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जानें, क्यों मनाया जाता है फ्रेंडशिप डे? इस देश से हुई थी शुरुआत

क्या आप जानते हैं.. फ्रेंडशिप डे आखिर अगस्त के पहले रविवार को ही क्यों मनाया जाता है..

आइए जानते हैं क्या है फ्रेंडशिप डे का इतिहास

– दोस्ती के प्रतीक के रूप में मनाए जाने वाले इस दिन की शुरुआत साल 1919 में सबसे पहले हॉलमार्क कार्ड के संस्थापक जोस हॉल ने दोस्ती मनाने का सुझाव दिया था.

– 1935 में पहली बार यूनाइटेड स्टेट्स कांग्रेस ने अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाने की घोषणा की थी.

– इसे पहली बार अमेरिका में मनाया गया था.


– इस अवसर पर दोस्तों को फ्रेंडशिप बैंड, कार्ड, गिफ्ट्स दिए जाते हैं.

– आपको बतादें साल 1997 में मिल्न के कार्टून किरदार विन्नी द पूह को संयुक्त राष्ट्र ने दोस्ती का अंतराष्ट्रीय दूत चुना.

– भारत में अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है, लेकिन दक्षिण अमेरिकी देशों में जुलाई महीने को काफी पावन माना जाता है. इसलिए जुलाई के अंत में ही इस दिन को मनाया जाता है. बांग्लादेश और मलेशिया में डिजिटल कम्यूनिकेशंस के तहत यह दिन ज्यादा चर्चित हो गया है. यूनाइटेड नेशंस ने भी इस दिन पर अपनी मुहर लगा दी थी.

– मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी देशों में यह समय ऐसा होता है, जब दूर-दूर तक किसी पर्व-त्योहार की छुट्टी नहीं होती. साल 1958 के 30 जुलाई को औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडशिप डे (विश्व मैत्री दिवस) की घोषणा की गई थी.

– करीब 60 साल पहले 1958 में पहली बार फ्रेंडशिप डे को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई जब दक्षिण अमेरिका के कई देश खासतौर पर परागवे में फ्रेंडशिप डे मनाया गया.

– फ्रेंडशिप डे सेलिब्रेशन के 10वें साल के मौके पर फेमस बैंड बीटल्स ने 1967 में एक गाना रिलीज किया था- With Little Help From My Friends…. यह गाना दुनियाभर में लोगों के बीच काफी फेमस हुआ था.

– ब्राजील, अर्जेंटीना, इक्वाडोर और उरुग्वे जैसे देशों में हर साल 20 जुलाई को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है.

– बॉलीवुड में दोस्ती को काफी अहम दर्जा दिया गया है. जिस पर बेहतरीन फिल्म बनाई गई है. इनमें खास है:- ‘दोस्ती’, आनंद, शोले ,याराना और दिल चाहता है.

– दोस्ती में कमाल की बात ये है कि इसका कोई मजहब नहीं होता. हम चाहे किसी से भी दोस्ती कर सकते हैं. बिना किसी बंधन के हम किसी को भी अपना दोस्त बना सकते हैं.

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अमेरिकी संसद ने बदला कानून, भारत के लिए रूस से हथियार खरीदने का रास्ता साफ

अमेरिकी संसद ने राष्ट्रीय रक्षा विधेयक, 2019 पारित कर सीएएटीएस कानून के तहत भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगने की आशंका को खत्म करने का रास्ता निकाल लिया है. प्रतिबंधों के जरिए अमेरिका के विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई कानून (सीएएटीएसए) के तहत उन देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाते हैं जो रूस से महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की खरीद करते हैं.

अमेरिकी कांग्रेस के सीनेट ने 2019 वित्त वर्ष के लिए जॉन एस मैक्केन नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट (एनटीएए) (रक्षा विधेयक) 10 मतों के मुकाबले 87 मतों से पारित कर दिया गया. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में यह विधेयक पिछले सप्ताह ही पारित हो चुका है. अब यह कानून बनने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के वास्ते व्हाइट हाउस जाएगा. इस विधेयक में CAATSA के प्रावधान 231 को समाप्त करने की बात कही गई है.

