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ऑस्ट्रिया में मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हो चुका है. इसमें दक्षिणपंथी नेता 31 साल के सेबस्टियन कुर्ज  की जीत की संभावना प्रबल मानी जा रही है. यूरोपीय संघ के करीब 87.50 लाख की आबादी वाले इस सदस्य देश के दक्षिणपंथ की ओर झुकाव से ब्रसेल्स के लिए नई मुसीबतें खड़ी हो जाएंगी. वह ब्रिटेन के संघ छोड़ने और जर्मनी, हंगरी, पोलैंड और अन्य सदस्य देशों में राष्ट्रवादियों के उदय को लेकर पहले से संघर्ष कर रहा है. हालांकि सभी संकेत इस ओर इशारा कर रहे हैं कि ऑस्ट्रिया के लोग शरण की मांग करने वाले लोगों की संख्या में रिकार्ड वृद्धि से तंग आ चुके हैं और मध्यमार्गी सरकार की बजाय अधिक सख्त सरकार के पक्ष में मतदान का मन बना चुके हैं. द पीपुल्स पार्टी ने करीब 30 प्रतिशत मतदाताओं को लुभाने के लिए अप्रवासियों पर सख्ती दिखाने और कर में ढील देने की घोषणा की है. कुर्ज ने इसे ‘निजी अभियान’ के तौर पर पेश किया. कुर्ज 27 साल में ही बन गए विदेश मंत्री   दरअसल, कुर्ज 2013 में उस समय चर्चा में आए जब वह मात्र 27 साल के थे और दुनिया के सबसे युवा विदेश मंत्री बने.  अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी और इरान के जावद जरीफ के साथ उनकी तस्वीरों ने खूब सुर्खियां बटोरीं. उनका राजनीतिक सफर स्कूल में ही शुरू हो गया था जब वह ए लेवल की पढ़ाई कर रहे थे. उन्होंने कंजरवेटिव ऑस्ट्रियन पीपल्स पार्टी के यूथ विंग की सदस्यता ली. विएना में विवादास्पद और ध्रुवीकरण वाले स्थानीय चुनाव के दौरान कुर्ज ने पार्टी को एक तबके में बेहद मजबूत बनाया. उनके इस योगदान को देखते हुए पार्टी ने उन्हें 2011 में स्टेट सेक्रेटरी बनाया. चार साल पहले सोशल डेमोक्रेटिक-पीपल्स पार्टी की गठबंधन सरकार बनने पर कुर्ज को विदेश मंत्री बनाया गया. इस तरह वह यूरोप के सबसे युवा कूटनीतिज्ञ बने.
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