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ऑस्ट्रेलिया की संसद में पहली बार किया गया योग, भारत से आया योग अब पूरी दुनिया में मचा रहा धूम

केनबरा स्थित संसद के कम्युनिटी हाल में इस सत्र में पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट समेत कई मंत्रियों व सांसदों ने हिस्सा लिया और विभिन्न आसनों का अभ्यास किया। दो घंटे तक चले इस सत्र का आयोजन मेलबर्न स्थित वासुदेव क्रिया योग समूह ने किया था।

हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। एबॉट ने कहा, ‘यह बहुत अच्छा है कि हम संसद में योग दिवस मना रहे हैं। चिंता और तनाव से घिरे नेताओं के लिए योग फायदेमंद है। कई भारतवंशी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को योग अभ्यास करते देखना बेहद सुखद है। ऑस्ट्रेलियाई भी योग में काफी रुचि दिखाते हैं।’

योग को प्रसारित करने में भारत की सफलता का जिक्र करते हुए एबॉट ने कहा, ‘भारत उभरती विश्व शक्ति है और योग उससे जुड़ा हुआ है। मुझे खुशी है भारत से आया योग पूरी दुनिया में फैल रहा है।’

हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। एबॉट ने कहा, ‘यह बहुत अच्छा है कि हम संसद में योग दिवस मना रहे हैं। चिंता और तनाव से घिरे नेताओं के लिए योग फायदेमंद है। कई भारतवंशी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को योग अभ्यास करते देखना बेहद सुखद है। ऑस्ट्रेलियाई भी योग में काफी रुचि दिखाते हैं।’

वासुदेव क्रिया योग के राजेंद्र येंकानमुले ने कहा, ‘पहली बार किसी देश की संसद में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया है। यह कार्यक्रम बहुत सफल रहा। हमें उम्मीद है कि आने वाले सालों में यह और भी सफल होगा।’

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दीवार के पीछे की हमारी हलचल को पकड़ सकता है एम आई टी का नया एआइ सिस्टम

शोधकर्ताओं ने लोगों की सामान्य गतिविधियों, जैसे टहलने, बातचीत करने, बैठने, दरवाजा खोलने या लिफ्ट का इंतजार करने की हजारों फोटो एकत्र कीं। फिर इन तस्वीरों को कैमरे से निकालकर उनके स्टिक फिगर्स (एक तरह के रेखा-चित्र) प्राप्त किए गए। संबंधित रेडियो सिग्नल के साथ इन्हें न्यूरल नेटवर्क से जोड़ा गया। इस संयोजन के साथ सिस्टम रेडियो सिग्नल और स्टिक फिगर्स के बीच संबंध को समझ गया। ट्रेनिंग के बाद आरएफ-पोज इतना समर्थ हो गया कि वह कैमरे के बिना केवल वायरलेस रिफ्लेक्शन के आधार पर लोगों के मूवमेंट को नोट करने लगा।

निगरानी में मिलेगी मदद

वैज्ञानिकों के मुताबिक, सिस्टम सही तरह से काम करे तो बुजुर्गों की बेहतर निगरानी में मदद मिलेगी और उन्हें गिरने, चोट लगने और एक्टिविटी पैटर्न में बदलाव जैसी चीजों से बचाया जा सकेगा। शोधकर्ताओं की टीम मौजूदा समय में डॉक्टरों के साथ मिलकर हेल्थकेयर में इसके ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर काम कर रही है।

सेंसर पहनने व डिवाइस चार्ज करने की जरूरत नहीं

एमआइटी के वैज्ञानिक दीना कताबी कहते हैं, हमने देखा है कि अक्सर लोगों को तेज चलते और सामान्य कामकाज करते हुए देखने के आधार पर ही डॉक्टर मर्ज को समझते हैं और इलाज की दिशा तय करते हैं। यहीं से हमें इसे तैयार करने का विचार आया। हमने इसी का एक जरिया उपलब्ध कराने की कोशिश की है। अब तक यह व्यवस्था नहीं थी।

