Posted on

हिजबुल के सरगना सैयद सलाहुद्दीन के बेटे को NIA ने टेरर फंडिंग केस में अरेस्ट किया

कश्मीर में कई आतंकी घटनाओं के लिए जिम्मेदार हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ सैयद सलाहुद्दीन के बेटे सैयद शाहिद यूसुफ को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने मंगलवार को अरेस्ट कर लिया। यूसुफ की गिरफ्तारी 2011 के टेरर फंडिंग केस में हुई है। यूसुफ जम्मू-कश्मीर सरकार के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में काम करता है। उसे पहले हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा, NIA आतंकी गतिविधियों के लिए हवाला चैनल के जरिए टेरर फंडिंग से जुड़े दूसरे कई मामलों की जांच कर रही है। जांच एजेंसी ने अब तक इन केस में करीब 7 से ज्यादा अलगाववादी नेताओं को अरेस्ट किया है।
क्या आरोप हैं सैयद शाहिद यूसुफ पर…
– सलाहुद्दीन के आदेश पर सीरिया में मौजूद गुलाम मोहम्मद बट नाम के संदिग्ध ने यूसुफ को कुछ पैसे भेजे थे। यह पैसा 2011 से 2014 के बीच भेजा गया। यह पैसा कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ था।
– एनआईए के एक अफसर ने न्यूज एजेंसी को बताया- “इस बात के भी सबूत हैं कि सऊदी अरब से भी पैसे भेजे गए। हमारे पास पैसा ट्रांसफर किए जाने के डॉक्यूमेंट्स और कॉल रिकॉर्ड भी हैं। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर ही हमने युसूफ को अरेस्ट करने का फैसला लिया।”

कौन-कौन है सलाहुद्दीन के परिवार में ?

– सैयद सलाहुद्दीन के 4 बेटे और 2 बेटियां हैं। 4 बेटे और एक बेटी सरकारी नौकरी में हैं। फरवरी में पम्पोर में हुए लश्कर के एक आतंकी हमले में सेना ने सलाउद्दीन के 31 साल के बेटे सैयद मुईद को भी बचाया था।
– सलाहुद्दीन का बेटा वाहिद यूसुफ शेर-ए-कश्मीर हॉस्पिटल में डॉक्टर है। दूसरा भाई शकील अहमद मेडिकल असिस्टेंट है। जावेद यूसुफ एजुकेशन ऑफिस में कम्प्यूटर ऑपरेटर है। शाहिद यूसुफ एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में है।
– आतंकी सरगना की एक बेटी सरकारी टीचर है। दूसरी बेटी आर्ट की टीचर है। 71 साल का सलाउद्दीन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में रहता है। हिजबुल के अलावा वह यूनाइटेड जिहाद काउंसिल भी चलाता है। पठानकोट एयरबेस स्टेशन पर हमले की जिम्मेदारी यूनाइडेट जिहाद काउंसिल ने ली थी।

कश्मीर में इलेक्शन लड़ चुका है सैयद सलाहुद्दीन

– सलाहुद्दीन ने यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर से पॉलिटकल साइंस की पढ़ाई की और इसी दौरान वो जमीयत-ए-इस्लामी के संपर्क में आया। यूनिवर्सिटी में रहने के दौरान ही सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान के सपोर्ट की बात शुरू कर दी। पढ़ाई पूरी करने के बाद वो मदरसे में टीचर बन गया। सलाहुद्दीन ने 1987 में श्रीनगर की अमीराकदाल विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा, लेकिन हार गया। 1989 में अपनी गिरफ्तारी और रिहाई के दौरान हुई हिंसा और प्रदर्शनों के बाद उसने हिजबुल मुजाहिद्दीन ज्वाइन किया।

टेरर फंडिंग में एनआईए ने कार्रवाई कब से शुरू की?

– एक न्यूज चैनल ने 16 मई को एक स्टिंग ऑपरेशन ब्रॉडकास्ट किया था। जिसमें कश्मीर के अलगाववादियों को पाकिस्तान के आतंकी गुटों से पैसे मिलने की बात का खुलासा हुआ था। इसके बाद 19 मई को एनआईए ने इन अलगाववादी नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया था और प्रिलिमिनरी इन्क्वायरी शुरू की थी। हुर्रियत नेता नईम खान को स्टिंग ऑपरेशन में लश्कर से पैसे लेने की बात कबूल करते दिखाया गया था। खान रिपोर्टर से यह कहते नजर आए थे कि पाकिस्तान से आने वाला पैसा सैकड़ों करोड़ से ज्यादा है, लेकिन हम और ज्यादा की उम्मीद करते हैं। हालांकि बाद में खान ने स्टिंग को फर्जी करार दिया था।
– एनआईए की तरफ से कार्रवाई शुरू होने के बाद हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने नईम खान को सस्पेंड कर दिया था।

क्या हैं आरोप?

– अलगाववादी नेताओं पर आरोप है कि इन्हें कश्मीर में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, स्कूलों और अन्य सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाने के लिए लश्कर चीफ हाफिज सईद से पैसा मिलता है। घाटी में सिक्युरिटी फोर्सेस पर पत्थर बरसाने के लिए हुर्रियत नेताओं को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों और पाक खुफिया एजेंसी ISI दोनों से फंडिंग होती है।

एनआईए ने कब-कब छापे डाले

– एनआईए ने इस मामले में सबसे पहले 3 जून को देश में 24 जगहों पर छापे मारे थे। कश्मीर में 14, दिल्ली में 8 और हरियाणा के सोनीपत में 2 जगहों पर छापे मारे गए थे। इस दौरान अलगाववादी नेताओं के घरों, ऑफिस और उनके कमर्शियल ठिकानों पर कार्रवाई की गई। दिल्ली में 8 हवाला डीलर्स और ट्रेडर्स के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी।
– इसके बाद सितंबर में कश्मीर और दिल्ली में 16 ठिकानों पर NIA ने छापे मारे।

कश्मीर में अब तक कितने लोग अरेस्ट

– बिट्टा कराटे, नईम खान, अल्ताफ अहमद शाह (अल्ताफ फंटूश), अयाज अकबर, टी. सैफुल्लाह, मेराज कलवल और शहीद-उल-इस्लाम शामिल हैं। अल्ताफ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी का दामाद है।
– अब सैयद शाहिद यूसुफ को अरेस्ट किया गया है।

Leave a Reply