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देश के सबसे बड़े सूबे के तौर पर उत्तर प्रदेश की पहचान होती है। एक कहावत भी है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है। लेकिन उत्तर प्रदेश को एक और नाम से जाना जाता है जिसे बीमारू कहते हैं। पीएम मोदी 2014 के चुनाव से पहले अपनी जनसभाओं में कहा करते थे कि एक ऐसा सूबा जो प्राकृतिक संसाधनों से लैस है,एक ऐसी धरती जहां के लोग कुछ कर गुजरने की माद्दा रखते हैं लेकिन नीतियों के अभाव में अदूरदर्शी निर्णयों की वजह से भारत मां का ये हिस्सा विकास की रेस में पिछड़ गया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का असाधारण प्रदर्शन रहा और इस बात की उम्मीद जगने लगी कि शायद अब कुछ बदलाव की बयार महसूस होगी। यूपी सरकार अपने कार्यकाल के एक साल पूरा करने से पहले दो दिवसीय इंवेस्टर्स समिट के जरिए ये संदेश देने की कोशिश कर रही है यूपी में अब निवेश सुरक्षित है और उस दिशा में सरकार एक कदम बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। इंवेस्टर्स समिट के पहले दिन 4 लाख 28 हजार करोड़ के एक हजार से ज्यादा करार पर दस्तखत हुए। इन करारों की सबसे बड़ी खासियत ये है कि देश का दूसरा डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को बुंदेलखंड में स्थापित किया जाएगा जिससे ढ़ाई लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकेगा। लेकिन एक सवाल ये भी है कि क्या ये यूपी की सूरत और सीरत को बदलने की कवायद है या 2019 के लक्ष्य को साधने की कोशिश है। इस गूढ़ सवाल का जवाब तलाशने से पहले ये जानना जरूरी है कि पीएम मोदी इन्वेस्टर्स समिट में क्या कुछ कहा।
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