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अब बिना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के भी पा सकते हैं अपना आधार। UIDAI ने की नई शुरुआत!

अभी तक यदि आपका आधार कार्ड गुम हो जाए तथा आपके आधार में आपका रजिस्टर्ड नंबर अपडेट न हो, तो आधार को डाउनलोड कर पाना संभव नहीं था। इसके लिए पहले आपको आधार केंद्र पर जाकर अपना मोबाइल नंबर अपडेट करवाना पड़ता था जिसके अपडेशन के बाद आधार का प्रिंट निकाल पाना संभव हो पाता है।

UIDAI ने इस समस्या का निदान करते हुए एक आधार रीप्रिंट सर्विस शुरू की है जिसके माध्यम से कुछ शुल्क का भुगतान कर आप आधार के रीप्रिंट को अपने घर पर डाक के द्वारा मंगवा सकते हैं। इसके लिए UIDAI ने 5 दिन की समयसीमा रखी है।

उपरोक्त अनुसार आधार की वेबसाइट पर ऑर्डर आधार रीप्रिंट विकल्प को चुनकर विकल्प में अपना 12 अंकों का आधार या वर्चुअल आई डी को लिखकर आप सिक्योरिटी कोड को यथानुसार अंकित करते हैं और “If you do not have registered mobile number” चेकबॉक्स पर क्लिक करते हैं। यहां से आगे आप ओटीपी की जगह शुल्क का भुगतान कर आधार को अपने घर के पते पर मंगवा सकते हैं।

आशा करते हैं आपको यह जानकारी पसंद आएगी और इससे आप यथासंभव लाभ उठा पाएंगे।

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दास्ताँ फर्श से अर्श तक: सुंदर पिचाई की गूगल का सीईओ बनने तक के संघर्ष की प्रेरणादायक जीवनी

सुंदर पिचाई को आज हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या गूगल क्रोम के आने से पहले कभी आपने इनका नाम सुना था।

हम आज आपको बता रहे हैं कैसे तमिलनाडु के छोटे से गांव का लड़का दुनिया की सबसे बड़ी वेब बेस्ड कंपनी और नंबर 1 वेबसाइट गूगल का सीईओ बन जाता है। मिलिए सुंदर जी से जो मेहनत और लगन की जीती जागती मिसाल हैं!

आरंभिक जीवन

सुंदर पिचाई का जन्म 12 जनवरी 1972 को मदुरै, तमिलनाडु के निम्न मध्यम वर्ग परिवार में हुआ। पिचाई सुंदरराजन अर्थात सुंदर पिचाई के पिता चेन्नई के अशोक नगर में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे जिनसे बचपन से प्रभावित होने के कारण इनका लगाव टेक्नोलॉजी से जुड़ गया। पिचाई की माँ स्टेनोग्राफर थी और इनके छोटे भाई के जन्म के बाद इन्होंने यह काम छोड़ दिया।

12 साल की उम्र में पिचाई के घर फोन आने के बाद इनकी विलक्षण प्रतिभा का पता इनके घरवालों को चला। यह फोन नंबर को एक बार में याद कर लेते थे और फिर भूलते नहीं थे।

शिक्षण

सुंदर पिचाई ने 10वीं तक की पढ़ाई चेन्नई के अशोक नगर के जवाहर विद्यालय से पूरी की और 12वीं कक्षा चेन्नई के वाना वाणी स्कूल से करी। इन्होंने आई आई टी खड़गपुर से मैटलर्जिकल इंजीनियरिंग की।

इसके बाद पिचाई ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से भौतिकी में मास्टर इन साइन्स किया और एम बी ए व्हार्टन स्कूल, यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेंसिल्वेनिया से किया।

इन्होंने अपनी पहली जॉब संचालन परामर्श के रूप में मैकिंसे एंड कम्पनी में करी और अपनी बेहतरीन प्रतिभा का नमूना पेश किया।

