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अच्छी खबर करिश्माई खेती की: डेढ़ लाख लगाकर इस किसान ने 70 दिन में कमाए 21 लाख रुपये

गुजरात के बनासकांठा जिले में एक सातवीं पास किसान सुर्खियों में छाया हुआ है. दरअसल, उसने फसल उगाने की ऐसी तरकीब अपनाई कि महज 70 दिन में 21 लाख रुपये का मुनाफा कमा लिया.

इस किसान का नाम है खेताजी सोलंकी. उसने अपने सात बीघा के खेत में आलू की जगह खरबूजे की फसल बोने का फैसला किया, लेकिन इसमें उन्होंने आधुनिक तकनीकों की मदद ली.

खेताजी सोलंकी ने बेहतर बीज, टपक सिंचाई और सोलर वॉटर पंप का इस्तेमाल किया. उनके खेत में 140 टन खरबूजा पैदा हुए. उन्होंने 1.21 लाख रुपये खर्च किए थे. पैदावार इतनी अच्छी थी कि उन्हें उसे बेचने के लिए कहीं जाना भी नहीं पड़ा बल्कि दूसरे राज्यों से व्यापारी उनके पास आकर खरबूजा खरीदकर ले गए. उन्हें इसके काफी अच्छे पैसे मिले. फरवरी में लगाई फसल अप्रैल में तैयार हो गई और 70 दिन में उन्होंने 21 लाख रुपये कमा लिए.

 

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सबसे मंहगी इस बाइक की खूबियां कर देंगी आपको हैरान, कीमत उड़ा देगी होश

दुनियाभर में सबसे ज्यादा कस्टमाइज्ड बाइक्स के शौकीनों के लिए हार्ले-डेविडसन पहली पसंद बनी हुई है और इसी पसंद को बरकरार रखने के लिए हार्ले-डेविडसन ने अपनी दुनिया की सबसे महंगी बाइक पेश की है, जिसका कीमत के आधार पर मुकाबला शायद ही कोई बाइक कर पाए। हार्ले डेविडसन की यह बाइक हीरों से जड़ी हुई है और इसे ब्लू एडिशन में बनाने के लिए वॉच और ज्वेलरी कंपनी बुकेरर के साथ बुंडनरबाइक के साथ साझेदारी की है।

हार्ले डेविडसन ब्लू एडिशन सॉफ्टेल स्लिम एस पर आधारित इस बाइक का बॉडीवर्क पर कस्टम रेट्रो-स्टाइल में काम किया गया है। कंपनी के मुताबिक इस मोटरसाइकिल के हर बॉडी पार्ट की वेल्डिंग, बीटिंग, शेप देना और पॉलिश करने जैसे सारे काम हाथों से किए गए हैं। इतना ही नहीं बाइक के व्हील रिम्स भी कस्टम-मेड हैं।

बाइक का लीवर, रिसर्वायरकैप, हेडलाइट कवर और फुट कंट्रोल जैसे पार्ट्स को गोल्ड ट्रीटमेंट दिया गया है। इस बाइक के हर पार्ट्स सिल्वर प्लेटेड हैं।

इतना ही नहीं बाइक में अलग-अलग रंगों के छह कोट्स किए गए हैं जिसे कंपनी की तरफ से ‘स्पेशल कोटिंग मेथड’ बताया गया है। बाइक के टॉप फ्यूल टैंक पर दो कटआउट्स हैं, जिसमें लेफ्ट वाले पर 5.40 कैरेट के हीरे वाला सॉलिटियर रिंग दिया गया है।

वहीं, दूसरी तरफ कस्टम-मेड वॉच का इस्तेमाल किया गया है और इसे साधने के लिए रिंग्स हैं ताकि वी-ट्विन मोटर के वाइब्रेशंस से इसे किसी तरह का कोई नुकसान न पहुंचे।

इस बाइक को बनाने के लिए दोनों कंपनियों के 8 लोग, स्विस क्राफ्ट्समेन, जर्मन मोटरसाइकिल डिजाइनर्स ने मिलकर 2500 घंटे तक काम किया है। हार्ले डेविडसन की इस ब्लू एडिशन बाइक को ज्यूरिक में पेश किया गया और करेंट एक्सचेज रेट के हिसाब से इसकी कीमत 12.2 करोड़ रुपये है।

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फ्लिपकॉर्ट में 77% हिस्सेदारी के बाद अब 85% की तैयारी में वॉलमार्ट