शोधकर्ता के अनुसार, हमारी पहल की एक खासियत यह है कि इसमें मरीज को न तो कोई सेंसर पहनना पड़ता है और न ही अपनी डिवाइस को चार्ज करने की चिंता करनी पड़ती है। हेल्थकेयर के अलावा नया सिस्टम यानी आरएफ-पोज ऐसे वीडियो गेमों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है, जिनमें खिलाड़ियों का मूवमेंट होता है।

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किम के बड़े कदम से टली परमाणु आपदा, अब नए रिश्ते की होगी शुरुआत: डोनाल्ड ट्रम्प

सिंगापुर में मंगलवार को हुई शिखर वार्ता में किम ने अमेरिकी राष्ट्रपति से सुरक्षा की गारंटी मिलने पर कोरियाई प्रायद्वीप को पूरी तरह परमाणु मुक्त करने का वादा किया। ट्रंप ने एयर फोर्स वन विमान से वाशिंगटन डीसी लौटते वक्त ट्वीट किया, ‘अपने लोगों के उज्जवल भविष्य की खातिर साहसिक कदम उठाने के लिए मैं किम को धन्यवाद कहना चाहता हूं। हमारी अप्रत्याशित मुलाकात से यह साबित होता है कि वास्तविक बदलाव संभव है।’

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘रॉकेट लांच, परमाणु परीक्षण या रिसर्च और नहीं। हम लोगों का एक साथ गुजरा दिन ऐतिहासिक रहा। धन्यवाद किम।’

दक्षिण कोरिया, चीन के दौरे पर पोंपियो

ट्रंप-किम शिखर वार्ता संपन्न होने के बाद अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो दक्षिण कोरिया रवाना हो गए, जहां से वह चीन जाएंगे। पोंपियो दोनों देशों के अपने समकक्षों को शिखर वार्ता के बारे में जानकारी देंगे।

अन्य मिसाइल लांच स्थलों को भी ध्वस्त करने का एलान करेंगे किम

शिखर वार्ता के एक दिन बाद ट्रंप ने बताया कि उत्तर कोरिया एक मिसाइल परीक्षण स्थल को नष्ट करने पर सहमत हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया के नेता किम आगामी कुछ दिनों में अन्य मिसाइल स्थलों को भी ध्वस्त करने का एलान करेंगे। उत्तर कोरिया ने पिछले महीने विदेशी मीडिया की मौजूदगी में अपना एक परमाणु परीक्षण स्थल ध्वस्त कर दिया था।

किम ने ट्रंप को दिया प्योंगयांग आने का न्योता

किम जोंग उन ने शिखर वार्ता के दौरान डोनाल्ड ट्रंप को उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग आने का न्योता दिया। उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने बुधवार को कहा कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को अपने यहां आने का निमंत्रण दिया। दोनों ने इस आमंत्रण को खुशी से स्वीकार किया है। इससे नए रिश्ते की शुरुआत होगी।

ट्रंप-किम वार्ता को उत्तर कोरिया के मीडिया ने बताया अपनी जीत

उत्तर कोरिया के मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच मंगलवार को सिंगापुर में हुई ऐतिहासिक शिखर वार्ता को उत्तर कोरिया की जीत करार दिया है। अमेरिकी मीडिया में भी यह खबर छाई रही। न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट ने हालांकि शिखर वार्ता में हुए समझौते का विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किए जाने पर सवाल भी उठाए।

दोनों अखबारों ने पहले पेज पर शिखर वार्ता की खबर को ट्रंप-किम की तस्वीरों के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया। उत्तर कोरिया के सरकारी अखबार रॉडोंग सिनमुन ने अपने पहले पेज पर शिखर वार्ता को ‘सदी की बैठक’ बताया। सरकारी न्यूज एजेंसी कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने लिखा, ट्रंप ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास को बंद करने, उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी देने और प्रतिबंधों को हटाने का इरादा जाहिर किया है।

