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सबसे मंहगी इस बाइक की खूबियां कर देंगी आपको हैरान, कीमत उड़ा देगी होश

दुनियाभर में सबसे ज्यादा कस्टमाइज्ड बाइक्स के शौकीनों के लिए हार्ले-डेविडसन पहली पसंद बनी हुई है और इसी पसंद को बरकरार रखने के लिए हार्ले-डेविडसन ने अपनी दुनिया की सबसे महंगी बाइक पेश की है, जिसका कीमत के आधार पर मुकाबला शायद ही कोई बाइक कर पाए। हार्ले डेविडसन की यह बाइक हीरों से जड़ी हुई है और इसे ब्लू एडिशन में बनाने के लिए वॉच और ज्वेलरी कंपनी बुकेरर के साथ बुंडनरबाइक के साथ साझेदारी की है।

हार्ले डेविडसन ब्लू एडिशन सॉफ्टेल स्लिम एस पर आधारित इस बाइक का बॉडीवर्क पर कस्टम रेट्रो-स्टाइल में काम किया गया है। कंपनी के मुताबिक इस मोटरसाइकिल के हर बॉडी पार्ट की वेल्डिंग, बीटिंग, शेप देना और पॉलिश करने जैसे सारे काम हाथों से किए गए हैं। इतना ही नहीं बाइक के व्हील रिम्स भी कस्टम-मेड हैं।

बाइक का लीवर, रिसर्वायरकैप, हेडलाइट कवर और फुट कंट्रोल जैसे पार्ट्स को गोल्ड ट्रीटमेंट दिया गया है। इस बाइक के हर पार्ट्स सिल्वर प्लेटेड हैं।

इतना ही नहीं बाइक में अलग-अलग रंगों के छह कोट्स किए गए हैं जिसे कंपनी की तरफ से ‘स्पेशल कोटिंग मेथड’ बताया गया है। बाइक के टॉप फ्यूल टैंक पर दो कटआउट्स हैं, जिसमें लेफ्ट वाले पर 5.40 कैरेट के हीरे वाला सॉलिटियर रिंग दिया गया है।

वहीं, दूसरी तरफ कस्टम-मेड वॉच का इस्तेमाल किया गया है और इसे साधने के लिए रिंग्स हैं ताकि वी-ट्विन मोटर के वाइब्रेशंस से इसे किसी तरह का कोई नुकसान न पहुंचे।

इस बाइक को बनाने के लिए दोनों कंपनियों के 8 लोग, स्विस क्राफ्ट्समेन, जर्मन मोटरसाइकिल डिजाइनर्स ने मिलकर 2500 घंटे तक काम किया है। हार्ले डेविडसन की इस ब्लू एडिशन बाइक को ज्यूरिक में पेश किया गया और करेंट एक्सचेज रेट के हिसाब से इसकी कीमत 12.2 करोड़ रुपये है।

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अमेरिका के प्रतिबंध पर करारा जवाब देगा रूस, दूसरे शीत युद्ध का हो सकता है आगाज

रूस ने अमेरिका के लगाए नए प्रतिबंधों पर हाथ पर हाथ रख बैठने की जगह मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही है। दरअसल, पूर्व जासूस सरगेई स्क्रीपाल को जहर देने के बाद से दोनों के बीच राजनयिक संकट पैदा हो गया। इसके बाद अमेरिका ने रूस के सात सबसे प्रभावशाली कुलीनों, 12 कंपनियों, 17 वरिष्ठ अधिकारियों और हथियार निर्यातक सरकारी कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया है।

2016 में राष्ट्रपति चुनाव, साइबर युद्ध और यूक्रेन व सीरिया में दखल के लिए अमेरिका ने रूस को सजा देने के लिए कानून बनाया था। इसी आधार पर शुक्रवार को प्रतिबंध लगाया गया।

इसपर सख्त रुख अपनाते हुए रूस ने कहा, हम रूस के खिलाफ लिए गए हर कदम का करारा जवाब देंगे। रूस के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘अमेरिका पहले भी 50 चरणों में प्रतिबंध लगाकर भी कुछ हासिल नहीं कर पाया। इसलिए वह वीजा जारी न करने और रूसी औद्योगिक कंपनियों की संपत्ति जब्त करने की धमकी दे रहा है। शायद वह भूल गया है कि निजी संपत्ति जब्त करना चोरी है। प्रतिबंध लगाने से अमेरिका खुद ही बाजार अर्थव्यवस्था और स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा का दुश्मन बन रहा है।’

दूसरे शीत युद्ध का हो सकता है आगाज
अमेरिका ने अल्यूमीनियम कारोबारी ओलेग डेरीपास्का और सरकारी उर्जा कंपनी गजप्रौम के निदेशक एलेक्सी मिलर पर प्रतिबंध लगाया है। ओलेग पर रूसी सरकार के लिए काम करने का आरोप है। ये दोनों राष्ट्रपति पुतिन के करीबी माने जाते हैं। अमेरिका के इस कदम से एक बार फिर शीत युद्ध हो सकता है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि किसी तरह का दबाव हमें अपने मकसद से नहीं भटका सकता है।
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वसुंधरा राजे का चुनावी बजट, खोला घोषणाओं का पिटारा

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सोमवार को वर्तमान सरकार का पांचवा और अंतिम बजट पेश किया। बजट में करीब 9 माह बाद होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव की छाया साफ तौर पर नजर आई। सबसे बड़े वोट बैंक किसानों को साधने का पूरा प्रयास किया गया। बजट के माध्यम से वसुंधरा राजे ने किसान,युवा और सरकारी कर्मचारियों के वोट बैंक पर पूरा फोकस किया इन तीनों वर्गों को लुभाने के लिए वसुंधरा राजे ने कई बड़ी घोषणाएं की।

इसके साथ ही हाल ही में सम्पन्न दो लोकसभा और एक विधानसभा उप चुनाव में पार्टी के परम्परागत वोट बैंक सवर्ण जातियों को हाथ से जाते देख,वसुंधरा राजे ने आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग को एक बार फिर अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया। वसुंधरा राजे ने किसानों का 50 हजार रूपए तक का कर्ज माफ करने की घोषणा की । लघु एवं सीमांत किसानों के लिए की गई इस घोषणा से राज्य सरकार पर 8 हजार करोड़ रूपए का वित्तीय भार पड़ेगा । इसके तहत 30 सितम्बर,2017 के 50 हजार रूपए तक के कर्ज एक बार में माफ होंगे और फिर भविष्य में यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी। राजस्थान राज्य कृषक श्रृण राहत आयोग का गठन कर कर्ज माफी की प्रक्रिया को जारी रखने की भी मुख्यमंत्री ने घोषणा की। भविष्य में किसानों को आयोग में कर्ज माफी के लिए आवेदन करना होगा। किसानों को एक बड़ी राहत देते हुए राजफैड के माध्यम से समर्थन मूल्य पर सरसों और चने की फसल को समर्थन मूल्य पर खरीदने की भी घोषणा की गई। इसके लिए 500 करोड़ रूपए का ब्याज मुफ्त कर्ज दिया जाएगा।