व्हाइट हाउस में राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य रहे जोसुआ व्हाइट ने बताया कि सीएएटीएसए के नये संशोधित प्रावधानों को कानूनी रूप मिलने के बाद भारत के लिए रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदना आसान हो जाएगा.

हालांकि, उनका कहना है कि कानून की भाषा बेहद कठोर लग रही है, लेकिन रूस से रक्षा खरीद करने वाले देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाले प्रावधानों का बेहद नरम कर दिया गया है.

रक्षा विधेयक में एक प्रावधान किया गया है जिसके तहत अमेरिका और अमेरिकी रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण साझेदार को राष्ट्रपति एक प्रमाणपत्र जारी कर सीएएटीएसए के तहत प्रतिबंधों से छूट दे सकता है.

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बालों की सेहत के लिए हर किसी को खानी चाहिए ये विशेष चीजें

आइए जानते हैं ऐसी चीजों के बारे में जिन्हें खाने से आपके बाल ना केवल स्वस्थ रहेंगे बल्कि खूबसूरत और चमकीले भी नजर आएंगे.

पालक-
अगर आप शाकाहारी हैं तो पालक से बेहतर बालों के लिए कोई चीज हो ही नहीं सकती है. पालक आयरन, विटामिन ए, सी औऱ प्रोटीन का बढ़िया स्रोत होता है. आय़रन की कमी से ही सबसे ज्यादा बाल झड़ते हैं. पालक केवल आयरन से ही भरपूर नहीं होता है बल्कि इसमें सेबम भी होता है जो बालों के लिए प्राकृतिक कंडीशनर माना जाता है. इसमें ओमेगा-3 एसिड, मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन भी मौजूद होता है. इससे स्कैल्प हेल्दी और बाल स्वस्थ रहते हैं.

अंडा और दुग्ध उत्पाद-
बालों की ग्रोथ के लिए और मोटे-घने बालों के लिए अंडा व दुग्ध उत्पाद बहुत जरूरी हैं. दूध, योगर्ट और अंडे में कई सारे जरूरी पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, विटामिन बी12, आयरन, जिंक और ओमेगा 6 फैटी एसिड्स होते हैं. दुग्ध उत्पाद बियोटीन (विटामिन बी7) का भी अच्छा स्रोत है जो बालों को झड़ने से रोकता है.

नट्स-
बालों को झड़ने से रोकने के लिए अपनी डाइट में नट्स को शामिल कीजिए.  खासकर अखरोट इकलौता ऐसा नट है जिसमें बियोटीन, बी विटामिन्स, विटामिन ई और प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और मैग्नीशियम होता है. ये सभी बालों को मजबूत बनाते हैं.

अमरूद-
ये तो आप जानते ही होंगे कि बालों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन सी कितना जरूरी होता है. विटामिन सी बालों को पतला होने से रोकता है. अमरूद में संतरे से भी ज्यादा विटामिन सी होता है. इसकी पत्तियों में भी विटामिन बी और सी होता है जो बालों की ग्रोथ के लिए जरूरी कोलाजेन ऐक्टिविटी को बढ़ाने में मदद करता है.

दालें-
दालें प्रोटीन, आय़रन, जिंक, बायोटिन का भंडार होती हैं जोकि बालों के लिए जरूरी पोषक तत्व होते हैं. इसके अलावा दालें फोलिक एसिड का भी खजाना हैं. फोलिक एसिड लाल रक्त कोशिकाओं को दुरुस्त करती है जिससे स्किन और स्कैल्प को जरूरी ऑक्सीजन उपलब्ध हो पाती है और बाल टूटना रुक जाता है.

जौ- जौ में खूब विटामिन ई होता है जो पतले बालों को ठीक करने में मदद करता है. जौ में आयरन और कॉपर भी होता है जो रेड ब्लड सेल्स का उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है.

