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मिल्क शेक स्टार्टअप ने हासिल किया 2 साल में 40 करोड़ का रेवेन्यू। जानें कैसे!

2 साल पहले कोरामंगलम में पहला फ्रोजेन बोटल स्टोर खोलने वाले प्रांशुल यादव और अरुण सुवर्णा ने अपनी कड़ी मेहनत और बेमिसाल बिज़नेस प्लानिंग से अब 100 आउटलेट्स खोलने का कारनामा कर लिया है।

Frozen bottle cofounders

प्रांशुल ने इससे पहले क्रीम स्टोन के कई स्टोर्स बैंगलोर में खोले थे जिससे उनका इस क्षेत्र में अनुभव और बढ़ गया। दोनों ने मिलके 36 लाख रुपए से इस बिज़नेस को बूटस्ट्रैप किया और सफलता की नई मिसाल कायम की।

Frozen bottle outlet

2017 में अपने पहले साल में बैंगलोर में 10 स्टोर्स खोलना इनकी एक बड़ी कामयाबी रही। इस साल के अंत मे फ्रोज़न बोटल ने 18 लाख रुपए में 8% सेल्स प्रति माह रॉयल्टी फीस के साथ अपनी फ्रेंचाइजी देनी शुरू करी जिससे अब मौजूदा समय मे इनके 40 कंपनी आउटलेट्स मिलाकर कुल 100 से ज्यादा स्टोर्स चल रहे हैं।

Frozen bottle products

फ्रोज़न बोटल बैंगलोर, मुंबई, चेन्नई, दिल्ली, पुणे, सूरत, मनिपाल, कोच्चि और कोयम्बटूर जैसे कुल 18 शहरों में स्टोर्स खोल चुकी है। कंपनी का प्लान 140 नए स्टोर्स खोलने का है जिसके लिए 5 करोड़ का निवेश यह अपनी कमाई में से ही कर रहे हैं। फ्रेंचाइजी मॉडल की कामयाबी से इस कंपनी को कभी एक्सटर्नल फंडिंग की भी जरूरत नही पड़ी और अपनी शर्तों पर खुद मेहनत करके कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंचना सभी के लिए एक बेहद प्रेरणा दायक उदाहरण है।

यदि आपके पास भी कोई बिज़नेस आईडिया है तो यह लेख जरूर पढ़ें Starting Up Funding

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यूं ही नहीं भारत की टेस्ला कहलाती है एथर एनर्जी। मई में मिली है 51 मिलियन डॉलर की फंडिंग!

Tarun mehta and swapnil jain ather 450

एथर एनर्जी को CEO तरुण मेहता और CTO स्वप्निल जैन ने 2013 में हाई परफॉर्मेंस इलेक्ट्रिक टू व्हीलर बनाने के उद्देश्य से शुरू किया। ये दोनों ही आई आई टी मद्रास से इंजीनियरिंग के छात्र रहे हैं। टेक्नोलॉजी डेवलोपमेन्ट बोर्ड अंडर डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, आई आई टी मद्रास ने 2014 में इनसे प्रभावित होकर 65000 डॉलर की बूटस्ट्रेप फंडिंग दी। इसके बाद 2014 में ही इनको फ्लिपकार्ट के सचिन और बिन्नी बंसल से 1 मिलियन डॉलर की सीड इन्वेस्टमेंट मिली।

मई 2015 में टाइगर ग्लोबल ने एथर एनर्जी को 12 मिलियन डॉलर की सीरीज A फंडिंग दी। 23 फरवरी 2016 को एथर एनर्जी ने अपना पहला स्मार्ट स्कूटर 75 किमी/घण्टा की तेजी से चलने वाला और टच स्क्रीन कंट्रोल डिस्प्ले वाला S340 टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस सर्ज, बैंगलोर में प्रदर्शित किया।

Ather S340 unveiled

इसके बाद ऑक्टोबर 2016 में हीरो मोटोकॉर्प ने एथर एनर्जी को 30 मिलियन डॉलर अर्थात 205 करोड़ रुपए की सीरीज B फंडिंग प्रदान की और बदले में कम्पनी के 32.31 % शेयर लिए।

2018 में बैंगलोर के व्हाइट फील्ड में मैनुफैक्चरिंग यूनिट लगाकर एथर 450 और S340 के 600 वेहिकल्स प्रति सप्ताह की दर से उत्पादन शुरू किया। इसके कुछ माह बाद हीरो मोटोकॉर्प ने कुछ और हिस्सेदारी लेने के लिए 19 मिलियन डॉलर की सीरीज C फंडिंग दी।

Electric smart scooter Ather 450 s340 view image

मई 2019 तक कम्पनी के बैंगलोर में 31 और चेन्नई में 7 फ़ास्ट चार्जिंग पॉइंट लगाए हैं जिनको कम्पनी द्वारा ऑटो ग्रिड का नाम दिया गया है जो कि बैटरी को 1 घण्टे में 90% चार्ज कर सकता है। इसी माह कम्पनी को 51 मिलियन डॉलर की सीरीज D फंडिंग मिली जिसमें सचिन बंसल ने 32 मिलियन डॉलर और हीरो मोटोकॉर्प ने 19 मिलियन डॉलर का निवेश किया।

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स्टार्टअप बिज़नेस के लिए फंडिंग पाने के सभी उपाय

किसी भी बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है। आज के दौर के स्टार्टअप युग में बहुत ऐसी संस्थाएं है, जो कि बेहतर आईडिए को रूप देने में मदद करती हैं। यदि आप के पास एक आइडिया है जो कि आपके आसपास के समाज को प्रभावित करने और किसी समस्या को सुलझाने का कार्य करता है, तो आपको यह लेख जरूर पड़ना चाहिए!