उत्तर कोरिया के सरकारी टेलीविजन पर स्टार न्यूज एंकर री चुन ही ने भी इसी तरह की खबर पढ़कर सुनाई। 75 वर्षीय री आमतौर पर बड़ी घोषणाओं के मौके पर ही सामने आती हैं। पिछले साल सितंबर में उत्तर कोरिया के छठे परमाणु परीक्षण का एलान भी उन्होंने ही किया था।

सरकारी अखबार ने पहले पेज पर ट्रंप और किम के हाथ मिलाने समेत कई तस्वीरों को प्रकाशित किया है। जबकि अंदर के पेज पर अधिकारियों के साथ शिखर वार्ता, लंच और संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर करने की तस्वीरें छापी गई हैं।

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ब्रिटिश जज ने आपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटिश भूमिका की जाँच के लिए फाइल सार्वजनिक करने को कहा

न्यायाधीश मुरी शांक्स की अध्यक्षता में मार्च में लंदन में फ‌र्स्ट टीयर ट्रिब्यूनल (सूचना का अधिकार) में तीन दिनों तक सुनवाई चली थी। उन्होंने एक दिन पहले सोमवार को कहा कि अवधि से संबंधित अधिकांश फाइलें सार्वजनिक की जानी चाहिए।

न्यायाधीश ने ब्रिटिश सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया कि डाउनिंग स्ट्रीट कागजात को अवर्गीकृत करने से भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ता क्षतिग्रस्त हो जाएगा।

न्यायाधीश ने हालांकि ब्रिटेन की संयुक्त खुफिया समिति से ‘इंडिया पोलिटिकल’ के रूप में चिह्नित फाइल पर दलील स्वीकार नहीं की। इस फाइल में ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों एमआइ5, एमआइ6 और जीसीएचक्यू (गवर्नमेंट कम्युनिकेशन हेडक्वार्टर) से संबंधित सूचनाएं हो सकती हैं।

न्यायाधीश ने कहा कि इसलिए कैबिनेट कार्यालय तकनीकी रूप से उस व्यवस्था पर कायम रह सकता है जिसके तहत ऐसी सामग्री को सूचना की आजादी अपील से छूट मिली हुई है।

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दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी लेने वाले शख्स बने निकेश अरोड़ा, अब हैं पालो अल्टो नेटवर्क के नए CEO

50 साल के अरोड़ा ने मार्क मिकलॉकलीन जगह ली है. जो पिछले सात सालों से पालो अल्टो के सीईओ के पद पर बने हुए थे. निकेश अरोड़ा सीईओ के साथ ही इस ग्रुप के नए चेयरमैन भी बन गए हैं. निकेश का सालाना वेतन 1 मिलियन डॉलर यानी लगभग 6.7 करोड़ रुपये होगा और इतना ही उन्हें बोनस मिलेगा. इसके साथ ही उन्हें 40 मिलियन डॉलर यानी 268 करोड़ रुपए के रिस्ट्रीक्टेड शेयर मिलेंगे।

कौन हैं निकेश अरोड़ा?
निकेश अरोड़ा का जन्म 6 फरवरी 1968 को उत्तर प्रदेश के गाजि‍याबाद में हुआ. निकेश के पिता इंडियन एयरफ़ोर्स में अधिकारी थे. उन्होंने दिल्ली के एयरफ़ोर्स के स्कूल से पढ़ाई की. उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग आआईटी वाराणसी (बीएचयू) से साल 1989 में किया. आईआईटी की डिग्री के बाद उन्हें विप्रो में नौकरी मिली लेकिन उन्होंने जल्द ही ये नौकरी छोड़ दी औऱ आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. इसके बाद उन्होंने अमेरिका नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली.