किसानों को खेत में पानी के छोटे तालाब बनाने के लिए लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान के साथ ही नहरी क्षेत्र में डिग्गी निर्माण पर अधिकत 3 लाख रूपए तक का अनुदान देने की भी घोषणा की गई है। इसके लिए 90 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। किसानों को जनवरी,2012 तक के लंबित 2 लाख विधुत कृषि कनेक्शन देने की भी घोषणा की गई है। किसानों के बाद सबसे अधिक राहत युवा वर्ग को देते हुए विभिन्न विभागोंमें 1 लाख,8 हजार पदों पर भर्ती करने की घोषणा की गई है । इसमें शिक्षा विभाग में तृतीय श्रेणी से लेकर लेक्चरार तक के 77 हजार 100 पदों,प्रशासनिक सुधार विभाग में 11,930,चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में 6571,वन विभाग में 500 फोरेस्टर और 2 हजार फोरेस्ट गार्ड के पदों पर भर्ती शामिल होगी । राज्य के दो बड़े वोट बैंक किसान और युवाओं को कर्ज माफी और नौकरियों से साधने की कोशिश के बाद एक बड़े वोट बैंक सरकारी कर्मचारियों को भी लुभाने का प्रयास किया गया है । मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार की तर्ज पर राजस्थान में भी महिला कर्मचारियों को अधिकतम 2 वर्ष की बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश देने की घोषणा की है। इसके साथ ही 1 अप्रेल,2018 से सातवें वेतन आयोग के एरियर की राशि के भुगतान की घोषणा भी की गई ।

आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को लोन- हाल ही में सम्पन्न दो लोकसभा और एक विधानसभा चुनाव में भाजपा के परम्परागत वोट बैंक सवर्ण जातियों को दूर होते देख मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आर्थिक रूप से पिछड़ी सवर्ण वर्ग के युवाओं के लिए “सुंदर सिंह भंडारी ईबीसी स्वरोजगार योजना” की घोषणा की । इस योजना के तहत 50 हजार परिवारों को 50 हजार रूपए तक का कर्ज 4 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाएगा । इसके साथ ही दलित वोट बैंक को आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ जोड़ने के लिए अजजा,जजा वित्त एवं विकास सहकारी निगम के 2 लाख रूपए तक के बकाया कर्ज एवं ब्याज माफ करने की भी घोषणा बजट में की गई है । इससे राज्य सरकार पर 114 करोड़ का भार पड़ेगा । छोटे कामगारों को 2 लाख रूपए तक का ब्याज मुक्त कर्ज और ” पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत अंत्योदय स्वरोजगार योजना ” के तहत 50 हजार परिवारों को 50 हजार रूपए तक के कर्ज 4 प्रतिशत की ब्याज दर पर उपलब्ध कराए जाने की भी बजट में घोषणा की गई ।

सस्ते होंगे घर,शहरी मतदाताओं का रखा ध्यान

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने वर्तमान कार्यकाल के अंतिम बजट में रियल स्टेट और शहरी मतदाओं को भी राहत देने की कोशिश की। जीएसटी और नोटबंदी के बाद रियल स्टेट सेक्टर में आई भारी मंदी को संजीवनी देने का प्रयास वसुंधरा राजे ने बजट में किया है। सबसे बड़ी राहत डीएलसी दरों में 10 फीसदीकी कटौती करने की घोषणा है। इससे मकान और जमीन खरीदना सस्ता होगा। इस कटौती के बाद रजिस्ट्री भी सस्ती होगी।

दरअसल,रजिस्ट्री का आधार डीएलसी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जन आवास योजना में ईडब्लूएस और एलआईजी श्रेणी लोगों के पक्ष में आवंटित आवासीय यूनिटों के दस्तावेजों पर स्टाम्प ड्यूटी 2 और 3:5 प्रतिशत से घटाकर 1 और 2 प्रतिशत की गई है। मुख्यमंत्री ने मिक्स लैंड यूज के पट्टों की भूमि का मूल्यांकन वाणिज्यक भूमि की मूल्यांकन दर से 75 फीसदी के स्थान पर 50 फीसदी की दर से करने और रियल स्टेट मंदी को देखते हुए 3000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल के आवासीय एवं व्यावसायिक भूखंडों के मूल्यांकन पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त रियायत देने की घोषणा की है। आईटी सेक्टर,मनोजरंजन एवं पर्यटन इकाईयों के लिए बहुमंजिला व्यवसायिक भवनों में स्पेस या फ्लोर खरीद पर देय स्टाफ ड्यूटी में 50 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा भी बजट में की गई है। मुख्यमंत्री ने कृषि भूमि पर लगने वाले भू-राजस्व को माफ करने की भी घोषणा की है । इसका फायदा प्रदेश के 50 लाख किसानों को होगा।

गौशालाओं का अनुदान बढ़ाया,नंदी गौशालाओं की स्थापना

गायों को लेकर समय-समय पर होने वाली राजनीति के बीच मुख्यमंत्री ने बजट में राज्य के प्रत्येक जिले में एक नंदी गौशाला को गौ संरक्षण के लिए 50 लाख रूपए का अनुदान देने की घोषणा की। इसके साथ ही गौशालाओं को चारा पशु आहार के लिए सहायता 3 माह से बढ़ाकर 6 माह करने,पंजीकृत गौशालाओं में आधारभूत संरचना के विकास हेतु संरक्षण निधि से 50 करोड़ और ऊंटनी के दूध का प्रसंस्करण एवं विपणन करने के लिए 5 करोड़ की लागत से जयपुर में मिनी प्लांट लगाने की भी घोषणा की गई ।

कमलेश नागरकोटी को 25 लाख का ईनाम

मुख्यमंत्री ने बजट में अंडर-19 विश्वकप में अपनी तेज और धारदार गेंदबाजी की बदौलत देश को वर्ल्ड कप दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कमलेश नागरकोटी को 25 लाख रूपए का ईनाम देने की घोषणा की । कमलेश नागरकोटी राजस्थान में बाड़मेर जिले के निवासी है ।

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सीरिया के अखाड़े में तुर्की बनाम अमरीका

मध्य पूर्व के पांच देशों के दौरे पर निकले अमरीकी रक्षा मंत्री रेक्स टिलरसन का पहला पड़ाव मिस्र है. इस दौरे में वे तुर्की भी जाने वाले हैं.

अमरीका-तुर्की संबंधों के लिहाज से टिलरसन की ये यात्रा अहम मानी जा रही है. राष्ट्रपति ओबामा के समय से ही दोनों देशों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखा गया है

लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन में अमरीका-तुर्की के रिश्ते ज़्यादा बिगड़े हैं.

ये आशंका जताई जा रही है कि सीरिया के मोर्चे पर नैटो के दोनों सहयोगी देशों के बीच भिड़ंत हो सकती है. टिलरसन की यात्रा का मक़सद इस तनाव को कम करना है.

दरअसल दोनों मुल्कों के बीच सीरिया के मनबिज में अमरीका की मौजूदगी को लेकर है जहां सात फरवरी को एक अमरीकी कमांडर के जाने के बाद संघर्ष तेज़ हो गया.

