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उन्नाव केस: BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने पीड़िता के साथ किया था रेप, CBI ने की पुष्टि

 उन्नाव केस की जांच कर रही सीबीआई ने बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर लगे रेप के आरोपों की पुष्टि कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने आरोपों की पुष्टि कर दी है. वहीं दुष्कर्म में शशि सिंह की भूमिका पर सीबीआई ने कहना है कि शशि सिंह ही पीड़ित को नौकरी दिलाने का झांसा देकर कुलदीप सिंह के घर लाई थी. 4 जून 2017 को बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह ने उसके साथ रेप किया था और 11 जून को पीड़िता को तीन युवकों ने अगवा किया और कार में गैंगरेप किया. सूत्रों का कहना है कि अब सीबीआई स्थानीय पुलिस की भूमिका की भी जांच कर रही है.

बयानों से नहीं पलटी पीड़िता
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट के समक्ष पीड़िता का बयान दर्ज किए. कोर्ट के समझ भी उसने वहीं बयान दिए जो उसने पुलिस को अपनी शिकायत में दिए थे.

सीबीआई ने आमने-सामने बैठकर की थी जांच
आपको बता दें कि उन्नाव रेप केस की जांच कर रही सीबीआई ने आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और पीड़िता का आमना-सामना कराया था. पीड़िता ने पिछले वर्ष चार जून को विधायक द्वारा रेप किए जाने का आरोप दोहराया लेकिन, विधायक इससे इनकार करते रहे. सीबीआई के अफसरों ने दोनों से अलग-अलग हुई पूछताछ के तथ्यों को भी सामने रखा और एक-दूसरे से पुष्टि की.

सेंगर को सीतापुर जेल में किया गया शिफ्ट
आपको बता दें, बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मंगलवार (8 मई) को सुबह उन्नाव जेल से सीतापुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया है. पीड़िता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अपील दायर कर आरोपी विधायक को उन्नाव जेल से शिफ्ट करने की याचिका दायर की थी, जिसके बाद ये फैसला लिया गया.

अब तक मामले में क्या-क्या हुआ

  • रेप पीड़िता ने 11 जून 2017 को कोर्ट में शिकायत दर्ज की.
  • कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए और आरोपी अवधेश तिवारी, शुभम तिवारी व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, इस मुकदमे में विधायक और शशि सिंह का नाम नहीं था.
  • 3 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह ने केस वापस लेने के लिए पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया.
  • जब पिता द्वारा इनकार किया तो उसकी बेरहमी से पिटाई की गई और फर्जी मुकदमा लिखवाकर उसे जेल भिजवा दिया.
  • 8 अप्रैल, 2018 को पीड़िता ने परिवार समेत सीएम आवास के बाहर आत्मदाह की कोशिश की.
  • 9 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता की उन्नाव जेल में मौत हो गई.
  • 10 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह को गिरफ्तार किया गया.

केस में अब आगे क्या होगा

  • विधायक कुलदीप पर रेप के आरोपों की पुष्टि हुई.
  • अब आरोपी विधायक पर शिकंजा कस सकता है.
  • बीजेपी भी विधायक कुलदीप के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है.
  • ये भी संभव है कि पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दे.
  • सीबीआई अब मामले में पूरी जांच करने के बाद रिपोर्ट सौंपेगी.
  • सीबीआई की रिपोर्ट पर कोर्ट मामले में फैसला सुनाएगा.
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पीएम मोदी ने इराक में मारे गए लोगों के परिवार वालों को 10 लाख रुपए की मदद की घोषणा की

इराक के मोसुल में मारे गए भारतीयों के परिवारों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 लाख रुपये का अनुग्रह राशि यानी मदद का ऐलान किया है. इससे पहले पीएम मोदी ने उनकी मौत की खबर की पुष्टि होने के बाद दुख जताया था. बता दें कि इससे पहले मारे गए लोगों के परिजनों की तरफ से मुआवजे की मांग किए जाने के सवाल पर विदेश राज्य मंत्री ने कहा था कि, ‘ये बिस्कुट बांटने वाला काम नहीं है’.

इराक के मोसुल में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) द्वारा मारे गए भारतीय नागरिकों के अवशेष लेकर विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह सोमवार को भारत पहुंचे थे. इसके बाद वह सबसे पहले पंजाब गए. मोसुल में 39 भारतीय मारे गए थे. इनमें से 38 के अवशेष भारत आए हैं. एक की पहचान नहीं हो पाई. इनमें से 27 लोग में पंजाब के थे. अमृतसर एयरपोर्ट पर मारे गए लोगों के परिजनों की तरफ से मुआवजेकी मांग किए जाने के सवाल पर विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि, ‘ये बिस्कुट बांटने वाला काम नहीं है’. विदेश राज्य मंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है.

विदेश राज्यमंत्री वी. के. सिंह ने कहा कि इराक में आतंकवादी समूह आईएसआईएस द्वारा बंधक बनाए गए 40 भारतीयों का कोई भी रिकॉर्ड किसी दूतावास में नहीं है क्योंकि वे वहां ट्रैवल एजेंट के माध्यम से अवैध रूप से गए थे.  आतंकवादी समूहों ने 40 में से 39 भारतीयों की हत्या कर दी थी जबकि उनमें से एक खुद को बांग्लादेशी बताकर बच गया था. सिंह सोमवार को कहा कि इराक से एक विशेष विमान से 38 भारतीयों का शव लेकर अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर पहुंचे. मारे गए लोगों में से एक के शव की अभी तक स्पष्ट रूप से पहचान नहीं हो पाई है.