चिकन-
चिकन प्रोटीन का अच्छा स्रोत है लेकिन अगर आप शाकाहारी हैं तो आप टोफू और पीनट्स से इसकी भरपाई कर सकते हैं.

अलसी का बीज-
अलसी के बीज में ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होता है. आपका शरीर जरूरी फैटी एसिड का उत्पादन नहीं कर पाता है इसलिए आपको अपने आहार से इसकी आपूर्ति करनी चाहिए. अलसी का बीज सबसे बढ़िया विकल्प है.

गाजर-
गाजर केवल आंखों की रोशनी के लिए ही नहीं बल्कि आपके बालों के लिए भी बहुत जरूरी है. इनमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ए होता है जो नैचुरल कंडीशनर का काम करता है और आपके बालों को झड़ने से रोकता है.

विटामिन सी की खुराक के लिए खट्टे फल-
आपके शरीर को आयरन के अवशोषण के लिए विटामिन सी की जरूरत होती है इसलिए आपको अपनी डाइट में साइट्रस फ्रूट्स को जरूर शामिल करना चाहिए. न्यूट्रिशनिस्ट का सुझाव है कि एक गिलास नींबू पानी भी पर्याप्त साबित होगा.

इसके अतिरिक्त स्वीट पोटैटो भी विटामिन ए का अच्छा स्रोत है. बालों को स्वस्थ रखने में मदद करता है.

 

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मोदी सरकार को चाहिए 10 जॉइंट सेक्रेटरी, बिना UPSC किये प्रोफेशनल्स की होगी भर्ती

अब संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित होने वाली सिविल सर्विसेज परीक्षा पास किए बिना भी योग्य उम्मीदवार सरकार में वरिष्ठ अधिकारी बन सकते हैं.

कौन कर सकता है अप्लाई

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की ओर से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार इन पदों के लिए वो लोग अप्लाई कर सकते हैं, जिनकी उम्र 1 जुलाई तक 40 साल हो गई है और उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होना आवश्यक है. उम्मीदवार को किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर यूनिट, यूनिवर्सिटी के अलावा किसी प्राइवेट कंपनी में 15 साल काम का अनुभव होना भी आवश्यक है.

कब तक होगी नियुक्ति

इन पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों की नियुक्ति तीन साल तक के लिए की जाएगी और सरकार इस कॉन्ट्रेक्ट को पांच साल तक बढ़ा भी सकती है. बता दें कि इन पदों के लिए प्रोफेशनल उम्मीदवार ही अप्लाई कर सकते हैं.

कितनी होगी सैलरी

मोदी सरकार इन पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को 1.44 लाख से 2.18 रुपये प्रति महीना सैलरी देगी और इस सैलरी के साथ उम्मीदवारों को कई भत्ते और सुविधाएं भी सरकार की ओर से दी जाएंगी.

किन विभागों में होगी नियुक्ति

सरकार ने जिन पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, उनकी नियुक्ति 10 मंत्रालयों में होनी है. इनमें वित्तीय सेवा, इकोनॉमिक अफेयर, कृषि, सड़क परिवहन, शिपिंग, पर्यावरण और वन, नागरिक उड्डयन और वाणिज्य क्षेत्र शामिल हैं.

बता दें कि सरकार अब इसके लिए सर्विस रूल में जरूरी बदलाव भी करेगी. पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने 10 विभागों में बतौर जॉइंट सेक्रेटरी 10 पदों के लैटरल एंट्री से जुड़ी अधिसूचना पर कहा कि इससे उपलब्ध स्रोतों में से सर्वश्रेष्ठ को चुनने का मौका मिलेगा. गौरतलब है कि किसी मंत्रालय या विभाग में जॉइंट सेक्रेटरी का पद काफी अहम होता है और तमाम बड़ी नीतियों को अंतिम रूप देने में या उसके अमल में इनका अहम योगदान होता है.