Adto startup funding

अनेकों बिज़नेस पूंजी के अभाव में या तो आईडिया स्टेज तक ही सिमट के रह जाते हैं या कुछ चरण बाद पूंजी न मिलने से बंद हो जाते हैं। आप अपने स्टार्टअप बिज़नेस के लिए मुख्यतः 3 तरीकों से फंडिंग का प्रबंध कर सकते हैं।

1. सरकारी या गैर सरकारी अनुदान(ग्रांट)-

यदि आपका बिज़नेस उन विशेष क्षेत्रों में से है जिन पर अनुदान मिलता है, तो आप भी अनुदान पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। परंतु यह अनुदान मात्र बिज़नेस को लांच और थोड़े संचालन मात्र का ही फंड्स प्रदान कर पाते हैं।

2. बिज़नेस लोन- बैंकों या वित्तीय संस्थाओं से आप बिज़नेस लोन पा सकते हैं जो कि ब्याज सहित तय समय सीमा के भीतर वापिस करना पड़ता है भले ही आपका बिज़नेस चले या न चले।

Adto startup funding

3. इक्विटी फंडिंग- फंडिंग के इस तरीके में आपको इन्वेस्ट करने वाले से पूंजी मिल जाती है और बदले में इन्वेस्टर को आपकी कंपनी के इक्विटी शेयर का कुछ हिस्सा मिलता है। इस दशा में कंपनी को लाभ यह होता है की आपकी कंपनी में इन्वेस्ट करने वाला उसका भागीदार बन जाता है और कंपनी के हित के लिए कार्य करता है। इक्विटी फंडिंग में इन्वेस्टर नफा और नुकसान दोनों में भागीदार होता है। आइए जानते हैं इक्विटी फंडिंग के मुख्य चरण जिनसे स्टार्टअप बिज़नेस को गुजर कर शेयर मॉर्केट तक का सफ़र तय करना होता है!

Adto startup funding stages

1. सेल्फ फंडिंग या बूटस्ट्रैपिंग या सीड इन्वेस्टमेंट– आईडिया स्टेज से बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए आपको फंड्स का प्रबंध स्वतः करना पड़ता है। चाहे आप अपनी जमा पूंजी लगाएं या अपने परिवार या मित्रों से पूंजी का अनुरोध करें। बाहरी पूंजी के बदले में आप अपने बिज़नेस का 5% से 10% तक हिस्सा पूंजी देने वाले को प्रदान कर सकते हैं जो कि आपके आपसी संबंधों पर भी निर्भर करता है। बिज़नेस आईडिए के लिए अपनी कमर कसना या फीते बांधना इस चरण का मुख्य उद्देश्य है जिससे कि आप तेजी से आगे के चरण पार करते जाएं। इस चरण को सीड इन्वेस्टमेंट भी कहते हैं जो कि आपके बिज़नेस आईडिया का बीज स्टार्टअप मार्केट में उगाने का कार्य करता है। यह सीड इन्वेस्टमेंट के लिए बहुत सी संस्थाएं भी कार्यरत हैं परंतु वे आपसे 20% या अधिक की भागीदारी की अपेक्षा रखती हैं जो कि बिज़नेस के आने वाले चरणों के लिए हितकारी नहीं होगा।

2. एंजेल इन्वेस्टमेंट- इस चरण को आसानी से समझा जा सकता है, जैसे कोई फरिश्ता आपके सपनों को सच करने में आपके साथ हो और जो कि आप से ज्यादा परिपक्व तथा अनुभवी हो, साथ ही आपके आईडिया में रूचि रखता हो, आपका भागीदार बन सकता है। इस चरण को एंजेल नाम इसीलिए दिया गया है क्योंकि इस बड़े स्टार्टअप मार्केट में यह एंजेल आपको बिज़नेस की बारीकियों से परिचित कराएगा और एक अच्छी पूंजी आपके बिजनेस में लगाएगा। यह एंजेल आपके स्टार्टअप को आगे ले जाने में आपका पूरा सहयोग देगा और बदले में इक्विटी शेयर में 15% से 25% तक हिस्सेदारी की आशा करेगा। यह आपका निर्णय है कि आपको कितनी पूंजी की आवश्यकता है और आप कितनी हिस्सेदारी तक देने की इच्छा रखते हैं। एंजेल इन्वेस्टर या तो किसी कंपनी के डायरेक्टर होते हैं या खुद एक समूह होते हैं। आपकी कंपनी में इन्वेस्ट करके यह डायरेक्टर बन कर कंपनी के हितों के लिए कार्य करते हैं। इस प्रक्रिया में 50,000 डॉलर से 1 मिलियन डॉलर तक का इन्वेस्टमेंट आप हासिल कर सकते हैं जो की आपके बिज़नेस आईडिया और उसकी मार्केट संभावनाओं पर निर्भर करता है। एंजेल इन्वेस्टमेंट पाने के लिए आप एंजेल इन्वेस्टर्स को या एंजेल नेटवर्क्स को सर्च कर सकते हैं और उनको अपना बिज़नेस मॉडल प्रदर्शित कर सकते हैं।

3. वेंचर कैपिटल सीरीज A- इस चरण तक आपकी कंपनी ने प्रोडक्ट डेवलपमेंट और सेलिंग का काम शुरू कर दिया है। अब आपको इस बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए और इसका स्तर बढ़ाने के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है। इसके लिए वेंचर कैपिटल कंपनियों को अपना आवेदन और बिज़नेस मॉडल प्रदर्शित कर सकते हैं। यह कंपनियां 1 मिलियन डॉलर से 10 मिलियन डॉलर तक का निवेश इस चरण में करती हैं और 15% से 30% तक हिस्सेदारी की आशा रखती हैं।

Adto startup funding timeline stages

4. वेंचर कैपिटल सीरीज B- फंडिंग के इस चरण तक आपकी कम्पनी एक बड़े स्तर की कंपनी बन चुकी है और इसका मूल्यांकन एंजेल राउंड से 50 गुना से ज्यादा तथा सीरीज A राउंड से 5 से 10 गुना तक हो जाता है। इस फंडिंग राउंड में आप VC कम्पनियों को अपना आगे का बिज़नेस मॉडल प्रदर्शित करते हैं तथा इस चरण में 10 मिलियन डॉलर से 100 मिलियन डॉलर तक का निवेश 5% से 15% इक्विटी शेयर के बदले में हासिल कर सकते हैं। इसके लिए सीरीज A वाली कंपनी भी दोबारा निवेश कर सकती है या अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेच सकती है।