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AUTOMOBILE कंपनी रिजल्ट्सः जानिए दिग्गज कंपनियों को हुआ कितना मुनाफा?

देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया की फरवरी में कुल बिक्री 15 फीसदी बढ़कर 1,49,824 इकाई रही। पिछले साल इसी माह में यह बिक्री 1,30,280 इकाई थी। कंपनी ने एक बयान में बताया कि समीक्षावधि में उसकी घरेलू बिक्री 14.2 फीसदी बढ़कर 1,37,900 वाहन रही। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,20,735 वाहन था। कंपनी का निर्यात इस दौरान 24.9 फीसदी बढ़कर 11,924 वाहन रहा जो इससे पिछले साल समान अवधि में 9,545 इकाई था।
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बजाज ऑटो 
दोपहिया वाहन बनाने वाली प्रमुख कंपनी बजाज ऑटो की फरवरी माह में कुल बिक्री 31 फीसदी बढ़कर 3,57,883 वाहन रही है। पिछले साल इसी माह में यह आंकड़ा 2,73,513 इकाई था। कंपनी ने एक बयान में बताया कि उसकी कुल घरेलू बिक्री इस दौरान 35 फीसदी बढ़कर 2,14,023 वाहन रही है जो फरवरी 2017 में 1,59,109 वाहन थी। समीक्षावधि में कंपनी की मोटरसाइकिलों की घरेलू बिक्री 23 फीसदी बढ़कर 1,75,489 वाहन रही जो इससे पिछले साल इसी माह में 1,42,287 वाहन थी। कंपनी का कुल निर्यात फरवरी 2018 में 26 फीसदी बढ़कर 1,43,860 वाहन रहा है जो पिछले साल इस दौरान 1,14,404 वाहन था।

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अशोक लीलैंड
वाणिज्यिक वाहन बनाने वाली हिंदुजा समूह की कंपनी अशोक लीलैंड की कुल बिक्री फरवरी में 29 फीसदी बढ़कर 18,181 वाहन रही है। फरवरी 2017 में कंपनी की बिक्री 14,067 वाहन थी। कंपनी ने एक बयान में कहा कि उसके मध्यम एवं भारी वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री इस दौरान 21 फीसदी बढ़कर 13,726 इकाई रही और हल्के वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 63 फीसदी सुधरकर 4,455 वाहन रही।

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एस्कॉर्ट्स ट्रैक्टर
ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनी एस्कॉर्ट्स ने फरवरी 2018 में कुल 6,462 ट्रैक्टर बेचे जो गत साल के समान माह में बिके 4,247 वाहनों की तुलना में 52.2 फीसदी अधिक है। कंपनी ने कहा घरेलू बाजार में उसने गत माह 6,295 ट्रैक्टर बेचे जो फरवरी 2017 में बिके 4,104 वाहनों से 53.4 प्रतिशत अधिक है। कंपनी के निर्यात में भी तेजी रही और यह 16.8 फीसदी बढ़कर 143 से 167 ट्रैक्टर हो गया।

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अमेरिका के H-1B वीजा पॉलिसी में बदलाव के प्रपोजल से 75 हजार भारतीयों की नौकरी खतरे में

ट्रम्प एडमिस्ट्रेशन के H-1B वीजा पॉलिसी में बदलाव के प्रपोजल से अमेरिका में 75 हजार भारतीयों की नौकरी खतरे में आ सकती है। सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की संस्था नैस्कॉम ने इसे लेकर चिंता जताई है। आने वाले दिनों में उसकी प्रस्तावित बदलावों पर एडमिस्ट्रेशन से बातचीत हो सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकन युवाओं को प्रियॉरटी देने के लिए अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन ‘बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ की पॉलिसी पर काम कर रहा है।

नैस्कॉम ने प्रपोजल पर जताई चिंता

– इसे लेकर अमेरिकी सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की संस्था नैस्कॉम ने वीजा नियमों में बदलाव और नए नियमों को लेकर अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन के सामने चिंता जताई है। आने वाले दिनों प्रस्तावित बदलावों पर बातचीत हो सकती है।
– दरअसल, अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन ने यह कदम अपने ‘Protect and Grow American Jobs बिल के तहत उठाया है। इस बिल में H-1B वीजा के मिस यूज रोकने के लिए बदलाव प्रस्तावित हैं। इसके तहत, न्यूनतम सेलरी और टेलंट के मूवमेंट को लेकर पाबंदियां लगाए जाने की बात कही गई है।

क्यों बदलने पड़ रहे हैं H-1B वीजा पर नियम?

– अमेरिका में बढ़ती बेरोजगारी पर लगाम लगाने के लिए H-1B के रूल्स को सख्त बनाने की बात कही गई है। प्रेसिडेंट इलेक्शन में भी डोनॉल्ड ट्रंप ने यह मुददा उठाया था। उन्होंने अमेरिकी युवाओं को नौकरी में प्राथमिकता देने की बात कही थी। इसके बाद ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ‘बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ पॉलिसी अपना रहा है।
– माना जाता है कि कई अमेरिकी कंपनियां दूसरे देशों से कम सैलरी पर वर्कर्स को हायर करती हैं। इसमें भारतीय सबसे आगे हैं। इससे अमेरिकी युवाओं को नौकरी मिलने के मौके कम हो जाते हैं। चुनाव के बाद एडमिनिस्ट्रेशन ने एक पॉलिसी मेमोरेंडम जारी किया था। इसमें कहा गया था कि कम्प्‍यूटर प्रोग्रामर्स H-1B वीजा के लिए एलिजिबल नहीं होंगे।

भारतीयों पर क्यों असर पड़ेगा?