सुंदर पिचाई और गूगल

2004 में गूगल से जुड़ने के बाद इन्होने एक छोटी सी टीम के साथ गूगल सर्च टूलबार पर कार्य किया जिससे आज हम इंटरनेट एक्सप्लोरर और मोज़िला फायरफॉक्स जैसे ब्रॉउज़र्स में भी सीधे गूगल सर्च का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इन्होंने गूगल के अन्य उत्पाद जैसे Google Gear तथा Google Pack पर भी कार्य किया। सुंदर पिचाई ने एक इंटरनेट ब्रॉउज़र्स बनाने की पेशकश Google के समक्ष की लेकिन तत्कालीन Google CEO Eric Schmidt ने इसको एक बहुत महंगा प्रोजेक्ट करार देकर मना कर दिया। लेकिन पिचाई ने हार नही मानी और Google Cofounders Larry Page और Sergey Brin को इस प्रोजेक्ट के लिए मना लिया। 2008 में गूगल ने अपना इंटरनेट ब्रोउज़र लॉन्च किया जिसका नाम Chrome रखा गया और यह आज भी दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला इंटरनेट ब्रॉउज़र है। गूगल क्रोम की सफलता ने पिचाई को गूगल का वाइस प्रेसिडेंट ऑफ़ प्रोडक्ट डेवलेपमेंट बना दिया।

अच्छे कार्य और लगन से प्रभावित होकर गूगल ने इन्हें 2012 में Chrome and Apps का सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बना दिया। इसके बाद 2013 में एंड्रॉइड निर्माता एंडी रुबिन के किसी अन्य प्रोजेक्ट के कारण एंड्रॉइड को छोड़ दिया, जिससे पिचाई को उनकी कार्यकुशलता देखते हुए एंड्रॉइड का प्रोडक्ट इनचार्ज और 2014 में प्रोडक्ट चीफ बना दिया गया।

Google के CEO बनने का सुनहरा अवसर पिचाई को 10 अगस्त 2015 को मिला तथा अगले ही साल Google की संस्थापक कंपनी Alphabet Inc. ने इनको अपने 273,328 शेयर देकर सम्मानित किया गया।

सुंदर पिचाई का व्यक्तित्व बहुत ही साधारण है और पिचाई आज भी समय समय पर आई आई टी खड़गपुर के छात्रों से Skype के जरीर बातचीत करते हैं।

निजी जीवन

सुंदर पिचाई ने अपनी आई आई टी खड़गपुर की सहपाठी और गर्लफ्रेंड अंजलि से शादी करी और आज इनके दो सुंदर बच्चे एक लड़का और एक लड़की हैं। इन्होंने Brooklyn, New York में 6.8 मिलियन डॉलर का एक आशियाना ख़रीदा और आज भी उसी लगन और मेहनत से इंटरनेट युग को और प्रगति प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं।

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अब हिंदी दिलाएगी आपको रोजगार, घर बैठे सिखाकर कमा सकते हैं अच्छी रकम

कई लोग जिन्हें अच्छी इंग्लिश नहीं आती है वो अपने आप को कमजोर और पिछड़ा हुआ महसूस करते हैं।

लेकिन अब आपको अपनी कमजोर इंग्लिश के लिए शरमाने और अफसोस करने की जरुरत नहीं है। अगर आपकी हिंदी मजबूत है तो आप हर घंटो 2000 रुपये तक कमा सकते हैं। जी हां, आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे आप ऑन लाइन हिंदी की ट्यूटोरियल क्लासेज देकर हर घंटे 2000 रुपये तक कमा सकते हैं।

Italki

दुनिया की दूसरी भाषाओं को सीखने के लिए यह वेबसाइट एक अच्छा प्लेटफॉर्म है। इस पर आप अपनी पसंद की भाषा को चुन सकते हैं। इसके बाद आपको उस भाषा से जुड़े टीचर्स की प्रोफाइल लिस्ट दिखेगी। आपको इन टीचर्स के लिए शुल्क देना होगा। ये शुल्क आपको घंटे के हिसाब से देना होगा। अगर आप ट्रायल क्लास करना चाहते हैं तो आपको 30 मिनट के हिसाब से भुगतान करना होगा। ऐसे में इस वेबसाइट पर आप पैसे भी कमा सकते हैं। यहां आपको वेबसाइट पर खुद को रजिस्टर करना होगा। इसके अलावा आपको बताना होगा कि आप हर घंटे की क्लास के लिए कितनी फीस लेंगे। इसके लिए आपको अपनी क्वालिफिकेशन बतानी होगा और डेमो देना होगा।