कैसे होगा चयन

इनके चयन के लिए उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया जाएगा और कैबिनेट सेक्रेटरी के नेतृत्व में बनने वाली कमिटी इनका इंटरव्यू लेगी.

आवेदन करने की आखिरी तारीख- 30 जुलाई 2018

सालों से ठंडे बस्ते में था प्रस्ताव

ब्यूरोक्रेसी में लैटरल ऐंट्री का पहला प्रस्ताव 2005 में ही आया था, जब प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट आई थी. लेकिन तब इसे सिरे से खारिज कर दिया गया. फिर 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई. लेकिन पहली गंभीर पहल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद हुई.

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इम्पोर्टेड साइकिल के दाम में लॉन्च हुआ Hero का ये स्वदेशी स्कूटर, चलने में भी रहेगा किफायती

हीरो इलेक्ट्रीक ने अपना नया ईको-फ्रेंडली स्कूटर Flash लॉन्च किया है. जिसकी कीमत 19,990 रुपये (एक्स-शोरूम, दिल्ली) रखी गई है.

इस स्कूटर को खासकर उन कस्टमर्स को ध्यान में रखकर लॉन्च किया गया है जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपना रहें हैं और वो जो पहली दफा ई-व्हिकल खरीद रहें हैं.

नया फ्लैश दो कलर वेरिएंट में आएगा और इसे एक बार चार्ज करने पर 65 किलोमीटर तक चला सकते हैं. इस स्कूटर में 250 वॉट का मोटर है जिसमें 48-Volt 20 Ah VRLA की बैटरी है और ये पूरी तरह शॉर्ट शर्किट प्रोटेक्शन से लैस है. स्कूटर में सीट के नीचे स्टोरेज कंपार्टमेंट भी दिया गया है.

फ्लैश का वजन केवल 87 KG है जो इसे तेजी से चलने में मदद करता है. इसमें मैग्नेशियम अलॉय व्हील, टेलीस्कोपिक सस्पेंशन और फुल बॉडी क्रैश गार्ड दी गई है.

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सट्टेबाजी पर पूछे गए ये 5 सवाल, जवाब देते ही फंस गए अरबाज खान

ठाणे पुलिस की क्राइम ब्रांच 3 घंटे से ज्यादा वक्त तक अरबाज खान से पूछताछ की.

अरबाज खान को बुकी सोनू के सामने बिठाकर पूछताछ की गई. इसमें उनसे 5 सवाल दागे गए जिनका जवाब देकर अरबाज फंस गए. उनसे पूछा गया कि,

1. क्या आपने सोनू जालान के साथ सट्टा लगाया?

2. सोनू को कैसे जानते हैं आप?

3. क्या इस बारे में परिवार को पता था?

4. अब तक कितनी रकम का सट्टा लगाया है?

5. क्या जालान ने उन्हें फोन पर धमकी दी?

इन सवालों के जवाब में अरबाज ने बताया कि उन्होंने न सिर्फ आईपीएल मैचों पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैचों में भी सट्टा लगाया है. साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि पिछले साल IPL मैचों में लगाए गए पैसों में उन्हें करीब 2.75 करोड़ रुपये का नुकसाना भी हुआ था. अरबाज ने बताया कि करीब 4-5 साल से वह इस धंधे में शामिल हैं.

तनाव में शुरू की सट्टेबाजी

अभिनेता अरबाज ने पूछताछ में खुलासा किया कि उनका परिवार हमेशा से सट्टा लगाने के लिए मना करता था. परिवार इस काम को गलत मानता था लेकिन वह शौक के लिए क्रिकेट मैचों में करोड़ों रुपये का खेल करते थे. उन्होंने यह भी बताया कि पारिवारिक तनाव की वजह से वह सट्टेबाजी के खेल में शामिल हुए क्योंकि उनके निजी जीवन में काफी उतार-चढ़ाव था और पत्नी मलाइका अरोड़ा से तलाक की एक वजह सट्टेबाजी भी बताई जा रही है क्योंकि मलाइका हमेशा से उन्हें इसके लिए मना करती थीं.