– अमेरिका में सबसे ज्यादा H-1B वीजा भारतीयों के पास हैं। अप्रैल, 2017 में इससे जुड़ा आंकड़ा जारी किया गया था। यूएस सिटिजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विस (USCIS) की रिपोर्ट में कहा गया था कि 2007 से जून 2017 तक USCIS को 34 लाख H-1B वीजा एप्लीकेशन मिलीं। इनमें भारत से 21 लाख एप्लीकेशन थीं।
– इसी दौरान अमेरिका ने 26 लाख लोगों को को H-1B वीजा दिया। हालांकि, रिपोर्ट में ये साफ नहीं हो पाया कि अमेरिका ने किस देश के कितने लोगों को वीजा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, H-1B वीजा पाने वालों में 23 लाख की उम्र 25 से 34 साल के बीच है। इनमें 20 लाख आईटी सेक्टर की नौकरियों से जुड़े हुए हैं।

– दूसरी ओर, अप्रैल 2017 में USCIS ने 1 लाख 99 हजार H-1B पिटीशन रिसीव कीं। अमेरिका ने 2015 में 1 लाख 72 हजार 748 वीजा जारी किए, यानी 103% ज्यादा।

भारतीयों का H-1B एक्सटेंड नहीं होगा

– डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटी (डीएचएस) का ये प्रपोजल उन विदेशी वर्कर्स को अपना H-1B वीजा रखने से रोक सकता है जिनके ग्रीन कार्ड एप्लीकेशन अटके हुए हैं। इसमें बड़ी संख्या भारतीय पेशेवरों की है।
– ट्रम्प सरकार के फैसले से अमेरिका में हजारों भारतीयों का H-1B एक्सटेंड नहीं होगा क्योंकि वहां स्थायी निवास की इजाजत के लिए उनके ग्रीन कार्ड एप्लीकेशन फिलहाल अटके हुए हैं। इस नियम के लागू होने पर करीब 75 हजार नौकरीपेशा लोगों पर असर पड़ेगा। भारत के अलावा दूसरों देशों के युवाओं को भी अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है।

क्या है H-1B वीजा?

– H-1B वीजा एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी थ्योरिटिकल या टेक्निकल एक्सपर्ट्स को अपने यहां रख सकती हैं। इस वीजा के तहत आईटी कंपनियां हर साल हजारों इम्प्लॉइज की भर्ती करती हैं।
– यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) जनरल कैटेगरी में 65 हजार फॉरेन इम्प्लॉइज और हायर एजुकेशन (मास्टर्स डिग्री या उससे ज्यादा) के लिए 20 हजार स्टूडेंट्स को H-1B वीजा जारी करता है।

बढ़ चुकी है ये वीजा पाने की फीस

– अमेरिका आने वाले लोगों की संख्या कम करने के लिए ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन पहले ही वीजा को पाने की फीस बढ़ा चुका है। जनवरी 2016 में एच-1बी और एल-1 वीजा फीस बढ़ा चुकी है। एच-1बी के लिए यह 2000 डॉलर से बढ़ाकर 6000 डॉलर और एल-1 के लिए 4500 डॉलर किया गया है।

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जांबाजी की अनोखी मिसाल : 8 लोगों की जिंदगी बचाने वाले कांस्‍टेबल ने कहा, 14 लोगों की जान जाने का दुख

मुंबई के कमला मिल्स कॉम्प्लेक्स गुरुवार देर रात रूफटॉप पर स्थित एक पब में आग लगने से 14 लोगों की मौत हो गई. वहीं मुबंई पुलिस के एक कांस्‍टेबल ने आठ लोगों की जिंदगी बचाई और 200 लोगों को बाहर निकाला. वहीं एक फोटोग्राफर ने कांस्‍टेबल सुदर्शन शिवाजी शिंदे एक फोटो खींची जो इन दिनों वायरल हो गई है. इस फोटो में पुलिस कांस्‍टेबल अपने कंधों में एक महिला को आग की लपटों से निकालकर लेकर आ रहा है. मुंबई पुलिस आयुक्त दत्तात्रेय पदललगीकर और महापौर विश्वनाथ महादेववार ने सोमवार कांस्‍टेबल के प्रयासों की प्रशंसा की.

कांस्‍टेबल सुदर्शन शिवाजी शिंदे ने कहा कि यह अच्‍छी बात है कि साल के पहले दिन मेरी प्रशंसा की गई लेकिन मैं दुखी हूं कि 14 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी. कमला मिल्‍स के रूफ टॉप पर स्थि‍त 1 अबव रेस्‍टोरेंट में पार्टी के दौरान आग लगी और देखते ही देखते मोजो बिस्‍तरो समेत कई ऑफिस और दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया.

इस हादसे में अपना 29वां जन्‍मदिन मानने पहुंची खुशबू मेहता समेत 11 महिलओं की मौत हुई थी. इस हादसे में मरने वालों की उम्र 20 से 30 साल थी. डॉक्‍टरों का कहना था कि मरने वाले सभी लोगों की मौत दम घुटने के चलते ही हुई है.