Verbalplanet

आप इस वेबसाइट पर जाकर दुनिया की किसी भी भाषा को सीख सकते हैं। वेबसाइट आपको Skype क्लासेज की सुविधा देता है। आपको हर क्लास के लिए शुल्क देना होता है। यहां भी आपको टीचर्स की प्रोफाइल लिस्ट दिखाई देती है, जिसे आप अपनी पसंद के हिसाब से चुन सकते हैं। हालांकि यहां आपको फ्री ट्रायल क्लासेज मिलती है। ऐसे में किसी भी भाषा को सीखने के बजाए आप यहां पैसे भी कमा सकते हैं। इस वेबसाइट पर आप अपनी प्रोफाइल बनाकर पैसे कमा सकते हैं। वेबसाइट पर पढ़ाने के लिए आपको एप्लीकेशन देना होता जिसके आधार पर वेबसाइट आपके क्लास की क्वालिटी तय करती है। ध्यान रहे, जितनी अच्छी क्वालिटी होगी उतनी ही स्टूडेंट्स आएंगे और आप उतना ही पैसा कमा सकते हैं।

Verbling

ऊपर दिए वेबसाइट्स की तरह आप यहां भी अपनी पसंद की भाषा को वीडियो क्लास के जरिए सीख सकते हैं। इसके अलावा आप इन पर प्रोफाइल बना कर पैसे कमा सकते हैं। इसके लिए आपको खुद को रजिस्टर करना होगा। इस वेबसाइट पर आप 500 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक हर घंटे कमा सकते हैं।

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दुनिया की इन 10 जगहों पर किसी को भी जाने की नहीं है इजाजत

आज इंसान अंतरिक्ष में रहने की तैयारियां कर रहा है। मगर इतनी तरक्की करने के बाद भी दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं, जहां इंसान नहीं पहुंच सकते हैं। इंसानों पर ये पाबंदी वहां की सरकारों ने लगाई है। ऐसे ही कुछ इलाकों की सैर इन तस्वीरों के जरिए करिए।

ग्लोबल सीड वॉल्ट, नॉर्वे- ये एक अंडरग्राउंड बीज भंडारण केंद्र है। जिसे नार्वे के एक आइलैंड पर पहाड़ के अंदर बनाया गया है। यहां दुनिया की 4 हजार प्रजातियों के लगभग 8,40,000 बीज संरक्षित किए गए हैं। यहां पर सिर्फ उन्हीं लोगों को आने की इज़ाजत है, जो इसके सदस्य हैं और अपने बीज सुरक्षित रखना चाहते हैं।

स्नैक आयलैंड, ब्राजील- ब्राजील के साओ पाउलो से कुछ 100 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद Ilha da Queimada Granda नाम के आईलैंड पर 5-10 सांप हर 10 वर्ग फ़ीट पर मौजूद हैं। ये सांप बहुत ही ज़हरीले हैं, इसलिए यहां लोगों का जाना मना है।

द क्वींस बेडरूम, यूनाइडेट किंगडम- ब्रिटेन की महारानी Buckingham Palace में रहती हैं और ये 1837 से राजघराने का शाही महल रहा है। इस महल के एक भाग को छोड़ कर बाकी सभी को टूरिस्टों के लिए खोला गया है। जो हिस्सा बचा के रखा गया है, वो है महारानी का बेडरूम। जहां किसी को भी जाने की मंजूरी नहीं है।

नॉर्थ सेंटिनेल आयलैंड, भारत- भारत के अंडमान में मौजूद इस आइलैंड पर कोई भी व्यक्ति नहीं जा सकता, अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करता है, तो यहां मौजूद कुछ आदिवासी उसे जान से मारने पर उतारू हो जाते हैं। उनकी मानना है कि ये बहुत ही पवित्र क्षेत्र है, जहां इंसानों को नहीं जाना चाहिए।

एरिया 51, यूएसए- अमेरिका के नेवादा में मौजूद इस इलाके में भी घूमने-फिरना मना है। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो इसे अमेरिकी सेना ने एलियन टेस्टिंग के लिए बनाया है। हालांकि ये बात सही है या नहीं, ये आज तक नहीं पता चल पाया है। लेकिन यहां जाना जान जोखिम में डालने जैसा है, क्योंकि अमेरिकी सेना ने यहां लैंड माइंस बिछा रखी हैं।

निहाऊ, अमेरिका- इसे The Forbidden Island भी कहा जाता है,क्योंकि इसकी झलक आप दिन ढ़लने के बाद ही पा सकते हैं, इसका स्वामित्व 150 सालों से एक ही परिवार के हाथ में है।

