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बालों की सेहत के लिए हर किसी को खानी चाहिए ये विशेष चीजें

आइए जानते हैं ऐसी चीजों के बारे में जिन्हें खाने से आपके बाल ना केवल स्वस्थ रहेंगे बल्कि खूबसूरत और चमकीले भी नजर आएंगे.

पालक-
अगर आप शाकाहारी हैं तो पालक से बेहतर बालों के लिए कोई चीज हो ही नहीं सकती है. पालक आयरन, विटामिन ए, सी औऱ प्रोटीन का बढ़िया स्रोत होता है. आय़रन की कमी से ही सबसे ज्यादा बाल झड़ते हैं. पालक केवल आयरन से ही भरपूर नहीं होता है बल्कि इसमें सेबम भी होता है जो बालों के लिए प्राकृतिक कंडीशनर माना जाता है. इसमें ओमेगा-3 एसिड, मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन भी मौजूद होता है. इससे स्कैल्प हेल्दी और बाल स्वस्थ रहते हैं.

अंडा और दुग्ध उत्पाद-
बालों की ग्रोथ के लिए और मोटे-घने बालों के लिए अंडा व दुग्ध उत्पाद बहुत जरूरी हैं. दूध, योगर्ट और अंडे में कई सारे जरूरी पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, विटामिन बी12, आयरन, जिंक और ओमेगा 6 फैटी एसिड्स होते हैं. दुग्ध उत्पाद बियोटीन (विटामिन बी7) का भी अच्छा स्रोत है जो बालों को झड़ने से रोकता है.

नट्स-
बालों को झड़ने से रोकने के लिए अपनी डाइट में नट्स को शामिल कीजिए.  खासकर अखरोट इकलौता ऐसा नट है जिसमें बियोटीन, बी विटामिन्स, विटामिन ई और प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और मैग्नीशियम होता है. ये सभी बालों को मजबूत बनाते हैं.

अमरूद-
ये तो आप जानते ही होंगे कि बालों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन सी कितना जरूरी होता है. विटामिन सी बालों को पतला होने से रोकता है. अमरूद में संतरे से भी ज्यादा विटामिन सी होता है. इसकी पत्तियों में भी विटामिन बी और सी होता है जो बालों की ग्रोथ के लिए जरूरी कोलाजेन ऐक्टिविटी को बढ़ाने में मदद करता है.

दालें-
दालें प्रोटीन, आय़रन, जिंक, बायोटिन का भंडार होती हैं जोकि बालों के लिए जरूरी पोषक तत्व होते हैं. इसके अलावा दालें फोलिक एसिड का भी खजाना हैं. फोलिक एसिड लाल रक्त कोशिकाओं को दुरुस्त करती है जिससे स्किन और स्कैल्प को जरूरी ऑक्सीजन उपलब्ध हो पाती है और बाल टूटना रुक जाता है.

जौ- जौ में खूब विटामिन ई होता है जो पतले बालों को ठीक करने में मदद करता है. जौ में आयरन और कॉपर भी होता है जो रेड ब्लड सेल्स का उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है.

चिकन-
चिकन प्रोटीन का अच्छा स्रोत है लेकिन अगर आप शाकाहारी हैं तो आप टोफू और पीनट्स से इसकी भरपाई कर सकते हैं.

अलसी का बीज-
अलसी के बीज में ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होता है. आपका शरीर जरूरी फैटी एसिड का उत्पादन नहीं कर पाता है इसलिए आपको अपने आहार से इसकी आपूर्ति करनी चाहिए. अलसी का बीज सबसे बढ़िया विकल्प है.

गाजर-
गाजर केवल आंखों की रोशनी के लिए ही नहीं बल्कि आपके बालों के लिए भी बहुत जरूरी है. इनमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ए होता है जो नैचुरल कंडीशनर का काम करता है और आपके बालों को झड़ने से रोकता है.

विटामिन सी की खुराक के लिए खट्टे फल-
आपके शरीर को आयरन के अवशोषण के लिए विटामिन सी की जरूरत होती है इसलिए आपको अपनी डाइट में साइट्रस फ्रूट्स को जरूर शामिल करना चाहिए. न्यूट्रिशनिस्ट का सुझाव है कि एक गिलास नींबू पानी भी पर्याप्त साबित होगा.

इसके अतिरिक्त स्वीट पोटैटो भी विटामिन ए का अच्छा स्रोत है. बालों को स्वस्थ रखने में मदद करता है.

 

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धूल की चादर में लिपटा उत्‍तर भारत। जानें क्या है वजह और कैसे सुरक्षित रहें अगले 48 घंटों में!

धूलभरी हवा से राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सर्वाधिक प्रभावित रहे। धूलभरी हवाएं चलने का कारण पश्चिमी विक्षोभ माना जा रहा है। ऐसे में लोगों को जहां सांस लेने में दिक्कत हो रही है, वहीं हवाई परिचालन प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ही हालात रहे तो उत्तर भारत के लिए आने वाले 48 घंटे मुश्किलों भरे हो सकते हैं।

40 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही है धूल बढ़ते तापमान से परेशान उत्तर भारत के लोगों की मुश्किल तब और बढ़ गई, जब हवाएं चलने से वातावरण में धूल की मात्रा और बढ़ गई। स्काईमेट वेदर के मुख्य मौसम विज्ञानी महेश पलावत का कहना है कि राजस्थान और ब्लूचिस्तान की ओर से चल रही गर्म हवाओं के साथ धूल करीब 40 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दिल्ली की ओर आ रही है। चूंकि मौसम में नमी नहीं है, इस कारण धूल की इस चादर का असर कई दिन तक बना रहेगा। दिल्ली में कई गुना बढ़ा प्रदूषण का स्तर धूलभरी हवाओं ने दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचा दिया है।

पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 बुधवार को दिल्ली में तीन गुना से भी अधिक 200 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसका सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता है। इसी तरह पीएम 10 का सामान्य स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता है, जबकि बुधवार को यह 981 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया। घर व दफ्तर के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखने की सलाह मौसम विशेषज्ञों ने ऐसे हालात में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को घर के भीतर ही रहने की सलाह दी है। घर व दफ्तर की खिड़कियां-दरवाजे बंद रखने को कहा है। साथ ही कचरा न जलाने की सलाह दी है। इस दौरान निर्माण कार्य भी बंद रखने की भी बात कही है।

बठिंडा-जम्मू फ्लाइट रद
आसमान में धूल के कारण बठिंडा-जम्मू फ्लाइट रद आसमान में धूल होने के कारण बुधवार को बठिंडा से जम्मू और जम्मू से बठिंडा की फ्लाइट को रद कर दिया गया। जम्मू से सुबह 9:10 की फ्लाइट को बठिंडा 10:20 बजे पहुंचना था, लेकिन आसमान में धूल के कारण जम्मू से फ्लाइट उड़ान नहीं भर सकी।

यूपी में आंधी के बाद बरसे बदरा
उत्तर प्रदेश में आंधी के बाद बरसे बदरा, 10 की मौत भीषण तपन के बीच मौसम के प्रतिदिन अलग-अलग तेवर बेहाल कर रहे हैं। पश्चिमी उप्र के अधिकांश जिलों में बुधवार को आसमान में धुंध छायी रही। गर्म हवाएं और उमस ने झुलसाया तो कहीं आंधी-पानी ने तबाही मचाई। खासकर पूर्व और मध्य उप्र में। इस दौरान 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। पेड़, बिजली खंभे उखड़े, जिससे जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया।

हरियाणा में दो दिन और मुसीबत
हरियाणा में दो दिन और रहेगी मुसीबत हरियाणा के आसमान में भी बुधवार को धूल का गुबार छाया रहा। इससे दृश्यता कम हो गई। ऐसे हालात हो दिन और रह सकते हैं। धूल की वजह से सांस के मरीजों की तकलीफ भी बढ़ गई। वहीं, गर्मी के कारण हांसी में दो लोगों की मौत हो गई।

कोलकाता में मिली राहत 
कोलकाता में बारिश से मिली राहत कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के विभिन्ना जिलों में मानसून की हुई बारिश से तापमान सामान्य रहा। हालांकि, कोलकाता व आसपोड़स के जिलों में दोपहर तक तेज धूप थी। बाद में बादल छा जाने से मौसम अच्छा हो गया।

छत्‍तीसगढ़ में उमस 
छत्तीसगढ़ में उमस ने लोगों को किया परेशान छत्तीसगढ़ में बुधवार को दिन में उमस ने लोगों को परेशान किया। पूर्वानुमान है कि आने वाले 24 से 36 घंटों के बीच दक्षिण छत्तीसगढ़ से लेकर उत्तर छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से तेज बारिश होगी। छत्तीसगढ़ में आठ जून को मानसून पहुंच चुका है, लेकिन बारिश अपेक्षाकृत कम में हो रही है।

जम्‍मू-कश्‍मीर में पारा सामान्‍य से ऊपर
जम्मू-कश्मीर में सामान्य से ऊपर है पारा जम्मू-कश्मीर में तापमान सामान्य से ऊपर चल रहा है। जम्मू में बुधवार को दिन का अधिकतम तापमान 43.3 डिग्री सेल्सियस रहा। इससे पहले मई में तापामान 43.5 डिग्री रह चुका है। कश्मीर में भी तापमान सामान्य से करीब पांच डिग्री सेल्सियस ऊपर चल रहा है।

हिमाचल में धूप से बढ़ा तापमान
हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन दिन से धूप खिलने के कारण तापमान में वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान ऊना में 43.4 डिर्ग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शिमला में सामान्य से अधिक गर्मी दर्ज की जा रही है।

उत्तराखंड के पहाड़ों में बारिश, मैदान में तपिश
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में जहां बुधवार को बारिश से लोगों को चढ़ते पारे से राहत मिली है, वहीं मैदानी जिलों में गर्मी व उमस ने लोगों को परेशान किया। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिन चढ़ते पारे से राहत मिलने के आसार कम ही हैं।

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48 घंटे में धरती पर बरसेगा सूरज का कहर बंद होगा टीवी, मोबाइल और जीपीएस

अगले 48 घंटे में धरतीवासियों को सूरज का गुस्सा झेलना पड़ सकता है। सूरज के कोप से आपके मोबाइल का सिग्नल जाम हो सकता है, जीपीएस गड़बड़ा सकता है और तो और आपको एंटरटेन करने वाला टीवी भी बंद हो सकता है।

सूरज का यह गुस्सा दरअसल एक खगोलीय घटना है, जिसे सौर तूफान कहते हैं। खगोल वैज्ञानिकों ने सूरज पर चलने वाले तूफान के अगले 48 घंटे में धरती से टकराने की आशंका जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके प्रभाव से उपग्रह आधारित सेवाएं जैसे मोबाइल, केबल नेटवर्क, जीपीएस नैविगेशन प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा रेडिएशन के खतरे की भी आशंका है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत से पहले इसका असर अमेरिका और यूके में दिख सकता है। सौर तूफान के धरती से टकराने पर कुछ समय के लिए टेक ब्लैकआउट की स्थिति बन सकती है। नैशनल ओशन ऐंड अटमॉस्फियर असोसिएशन ने कहा है कि जब यह तूफान आएगा तो उत्तर और दक्षिण में तेज रोशनी नजर आएगी। हालांकि संस्थान ने इसे जी-1 या हल्का सौर तूफान ही करार दिया है। असोसिएशन फोरकास्ट का कहना है कि यह तूफान रविवार या सोमवार को आ सकता है। इस दौरान काफी तजे सौर हवाएं चलेंगी।