रात करीब 12.30 कांस्‍टेबल शिंदे को वायरलेस पर आग लगने की सूचना मिली. वह अपने साथियों के साथ घटनास्‍थल पर पहुंचे. उन्‍होंने वहां कई एंबुलेंस, फायर की गाड़ियां और पुलिस की कार देखी. लोग मदद के लिए चिल्‍ला रहे थे. कमला मिल्‍स की छत पर आग बहुत भयंकर थी जिसके चलते काफी दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. शिंदे ने एनडीटीवी को बताया कि उसने फायरकर्मियों के साथ सीढ़ियों की मदद से कमला मिल्‍स की छत पर जाने का फैसला लिया.

उन्‍होंने कहा कि जब मैं ऊपर पहुंचा तो सब जगह धुंआ था और कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. इतना ही नहीं सांस लेना और आंखें खुला रखना एक चुनौती थी. इसके फायर की टीम ने एक्जिट वाले दरवाजे को तोड़ा ताकि आग पर काबू पाया जा सके. वहां हमने वॉशरूम के पास कुछ महिलाएं देखी और इसके बाद हमने एक-एककर उन महिलाओं को नीचे उतारा. उन्‍होंने बताया कि उस वक्‍त उन महिलाओं को वहां से ले जाने के लिए उनके पास कोई स्‍ट्रेचर नहीं था इसलिए उन्‍होंने उन महिलाओं को कंधों पर लादकर वहां से बाहर निकाला.

वहीं इस मामले में 18 वर्षीय एक छात्र ने बंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर मध्य मुंबई में कमला मिल परिसर में एक पब में गत 29 दिसंबर को लगी भीषण आग की घटना की सीबीआई जांच कराने का निर्देश देने की मांग की है. ब्रिटेन में पढ़ रहे गर्व सूद ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि कमला मिल्स के मालिकों के खिलाफ भी आईपीसी की धारा 304 के तहत आरोप लगाये जाएं.

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Indepth: अमेरिका ने पाक पर कसा शिकंजा, ट्रंप ने रोकी 255 मिलियन डॉलर की मदद

अमेरिका ने पाकिस्तान पर अबतक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान को लेकर किए गए ट्वीट के बाद अब अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सैन्य मदद पर रोक लगा दी है। खबरों के अनुसार अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 255 मिलियन डॉलर की आर्थिक सैन्य मदद पर रोक लगाई है।

इसकी पुष्टि व्हाइट हाउस द्वारा कर दी गई है। व्हाइट हाउस से जारी बयान में कहा गया है कि इस तरह की मदद का भविष्य इस्लामाबाद द्वारा अपनी जमीन पर मौजूद आतंकियों पर की जाने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को दिए बयान में बताया कि अमेरिका वित्त वर्ष 2016 में पाकिस्तान को दी जानी वाली 255 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद देने का इच्छुक नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप साफ कर दिया है कि अमेरिका पाकिस्तान से चाहता है कि वो अपनी जमीन पर मौजूद आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। पाकिस्तान के दक्षिण एशिया रणनीति के लिए किए गए एक्शन से हमारे रिश्तों की दिशा तय होगी जिसमें भविष्य में मिलने वाली सुरक्षा निधि भी शामिल है।


झूठा और कपटी है पाकिस्तान: ट्रंप

बता दें कि नए साल के पहले ही दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को झूठा और कपटी करार दिया था। ट्रंप ने लिखा में लिखा, ‘पाकिस्तान को 15 साल में 33 अरब डॉलर (दो लाख दस हजार करोड़ रुपए) की भारी-भरकम सहायता दी गई। बदले में उसने हमें कुछ नहीं दिया। केवल झूठ बोला और धोखा दिया। उसने हमारे नेताओं को बेवकूफ बनाया।’

यह पाकिस्तान को किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से सबसे कड़ी फटकार है। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कुछ ही दिन पहले अमेरिकी अखबार “न्यूयॉर्क टाइम्स” ने खबर दी थी कि अमेरिका पाकिस्तान को दी जाने वाली 1436 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद रोकने पर विचार कर रहा है।


कब-कब पाकिस्तान की मदद के लिए आगे आया अमेरिका

पाकिस्तान के गठन के बाद से ही अमेरिका उसकी मदद करता आया है, लेकिन वर्ष 2001 में अमेरिका पर हुए आतंकी हमले के बाद उसने पाकिस्तान के लिए मदद का भंडार खोल दिया। अमेरिका के एक रिसर्च थिंक टैंक सेंटर फॉर ग्लोबल डवलवमेंट (CGD) की रिपोर्ट के मुताबिक 1951-2011 तक अमेरिका ने पाकिस्तान को 67 बिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद की है।

– बराक ओबामा के कार्यकाल में वर्ष 2009 में पाकिस्तान की मदद के लिए कैरी गुलर विधेयक पास हुआ

– 2010-14 में साढ़े सात अरब अमेरिकी डालर की असैनिक मदद वाले कैरी लुगर विधेयक को व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान के लिए व्यापक समर्थन की ठोस अभिव्यक्ति बताया

अमेरिका के फैसले का क्या होगा असर

अमेरिका द्वारा आर्थिक मदद रोक देने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। आर्थिक मदद के रूक जाने से पाकिस्तान को खासा नुकसान झेलना होगा। पाकिस्तान की आर्थिक हालत बेहद खराब है, पूरा देश उधारी और कर्जे पर चल रहा है। गरीबी, बेरोजगारी से तो पाकिस्तान जूझ रहा है, लेकिन आतंकवाद भी पाकिस्तान की जड़ों को घोघला बना रहा है।

