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भारतीय नौसेना ने बुधवार को भारत में बनने वाली स्कॉर्पीन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी आईएनएस करंज को पानी में उतारा.

आईएनएस करंज स्टेल्थ और एयर इंडिपेंडेंट प्रॉपल्शन समेत कई तरह की तकनीकों से लैस है. इस पनडुब्बी को मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड ने फ्रांसीसी कंपनी मेसर्स नेवल ग्रुप (पहले डीसीएनएस) के साथ ट्रांसफर ऑफ़ टेक्नोलॉजी के क़रार के तहत बनाया है. इस डील के तहत कुल छह पनडुब्बियां बनाई जानी हैं. इस श्रेणी की पहली पनडुब्बी कलवरी की लंबाई 61.7 मीटर, चाल 20 नॉट और वजन 1565 टन था.
पनडुब्बीइमेज कॉपीरइटTWITTER/INDIANNAVY
नौसेना के एडमिरल सुनील लांबा ने कहा है, "आईएनएस करंज अब से लगभग एक साल तक बंदरगाह से लेकर खुले समुद्र में कई तरह के परीक्षणों से गुज़रेगी." कितनी ताक़तवर है ये पनडुब्बी? आईएनएस करंज में सतह और पानी के अंदर से टॉरपीडो और ट्यूब लॉन्च्ड एंटी-शिप मिसाइल दागने की क्षमता है. ऐसा दावा है कि आईएनएस करंज में सटीक निशाना लगाकर दुश्मन की हालत खराब करने की क्षमता है. इसके साथ ही इस पनडुब्बी में एंटी-सरफेस वॉरफेयर, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, खुफ़िया जानकारी जुटाने, माइन लेयिंग और एरिया सर्विलांस जैसे मिशनों को अंजाम देने की क्षमता है.
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दुश्मन की नज़रों से रहेगी ओझल? स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस करंज में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिससे दुश्मन देशों की नौसेनाओं के लिए इसकी टोह लेना मुश्किल होगा. इन तकनीकों में अत्याधुनिक अकुस्टिक साइलेंसिंग तकनीक, लो रेडिएटेड नॉइज़ लेवल, हाइड्रो डायनेमिकली ऑपटिमाइज़्ड शेप शामिल है. पनडुब्बी को बनाते हुए पनडुब्बियों का पता लगाने वाले कारणों को ध्यान में रखा गया है जिससे ये पनडुब्बी ज़्यादातर पनडुब्बियों की अपेक्षा सुरक्षित हो गई है. रक्षा मामलों के जानकार उदय भास्कर ने बीबीसी से बात करते हुए बताया, "पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए सोनार तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इस पनडुब्बी के लक्षण कुछ बेहतर हैं. मेटलर्जी से स्टेल्थ तकनीक के लक्षण बढ़ाए जा सकते हैं. सामान्य रूप से पनडुब्बी अपनी आवाज़ की वजह से पकड़ा जाता है, लेकिन इस पनडुब्बी में आवाज़ को काफ़ी कम किया गया है"
पनडुब्बीइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES
पनडुब्बी में ऑक्सीज़न बनाने की क्षमता ये एक ऐसी पनडुब्बी है जिसे लंबी दूरी वाले मिशन में ऑक्सीजन लेने के लिए सतह पर आने की ज़रूरत नहीं है. इस तकनीक को डीआरडीओ के नेवल मैटेरियल्स रिसर्च लैब ने विकसित किया है. उदय भास्कर बताते हैं, "इस सबमरीन में एयर इंडिपेंडेंट प्रॉपल्शन तकनीक है जिसकी मदद से सबमरीन के अंदर ही ऑक्सीज़न बनाई जा सकती है. ये हमारे डीआरडीओ ने विकसित की है. पुरानी पनडुब्बी करंज के मुकाबले नई करंज में एआईपी को शामिल किया गया है. दरअसल, जब हम पनडुब्बी को बैटरी से चलाते हैं तो बैटरी को रिचार्ज करने के लिए पनडुब्बी को सतह पर आना पड़ता है. क्योंकि डीज़ल इंजन से हम बैटरी को चार्ज करते हैं और डीज़ल इंजन चलाने के लिए आपको ऑक्सीज़न की जरूरत होती है. लेकिन एयर इंडिपेंडेंट प्रॉपल्शन एक ऐसी तकनीक है जिसकी मदद से पनडुब्बी को बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आने की ज़रूरत नहीं पड़ती है."

क्या दोहरे मोर्चे पर युद्ध में होगी मददगार?

उदय भास्कर बताते हैं, "ये अजीब बात की जा रही है कि इससे चीन और पाकिस्तान परेशान हो जाएंगे. भारत की पनडुब्बी शक्ति काफ़ी कम हो गई थी. पिछले साल दो एक्सीडेंट हो गए थे. 15 साल तक हमने नई पनडुब्बी शामिल नहीं की थी. ऐसे में हम इस समय बेहद नाज़ुक स्थिति में पहुंच गए थे. इसलिए पाकिस्तान और चीन इस पनडुब्बी से डरने वाले नहीं हैं. वे इसकी निगरानी ज़रूर रखेंगे."
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