नासा की ओर से जारी की गई तस्वीर में गैस के इस तूफान को देखा जा सकता है। विदेशी मीडिया से आ रही खबरों के मुताबिक सूरज में एक कोरोनल होल खुलेगा, जिसके कारण उससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलेगी। इसमें कॉस्मिक कण भी होंगे। खगोल विशेषज्ञों का कहना है कि सोलर डिस्क के लगभग आधे हिस्से को काटते हुए एक बड़ा सा छेद बनेगा, जिसके जरिये सूरज से पृथ्वी की ओर बेहद गर्म हवा का एक तूफान आएगा।

बता दें कि सौर तूफान सूर्य की सतह पर आए क्षणिक बदलाव से उत्पन्न होते हैं। इन्हें पांच श्रेणी जी-1, जी-2, जी-3, जी-4 और जी-5 में बांटा गया है। इनमें जी-5 श्रेणी का तूफान सबसे खतरनाक हो सकता है। जानकारों का कहना है कि जी-1 श्रेणी के तुफान का सबसे ज्यादा असर पावर ग्रिड और माइग्रेटरी बर्ड्स पर पड़ता है।

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13 राज्‍यों में जारी किया आंधी-तूफान का अलर्ट, हरियाणा में आज और कल बंद रहेंगे स्‍कूल, बरतें ये सावधानियां

दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में शुक्रवार तक आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की गई है. हाल ही में हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में ताजा बर्फबारी हुई. भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, कर्नाटक और केरल आंधी-तूफान से प्रभावित हो सकते हैं.

9 मई तक ऐसे ही हालात

आंधी-तूफान की चपेट में इस बार राजधानी दिल्ली भी आ सकती है. दिल्ली में तेज हवाओं के साथ बारिश का अनुमान जताया गया है. मौसम विभाग का कहना है कि दिल्ली में मंगलवार दोपहर 4 बजे बारिश हो सकती है. हालांकि सोमवार रात आंधी तूफान का असर कम दिखेगा, लेकिन मंगलवार को इसकी तीव्रता ज्यादा हो सकती है. ऐसे हालात 9 मई तक बने रह सकते हैं.

मौसम विभाग ने कहा कि हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर आंधी की संभावना है. राजस्थान में धूलभरी आंधी चलने की चेतावनी जारी की गई है, जबकि छह पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की उम्मीद है. महाराष्ट्र के विदर्भ में कुछ इलाकों में लू की भी चेतावनी दी गई है.

मौसम लेगा करवट

मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में आंधी के साथ गरज के साथ छींटे पड़ने की चेतावनी जारी की है. हरियाणा सरकार ने सोमवार को एहतियातन दो दिनों के लिए स्कूल बंद करने के निर्देश दिए. हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में सोमवार को हल्की बर्फबारी हुई जबकि कुछ हिस्सों में बारिश हुई. स्थानीय मौसम विभाग ने बुधवार तक राज्य में धूलभरी आंधी, बारिश और बर्फबारी की चेतावनी दी है.

आंधी-तूफान के दौरान बरतें ये सावधानी

-अगर बाहर हों तो किसी पेड़ के नीचे न ठहरें और न ही अपनी गाड़ी पेड़ के नीचे पार्क करें.

-तेज आंधी तूफान आने पर घर में ही रहें, बाहर न निकले.

-अगर बाहर फंस भी जाएं तो पार्क जैसी किसी खुली जगह में लेट जाएं.

-घर के अंदर ऐसे जगह पर जमा हो जाएं जो सबसे मजबूत हो.

-घर में लाइट, गैस, पानी के नल पूरी तरह बंद कर दें.

-अगर एक तरफ से तेज हवा आ रही हो तो दूसरी तरफ की खिड़कियां खोल दें.

पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश और राजस्थान में आंधी की वजह से 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. 4 मई को आए भयंकर आंधी तूफान ने यूपी में करीब 70 और राजस्थान में करीब 40 लोगों की जान ले ली. आगरा में ही करीब 45 लोगों की मौत हुई. इस बार अलर्ट के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने 7 और 8 मई को स्कूल बंद रखने का ऐलान किया है. इसके अलावा दूसरी राज्य सरकारें भी पूरी तरह अलर्ट हैं.

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एक ऐसी चाय जिससे आपके शरीर में मौजूद हर बीमारी छूमंतर हो जाएगी। उत्तराखंड की मशरूम गर्ल ने खोजा यह फार्मूला!

अब चाय बनाएगी आपकी सेहत। जी हां! पहली बार एक ऐसी चाय को तैयार किया गया है, जो आपके स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं। मशरूम गर्ल कही जाने वाली दिव्या रावत ने इसे तैयार किया है। आपको बता दें कि दिव्या को मशरूम फार्मिंग के लिए राष्ट्रपति से सम्मान मिल चुका है। अब उन्होंने एक ऐसी चाय तैयार की है जिससे आपकी हर बीमारी छूमंतर हो जाएगी।

कीड़ाजड़ी की चाय
दिव्या ने हाल ही में अपनी दून स्थित लैब में कीड़ाजड़ी जैसी बहुमूल्य औषधि उगाई थी। इसके जरिए वो अब अलग अलग पहलुओं पर काम कर रही हैं। बिस्ट्रो रेस्तरां के सहयोग से आप इस फॉर्मूले वाली चाय को आजमा सकते हैं।