कुछ कंपनियां VC सीरीज C, D … इत्यादि राउंड की फंडिंग के लिए आवेदन करती हैं तथा अधिकतर कंपनियां VC सीरीज B राउंड के बाद ही आईपीओ लॉन्च कर देती हैं।

5. IPO Launch- Securities and Exchange Bureau of India, सेबी ने ग्रोथ स्टेज बिज़नेस के लिए Institutional Trading Platform, ITP के तहत कुछ नियम बनाए थे जिन्हें मोदी सरकार ने नीतियों में परिवर्तन करके स्टार्टअप्स के लिए Innovators Growth Platform, IGP नाम से नया मॉडल पेश किया जिससे कि स्टार्टअप्स के लिए अपनी कंपनी का Initial Public Offerings, IPO लांच कर शेयर मार्केट में प्रवेश करना आसान हो गया है। मोदी सरकार ने स्टार्टअप्स की मूल भावना को पहचाना और बड़ी बड़ी VC और Private Equity, PE कम्पनियों के पास न जाकर सीधे शेयर मार्केट में कदम रखने को आसान बना दिया। आइए जानते हैं क्या बदलाव हुए हैं IPO लांच की नीति में,

New IGP rules for IPO Launch Stock Market
Image Credit: Yourstory

आसान शब्दों में कहें तो यदि आपकी कंपनी टेक्नोलॉजी, आई पी, डेटा एनालिटिक्स, बायोटेक या नैनोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र से है और आपने 25% या ज्यादा की हिस्सेदारी इन्वेस्टर्स को 2 साल या अधिक समय से दी हुई है तो आप अपनी कंपनी का 25% इक्विटी स्टॉक IGP के तहत शेयर मार्केट में बेचने के लिए आवेदन कर सकते हैं जिसे 6 माह के लिए प्री-इश्यू स्टेज में 2 लाख की प्रारंभिक लॉट लिमिट और 50 आवेदकों की प्रारंभिक सीमा के साथ लॉक किया जाएगा तथा सफलता पूर्वक संचालन होने पर स्टॉक एक्सचेंज में सब लोगों के लिए खोला जाएगा।

आधुनिक भारत की अर्थव्यवस्था में जो सकारात्मकता आई है वो यकीनन्द स्टार्टअप युग का ही योगदान है। फ्लिपकार्ट, पेटीएम जैसी कम्पनियों ने जो इतिहास रचा उसे और अलग अलग क्षेत्रों की कंपनियां आगे बढ़ा रही हैं। जिन कम्पनियों का बाजार मूल्यांकन 1 अरब डॉलर(1 बिलियन डॉलर) से ज्यादा हो जाता है वे स्टार्टअप मार्केट में यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स के नाम से जानी जाती हैं। आइए जानते हैं कौन कौन से कम्पनियां शामिल हैं इस स्टार्टअप यूनिकॉर्न क्लब में,

Indian Startup Unicorn Club Adto

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जरूर आजमाएं खुश रहने के चार बहुमूल्य नुस्खे

मानव जीवन ईश्वर की एक अनुपम देन है। यह सौभाग्य से मिला एक अनुपम रत्न है। यदि हम किसी भी बात पे किसी से भी नाराज या क्रोध दिखाते हैं, तो सबसे पहले यह आपकी आतंरिक शक्ति को क्षीण करेगा। कोई भी आपको हानि नहीं पहुंचा सकता जब तक की आप हानि को आमंत्रित न करें।

समझना कठिन जरूर है लेकिन अगर यह बात आप जीवन में आत्मसात कर लें तो समस्त समस्याएं खुद ही समाप्त हो जाएंगी।

खुश रहना इस मानव जीवन का परम उद्देश्य है और यह जीवन आनंद प्राप्ति के लक्ष्य के साथ मिला है और प्रतिफल में आनंद देने वाले के प्रति कृतज्ञता भाव देना उस आनंद को और बढ़ा देता है। यह बात उस मूल सत्य की ही तरह है जैसे मृत्यु।

आज हम आपको आसान से चार तरीके बता रहे हैं जिससे आप हर दिन आनंद का लुत्फ़ उठा सकते हैं!

1. बेहतरीन हो दिन की शुरुआत

सूर्योदय से पहले उठने पर हमें अलग ही अनुभव होता है। आसमान में सूर्योदय का नजारा देखने मात्र से आपमें नई ऊर्जा का संचार होता है। इसके अतिरिक्त,

सूर्योदय से पहले उठने के कई फायदे है

Advantage of Waking Up Early :-

  1. मैडिटेशन, योग और व्यायाम के लिए अच्छा समय मिल जाता है|
  2. रचनात्मकता (Creativity) बढती है|
  3. एक सकारात्मक एंव अच्छी शुरुआत होती है
  4. दिन के लिए लक्ष्य बनाना|
  5. आयुर्वेद (ayurveda) के अनुसार सूर्योदय से पहले बहने वाली वायु अमृत के समान होती है जिससे हमारे शरीर में एक नई उर्जा का संचार होता है|
  6. प्रकृति के अद्भुत नज़ारे का अनुभव
  7. पूरे दिन के कार्यों के लिए मानसिक रूप से तैयार होना|

2. ध्यान, योग तथा व्यायाम

Meditation, Yoga & Exercise

ध्यान व योग हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है। यह शारीरिक रोगों के साथ साथ मानसिक विकारों को भी दूर रखता है। नियमित योग आचरण से आतंरिक शक्तियां जाग्रत होती हैं तथा व्यायाम से हमारा शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है।