पोवेगलिया, इटली- इटली के वीनस शहर के पास ये एक छोटा सा आइलैंड है। यहां 14वीं शताब्दी में प्लेग फैलने के कारण सैंकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। ऐसी भी कहानी है कि, 19वीं सदी में यहां एक पागल खाना बना था। इस पागल खाने में बहुत से मरीज़ों पर जानलेवा प्रयोग किए जाते थे। फिलहाल इस डरावनी जगह पर सैलानियों के जाने पर पूरी तरह से पाबंदी है।

किन शी हुआंग मकबरा, चीन- चीन के पहले सम्राट के पास टेराकोटा वारियर्स नाम की एक सेना थी। ये सैनिक अपने राजा की रक्षा के लिए तैनात थे। जब उनकी मौत हुई, तब क्रब में टेराकोटा वॉरियर्स की हजारों मूर्तियां दफन की गई थी। यहां जाना बैन है, क्योंकि इस मकबरे में मौजूद पारे के कारण लोगों की जान जाने का खतरा है।

कोका-कोला रेसिपी वॉल्ट, अमेरिका- सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी कोका कोला को बनाने वाली रेसिपी को एक 6.6 फ़ीट की तिज़ोरी में अटलांटा में सुरक्षित रखा गया है। इसकी सुरक्षा में हर दम हथियारबंद गार्ड तैनात रहते हैं। जिमी होफा ने इसकी खोज की थी, जिनकी बाद में हत्या कर दी गई थी। इस तक कोई भी नहीं पहुंच सकता है।

बोहेमियन ग्रोव, अमेरिका- कैलिफोर्निया के मोंटे रियो में ये जगह एक खेल मैदान की तरह है, मगर इस मैदान पर चुनिंदा शख्सियतों को ही जाने की इजाजत है। जिनमें कुछ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति, संगीतकार और बड़े सरकारी अफसर शामिल हैं। इसकी सदस्यता हासिल करना भी बड़ी टेढ़ी खीर साबित होता है। सदस्यतों की मंजूरी के बाद ही यहां कोई आ सकता है।

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जानिए भारत में कैसे बढ़ती-घटती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमत

आइये जानते हैं वे कौन से फैक्टर हैं जो पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर प्रभाव डालते हैं।

कैसे तय होते हैं दाम

सबसे पहले खाड़ी या दूसरे देशों से तेल खरीदते हैं, फिर उसमें ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़ते हैं। क्रूड आयल यानी कच्चे तेल को रिफाइन करने का व्यय भी जोड़ते हैं। केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और डीलर का कमीशन जुड़ता है। राज्य वैट लगाते हैं और इस तरह आम ग्राहक के लिए कीमत तय होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में बदलाव घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमत को सीधे प्रभावित करता है। भारतीय घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार यह सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से है। अंतरराष्ट्रीय मांग में वृद्धि, कम उत्पादन दर और कच्चे तेल के उत्पादक देशों में किसी तरह की राजनीतिक हलचल पेट्रोल की कीमत को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

बढ़ती मांग

भारत और अन्य विकासशील देशों में आर्थिक विकास ने भी पेट्रोल और अन्य आवश्यक ईंधन की मांग में वृद्धि की है। हाल ही में निजी वाहनों के मालिकों की संख्या बढ़ी है, जिससे भारत में पेट्रोल की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

आपूर्ति और मांग में असंतुलन
कच्चे तेल के इनपुट मूल्य की उच्च लागत के कारण भारत में तेल रिफाइनरी कंपनियों को बाजार की मांगों को पूरा करने में समस्या का सामना करना पड़ता है। जिससे देश में पेट्रोल की कम आपूर्ति और अधिक मांग होती है।

टैक्स रेट
पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स पर भी काफी हद तक निर्भर करती हैं। सरकार की ओर से टैक्स दरें बढ़ाने की स्थिति में कंपनियां अक्सर उसका बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि होती है।

चार साल में 12 बार बढ़ीं कीमतें
बीते चार साल में सरकार ने कम से कम एक दर्जन बार ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क में इजाफा किया है। नतीजतन मौजूदा सरकार को पेट्रोल पर मनमोहन सिंह की सरकार के कार्यकाल में 2014 में मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी के मुकाबले 10 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मुनाफा होने लगा। इसी तरह डीजल में सरकार को पिछली सरकार के मुकाबले 11 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मिल रहे हैं।

पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 105. 49 फीसदी और डीजल में 240 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। दरअसल, फिलहाल पेट्रोल डीजल में कई सारे टैक्स शामिल हैं। मसलन, एक्साइज ड्यूटी और वैट (मूल्य संवर्धित कर)। इसके अलावा डीलर की ओर से लगाया गया रेट और कमीशन भी कीमतों में जुड़ते हैं। एक्साइज ड्यूटी तो केंद्र सरकार लेती है, जबकि वैट राज्यों की आमदनी (राजस्व) में जुड़ता है।

89.97 प्रति लीटर
महाराष्ट्र के परभणी में पेट्रोल सोमवार को हो गया। यह पूरे देश में पेट्रोल की सर्वाधिक कीमत है।

रुपये की हालत
डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत भी उन प्रमुख कारकों में से एक है, जो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत को प्रभावित करती हैं। भारतीय तेल कंपनियां अन्य देशों से आयातित तेल का भुगतान डॉलर में करती हैं। लेकिन उनके खर्च रुपये में दर्ज होते हैं। जब डॉलर की तुलना में रुपये में गिरावट आती है, तो कंपनियों के लाभ पर असर पड़ता है और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ जाती है। इसी तरह रुपया मजबूत होने पर कीमतों में राहत मिलती है।

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जानें, क्यों मनाया जाता है फ्रेंडशिप डे? इस देश से हुई थी शुरुआत

क्या आप जानते हैं.. फ्रेंडशिप डे आखिर अगस्त के पहले रविवार को ही क्यों मनाया जाता है..

आइए जानते हैं क्या है फ्रेंडशिप डे का इतिहास

– दोस्ती के प्रतीक के रूप में मनाए जाने वाले इस दिन की शुरुआत साल 1919 में सबसे पहले हॉलमार्क कार्ड के संस्थापक जोस हॉल ने दोस्ती मनाने का सुझाव दिया था.

– 1935 में पहली बार यूनाइटेड स्टेट्स कांग्रेस ने अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाने की घोषणा की थी.

– इसे पहली बार अमेरिका में मनाया गया था.


– इस अवसर पर दोस्तों को फ्रेंडशिप बैंड, कार्ड, गिफ्ट्स दिए जाते हैं.

– आपको बतादें साल 1997 में मिल्न के कार्टून किरदार विन्नी द पूह को संयुक्त राष्ट्र ने दोस्ती का अंतराष्ट्रीय दूत चुना.

– भारत में अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है, लेकिन दक्षिण अमेरिकी देशों में जुलाई महीने को काफी पावन माना जाता है. इसलिए जुलाई के अंत में ही इस दिन को मनाया जाता है. बांग्लादेश और मलेशिया में डिजिटल कम्यूनिकेशंस के तहत यह दिन ज्यादा चर्चित हो गया है. यूनाइटेड नेशंस ने भी इस दिन पर अपनी मुहर लगा दी थी.

– मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी देशों में यह समय ऐसा होता है, जब दूर-दूर तक किसी पर्व-त्योहार की छुट्टी नहीं होती. साल 1958 के 30 जुलाई को औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडशिप डे (विश्व मैत्री दिवस) की घोषणा की गई थी.

– करीब 60 साल पहले 1958 में पहली बार फ्रेंडशिप डे को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई जब दक्षिण अमेरिका के कई देश खासतौर पर परागवे में फ्रेंडशिप डे मनाया गया.

– फ्रेंडशिप डे सेलिब्रेशन के 10वें साल के मौके पर फेमस बैंड बीटल्स ने 1967 में एक गाना रिलीज किया था- With Little Help From My Friends…. यह गाना दुनियाभर में लोगों के बीच काफी फेमस हुआ था.

– ब्राजील, अर्जेंटीना, इक्वाडोर और उरुग्वे जैसे देशों में हर साल 20 जुलाई को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है.

– बॉलीवुड में दोस्ती को काफी अहम दर्जा दिया गया है. जिस पर बेहतरीन फिल्म बनाई गई है. इनमें खास है:- ‘दोस्ती’, आनंद, शोले ,याराना और दिल चाहता है.

– दोस्ती में कमाल की बात ये है कि इसका कोई मजहब नहीं होता. हम चाहे किसी से भी दोस्ती कर सकते हैं. बिना किसी बंधन के हम किसी को भी अपना दोस्त बना सकते हैं.