निकेश अरोड़ा ने साल 2004 में गूगल कंपनी ज्वाइन की. गूगल में वे कई ऑपरेशन के लीडर के तौर पर काम करते रहे. साल 2004 से 2007 के बीच वे गूगल के यूरोप ऑपरेशन के वाइस प्रेसिडेंट रहे. इसके बाद अफ्रीका रिजन के लिए साल 2009 तक काम किया. साल 2009 से 2010 तक वे गूगल के ग्लोबल बिजनेस डेवपमेंट के प्रेसिडेंट रहे. 2011 में वो गूगल में चीफ़ बिज़नेस ऑफिसर बन गए और इसके साथ ही वो उस लीग में आ गए जिन्हें गूगल सबसे ज्यादा सैलरी देता है. साल 2014 में अरोड़ा ने गूगल की नौकरी छोड़ दी.

इसके बाद निकेश ने बतौर सीओओ (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर) सॉफ़्ट बैंक ज्वाइन किया था और यहां उन्हें दो सालों में 200 मिलियन डॉलर का कंपेंसेशन पैकेज मिला. निकेश यहां जून 2016 तक रहे थे. अब जून 2018 में उन्होंने पालो अल्टो का हाथ थामा है.

 

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स्वदेशी लाइसेंस से इन 8 देशों में चला सकते हैं गाड़ी!

कई देशों में दूसरे देशों के लाइसेंस को कुछ समय तक वैध माना जाता है. आइए जानते हैं भारत के ड्राइविंग लाइसेंस से आप कहां-कहां गाड़ी चला सकते हैं.

अमेरिका- अमेरिका में भारतीय लाइंसेस के साथ एक साल तक गाड़ी चला सकते हैं. हालांकि इसके साथ ही आपके पास I-94 फॉर्म होना आवश्यक है, जिससे पता चलता है कि आपको अमेरिका में आए कितने दिन हुए हैं.

ग्रेट ब्रिटेन- ग्रेट ब्रिटेन (इंग्लैंड, सकॉटलैंड) में विदेशी अपने देश के लाइसेंस के साथ एक साल तक गाड़ी चला सकते हैं.

ऑस्ट्रेलिया- ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड, साउथ ऑस्ट्रेलिया और ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरीटरी में भारतीय लाइंसेस के साथ गाड़ी चला सकते हैं.

जर्मनी- भारत से जर्मनी घूमने आए लोग यहां 6 महीने तक इंडियन ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए गाड़ी चला सकते हैं. यहां इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस की जरुरत नहीं पड़ती.

साउथ अफ्रीका- साउथ अफ्रीका में गाड़ी चलाने के लिए आपका ड्राइविंग लाइसेंस वैध और अंग्रेजी में होना चाहिए. साथ ही आपके लाइसेंस पर आपकी फोटो और सिग्नेचर होना जरुरी है. अगर आपके लाइसेंस में ऐसा है तो आप वहां गाड़ी चला सकते हैं.

स्विट्ज़रलैंड- यहां भी आप एक साल तक गाड़ी चला सकते हैं.

नॉर्वे- मिडनाइट सन की भूमि कहे जाने वाले इस देश में गाड़ियां सड़क के दाईं तरफ चलायीं जाती हैं. यहां आप इंडियन ड्राइविंग लाइसेंस पर सिर्फ 3 महीने ही गाड़ी चला सकते हैं, इसके साथ ही लाइसेंस का अंग्रेजी में होना भी जरूरी है.

न्यूजीलैंड- यहां गाड़ी चलाने के लिए 21 साल का होना जरुरी है. इसके अलावा आपका लाइसेंस अंग्रेजी में होना चाहिए.

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फिरसे बिगड़े बोल, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से बातचीत रद्द की; अमरीका को चेताया

उत्तर कोरिया की समाचार एजेंसी केसीएनए ने लिखा है कि अमरीका और दक्षिण कोरिया के साझा अभ्यास ‘उकसावा’ हैं.

एजेंसी ने अमरीका को भी उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच 12 जून को होने वाली बहुप्रतीक्षित मुलाक़ात के भविष्य को लेकर चेताया है.