3. वर्तमान में जिएं

Live in Present

रिसर्च के अनुसार 70% से 90% लोग अपना ज्यादातर समय भूत, भविष्य और व्यर्थ की बातों को सोचने में व्यतीत करते हैं। अगर हम वर्तमान में अपनी सारी ऊर्जा और सोच को इस्तेमाल करें तो निश्चित ही जल्दी ही अपना कार्य पूर्ण करने में सक्षम हो जाएंगे।

अतः गाँठ बाँध ले कि यदि हमें सफल होना है तो उन बातों के बारे में सोचना छोड़ दें जिन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है।

4. जो पसंद हो वो करें

Do whatever you like

आप अपनी पसंद के अनुसार कुछ कार्य चुनें जिसको करने से आप खुद ख़ुशी का अनुभव करें। वह कार्य संगीत सुनना, गेम खेलना, फ़िल्म या नाटक देखना अथवा चाहे जो भी कार्य हो उसको अपने हर दिन का कुछ हिस्सा जरूर दें, भले ही 2 घंटे का समय दें या 30 मिनट का पर वो समय आपके मन की सहमति से होना चाहिए। इसको काम समझ के कदापि न करें तथा इसमें ज्यादा समय देकर भी इसका मजा किरकिरा न करें। इससे आपका समय प्रबंधन भी बना रहेगा और ख़ुशी भी।

रोजाना की दिनचर्या छोड़कर आप अपना कार्यक्षेत्र भी वही चुनें जिसमे आपकी रूचि हो। इससे आपको अपना व्यवसाय या अपनी नौकरी में भी मजा आएगा और आप दिन दूनी रात चौगुनी तरक़्क़ी करेंगे।

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दास्ताँ फर्श से अर्श तक: सुंदर पिचाई की गूगल का सीईओ बनने तक के संघर्ष की प्रेरणादायक जीवनी

सुंदर पिचाई को आज हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या गूगल क्रोम के आने से पहले कभी आपने इनका नाम सुना था।

हम आज आपको बता रहे हैं कैसे तमिलनाडु के छोटे से गांव का लड़का दुनिया की सबसे बड़ी वेब बेस्ड कंपनी और नंबर 1 वेबसाइट गूगल का सीईओ बन जाता है। मिलिए सुंदर जी से जो मेहनत और लगन की जीती जागती मिसाल हैं!

आरंभिक जीवन

सुंदर पिचाई का जन्म 12 जनवरी 1972 को मदुरै, तमिलनाडु के निम्न मध्यम वर्ग परिवार में हुआ। पिचाई सुंदरराजन अर्थात सुंदर पिचाई के पिता चेन्नई के अशोक नगर में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे जिनसे बचपन से प्रभावित होने के कारण इनका लगाव टेक्नोलॉजी से जुड़ गया। पिचाई की माँ स्टेनोग्राफर थी और इनके छोटे भाई के जन्म के बाद इन्होंने यह काम छोड़ दिया।

12 साल की उम्र में पिचाई के घर फोन आने के बाद इनकी विलक्षण प्रतिभा का पता इनके घरवालों को चला। यह फोन नंबर को एक बार में याद कर लेते थे और फिर भूलते नहीं थे।

शिक्षण

सुंदर पिचाई ने 10वीं तक की पढ़ाई चेन्नई के अशोक नगर के जवाहर विद्यालय से पूरी की और 12वीं कक्षा चेन्नई के वाना वाणी स्कूल से करी। इन्होंने आई आई टी खड़गपुर से मैटलर्जिकल इंजीनियरिंग की।

इसके बाद पिचाई ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से भौतिकी में मास्टर इन साइन्स किया और एम बी ए व्हार्टन स्कूल, यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेंसिल्वेनिया से किया।

इन्होंने अपनी पहली जॉब संचालन परामर्श के रूप में मैकिंसे एंड कम्पनी में करी और अपनी बेहतरीन प्रतिभा का नमूना पेश किया।

सुंदर पिचाई और गूगल

2004 में गूगल से जुड़ने के बाद इन्होने एक छोटी सी टीम के साथ गूगल सर्च टूलबार पर कार्य किया जिससे आज हम इंटरनेट एक्सप्लोरर और मोज़िला फायरफॉक्स जैसे ब्रॉउज़र्स में भी सीधे गूगल सर्च का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इन्होंने गूगल के अन्य उत्पाद जैसे Google Gear तथा Google Pack पर भी कार्य किया। सुंदर पिचाई ने एक इंटरनेट ब्रॉउज़र्स बनाने की पेशकश Google के समक्ष की लेकिन तत्कालीन Google CEO Eric Schmidt ने इसको एक बहुत महंगा प्रोजेक्ट करार देकर मना कर दिया। लेकिन पिचाई ने हार नही मानी और Google Cofounders Larry Page और Sergey Brin को इस प्रोजेक्ट के लिए मना लिया। 2008 में गूगल ने अपना इंटरनेट ब्रोउज़र लॉन्च किया जिसका नाम Chrome रखा गया और यह आज भी दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला इंटरनेट ब्रॉउज़र है। गूगल क्रोम की सफलता ने पिचाई को गूगल का वाइस प्रेसिडेंट ऑफ़ प्रोडक्ट डेवलेपमेंट बना दिया।

अच्छे कार्य और लगन से प्रभावित होकर गूगल ने इन्हें 2012 में Chrome and Apps का सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बना दिया। इसके बाद 2013 में एंड्रॉइड निर्माता एंडी रुबिन के किसी अन्य प्रोजेक्ट के कारण एंड्रॉइड को छोड़ दिया, जिससे पिचाई को उनकी कार्यकुशलता देखते हुए एंड्रॉइड का प्रोडक्ट इनचार्ज और 2014 में प्रोडक्ट चीफ बना दिया गया।

Google के CEO बनने का सुनहरा अवसर पिचाई को 10 अगस्त 2015 को मिला तथा अगले ही साल Google की संस्थापक कंपनी Alphabet Inc. ने इनको अपने 273,328 शेयर देकर सम्मानित किया गया।

सुंदर पिचाई का व्यक्तित्व बहुत ही साधारण है और पिचाई आज भी समय समय पर आई आई टी खड़गपुर के छात्रों से Skype के जरीर बातचीत करते हैं।

निजी जीवन

सुंदर पिचाई ने अपनी आई आई टी खड़गपुर की सहपाठी और गर्लफ्रेंड अंजलि से शादी करी और आज इनके दो सुंदर बच्चे एक लड़का और एक लड़की हैं। इन्होंने Brooklyn, New York में 6.8 मिलियन डॉलर का एक आशियाना ख़रीदा और आज भी उसी लगन और मेहनत से इंटरनेट युग को और प्रगति प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं।

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कामयाब लोग तरीके खोजते हैं और अन्य लोग न कर पाने के बहाने। सफलता के मंत्र!