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WhatsApp पर पाएं ट्रेनों का लाइव स्टेटस, जानें कैसे

आपको अब रेलवे के पूछताछ नंबर 139 पर फोन करने की या फिर इंटरनेट से पीएनआर के जरिए जानकारी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आपको ट्रेन के डिपार्चर से लेकर उसके स्टेशन के बारे में भी जानकारी व्हाट्सऐप के जरिए मिल जाएगी। इसके अलावा इससे टैक्सी, लाने-ले जाने की सुविधा, रिटायरिंग रूम, होटल, टूर पैकेज, ई-कैटरिंग और यात्रा से जुड़ीं अन्य जानकारियां भी हासिल की जा सकती हैं।

बस इस नंबर को करें सेव और..
ट्रेन का लाइव स्टेट्स जानने के लिए आपको अपने मोबाइल में 7349389104 नंबर को सेव करना होगा। इसके बाद आप किसी भी ट्रेन का नंबर इस नंबर पर सेंड कर उसके बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। आपको ट्रेन की अपटेड स्थिति इस नंबर से मिल जाएगी। 10 सेकंड में आपको आपकी ट्रेन का लाइव स्टेटस उसी ग्रुप में मिल जाएगा। इस तरीके को अपनाकर आप महसूस करेंगे कि पहले से काफी आसान हो गया है ट्रेन का स्टेटस जानना।

पश्चिमी रेलवे के वरिष्ठ डिवीजनल कमर्शियल मैनेजर आरती सिंह परीर ने कहा, ‘आम यात्रियों को ट्रेनों की स्थिति के बारे में अपडेट के लिए रेलवे ने इस नंबर को लॉन्च किया है। हमारा प्रयास यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है। यह यात्रियों के लिए एक बहुत उपयोगी सुविधा है और उन्होंने इसकी सराहना की है।’

10 सेकंड में रेलवे की तरफ से आएगा जवाब
आपको इस बात का ध्याोन रखना होगा कि आपका मैसेज सर्वर पर तब तक नहीं पहुंचेगा जब तक डबल टिक न हो जाए। कभी-कभी सर्वर पर ज्यादा ट्रैफिक होने से ऐसा हो सकता है। इस नंबर पर मैसेज करने पर डबल टिक आए तो समझ जाएं कि मैसेज रेलवे सर्वर तक पहुंच गया है। डबल टिक ब्लू हो जाए तो समझ जाएं कि रेलवे सर्वर ने मैसेज को रीड कर लिया है। इसका मतलब है कि अब जवाब आने ही वाला है। ब्लू टिक आने के बाद ही व्हाट्सऐप पर रिवर्ट आता है। कोई सर्वर प्रॉब्लम न होने पर आमतौर पर 10 सेकंड में रिवर्ट आ ही जाता है।

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आपके रोमांच को और बढ़ाएंगी भारत की ये रहस्यमय गुफाएं

आइए, जानते हैं भारत की रहस्यमय गुफाओं के बारे में,

बोरा गुफाएं

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के विलियम किंग जॉर्ज ने 1807 में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम जिले में अराकू वैली के पास अनंतगिरी की पहाडि़यों में खोजी थी। यहां कार्स्टिक चूना पत्थर से बनी हुई सबसे गहरी गुफा है। इसकी गहराई 80 मीटर है। ये भारत की सबसे गहरी गुफाओं में से एक है।

भीमबेटका रॉक शेल्‍टर

मध्‍य प्रदेश के रायसेन जिले में रतापानी वाइल्‍ड लाइफ सैंक्चुअरी के अंदर भीमबेटका गुफाएं हैं। ये गुफाएं पाषाण काल की बनी हुई हैं। गुफा की दीवारों पर इंसान और जानवरों की पेंटिंग उकेरी गई हैं। मानव सभ्‍यता की ये सबसे पुराने चिह्नों में से एक हैं। 2003 में इसे वर्ल्‍ड हैरिटेज साइट घोषित कर दिया गया था। ये गुफा लगभग 30 हजार साल पुरानी है। यहां पांच सौ से ज्‍यादा प्राकृतिक गुफाएं बनी हुई हैं। भीमबेटका में युद्ध की पेंटिंग दीवारों पर बनाई गई है। 1958 में इस पेंटिंग की खोज की गई थी।