रेक्स टिलरसनइमेज कॉपीरइटALEX WONG/GETTY IMAGES
Image captionरेक्स टिलरसन मध्य पूर्व के पांच देशों के दौरे पर हैं

क्या हुआ था?

तुर्की ने अपनी उत्तरी सीमा के पास सीरिया के आफ़रीन इलाके से कुर्द लड़ाकों को खदेड़ना के लिए वहां 20 जनवरी को हवाई हमला किया था.

इससे मनबिज के अगला निशाना होने के संकेत मिले थे.

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तेयेप अर्दोआन ने 20 जनवरी को कहा था, “ऑपरेशन आफ़रीन जमीन पर उतर चुका है. इसके बाद मनजिब होगा.वह इस बात को अब तक कई बार दोहरा भी चुके हैं.”

आफ़रीन और म​नजिब पर कुर्दिश बलों का कब्ज़ा है जिसे तुर्की निर्वासित कुर्दिस्तान श्रमिक पार्टी (पीकेके) का विस्तार मानता है.

हालांकि, मनजिब में अमरीकी सैनिक कुर्द बलों के साथ मौजूद हैं और यहां तुर्की और अमरीका एक-दूसरे के सामने-सामने हैं.

तुर्की, अमरीका, कु्र्दइमेज कॉपीरइटAFP

मनजिब में अमरीकी कमांडर

अर्दोआन ने अमरीकी सेना को कई बार इस इलाके से जाने के लिए कहा है.

उन्होंने 6 फरवरी को टीवी पर दिए एक भाषण में अमरीका को लेकर कहा था, “उन्होंने कहा था… हम मनजिब से पीछे हट जाएंगे, हम वहां नहीं रहेंगे… तो फिर वो वहां क्यों रुके हैं? आपको चले जाना चाहिए.”

इसके तुरंत बाद सात फरवरी को अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के कमांडर लेफ्टिनेंट जेन पॉल फंक ने मेजर जनरल जेमी जर्राड के साथ मनबिज का दौरा किया.

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, “तुर्की के राष्ट्रपति के चेतावनी देने के बाद से यह किसी वरिष्ठ अमरीकी सैन्य अधिकारी का पहला दौरा था. राष्ट्रपति ने मनबिज को आतंकवादियों का गढ़ कहते हुए अमरीकी सेना के वहां से जाने की मांग की थी.”

अमरीकी सैन्य अधिकारी के दौरे की तस्वीरें तुर्की के अख़बारों के पहले पन्ने पर छपी थीं और उन्हें ‘अक्खड़’ कहा गया था.

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मनबिज क्यों महत्वपूण है?

मनबिज अरब विद्रोही समूहों और अलेप्पो प्रांत में कुर्द बलों के बीच संघर्ष की जगहों में से एक है.

इस क्षेत्र में साल 2011 में विरोध प्रदर्शन हुए और यह साल 2014 में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के कब्ज़े से पहले विपक्षी विद्रोही गुटों के नियंत्रण में था.

साल 2016 में अमरीका समर्थित कुर्दों के नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) ने मनबिज मिलिट्री काउंसिल बनाई.

एसडीएफ एक बहु-जातीय गठबंधन है जिसमें सीरिया से सक्रिया कुर्द नेतृत्व वाली पीपल्स प्रोटेक्शन यूनिट (वाईपीजी) प्रमुख दल है.

लेकिन तब से एसडीएफ और अरब जनजाति के बीच कई मसलों पर तनाव बढ़ गया है.

तुर्की के कुर्द लड़ाकों के ख़िलाफ़ साल 2017 के मध्य तक ऑपरेशन चलाने की धमकी देने के बाद अमरीका ने भी इस क्षेत्र में अपनी सेना भेज दी थी.

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तुर्की क्या चाहता है?

तुर्की लंबे समय से कुर्द बलों से फ़रात नदी के पश्चिमी क्षेत्रों से पीछे हटने की मांग कर रहा है.

तुर्की की फौज और तुर्की समर्थित विद्रोही गुट नदी के पश्चिम में तुर्की की सीमा पर एक ऐसे क्षेत्र में है जो तीन तरफ से सीरियाई शहरों से घिरा हुआ है.

यह क्षेत्र फ़रात नदी के पश्चिम में कुर्द बलों की मौजूदगी वाले सिर्फ दो क्षेत्रों आफरीन और मनबिज को अलग करता है.

तुर्की अपने यहां मौजूद कुर्दों के विद्रोह के डर से अपनी सीमा के दूसरी तरफ एक स्वतंत्र राज्य का विरोध करता है.

अर्दोआन ने अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और वर्तमान राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर मनबिज के बारे में सच न कहने का आरोप लगाया था.

उन्होंने कहा था कि तुर्की मनबिज को निशाना बनाएगा और उसे उसके असल मालिकों अरबों को वापस देगा.

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अमरीका का क्या कहना है?

अमरीका ने इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ कुर्दिश पीपल्स प्रॉटेक्शन यूनिट (वाईपीजी) और एसडीएफ को सैन्य सहायता दी है जो तुर्की के लिए चिंता का विषय है.

दोनों देशों के बीच बढ़ रहे तनाव के बीच अमरीका के जनरल ने सीरियाई कुर्दों का सहयोग करने को सही ठहराया है.

यूएस सेंट्रल कमांड जनरल जोसफ़ वोटेल ने 28 जनवरी को सीएनएन से कहा था कि अमरीका मनबिज से सेना हटाने के बारे में नहीं सोच रहा है.

अमरीकी रक्षा सचिव जिम मेटिस ने आठ फरवरी को कहा था कि तुर्की की चिंताएं वाजिब हैं लेकिन मनबिज के आसपास स्थिति नहीं बदली है. अभी हमारा लक्ष्य इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ अभियान पर ज़ोर देना है.

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सीरियाई कुर्दिश बल

लेफ्टिनेंट जनरल पॉल फंक और मेजर जनरल जैमी जर्राड के मनबिज में हाल के दौरे में दिये गए बयान पहले के मुकाबले ज्यादा सख़्त थे.

जर्राड ने न्यूयॉक टाइम्स ने कहा था, “हम यहां अपनी स्थिति को लेकर गर्व महसूस कर रहे हैं और हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हर कोई यह जानता हो.”

तुर्की के मनबिज को निशाना बनाने वाले बयान पर फंक ने अख़बार से कहा था, “तुम हम पर हमला करोगे तो हम अक्रामकता से जवाब देंगे. हम खुद को बचाएंगे.”

जनरल फंक ने सीरियाई कुर्दिश बलों को आतंकी मानने से भी इनकार कर दिया था.

उन्होंने कहा, “मैं कहूंगा कि जिन लोगों ने आईएस से रक़्क़ा को वापस पाने में मदद की है वो हीरो हैं, उनकी राष्ट्रीयता क्या है, उनकी मान्यताएं क्या हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.”

फंक ने आगे कहा था कि जिस सीमा का वो दौरा कर रहे थे वहां उनकी सबसे बड़ी चिंता ‘गलत अनुमान’ है.

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कुर्दों का क्या?

