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सीरिया के अखाड़े में तुर्की बनाम अमरीका

मध्य पूर्व के पांच देशों के दौरे पर निकले अमरीकी रक्षा मंत्री रेक्स टिलरसन का पहला पड़ाव मिस्र है. इस दौरे में वे तुर्की भी जाने वाले हैं.

अमरीका-तुर्की संबंधों के लिहाज से टिलरसन की ये यात्रा अहम मानी जा रही है. राष्ट्रपति ओबामा के समय से ही दोनों देशों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखा गया है

लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन में अमरीका-तुर्की के रिश्ते ज़्यादा बिगड़े हैं.

ये आशंका जताई जा रही है कि सीरिया के मोर्चे पर नैटो के दोनों सहयोगी देशों के बीच भिड़ंत हो सकती है. टिलरसन की यात्रा का मक़सद इस तनाव को कम करना है.

दरअसल दोनों मुल्कों के बीच सीरिया के मनबिज में अमरीका की मौजूदगी को लेकर है जहां सात फरवरी को एक अमरीकी कमांडर के जाने के बाद संघर्ष तेज़ हो गया.

रेक्स टिलरसनइमेज कॉपीरइटALEX WONG/GETTY IMAGES
Image captionरेक्स टिलरसन मध्य पूर्व के पांच देशों के दौरे पर हैं

क्या हुआ था?

तुर्की ने अपनी उत्तरी सीमा के पास सीरिया के आफ़रीन इलाके से कुर्द लड़ाकों को खदेड़ना के लिए वहां 20 जनवरी को हवाई हमला किया था.

इससे मनबिज के अगला निशाना होने के संकेत मिले थे.

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तेयेप अर्दोआन ने 20 जनवरी को कहा था, “ऑपरेशन आफ़रीन जमीन पर उतर चुका है. इसके बाद मनजिब होगा.वह इस बात को अब तक कई बार दोहरा भी चुके हैं.”

आफ़रीन और म​नजिब पर कुर्दिश बलों का कब्ज़ा है जिसे तुर्की निर्वासित कुर्दिस्तान श्रमिक पार्टी (पीकेके) का विस्तार मानता है.

हालांकि, मनजिब में अमरीकी सैनिक कुर्द बलों के साथ मौजूद हैं और यहां तुर्की और अमरीका एक-दूसरे के सामने-सामने हैं.

तुर्की, अमरीका, कु्र्दइमेज कॉपीरइटAFP

मनजिब में अमरीकी कमांडर

अर्दोआन ने अमरीकी सेना को कई बार इस इलाके से जाने के लिए कहा है.

उन्होंने 6 फरवरी को टीवी पर दिए एक भाषण में अमरीका को लेकर कहा था, “उन्होंने कहा था… हम मनजिब से पीछे हट जाएंगे, हम वहां नहीं रहेंगे… तो फिर वो वहां क्यों रुके हैं? आपको चले जाना चाहिए.”

इसके तुरंत बाद सात फरवरी को अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के कमांडर लेफ्टिनेंट जेन पॉल फंक ने मेजर जनरल जेमी जर्राड के साथ मनबिज का दौरा किया.

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, “तुर्की के राष्ट्रपति के चेतावनी देने के बाद से यह किसी वरिष्ठ अमरीकी सैन्य अधिकारी का पहला दौरा था. राष्ट्रपति ने मनबिज को आतंकवादियों का गढ़ कहते हुए अमरीकी सेना के वहां से जाने की मांग की थी.”

अमरीकी सैन्य अधिकारी के दौरे की तस्वीरें तुर्की के अख़बारों के पहले पन्ने पर छपी थीं और उन्हें ‘अक्खड़’ कहा गया था.

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मनबिज क्यों महत्वपूण है?

मनबिज अरब विद्रोही समूहों और अलेप्पो प्रांत में कुर्द बलों के बीच संघर्ष की जगहों में से एक है.

इस क्षेत्र में साल 2011 में विरोध प्रदर्शन हुए और यह साल 2014 में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के कब्ज़े से पहले विपक्षी विद्रोही गुटों के नियंत्रण में था.