अब आपको बताते हैं कि आखिर इस चाय के फायदे क्या क्या हैं;

इस चाय के फायदे
इस चाय में आपको प्रोटीन, पेपटाइड्स, अमीनो एसिड, विटामिन बी-1, बी-2 और बी-12 जैसे पोषक तत्व मिलेंगे। ये सभी पोषक तत्व तत्काल रूप में प्राकृतिक तौर पर शरीर को ताक़त देते हैं।

इतना जरूर है कि कीड़ाजड़ी की चाय आपके स्वास्थ्य में जबरदस्त तरीके से वृद्धि कर सकती है। इस दवा का इस्तेमाल चीन और तिब्बत जैसे इलाकों में किया जाता है।

चीन और तिब्बत में इस्तेमाल
तिब्बत और चीन में इसे यार्सागुम्बा या यारसागम्बू कहा जाता है। प्राकृतिक इलाज के तौर पर इसका

सबसे बेहतर इस्तेमाल किया जाता है। खास बात ये है कि इस चाय का शरीर पर कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। आमतौर पर गंभीर रोगों के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल सांस और गुर्दे की बीमारी में भी किया जाता है।

बुढ़ापा बढ़ने से रोकती है
साथ ही इसके बारे में कहा जाता है कि ये उम्र के असर यानी बुढ़ापे को भी बढ़ने से रोकती है। ये शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से इंसान का शरीर गंभीर से गंभीर बीमारियों से लड़ता है। बुढ़ापे में वजन बढ़ने से रोकने के लिए इससे बेहतर कोई इलाज नहीं है। इस वजह से कीड़ाजड़ी की चाय की दुनियाभर में भी काफी डिमांड है।

हर बीमारी का इलाज
इसके अलावा इसका उपयोग सांस और गुर्दे की बीमारी में भी होता है। दरअसल यार्सागुम्बा यानी कीड़ाजड़ी एक तरह का कीड़ा होता है। ये खास तरह के पौधों पर ही पैदा होता है। सर्दियों में इन पौधों से रस निकलता है और ये पैदा होते हैं। इसका जीवन 6 महीने का ही होता है। अब दिव्या ने इससे एक चाय को तैयार किया है, जो शरीर के लिए बेहद ही फायदेमंद है।

आपको इस चाय की कीमत के बारे में भी बता देते हैं। बकौल दिव्या एक कप की कीमत 1000 रुपये के करीब होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि कीड़ाजड़ी की ही कीमत 2 लाख रुपये किलोग्राम है। इसकी महीन सी मात्रा ही आपके शरीर में मौजूद हर बींमारी से लड़ने में कारगर होती है। इसलिए अब इस चाय का सेवन कीजिए और आपके शरीर की हर बीमारी छूमंतर हो जाएगी।

आप नीचे दिए लिंक द्वारा कीड़ा-जड़ी को मूलरूप में भी खरीद सकते हैं

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(Source: दिव्या रावत सोशल मीडिया)

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‘बहुत ज़्यादा सवाल करते थे स्टीफ़न हॉकिंग’

दुनिया के मशहूर वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग का 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है.

भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में स्टीफ़न हॉकिंग के साथ पढ़ाई की थी.

इसके बाद साइंस से संबंधित कई ग्लोबल सम्मेलनों में दोनों की मुलाक़ात होती रही. डॉक्टर नारलीकर के अनुसार, कॉलेज के दिनों में वो स्टीफ़न हॉकिंग के साथ टेबल टेनिस के मैच भी खेल चुके हैं.

कॉलेज की उन यादों पर डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर ने बीबीसी से बात की. पढ़िए, उन्होंने क्या-क्या बताया:

स्टीफ़न हॉकिंग और भारतीय वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर
Image captionस्टीफ़न हॉकिंग और भारतीय वैज्ञानिक डॉक्टर जयंत विष्णु नारलीकर

मैं और स्टीफ़न हॉकिंग कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में साथ पढ़ते थे. वो मुझसे साल दो साल जूनियर ही थे. वो बाक़ी आम स्टूडेंट्स की तरह ही थे. उस वक़्त कोई उनकी प्रतिभा के बारे में नहीं जानता था.

लेकिन कुछ सालों के भीतर ही लोगों को ये अंदाज़ा हो गया था कि स्टीफ़न में कुछ ख़ास बात है.

मुझे याद है कि ब्रिटेन की रॉयल ग्रीनविच शोध विद्यालय ने साल 1961 में एक साइंस सम्मेलन आयोजित किया था. वहां स्टीफ़न हॉकिंग से पहली बार मेरी सीधी मुलाक़ात हुई थी.

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उस वक़्त वो ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे. मैं एक छात्र ही था, लेकिन मुझे वहां एक लेक्चर देने के लिए बुलाया गया था.

लेक्चर शुरू होने के कुछ देर बाद ही मैंने पाया कि एक स्टूडेंट है जो बहुत ज़्यादा सवाल कर रहा है. वो थे स्टीफ़न हॉकिंग.

उन्होंने मानो मुझपर सवालों की बौछार कर दी थी. वो ब्रह्मांड के विस्तार के बारे में जानना चाहते थे. वो जानना चाहते थे कि बिग बैंग थियोरी है क्या?

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मैंने उनके सभी सवालों के जवाब देने की पूरी कोशिश की. लेकिन ब्रह्मांड से जुड़े उनके सवाल पैने होते चले गए. वो वाक़ई इस विषय पर गंभीर थे.

बहरहाल, सम्मेलन ख़त्म होने के बाद हम दोनों ने टेबल टेनिस खेला. हमारे बीच दो मैच हुए और दोनों ही मैच मैं जीता!

