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PAK को ब्रह्मोस की जानकारी देता था DRDO का यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड हासिल कर चुके रुड़की के निशांत अग्रवाल, गिरफ्तार

वह ब्रह्मोस मिसाइल की गुप्त जानकारियां पाकिस्तान को पहुंचा रहा था। आशंका यह भी जताई जा रही है कि आईएसआई और अमेरिकी इंटेलिजेंस के लिए वह काम करता था। हाल ही यंग साइंटिस्ट का अवॉर्ड हासिल कर चुके निशांत अग्रवाल पर कई सनसनीखेज आरोप उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (यूपी एटीएस) की ओर से लगाए गए हैं। आइए, जानते हैं कथित ISI एजेंट की पूरी कहानी..
ऑफिशल सीक्रेट ऐक्ट के तहत हुआ अरेस्ट
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सोमवार को निशांत अग्रवाल नाम के साइंटिस्ट को नागपुर स्थित ब्रह्मोस ऐरोस्पेस सेंटर से गिरफ्तार किया गया है। आरोपी को उत्तर प्रदेश एटीएस और मिलिटरी इंटेलिजेंस के अधिकारियों द्वारा ऑफिशल सीक्रेट ऐक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है।
‘पाक’ के साथ इस मुल्क के लिए काम करने का आरोप
'पाक' के साथ इस मुल्क के लिए काम करने का आरोप
निशांत अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने खुफिया जानकारी को पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका को भी साझा किया है। एक टीम ने उन्हें रविवार रात ट्रैक किया और सोमवार को छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया।
2013 में मिशन ब्रह्मोस से जुड़े थे निशांत
2013 में मिशन ब्रह्मोस से जुड़े थे निशांत
रुड़की के रहने वाले निशांत अग्रवाल मिशन ब्रह्मोस में 31 जुलाई 2013 से काम कर रहे थे। ब्रह्मोस से पहले उन्होंने मुंबई में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ भी काम किया। निशांत ने एनआईटी कुरुक्षेत्र से पढ़ाई पूरी की है।
यंग साइंटिस्ट से बन गया ISI एजेंट?
यंग साइंटिस्ट से बन गया ISI एजेंट?
कथित तौर पर आईएसआई एजेंट निशांत अग्रवाल ब्रह्मोस ऐरोस्पेस में सीनियर सिस्टम इंजिनियर के रूप में काम करते थे। उनके पास सिस्टम इंजिनियरों, टेक्निकल सुपरवाइजर्स और टेक्निशन समेत 40 लोगों के प्रबंधन की जिम्मेदारी थी। निशांत को 2017-2018 का यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड भी मिला था।
साढ़े 11 घंटे तक ISI कनेक्शन खंगालती रही टीम
साढ़े 11 घंटे तक ISI कनेक्शन खंगालती रही टीम
निशांत के मकान मालिक मनोहर काले ने बताया कि यह इंजिनियर वर्धा रोड पर पिछले वर्ष (2017) से किराये के मकान में रह रहा था। काले ने बताया कि पुलिस टीम सुबह 5:30 बजे इमारत में पहुंची और शाम 5 बजे तक वहां रुकी।
जानिए, क्या है ब्रह्मोस ऐरोस्पेस
जानिए, क्या है ब्रह्मोस ऐरोस्पेस
ब्रह्मोस ऐरोस्पेस का गठन भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के ‘मिलिटरी इंडस्ट्रियल कंसोर्टियम’ (एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिया) के बीच संयुक्त उद्यम के रूप में किया गया है। भारत और रूस के बीच 12 फरवरी, 1998 को हुए एक अंतर-सरकारी समझौते के माध्यम से यह कंपनी स्थापित की गई थी।
निशांत के मकान मालिक ने बताई यह बात
निशांत के मकान मालिक ने बताई यह बात
पाकिस्तान के साथ अहम जानकारी साझा करने के आरोपी निशांत अग्रवाल के मकान मालिक ने यह भी कहा, ‘निशांत यहां पत्नी के साथ रह रहा था और उसने यहां आने पर मुझे अपने आधार कार्ड की प्रति और अपने नियोक्ता का एक प्रमाणपत्र दिया था।’