ऐसे में अमेरिका की मदद कहीं न कहीं पाकिस्तान के लिए तिनके का सहारा थी और अब वो भी खत्म हो गई। अब जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पालना बंद नहीं करता, ये पॉलिसी दोबारा बहाल होती नजर नहीं आ रही है।

अमेरिका की कार्रवाई पर पाकिस्तान का रुख

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्‍बासी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आरोपों और सहायता राशि रोक देने के बाद कैबिनेट और राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक बुलाई है। रेडियो पाकिस्तान ने बताया कि अब्बासी आज संघीय कैबिनेट की एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जो अन्य प्रमुख मुद्दों के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दे के बीच चर्चा करेंगे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में ट्रंप की टिप्पणी चर्चा का मुख्य मुद्दा होगा। कैबिनेट की बैठक के बाद कल राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की बैठक होगी।

प्रधानमंत्री अब्बासी एनएससी की अध्यक्षता करेंगे, जो देश और क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति में विस्तार से समीक्षा करेंगे। बैठक में विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ, आंतरिक मंत्री अहसान इकबाल, रक्षा मंत्री खुर्रम दस्तगीर-खान, सेवा प्रमुख और वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। सूत्रों ने बताया कि एनएससी बैठक अमेरिका द्वारा लगाए आरोपों के अंतिम उत्तर को मजबूती देने के लिए मदद करेगी।

बता दें कि ट्रंप के आरोपों पर प्रतिक्रिया देने में पाकिस्तान सावधानी बरत रहा है। अब तक केवल विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने रिकॉर्ड पर इसके बारे में बात की है। उन्होंने ट्वीट पर कहा, ‘हम राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट में जल्द ही जवाब देंगे, दुनिया को सच्चाई पता चलेगी, तथ्यों और कल्पना के बीच का अंतर समझ आएगा।’

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200 साल पुरानी जंग की बरसी पर पुणे में हिंसा, एक की मौत; मुंबई समेत महाराष्ट्र के 13 शहरों में धारा 144 लागू

भीमा-कोरेगांव की 200 साल पुरानी जंग की बरसी के मौके पर भीमा, पबल और शिकरापुर गांव में दलितों और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई। ये विवाद पुणे से करीब 30 किलोमीटर दूर पुणे-अहमदनगर हाइवे में पेरने फाटा के पास हुआ। लोगों ने हाईवे पर करीब 100 गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की। इस घटना के विरोध में मुंबई समेत महाराष्ट्र के 13 शहरों में हिंसा और प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इन शहरों में धारा 144 लागू कर दी गई है। उधर, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने घटना की ज्यूडिशियल इन्क्वॉयरी के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने के लिए हिंसा फैलाई है। ऐसी हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

Q&A में समझें पूरा मामला?

किस जंग की बरसी मना रहे थे लोग?

– 1 जनवरी 1818 में कोरेगांव भीमा की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर अंग्रेजों ने जीत दर्ज की थी। इसमें कुछ संख्या में दलित भी शामिल थे।

– अंग्रेजों ने कोरेगांव भीमा में अपनी जीत की याद में जयस्तंभ का निर्माण कराया था। बाद में यह दलितों का प्रतीक बन गया।

विवाद की वजह क्या है?

– हर साल हजारों की संख्या में दलित समुदाय के लोग जयस्तंभ पर श्रद्धांजलि देते हैं। सोमवार को रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) ने जंग की 200वीं बरसी पर खास कार्यक्रम कराया था। इसमें महाराष्ट्र के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री गिरीश बापट, बीजेपी सांसद अमर साबले, डेप्युटी मेयर सिद्धार्थ डेंडे और अन्य नेता शामिल हुए। इस मौके पर देशभर से करीब 2 लाख दलित यहां इकट्ठा हुए थे। मराठा कम्युनिटी इस प्रोग्राम का विरोध कर रही थी।

सोमवार को कैसे शुरू हुआ विवाद?

– शनिवार रात वढू बुद्रुक गांव में दो गुटों में विवाद हो गया था। इसके बाद सोमवार को भी तनाव के हालात थे। भीमा परिसर में कार्यक्रम के दौरान कुछ लोग भगवा झंडे लेकर पहुंचे और हिंसा शुरू हो गई।

कार्यक्रम के लिए प्रशासन ने क्या इंतजाम किए थे?

– आईजीपी (कोल्हापुर रेंज) विश्वास नांगरे-पाटिल ने बताया कि इलाके में सोमवार सुबह से ही तनावपूर्ण माहौल था। जिसके चलते कार्यक्रम वाली जगह पर भारी सुरक्षा की गई थी।

हिंसा का असर कहां-कहां हुआ?

– हिंसा को लेकर असर औरंगाबाद, ठाणे, मुंबई के कुछ इलाकों में दलित संगठन आरपीआई से जुड़े लोगों ने प्रोटेस्ट किया है। इसके अलावा बीड, परभणी, सोलापुर, जालना और बुलढाणा में भी प्रोटेस्ट हुआ है। कई जगहों से तोड़फोड़ की खबरें हैं। चेंबुर और गोवंडी के बीच प्रदर्शन के बाद हार्बर लाइन पर लोकल ट्रेन सर्विस प्रभावित हुई है। मुंबई और परभणी में भी लोगों ने ट्रेन रोकी।

हालात काबू में करने के लिए क्या कदम उठाए गए?