साल 2016 में अमरीका समर्थित कुर्दों के नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) ने मनबिज मिलिट्री काउंसिल बनाई.

एसडीएफ एक बहु-जातीय गठबंधन है जिसमें सीरिया से सक्रिया कुर्द नेतृत्व वाली पीपल्स प्रोटेक्शन यूनिट (वाईपीजी) प्रमुख दल है.

लेकिन तब से एसडीएफ और अरब जनजाति के बीच कई मसलों पर तनाव बढ़ गया है.

तुर्की के कुर्द लड़ाकों के ख़िलाफ़ साल 2017 के मध्य तक ऑपरेशन चलाने की धमकी देने के बाद अमरीका ने भी इस क्षेत्र में अपनी सेना भेज दी थी.

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तुर्की क्या चाहता है?

तुर्की लंबे समय से कुर्द बलों से फ़रात नदी के पश्चिमी क्षेत्रों से पीछे हटने की मांग कर रहा है.

तुर्की की फौज और तुर्की समर्थित विद्रोही गुट नदी के पश्चिम में तुर्की की सीमा पर एक ऐसे क्षेत्र में है जो तीन तरफ से सीरियाई शहरों से घिरा हुआ है.

यह क्षेत्र फ़रात नदी के पश्चिम में कुर्द बलों की मौजूदगी वाले सिर्फ दो क्षेत्रों आफरीन और मनबिज को अलग करता है.

तुर्की अपने यहां मौजूद कुर्दों के विद्रोह के डर से अपनी सीमा के दूसरी तरफ एक स्वतंत्र राज्य का विरोध करता है.

अर्दोआन ने अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और वर्तमान राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर मनबिज के बारे में सच न कहने का आरोप लगाया था.

उन्होंने कहा था कि तुर्की मनबिज को निशाना बनाएगा और उसे उसके असल मालिकों अरबों को वापस देगा.

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अमरीका का क्या कहना है?

अमरीका ने इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ कुर्दिश पीपल्स प्रॉटेक्शन यूनिट (वाईपीजी) और एसडीएफ को सैन्य सहायता दी है जो तुर्की के लिए चिंता का विषय है.

दोनों देशों के बीच बढ़ रहे तनाव के बीच अमरीका के जनरल ने सीरियाई कुर्दों का सहयोग करने को सही ठहराया है.

यूएस सेंट्रल कमांड जनरल जोसफ़ वोटेल ने 28 जनवरी को सीएनएन से कहा था कि अमरीका मनबिज से सेना हटाने के बारे में नहीं सोच रहा है.

अमरीकी रक्षा सचिव जिम मेटिस ने आठ फरवरी को कहा था कि तुर्की की चिंताएं वाजिब हैं लेकिन मनबिज के आसपास स्थिति नहीं बदली है. अभी हमारा लक्ष्य इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ अभियान पर ज़ोर देना है.

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सीरियाई कुर्दिश बल

लेफ्टिनेंट जनरल पॉल फंक और मेजर जनरल जैमी जर्राड के मनबिज में हाल के दौरे में दिये गए बयान पहले के मुकाबले ज्यादा सख़्त थे.

जर्राड ने न्यूयॉक टाइम्स ने कहा था, “हम यहां अपनी स्थिति को लेकर गर्व महसूस कर रहे हैं और हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हर कोई यह जानता हो.”

तुर्की के मनबिज को निशाना बनाने वाले बयान पर फंक ने अख़बार से कहा था, “तुम हम पर हमला करोगे तो हम अक्रामकता से जवाब देंगे. हम खुद को बचाएंगे.”

जनरल फंक ने सीरियाई कुर्दिश बलों को आतंकी मानने से भी इनकार कर दिया था.

उन्होंने कहा, “मैं कहूंगा कि जिन लोगों ने आईएस से रक़्क़ा को वापस पाने में मदद की है वो हीरो हैं, उनकी राष्ट्रीयता क्या है, उनकी मान्यताएं क्या हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.”