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब वॉलमार्ट 3 अरब डॉलर का निवेश कर फ्लिपकॉर्ट की 85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है।

 

इस बात की जानकारी दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर ने शुक्रवार को अमेरिकी सिक्यॉरिटीज और एक्सचेंज कमिशन को दी। रिटेलर ने ये भी बताया कि वॉलमार्ट के बाकी शेयर भी उसी कीमत पर खरीदे जाएंगे जिस कीमत पर 77 फीसदी शेयर खरीदे गए थे।

वॉलमार्ट ने किस दर पर फ्लिपकॉर्ट के शेयरों को हासिल किया यह जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। वॉलमार्ट की फाइलिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लिपकॉर्ट के बड़े निवेशक जापानी इंटरनेट और टैलीकॉम कंपनी सॉफ्टबैंक ने शेयरों को बेचने पर कोई फैसला नहीं किया है। सॉफ्टबैंक के पास फ्लिपकॉर्ट के करीब 22 फीसदी शेयर हैं। इससे पहले मीडिया रिपोर्टस से भी ये बात साने आई थी कि वॉलमार्ट और सॉफ्टबैंक पहले की कीमत पर ही शेयर ट्रांजेक्शन के लिए वक्त निकाल कर बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे।

एसईसी फाइलिंग के अनुसार, वॉलमार्ट 2 अरब डॉलर कैश में निवेश कर रहा है और फ्लिपकॉर्ट के मौजूदा शेयर होल्डर्स से 14 अरब डॉलर मूल्य के शेयर खरीद रहा है। वॉलमार्ट ने कहा है कि वह बोर्ड और फाउंडर की सलाह से फ्लिपकॉर्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीईओ और प्रिंसिपल एग्जिक्युटिव्ज को अपॉइंट या रिप्लेस कर सकता है। फिलहाल कल्याण कृष्णमूर्ति फ्लिपकॉर्ट के सीईओ हैं और को-फाउंडर बिन्नी बंसल ग्रुप सीईओ हैं। को-फाउंडर और एग्जिक्युटिव चैयरमैन सचिन बसंल ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया।

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रिलायंस जियो का कमाल का ऑफर, मुफ्त में मिलेगा 1.1 TB डेटा

मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली कंपनी Jio टेलीकॉम सेक्टर में तूफान लाने के बाद अब अपने कदम ब्रॉडबैंड इंटरनेट की तरफ बढ़ा रही है. कंपनी अपने जियोफाइबर सर्विस के जरिए ब्रॉडबैंड इंटरनेट की दुनिया में कब्जा जमाना चाह रही है.

कंपनी ने देश के चुनिंदा बाजारों में 1.1TB (टेराबाइट) फ्री डेटा के साथ हाई-स्पीड फाइबर टू द होम (FTTH) ब्रॉडबैंड कनेक्शन देना शुरू कर दिया है. इसमें डेटा की स्पीड 100Mbps है. कंपनी इस सर्विस की कमर्शियल ओपनिंग इस साल सेकेंड हाफ में करेगी.

द हिंदू की खबर के मुताबिक, शुरुआत में FTTH प्लान में 100 Mbps की स्पीड के साथ 100GB डेटा मिलेगा. जैसे ही ये डेटा समाप्त हो जाएगा तब ग्राहक एक महीने में 25 बार तक फ्री में 40GB डेटा का रीचार्ज करवा सकेंगे. यानी ग्राहकों को एक महीने में कुल 1,100 GB डेटा मुफ्त में मिलेगा.

कंपनी इस सर्विस को घरेलू और कारोबारी दोनों तरह के ग्राहकों के लिए पेश करेगी. इसके अलावा ग्राहकों को बिना केबल के घर के हर कोने में WiFi कवरेज पहुंचाने के लिए जियो ‘एक्सटेंड’ का भी विकल्प मिलेगा.

जियोफाइबर कनेक्शन प्राप्त करने के लिए ग्राहकों को सिक्योरिटी के तौर पर 4,500 रुपये देने होंगे. साथ ही ये पैसा रिफंड भी कर दिया जाएगा और ये ब्याज मुक्त होगा. कंपनी एक जियो राउटर इंस्टॉल करेगी. इसे सेट-टॉप बॉक्स के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा, जब कंपनी इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) सर्विस लॉन्च करेगी.

रिलायंस जियो के पास देशभर में 3 लाख किलोमीटर से ज्यादा ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क है. फिलहाल कंपनी जियोफाइबर को मुंबई, नई दिल्ली, चेन्नई, अहमदाबाद, वड़ोदरा और जामनगर जैसे शहरों में उपलब्ध करा रही है.

