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फ्लिपकॉर्ट में 77% हिस्सेदारी के बाद अब 85% की तैयारी में वॉलमार्ट

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब वॉलमार्ट 3 अरब डॉलर का निवेश कर फ्लिपकॉर्ट की 85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है।

 

इस बात की जानकारी दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर ने शुक्रवार को अमेरिकी सिक्यॉरिटीज और एक्सचेंज कमिशन को दी। रिटेलर ने ये भी बताया कि वॉलमार्ट के बाकी शेयर भी उसी कीमत पर खरीदे जाएंगे जिस कीमत पर 77 फीसदी शेयर खरीदे गए थे।

वॉलमार्ट ने किस दर पर फ्लिपकॉर्ट के शेयरों को हासिल किया यह जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। वॉलमार्ट की फाइलिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लिपकॉर्ट के बड़े निवेशक जापानी इंटरनेट और टैलीकॉम कंपनी सॉफ्टबैंक ने शेयरों को बेचने पर कोई फैसला नहीं किया है। सॉफ्टबैंक के पास फ्लिपकॉर्ट के करीब 22 फीसदी शेयर हैं। इससे पहले मीडिया रिपोर्टस से भी ये बात साने आई थी कि वॉलमार्ट और सॉफ्टबैंक पहले की कीमत पर ही शेयर ट्रांजेक्शन के लिए वक्त निकाल कर बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे।

एसईसी फाइलिंग के अनुसार, वॉलमार्ट 2 अरब डॉलर कैश में निवेश कर रहा है और फ्लिपकॉर्ट के मौजूदा शेयर होल्डर्स से 14 अरब डॉलर मूल्य के शेयर खरीद रहा है। वॉलमार्ट ने कहा है कि वह बोर्ड और फाउंडर की सलाह से फ्लिपकॉर्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीईओ और प्रिंसिपल एग्जिक्युटिव्ज को अपॉइंट या रिप्लेस कर सकता है। फिलहाल कल्याण कृष्णमूर्ति फ्लिपकॉर्ट के सीईओ हैं और को-फाउंडर बिन्नी बंसल ग्रुप सीईओ हैं। को-फाउंडर और एग्जिक्युटिव चैयरमैन सचिन बसंल ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया।

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CWG 2018: हिना सिद्धू ने शूटिंग में जीता गोल्ड, अब तक भारत के 20 मेडल हुए

21वें कॉमनवेल्थ खेलों के छठे दिन शूटिंग में अच्छी खबर आई है. 25 मीटर पिस्टल इवेंट में हीना सिद्धू ने भारत को गोल्ड दिलाया है. इसके साथ ही भारत के स्वर्ण पदकों की कुल संख्या 11 हो गई है. हीना ने फाइनल में रिकॉर्ड 38 अंक बटोरे. इससे पहले हीना ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में सिल्वर जीता था.

मौजूदा कॉमनवेल्थ शूटिंग में भारत के खाते में अब तक कुल तीन गोल्ड मेडल आ चुके हैं. हीना से पहले मनु भाकेर और जीतू राय ने निशानेबाजी में गोल्ड जीता था. शूटिंग में भारत ने 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज के साथ कुल 8 मेडल हासिल किए हैं.

भारतीय मुक्केबाज अमित पंघाल ने पुरुषों की 46-49 किलोवर्ग की मुक्केबाजी स्पर्धा के सेमीफाइनल में जगह बना ली है. इसके साथ ही अमित ने ब्रॉन्ज मेडल भी पक्का कर लिया है. हालांकि, उनकी कोशिश भारत को गोल्ड मेडल दिलाने की होगी.

पुरुषों के 50 मीटर राइफल प्रोन इवेंट के फाइनल में भारत के गगन नारंग 142.3 के स्कोर के साथ मेडल की रेस से बाहर हो गए. गगन सातवें स्थान पर रहे, जबकि चैन सिंह 204.8 का स्कोर कर चौथे स्थान पर आए. इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक वेल्स के डेविड फेल्प्स को हासिल हुआ. उन्होंने 248.8 अंक बनाए और राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड भी तोड़ा. स्कॉटलैंड के नील स्टिरटोन (247.7 अंक) को रजत मिला, जबकि इंग्लैंड के केनेथ पार (226.6 अंक) ने कांस्य पदक जीता.