– मुंबई समेत महाराष्ट्र के 13 शहरों में धारा 144 लागू कर दी गई है। मोबाइल टॉवर बंद करने और नेटवर्क जैमर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। सीआरपीएफ की दो टुकड़ियां शिकरापुर स्टेशन में तैनात की गई है। पुलिस की 6 कंपनियां लगाई गई हैं। एंटी रॉइट स्क्वॉड भी तैनात की गई है।

सरकार ने क्या एक्शन लिया?

– देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर करीब तीन लाख लोग आए थे। हमने पुलिस की 6 कंपनियां तैनात की थीं। कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने के लिए हिंसा फैलाई। इस तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. मृतक के परिवार वालों को 10 लाख के मुआवजा दिया जाएगा।”

– सीएम ने मृतक की फैमिली को 10 लाख मुआवजा देने का एलान किया है। साथ ही घटना की ज्यूडिशियल इन्क्वॉयरी के आदेश दे दिए गए हैं।

अपोजिशन ने क्या कहा?
– एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने इस हिंसा के लिए दक्षिणपंथी संगठनों की जिम्मेदार बताया है और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
– पवार ने कहा, “भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह मनाई जा रही थी। हर साल यह दिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है। लेकिन इस बार कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने यहां की फिजा को बिगाड़ दिया।”
– आरपीआई लीडर रामदास अठावले ने जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि 200 साल में ऐसी घटना नहीं हुई है।

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उस इंटरव्यू में क्या बोले बराक़ ओबामा जो प्रिंस हैरी ने लिया

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोशल मीडिया के गैरज़िम्मेदाराना इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है.

जनवरी में पद से हटने के बाद बराक ओबामा का शायद ये पहला और अपनी तरह का अनोखा इंटरव्यू था.

ये इस वजह से भी ख़ास था क्योंकि ‘बीबीसी रेडियो 4’ के टुडे प्रोग्राम के लिए प्रिंस हैरी ओबामा का इंटरव्यू ले रहे थे.

ब्रिटेन के राज परिवार के प्रोटोकॉल में प्रिंस हैरी पांचवें पायदान पर हैं.

सोशल मीडिया के गैरज़िम्मेदाराना इस्तेमाल पर ओबामा ने चेतावनी दी कि इसे ग़लतफहमियां बढ़ती हैं और जटिल मुद्दों पर लोगों की समझदारी पर असर पड़ता है.

बराक ओबामाइमेज कॉपीरइटAFP
Image captionजनवरी में व्हाइट हाउस छोड़ते समय आख़िरी बार बतौर राष्ट्रपति प्रेस से बात करते हुए बराक ओबामा

सोशल मीडिया की इंतेहा पर…

पूर्व राष्ट्रपति ने आने वाले कल की उस स्थिति को लेकर चिंता ज़ाहिर की ‘जिसमें हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ कर दिया जाएगा और लोग केवल वही बातें पढ़ना और सुनना चाहेंगे जो उनके अपने विचारों से मेल खाती हों.’

“इंटरनेट का एक ख़तरा ये भी है कि लोग पूरी तरह से अलग हक़ीक़तों में जी सकते हैं. लोगों के अपने पूर्वाग्रह होते हैं और वे इन्हीं पूर्वाग्रहों को मज़बूत करने वाली सूचनाओं के दायरे में सिमटकर दुनिया से अलग-थलग से बने रह सकते हैं.”

“सवाल ये है कि हम किस तरह से टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करते हैं ताकि अलग-अलग तरह की आवाज़ों की जगह मिल सके, जो विविधता के लिए गुंजाइश बनाए और जो बंटवारे को बढ़ावा देने वाली ताक़तों को मौका न दे.”

ओबामा के उत्तराधिकारी ट्रंप ट्विटर का खूब इस्तेमाल करते हैं लेकिन पूर्व राष्ट्रपति ने उनका नाम नहीं लिया. ट्रंप पर ट्विटर के ज़्यादा इस्तेमाल का आरोप लगता रहा है हालांकि पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ये मानते हैं कि ट्विटर की वजह से अमरीकी लोगों से सीधे जुड़ने में सहूलियत होती है.

बराक ओबामा, डोनल्ड ट्रंपइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

राष्ट्रपति पर पड़ने वाले दबाव पर…

ये मुश्किल है, लोगों की नज़र में बने रहना कई तरह से असहज करता है. एक तरह से ये चुनौतीपूर्ण भी है. जिन्हें आप पसंद करते हों, उन्हें भी दिक्कतें पेश आ सकती हैं. 20-30 साल पहले ऐसा नहीं होता था.

इसलिए ये एक तरह से बलिदान जैसा है. मुझे लगता है कि जब लोग राजनीति में जाने का फ़ैसला करते हैं तो उन्हें खुद को शांत रखना चाहिए. लेकिन आख़िरकार अगर आप दुनिया में सार्थक बदलाव ला पाते हैं तो राजनीति में आपका आना सार्थक हो जाता है.

ओबामा इन सब चुनौतियों के बीच अपनी पत्नी मिशेल से मिले सपोर्ट के लिए शुक्रगुजार महसूस करते हैं.

बराक ओबामाइमेज कॉपीरइटAFP

व्हाइट हाउस छोड़ने पर

“मिलाजुला अनुभव होता है. उन सभी कामों के लिए जो अधूरे रह गए. चिंता इस बात की है कि देश किस तरह से आगे बढ़े लेकिन आप जानते हैं कि मिलाजुलाकर सब कुछ ठीक है.”

व्हाइट हाउस में अपने कार्यकाल के दौरान ओबामा खुद को एक रीले रनर के तौर पर देखते हैं.