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स्कूटर पर सामान बेचते थे ये दोनों, आज 1 लाख करोड़ रुपये में बेचे कंपनी के 75 फीसदी शेयर!

अमेरिकी कंपनी वाल्मार्ट ने Flipkart में 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है.

आइए जानते है फिल्पकार्ट के सफर के बारे में

 देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में...

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में…

 10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

 शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की. हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम 'Leaving Microsoft to Change the World' और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की.

हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम ‘Leaving Microsoft to Change the World’ और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

 सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

 ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.

ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.

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फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों को पहुंचाएगा फायदा प्राइवेसी लॉ!

यूरोप में अगले माह एक नया नियम का प्रस्ताव आने वाला है, जिसके तहत प्राइवेट लोगों के हाथ में लोगों के निजी डाटा को जाने से सुरक्षित रखा जा सकेगा।

इस नए नियम के तहत कंपनी डाटा शेयर करने से पहले उपभोक्ता से इसके लिए इजाजत लेगी। सरकार के इस कदम से जहां इंटरनेट पर बड़ी कंपनियों का वर्चस्व खत्म होगा। वहीं छोटी कंपनियों को भी फायदा होगा। हाल के वर्षों में कुछ छोटी कंपनियों ने निजता के नियमो का सम्मान किया है, जबकि बड़ी कंपनियों की ओर से हमेशा इन नियमों की अनदेखी की गई है।

टोरंटो विश्वविद्याल के मार्केटिंग प्रोफेसर एवी गोल्डफार्ब ने प्रतिस्पर्धा पर गोपनीयता नियमों के प्रभावों का अध्ययन किया। गोल्डफार्ब वर्ष 2013 की एक रिपोर्ट के सह-लेखक भी थे, जिसमें कहा गया था कि गोपनियाता से बाजार की प्रतिस्पर्धा पर नकारात्मक असर होगा क्योंकि उपभोक्ता से किसी चीज की इजाजत लेना एक छोटी कंपनी की लागत बढ़ा सकता है। ऐसे में ये स्टार्टअप के लिए नुकसानदायक होगा।

फेसुबक के मुताबिक एक राजनीतिक रिसर्च करने वाली कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के करीब 87 मिलियन यूजर्स की गोपनीय जानकारी हासिल करके उसका उपयोग किया। इसी को मुद्दा बनाकर कांग्रेस की ओर से मार्क जुकरबर्ग को निशाना बनाया गया। गूगल की वीडियो सर्विस यूट्यूब को लेकर भी कुछ इसी तरह के सवाल उठ रहे हैं।

मॉडल की जांच कर सकेंगे दूसरे देश

यूरोप और अमेरिका की तरह ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देश प्राइवेसी को लेकर फेसबुक औऱ गूगल जैसी कंपनियों के विज्ञापन आधारित मॉडल की जांच कर सकती है। अमेरिका के कानून निर्माताओं ने इस माह जुकरबर्गक की संसद में गवाही के दौरान सिलिकॉन वैली को गोपनियता के मुद्दे पर ज्यादा विनियमित बनाने पर जोर दिया। यूरोप में ऐसा ही एक प्रयोग सफल रहा है, जब वर्ष 2014 में वहां की उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया कि लोगों की इच्छा के मुताबिक उनके कंटेट को ऑनलाइट होने से हटाया जा सकेगा।

नहीं पड़ा व्‍यापार पर असर

इसके अलावा वर्ष 2011 के यूरोपियन कानून बेबसाइटों की ओर से लोगों को कूकीज के बारे में जानकारी देने को कहा गया, जिससे कि वो ब्राउजिंग हिस्ट्री को सुरक्षित रखा जा सके और कोई इसका दुरुपयोग न कर सके। इसके बाद पॉपअप वार्निंग को लेकर काम किया गया। इसी के साथ आज के दौर में डेटा की गोपनियता के बीच फेसबुक और गूगल के उपयोग को कम किया जा रहा है। फेसबुक की ओर से कहा गया कि कैंब्रिज एनालिटिका घोटाले से उनके व्यापार पर कोई असर नहीं पड़ा है, जबकि गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने कहा इस तिमाही में उनके कर संग्रह में 26 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है।

नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी कंपनियां

यूरोप में डेटा रेग्यूलेशन को लेकर लाए जा रहे कानून को ‘द जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेग्यूलेशन’ का नाम दिया गया है। इस कानून के तहत टेक कंपनियों की ओर से यूजर्स के डेटा कलेक्शन, स्टोर और उनके प्रयोग पर कंट्रोल रखा जा सकेगा। यह नया नियम 25 मई से प्रभाव में आएगा। इसके बाद टेक कंपनियों को बताना होगा कि उन्होंने लोगों का डेटा किस तरह से प्राप्त किया है, कहां प्रयोग किया है, और कहां सुरक्षित किया है। ऐसे में कंपनियां उपभोक्ताओं के समझौते को नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी।

कंपनियां होंगी मजबूत

कुछ लोगों का मानना है कि प्राइवेसी के नियन बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले होंगे। लेकिन छोटी कंपनियों को ये प्रतियोगिता से बाहर कर देंगे। लेकिन पेरिस की एक स्टार्टअप कंपनी के सीईओ की मानें तो डेटा प्रोटेक्शन के नए नियम से कंपनी मजबूत होगी क्योंकि उनका मूल संपत्ति ग्राहक का विश्वास है। गोपनियता कानून के बाद टारगेटेड विज्ञापनों को कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद भी फेसबूक और गूगल जैसी बड़ी कंपनियां फायदे में रहेगी, क्योंकि विज्ञापन देने वाले ज्यादा ऑडियंस उसकी ओर रुख करेंगे। ऐसे में फेसबुक और गूगल की यूट्यूब जैसी कंपनियों को ज्यादा विज्ञापन मिलेगा, जिनके पास क्रमश: 2.2 मिलियन और 1.5 बिलियन मासिक उपभोक्ता हैं।

यूजर्स देंगे सहमति

यूरोपीय डेटा संरक्षण पर्यवेक्षक जोवोवानी बुट्टारेली के मुताबिक गूगल और फेसबुक की निगरानी आयरिश डेटा अथॉरिटी की ओर से की जाएगी, उनके यूरोपीय मुख्यालय आयरलैंड में हैं। उन्होंने छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय को अलग तरह से ट्रीट करने की बात कही। गूगल प्राइवेसी इंजीनियर योनातन जुंगर के मुताबिक बड़ी कंपनियां डेटा को उपयोग करने के लिए शर्त जोड़ सकती हैं, जबकि छोटी कंपनियां ऐसी शर्त नहीं जोड़ पाएंगी। जैसा कि पिछले दिनों फेसबुक ने वैश्विक स्तर पर उपयोगकर्ताओं से नया सहमति फार्म भरवाना शुरु किया है, जिसके तहत थर्ड पार्टी को उपभोक्ता की जानकारी हासिल करने के लिए फेसबुक से इसकी इजाजत लेनी होगी।

नई चुनौती

गोपनियता के आलोचकों ने फेसबुक के नए सहमति फार्म की चुनौती दी है, उनके मुताबिक वे उपयोगकर्ताओं की सूचनाओं को व्यापक रुप में साझा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। न्यू अमेरिका के ओपन टेक्नोलॉजी इंसटीट्यूट के एक वरिष्ठ सलाहकार बेन स्कॉट के मुताबिक नए कानून जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेग्यूलेशन (जीडीपीआर) को लेकर मेरी चिताएं हैं। मैं उन लोगों को लेकर चिंतित हूं, जो जीडीपीआर में काफी कुछ निवेश करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोपनियता कानून कितना सफल होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे किस तरह से लागू किया गया है।

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एक मुलाकात लिटिल ऐप डेवलपर आदित्य चौबे से

खबर है कि महज़ 9 साल की उम्र से एप डेवलप कर रहे आदित्य आज ऑनलाइन ‘आदि” कंपनी के मालिक भी हैं. ये कारनामा है जबलपुर के जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 8वीं में पढ़ने वाले आदित्य चौबे का जो आजकल जावा लैंग्वेज की ऑनलाइन ट्यूशन दे रहे है जिस लैंग्वेज का नाम 2 साल पहले तक सुना भी नहीं था .
एक मुलाकात लिटिल ऐप डेवलपर आदित्य चौबे से