पाकिस्तान में चैटिंग, कंप्यूटर में संदिग्ध चीजें और…

पाकिस्तान में चैटिंग, कंप्यूटर में संदिग्ध चीजें और...
यूपी एटीएस के आईजी असीम अरुण ने बताया, ‘उसके निजी कंप्यूटर में कई संदिग्ध चीजें मिली हैं। हमें उसके खिलाफ सबूत मिला है कि वह फेसबुक पर पाकिस्तान से जुड़ी कुछ आईडी के संपर्क में है।’
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यूएन के महासचिव ने किया नरेंद्र मोदी को चैंपियंस ऑफ अर्थ अवॉर्ड से सम्मानित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को एक विशेष समारोह में संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण अवॉर्ड चैंपियंस ऑफ अर्थ से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री को यह अवॉर्ड यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दिया। इस मौके पर मोदी ने कहा, ‘मैं इस सम्मान के लिए संयुक्त राष्ट्र का आभारी हूं। यह सम्मान भारत के सवा सौ करोड़ लोगों की प्रतिबद्धता का फल है। चैंपियन अर्थ अवॉर्ड भारत के जंगलों में बसे आदिवासियों का सम्मान है, जो अपने जीवन से ज्यादा जंगल से प्यार करते हैं।’

ये देश के किसानों और महिलाओं का सम्मान :प्रधानमंत्री ने कहा- ‘यह देश के किसानों और महिलाओं का सम्मान है। महिलाएं पौधों में भी भगवान देखती हैं, वे पत्तियां भी गिनकर तोड़ती हैं। मैं इस सम्मान के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूं। भारत के लिए यह दोहरे सम्मान का मौका है। कोच्चि एयरपोर्ट को ऊर्जा क्षेत्र में सम्मान मिला है। पर्यावरण और प्रकृति का सीधा रिश्ता कल्चर से है। पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदना को विश्व स्वीकार कर रहा है। हम उस समाज का हिस्सा हैं, जहां सुबह उठने से पहले धरती पर पांव रखने से पहले क्षमा मांगी जाती है। क्योंकि हम उस पर वजन डालने वाले हैं।’

भारतीयों के लिए प्रकृति ही सर्वोपरि है : उन्होंने कहा, ‘हमारे व्रत और त्योहारों में प्रकृति का जुड़ाव है। हमारे यहां प्रकृति को सर्वोपरि माना गया है। यजुर्वेद से लिए शांतिपाठ में वातावरण में शांति की प्रार्थना की गई है। यूएन ने जो सम्मान दिया, वह लोगों की आस्था का सम्मान है। देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। हर साल लाखों लोग गरीबी से बाहर आ रहे हैं। आबादी के एक हिस्से को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते हैं। सूखे की वजह से सीमित संसाधन वाले गरीब परेशान हो रहे हैं। आज प्रकृति पर अतिरिक्त दवाब डाले बगैर विकास की जरूरत है।’

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अमेजन एक ट्रिलियन डॉलर मार्केट कैप वाली दूसरी अमेरिकी कंपनी

amazon head quarter

अमेजन 1 ट्रिलियन डॉलर (71 लाख करोड़ रुपए) मार्केट कैप वाली अमेरिका की दूसरी और दुनिया की तीसरी कंपनी बन गई। इसका शेयर मंगलवार को 2% तेजी के साथ 2050.50 डॉलर पर पहुंच गया। इस बढ़त से मार्केट वैल्यू में इजाफा हुआ।

amazon jeff bezos

एपल दो अगस्त को 1 ट्रिलियन डॉलर की पहली अमेरिकी कंपनी बनी थी। अमेजन का मार्केट कैप एपल से 9900 करोड़ डॉलर कम है। एपल से पहले 2007 में शंघाई के शेयर बाजार में पेट्रोचाइना का मार्केट वैल्यूएशन 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े पर पहुंचा था।