स्टीफ़न पीएचडी करने के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गए थे. उस वक़्त तक लोगों को समझ आ चुका था कि हॉकिंग के मस्तिष्क की क्षमता कितनी है.

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सच कहूं तो पहली बार मुझे लगा था कि स्टीफ़न हॉकिंग सिर्फ़ ज़्यादा सवाल करते हैं. उन्हें उनके जवाबों से कोई लेनादेना नहीं.

लेकिन उनकी पीएचडी की थीसिस पढ़कर सब हैरान रह गए थे. क्योंकि अपनी थीसिस में ब्रह्मांड के विस्तार के बारे में उन्होंने कई बेहद दिलचस्प बातें लिखी थीं.

उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफ़ेसर क़रीब 30 साल काम किया. ब्लैक होल पर उनकी रिसर्च को सबसे ज़्यादा पहचान मिली.

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साइंस की दुनिया के हिसाब के कहूं तो ब्लैक होल के नियमों को स्टीफ़न ने ही स्थापित किया.

स्टीफ़न की सबसे अच्छी बात थी कि वो डायलॉग में विश्वास करते थे. बहस करना उनकी आदत में शामिल नहीं था.

कैम्ब्रिज में उनके साथ मैंने विज्ञान के कई सिद्धांतों पर कई बार चर्चा की. लेकिन कभी हमारे बीच गर्म बहस नहीं हुई. हमने हमेशा एक दूसरे से सीखा ही.

अपनी बीमारी की वजह से बीते कई सालों से स्टीफ़न लेक्चर नहीं दे पा रहे थे. लेकिन लोगों की जिज्ञासाओं और उनके सवालों के जवाब वो कई माध्यमों से देते रहे.

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मुझे याद है जब पहली बार स्टीफ़न ने कहा था कि दुनिया किसी ईश्वर के इशारे पर नहीं चलती. भगवान कुछ नहीं है. और संभावना है कि इस विश्व के अलावा भी कोई दुनिया हो.

लोगों को हमेशा ये उनकी कल्पना ही लगी. स्टीफ़न के पास भी इसे साबित करने के लिए कोई पुख़्ता सबूत नहीं थे. लेकिन उन्होंने मरते दम तक इसे साबित करने की कोशिश की और उनकी इस ललक का सम्मान किया जाना चाहिए.

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Stephen Hawking dies aged 76

The British physicist was known for his work with black holes and relativity, and wrote several popular science books including A Brief History of Time.

At the age of 22 Stephen Hawking was given only a few years to live after being diagnosed with a rare form of motor neurone disease. The illness left him wheelchair-bound and largely unable to speak except through a voice

synthesizer.

His family said that he died peacefully in his home near Cambridge University, where he did much of his ground-breaking work on black holes.

“We are deeply saddened that our beloved father passed away today,” a family statement said.

In the statement his children, Lucy, Robert and Tim said: “He was a great scientist and an extraordinary man whose work and legacy will live on for many years.

They praised his “courage and persistence” and said his “brilliance and humour” inspired people across the world.

“He once said, ‘It would not be much of a universe if it wasn’t home to the people you love.’ We will miss him forever.”

Prof Hawking was the first to set out a theory of cosmology as a union of relativity and quantum mechanics.


Factfile: Stephen Hawking

  • Born 8 January 1942 in Oxford, England
  • Earned place at Oxford University to read natural science in 1959, before studying for his PhD at Cambridge
  • By 1963, was diagnosed with motor neurone disease and given two years to live
  • Outlined his theory that black holes emit “Hawking radiation” in 1974
  • Published his book A Brief History of Time in 1988, which has sold more than 10 million copies
  • His life story was the subject of the 2014 film The Theory of Everything, starring Eddie Redmayne
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जब ब्रह्मांड नहीं था, तब क्‍या था? स्‍टीफन हॉकिंग ने खोला राज!

बिगबैंग थ्‍योरी के बारे में तो आप शायद जानते ही होंगे। हमारा संसार, आकाश गंगाएं, सौरमंडल और सारे ग्रह Big Bang के कारण अपने अस्तित्‍व में हैं। सालों से वैज्ञानिक यही मानते और बताते चले आ रहे हैं कि इस संसार में सबसे पहले बिगबैंग हुआ और उसके कारण ही पूरे ब्रह्मांड का उदय हुआ। अब दुनिया के फेमस वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने वो राज खोला है, जिसे पूरी दुनिया बरसों से जानता चाहती है। स्‍टीफन हॉकिंग ने हाल ही में बिगबैंग के पहले के संसार के बारे में कुछ ऐसा बताया है, जिसे जानकर विज्ञान भी अचंभित है।

बिगबैंग के पहले क्‍या था संसार में? स्‍टीफन हॉकिंग ने किया खुलासा

आज से करीब 13.8 अरब साल पहले ब्रह्मांड बहुत छोटे से आकार से बढ़ना शुरु हुआ था। फिर बहुत ज्‍यादा तापमान और फोर्स के दम पर इसका आकार बढ़ना शुरु हुआ। इसके बाद अणुओं को आपस में मिलना शुरु हुआ। पहले उनका आकार बहुत बढ़ा और फिर उनका विघटन शुरु हुआ, जिससे तमाम तारा मंडल, ग्रह और आकाश गंगाएं अस्तित्‍व में आईं। यही बिगबैंग था, जिससे हमारा संसार बना और आजतक ब्रह्मांड का आकार धीरे धीरे बढ़ रहा है। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक ब्रह्मांड के बारे में यही जानते हैं, लेकिन इस बिगबैंग के पहले क्‍या था या कहें कि दुनिया कैसी थी, इस पर अब तक वैज्ञानिक कुछ खास नहीं जान सके हैं और इस पर वैज्ञानिकों की बहस का कोई रिजल्‍ट नहीं निकल पाया है। इसी बीच वर्ल्‍ड फेमस वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने टीवी शो StarTalk पर खुलासा करते हुए बताया है कि बिगबैंग के पहले आखिर क्‍या हुआ करता था।

