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प्रतिभा किसी उम्र, जगह, परिवार या वातावरण की मोहताज नहीं होती। आपने महान वैज्ञानिक अब्दुल कलाम की जीवनी पड़ी होगी, बिल्कुल वैसी ही कुछ दास्तां है प्रताप की जो कि 14 वर्ष की उम्र से ड्रोन बना रहें हैं और विज्ञान में इनकी विलक्षण रुचि और सीखने की कला बचपन से है। एक बेहद गरीब परिवार में जहाँ दूसरों के खेतों में मजदूरी करके गुजारा होता हो, प्रताप जैसे हीरे का होना मुश्किल होता है। कुछ परिस्थितियों से हार जाते हैं तो कुछ मन से, लेकिन जो हार नहीं मानते वो इतिहास बनाते हैं और ऐसा ही इतिहास रचना शुरू किया है प्रताप ने! Prathap nm drone प्रताप कर्नाटक के मांड्या जिले की मलावली तालुका के नेटकल गांव के किसान दम्पति मरीमडैया और सविता के गौरवशाली सुपुत्र हैं। भले ही महीने की कुछ हजार की परिवारिक आय हो लेकिन इनकी रुचि बचपन से बाज, हैलीकॉप्टर और ऐरोप्लेन में रही। Pratap nm drone प्रताप को स्कूल के समय में साइंस प्रोजेक्ट्स में कई सारे ईनाम मिले और ये अपने घर के पास साइबर कैफे में रोल्स रॉयस, बोइंग, नासा जैसी वेबसाइटों को पढ़ा करते थे। इंजीनियरिंग के लिए रुपए न होने पर इन्होंने मैसूर के JSS College से फिजिक्स में BSc करी। होस्टल में फीस टाइम पर न देने पर इनको इनको होस्टल से बाहर कर दिया गया जहाँ से बस स्टैंड पर सोकर और पब्लिक टॉयलेट में कपड़ों को धोकर इन्होंने पढ़ाई का समय गुजारा।
N M Prathap
Youth Conclave 2019
अपनी लगन से खुद C++, JAVA और Python सिख के इन्होंने E-Waste से ड्रोन बनाने का काम शुरू किया। एडिसन के बल्ब के असफल प्रयोग तो सबको याद होंगे पर प्रताप की लगन का कोई सानी नहीं है। इन्होंने करीब 80 बार असफल ड्रोन बनाया परन्तु हार जैसा शब्द इनको मालूम ही नहीं है और इसी तरह फोन, ऐसी जैसे उपकरणों के टूटे कबाड़ से इन्होंने सफल ड्रोन बनाया और हर दिन उसको बेहतर बनाते रहे, रुके नहीं। इन्होंने अभी तक 600 से ज्यादा ड्रोन बना कर 50 से ज्यादा देशों में भेजे हैं जहाँ इनके ड्रोन से अफ्रीका में आपात अवस्था मे 8 मिनट के भीतर दवाई पहुंचाई गई जिसके न मिलने से मरीज की जान जा सकती थी और रोड का सफर 10 घंटे का था। जीहां प्रताप द्वारा बनाए ड्रोन सिर्फ ड्रोन नहीं है, ये 250 किलोमीटर प्रति घण्टा की गति से भी तेज उड़ सकते हैं। Pratap testing drone IIT Delhi के ड्रोन प्रतियोगिता में इन्होंने दूसरा स्थान जीत कर सबको हैरान कर दिया। फिर उस प्रतियोगिता के प्रबंधकों ने इन्हें जापान में दिसंबर 2017 में विश्व ड्रोन प्रतियोगिता में हिस्सा लेने को कहा। इसके लिए थीसिस पास होनी आवश्यक थी और जाने के खर्च के लिए बहुत सी रकम भी। IIT Madras के एक प्रोफेसर को इन्होंने अपनी थीसिस मंजूर करने को राजी किया और मैसूर के एक समाजसेवी ने इनके फ्लाइट टिकट का खर्च उठाने की बात मान ली। परन्तु फिर भी होने वाले अन्य खर्च को इनकी माँ ने मंगलसूत्र बेच के इनको रुपए दिए। जब प्रताप जापान एयरपोर्ट पर उतरे तो इनके पास 1400 रुपए थे जिसको बचाने के लिए इन्होंने बुलेट ट्रेन न इस्तेमाल कर तीन ट्रेन बदल कर और 8 किलोमीटर पैदल चल के उस प्रतियोगिता स्थल पर पहुंचे जहां 127 देशों के शीर्ष ड्रोन वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया हुआ था। अपने ई वेस्ट से बनाए सुपरड्रोन 'ईगल' से इन्होंने प्रथम स्थान पर आकर गोल्ड मैडल जीता। दूसरे पर अमेरिका और तीसरे स्थान पर जापान रहा। Pratap super drone जब प्रारम्भ में कोई पुरस्कार न मिलने से यह निराश होकर जाने लगे, फिर द्वितीय के बाद जब प्रथम पुरस्कार पर घोषणा हुई, " Please Welcome Pratap, Gold Medalist from India" तब इनकी मेहनत को सही फ़ल मिला। इसके बाद नोबल विजेता हिदेकी शिराकवा ने इनको अपने घर आमंत्रित किया जो कि बेहद सफल अनुभव रहा। भारत लौटकर इनको चारों ओर प्रशंसा और सम्मान मिले। इसके बाद 2018 में जर्मनी में इंटरनेशनल एक्सहिबिशन में 'अल्बर्ट आइंस्टाइन इन्नोवेशन मेडल' जीत के एक और इतिहास रचा। जर्मनी, जापान और फ्रांस के करोड़ों रुपये के पैकेज को ठुकरा के इन्होंने भारत के लिए कार्य करना जारी रखा। सेना को इनके बनाए ईगल की बहुत आवश्यकता है जो बेहद दूर से इंसानो और छिपे हुए इंसानो की पहचान करने में सक्षम है जिसको देश की सीमा और आपदा प्रबंधन में उपयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने प्रताप को बतौर वैज्ञानिक DRDO में नियुक्ति दी जिसे प्रताप ने सहर्ष स्वीकार किया और अपने आदर्श भारतरत्न पूर्व राष्ट्रपति APJ अब्दुल कलाम के दिखाए देशसेवा के मार्ग पर चलने का दृण संकल्प किया। प्रताप की प्रेरणादायक जीवनगाथा आपको भी हर परिस्थिति में आगे बढ़ते रहने का हौसला देती है और यह भी सिखाती है कि चाहे जो हो जाए पर लक्ष्य को सिद्ध करने के प्रयास निरन्तर करके ही आप सफल हो पाते हैं। अपने आइडिया को आगे बढ़ाने और बिजनेस को ऑनलाइन ब्रांड बनाने के लिए आज ही AdTO Destination से जुड़ें।
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