दुनिया की टॉप-3 मार्केट कैप वाली कंपनियां

कंपनी मार्केट कैप (डॉलर)
एपल 1099 अरब
अमेजन 1000 अरब
माइक्रोसॉफ्ट 856 अरब

एक साल में शेयर 100% से ज्यादा चढ़ा: पिछले 12 महीने में अमेजन के शेयर ने 108% रिटर्न दिया। इस साल जनवरी से अब तक इसमें 74% तेजी आई। पिछले तीन महीने में निवेशकों को 20% और एक महीने में करीब 12% मुनाफा दिया।

21 साल में शेयर प्राइस बढ़कर 114 गुना: 15 मई 1997 को 18 डॉलर पर अमेजन के शेयर की लिस्टिंग हुई। मंगलवार की तेजी के बाद शेयर 2050 के ऊपर चला गया। आईपीओ में 1000 डॉलर के निवेश की वैल्यू अब 13 लाख 41 हजार डॉलर से भी ज्यादा हो गई।

तारीख शेयर प्राइस
15 मई 1997 18 डॉलर
23 अक्टूबर 2009 100 डॉलर
27 अक्टूबर 2017 1000 डॉलर
30 अगस्त 2018 2000 डॉलर

जेफ बेजोस दुनिया में सबसे अमीर: अमेजन के फाउंडर और सीईओ लंबे समय से दुनिया के अमीरों की लिस्ट में टॉप पर बने हुए हैं। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स में 166 अरब डॉलर नेटवर्थ के साथ बेजोस नंबर-1 हैं। शेयर में तेजी से इस साल उनकी दौलत में 66.5 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। बिलेनियर इंडेक्स में 98.1 अरब डॉलर नेटवर्थ के साथ बिल गेट्स दूसरे नंबर पर हैं। एशिया के सबसे अमीर मुकेश अंबानी 47.7 अरब डॉलर के साथ 12वें नंबर पर हैं।

 

अमेजन का सफर

1994 किताब बेचने से शुरुआत
मई 1997 अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टिंग
जून 1998 आईएमडीबी का अधिग्रहण

ऑनलाइन म्यूजिक स्टोर की शुरुआत

दिसंबर 2000 कैमरा, फोटो स्टोर शुरू किया

अमेजन मार्केटप्लेस लॉन्च

फरवरी 2005 अमेजन प्राइम लॉन्च
नवंबर 2007 अमेजन किंडल, अमेजन म्यूजिक शुरू
सितंबर 2011 किंडल फायर, किंडल टच, किंडल टच 3जी बाजार में उतारे
दिसंबर 2016 अमेजन वीडियो लॉन्च

ड्रोन सर्विस प्राइम एयर से पहली डिलीवरी

अगस्त 2017 13 अरब डॉलर में होल फूड्स का अधिग्रहण
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ISIS चीफ बगदादी ने राहुल गांधी को शुक्रिया कहा। चाहता है राहुल से सहयोग। जानिए पूरा मामला!

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जर्मनी के हैम्बर्ग में अपने भाषण के दौरान इराक में बेरोजगारी को खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस के गठन की वजह बतलाया। उन्होंने इराक का उदाहरण देते हुए भारत सरकार की नीतियों पर भी निशाना साधा।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ‘भारत सरकार की मौजूदा नीति में विकास की प्रक्रिया से आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को बाहर रखा जा रहा है, जिसके खतरनाक परिणाम होंगे।’ हैम्बर्ग में 23 देशों के प्रतिनिधियों के सामने कई विषयों पर अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने आगे कहा कि ’21वीं सदी में लोगों को बाहर रखना काफी खतरनाक है। अगर आप 21वीं सदी में लोगों को कोई विजन नहीं देते तो कोई और देगा और विकास प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों को बाहर रखना असली खतरा है।’