वाईपीजी ने आफ़रीन से सेना हटाने और तुर्की को ऑपरेशन ओलिव ब्रांच में क्षेत्र के ऊपर सीरियाई हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की इजाजत देने की आलोचना की थी.

कुर्द बल इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अमरीका मनबिज में ऐसी स्थिति न होने दे.

कुर्दों के नेतृत्व वाली वाईपीजी के कमांडर-इन-चीफ सिपान हामो ने 6 फरवरी को सऊदी अख़बार अल-शार्क अल-अवस्त में कहा था कि उन्हें आश्वासन मिला है कि अमरीका मनबिज से सेना नहीं हाटएगा.

हामो ने कहा, “तुर्की बहुत कुछ कहता है और उसके कई लक्ष्य हैं. बिना अंतरराष्ट्रीय मंत्रणा या समझौते के तुर्की की सेना मनबिज तक नहीं पहुंच सकती.”

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क्या थी मीडिया की प्रतिक्रिया?

तुर्की के मीडिया ने अमरीकी जनरल के मनबिज दौरे को विस्तार से कवरेज दी थी.

ये ख़बर अच्छी सर्कुलेशन रखने वाले हुर्रियत डेली और अन्य अख़बारों के पहले पन्ने पर थी.

यह सरकार समर्थित वेटान की मुख्य ख़बर थी जिसका शीर्षक था, “क्या आप अंधे हैं जनरल?”

इस बीच हुर्रियत के स्तंभकार सेदत अर्गिन ने 9 फरवरी को लिखा था कि तुर्की और अमरीका के बीच मनबिज को लेकर हुए हालिया टकराव को अगर कम नहीं किया गया तो उसके गंभीर ख़तरे हैं.

उन्होंने लिखा, “हमें तुर्की और अमरीका को संघर्ष की स्थिति में दो सहयोगियों के बजाये दो दुश्मनों के तौर पर स्वीकार करने की जरूरत है.”

हुर्रियत में एक और स्तंभकार ने लिखा था कि फंक का संदेश साफ है, “तुम्हें मनबिज में हमारा सामना करना होगा. गलत अनुमान न लगाएं.”

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आगे क्या?

शीर्ष अमरीकी सैन्य अधिकारियों के मनबिज को लेकर सख़्त बयान देने के बावजूद तुर्की और अमरीका के बीच उच्च स्तर पर कूटनीतिक बातचीत जारी है.

अमरीकी सुरक्षा सलाहकार ने इस हफ़्ते तुर्की में इस्तांबुल का दौरा किया था जबकि अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन इस हफ्ते तुर्की की राजधानी अंकारा का दौरे पर हैं.

तुर्की के राष्ट्रपति के प्रवक्ता इब्राहिम कलि ने 7 फरवरी को कहा था कि टिलरसन का दौरा उनके ही अनुरोध पर अयोजित हुआ है.

इसके अलावा तुर्की के रक्षा मंत्री अलगे हफ़्ते ब्रुसेल्स में होने वाली बैठक में अपने अमरीकी समकक्ष से मिलेंगे.

तुर्की में सत्ताधारी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी के प्रवक्ता माहिर उनल ने 9 फरवरी को अमरीकी जनरल के मनबिज दौरे पर मीडिया से कहा था कि तुर्की जहां कहीं भी हो आतंक के स्रोत को ख़त्म करना चाहता है.

उनल ने कहा, “हमारा संदेश अमरीकी जनरल के लिए नहीं बल्कि राजनीति के लिए हैं. अगले हफ़्ते अमरीकी विदेश और रक्षा मंत्री आने वाले हैं(तुर्की में). हमें किस पर विचार करना चाहिए यह उन बैठकों का परिणाम है.”

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विजय माल्या को झटका, यूके में किंगफिशर हारी केस, चुकाने होंगे लगभग 579 करोड़

भारत में अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किए जा चुके विजय माल्याb को एक और बड़ा झटका लगा है। उनकी किंगफिशर एयरलाइंस यूके में एक केस हार गई है। इसमें उन्हें एक कंपनी को 90 मिलियन डॉलर (लगभग ₹579 करोड़) क्लेम के तौर पर देने को कहा गया है।

यह केस अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़ा था। 62 साल के माल्या की कंपनी के खिलाफ सिंगापुर की बीओसी एविएशन नाम की कंपनी ने दायर किया था। खबरों के मुताबिक, मामला 2014 का है, तब किंगफिशर ने बीओसी ने कुछ प्लेन लीज पर लिए थे।

बीओसी एविएशन और किंगफिशर एयरलाइंस के बीच का यह मामला लीजिंग अग्रीमेंट को लेकर था। दोनों के बीच चार प्लेन को लेकर डील हुई थी, जिसमें से तीन डिलीवर किए जा चुके थे। बता दें कि माल्या पर भारतीय बैंकों का 9 हजार करोड़ रुपया बकाया है। बीओसी एविएशन सिंगापुर और बीओसी एविएशन (आयरलैंड) ने इस मामले में किंगफिशर एयरलाइंस और यूनाइटेड ब्रुअरीज का नाम लिया था। यूनाइटेड ब्रुअरीज में भी माल्या की बड़ी हिस्सेदारी है।

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शोपियां फायरिंग केस: SC ने कहा, मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ FIR पर फिलहाल कोई कार्रवाई ना हो

 शोपियां में पत्‍थरबाजी के दौरान सेना द्वारा फायरिंग करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सेना के मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ एफआईआर पर अगली सुनवाई तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस मामले सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार और अटार्नी जनरल को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है.सेना में मेजर के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में जम्मू-कश्मीर के शोपियां में 27 जनवरी को दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की.

10 गढ़वाल राइफल के मेजर आदित्य कुमार के पिता ने लेफ्टिनेंट कर्नल कर्मवीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को बचाने के लिए और जान की बाज़ी लगाने वाले भारतीय सेना के जवानों के मनोबल की रक्षा की जाए. जिस तरीके से राज्य में राजनीतिक नेतृत्व द्वारा एफआईआर का चित्रण किया गया और राज्य के उच्च प्रशासन प्रोजेक्ट किया गया. इससे लगता है कि राज्य में विपरीत स्थिति है. ये उनके बेटे उनके लिए समानता के अधिकार और जीवन जीने के अधिकार का उलंघन है.

पुलिस ने इस मामले में मेरे मेजर बेटे को आरोपी बनाकर मनमाने तरीके से काम किया है ये जानते हुए भी की वो घटना स्थल पर मौजूद नहीं था और सेना के जवान शांतिपूर्वक काम कर रहे थे. जबकि हिंसक भीड़ की वजह से वो सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए कानूनी तौर पर कार्रवाई करने के लिए मजबूर हुए.  सेना का यह काफ़िला केंद्र सरकार के निर्देश पर जा रहा था और अपने कर्तव्य का पालन कर रहे थे. ये कदम लिया गया जब भीड़ ने पथराव किया और  हिंसक भीड़ ने कुछ जवानों को पीट पीट कर मार डालने की कोशिश की और देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ करवाई से रोकने की कोशिश की गई.