दोनों देशों के बीच होनी थी ‘फॉलो-अप’ मुलाक़ात

रद्द की गई बातचीत असैन्यीकृत क्षेत्र पनमुनजोम में बुधवार को होनी थी और इस पर इसी हफ़्ते सहमति बनी थी. इस बातचीत में दोनों देशों के प्रतिनिधि 27 अप्रैल को दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत में बनी सहमति को आगे ले जाने पर विचार करने वाले थे.

पनमुनजोम कोरियाई प्रायद्वीप की अकेली ऐसी जगह है जहां उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और अमरीकी सैनिक एक दूसरे से रूबरू होते हैं. साल 1953 के बाद से यहां युद्ध विराम लागू है.

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने द्विपक्षीय मुलाक़ात के बाद कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने पर सहमति जताई थी.

दोनों ने 1953 के युद्धविराम को औपचारिक तौर पर इस साल शांति संधि में बदलने की भी इच्छा जताई थी.

मार्च में ट्रंप ने दुनिया को यह बताकर चौंका दिया था कि उन्हें किम जोंग-उन से मुलाक़ात का प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने स्वीकार लिया है.

ट्रंप ने उस वक़्त ट्वीट किया था, “हम दोनों साथ में इसे विश्व शांति के लिए एक बहुत विशेष पल बनाने की कोशिश करेंगे.”

बी-52 बमवर्षक और एफ-15के जेट विमानों समेत करीब 100 लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को ‘मैक्स थंडर’ युद्धाभ्यास शुरू किया था.

अमरीका और दक्षिण कोरिया 1953 के द्विपक्षीय समझौते के तहत इस तरह के युद्धाभ्यास करते रहे हैं. लेकिन उत्तर कोरिया इस पर आपत्ति जताता रहा है.

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दुनिया की 10 सबसे ताकतवर हस्तियों में शुमार हुए नरेंद्र मोदी, No. 1 पर चिनफिंग

प्रतिष्ठित फोर्ब्‍स की लिस्‍ट में पीएम नरेंद्र मोदी दुनिया के 10 सबसे शक्तिशाली नेताओं की सूची में शुमार हो गए हैं. फोर्ब्‍स की लिस्‍ट में पीएम मोदी नौवें स्‍थान पर काबिज हैं. इस सूची में चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार पहले स्‍थान पर काबिज हुए हैं. वह रूसी नेता व्‍लादिमीर पुतिन को हटाकर पहले स्‍थान पर पहुंचे हैं. फोर्ब्‍स 2018 लिस्‍ट में दुनिया को चलाने वाले सबसे ताकतवर 75 नामों को शामिल किया गया है. फोर्ब्‍स ने लिस्‍ट जारी करते हुए कहा, ”दुनिया में करीब 7.5 अरब लोग हैं लेकिन ये 75 लोग दुनिया को चलाते हैं. फोर्ब्‍स की वार्षिक रैंकिंग में हर एक अरब में से एक ऐसे व्‍यक्ति को चुना जाता है जिनके एक्‍शन सबसे ज्‍यादा मायने रखते हैं.”

पीएम नरेंद्र मोदी
फोर्ब्स ने कहा कि पीएम मोदी दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देश (भारत) में “बेहद लोकप्रिय बने हुए हैं.” इसमें मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए मोदी सरकार के नवंबर 2016 के नोटबंदी के फैसले का हवाला दिया गया है. हाल के वर्षों में पीएम मोदी ने आधिकारिक यात्रा के दौरान डोनाल्‍ड ट्रंप और शी जिनपिंग के साथ मुलाकात की और वैश्विक नेता के रूप में अपनी पहचान बढ़ाई है. इसके अलावा वह जलवायु परिवर्तन से निपटने के अंतरराष्ट्रीय प्रयास में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं.

mukesh ambani
PM मोदी के अलावा मुकेश अंबानी लिस्‍ट में शामिल होने वाले एकमात्र भारतीय हैं.(फाइल फोटो)

मुकेश अंबानी
रिलांयस इडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी इस सूची में पीएम मोदी के अलावा स्थान पाने वाले एकमात्र भारतीय हैं. वहीं, माइफ्रोसॉफ्ट के सीईओ भारतीय मूल के सत्या नाडेला को 40वें पायदान पर रखा गया है. अंबानी पर फोर्ब्स ने कहा कि अरबपति उद्योगपति ने 2016 में भारत के अति-प्रतिस्‍पर्द्धी बाजार में 4-G सेवा जियो शुरू करके कीमत की जंग छेड़ दी.

