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लाजवाब है ‘न्यूटन’ की कहानी, जा रही है ऑस्कर

फिल्म का नाम: न्यूटन

डायरेक्टर: अमित मसूरकर

स्टार कास्ट: राजकुमार राव, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, अंजलि पाटिल, रघुबीर यादव

अवधि: 1 घंटा 46 मिनट

सर्टिफिकेट: U/A

रेटिंग: 4 स्टार

डायरेक्टर अमित मसूरकर ने सुलेमानी कीड़ा नामक फिल्म बनायी थी जिसकी क्रिटिक ने काफी तारीफ की थी. उसके बाद अब एक बार फिर से अमित मसूरकर ने भारत के चुनाव सिस्टम पर आधारित विषय पर अपना पक्ष रखते हुए ‘न्यूटन’ फिल्म की है. फिल्म में मंझे हुए कलाकारों की कास्टिंग भी हुए है.

कहानी

यह कहानी नूतन कुमार (राजकुमार राव) की है जिसने अपने लड़कियों वाले नाम को दसवीं के बोर्ड में ‘न्यूटन’ लिख कर बदल लिया है. अब सभी लोग उसे न्यूटन के नाम से ही जानते हैं. न्यूटन ने फिजिक्स में एमएससी की पढ़ाई की है. आगामी इलेक्शन में ड्यूटी लगती है जिसके लिए उसे जंगल के नक्सल प्रभावित इलाके में जाकर वोटिंग करवानी पड़ती है. इलेक्शन की तैयारी के लिए न्यूटन की हेल्प संजय मिश्रा करते हैं उसके बाद एक टीम जिसमें लोकनाथ (रघुबीर यादव), मालको (अंजलि पाटिल), पुलिस अफसर आत्मा सिंह (पंकज त्रिपाठी) जंगली इलाके की तरफ बढ़ती है जहां जाने पर पता चलता है की कुल मिलाकर वहां के 76 वोटर्स की चर्चा है लेकिन वोट वाले दिन कोई नहीं आता. कुछ वक्त के बाद चीजें बदलती हैं और अंततः एक ख़ास तरह का रिजल्ट सामने आता है जिसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

क्यों देख सकते हैं फिल्म

– फिल्म का डायरेक्शन लोकेशन सिनेमेटोग्राफी बहुत बढ़िया है.

– फिल्म की कहानी और डायलॉग्स बहुत ही कमाल के हैं और गंभीर मुद्दे पर आधारित इस कहानी के संवाद के लिए मयंक तिवारी की जितनी भी तारीफ की जाए कम है. बहुत ही जबरदस्त तरीके से इलेक्शन वोटिंग जैसे गंभीर मुद्दे को मनोरंजन से भरपूर डायलॉग्स के साथ परोसा गया है.

– इलेक्शन के दौरान तरह-तरह के चुनाव चिन्हों के साथ ही उम्मीदवारों के बारे में भी अलग तरह से बताया किया गया है जिसे देखकर हंसी आती हैं.

– फिल्म में राजकुमार राव ने एक बार फिर से अपनी उम्दा एक्टिंग से बता दिया है कि वो एक बेहतरीन कलाकर हैं, वहीँ उनके अपोजिट अलग तरह के पुलिस अफसर के रोल में पंकज त्रिपाठी ने बेहतरीन एक्टिंग की है. राजकुमार राव के साथ उनकी कैमि‍स्ट्री बहुत उम्दा है. वहीँ रघुबीर यादव ने भी मनोरंजन में कोई कमी नहीं छोड़ी है. अभिनेत्री अंजलि पाटिल का काम भी काफी सहज है और संजय मिश्रा की मौजूदगी आपके चेहरे पर मुस्कान जरूर लाती है.

कमजोर कड़ियां

इक्का दुक्का बातों को छोड़ दें तो फिल्म में ऐसी कोई बात नहीं है जो इसे कमजोर बनाती हो, हां इसमें आपको आइटम नंबर जैसी बातें नहीं मिलेगी और एक अलग तरह का क्लाइमेक्स देखने को मिलता है.

बॉक्स ऑफिस

प्रोडक्शन कॉस्ट और प्रोमोशन को मिलकर फिल्म का बजट लगभग 8-10 करोड़ बताया जा रहा है और फिल्म के लिए वर्ड ऑफ माउथ बहुत ही अहम रोल प्ले करेगा. फिल्म को 350 से ज्यादा स्क्रीन्स में रिलीज किया जाने वाला है.

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