अमरनाथ गुफा

अमरनाथ गुफा भारतीय आस्‍था का केंद्र है। यहां बर्फ से भगवान के शिवलिंग का निर्माण होता है। हजारों की संख्‍या में भक्‍त यहां आते हैं। ये भारत के सबसे पूज्‍यनीय तीर्थ स्‍थलों में से एक है। जम्‍मू कश्‍मीर में बनी यह गुफा हिमालय की पहाडि़यों से घिरी हुई है। ये गुफा ज्‍यादातर बर्फ से ढकी रहती है।

अंडावल्‍ली गुफा

यह गुफा प्रचीन काल का सबसे बेहतरीन नमूना है। इसे विश्‍वकर्मा स्‍थापथीस कहा जाता है। आंध्र प्रदेश में यह गुफा विजयवाड़ा से सिर्फ 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इन गुफाएं चौथी-पांचवी शताब्‍दी की प्रतीत होती हैं। यह गुफाएं पत्‍थरों से निर्मित हैं। यह एक जैन गुफा थी। यह उदयगिरि और खांडगिरि के आर्कीटेक्‍चर का नमूना है। इसमें से प्रमुख गुफा गुप्‍त काल के आर्कीटेक्‍चर का नमूना है।

वैष्‍णो देवी

जम्‍मू कश्‍मीर में स्थित वैष्‍णो देवी मंदिर भारत की सबसे प्रचीन गुफाओं में से एक है। ये प्रमुख हिन्‍दू मंदिरों और शक्ति के 52 पीठों में से एक है। यह त्रिकूट पहाडि़यों पर स्थित है। यहां हर साल लाखों की संख्‍या में भक्‍त आते हैं।

उदयगिरि और खांडगिरि गुफा

उड़ीसा में बनी उदयगिरि और खांडगिरि गुफा प्रकृति और मानव निर्मित गुफा का अद्भुत नमूना है। इस आर्कियोलॉजिकल और हिस्‍टॉरिकल गुफा का अपना ही धार्मिक महत्‍व है। यह गुफा भुवनेश्‍वर के पास स्थित है। यहां की ज्‍यादातर गुफाएं जैन मॉंक का घर रहीं हैं। उदयगिरि का अर्थ होता है सूर्योदय गुफा। यहां 18 खांडगिरि गुफाएं भी है। जिनका अर्थ होता है टूटी हुई पहाडि़यां। जैन गुफाएं भारत में प्राचीन काल से हैं।

एलीफेंटा गुफाएं

महाराष्‍ट्र के एलीफेंटा आईसलैंड पर बनी ये गुफाएं मानव निर्मित गुफाओं का नेटवर्क है। इसे सिटी ऑफ केव्‍स भी कहा जाता है। ये मुंबई में हार्बॉर पर स्थित हैं। ये आइसलैंड दो गुफाओं का घर है। यहां दो ग्रुपो में पहली पांच हिन्‍दू गुफाएं है और छोटे ग्रुप में दो बुद्धिस्‍ट गुफाएं हैं। पहाड़ों को काट कर इन गुफाओं का निर्माण किया गया है।

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मानसून के बदलते मौसम में स्वस्थ रहने के लिए खान-पान में क्या करें शामिल

जीवनशैली और नजरिए में थोड़ा सा फर्क लाकर हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बना सकते हैं…

बरसात में इनका सेवन जरूरी

तुलसी: तुलसी दल एक उत्कृष्ट रसायन है। यह गर्म और त्रिदोषशामक है। रक्तविकार, ज्वर, वायु, खांसी एवं कृमि निवारक है तथा हृदय के लिए हितकारी है। सफेद तुलसी के सेवन से त्वचा, मांस और हड्डियों के रोग दूर होते हैं। काली तुलसी के सेवन से सफेद दाग दूर होते हैं। तुलसी की जड़ और पत्ते ज्वर में उपयोगी हैं। तुलसी की चाय पीने से ज्वर, आलस्य, सुस्ती तथा वातपित्त विकार दूर होते हैं, भूख बढ़ती है।

शहद: शहद का सेवन हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। कारण, शहद में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं और यह एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है। शक्कर की तुलना में शहद में बीस प्रतिशत कम कैलोरी होती है। इसलिए शहद के सेवन से शरीर को भरपूर ऊर्जा और शक्कर की तुलना में कम कैलोरीज मिलती हैं। शहद में अन्य पोषक तत्वों के अलावा शरीर के लिए जरूरी विटामिन्स बी-1, बी-2, बी-5, बी-6 और विटामिन सी पाए जाते हैं। ये विटामिन्स हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।