जिंदगी में भले ही बड़ी से बड़ी मुश्किल आए लेकिन आप का वजूद वही रहेगा जो पहले था। मुसीबत में आपकी क्षमता कम हो जाए यह मात्र मन का वहम है। आपको जरूरत है अपनी क्षमता को पहचान कर उसका हल खोजने की।

आज हम आप को बेहद प्रेरणादायक कहानियां बताएंगे जो निश्चित ही आपके सोचने के रवैये को बदल के रख देगी!

इंसान की कीमत

एकबार एक टीचर क्लास में पढ़ा रहे थे| बच्चों को कुछ नया सिखाने के लिए टीचर ने जेब से 100 रुपये का एक नोट निकाला| अब बच्चों की तरफ वह नोट दिखाकर कहा – क्या आप लोग बता सकते हैं कि यह कितने रुपये का नोट है ?

सभी बच्चों ने कहा – “100 रुपये का”

टीचर – इस नोट को कौन कौन लेना चाहेगा ? सभी बच्चों ने हाथ खड़ा कर दिया|

अब उस टीचर ने उस नोट को मुट्ठी में बंद करके बुरी तरह मसला जिससे वह नोट बुरी तरह कुचल सा गया| अब टीचर ने फिर से बच्चों को नोट दिखाकर कहा कि अब यह नोट कुचल सा गया है अब इसे कौन लेना चाहेगा ?

सभी बच्चों ने फिर हाथ उठा दिया।

अब उस टीचर ने उस नोट को जमीन पर फेंका और अपने जूते से बुरी तरह कुचला| फिर टीचर ने नोट उठाकर फिर से बच्चों को दिखाया और पूछा कि अब इसे कौन लेना चाहेगा ?

सभी बच्चों ने फिर से हाथ उठा दिया|

अब टीचर ने कहा कि बच्चों आज मैंने तुमको एक बहुत बड़ा पाठ पढ़ाया है| ये 100 रुपये का नोट था, जब मैंने इसे हाथ से कुचला तो ये नोट कुचल गया लेकिन इसकी कीमत 100 रुपये ही रही, इसके बाद जब मैंने इसे जूते से मसला तो ये नोट गन्दा हो गया लेकिन फिर भी इसकी कीमत 100 रुपये ही रही|

ठीक वैसे ही इंसान की जो कीमत है और इंसान की जो काबिलियत है वो हमेशा वही रहती है| आपके ऊपर चाहे कितनी भी मुश्किलें आ जाएँ, चाहें जितनी मुसीबतों की धूल आपके ऊपर गिरे लेकिन आपको अपनी कीमत नहीं गंवानी है| आप कल भी बेहतर थे और आज भी बेहतर हैं|

हाथी और रस्सी –

एक व्यक्ति रास्ते से गुजर रहा था कि तभी उसने देखा कि एक हाथी एक छोटे से लकड़ी के खूंटे से बंधा खड़ा था| व्यक्ति को देखकर बड़ी हैरानी हुई कि इतना विशाल हाथी एक पतली रस्सी के सहारे उस लकड़ी के खूंटे से बंधा हुआ है|

ये देखकर व्यक्ति को आश्चर्य भी हुआ और हंसी भी आयी| उस व्यक्ति ने हाथी के मालिक से कहा – अरे ये हाथी तो इतना विशाल है फिर इस पतली सी रस्सी और खूंटे से क्यों बंधा है ? ये चाहे तो एक झटके में इस रस्सी को तोड़ सकता है लेकिन ये फिर भी क्यों बंधा है ?

हाथी के मालिक ने व्यक्ति से कहा कि श्रीमान जब यह हाथी छोटा था मैंने उसी समय इसे रस्सी से बांधा था| उस समय इसने खूंटा उखाड़ने और रस्सी तोड़ने की पूरी कोशिश की लेकिन यह छोटा था इसलिए नाकाम रहा| इसने हजारों कोशिश कीं लेकिन जब इससे यह रस्सी नहीं टूटी तो हाथी को यह विश्वास हो गया कि यह रस्सी बहुत मजबूत है और यह उसे कभी नहीं तोड़ पायेगा इस तरह हाथी ने रस्सी तोड़ने की कोशिश ही खत्म कर दी|

आज यह हाथी इतना विशाल हो चुका है लेकिन इसके मन में आज भी यही विश्वास बना हुआ है कि यह रस्सी को नहीं तोड़ पायेगा इसलिए यह इसे तोड़ने की कभी कोशिश ही नहीं करता| इसलिए इतना विशाल होकर भी यह हाथी एक पतली सी रस्सी से बंधा है|

दोस्तों उस हाथी की तरह ही हम इंसानों में भी कई ऐसे विश्वास बन जाते हैं जिनसे हम कभी पार नहीं पा पाते| एकबार असफल होने के बाद हम ये मान लेते हैं कि अब हम सफल नहीं हो सकते और फिर हम कभी आगे बढ़ने की कोशिश ही नहीं करते और झूठे विश्वासों में बंधकर हाथी जैसी जिंदगी गुजार देते हैं|

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तीन दोस्तों द्वारा शुरू की गयी ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी कंपनी को मिला 1 अरब डॉलर का निवेश। जानें कैसे मिली इन्हें सफलता!

देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी कंपनी Swiggy को हाल ही में 1 अरब डॉलर का निवेश मिला है। इस निवेश में 66 करोड़ डॉलर का हिस्सा साउथ अफ्रीका की कंपनी नैस्पर का रहा जबकि बाकी निवेश टेंसेन्ट एंड हेज फंड्स और कैपिटल एंड वेलिंगटन मैनेजमेंट का रहा। इस नई फंडिंग के समय पांच साल पुरानी Swiggy की कीमत 3.3 अरब डॉलर आंकी गई। इसके साथ ही Swiggy भारतीय ऑनलाइन कम्पनियों में वैल्यूएशन के अनुसार छठे नंबर की स्टार्टअप कंपनी बन गई है।

सफलता की कहानी

Swiggy को तीन दोस्तों ने 5 साल पहले शुरू किया था। इस तिकड़ी में राहुल जैमिनी IIT खड़गपुर से, श्रीहर्ष IIT कलकत्ता से तथा नंदन रेड्डी BITS से स्नातक हैं। 5 डिलीवरी बॉयज से शुरू हुई Swiggy में अब 1.2 लाख डिलीवरी पार्टनर्स हैं और 42 शहरों के 50 हजार से ज्यादा रेस्त्रों स्विगी से जुड़े हुए हैं।

फ़ूड डिलीवरी मार्केट में स्विगी ने जोमाटो से जंग जीत ली है। गुरुग्राम की जोमाटो को 2018 में 41 करोड़ डॉलर की फंडिंग मिली जबकि स्विगी को तीन फंडिंग राउंड्स में 131 करोड़ डॉलर की फंडिंग मिली।

इस ताजा फंडिंग के बाद स्विगी ने बताया की अब वो डिलीवरी ओनली किचेन्स का विस्तार करेंगे, टीम को और मजबूती देंगे और साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित नेक्स्ट जेनेरेशन प्लेटफार्म बनाया जाएगा। आपको बता दें की स्विगी फ़िलहाल हर माह 2.5 करोड़ ऑर्डर पूरे कर रही है और भविष्य में इस आंकड़े को और बढ़ना स्वाभाविक है।

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महामानव की महाफिल्म #NarendraModi का सूक्ष्म विश्लेषण!

हमारे प्रिय प्रधानमंत्री मोदी जी पर बनी विवेक ओबरॉय द्वारा अभिनीत फ़िल्म #NarendraModi 11 अप्रैल को रिलीज़ होनी थी जो कि चुनाव को देखते हुए आगे बढ़ाकर 24 मई को रिलीज रो रही है।

इस अनुपम व्यक्ति की महाकथा देखने को सभी देशभक्त उत्साहित हैं।
एक चाय वाले का बेटा, हिमालय में सिद्धि प्राप्त करने वाला योगी, माँ भारती का अनन्य सेवक, वर्ल्ड बैंक के कर्ज के नीचे दबे राज्य को एशिया का सबसे सफल राज्य बनाने वाला मुख्यमंत्री, पहली बार पूर्ण बहुमत से प्रधानमंत्री बनने वाला गैर-कांग्रेसी नायक और न जाने कितने ही रूप इस महामानव के व्यक्तित्व में आत्मसात हैं। इनको और जानने के लिए हर व्यक्ति इस फ़िल्म का इंतजार कर रहा है।

कांग्रेसी पंडितों ने फ़िल्म की रिलीज़ रोकने को एड़ी चोटी का जोड़ लगाया परन्तु वो इस फ़िल्म के पीछे की सद्भावना को नहीं जान सके। आप कांग्रेसी पंडित एक व्यक्ति की कथा से इतने भयभीत हैं कि आप अपनी हार पहले ही स्वीकार कर चुके हैं। सिर्फ मौका ढूंढ रहें हैं कि होने वाली हार का बहाना क्या बनाया जाए।

अब भाजपा ने अपने दम पर जो चमत्कार किया है वो इतिहास के पन्नों में हमेशा दर्ज रहेगा। पहली बार देश भर के 22 दलों से सिर्फ एक व्यक्ति मोदी जी ने चुनाव लड़ा और जीत कर दिखा दिया कि अब भारतवर्ष की जनता को और मुर्ख बना पाना सम्भव नहीं है।

फिर हुआ चमत्कार

अपने बुते 300 पार

बन गई मोदी सरकार

यदि फ़िल्म ही किसी चुनाव को प्रभावित कर सकती है तो ये रैली और प्रचार छोड़ कर सभी दलों को अपने नायकों पर फ़िल्म बना देनी चाहिए लेकिन यह तभी संभव है जब उनके नायकों में वह प्रतिभा हो और उन्होंने वह संघर्ष किया हो जिससे जनमानस प्रभावित हो।

सभी जानते हैं कि अन्य दलों के नायक या तो वंशवाद से बड़े बने हैं या फिर दुसरो का इस्तेमाल करके। कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने अपने वंश को ही धोका देकर सत्ता हतिया ली। फिर भी सब एक साथ इसलिए हैं क्योंकि इस महामानव को किसी भी तरह से हराना संभव नहीं है। यह फिजूल कोशिश सिर्फ इसलिए है की अपने दल की इज्जत बचाई जा सके।

जो पिछली बार 2014 में लहर थी अब वो सुनामी है और विश्व भर में मोदी जी की साख के आगे किसी का भी टिक पाना मुमकिन नहीं है।

इन सब बातों से दूर यह फ़िल्म आपके भीतर एक प्रेरणा को प्रज्वलित करेगी और आप भी अपनी वर्तमान परिस्थितियों पर पछताने को छोड़कर माँ भारती की सेवा करने को अग्रसर होंगे। फ़िल्म का आनंद उठाएं तथा औरों को भी माँ भारती की सेवा हेतु प्रेरित करें।

नोट: यह लेख AdTO.in के चीफ एडिटर के विचारों और शोध पर आधारित है। इसका किसी भी मीडिया समूह से कोई लेना-देना नहीं है और न ही किसी राजनीतिक दल के प्रभाव से शब्दों का चयन किया गया है।

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अविराम गौसेवा के लिए जर्मन मूल की मथुरा निवासी अम्मा जी को पद्मश्री। जानें गौसेवा से जुड़ी यह अनोखी दास्तां!