क्‍या बताया स्‍टीफन हॉकिंग ने

वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने इस शो के होस्‍ट और एस्‍ट्रोफिजीसिस्‍ट नील डिग्रास से बात करते हुए बताया कि बिगबैंग के पहले क्‍या था, इस बारे में मेरा यह कहना है कि वो जितना आसान था उतना ही ज्‍यादा कॉम्‍प्‍लेक्‍स था, क्‍योंकि वास्‍तव में बिगबैंग से पहले कुछ नहीं था। हॉकिंग ने कहा कि एल्‍बर्ट आइंसटाइन की जनरल थ्‍योरी ऑफ रिलेटीविटी के अनुसार स्‍पेस और टाइम ने साथ मिलकर दुनिया में स्‍पेस और समय का कभी न रुकने वाला चक्र बनाया है, लेकिन सच में वो बिल्‍कुल सपाट नहीं है बल्कि ऊर्जा और भौतिक पदार्थ के दबाव के कारण ये आपस में घूमा हुआ है। यहीं वजह है कि इसे समझ पाना आसान नहीं है।

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स्‍टीफन हॉकिंग ने बताया, बिगबैंग के पहले समय’ का भी अस्तित्‍व नहीं था

बिगबैंग के पहले की दुनिया को लेकर स्‍टीफन हॉकिंग ने एक काफी नया विचार इस रखा है जो चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि बिगबैंग के पहले टाइम यानि समय का भी कोई अस्तित्‍व नहीं था। वो कहते हैं कि Einstein के सिद्धांत के मुताबिक ब्रह्मांड की उत्‍पत्ति के समय संसार में मौजूद सभी भौतिक पदार्थ और ऊॅर्जा बहुत ही छोटी जगहों पर केंद्रित थी, लेकिन उनकी यह थ्‍योरी बिगबैंग के पहले और बाद की कंडीशन के बीच कोई गणितीय लिंक नहीं बताती।

स्‍टीफन हॉकिंग की थ्‍योरीज दुनिया के लिए अचंभा

वैसे तो स्‍टीफन हॉकिंग हमारी दुनिया और हमारे भविष्‍य के बारे में इससे पहले भी बहुत कुछ बता चुके हैं। जैसे कि उनका मानना है कि कोई भी एलियन प्रजाति हम इसांनो को खत्‍म नहीं करेंगे, बल्कि विज्ञान द्वारा बनाया गया आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस ही धरती पर हम इसांनों को रिप्‍लेस कर देगा। उनका तो यह भी कहना है कि इंसानों जल्‍दी से जल्‍दी इस धरती को छोड़ देना चाहिए। स्‍टीफन हॉकिंग के लॉजिक्‍स भले ही कई बार आम लोगों को समझ नहीं आते हैं, लेकिन वैज्ञानिक उनके दिमाग का लोहा मानते हैं।

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मस्क का एक और करिश्मा: अंतरिक्ष में भेजा गया दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट, मकसद है बेहद खास

बिजनेस टाइकून एलन मस्‍क की दिग्‍गज कंपनी ‘स्‍पेसएक्‍स’ ने दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट ‘फॉल्‍कन हैवी’ को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजकर इतिहास रच दिया है। मंगल पर मानव बस्‍ती बसाने की मस्‍क की महत्‍वाकांक्षी योजना की दिशा में यह पहला महत्‍वपूर्ण कदम है। इसके साथ एक दिलचस्‍प बात ये भी है कि इस रॉकेट के साथ एक स्‍पोर्ट्स कार को भी अंतरक्षि में भेजा गया है और ये भी गौर फरमाने वाली बात है कि पहली बार किसी प्राइवेट कंपनी ने बिना किसी सरकारी मदद से इतना बड़ा रॉकेट लॉन्‍च किया है। यह भी कहा जा रहा है कि इस रॉकेट को किसी 23 मंजिला इमारत के बराबर माना जा सकता है।

‘फॉल्‍कन हैवी’ के लॉन्‍च का हुआ लाइव प्रसारण

फॉल्‍कन हैवी को फ्लोरिडा के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से भारतीय समयानुसार मंगलवार देर रात 2 बजकर 25 मिनट पर लॉन्‍च किया गया और स्‍पेसएक्‍स ने इस पूरी प्रकिया का लाइव प्रसारण किया। इसको लेकर लोगों में जबरदस्‍त उत्‍साह देखने को मिला। फॉल्‍कन हैवी के लांच होने के बाद स्पेसएक्स के कमेंटेटर लॉरेन लियॉन्स ने कहा, ‘वाह, क्या आप लोगों ने देखा? यह बेहद शानदार था।’

स्‍पेसएक्‍स का है सबसे महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट

फॉल्‍कन हैवी पृथ्वी की ऑर्बिट से मंगल की ऑर्बिट तक चक्कर लगाता रहेगा। मस्‍क ने बताया था कि अपने ऑर्बिट में पहुंचने के बाद इसकी रफ्तार 11 किलोमीटर/सेकंड की होगी। हालांकि इसमें किसी इंसान को नहीं, बल्कि फ्यूचर स्‍पेस सूट पहने एक पुतले को भेजा गया है। यह स्‍पेसएक्‍स का अब तक का सबसे महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट है और विशेषज्ञों ने इसकी सराहना करते हुए इसे गेम-चेंजर करार दिया है।