बुधवार को अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने यहां जीएसटी, नोटबंदी समेत कई मुद्दों पर चर्चा की थी। लेकिन अब सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के बयान को लेकर मजाक उड़ाया जा रहा है। कई तरह के फनी मीम्स भी इसे लेकर शेयर किये जा रहे हैं। एक यूजर ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि ‘आईएस चीफ अबु बकर अल बगदादी ने राहुल गांधी को धन्यवाद देते हुए उनसे कहा है कि वो सभी आईएसआईएस सदस्यों को अमेठी में रोजगार उपलब्ध कराएं।’

बहरहाल आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष के इस भाषण के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में जिस प्रकार से आतंकवाद को सही ठहराने का प्रयास किया और आईएसआईएस के बारे में जो जस्टिफिकेशन दिया है उससे भयावह और चिंताजनक कुछ नहीं हो सकता है।

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अमेरिकी संसद ने बदला कानून, भारत के लिए रूस से हथियार खरीदने का रास्ता साफ

अमेरिकी संसद ने राष्ट्रीय रक्षा विधेयक, 2019 पारित कर सीएएटीएस कानून के तहत भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगने की आशंका को खत्म करने का रास्ता निकाल लिया है. प्रतिबंधों के जरिए अमेरिका के विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई कानून (सीएएटीएसए) के तहत उन देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाते हैं जो रूस से महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की खरीद करते हैं.

अमेरिकी कांग्रेस के सीनेट ने 2019 वित्त वर्ष के लिए जॉन एस मैक्केन नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट (एनटीएए) (रक्षा विधेयक) 10 मतों के मुकाबले 87 मतों से पारित कर दिया गया. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में यह विधेयक पिछले सप्ताह ही पारित हो चुका है. अब यह कानून बनने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के वास्ते व्हाइट हाउस जाएगा. इस विधेयक में CAATSA के प्रावधान 231 को समाप्त करने की बात कही गई है.

व्हाइट हाउस में राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य रहे जोसुआ व्हाइट ने बताया कि सीएएटीएसए के नये संशोधित प्रावधानों को कानूनी रूप मिलने के बाद भारत के लिए रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदना आसान हो जाएगा.

हालांकि, उनका कहना है कि कानून की भाषा बेहद कठोर लग रही है, लेकिन रूस से रक्षा खरीद करने वाले देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाले प्रावधानों का बेहद नरम कर दिया गया है.

रक्षा विधेयक में एक प्रावधान किया गया है जिसके तहत अमेरिका और अमेरिकी रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण साझेदार को राष्ट्रपति एक प्रमाणपत्र जारी कर सीएएटीएसए के तहत प्रतिबंधों से छूट दे सकता है.

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अमरीकी चुनाव में कथित रूसी दख़ल पर दिए बयान से पलटे ट्रंप

उन्होंने कहा कि सोमवार को दिए उनके बयान का मतलब था कि उन्हें रूस द्वारा हस्तक्षेप ना करने का कोई कारण नज़र नहीं आता.

क्या कहा था ट्रंप ने

ये विवाद शुरू हुआ जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनल्ड ट्रंप मुलाक़ात के बाद मीडिया से मुख़ातिब हुए थे.

एक पत्रकार के सवाल पर ट्रंप ने जो जवाब दिया, वो अमरीकी एजेंसियों के दावे के विपरीत था.

ट्रंप-पुतिनइमेज कॉपीरइटAFP

व्हाइट हाउस से जो इस न्यूज़ कॉन्फ़्रेंस का ट्रांसक्रिप्ट जारी हुआ है, नीचे उसका हिस्सा पढ़ा जा सकता है.