हर्बल टी: इसमें सिट्रॉल नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो कई बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से बचाता है। इससे पेट साफ रहता है और रक्त संचरण में सुधार होता है। इसका सेवन एग्जि़मा और त्वचा संबंधी संक्रमणों से भी बचाता है। आप चाहे तो इसमें अदरक, काली मिर्च और शहद का भी प्रयोग कर सकते हैं।

सूखे मेवे: सूखे मेवे में जिंक और विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है। जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बहुत सहायता करते हैं। इसलिए अपनी डाइट में हर रोज किसी भी रूप में एक मुट्ठी मेवों को शामिल करें। शरीर भीतर से मजबूत होगा और बदलते मौसम का शरीर पर असर नहीं पड़ेगा।

लहसुन: खाली पेट कच्‍चे लहसुन से ब्‍लड प्रेशर नियंत्रित रहता है एवं भुना हुआ लहसुन खाने से शरीर की आंतरिक सफाई होती है। लहसुन से हमारा वजन भी कंट्रोल में रहता है। यह एक प्राकृतिक एंटी-बायोटिक का काम करता है। लहसुन आपके शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ायेगा और टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकाल फेकेगा।

करेला: करेले में कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन पाया जाता है। करेला खाने से खून साफ होता है और ये हीमोग्लोबिन बढ़ाने का अच्छा स्त्रोत है। लीवर संबंधी रोगों के लिये करेला बहुत लाभकारी है। श्वांस और दमे के रोगियों को करेले की सादी सब्जी का सेवन करना चाहिये। करेला हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।

नीबू: नीबू में ए, बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा है। इसमें पोटेशियम, लोहा, सोडियम, मैगनेशियम, तांबा, फास्फोरस और क्लोरीन तत्त्व तो हैं ही, प्रोटीन, वसा और कार्बोज भी पर्याप्त मात्रा में हैं। विटामिन सी से भरपूर नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है और कोलेस्ट्राल भी कम करता है।

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स्वदेशी लाइसेंस से इन 8 देशों में चला सकते हैं गाड़ी!

कई देशों में दूसरे देशों के लाइसेंस को कुछ समय तक वैध माना जाता है. आइए जानते हैं भारत के ड्राइविंग लाइसेंस से आप कहां-कहां गाड़ी चला सकते हैं.

अमेरिका- अमेरिका में भारतीय लाइंसेस के साथ एक साल तक गाड़ी चला सकते हैं. हालांकि इसके साथ ही आपके पास I-94 फॉर्म होना आवश्यक है, जिससे पता चलता है कि आपको अमेरिका में आए कितने दिन हुए हैं.

ग्रेट ब्रिटेन- ग्रेट ब्रिटेन (इंग्लैंड, सकॉटलैंड) में विदेशी अपने देश के लाइसेंस के साथ एक साल तक गाड़ी चला सकते हैं.

ऑस्ट्रेलिया- ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड, साउथ ऑस्ट्रेलिया और ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरीटरी में भारतीय लाइंसेस के साथ गाड़ी चला सकते हैं.

जर्मनी- भारत से जर्मनी घूमने आए लोग यहां 6 महीने तक इंडियन ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए गाड़ी चला सकते हैं. यहां इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस की जरुरत नहीं पड़ती.

साउथ अफ्रीका- साउथ अफ्रीका में गाड़ी चलाने के लिए आपका ड्राइविंग लाइसेंस वैध और अंग्रेजी में होना चाहिए. साथ ही आपके लाइसेंस पर आपकी फोटो और सिग्नेचर होना जरुरी है. अगर आपके लाइसेंस में ऐसा है तो आप वहां गाड़ी चला सकते हैं.

स्विट्ज़रलैंड- यहां भी आप एक साल तक गाड़ी चला सकते हैं.

नॉर्वे- मिडनाइट सन की भूमि कहे जाने वाले इस देश में गाड़ियां सड़क के दाईं तरफ चलायीं जाती हैं. यहां आप इंडियन ड्राइविंग लाइसेंस पर सिर्फ 3 महीने ही गाड़ी चला सकते हैं, इसके साथ ही लाइसेंस का अंग्रेजी में होना भी जरूरी है.

न्यूजीलैंड- यहां गाड़ी चलाने के लिए 21 साल का होना जरुरी है. इसके अलावा आपका लाइसेंस अंग्रेजी में होना चाहिए.