42 वर्षों से मथुरा में गोसेवा कर रही जर्मन मूल की सुदेवी गोवर्धन “अम्मा जी” को पद्मश्री मिलने पर बहुत बहुत बधाई।

पाँच बीघा के क्षेत्र में फैले सुरभि गौशाला का संचालन कर रही सुदेवी ने 1,500 से भी अधिक गायों को पाल रखा है, जिनकी वह लगातार देखभाल करती हैं। इन गायों में से अधिकतर बीमार, नेत्रहीन या अपाहिज हैं। इनमें से 52 गायें नेत्रहीन है जबकि 350 पैरों से अपाहिज है। उनके पैरों की नियमित मरहम-पट्टी की जाती है।

जर्मन महिला फ्रेड्रिन इरिन ब्रूनिंग उर्फ़ ‘सुदेवी दासी गोवर्धन’ को केंद्र सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया है। सुदेवी राधाकुंड धाम में विगत 42 वर्षों से गौसेवा कर रहीं हैं। बीमार और असहाय गायों की सेवा करने के कारण उन्हें ‘गायों की मदर टेरेसा’ भी कहा जाता है। उन्हें पद्म सम्मान मिलने का समाचार पाकर स्थानीय निवासी भी ख़ुश हुए और गौशाला पहुँच कर उन्होंने सुदेवी को माला पहनाकर सम्मानित किया। उन्हें शनिवार (मार्च 16, 2019) को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के हाथों पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

सुदेवी के अनुसार, जब मंत्रालय द्वारा उन्हें पुरस्कार मिलने की जानकारी दी गई, तब उन्हें समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। फिर स्थानीय निवासियों ने उन्हें इस से अवगत कराया। ये तब की बात है, जब सरकार ने उन्हें पद्मश्री देने की घोषणा की थी।

अपने माता-पिता की इकलौती संतान फ्रेड्रिन 42 वर्ष पहले भारत भ्रमण पर आई थी। इस दौरान उन्होंने ब्रज आकर श्रीकृष्ण के भी दर्शन किए। कृष्ण-भक्ति ने उन्हें अपनी तरफ ऐसा खींचा कि उन्होंने भारत में रहने की ठान ली। ब्रज में उन्होंने एक गाय भी पाल रखी थी, जिसके बीमार होने के बाद उन्होंने उसकी काफ़ी देखभाल की। इसके बाद वह जहाँ भी बीमार गाय देखती, उसकी देखभाल और सेवा में लग जाती। इसके बाद तो जैसे उन्होंने गोसेवा को ही अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने अपना पूरा जीवन ही गोसेवा को समर्पित कर दिया।

सुदेवी के पिता तीस वर्ष पहले तक दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में कार्यरत थे। इकलौती संतान होने के कारण उन्होंने पिता से मिलने वाली सारी धनराशि को गोसेवा में ही ख़र्च किया। उनकी गौशाला में गायों के लिए एक स्पेशल एम्बुलेंस भी है। अगर किसी गाय की मृत्यु निकट आ जाए और उसके बचने की कोई संभावना न रहे, तब सुदेवी उसे गंगाजल का सेवन कराती है। मरणोपरांत गायों के शरीर का अंतिम संस्कार भी पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न किया जाता है।

सुदेवी बताती हैं कि गायों की सेवा में हर महीने ₹35 लाख तक ख़र्च होते हैं। गायों का इलाज डॉक्टरों द्वारा करवाया जाता है। सुदेवी दानदाताओं और जर्मनी से आने वाले रुपयों की मदद से इस गौशाला का संचालन कर रहीं हैं। सुरभि गौशाला में 70 से 80 कर्मचारी कार्यरत हैं। किराए की भूमि पर गौशाला चला रहीं सुदेवी को उम्मीद है कि उन्हें इस पुरस्कार के मिलने के बाद गौशाला के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, उन्होंने इस बात की भी उम्मीद जताई कि अब गोसेवा के रास्ते में आने वाली अड़चनें दूर होंगी।

सुदेवी ने बताया कि अगर गौशाला के लिए उन्हें भूमि मिल जाती है तो मासिक किराए में ख़र्च हो रहे रुपयों की बचत होगी और उसका उपयोग गौसेवा में किया जाएगा। हाल ही में जब उनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई थी तब उन्होंने मथुरा की सांसद हेमा मालिनी से लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक के दरवाज़े खटखटाए थे। इसके बाद उन्हें वीजा मिल गया था। सुदेवी अविवाहित हैं और अभी भी एक झोपड़ी में ही रहती हैं। स्थानीय निवासियों ने उन्हें भारतीय नागरिकता देने की भी माँग की है। उनके अतुलनीय सेवा कार्य के लिए हम सदा आभारी रहेंगे।

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Elon Musk के बारे में हर वो बात जो आपको जरूर जाननी चाहिए

दुनिया का सबसे शक्तिशाली और दोबारा से इस्तेमाल किया जाने वाला रॉकेट फॉल्कन हैवी बनाने वाले करीब एक दर्जन कंपनियों के मालिक एलन मस्क के बारे में हम आज आपको हर वो बात बताएंगे जो आपको जरूर जाननी चाहिए।