रिपोर्टर : राष्ट्रपति पुतिन ने 2016 राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप के आरोप को ख़ारिज किया है लेकिन अमरीका की ख़ुफिसा एजेंसियों का कहना है कि रूस ने हस्तक्षेप किया है. मेरा आपसे सवाल है कि आप क्या मानते हैं?

ट्रंप : हमारे लोग मेरे पास आए, उन्होंने कहा कि उन्हें रूस का हाथ लगता है. मेरे साथ राष्ट्रपति पुतिन हैं, उन्होंने अभी कहा कि रूस का हाथ नहीं है. मैं कहूंगा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा.

अब क्या कह रहे हैं ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कॉन्फ़्रेंस की ट्रांसक्रिप्ट पढ़ी तो लगा कि उन्हें सफ़ाई देनी चाहिए.

उनका कहना है कि एक वाक्य में उन्होंने ‘क्यों नहीं किया होगा’ के बजाय ‘क्यों किया होगा’ कह दिया.

ट्रंप-हिलेरी

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वो अपनी खुफ़िया एजेंसियों के दावे पर यक़ीन करते हैं कि 2016 राष्ट्रपति चुनावों में रूस ने दख़ल दिया था.

ट्रंप ने कहा कि इस दख़ल का चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ा था.

ट्रंप के बयान पर ऐसी हुई प्रतिक्रिया

वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर और सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज़ कमेटी के सदस्य लिंडसे ग्राहम ने कहा था कि ट्रंप ने रूस को अमरीका के ‘कमज़ोर’ होने का संकेत दिया है.

उन्होंने ट्वीट किया था, “ट्रंप ने 2016 के हस्तक्षेप के लिए रूस को जवाबदेह बनाने और आने वाले चुनावों को लेकर सख्त चेतावनी देने का मौक़ा गंवाया है.”

उनके सहयोगी रिपल्बिकन सीनेटर जेफ़ फ्लेक ने कहा था कि ट्रंप ने ‘शर्मनाक’ शब्द इस्तेमाल किए हैं.

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हेलसिंकी में आज पुतिन से मिलेंगे ट्रंप, ट्रेड वॉर समेत कई अहम मुद्दों पर बात सम्भव

सोमवार को फिनलैंड की राजधानी में ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने वाले हैं। यह इन दोनों नेताओं की पहली बैठक होगी।

बैठक के लिए ट्रंप हेलसिंकी पहुंच चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल के आरोपों के मद्देनजर हर कोई जानना चाह रहा है कि दोनों नेताओं में क्या बातचीत होती है?

यूरोप आने से पहले जब ट्रंप ने कहा था कि उनकी यात्रा का सबसे आसान हिस्सा हेलसिंकी प्रवास रहेगा, तो कई लोगों की भवें तन गई थीं। ब्रसेल्स और लंदन प्रवास के दौरान अब तक ट्रंप की यात्रा विवादों में रही है। इस बीच, अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल का मामला फिर गरमा गया है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव जीतने में पुतिन ने ट्रंप की गुप्त रूप से मदद की थी। ऐसे में इसकी उम्मीद कम ही है कि बैठक में यह अकेला मुद्दा हावी रहेगा।

रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि वाशिंगटन और मॉस्को का द्विपक्षीय संबंध बेहद खराब है। हमें एक नई शुरुआत करनी होगी। हालांकि, हम ट्रंप को बातचीत के योग्य साझीदार मानते हैं।

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रूस के साथ दो लाख करोड़ के लड़ाकू विमान समझौते से अलग हो सकता है भारत। जानें क्या है कारण

मालूम हो कि सैन्य संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के मकसद से भारत और रूस के बीच 2007 में लड़ाकू विमानों को संयुक्त रूप से तैयार करने का अंतर-सरकारी करार हुआ था।