इस वजह से नासा की भी है इस पर नजर

नासा की भी इस पर नजर है। चांद-मंगल पर लोगों को भेजने के मकसद को देखते हुए वह भी इस ताकतवर रॉकेट का इस्‍तेमाल कर सकता है। स्‍पेसएक्‍स का दावा है कि यह मौजूदा समय में इस्तेमाल हो रहे सबसे पॉवरफुल रॉकेट डेल्टा-4 हैवी से दोगुना वजन ले जा सकता है। मस्क ने यह दावा भी किया था कि यह रॉकेट मनुष्यों को चांद और मंगल ग्रह तक ले जा सकेगा। उन्‍होंने बताया था कि फॉल्कन हैवी को ठीक उसी जगह से लॉन्च किया जाएगा, जहां से ‘सैटन 5 अपोलो 11 मून रॉकेट’ को लॉन्च किया गया था।

जानिए क्‍या है ‘फॉल्‍कन हैवी’ की खासियत

पिछले साल दिसंबर में मस्क ने 27 मर्लिन इंजन वाले इस रॉकेट की तस्‍वीरें सोशल मीडिया पर साझा की थीं। इसे फॉल्कन 9 नामक तीन रॉकेट को मिलाकर बनाया गया है। यह 40 फीट चौड़ा व 230 फीट लंबा है और इसका कुल वजन 63.8 टन है, जो दो स्पेस शटल के वजन के बराबर है। जमीन से उठने पर यह 50 लाख पाउंड का थ्रस्ट पैदा करता है जो बोइंग 747 एयरक्राफ्ट के 18 प्लेन द्वारा मिलाकर पैदा करने वाले थ्रस्ट के बराबर है। इससे लगभग एक लाख 40 हजार पाउंड का वजन अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है।

इस रॉकेट का हो सकता है दोबारा इस्‍तेमाल

स्पेसएक्स काफी लंबे समय से ऐसे रॉकेट पर प्रयोग कर रही थी, जिसे एक से अधिक बार इस्तेमाल किया जा सके। मगर उसे सफलता अब जाकर मिली है। कंपनी का दावा था कि दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट से इसकी लॉन्चिंग पर होने वाले खर्च में काफी कमी आएगी। यूरोपियन स्पेस एजेंसियां, रूस और जापान भी इस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, मगर अभी वह प्रायोगिक दौर में ही हैं। आपको बता दें कि अंतरिक्ष में किसी सेटेलाइट को स्थापित करने के लिए रॉकेट की सहायता ली जाती है। इसलिए ऐसे अनुसंधानों पर प्रोग्राम से ज्यादा खर्च स्थापित करने वाले सेटेलाइट व्हिकल पर होता है।

सैटर्न-5 था अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट

आपको बता दें कि सैटर्न-5 अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट था, जिसका अब इस्तेमाल बंद हो गया है। सैटर्न-5 में 140 टन पेलोड ले जाने की ताकत थी। नासा ने सैटर्न-5 की मदद से ही चांद पर खोज के लिए कई मिशन भेजे थे। स्काईलैब भी इसी से लॉन्च की गई थी। यह 1973 तक प्रचलन में था।

अंतरिक्ष में भेजी गई मस्‍क की रोडस्टर कार भी

फॉल्‍कन हैवी के साथ मस्‍क की रोडस्‍टर कार को भी अंतरिक्ष में भेजा गया। ऐसा पहली बार हुआ है। मस्क ने इस बारे में बताया था कि वह फॉल्‍कन हैवी के साथ मंगल ग्रह की ओर अपनी टेस्ला कंपनी की रोडस्टर कार भी लॉन्च करेंगे। यह एक स्पो‌र्ट्स कार है और एक बार चार्जिंग में यह एक हजार किमी की यात्रा कर सकती है। वहीं 1.9 सेकंड में 0 से 100 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। इस कार की अधिकतम रफ्तार 400 किमी प्रतिघंटे है।

मंगल-चांद पर मानव बस्‍ती बसाना है सपना

पृथ्‍वी से इतर दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं को ले‍कर पिछले काफी लंबे दशक से दुनियाभर में शोध और प्रयोग होते आ रहे हैं। खास तौर से सभी की नजरें मंगल और चांद पर मानव बस्‍ती बसाने पर टिकी हुई है। स्‍पेसएक्‍स के सीईओ मस्‍क का भी यह सपना है और इस सपने को पूरा करने की दिशा में उन्‍होंने अपना पहला कदम बढ़ा दिया है और इसमें उन्‍हें सफलता भी मिल गई है। फाल्‍कन हैवी को लॉन्‍च करने का मुख्‍य मकसद मंगल और चांद पर लोगों को भेजना और वहां मानव बस्‍ती बसाना ही है। यह लोगों के लिए भी बेहद रोमांचकारी है, मगर देखना होगा कि मस्‍क का यह सपना पूरा होता है या नहीं।

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मशरूम के होते हैं अनेक फायदे: घर बैठे पाइये 100% सेहतमंद मशरूम प्रोडक्ट्स

मशरूम स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त रोगरोधक सुपाच्य खाध पदार्थ है। इसमें एमीनो एसिड, खनिज, लवण, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं।

सेहत का खजाना ‘मशरूम’

वेजिटेरियन हों या फिर नॉन वेजिटेरियन, मशरूम की सब्‍जी हर किसी को पसंद होती है। और भला हो भी क्यों ना, यह स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त रोगरोधक सुपाच्य खाध पदार्थ जो है। इसमें एमीनो एसिड, खनिज, लवण, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं। चीन में तो इसे महौषधि एवं रसायन सदृश्य माना जाता है। वहीं रोम के लोग मशरूम को र्इश्वर का आहार मानते हैं। भारत में उगने वाले मशरूम की दो सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रजातियां वाइट बटन मशरूम और ऑयस्टर मशरूम है।