बचपन में ही मिला कई देशों का अनुभव

एलन रीव मस्क 28 जून 1971 को दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में एक कनाडाई- अफ़्रीकी दंपति के यहाँ जन्मे एक सुप्रसिद्ध बिजनेस टायकून हैं। एलन की माँ एक मॉडल और डाइटीशियन रहीं थीं वहीं एलन के पिता एक इलेक्ट्रोकेमिकल इंजीनियर, पायलट और सेलर थे। 1980 में इनके माता-पिता का तलाक होने के बाद ये पिता के साथ प्रिटोरिया में रहे। स्कूल में पढ़ने वाले एलन के सहपाठी इनकी अक्सर पिटाई कर दिया करते थे। एक बार तो एलन को हॉस्पिटल भी जाना पड़ा जब सहपाठियों द्वारा इन्हें सीढ़ियों से नीचे फेंक दिया गया और बेहोश होने तक पिटाई की गई। कंप्यूटर में रूचि इनकी बचपन से थी। मात्र 10 वर्ष की छोटी उम्र में इन्होंने बेसिक लैंग्वेज खुद सीखनी शुरू की और 2 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद एक गेम ‘ब्लास्टर’ बनाया जो की एक मैगजीन “PC and Office Technology” द्वारा 500 डॉलर में ख़रीदा गया।

जून 1989 को अपने जन्मदिन से एक दिन पहले एलन अपनी माँ के पास कनाडा आ गए क्योंकि वो जानते थे कि अमेरिका में सपनों को जीने का सफर कनाडा आ जाने से और आसान हो जाएगा। इसके लिए इन्होंने अफ़्रीकी मिलेट्री की अनिवार्य सर्विस छोड़ दी और कनाडा की क्वींस यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। 2 साल बाद इन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया में दाखिला लिया जहाँ इन्होंने इकोनॉमिक्स और फिजिक्स दोनों की पढ़ाई की। इसके बाद इन्होंने कैलिफोर्निया की यूनिवर्सिटी ऑफ स्टैनफोर्ड में एनर्जी फिजिक्स में Ph.D में दाखिल लिया लेकिन 2 दिन बाद ही पढ़ाई छोड़ इंटरनेट बूम को देख कर व्यापार करने का फैसला किया।

इंटरनेट बूम मिलेनियम क्रैश और एलन के स्टार्टअप्स

एलन ने फरवरी 1995 में अपने भाई किम्भल मस्क के साथ मिलकर एक मार्केटिंग और सिटी सर्च कंपनी ‘Zip2’ बनाई जो की न्यूजपेपर्स के लिए सर्विस देती थी। Zip2 को Compaq ने 307 मिलियन डॉलर कैश और 34 मिलियन डॉलर स्टॉक ऑप्शन में ख़रीदा।

मिलेनियम क्रैश के वक्त एक ओर जहाँ सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी वहीं ऐसे मौके पर एलन के पास मिलियंस डॉलर का मुनाफा था।

इसके बाद एलन ने मार्च 1999 में इंटरनेट पेमेंट ट्रांसफर सिस्टम ‘X.com’ की शुरुआत की जो बेहद सफल रही। कैलिफोर्निया में X.com के ऑफिस के पास ही पीटर थील का भी ऑफिस था जो अपनी कंपनी ‘Confinity’ के माध्यम से यही कार्य कर रहे थे। एक साल बाद दोनों ने अपनी कम्पनियों का विलय कर ‘PayPal Services’ की शुरुआत 2001 में की जिसका बाद में नाम ‘PayPal’ कर दिया गया।

मई 2002 में एलन ने ‘SpaceX’ की शुरुआत करी जिसका उद्देश्य मार्स ओएसिस को मंगल ग्रह पर बनाना और वहाँ मानव बस्तियाँ बसाने के साथ- साथ लांच वेहिकल्स और रेवोल्यूशनरी रॉकेट बनाना है। ऑक्टूबर 2002 को PayPal को Ebay ने 1.5 बिलियन डॉलर स्टॉक ऑप्शन में ख़रीदा जिसमे से 11.7% के लिए एलन को 165 मिलियन डॉलर मिले जिसका निवेश इन्होने SpaceX में किया।

फरवरी 2004 में ‘Tesla’ की Series A फंडिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जून 2003 में बनी इस कम्पनी के चेयरमैन बन गए। 2007 में CEO और प्रोडक्ट आर्किटेक्ट बनने के बाद 2008 में कंपनी ने पहली इलेक्ट्रिक कार Tesla Roadster लॉन्च की जो बेहद सफल रही।

मुश्किलें आती रही और कदम बढ़ते रहे

एलन को SpaceX की सफलता रातों रात नहीं मिली। सारी पूंजी और निवेशकों का धन लगाकर जो पहले 3 रॉकेट लॉन्च हुए वो फेल रहे। हार न मानने का जज्बा ही था कि इन्होने चौथा रॉकेट सफलता पूर्ण लॉन्च किया और SpaceX को नासा से 1.6 बिलियन डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ।


दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट फॉल्कन हेवी एलन की ही खोज है और रॉकेट को दोबारा से इस्तेमाल किये जाने की तकनीक भी एलन की ही देन है। जरूरत पड़ने पर Tesla और SpaceX कंपनी में स्लीपिंग बैग में सो जाना एलन को बेहद पसन्द है क्योंकि एलन काम के समय सिर्फ काम पर ही अपना सारा ध्यान देते हैं और किसी भी लक्ष्य को मुश्किल नही मानते।

एलन SpaceX, Tesla और Neuralink के CEO हैं। एलन Zip2, OpenAI, PayPal और Neuralink के Co-Founder हैं तथा X.com , theboringcompany और SpaceX के Founder हैं।

एलन एक बहुआयामी सोच वाले उत्कृष्ट बुद्धि से संपन्न वैज्ञानिक और आंत्रेप्रीन्योर हैं जिनकी विलक्षण प्रतिभा का लोहा समस्त विश्व मानता है। एलन 21वें सबसे शक्तिशाली व्यक्तित्व के स्वामी और दुनिया के 54वें सबसे धनी व्यक्ति हैं। एक बेहद खास रिपोर्ट के अनुसार एलन ने वर्ष 2017 में X.com को दोबारा से ख़रीदा है और जल्द ही इसके साथ एक नई पारी शुरू करना वो जरूर पसंद करेंगे।