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क्या उत्तर और दक्षिण कोरिया की दुश्मनी ख़त्म हो गई है?

साल 2017 के जाते-जाते कोरियाई प्रायद्वीप में एक बड़ा बदलाव हुआ. परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी जिद पर अड़े उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने कुछ नरमी दिखाते हुए अपने पड़ोसी देश से संबंध सुधारने के संकेत दिए.

फिर उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की मेज़बानी में हो रहे शीतकालीन ओलंपिक में अपनी टीम भेजने के फ़ैसला किया और एक क़दम और आगे बढ़ते हुए एलान किया कि उद्घाटन समारोह के दौरान दोनों देशों की टीमें एक ही झंडे के तले मार्च करेंगी.

किम जोंग उन ने ओलंपिक उद्घाटन के लिए अपनी बहन को प्योंगचांग भेजा और लौटने के बाद उनकी बहन ने जो रिपोर्ट सौंपी वो किम जोंग उन को पसंद भी आई.

उद्घाटन समारोह में जब उत्तर और दक्षिण कोरिया की टीमें एक झंडे तले मार्च कर रही थीं तो दुनिया के लिए ये बड़ा संदेश था, इसलिए भी कि जिस झंडे के नीचे ये टीमें थी उसमें सफेद पृष्ठभूमि पर एकीकृत कोरिया को दिखाया गया था.

अपने बीते कल और साझा इतिहास को याद कर उत्तर कोरिया के शीर्ष अधिकारियों की आंखें भी भर आईं और जब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन और किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग एक साथ बैठे तो दूरियां कम दिखीं.

कोरियाई प्रायद्वीप में शांति बनाए रखने के इच्छुक हैं दोनों देश

किम जोंग की बहन किम यो जोंग वहां संयुक्त महिला आइस हॉकी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए मौजूद थीं तो उत्तर कोरिया की चीयरलीडर्स दुनियाभर से वहाँ पहुँचे दर्शकों का उत्साहवर्धन कर रही थीं.

लेकिन शीतकालीन ओलंपिक से रिश्तों में आई ये गर्माहट लंबे समय तक कायम रहेगी?

नई दोस्ती नहीं आ रही रास

यही लाख टके का सवाल है जिसका जवाब शायद दुनिया का हर शख़्स पाना चाहेगा.

उत्तर और दक्षिण कोरिया के खेल के बहाने ही सही एक-दूसरे के करीब आने की ख़बर दुनिया के हर कोने में चर्चा का विषय बनी.

लेकिन उत्तर और दक्षिण कोरिया की ये नई दोस्ती दक्षिण कोरिया में हर किसी को रास नहीं आ रही है.

किम यो जोंग
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ऐसे कई लोगों का मानना है कि मून सरकार ने अमरीका से अपना मुंह मोड़ लिया और उत्तर कोरिया की तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया है.

परंपरावादी इस कदर हतोत्साहित हैं कि उत्तर कोरिया का दक्षिणपंथी मीडिया अपने संपादकीयों में नियमित तौर पर हर चर्चा में उत्तर कोरिया के ज़िक्र पर आपत्ति जताता है.

एक चिंता ये भी है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने का वादा करने के बदले दक्षिण कोरिया और अमरीका के संयुक्त सैन्य अभ्यास को रोकने की मांग कर सकता है.

हक़ीक़त ये है कि उम्मीदें हर तरफ़ से हैं, साथ ही हर कोई ये भी चाहता है कि हालात और बुरे न हों. ये सही है कि एक खेल महोत्सव ने दोनों देशों को करीब लाने का मंच दिया, लेकिन इससे राजनीतिक गतिरोध एकदम दूर हो जाएगा, इसे लेकर संदेह है.

अविश्वास

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दशकों से चली आ रही बातचीत बेनतीजा रही है और बहुत अधिक उदासी या अविश्वास का मतलब प्रायद्वीप में तनाव, घबराहट और असहजता और वो भी स्थाई तौर पर.

65 साल पहले हुए कोरियाई युद्ध के बाद इन दोनों देशों के बीच रिश्ते अमूमन एक जैसे और स्थाई रहे हैं.