इस तरह का हमला सेना का मनोबल गिराने के लिए किया गया. याचिका में मांग की गई है आतंकी गतिविधियों और सरकारी सम्पतियों को नुकसान पहुंचाने और केंद्रीय कर्मचारियों के जीवन को खतरे में डालने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और पूरे मामले की जांच दूसरे राज्य में किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए.

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सुंजवान अटैक: PAK को इस हमले की कीमत चुकानी होगी, वहां बैठा अजहर मसूद है मास्टर माइंड- सीतारमण

सुंजवान आर्मी कैंप पर हुए आतंकी हमले पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि हमले का मास्टर माइंड पाकिस्तान बेस्ड जैश-ए-मोहम्मद का चीफ अजहर मसूद है,जिसे वहां पर सपोर्ट मिलता है। रक्षा मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा, “सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं। लेकिन, पाकिस्तान को सबूत देना एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। ये हर बार साबित हुआ है कि वे ही जिम्मेदार हैं। पाकिस्तान को इस हरकत की कीमत चुकानी होगी।” रक्षामंत्री का ये सख्त वॉर्निंग मुफ्ती के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को पाकिस्तान से बातचीत करना चाहिए। सोमवार को सीतारमण ने मुफ्ती से भी मुलाकात की। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 3 दिन में दो आतंकी हमले हुए। पहला हमला शनिवार को जम्मू के सुंजवान आर्मी कैंप और दूसरा सोमवार को श्रीनगर के सीआरपीएफ कैंप पर हुआ। जिसमें 5 जवान शहीद हुए और एक सिविलियन की मौत हो गई। सीआरपीएफ कैंप हमले में एक जवान शहीद हो गया।

सुंजवान अटैक पर क्या बोलीं रक्षा मंत्री सीतारमण?

1) जैश-ए-मोहम्मद के थे आतंकी
– निर्मला सीतारमण ने कहा, “सुंजवान में काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन सुबह 10.30 पर खत्म हो गया है। लेकिन, सेनिटेशन ऑपरेशन जारी है। आतंकियों का संबंध जैश-ए-मोहम्मद से था, जिसे पाकिस्तान में बैठा अजहर मसूद ऑपरेट करता है और जिसे वहां से सपोर्ट मिलता है।”

2) आतंकियों को लोकल सपोर्ट की आशंका

“आतंकियों ने मिलिट्री स्टेशन को हमले के लिए चुना जहां इंडियन आर्मी के जवानों और उनकी फैमिली के घर थे। ये जगह इंटरनेशनल बॉर्डर से करीब 30 किलोमीटर दूर है। यहां काफी घनी आबादी है। कैंटोंमेंट की डेमोग्राफी और आसपास के इलाके से ये लगता है कि आतंकियों को लोकल सपोर्ट मिला।”

3) फैमिली क्वॉर्टर्स की ओर भागे आतंकी
– “इस हमले के मद्देनजर एक अलर्ट जारी हुआ। इसके बाद क्विक रिएक्शन टीमों को जरूरी जगहों पर तैनात किया गया। ऐसा महसूस हुआ कि पाकिस्तान स्पॉन्सर्ड
टेरिरिस्ट सॉफ्ट टारगेट की ओर जाएंगे इसलिए QRT को सुंजवान की फैमिली एकोमडेशन में भी भेजा गया। आतंकियों की घुसपैठ को संतरी ने रोका और QRT ने भी तुरंत इसका जवाब दिया। दोनों के बीच भारी गोलीबारी हुई। इस फायरिंग के चलते आतंकियों को बिखरना पड़ा और वे कोऑर्डिनेटेड हमले नहीं कर पाए। इसके बाद आतंकी फैमिली क्वॉर्टर्स की तरफ भागे और कुछ ब्लॉक्स पर कब्जा कर लिया।”

4) 189 फ्लैट्स से फैमलीज को सुरक्षित निकाला
– “आतंकवादी सेना की वर्दी में थे और उनकी पहचान मुश्किल थी इसलिए ऑपरेशन को इस तरह से अंजाम दिया गया, ताकि मिस्टेकन आइडेंटिटी की वजह से किसी की जान पर जोखिम ना हो। ऑपरेशन के दौरान 26 ब्लॉक्स को सर्च किया गया और 189 फ्लैट्स से फैमिलीज को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसमें वक्त लगा और ये काफी चुनौतीभरा भी था।”

5) आतंकियों ने निहत्थे जवानों पर फायरिंग की
– “काउंटर टेररिस्ट ऑपरेशन के दौरान एक सिविलियन समेत 6 जवानों की जान गई। आतंकियों ने निहत्थे जवानों और उनकी फैमिली पर फायरिंग की। वे फैमिली क्वॉर्टर्स में जबरदस्ती घुसने की कोशिश कर रहे थे।”

6) 4 में से 3 आतंकी मार गिराए
– “3 आतंकियों को सेना ने मार गिराया। इलाके में 4 टेररिस्ट होने की इन्फर्मेशन थी। हो सकता है कि चौथा आतंकी गाइड हो और वो कैम्प में ना घुसा हो।”

7) सीमा पार से हैंडलर्स आतंकियों को कंट्रोल कर रहे थे
– रक्षा मंत्री बोलीं, “जैश के जिस मॉड्यूल ने हमले को अंजाम दिया है, हो सकता है कि वो कुछ अरसा पहले भारत में दाखिल हुआ हो। इसकी भी संभावना है कि उन्हें ऑपरेशन से पहले लोकल सपोर्ट भी मिला हो। हमारे इंटेलिजेंस इनपुट इशारा करते हैं कि इन टेररिस्ट को सीमा पार बैठे हैंडलर्स कंट्रोल कर रहे थे। सबूतों की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी ने की, जो जल्द ही डिटेल रिपोर्ट देगी।”

8) घुसपैठ रोकने में कामयाबी मिली है
– “पाकिस्तान पीरपंजाल के दक्षिण में टेररिज्म को स्पॉन्सर कर रहा है और घुसपैठ के लिए सीजफायर वॉयलेशन कर रहा है। इन कोशिसों का माकूल जवाब दिया गया। लाइन ऑफ कंट्रोल पर घुसपैठ रोकने के लिए हमारे सिस्टम के जरिए बड़ी कामयाबी मिली है। सिक्युरिटी फोर्सेस की लगातार कोशिशों के चलते आतंकी गतिविधियों पर रोक लगी है। मौसम और बर्फबारी के चलते घुसपैठ को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता है, इसके लिए सरकार मॉडर्न तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। एडिशनल सेंसर्स, यूएवी और लॉन्ग रेंज सर्विलांस डिवाइसेस को लाइन ऑफ कंट्रोल को कवर करने के लिए लगाया गया है।’

9) जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा
– “आखिर में मैं अपने बहादुर जवानों की जान जाने पर और उनके परिवारों पर कायराना हमले के लिए शोक जाहिर करती हूं। मैं देश को ये भरोसा दिलाती हूं कि उनका बलिदान बेकार नहीं जाएगा। हम पाकिस्तान स्पॉन्सर्ड टेररिज्म के जरिए देश में हिंसा फैलाने की हर कोशिश को रोकेंगे और जरूरी कदम उठाए जाएंगे।’

10) मुफ्ती के साथ हालात पर चर्चा की
– सीतारमण ने कहा, “मैं घायलों से मिलिट्री हॉस्पिटल में मुलाकात की। मैंने चीफ मिनिस्टर (महबूबा मुफ्ती) से भी मुलाकात की, उनके साथ मैंने विस्तार से हालात पर चर्चा की। उन्होंने इतने शॉर्ट नोटिस पर मुलाकात की, इसके लिए मैं उनकी शुक्रगुजार हूं।”

पांच शहीदों में दो सूबेदार, 1 हवलदार

– सूबेदार मदन लाल चौधरी
– सूबेदार मोहम्मद अशरफ मीर
– हवलदार हबीबुल्लाह कुरैशी
– नायक मंजूर अहमद
– लांस नायक मोहम्मद इकबाल
– लांस नायक मो. इकबाल के पिता (सिविलियन)

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उस इंटरव्यू में क्या बोले बराक़ ओबामा जो प्रिंस हैरी ने लिया

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोशल मीडिया के गैरज़िम्मेदाराना इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है.