शी जिनपिंग
जिनपिंग ने पिछले लगातार चार वर्ष तक इस सूची में शीर्ष पर चले आ रहे पुतिन को दूसरे स्थान पर धकेल दिया है. सूची में तीसरे पायदान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, चौथे पर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और पांचवें पर अमेजन प्रमुख जैफ बेजोस हैं. पीएम मोदी के बाद फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग(13वें), ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे(14), चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग(15), एपल के सीईओ टिम कुक(24) को रखा गया है. इस वर्ष सूची में 17 नए नामों को शामिल किया गया है, इसमें सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद (8वें ) भी हैं. सूची में पोप फ्रांसिस(6), बिल गेट्स(7), फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों(12), अलीबाबा के प्रमुख जैक मा(21) भी शामिल हैं.

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48 घंटे में धरती पर बरसेगा सूरज का कहर बंद होगा टीवी, मोबाइल और जीपीएस

अगले 48 घंटे में धरतीवासियों को सूरज का गुस्सा झेलना पड़ सकता है। सूरज के कोप से आपके मोबाइल का सिग्नल जाम हो सकता है, जीपीएस गड़बड़ा सकता है और तो और आपको एंटरटेन करने वाला टीवी भी बंद हो सकता है।

सूरज का यह गुस्सा दरअसल एक खगोलीय घटना है, जिसे सौर तूफान कहते हैं। खगोल वैज्ञानिकों ने सूरज पर चलने वाले तूफान के अगले 48 घंटे में धरती से टकराने की आशंका जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके प्रभाव से उपग्रह आधारित सेवाएं जैसे मोबाइल, केबल नेटवर्क, जीपीएस नैविगेशन प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा रेडिएशन के खतरे की भी आशंका है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत से पहले इसका असर अमेरिका और यूके में दिख सकता है। सौर तूफान के धरती से टकराने पर कुछ समय के लिए टेक ब्लैकआउट की स्थिति बन सकती है। नैशनल ओशन ऐंड अटमॉस्फियर असोसिएशन ने कहा है कि जब यह तूफान आएगा तो उत्तर और दक्षिण में तेज रोशनी नजर आएगी। हालांकि संस्थान ने इसे जी-1 या हल्का सौर तूफान ही करार दिया है। असोसिएशन फोरकास्ट का कहना है कि यह तूफान रविवार या सोमवार को आ सकता है। इस दौरान काफी तजे सौर हवाएं चलेंगी।

नासा की ओर से जारी की गई तस्वीर में गैस के इस तूफान को देखा जा सकता है। विदेशी मीडिया से आ रही खबरों के मुताबिक सूरज में एक कोरोनल होल खुलेगा, जिसके कारण उससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलेगी। इसमें कॉस्मिक कण भी होंगे। खगोल विशेषज्ञों का कहना है कि सोलर डिस्क के लगभग आधे हिस्से को काटते हुए एक बड़ा सा छेद बनेगा, जिसके जरिये सूरज से पृथ्वी की ओर बेहद गर्म हवा का एक तूफान आएगा।

बता दें कि सौर तूफान सूर्य की सतह पर आए क्षणिक बदलाव से उत्पन्न होते हैं। इन्हें पांच श्रेणी जी-1, जी-2, जी-3, जी-4 और जी-5 में बांटा गया है। इनमें जी-5 श्रेणी का तूफान सबसे खतरनाक हो सकता है। जानकारों का कहना है कि जी-1 श्रेणी के तुफान का सबसे ज्यादा असर पावर ग्रिड और माइग्रेटरी बर्ड्स पर पड़ता है।