उत्तर कोरिया निश्चित तौर पर दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश है और इसकी वजह है इसका परमाणु कार्यक्रम. किम जोंग उन के जखीरे में परमाणु हथियारों के होने से इसका ख़तरा दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है.

तो क्या उत्तर कोरिया के व्यवहार या नीति में बदलाव रातों-रात आ गया और वो दक्षिण कोरिया के साथ दोस्ती करने के लिए बेताब है?

उत्तर कोरिया पहले भी बातचीत की मेज़ पर बैठ चुका है और कई दौर की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका था. उत्तर कोरियाई बेहद चालाक होते हैं और मोलतोल में भी माहिर होते हैं.

वो हर इंच के लिए लड़ते हैं और हर बुरी बात का देर तक शोक मनाते हैं.

उत्तर कोरिया के साथ मोलभाव इतना आसान नहीं है, हां इतना तय है कि जो उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले बात तक करने को तैयार नहीं था, वो कुछ कदम तो बढ़ा ही है.

उत्तर कोरिया में वामपंथी विचारधारा के लोगों को उम्मीद है कि उनकी सरकार भी इस मौके को बेकार नहीं जाने देगी.

लेकिन राष्ट्रपति मून इस राह पर कितना बढ़ पाएंगे, ये कहना अभी जल्दबाज़ी होगी. राष्ट्रपति मून 41 फ़ीसदी वोटों के साथ सत्ता में आए हैं और शायद खुद के दम पर बहुत दूर न चल पाएं.

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अमरीका की भूमिका

दूसरी तरफ़, उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच पनप रही ‘नई दोस्ती’ से ट्रंप प्रशासन असहज महसूस कर रहा है.

किम जोंग उन ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति को उत्तर कोरिया आने का निमंत्रण दिया है और हो सकता है कि आने वाले समय में राष्ट्रपति मून प्योंगयांग जाएं.

हालाँकि ये आमंत्रण औपचारिक तौर पर नहीं दिया गया है और मून ने कहा है कि वो चाहते हैं कि उत्तर कोरिया, अमरीका के साथ बातचीत के लिए तैयार हो.

अभी ये सिर्फ़ माहौल है और एक छोटी सी मुलाक़ात को रिश्तों में सुधार के रूप में पेश नहीं किया जा सकता, वो भी तब जब ये भी पता न हो कि उनके बीच किस मुद्दे पर चर्चा हुई.

दक्षिण कोरिया में चर्चा ये है कि राष्ट्रपति मून बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन परंपरावादियों को डर है इसे कहीं तुष्टीकरण के रूप में न देखा जाए.

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दक्षिण कोरिया के इतिहासकार जॉन डेल्यूरी कहते हैं, “लोगों को लग रहा है कि मून जे इन को ठीक से श्रेय नहीं मिल रहा है. लोगों को लग रहा है उत्तर कोरिया मन बदल रहा है. अमरीका को समझना होगा कि दक्षिण कोरिया के हाथ बंधे हैं. समझना ज़रूरी है कि उत्तर कोरिया को दक्षिण कोरिया से डर नहीं लगता, बल्कि दक्षिण कोरिया को लगता है, क्योंकि परमाणु हथियार उसके पास नहीं हैं.”

उत्तर कोरिया के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत के दौर पूर्व में कामयाब नहीं रहे, लेकिन इस बार शायद उत्तर कोरिया अपने रुख़ में कुछ नरमी बरते- बिल्कुल ओलंपिक की भावना की तरह- आगे आए, बातचीत शुरू करे और उसे लेकर दुनियाभर में जो अविश्वास का माहौल बना है, उसे दूर करे.

लेकिन, ये भी तय है कि किम जोंग उन दक्षिण कोरिया और अमरीका को दूर-दूर करने की कोशिश करेंगे, क्योंकि उत्तर कोरिया को ये पता है कि राष्ट्रपति ट्रंप को दक्षिण कोरिया में नापसंद करने वालों की कमी नहीं है.

इसलिए, शीतकालीन ओलंपिक के बाद उम्मीद तो बंधी है, लेकिन सच ये है कि इस पहल से बहुत ज़्यादा उम्मीदें न रखी जाएं.