जनवरी में पद से हटने के बाद बराक ओबामा का शायद ये पहला और अपनी तरह का अनोखा इंटरव्यू था.

ये इस वजह से भी ख़ास था क्योंकि ‘बीबीसी रेडियो 4’ के टुडे प्रोग्राम के लिए प्रिंस हैरी ओबामा का इंटरव्यू ले रहे थे.

ब्रिटेन के राज परिवार के प्रोटोकॉल में प्रिंस हैरी पांचवें पायदान पर हैं.

सोशल मीडिया के गैरज़िम्मेदाराना इस्तेमाल पर ओबामा ने चेतावनी दी कि इसे ग़लतफहमियां बढ़ती हैं और जटिल मुद्दों पर लोगों की समझदारी पर असर पड़ता है.

बराक ओबामाइमेज कॉपीरइटAFP
Image captionजनवरी में व्हाइट हाउस छोड़ते समय आख़िरी बार बतौर राष्ट्रपति प्रेस से बात करते हुए बराक ओबामा

सोशल मीडिया की इंतेहा पर…

पूर्व राष्ट्रपति ने आने वाले कल की उस स्थिति को लेकर चिंता ज़ाहिर की ‘जिसमें हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ कर दिया जाएगा और लोग केवल वही बातें पढ़ना और सुनना चाहेंगे जो उनके अपने विचारों से मेल खाती हों.’

“इंटरनेट का एक ख़तरा ये भी है कि लोग पूरी तरह से अलग हक़ीक़तों में जी सकते हैं. लोगों के अपने पूर्वाग्रह होते हैं और वे इन्हीं पूर्वाग्रहों को मज़बूत करने वाली सूचनाओं के दायरे में सिमटकर दुनिया से अलग-थलग से बने रह सकते हैं.”

“सवाल ये है कि हम किस तरह से टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करते हैं ताकि अलग-अलग तरह की आवाज़ों की जगह मिल सके, जो विविधता के लिए गुंजाइश बनाए और जो बंटवारे को बढ़ावा देने वाली ताक़तों को मौका न दे.”

ओबामा के उत्तराधिकारी ट्रंप ट्विटर का खूब इस्तेमाल करते हैं लेकिन पूर्व राष्ट्रपति ने उनका नाम नहीं लिया. ट्रंप पर ट्विटर के ज़्यादा इस्तेमाल का आरोप लगता रहा है हालांकि पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ये मानते हैं कि ट्विटर की वजह से अमरीकी लोगों से सीधे जुड़ने में सहूलियत होती है.

बराक ओबामा, डोनल्ड ट्रंपइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

राष्ट्रपति पर पड़ने वाले दबाव पर…

ये मुश्किल है, लोगों की नज़र में बने रहना कई तरह से असहज करता है. एक तरह से ये चुनौतीपूर्ण भी है. जिन्हें आप पसंद करते हों, उन्हें भी दिक्कतें पेश आ सकती हैं. 20-30 साल पहले ऐसा नहीं होता था.

इसलिए ये एक तरह से बलिदान जैसा है. मुझे लगता है कि जब लोग राजनीति में जाने का फ़ैसला करते हैं तो उन्हें खुद को शांत रखना चाहिए. लेकिन आख़िरकार अगर आप दुनिया में सार्थक बदलाव ला पाते हैं तो राजनीति में आपका आना सार्थक हो जाता है.

ओबामा इन सब चुनौतियों के बीच अपनी पत्नी मिशेल से मिले सपोर्ट के लिए शुक्रगुजार महसूस करते हैं.

बराक ओबामाइमेज कॉपीरइटAFP

व्हाइट हाउस छोड़ने पर

“मिलाजुला अनुभव होता है. उन सभी कामों के लिए जो अधूरे रह गए. चिंता इस बात की है कि देश किस तरह से आगे बढ़े लेकिन आप जानते हैं कि मिलाजुलाकर सब कुछ ठीक है.”

व्हाइट हाउस में अपने कार्यकाल के दौरान ओबामा खुद को एक रीले रनर के तौर पर देखते हैं.

अगर आप मेहनत से दौड़ते हैं और आप अपना बेस्ट करते हैं तो आप कामयाबी से अपनी मशाल आगे बढ़ा सकते हैं. आप अपना काम अच्छे से करते हैं तो दुनिया थोड़ी बेहतर होती है.

लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित कराने वाले ओबामाकेयर प्रोजेक्ट को वे अपनी बड़ी उपलब्धि बताते हैं.

“ये कहना कितना बड़ी बात है कि दो करोड़ अमरीकियों को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराया गया जो उनके पास पहले नहीं था.”

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आना वाला कल कैसा दिखता है?

दुनिया के सामने मौजूद समस्याओं को ख़ारिज किए बिना ओबामा सकारात्मक बने हुए हैं.

अगर हम अपनी किस्मत खुद लिखते हैं, इसकी ज़िम्मेदारी लेते हैं, इसमें हिस्सा लेते हैं, इससे जुड़ते हैं, इस पर खुलकर बात करते हैं, अगर हम समुदायों के साथ काम करते हैं तो हर मुश्किल का हर निकाला जा सकता है, बावजूद उन डरावनी ख़बरों के जो हम देखते हैं.

अगर मानव इतिहास में कोई एक लम्हा आपको चुनने का मौका मिले जिसमें आप पैदा होना चाहें तो आप आज को चुनेंगे क्योंकि हक़ीक़त यही है कि दुनिया आज सबसे ज़्यादा स्वस्थ, संपन्न, ज्यादा शिक्षित, अधिक सहिष्णु और आधुनिक और कम हिंसक है.

बराक ओबामा, प्रिंस हैरीइमेज कॉपीरइटREUTERS

प्रिंस हैरी क्या बोले?

एडिटिंग के अलावा प्रिंस हैरी ने ये इंटरव्यू ख़ुद लिया.

“मैंने बहुत ज़्यादा इंटरव्यू नहीं किए हैं लेकिन ये एक अच्छा अनुभव था. ख़ासकर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का. हकीकत तो ये थी कि वे मुझे इंटरव्यू करना चाहते थे.”