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किम जोंग उन से वार्ता के लिए प्योंगयोंग नहीं जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप, अब यहां होगी वार्ता

किम जोंग उन से वार्ता के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अब प्‍योंगयोंग नहीं जाएंगे। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि यह वार्ता रद कर दी गई है, दरअसल, अब ये दोनों नेता उसी जगह पर मिलेंगे जहां पिछले दिनों दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे ने किम जोंग उन से मुलाकात की थी। इसका सुझाव खुद ट्रंप की तरफ से आया था जिसको किम ने हरी झंडी दे दी है।

आपको बता दें कि किम और मून के बीच 27 अप्रैल को पुनमुंजोम गांव में बैठक हुई थी। यह उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। यहां 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद से ही युद्ध विराम लागू है। इसका एक हिस्‍सा उत्‍तर तो दूसरा हिस्‍सा दक्षिण कोरिया में पड़ता है। आपके लिए यह जानना भी बेहद दिलचस्‍प है कि यह सीमा रेखा दुनिया की सबसे खतरनाक सीमाओं में गिनी जाती है। यही वजह है कि उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा एक बार फिर से चर्चा का विषय बनने के साथ-साथ ऐतिहासिक वार्ता का भी गवाह बनने वाली है।

पीस हाउस में बैठक का सुझाव

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने ही किम जोंग उन के साथ पीस हाउस में बैठक करने का सुझाव दिया है। पीस हाउस उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि उत्तर कोरिया के साथ शिखर बैठक के लिए कई देशों पर विचार किया जा रहा है। लेकिन किसी तीसरे देश की अपेक्षा पीस हाउस/फ्रीडम हाउस ज्यादा महत्वपूर्ण और स्थायी जगह है। तीन से चार हफ्ते में ट्रंप और किम की मुलाकात होने की संभावना है। गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि किम के साथ शिखर वार्ता के लिए पांच जगहों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि वह कई बार यह भी कह चुके हैं कि बातचीत नहीं भी हो सकती है।

दोनों के बीच वार्ता के अहम बिंदु

किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच होने वाली वार्ता का सबसे अहम बिंदु कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाना है। हालांकि इसको लेकर किम के तेवर में अब काफी नरमी आ चुकी है। पिछले दिनों मून से हुई मुलाकात में किम ने कहा था कि अगर अमेरिका कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने का वादा करे और उत्तर कोरिया पर हमला नहीं करने का वचन दे, तो उनका देश परमाणु हथियारों को त्यागने को तैयार है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्‍हें एक बार फिर विचार करना पड़ेगा।

कई लिहाज से खास है बैठक

किम ने ट्रंप को संबोधित करते हुए ये भी कहा है कि हमारे बीच जब बातचीत शुरू हो जाएगी, तब अमेरिकी राष्‍ट्रपति जान जाएंगे कि मैं ऐसा शख्‍स नहीं हूं कि दक्षिण कोरिया या अमेरिका पर परमाणु हथियार से हमला करूंगा। उन्‍होंने इस बात की भी उम्‍मीद जताई है कि यदि दोनों देशों के बीच बैठकों का सिलसिला बढ़ा और आपसी विश्‍वास बहाली हो सकी यह काफी अच्‍छा होगा। हालांकि अभी इन दोनों नेताओं की बैठक का दिन और समय निश्चित नहीं हो पाया है। लेकिन इतना जरूर तय है कि इस बैठक में दक्षिण कोरिया भी मौजूद होगा। यह बैठक इस लिहाज से भी खास होगी क्‍योंकि पहली बार पद पर रहते हुए कोई अमे‍रिकी राष्‍ट्रपति उत्तर कोरिया के प्रमुख से बात करेगा।