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मैच में महेंद्र सिंह धोनी की गाली-डांट सुनने वाले मनीष पांडे ने कही यह बात

दक्षिण अफ्रीका दौरे के बीच टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से गाली और डांट-फटकार सुनने वाले मनीष पांडे की टिप्पणी आई है। उन्होंने कहा है कि लगातार इस तरह की चीजों का सामना करना कठिन होता है, लेकिन दिग्गजों से भरी भारतीय टीम में उन्हें अभी धैर्य रखना होगा। पांडे के अनुसार, उनके लिए यह थोड़ा मुश्किल था, जिसका उनके दिमाग पर भी असर पड़ा। यहां तक कि उन्हें इस बाबत मानसिक तनाव से निपटने के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना पड़ा। बता दें कि बुधवार को सेंचुरियन में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच दूसरा टी-20 खेला गया। धोनी में क्रीज पर रन लेने में लापरवाही करने को लेकर साथी खिलाड़ी को डांटते हुए गाली दी थी। माही ने कहा था कि उधर क्या देख रहा है, इधर देख ले, उसी पर पांडे की ओर से प्रतिक्रिया आई है। मनीष पांडे ने एक इंटरव्यू में कहा, “भारतीय टीम का शुरुआती लाइन-अप बेहद अच्छा है। हमारे पास 35-40 ओवर खेलने के लिए तीन शीर्ष बल्लेबाज हैं, जिनमें विराट कोहली और महेंद्र सिंह धौनी मेरे आगे हैं। मगर मुझे लगता है कि अभी मुझे और मौके मिलने चाहिए, ताकि मैं उनमें और भी अच्छा कर सकूं।”

क्रिकबज से हुई बातचीत में आगे उन्होंने बताया, “ईमानदारी से बताऊं, यह थोड़ कठिन है। आपके दिमाग पर इसका खासा असर पड़ता है। खासकर इस तरह के दौरे पर। मुझे अब यह चीज काफी महसूस हो रही है। यह भी एक कारण है कि मुझे खुद को एक डॉक्टर को दिखाना पड़ा था।”

दूसरे टी-20 में कर्नाटक के क्रिकेटर ने 66 गेंदों में 79 रन की शानदार पारी खेली। हालांकि, उनका टीम के लिए किया गया यह योगदान भारत को जीत नहीं दिला सका। ऐसे में टी-20 सीरीज का स्कोर 1-1 से बराबर हो गया है। नतीजतन पांडे आगामी छिटपुट मौकों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। चूंकि वनडे सीरीज में उन्हें एक भी मैच खेलने के लिए नहीं मिला था।
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तेजप्रताप ने भूतों के डर से छोड़ा बंगला, सुशील मोदी बोले- वे लोग खुद भूत हैं

राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े पुत्र एवं पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव ने सरकारी बंगले को खाली कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस बंगले में भूत छोड़ दिया है। इसलिए यहां रहना अब ठीक नहीं है। तेज प्रताप के बयान पर पलटवार करते हुए सुशील मोदी ने कहा कि जो लोग खुद भूत हैं, वे भूत की बात करते हैं।

दरअसल, राज्य की महागठबंधन सरकार में तेजप्रताप जब स्वास्थ्य मंत्री थे तो उन्हें देशरत्न मार्ग स्थित तीन नंबर का बंगला आवंटित किया गया था। वास्तुविदों और ज्योतिषियों की सलाह पर उन्होंने उक्त बंगले में कई बदलाव भी किए थे। जुलाई में महागठबंधन में बिखराव के बाद राज्य सरकार ने सभी पूर्व मंत्रियों को सरकारी बंगले खाली करने का नोटिस जारी किया था। फिर भी कई पूर्व मंत्रियों ने अभी तक बंगला खाली नहीं किया है।

तेजप्रताप ने कहा कि उन्हें सरकारी भीख की जरूरत नहीं है। उनके पास पहले से ही 10 सर्कुलर रोड का बंगला है, जो उनकी मां राबड़ी देवी के नाम से आवंटित है।

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UN टीम को हाफिज सईद-आतंकी संगठनों की सीधी जांच नहीं करने देगा PAK