अगर आप मेहनत से दौड़ते हैं और आप अपना बेस्ट करते हैं तो आप कामयाबी से अपनी मशाल आगे बढ़ा सकते हैं. आप अपना काम अच्छे से करते हैं तो दुनिया थोड़ी बेहतर होती है.

लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित कराने वाले ओबामाकेयर प्रोजेक्ट को वे अपनी बड़ी उपलब्धि बताते हैं.

“ये कहना कितना बड़ी बात है कि दो करोड़ अमरीकियों को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराया गया जो उनके पास पहले नहीं था.”

बराक ओबामा, डोनल्ड ट्रंपइमेज कॉपीरइटREUTERS

आना वाला कल कैसा दिखता है?

दुनिया के सामने मौजूद समस्याओं को ख़ारिज किए बिना ओबामा सकारात्मक बने हुए हैं.

अगर हम अपनी किस्मत खुद लिखते हैं, इसकी ज़िम्मेदारी लेते हैं, इसमें हिस्सा लेते हैं, इससे जुड़ते हैं, इस पर खुलकर बात करते हैं, अगर हम समुदायों के साथ काम करते हैं तो हर मुश्किल का हर निकाला जा सकता है, बावजूद उन डरावनी ख़बरों के जो हम देखते हैं.

अगर मानव इतिहास में कोई एक लम्हा आपको चुनने का मौका मिले जिसमें आप पैदा होना चाहें तो आप आज को चुनेंगे क्योंकि हक़ीक़त यही है कि दुनिया आज सबसे ज़्यादा स्वस्थ, संपन्न, ज्यादा शिक्षित, अधिक सहिष्णु और आधुनिक और कम हिंसक है.

बराक ओबामा, प्रिंस हैरीइमेज कॉपीरइटREUTERS

प्रिंस हैरी क्या बोले?

एडिटिंग के अलावा प्रिंस हैरी ने ये इंटरव्यू ख़ुद लिया.

“मैंने बहुत ज़्यादा इंटरव्यू नहीं किए हैं लेकिन ये एक अच्छा अनुभव था. ख़ासकर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का. हकीकत तो ये थी कि वे मुझे इंटरव्यू करना चाहते थे.”

“ये अनुभव हासिल करने के साथ-साथ सीखने जैसा भी था. लेकिन कई और भी अहम मुद्दे हैं जिनपर सोचने और बात किए जाने की ज़रूरत है.”

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पेट्रोल में मिलाया जाएगा 15 फीसद मेथेनॉल, समझें इसके फायदे-नुकसान

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने आज लोकसभा में कहा कि अब पेट्रोल में 15 फीसद मेथेनॉल मिलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से साल 2030 तक भारत का ईंधन बिल कम हो जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मेथेनॉल को बढ़ावा देने से प्रदूषण पर भी लगाम लगाई जा सकेगी। सरकार की इस योजना के बारे में नितिन गडकरी पहले भी जानकारी दे चुके हैं।

मेथेनॉल मिलाने से कितना सस्ता हो जाएगा पेट्रोल: मेथेनॉल कोयला से बनाया जा सकता है और इसकी लागत 22 रुपये प्रति लीटर होती है, जबकि पेट्रोल की कीमत 80 रुपये प्रति लीटर पड़ती है। चीन इसे 17 रुपये प्रति लीटर की लागत में तैयार कर रहा है। गडकरी ने कहा यह पेट्रोल की लागत को कम करेगा और प्रदूषण को भी कम करेगा। गडकरी ने कहा कि मुंबई के आस-पास की फैक्ट्री जिसमें दीपक फर्टिलाइजर्स और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स भी शामिल हैं वो मेथेनॉल को तैयार कर सकती है।

समझें गणित कैसे सस्ता हो जाएगा पेट्रोल: (उदाहरण से समझें)

  • 1 लीटर पेट्रोल की कीमत दिल्ली में 69 रुपए है
  • यानी 1000 एमएल पेट्रोल की कीमत: 69 रुपए
  • इसमें अगर 15 फीसद एथेनॉल मिलेगा।
  • 850 एमएल पेट्रोल की कीमत: 69/1000X850= 58.65 रुपए
  • वहीं 1000 एमएल मेथेनॉल की कीमत 22 रुपए
  • 15 फीसद यानी 150 एमएल मेथेनॉल की कीमत: 22/1000X150= 3.3 रुपए
  • इस हिसाब से 1 लीटर पेट्रोल की कीमत होगी: 58.65+3.3= 61.95 रुपए