लेकिन लागत साझा करने, इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक और तैयार किए जाने वाले विमानों की संख्या के मसले पर गंभीर मतभेदों के कारण पिछले 11 साल से यह परियोजना अटकी हुई है। परियोजना पर बातचीत में शामिल एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, ‘हमने परियोजना की लागत समेत तमाम मसलों पर अपनी राय रख दी है। लेकिन रूसी पक्ष की ओर से अब तक कोई प्रतिबद्धता व्यक्त नहीं की गई है।’

बता दें कि भारत ने लड़ाकू विमान के प्रारंभिक डिजायन के लिए दिसंबर, 2010 में 29.5 करोड़ डॉलर देने पर सहमति व्यक्त की थी। बाद में दोनों पक्षों ने अंतिम डिजाइन और पहले चरण में विमान के उत्पादन के लिए छह-छह अरब डॉलर का योगदान देने पर सहमति जताई, लेकिन इस पर कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका।

कहां फंसा है पेंच

भारत चाहता है कि विमान में इस्तेमाल होने वाली तकनीक पर दोनों देशों का समान अधिकार हो, लेकिन रूस विमान में इस्तेमाल की जाने वाली सभी अहम तकनीकों को भारत के साथ साझा करने के लिए तैयार नहीं है। वार्ता के दौरान भारत ने जोर देकर कहा कि उसे सभी जरूरी कोड और अहम तकनीक उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वह अपनी जरूरतों के हिसाब से विमान को अपग्रेड कर सके। फरवरी, 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर की सहमति से परियोजना पर वार्ता फिर शुरू हुई थी। दोनों देश गतिरोध वाले मसलों का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत परियोजना की बेहद ऊंची लागत की वजह से इसके फलदायी होने के प्रति आशान्वित नहीं है।

एचएएल कर रही पैरवी, वायुसेना की रुचि नहीं

दिलचस्प बात यह है कि सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) इस परियोजना की जोरदार पैरवी कर रही है। उसका मानना है कि इस परियोजना के जरिये भारत को अपने एरोस्पेस सेक्टर को बढ़ावा देने का सुनहरा मौका मिलेगा क्योंकि किसी अन्य देश ने भारत को आज तक ऐसी अहम तकनीक का प्रस्ताव नहीं दिया है। वहीं, दूसरी ओर ऊंची लागत की वजह से भारतीय वायुसेना ने इस परियोजना में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

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यहां हुई है बादल और बर्फ की चोरी, इस देश पर लगा है आरोप

ईरान में हो रहे जलवायु परिवर्तन को देखते हुए इजरायल संदेह के घेरे में है। अन्‍य देशों के साथ इजरायल की कोशिश है कि ईरान में बारिश न हो। लेकिन ईरानी मौसम विभाग प्रमुख अहद वजीफे इससे सहमत नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि इस तरह के सवाल और आरोपों से समाधान नहीं मिलने वाला है हम अपने इस संकट का सही समाधान करने में जुटे हैं।

अहमदीनेजाद ने भी लगाया था ऐसा आरोप
जलाली ने कहा कि अफगानिस्तान और भूमध्य सागर के बीच का 2200 मीटर का पहाड़ी हिस्सा बर्फ से ढका होता है, लेकिन ऐसा ईरान में नहीं है। हालांकि यह पहला मामला नहीं है कि जब ईरान में किसी अफसर ने अन्य देश पर बारिश चोरी का आरोप लगाया हो। इसके पहले भी 2011 में पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा था कि पश्चिमी देशों के चलते ईरान में सूखा पड़ा हुआ है। यूरोपीय देश एक खास तरह के उपकरण का इस्तेमाल करके बादलों को कैद कर लेते हैं।

ईरान के मौसम विभाग के प्रमुख अहद वजीफे ने इससे स्‍पष्‍ट तौर से इन्कार करते हुए कहा है कि बादल या बर्फ की चोरी नहीं की जा सकती। ईरान लंबे वक्त से सूखे से जूझ रहा है। यह एक वैश्विक समस्या है न कि केवल ईरान की।