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और उसके आतंकी संगठनों की जांच के लिए पाकिस्तान आ रही UN की जांच टीम की राह में पहले ही रोढ़े अटका दिए गए हैं। पाकिस्तान ने कहा है कि UN की स्पेशल जांच टीम को सईद और उसके संगठनों की सीधी जांच नहीं करने दी जाएगी। ये टीम 25 और 26 जनवरी को पाकिस्तान में रहेगी। इस टीम की पाकिस्तान विजिट इसलिए भी खास हो जाती है कि क्योंकि पिछले ही हफ्ते पाकिस्तान के पीएम शाहिद खकान अब्बासी ने कहा था कि पाकिस्तान में हाफिज सईद के खिलाफ कोई केस नहीं है, लिहाजा उसके खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की जा सकती।

सईद तक सीधी पहुंच मुमकिन नहीं

– पाकिस्तान के अखबार ‘द नेशन’ ने यूएन टीम की जांच के बारे में एक रिपोर्ट पब्लिश की। इसमें पाकिस्तान सरकार के सूत्रों के हवाले से कई अहम जानकारियां दी गई हैं।
– इन सूत्रों के मुताबिक, यूएन सिक्युरिटी काउंसिल की sanctions monitoring team टीम को हाफिज सईद या जमात-उद-दावा के अलावा इससे जुड़े बाकी संगठनों तक सीधी पहुंच (direct access) नहीं दी जाएगी।
– एक और रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार ने तय किया है कि हाफिज सईद के मामले में वो दबाव में नहीं आएगी।

अभी मंजूरी नहीं मांगी गई

– रिपोर्ट में पाकिस्तान सरकार के एक बड़े अफसर के हवाले से कहा गया- उन्होंने (UNSC टीम) ने फिलहाल, हमसे हाफिज सईद तक सीधी पहुंच की मंजूरी नहीं मांगी है। लेकिन, वो इसकी इजाजत मांगते भी हैं तो उन्हें ये नहीं दी जाएगी। हम उनसे बातचीत कर रहे हैं।
– एक और अफसर ने कहा- ये टीम पाकिस्तान के अफसरों से मिलेगी और बैन किए गए संगठनों की लिस्ट मांगेगी। हमने यूएन के ऑर्डर फॉलो किए हैं। इसलिए, इस मामले में परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।

किन संगठनों पर बैन

– यूएन ने पाकिस्तान में कई संगठनों को बैन किया है। इनमें जमात-उद-दावा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, लश्कर-ए-झांगवी, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन और लश्कर-ए-तैयबा शामिल हैं। इनके अलावा इन संगठनों के सरगनाओं जिनमें हाफिज सईद भी शामिल को भी बैन किया गया है।

पाकिस्तान सरकार के दावों पर भरोसा नहीं

– पाकिस्तान सरकार ने दावा किया था कि उसने हाफिज सईद के जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन के चंदा लगाने और पब्लिक प्रोग्राम करने पर रोक लगा दी है। हालांकि, उसके इन दावों की हकीकत पर सवाल उठते रहे।
– पाकिस्तान के ही कुछ सांसदों ने हाफिज सईद को देश के लिए खतरा बताया। मीडिया रिपोर्ट्स में भी दावा किया गया कि सईद पर किसी तरह की कोई बंदिशें नहीं हैं और वो अपने संगठनों के नाम बदलकर काम कर रहा है।
– खतरा तब और बढ़ता नजर आया है जब पता लगा कि पाकिस्तान के स्टॉक मार्केट में फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को रजिस्टर कराने की कोशिश खुद पाकिस्तान सरकार कर रही है। इसके बाद भारत और अमेरिका ने पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा दिया।

 अमेरिका की पाकिस्तान को दो टूक

– शुक्रवार को अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने पाकिस्तान से दो टूक कहा कि हाफिज सईद एक आतंकवादी है और उसके खिलाफ पूरी तरह कार्रवाई होनी चाहिए।
– अमेरिका का यह बयान पाकिस्तान के पीएम द्वारा सईद को क्लीन चिट देने के बाद आया। अब्बासी ने कहा था कि सईद के खिलाफ कानूनी तौर पर कोई केस दर्ज नहीं है और इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती।
– सईद को 9 महीने हाउस अरेस्ट में रखने के बाद पिछले साल नवंबर में ही रिहा किया गया था। जमात-उद-दावा को 2014 में आतंकी संगठन घोषित किया गया था।

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अडाणी खरीदेंगे अंबानी का पावर कारोबार, 18,800 करोड़ रुपए में हुआ सौदा

अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (आर इन्फ्रा) ने गुरुवार को संकेत दे दिए कि उसने अडाणी ट्रांसमिशन को अपने मुंबई के पावर बिजनेस को बेचने के लिए एक करार पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह पूरी डील करीब 18,800 करोड़ रुपए की बताई गई है।

रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (आरइन्फ्रा) ने अडाणी ट्रांसमिशन (एटीएल) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत वह मुंबई के पावर बिजनेस की 100 फीसद हिस्सेदारी की बिक्री करेगा जिसमें कई एकीकृत व्यवसाय, ट्रांसमिशन और बिजली का वितरण भी शामिल है। रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने बीएसई फाइलिंग में यह जानकारी दी है।

सौदे में किसको क्या मिलेगा: अडाणी ट्रांसमिशन लिमिटेड जो कि अडाणी एंटरप्राइजेज की डिस्ट्रीब्यूशन इकाई है रिलायंस के मुंबई स्थित पावर बिजनेस को खरीदने के लिए शुरुआती तौर पर 13,251 करोड़ का भुगतान करेगा। बाकी के 5,550 करोड़ रुपए का भुगतान वह कुछ जरूरी मंजूरियों के आधार पर बाद में करेगा। रिलायंस की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गई है। कंपनी का कहना है कि इस डील की कुल लागत 18,800 करोड़ रुपए है। यह लेनदेन कुछ अप्रूवल के अंतर्गत होना है।

पैसे का इस्तेमाल कहां करेगी रिलायंस: इस डील के अंतर्गत मिलने वाले पैसों में से अधिकांश का इस्तेमाल कंपनी अपने कर्ज को कम करने के लिए करेगी, जो कि अपने कर्ज को लगातार कम कर रही है। 15,000 करोड़ रुपए का कर्ज चुकाने के बाद कंपनी के पास तीन हजार करोड़ रुपए बच जाएगा।

डील पर क्या बोले अडाणी: अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने कहा, “यह अधिग्रहण (डील) वितरण क्षेत्र में हमारी पहुंच का प्रतीक है। हम वितरण क्षेत्र को सनराइज सेक्टर के तौर पर देख रहे हैं, क्योंकि भारत लोगों को 24 घंटे बिजली महैया कराने के उद्देश्य की तरफ आगे बढ़ रहा है।”

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विजय रूपाणी चुने गए गुजरात के मुख्‍यमंत्री, नितिन पटेल होंगे उप मुख्‍यमंत्री

गुजरात में विजय रूपाणी को राज्‍य का अगला मुख्‍यमंत्री चुन लिया गया है. साथ ही नितिन पटेल को उप मुख्‍यमंत्री चुना गया है. पार्टी विधायकों की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया. केंद्रीय पर्यवेक्षक अरुण जेटली और सरोज पांडे की मौजूदगी में यह फैसला हुआ. इससे पहले 5 नेता मुख्‍यमंत्री पद की रेस में थे जिनमें विजय रूपाणी के अलावा नितिन पटेल, पुरुषोत्तम रूपाला, मनसुख मांडविया और वजूभाई वाला शामिल थे. और अंतत: रूपाणी के नाम पर मुहर लग गई. इससे पहले ये कयास लगाए जा रहे थे कि बीजेपी की सीटें कम होने से रूपाणी की कुर्सी जा सकती है. सूत्रों के हवाले से ख़बर है कि सोमवार को नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण होगा.

कौन हैं विजय रूपाणी
विजय भाई रूपाणी का जन्म बर्मा में हुआ था. वह 61 साल के हैं. 1960 में बर्मा में राजनीतिक उथल-पुथल के चलते उनका परिवार राजकोट आ गया था.  उन्होंने सौराष्ट्र विश्वविद्यालय से बीए की पढ़ाई की. एबीवीपी और RSS से जुड़े रहे. इमरजेंसी के दौरान वह 11 महीने जेल भी गए. 1996-97 के बीच वह राजकोट शहर के मेयर भी रहे. मुख्यमंत्री बनने से पहले वह गुजरात प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष भी रहे. आनंदीबेन पटेल मुख्यमंत्री थीं तब वह परिवहन और वाटर सप्लाई के मंत्री थे. 7 अगस्त 2016 से वह गुजरात के मुख्यमंत्री हैं. राजकोट पश्चिम से वह चुनाव लड़ते हैं और जीतते आए हैं. जैन समाज से आते हैं, उनके दो बेटे और एक बेटी है.