सेहत का खजाना 'मशरूम'

प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए मजबूत

मशरूम में मौजूद एंटी ऑक्‍सीडेंट हमें हानिकारक फ्री रेडिकल्‍स से बचाते हैं। मशरूम का सेवन करने से शरीर में एंटीवाइरल और अन्‍य प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है, जो शरीर की कोशिकाओं को रिपेयर करता है। यह एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है जो कि माइक्रोबियल और अन्‍य फंगल संक्रमण को भी ठीक करता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए मजबूत

हृदय रोगों से बचाव

मशरूम में हाइ न्‍यूट्रियंट्स पाये जाते हैं, इसलिये ये दिल के लिये भी अच्‍छे होते हैं। साथ ही मशरूम में कुछ प्रकार के एंजाइम और रेशे पाए जाते हैं जो हमारे कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करते हैं।

हृदय रोगों से बचाव

कैंसर के लिए मशरूम

मशरूम का सेवन करने से प्रोस्‍टेट और ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाव होता है। क्योंकि इसमें बीटा ग्‍लूकन और कंजुगेट लानोलिक एसिड होता है जो कि एक एंटी कासिजेनिक प्रभाव छोड़ते हैं। कई शोध भी इस बात का समर्थन करती हैं कि मशरूम में मौजूद तत्व कैंसर के प्रभाव को कम करते हैं।

कैंसर के लिए मशरूम

मधुमेह

मधुमेह रोगियों के लिए मशरूम उत्तम आहार माना जाता है। मशरूम में शर्करा (0.5 प्रतिशत) और स्टार्च की मात्रा बहुत कम होते हैं। इनमें वो सब कुछ होता है जो किसी मधुमेह रोगी को चाहिये। मशरूम में विटामिन, मिनरल और फाइबर होते हैं। साथ ही इमसें फैट, कार्बोहाइड्रेट और शुगर भी नहीं होती, जो कि मधुमेह रोगी के लिये जानलेवा है। यह शरीर में इनसुलिन के निर्माण में भी मदद करता है।

मधुमेह

मोटापा से बचाए

मशरूम में लीन प्रोटीन होता है जो कि वजन घटाने में मददगार होता है। मोटापा कम करने वालों को प्रोटीन डाइट लेने की सलाह दी जाती है, जिसके लिए मशरूम खाना बेहतर विकल्पों में से एक माना जाता है।

मोटापा से बचाए

मैटाबॉलिज्‍म करे मजबूत

मशरूम में विटामिन ‘बी’ होता है जो कि भोजन को ग्‍लूकोज़ में बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन बी-2 और बी-3 भी मैटाबॉलिज्‍म को दुरुस्त रखते हैं। इसलिए मशरूम खाने से मैटाबॉलिज्‍म बेहतर बना रहता है।

मैटाबॉलिज्‍म करे मजबूत

पेट के विकार करे दूर

ताजे मशरूम में पर्याप्त मात्रा में रेशे (लगभग 1 प्रतिशत) व कार्बोहाइड्रेट तन्तु होते हैं, इसका सेवन करने से कब्ज, अपचन, अति अम्लीयता सहित पेट के विभिन्न विकारों से बचाव होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर में कोलेस्ट्राल एवं शर्करा का अवशोषण भी कम होता है।

पेट के विकार करे दूर

हीमोग्लोबिन रखे ठीक

मशरूम का सेवन रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है। इसके अलावा इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है जो केवल मांसाहारी खाध पदार्थो में होता है। अत: लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी की शिकार अधिकांश शाकाहारी ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये ये सर्वोत्तम आहार है।

हीमोग्लोबिन रखे ठीक

कुपोषण से बचाए

मशरूम गर्भवस्था, बाल्यावस्था, युवावस्था तथा वृद्धावस्था तक सभी चरणों में उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, विटामिन, खनिज, वसा तथा कार्बोहाइड्रेट बाल्यावस्था से युवावस्था तक कुपोषण से बचाते हैं। इसलिए डॉक्टर भी इसे खाने की सलाह देते हैं।

कुपोषण से बचाए

ट्यूमर को रोके

मशरूम में कालवासिन, क्यूनाइड, लेंटीनिन, क्षारीय एवं अम्लीय प्रोटीन की उपस्थिति मानव शरीर में टयूमर बनने से रोकती है। साथ  ही इसमें लगभग 22-35 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। जो पौधों से प्राप्त प्रोटीन से कही अधिक होती है तथा यह शाकभाजी व जन्तु प्रोटीन के मध्यस्थ का दर्जा रखता है।
इसमें प्यूरीन, पायरीमिडीन, क्यूनान, टरपेनाइड इत्यादि तत्व भी होते है जो जीवाणुरोधी क्षमता प्रदान करते है।

ट्यूमर को रोके

मशरूम और AdTo.In

आपको जानकर ख़ुशी होगी की हमारी कंपनी उत्तराखंड की एक अग्रणी मशरूम उत्पादक कंपनी सौम्या फूड्स के साथ हाथ मिला चुकी है और जल्द ही AdTo पर मशरूम के कई उत्पादों जैसे ओएस्टर मशरूम, बटन मशरूम, मिल्की मशरूम पिकल, बटन मशरूम पिकल, ओएस्टर मशरूम पिकल, मिक्स मशरूम पिकल, शिटाके और गैनोडर्मा मशरूम के साथ साथ औषिधीय गुणों से युक्त पहाड़ों की अनमोल खाद्य वस्तु कीड़ाजड़ी भी आप ऑनलाइन आर्डर कर घर बैठे प्राप्त कर सकेंगे।