छह देशों की बैठक पर लगी निगाह

इस बीच जानकारों की निगाह कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाने के लिए छह देशों की बैठक पर भी लगी है, जो वर्षों से निलंबित हैं। जानकारों की दिलचस्‍पी इस बात को लेकर है कि इस बाबत छह देशों की वार्ता दोबारा शुरू होगी या नहीं। इन छह देशों में उत्तर और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, रूस और अमेरिका शामिल हैं। यॉनहॉप एजेंसी की मानें तो जानकार इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि कोरिया प्रायद्वीप को लेकर इन देशों की बैठकों का दौर दोबारा शुरू हो सकता है। जानकारों के मुताबिक इसको लेकर उत्तर कोरिया भी शायद पीछे न हटे और ऐसा करने पर अपनी सहमति व्‍यक्त करे। इस बारे में जापान की मीडिया ने यहां तक कहा है कि पिछले दिनों किम ने जो बीजिंग की यात्रा कर शी चिनफिंग के समक्ष अपनी बात रखी है उसके बाद इस सिक्‍स नेशन टॉक को लेकर सहमति बनी है।

उत्तर कोरिया खफा हो जाए

हालांकि जानकारों का एक मत यह भी है कि मुमकिन है कि जापान की मौजूदगी से उत्तर कोरिया खफा हो जाए। इसकी वजह ये है कि जापान काफी समय से अपने अगवा किए नागरिकों की वापसी की मांग उत्तर कोरिया से करता रहा है। वहीं इसको लेकर उत्तर कोरिया साफ इंकार कर रहा है। आपको बता दें कि छह देशों की यह वार्ता सबसे पहले 2003 में हुई थी। 2005 में वार्ता के बाद एक अहम समझौता भी हुआ था जिसमें उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी तक दी गई थी। लेकिन वर्ष 2009 में उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु परिक्षण किए जाने के चलते इसको निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से इस मुद्दे को लेकर इन देशों के बीच कोई वार्ता नहीं हुई।

दोनों के बीच विवादित बोल

इसके अलावा यह बैठक इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच बदजुबानी का लंबा सिलसिला चला है। एक ओर जहां ट्रंप ने किम को रॉकेट मैन कहा वहीं किम ने ट्रंप को बूढ़ा तक कह डाला था। आइए जानते हैं दोनों नेताओं ने कब-कब और क्‍या-क्‍या कहा।

– नवंबर 2017 में ट्रंप को उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने ‘बूढ़ा पागल’ बताया था। इस पर ट्रंप ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और लिखा था, ‘भला किम जोग-उन मुझे बूढ़ा बुला कर मेरा अपमान क्यों करेंगे, जब मैं उन्हें कभी नाटा और मोटा नहीं कहूंगा।’

– इसी तरह सितंबर 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने किम जोंग उन को रॉकेट मैन कहा था और उनके देश को नेस्तनाबूद करने की धमकी दी थी।

– इसके जवाब में किम जोंग उन की तरफ से जिस तरह का बयान आया, अमेरिका और ट्रंप ने कल्पना भी नहीं की होगी। उत्तर कोरिया ने कहा था, ‘डरे हुए कुत्ते ज्यादा भौंकते हैं। ट्रंप आग से खेलने के शौकीन एक दुष्ट व्‍यक्ति हैं।’

– जनवरी के पहले हफ्ते में भी पूरी दुनिया इन दोनों नेताओं के अजीब-गरीब बयानों की गवाह बनी थीं। दरअसल, किम जोंग उन ने नए साल के मौके पर अपने संबोधन में अमेरिका को तबाह करने की धमकी दी थी और कहा था कि परमाणु बम का बटन हर वक्त उनकी टेबल पर होता है।

– इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘कोई किम जोंग उन को बताए कि मेरे पास भी न्यूक्लियर बटन है, जो उसके बटन से बहुत बड़ा और ताकतवर है। मेरा बटन काम करता है।’

– 23 फरवरी 2018 को डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए दबाव बढ़ाने को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कदम उठाया है।

– 30 जनवरी को अमेरिका में सीआईए के निदेशक माइक पोंपियो ने आशंका जताई थी कि उत्तर कोरिया के पास ऐसी परमाणु मिसाइल हैं, जिससे वह कुछ महीनों के भीतर अमेरिका पर हमला कर सकता है।