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ऑलटाइम हाई पर बाजार, निफ्टी 10493, सेंसेक्स 33940 के स्तर पर बंद

इस कारोबारी हफ्ते के आख‍री दिन घरेलू शेयर बाजार ने नया रिकॉर्ड रचा. शुक्रवार को कारोबार के दौरान दोनों सूचकांकों ने ऑलटाइम हाई का आंकड़ा छुआ. बाजार में आई इस तेजी से दोनों सेंसेक्स नई ऊंचाई पर पहुंचकर बंद हुए. शुक्रवार को सेंसेक्स 184 अंक बढ़कर 33,940 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं,  निफ्टी 53 अंक चढ़कर 10,493 के स्तर पर पहुंचा.

सेंसेक्स और निफ्टी का रिकॉर्ड

शुक्रवार को बाजार में आई  तेजी से सेंसेक्स नई  ऊंचाई पर पहुंच गया. सेंसेक्स ने अपना पिछला रिकॉर्ड  तोड़ते हुए नये स्तर को छुआ. सेंसेक्स ने 33,956 के स्तर पर पहुंचकर पहले रिकॉर्ड  बनाया था. इस बार यह 33,963 के स्तर पर पहुंच गया है.

निफ्टी पहली बार 10500 के पार

निफ्टी ने भी सेंसेक्स की तरह ही नया रिकॉर्ड स्थापित किया है. शुक्रवार को निफ्टी ने पहली बार 10500 के स्तर को पार किया। इसका पिछला रिकॉर्ड 10,494.45 के स्तर पर पहुंचने का था. इस बार यह 10,501.10 के नये स्तर पर पहुंच गया.

टीसीएस के शेयरों में तेजी

शुक्रवार को कारोबार के दौरान ओएनजीसी , हिंडाल्को और टीसीएस के शेयर टॉप गेनर में शामिल रहे. इसके अलावा बजाज ऑटो और बजाज फाइनेंस व ओएनजीसी के शेयरों में भी  तेजी रही.

तेज रही शुरुआत भी

इस कारोबारी हफ्ते के आख‍िरी दिन शेयर बाजार की तेज शुरुआत हुई. वैश्व‍िक बाजार से मिले मजबूत संकेतों ने घरेलू शेयर बाजार को रफ्तार दी. इसकी बदौलत निफ्टी 22.45 अंकों की बढ़ोतरी के साथ 10462.75 के स्तर पर खुला. वहीं, सेंसेक्स 91.95 अंक की तेजी के साथ फिलहाल 33848.23 के स्तर पर कारोबार कर रहा है.

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चिंता जताते रह गए चीन-पाक, सुखोई पर सवार ब्रह्मोस ने उड़ा दिया टारगेट

 

  • भारत ने दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल ब्रम्होस का फाइटर जेट सुखोई-30 MKI से सफल परिक्षण किया. सुखोई से छोड़ी गई मिसाइल बंगाल की खाड़ी में अपने टारगेट पर हिट हुई.

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    यह पहला मौका है जब ब्रम्होस का परिक्षण किसी फाइटर जेट से दिया गया हो. इसके पहले इसे जमीन और लड़ाकू जहाज से दागा जा चुका है.

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    बता दें कि रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया और भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इस कम दूरी की रैमजेट, सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल तो तैयार किया है.

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    इसकी सबसे ख़ास बात तो यह कि आदेश मिलते ही यह मिसाइल अपना रूट बदल सकती है. यही नहीं, रडार सिस्टम भी रफ़्तार के कारण धोखा खा जाते हैं.

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    मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस मिसाइल के जरिए 400 किमी की दूरी तक हमला किया जा सकता है. साथ ही यह  न्यूक्लियर वॉर हेड तकनीक से लैस होती है.

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    यही वजह है कि न्यूक्लियर वॉर हेड के डर से पाकिस्तान और चीन इस मिसाइल को लेकर पहले ही चिंता जता चुका है.

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    इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मसक्वा के नाम पर रखा गया है. यह अब तक की सुखोई द्वारा दागी गई सबसे भारी मिसाइल है. इसका वजन 2.5 टन बताया जा रहा है.