12 साल की उम्र में गूगल प्ले स्टोर में अपने बनाये हुए एप को लेकर चर्चा में आये आदित्य चौबे ने बताया की उनकी यह शुरुआत तब हुई जब एक दिन वो लैपटॉप के नोटपैड पर कुछ काम कर रहे थे जिसमे error आने पर उन्होंने उसे ओपन किया तो जावा लैंग्वेज से पहली बार उनका सामना हुआ था. जिज्ञासु प्रवृति के आदित्य ने उसके बाद से ही लगातार जावा के बारे में पढ़कर कई एप भी बनाये है जिसमे से कुछ खास एप ये है –
1 – कोडरेड बटन एप
2 – लोकेशन लाइट एप
3 – लिसिन ट्यूब एप
4 – चैट बुक एप

आदित्य के पिता धर्मेन्द्र चौबे ऑर्डिनेंस फैक्टरी खमरिया में जूनियर वर्क्स मैनेजर और मां अमिता निजी स्कूल में साइंस टीचर हैं. आदी की बड़ी बहन 12वीं की छात्रा हैं.आदित्य ने अपने पिता की लिए एक स्पेशल कैलकुलेटर एप भी बनाया है जिसमे अनलिमिटेड नंबर्स तक कैलकुलेशन किया जा सकता है . फ़िलहाल आदित्य के 48 एप अभी गूगल प्ले स्टोर व एप्टॉयड पर लोड होने के लिए वेरीफिकेशन मोड पर है जो जल्दी ही प्ले स्टोर पर देखे जा सकते है .

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सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट हैक, ब्राजील के हैकर्स पर शक

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट गुरुवार को हैक हो गई. इस साइबर अटैक में ब्राजीलियन हैकर्स का हाथ बताया जा रहा है. वेबसाइट supremecourtofindia.nic.in खोलने पर ‘पत्ती’ जैसी तस्वीर और ‘hackeado por HighTech Brazil HacTeam’ मैसेज दिख रहा है. हालांकि, अब वेबसाइट पर Site Under Maintenance लिखा दिख रहा है.

बताया जाता है कि 2013 में भी इन हैकरों ने भारतीय वेबसाइट को निशाना बनाया था. सुप्रीम कोर्ट के वेबसाइट न खुलने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसके हैक होने की सूचना भी दी. यूजर्स ने दावा कि साइट डाउन नहीं हुई है बल्‍कि हैक की गई है.

इससे पहले रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट भी हैक हो चुकी है. उस समय अधिकारियों ने बताया था कि वेबसाइट पर चीनी अक्षर में कुछ नजर आ रहा है, जिसके बाद बताया गया कि वेबसाइट हैक हो चुकी है.

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गगनशक्ति 2018: वायुसेना का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, एयरचीफ मार्शल बोले- आसमान को हिलाने का है माद्दा

पिछले तीन दशक में भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े अभ्यास ‘गगन शक्ति-2018’ में पिछले तीन दिनों के अंदर करीब 1100 विमानों ने हिस्सा लिया। जिनमें करीब आधा लड़ाकू विमान थे। वायुसेनाध्यक्ष बी.एस. धनोवा ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान बेहद करीब से इस ऑपरेशन पर नज़र रख रहा था जो “आसमान को हिला रहा है और धरती को चीर रहा है।”

अब वायुसेना अपना अभ्यास वेस्टर्न सेक्टर से ईस्टर्न सेक्टर में करने जा रही है। धनोवा ने कहा कि सभी तरह के प्रशिक्षण को 22 अप्रैल तक दो चरणों में चलनेवाले अभ्यास के चलते सस्पेंड किया जा रहा है। अमूमन यह युद्ध के समय में ऐसा होता है जब सेना की तरफ से सभी गतिविधियों को रोक दिया जाता है।

वायुसेना ने आकाश से दुश्मन के खात्मे का दम दिखाया
भारतीय वायुसेना का युद्धाभ्यास ‘गगन शक्ति 2018’ पिछले एक सप्ताह से पश्चिमी क्षेत्र में जारी है। पैराशुट ब्रिगेड की बटालियन के साथ वायुसेना ने आकाश से दुश्मन की धरती पर निशाना साधने का अभ्यास किया। वहीं पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित कलाईकुंडा एयरबेस से उड़े सुखाई 30 लड़ाकू विमानों ने भी दुश्मन को नेस्तेनाबूत करने का दम दिखाया। इस दौरान लक्षद्वीप तक की उड़ान के दौरान दो बार आकाश में ही सुखोई से सुखोई में ईंधन भरा गया।