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वर्ल्‍ड ट्रेड वार में भारत ने भी दिया अमेरिका को उसकी ही भाषा में जवाब

गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिकी कारोबार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) रॉबर्ट लाइटहाइजर के कार्यालय ने भारत सरकार द्वारा वस्तुओं के निर्यात को लेकर चलाई जाने वाली योजनाओं तथा निर्यात से जुड़ी इकाइयों की योजनाओं व अन्य ऐसी योजनाओं को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत के खिलाफ कारोबारी विवाद आपत्तियों के निपटारे हेतु कठोर आवेदन प्रस्तुत किया था। अमेरिका की इन आपत्तियों पर भारत सरकार ने दलील दी कि उसके द्वारा दी जा रही विभिन्न राहत और सुविधाएं डब्ल्यूटीओ के नियमों के तहत ही हैं। लेकिन अमेरिका अनुचित और अन्यायपूर्ण ढंग से भारत पर व्यापार प्रतिबंध बढ़ाते हुए दिखाई दे रहा है। ऐसे में भारत ने विगत 18 मई को डब्ल्यूटीओ को अमेरिका से आयातित 30 उत्पादों की सूची सौंपी थी, जिन पर वह आयात शुल्क बढ़ाना चाहता था। अब भारत ने इनमें से 29 वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है।

वर्ल्‍ड ट्रेड वॉर
इससे यही लगता है कि बीते कुछ दिनों से वर्ल्‍ड ट्रेड वॉर यानी वैश्विक व्यापार युद्ध को लेकर जो आशंका जताई जा रही थी, वह सही साबित होने लगी है। यह सही है कि अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कोई सात दशक तक वैश्विक व्यापार, पूंजी प्रवाह और कुशल श्रमिकों के लिए न्यायसंगत आर्थिक व्यवस्था के निर्माण और पोषण में उल्लेखनीय योगदान दिया है, लेकिन अब वही वैश्विक व्यवस्था मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कदमों से जोखिम में है। इस साल अमेरिका ने चीन, मैक्सिको, कनाडा, ब्राजील, अर्जेटीना, जापान, दक्षिण कोरिया व यूरोपीय संघ के विभिन्न देशों के साथ-साथ भारत की कई वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाए हैं। जैसे-जैसे अमेरिका विभिन्न देशों के आयातों पर शुल्क बढ़ा रहा है, जवाब में वे देश भी वैसा ही कर रहे हैं। इसका दुष्प्रभाव भी भारत के वैश्विक कारोबार पर पड़ रहा है। गौरतलब है कि 19 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के 200 अरब डॉलर के आयात पर 10 फीसद शुल्क लगाने की चेतावना दी।

चीन ने लगाया शुल्‍क
इसके चार दिन पूर्व ही ट्रंप ने चीन से 50 अरब डॉलर मूल्य के सामान के आयात पर 25 फीसद शुल्क लगाने को मंजूरी दे दी। इसके बाद चीन ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह भी 50 अरब डॉलर मूल्य की अमेरिकी वस्तुओं पर 25 फीसद शुल्क लगाएगा। इससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वॉर की आशंका बढ़ गई। उल्लेखनीय है कि इसी माह कनाडा के क्यूबेक सिटी में आयोजित जी-7 देशों का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों और नीतियों की वजह से तमाशा बनकर रह गया। जी-7 के सदस्य देश कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान, फ्रांस तथा ब्रिटेन जहां पहले ही ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी को लेकर नाखुश थे, वहीं जी-7 सम्मेलन के तुरंत बाद अमेरिका ने इस समूह के विभिन्न देशों से होने वाले कुछ आयातों पर नए व्यापारिक प्रतिबंध घोषित करते हुए ग्लोबल ट्रेड वॉर की आशंका को और गहरा दिया।