यानी इस हिसाब से आपको करीब 7 रुपए का सीधा-सीधा फायदा होगा।

क्या है मेथेनॉल: मेथनॉल आंतरिक दहन और अन्य इंजनों के लिए वैकल्पिक ईंधन है। इसे या तो गैसोलीन के साथ मिलकर इस्तेमाल किया जाता है या फिर सीधे तौर पर। काफी सारे देशों में इसका इस्तेमाल रेसिंग कार के लिए किया जाता है। अमेरिका में, पेट्रोलियम आधारित ईंधन के विकल्प के रूप में इथेनॉल ईंधन को मेथनॉल ईंधन तुलना में ज्यादा पसंद किया जाता है। सामान्य तौर पर, इथेनॉल कम विषाक्त (टॉक्सिक) होता है और इसका ऊर्जा घनत्व ज्यादा होता है। हालांकि मेथनॉल ऊर्जा उत्पादन के लिहाज से कम खर्चीला होता है। ओपेक देशों के वर्ष 1973 के तेल संकट के दौरान, रीड और लर्नर (1973) ने कोयला के इस्तेमाल से विनिर्माण प्रौद्योगिकी के साथ ईंधन के रूप में मेथनॉल को प्रस्तावित किया था और यह गैसोलीन को रिप्लेस करने के लिहाज से एक बेहतर (पर्याप्त) संसाधन भी है। ऐतिहासिक रूप से, मेथनॉल को पहली बार लकड़ी के विनाशकारी आसवन (pyrolysis) द्वारा उत्पादित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लकड़ी के शराब के आम अंग्रेजी नाम का परिणाम था।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट: केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया ने बताया कि देश के भीतर पेट्रोल में एथेनॉल तो मिलाया ही जा रहा है, लेकिन मेथेनॉल एक नया कॉन्सेप्ट है। अब पेट्रोल में मेथेनॉल मिलाने से बेशक प्रदूषण काफी कम होगा,जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट दिल्ली सरकार को लताड़ लगाते हुए यह भी कह चुकी है कि राजधानी में प्रदूषण नियंत्रित करने के उनके प्रयास नाकाफी हैं। अगर पेट्रोल में मेथेनॉल मिलाया जाएगा तो जाहिर तौर पर पेट्रोल की कीमत में 8 से 10 रुपए की कमी आएगी। जो कि आम आदमी के लिए एक राहत की खबर है। हालांकि इस मसले पर चिंता की बात गाड़ियों के इंजन को लेकर है जो कि मेथनॉल मिलाए जाने के कारण खराब भी हो सकते हैं। हालांकि सरकार ने इस संबंध में वोल्वो से स्पेशल इंजन के लिए बात भी की है। साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि इससे देश के इंपोर्ट (आयात) पर भी असर पड़ सकता है।

क्या होंगे नुकसान: ऑटो एक्सपर्ट रंजॉय मुखर्जी ने बताया कि इस फैसले से गाड़ियों पर जाहिर तौर पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि फैक्ट्रियों से निकलने वाली गाड़ियां मौजूदा समय में मेथेनॉल के लिहाज से सक्षम नहीं हैं। इसलिए सरकार को अपनी इस योजना को अमलीजामा पहनाने से पहले कंपनियों को गाड़ियों को अपग्रेड करने का समय देना होगा। नहीं तो यह गाड़ियों के इंजन और उसके प्रदर्शन पर बुरा असर डाल सकता है।

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काबुल के शिया कल्चरल सेंटर पर आत्मघाती हमला; 40 की मौत, 30 से ज्यादा जख्मी

यहां के पश्चिमी इलाके में स्थित शिया कल्चरल एंड रिलीजियस ऑर्गनाइजेशन पर एक आत्मघाती हमले की खबर है। इसमें कम से कम 40 लोग मारे गए और 30 जख्मी हो गए। इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी भी आतंकी गुट ने नहीं ली है। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि इस हमले में मरने वालों की तादाद बढ़ सकती है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, हमला उस वक्त किया गया जब ऑर्गनाइजेशन के ऑफिस में मीडिया ग्रुप के मेंबर्स चर्चा कर रहे थे।

– स्थानीय तोलो न्यूज ने विदेश मंत्रालय के हवाले से 40 लोगों की मौत और 30 लोगों के जख्मी होने की पुष्टि की है।

– अफगानिस्तान के अफसरों के मुताबिक, मारे गए लोगों में ज्यादातर महिलाएं, बच्चे और जर्नलिस्ट शामिल हैं।

एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत

– तोला न्यूज के मुताबिक, इस हमले में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई है। परिवार वाले शवों के बीच में अपनों की तलाश करते रहे।

– प्रेसिडेंट अशरफ गनी ने इस हमले की निंदा की है और इसे इंसानियत के खिलाफ किया गया गुनाह बताया है।

मई में हुए अटैक में मारे गए थे 90 लोग

– बता दें कि इसी साल मई में काबुल स्थित इंडियन एंबेसी के पास भी ऐसा ही अटैक किया गया था, जिसमें कम से कम 90 लोगों की मौत हो गई थी। 300 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे।

जुलाई में कार ब्लास्ट में मारे गए थे 24 लोग

– गुलाई दावा खाना इलाके में 24 जुलाई को फिदायीन अटैक किया था। इसमें 24 लोगाें की मौत हो गई थी। 42 लोग जख्मी हुए थे।

हमलों में सबसे ज्यादा पिछले साल हताहत हुए
– यूनाइटेड नेशंस असिस्टेंस मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अफगानिस्तान में हमलों में 3498 आम लोगों की मौत हुई थी। 7920 लोग घायल हुए। यानी 11418 लोग हताहत हुए। पिछले आठ सालों में यह आंकड़ा सबसे ज्यादा था। 2015 की तुलना में इसमें 2% का इजाफा हुआ था।
– UNAMA की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मार्च तक अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक और आतंकी हमलों में 715 लोगों की मौत हुई थी। 1466 लोग घायल हुए थे।

अमेरिकी फौज आने के बाद बढ़ रहीं मुश्किलें

– आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिकी और विदेशी सेनाएं अफगानिस्तानी फोर्स की मदद करती रही हैं।

– फिलहाल यहां 8400 अमेरिकी सैनिक और 5000 नाटो सैनिक हैं। इनका मुख्य काम सलाहकार के रूप में काम करना है।

– छह साल पहले तक यहां एक लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक थे। 2011 से 2013 के बीच अमेरिकी फौज की वापसी के बाद यहां आतंकी हमलों में तेजी आई है।