वायुसेना ने तैयारी और दमखम को दो हिस्सों में परखा है। पहला पश्चिमी सीमा में और दूसरा उत्तरी सीमा पर। पश्चिमी सीमा के लिए पाकिस्तान सरकार को पूर्व सूचना दी गई। इस चरण में भारतीय सेना पाकिस्तान की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए दम दिखाया। दूसरे चरण में तिब्बत की ओर से चीन की सेना के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए अभ्यास किया।

जैसलमेर, जोधपुर, खड़गपुर में सैन्य विमानों ने हिस्सा लिया
लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना में शामिल होने के बाद पहली बार गगन शक्ति युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहा है। सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, मिग 27, जगुआर व मिराज जैसे 600 लड़ाकू विमान शामिल हैं। बड़े परिवहन विमान सी-17 ग्लोब मास्टर, सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस और अटैक हेलिकॉप्टर एमआई 35, एमआई 17 वी 5, एमआई 17, एएलएच ध्रुव, एएलएच भी शामिल हैं।

अड्डों पर धुआंधार गोलीबारी की गई
जैसलमेर में वायुसेना के विमानों ने विभिन्न ठिकानों को निशाना बनाकर युद्धाभ्यास किया।
‘गगन शक्ति 2018’ युद्धाभ्यास में पहली बार महिला फाईटर पायलट हिस्सा ले रही हैं। युद्धाभ्यास के दौरान स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की पूरी स्कवाड्रन ताकत दिखा रही है।

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रेंज रोवर इवोक कन्वर्टेबल लॉन्च, कीमत 69.53 लाख रूपए

लैंड रोवर ने रेंज रोवर इवोक कन्वर्टेबल को लॉन्च कर दिया है। यह केवल टॉप वेरिएंट एचएसई डायनामिक में उपलब्ध है। इसकी कीमत 69.53 लाख रूपए (एक्स-शोरूम) हैै। यह स्टैंडर्ड इवोक एचएसई डायनामिक से 9.54 लाख रूपए महंगी है।

Range Rover Evoque Convertible

इवोक कन्वर्टेबल को स्टैंडर्ड इवोक पर तैयार किया गया है। फर्क सिर्फ इतना है कि इसकी छत को खोला और बंद किया जा सकता है, जबकि रेग्यूलर मॉडल की छत को खोला और बंद नहीं किया जा सकता। इवोक कन्वर्टेबल की छत को फोल्ड होने में 18 सेकंड लगते हैं, जबकि वापस उसी स्थिति में आने में 21 सेकंड लग जाते हैं। इसकी छत को 48 किमी प्रति घंटा की स्पीड पर खोला और बंद किया जा सकता है।

Range Rover Evoque Convertible

इवोक कन्वर्टेबल की लंबाई 4370 एमएम, चौड़ाई 1900 एमएम और ऊंचाई 1609 एमएम है। यह रेग्यूलर मॉडल से 10 एमएम ज्यादा लंबी, 220 एमएम कम चौड़ी और 26 एमएम कम ऊंची है। इसकी वाटर वेडिंग क्षमता 500 एमएम है। फोल्डेबल रूफ की वजह से इसका बूट स्पेस 73 लीटर कम हुआ है। इसका बूट स्पेस 251 लीटर है।

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इवोक कन्वर्टेबल में नेविगेशन सपोर्ट करने वाला 10 इंच टचस्क्रीन इंफोटेंमेंट सिस्टम, 825 वॉट का 16-स्पीकर्स वाला मैरिडयन सराउंड साउंड सिस्टम, 360 डिग्री कैमरा, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, क्रूज़ कंट्रोल, फ्रंट-रियर पार्किंग सेंसर, रेन-सेसिंग वाइपर और 12 तरह से इलेक्ट्रिक एडजस्ट होने वाली फ्रंट सीटें दी गई है। सुरक्षा और ऑफ-रोडिंग को बेहतर बनाने के लिए इस में टरेन रिस्पॉन्स सिस्टम, एबीएस, ईबीडी, ट्रेक्शन कंट्रोल, रोल स्टेबिलिटी कंट्रोल, ट्रेलर स्टेबिलिटी असिस्ट और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम दिया गया है।

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इवोक कन्वर्टेबल में 2.0 लीटर का एसआई4 पेट्रोल इंजन लगा है, जो 241 पीएस की पावर और 340 एनएम का टॉर्क देता है। यह इंजन 9-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स से जुड़ा है, जो सभी पहियों पर पावर सप्लाई करता है। इसकी टॉप स्पीड 217 किमी प्रति घंटा है। 0 से 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पाने में इसे 8.1 सेकंड का समय लगता है।

(Source : CARDEKHO)