डब्ल्यूटीओ की भूमिका
इस संदर्भ में डब्ल्यूटीओ की भूमिका अहम हो जाती है। डब्ल्यूटीओ एक ऐसा संगठन है, जो सदस्य देशों के बीच व्यापार तथा वाणिज्य को सहज-सुगम बनाने का उद्देश्य रखता है। यद्यपि डब्ल्यूटीओ एक जनवरी, 1995 से प्रभावी हुआ, परंतु वास्तव में यह 1947 में स्थापित एक बहुपक्षीय व्यापारिक व्यवस्था प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (गैट) के नए एवं बहुआयामी रूप में अस्तित्व में आया। जहां गैट वार्ता वस्तुओं के व्यापार एवं बाजारों में पहुंच के लिए प्रशुल्क संबंधी कटौतियों तक सीमित रही थीं, वहीं इससे आगे बढ़कर डब्ल्यूटीओ का लक्ष्य वैश्विक व्यापारिक नियमों को अधिक कारगर बनाने के प्रयास के साथ-साथ सेवाओं एवं कृषि में व्यापार संबंधी वार्ता को व्यापक बनाने का रहा है। किंतु वैश्विक व्यापार को सरल और न्यायसंगत बनाने के 71 वर्ष बाद तथा डब्ल्यूटीओ के कार्यशील होने के 23 वर्ष बाद भारत सहित विकासशील देशों के करोड़ों लोग यह अनुभव कर रहे हैं कि डब्ल्यूटीओ के तहत विकासशील देशों का शोषण हो रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों की राय
ऐसे में दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञ यही आशंका जता रहे हैं कि अमेरिका के संरक्षणवादी रवैये से वैश्विक व्यापार युद्ध की शुरुआत हो गई है। लिहाजा इस बारे में गंभीरतापूर्वक विचार करना जरूरी है कि यदि विश्व व्यापार व्यवस्था वैसे काम नहीं करती, जैसे उसे करना चाहिए तो डब्ल्यूटीओ ही एक ऐसा संगठन है, जो इसे दुरुस्त कर सकता है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो दुनियाभर में घातक व्यापार लड़ाइयां 21वीं सदी की हकीकत बन जाएंगी। बेहतर यही होगा कि विभिन्न देश एक-दूसरे को व्यापारिक हानि पहुंचाने की होड़ में उलझने के बजाय डब्ल्यूटीओ के मंच से ही आसन्न ग्लोबल ट्रेड वॉर के नकारात्मक प्रभावों का उपयुक्त हल निकालें। यद्यपि भारत ने कुछ अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है, लेकिन अब बेहतर यही होगा कि वह इस मामले में धैर्य का परिचय दे और अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक हितों के व्यापक पहलुओं पर गौर करे।

सबसे बड़ा निर्यातक बाजार
यह इसलिए भी जरूरी है कि जहां भारत के लिए अमेरिका दुनिया का सबसे पहले क्रम का निर्यातक बाजार है, वहीं अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी है। पिछले वित्त-वर्ष में भारत ने अमेरिका को 47.9 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात किया था। हम उम्मीद करें कि भारत सरकार और भारतीय उद्यमी निर्यात की नई उभरती चुनौतियों के बीच विभिन्न देशों में विभिन्न वस्तुओं के निर्यात के नए मौके ढूंढने की डगर पर आगे बढ़ेंगे। खासकर चीन व अन्य देशों में अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ने के कारण अमेरिका से आयातित सोयाबीन, तंबाकू, फल, गेहूं, मक्का तथा रसायन जैसी जो कई चीजें महंगी हो गई हैं, वहां के बाजारों में ये भारतीय उत्पाद सस्ते होने के कारण सरलता से अपनी पैठ बना सकते हैं। ग्लोबल ट्रेड वॉर की स्थिति के चलते हमारे निर्यात, निवेश व आर्थिक विकास दर घटने की जो आशंकाएं बढ़ गई हैं, उनसे निपटने हेतु सरकार को पुख्ता रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।