“ये अनुभव हासिल करने के साथ-साथ सीखने जैसा भी था. लेकिन कई और भी अहम मुद्दे हैं जिनपर सोचने और बात किए जाने की ज़रूरत है.”

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पेट्रोल में मिलाया जाएगा 15 फीसद मेथेनॉल, समझें इसके फायदे-नुकसान

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने आज लोकसभा में कहा कि अब पेट्रोल में 15 फीसद मेथेनॉल मिलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से साल 2030 तक भारत का ईंधन बिल कम हो जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मेथेनॉल को बढ़ावा देने से प्रदूषण पर भी लगाम लगाई जा सकेगी। सरकार की इस योजना के बारे में नितिन गडकरी पहले भी जानकारी दे चुके हैं।

मेथेनॉल मिलाने से कितना सस्ता हो जाएगा पेट्रोल: मेथेनॉल कोयला से बनाया जा सकता है और इसकी लागत 22 रुपये प्रति लीटर होती है, जबकि पेट्रोल की कीमत 80 रुपये प्रति लीटर पड़ती है। चीन इसे 17 रुपये प्रति लीटर की लागत में तैयार कर रहा है। गडकरी ने कहा यह पेट्रोल की लागत को कम करेगा और प्रदूषण को भी कम करेगा। गडकरी ने कहा कि मुंबई के आस-पास की फैक्ट्री जिसमें दीपक फर्टिलाइजर्स और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स भी शामिल हैं वो मेथेनॉल को तैयार कर सकती है।

समझें गणित कैसे सस्ता हो जाएगा पेट्रोल: (उदाहरण से समझें)

  • 1 लीटर पेट्रोल की कीमत दिल्ली में 69 रुपए है
  • यानी 1000 एमएल पेट्रोल की कीमत: 69 रुपए
  • इसमें अगर 15 फीसद एथेनॉल मिलेगा।
  • 850 एमएल पेट्रोल की कीमत: 69/1000X850= 58.65 रुपए
  • वहीं 1000 एमएल मेथेनॉल की कीमत 22 रुपए
  • 15 फीसद यानी 150 एमएल मेथेनॉल की कीमत: 22/1000X150= 3.3 रुपए
  • इस हिसाब से 1 लीटर पेट्रोल की कीमत होगी: 58.65+3.3= 61.95 रुपए

यानी इस हिसाब से आपको करीब 7 रुपए का सीधा-सीधा फायदा होगा।

क्या है मेथेनॉल: मेथनॉल आंतरिक दहन और अन्य इंजनों के लिए वैकल्पिक ईंधन है। इसे या तो गैसोलीन के साथ मिलकर इस्तेमाल किया जाता है या फिर सीधे तौर पर। काफी सारे देशों में इसका इस्तेमाल रेसिंग कार के लिए किया जाता है। अमेरिका में, पेट्रोलियम आधारित ईंधन के विकल्प के रूप में इथेनॉल ईंधन को मेथनॉल ईंधन तुलना में ज्यादा पसंद किया जाता है। सामान्य तौर पर, इथेनॉल कम विषाक्त (टॉक्सिक) होता है और इसका ऊर्जा घनत्व ज्यादा होता है। हालांकि मेथनॉल ऊर्जा उत्पादन के लिहाज से कम खर्चीला होता है। ओपेक देशों के वर्ष 1973 के तेल संकट के दौरान, रीड और लर्नर (1973) ने कोयला के इस्तेमाल से विनिर्माण प्रौद्योगिकी के साथ ईंधन के रूप में मेथनॉल को प्रस्तावित किया था और यह गैसोलीन को रिप्लेस करने के लिहाज से एक बेहतर (पर्याप्त) संसाधन भी है। ऐतिहासिक रूप से, मेथनॉल को पहली बार लकड़ी के विनाशकारी आसवन (pyrolysis) द्वारा उत्पादित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लकड़ी के शराब के आम अंग्रेजी नाम का परिणाम था।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट: केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया ने बताया कि देश के भीतर पेट्रोल में एथेनॉल तो मिलाया ही जा रहा है, लेकिन मेथेनॉल एक नया कॉन्सेप्ट है। अब पेट्रोल में मेथेनॉल मिलाने से बेशक प्रदूषण काफी कम होगा,जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट दिल्ली सरकार को लताड़ लगाते हुए यह भी कह चुकी है कि राजधानी में प्रदूषण नियंत्रित करने के उनके प्रयास नाकाफी हैं। अगर पेट्रोल में मेथेनॉल मिलाया जाएगा तो जाहिर तौर पर पेट्रोल की कीमत में 8 से 10 रुपए की कमी आएगी। जो कि आम आदमी के लिए एक राहत की खबर है। हालांकि इस मसले पर चिंता की बात गाड़ियों के इंजन को लेकर है जो कि मेथनॉल मिलाए जाने के कारण खराब भी हो सकते हैं। हालांकि सरकार ने इस संबंध में वोल्वो से स्पेशल इंजन के लिए बात भी की है। साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि इससे देश के इंपोर्ट (आयात) पर भी असर पड़ सकता है।

क्या होंगे नुकसान: ऑटो एक्सपर्ट रंजॉय मुखर्जी ने बताया कि इस फैसले से गाड़ियों पर जाहिर तौर पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि फैक्ट्रियों से निकलने वाली गाड़ियां मौजूदा समय में मेथेनॉल के लिहाज से सक्षम नहीं हैं। इसलिए सरकार को अपनी इस योजना को अमलीजामा पहनाने से पहले कंपनियों को गाड़ियों को अपग्रेड करने का समय देना होगा। नहीं तो यह गाड़ियों के इंजन और उसके प्रदर्शन पर बुरा असर डाल सकता है।

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2017 में पीएम मोदी की 6-1 से बंपर जीत, कमलमय हुए ये प्रदेश

21 वीं सदी का 17 वां साल दस्तक दे रहा था और इसके साथ ही इस वर्ष को अनेकों राजनीतिक घटनाओं का गवाह भी बनना था। राजनीतिक तौर पर साल 2017 के सभी महीने किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहे। लेकिन फरवरी-मार्च के साथ नवंबर और दिसंबर का महीना कुछ राजनीतिक दलों के लिए जहां खुशी का लमहा लेकर आया तो कुछ के हिस्से में सिर्फ दुख और दर्द आया। कुछ राजनीतिक दलों और शख्सियतों को आत्मावलोकन की सीख दे गया तो कुछ के लिए ये संदेश कि सफलता को महफूज रखने के लिए आप को लगातार कोशिश करनी होगी। 2017 के जनवरी से दिसंबर के कालखंड में हम पीएम मोदी के उस प्रभामंडल की चर्चा करेंगे जिसका असर देश के सात सूबों में होने वाले चुनाव परिणाम में दिखा।