फंक ने आगे कहा था कि जिस सीमा का वो दौरा कर रहे थे वहां उनकी सबसे बड़ी चिंता ‘गलत अनुमान’ है.

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कुर्दों का क्या?

वाईपीजी ने आफ़रीन से सेना हटाने और तुर्की को ऑपरेशन ओलिव ब्रांच में क्षेत्र के ऊपर सीरियाई हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की इजाजत देने की आलोचना की थी.

कुर्द बल इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अमरीका मनबिज में ऐसी स्थिति न होने दे.

कुर्दों के नेतृत्व वाली वाईपीजी के कमांडर-इन-चीफ सिपान हामो ने 6 फरवरी को सऊदी अख़बार अल-शार्क अल-अवस्त में कहा था कि उन्हें आश्वासन मिला है कि अमरीका मनबिज से सेना नहीं हाटएगा.

हामो ने कहा, “तुर्की बहुत कुछ कहता है और उसके कई लक्ष्य हैं. बिना अंतरराष्ट्रीय मंत्रणा या समझौते के तुर्की की सेना मनबिज तक नहीं पहुंच सकती.”

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क्या थी मीडिया की प्रतिक्रिया?

तुर्की के मीडिया ने अमरीकी जनरल के मनबिज दौरे को विस्तार से कवरेज दी थी.

ये ख़बर अच्छी सर्कुलेशन रखने वाले हुर्रियत डेली और अन्य अख़बारों के पहले पन्ने पर थी.

यह सरकार समर्थित वेटान की मुख्य ख़बर थी जिसका शीर्षक था, “क्या आप अंधे हैं जनरल?”

इस बीच हुर्रियत के स्तंभकार सेदत अर्गिन ने 9 फरवरी को लिखा था कि तुर्की और अमरीका के बीच मनबिज को लेकर हुए हालिया टकराव को अगर कम नहीं किया गया तो उसके गंभीर ख़तरे हैं.

उन्होंने लिखा, “हमें तुर्की और अमरीका को संघर्ष की स्थिति में दो सहयोगियों के बजाये दो दुश्मनों के तौर पर स्वीकार करने की जरूरत है.”

हुर्रियत में एक और स्तंभकार ने लिखा था कि फंक का संदेश साफ है, “तुम्हें मनबिज में हमारा सामना करना होगा. गलत अनुमान न लगाएं.”

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आगे क्या?

शीर्ष अमरीकी सैन्य अधिकारियों के मनबिज को लेकर सख़्त बयान देने के बावजूद तुर्की और अमरीका के बीच उच्च स्तर पर कूटनीतिक बातचीत जारी है.

अमरीकी सुरक्षा सलाहकार ने इस हफ़्ते तुर्की में इस्तांबुल का दौरा किया था जबकि अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन इस हफ्ते तुर्की की राजधानी अंकारा का दौरे पर हैं.

तुर्की के राष्ट्रपति के प्रवक्ता इब्राहिम कलि ने 7 फरवरी को कहा था कि टिलरसन का दौरा उनके ही अनुरोध पर अयोजित हुआ है.

इसके अलावा तुर्की के रक्षा मंत्री अलगे हफ़्ते ब्रुसेल्स में होने वाली बैठक में अपने अमरीकी समकक्ष से मिलेंगे.

तुर्की में सत्ताधारी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी के प्रवक्ता माहिर उनल ने 9 फरवरी को अमरीकी जनरल के मनबिज दौरे पर मीडिया से कहा था कि तुर्की जहां कहीं भी हो आतंक के स्रोत को ख़त्म करना चाहता है.

उनल ने कहा, “हमारा संदेश अमरीकी जनरल के लिए नहीं बल्कि राजनीति के लिए हैं. अगले हफ़्ते अमरीकी विदेश और रक्षा मंत्री आने वाले हैं(तुर्की में). हमें किस पर विचार करना चाहिए यह उन बैठकों का परिणाम है.”

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