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यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहने के दौरान पी. चिदंबरम सोने के आयात पर नियंत्रण के लिए 80:20 स्कीम लाए थे. आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने इस स्कीम का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि यह स्कीम सोने के आयात पर नियंत्रण लगाने के लिए लाई गई थी. उन्होंने कहा कि आरोप लगाने से पहले हमें यह देखना होगा कि असल में हुआ क्या था.

मोदी सरकार के सत्ता में आने से कुछ दिन पहले से ही 80:20 स्कीम के तहत कुछ कारोबारियों को सहयोग देने को लेकर भाजपा लगातार पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को घेर रही है. अब इसमें आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का नाम भी घसीटा जा रहा है. सीएनबीसी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में रघुराम राजन ने इस मामले को लेकर अपना पक्ष रखा.

रघुराम ने कहा कि हमें यह देखने की जरूरत है कि पंजाब नेशनल बैंक घोटाला कैसे हुआ और इसमें कहां खामियां रह गईं. उन्होंने गोल्ड स्कीम 80:20 को लेकर कहा कि हमें यह देखना होगा कि हमने इस स्कीम को किस समय पर लाया. 2013 के दौरान जब इस स्कीम को लाया गया, तब देश में फॉरेन एक्सचेंज क्राइस‍िस की स्थ‍िति थी. इसकी वजह से सबने यह आशंका जताई थी कि चालू खाता घाटा नियंत्रण से बाहर हो सकता है.उन्होंने कहा कि यह स्कीम ज्वैलरी सेक्टर में रोजगार पैदा करने की जरूरत को ध्यान में रखकर भी लाई गई थी.

चालू खाते के घाटे में एक सबसे बड़ी हिस्सेदारी सोने की बड़ी खरीदारी थी. ऐसे में जब जनता बड़े स्तर पर सोना खरीद रही थी, तो सरकार ने इस पर थोड़ा नियंत्रण पाने के लिए कदम उठाने की सोची. इस समय यह सोचा गया कि एक अस्थाई समाधान सोने के आयात पर लगाम लगेगी.

उन्होंने बताया कि इस स्कीम के तहत हर 100 ग्राम के आयात में से 20 ग्राम सोने का निर्यात करना जरूरी था. इसी वजह से सोने के आयात पर लगाम लगाई जा सकी.

भाजपा का ये है आरोप

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया है कि 2014 में जिस दिन लोकसभा चुनाव के रिजल्ट आए, उस दिन तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 7 निजी कंपनियों को 80:20 गोल्ड स्कीम के तहत सहयोग दिया. प्रसाद का आरोप है कि इसमें मेहुल चौकसी की कंपनी गीतांजलि भी शामिल थी.

क्या है 80:20 गोल्ड स्कीम?

यूपीए सरकार के राज में इस स्कीम की शुरुआत अगस्त, 2013 में की गई थी. ज्वैलर्स के लगातार दबाव के बाद यूपीए सरकार ने सोने के आयात-निर्यात में कुछ राहत दी थी. इस स्कीम के तहत निजी कंपनियों को भी आयात करने की सुविधा दी गई. इस स्कीम में यह शर्त रखी गई थी कि कारोबारियों ने जो भी सोना आयात किया है. इसमें से वह सिर्फ 20 फीसदी निर्यात कर सकते हैं और 80 फीसदी उन्हें घरेलू इस्तेमाल के लिए रखना होगा.

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