उत्तर प्रदेश में भाजपा 14 साल का वनवास खत्म
जनवरी और फरवरी में उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड थी। लेकिन देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजनीतिक फिजां में गरमी थी। राजनीतिक दल अवध पर कब्जे की तैयारी कर रहे थे। अवध पर कब्जे की तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण होती है क्योंकि कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ के जरिए जाता है और जिसके हाथ से लखनऊ फिसला वो दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने का सिर्फ सपना ही देख सकता है। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सपा सरकार अपने काम के दम और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर समाजवादी झंडे को निर्बाध फहराने की तैयारी कर रही थी। इसके साथ ही केसरियां रंग भी यूपी को अपने रंग में सराबोर करने की तैयारी में था। मतदाताओं को लुभाने के लिए राजनीतिक दलों से अथक और अकथ कोशिश की गई। चुनाव प्रचार चरम पर था और राजनीतिक दल अपनी तरकश से एक से बढ़कर एक तीर के जरिए एक दूसरे पर निशाना साध रहे थे।


भाजपा जहां 14 साल के वनवास को खत्म करने के लिए अपने आपको मौका देने की मांग कर रही थी। वहीं सपा और कांग्रेस के नेता यूपी के लड़के करेंगे विकास का नारा बुलंद कर रहे थे। पीएम मोदी भाजपा के स्टार प्रचारक थे। वो लोगों से अपील कर रहे थे कि ये लड़ाई ईमानदारों और भ्रष्टाचारियों के बीच की है। वो ये भी कहा करते थे कि यूपी की जनता वंशवाद,जातिवाद से तंग आ चुकी है। इसके साथ ही इन नेताओं की अपील का कितना असर पड़ेगा इसे लेकर राजनीतिक टीकाकार अलग अलग ढंग से भविष्यवाणी कर रहे थे। लेकिन जब चुनाव परिणाम आया तो वो सभी के अनुमानों से जुदा था। यूपी की जनता ने अपना मत दे दिया था, देश का सबसे बड़ा सूबा अब उस राह पर चलने को तैयार था जो केसरिया रंग में रंग चुका था।

उत्तराखंड में प्रचंड विजय
उत्तर प्रदेश के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड में चुनाव का आगाज हो चुका था। उत्तराखंड में हरीश रावत की कांग्रेस सरकार दोबारा सरकार बनाने की तैयारी के साथ चुनाव मैदान में थी। लेकिन भाजपा देवभूमि की जनता को ये समझा रही थी कि किस तरह से कांग्रेस शासन में उत्तराखंड विकास की पटरी से उतर गया था। एक तरफ कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी जनमत को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश करते रहे, वहीं भाजपा के स्टॉर प्रचारक पीएम मोदी ने कहा कि एक ऐसी पार्टी के हाथ में आप सत्ता कैसे सौंप सकते हैं जिसका दामन दागदार है। देवभूमि की धरती पर दोनों दल अपने अपने अंदाज में एक दूसरे की वादों और दावों की धज्जियां उड़ा रहे थे। लेकिन जन का मत कुछ और ही था। इवीएम से जब परिणाम बाहर आने शुरू हुए तो नतीजे प्रत्याशित लेकिन चौंकाने वाले थे। देवभूमि की जनता का फैसला सार्वजनिक हो चुका था और केसरिया झंडा मैदान से लेकर पहाड़ तक फहर रहा था।

गोवा और मणिपुर बनाई सरकार
यूपी और उत्तराखंड के साथ पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर और समुद्र के किनारे स्थित गोवा में भी चुनावी सरगर्मी तेज थी। भाजपा के विरोधी पणजी में जोरशोर से नोटबंदी के मुद्दे को उठा रहे थे। गोवा में विरोधी दल अपने तर्कों से समझाने की कोशिश कर रहे थे कि किस तरह से नोटबंदी ने गोवा की रीढ़ (पर्यटन व्यवसाय) को तोड़ दी है। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी कहते रहे कि उनकी लड़ाई गरीबों के लिए है। नोटबंदी के समर्थन में उन्होंने कहा कि वो जानते हैं कि इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा। लेकिन गरीबों की पीड़ा को कम करने के लिए इस तरह का कदम उठाना जरुरी था। गोवा और मणिपुर में भाजपा-कांग्रेस के बीच जबरदस्त टक्कर में भाजपा भारी पड़ी और गोवा के साथ मणिपुर में कमल खिलने में कामयाब रहा।

पंजाब में  कांग्नेस को मिली कामयाबी
यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के साथ ही पंजाब में विधानसभा के लिए चुनाव प्रचार परवान चढ़ चुका था। पंजाब में अकाली दल-भाजपा गठबंधन के खिलाफ कांग्रेस और आप मोर्चा खोले थी। कांग्रेस के नेता इस तथ्य को वहां की जनता के सामने रख रहे थे कि कैसे अकाली-भाजपा गठबंधन के शासन में पंजाब नशे की गिरफ्त में आ गया। कांग्रेस और आप के नेता जनता को ये बताने में कामयाब रहे कि पंजाब का भला सिर्फ कांग्रेस सोचती है और मौका मिलने पर वो प्रदेश को तरक्की के राह पर ले जायेंगे। पंजाब की जनता ने कांग्रेस पर भरोसा किया और सत्ता अमरिंदर सिंह के हाथों सौंप दी।


कमलमय हुआ गुजरात

साल 2017 के पहले तीन महीनों में देश के इन सूबों में चुनावी शोर खत्म हो चुका था। देश की राजनीति किसी और बड़ी घटना की गवाह बनने वाली थी। एक जुलाई 2017 को भारत एक बाजार में बदल चुका था। एक राष्ट्र और एक कर के जरिए जीएसटी को लाया जा चुका था। ठीक उसके बाद पीएम के गृहराज्य गुजरात और देवभूमि हिमाचल में विधानसभा चुनावों की रूपरेखा तैयार हो चुकी थी। राजनीति के जानकारों का मानना था कि गुजरात विधानसभा चुनाव पीएम मोदी के लिए लिटमस टेस्ट होगा। इसके साथ ही कई जानकारों का कहना था कि गुजरात में पाटीदार, दलित और पिछड़ो के मुद्दे पर मौजूदा भाजपा सरकार बैकफुट पर है। यही नहीं जीएसटी का फैसला भाजपा के लिए आत्मघाती साबित होगा। गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी कहा करते थे कि केंद्र की मोदी सरकार महज कुछ लोगों के फायदे के लिए सोचती है। ये बात अलग है कि इवीएम से निकले हुए परिणाम कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे थे। गुजरात में छठी बार भाजपा सरकार बनाने में कामयाब हुई। लेकिन चुनाव नतीजे कुछ संकेत भी दे गए।

देवभूमि हिमाचल में खिला कमल
इसके साथ ही देवभूमि हिमाचल में कांग्रेस अपने प्रदर्शन को दोहराने में नाकाम रही। दूसरे राज्यों की तरह हिमाचल में भ्रष्टाचार का मामला छाया रहा। भाजपा के स्टॉर प्रचारक पीएम मोदी लोगों तक ये छाप छोड़ने में कामयाब रहे कि कांग्रेस का मतलब ही भ्रष्टाचार है। भ्रष्टाचार का समूल नाश करने के लिए वीरभद्र की सरकार से छुटकारा पाना ही होगा। कांग्रेस और भाजपा के बीच चुनावी लड़ाई में जनता ने अपने नायक पीएम मोदी पर भरोसा किया और राज्य की कमान भाजपा के हाथों में सौंप दी।