पुलिस की पूछताछ में अरबाज ने सोनू से लिंक की बात कबूल की है लेकिन उन्हें याद नहीं कि वह कब और कैसे सोनू से मिले थे. उन्होंने बताया कि सोनू से उन्हें किसने मिलवाया इस बारे में ठीक से याद नहीं है.

इससे पहले ठाणे पुलिस की एंटी एक्टॉर्सन सेल ने शुक्रवार को अरबाज को समन किया था. पुलिस अब अरबाज का बयान दर्ज कर सट्टेबाजी रैकेट से उनके लिंक के बारे में पड़ताल की है. पुलिस को इंटरनेशनल बुकी सोनू जालान के साथ अरबाज की तस्वीरें मिली थीं. पुलिस सोनू पर मकोका के तहत नया केस भी दर्ज करेगी. अरबाज की ओर से उनके भाई सलमान खान की लीगल टीम इस मामले में उनका पक्ष रखेगी. सुबह अरबाज सलमान के बॉडीगार्ड शेरा के साथ क्राइम ब्रांच के दफ्तर पहुंचे थे.

कैसे आया अरबाज का नाम

पिछले महीने पुलिस ने डोबिंवली में सट्टेबाजी रैकिट का भंडाफोड़ करते हुए 4 सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया. शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सट्टेबाजी रैकिट चल रहा था. इतना ही नहीं, डॉन दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी से भी सट्टेबाजी रैकिट के लिंक मिलते दिख रहे हैं.

पूछताछ में रैकेट के पीछे सोनू जालान का नाम सामने आया था. इसके बाद सोनू जालान को गिरफ्तार कर जब पूछताछ की गई तो उसने बताया कि बॉलीवुड के कई सेलिब्रिटी बेटिंग में अलग-अलग नामों से पैसा लगाते हैं. तब इस मामले में अरबाज खान को समन किया गया था. पुलिस को शक है कि इस खेल में बॉलीवुड की कई और हस्तियां भी शामिल हो सकती हैं.

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उत्तराखण्ड बोर्ड के 12वीं के रिजल्ट घोषित, दिव्यांशी ने किया टॉप

उत्तराखंड बोर्ड ने आज अपने 12वीं के नतीजे की घोषणा कर दी है. छात्र परीक्षा के रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रिजल्ट देख सकते हैं. इस 12वीं की परीक्षा 5 मार्च से 24 मार्च तक चली थी. बता दें, रिजल्ट 11 बजे जारी होनेा था पर रिजल्ट घोषित होने में देरी की गई. देहरादून स्थित शिक्षा निदेशालय में रिजल्ट की घोषणा शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने की.

इस साल 12वीं में ऑवरोल 78.97 प्रतिशत छात्र पास हुए हैं. इस साल 12वीं की परीक्षा में 75.03 प्रतिशत लड़के पास हुए हैं और 82.83 प्रतिशत लड़कियां पास हुई है. 12वीं में इस साल दिव्यांशी राज ने 98.4 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉप किया है.

ऐसे देखें रिजल्ट

– सबसे पहले उत्तराखंड बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.ubse.uk.gov.in और www.uaresults.nic.in. पर जाएं.

–  उत्तराखंड बोर्ड रिजल्ट 2018 कक्षा 12 पर लिंक पर क्लिक करें.

– अपना रोल नंबर और सभी जरूरी जानकारियां भरें.

– रिजल्ट स्क्रीन पर दिखने लगेगा.

– भविष्य के लिए प्रिंटआउट लेना न भूलें.

आपको बता दें,  इस साल 12वीं में 130094 छात्र शामिल हुए थे. पिछले साल 12वीं में 78.89 प्रतिशत छात्र पास हुए थे.

देखें पांच साल का कक्षा 12वीं  उत्तराखंड रिजल्ट

2013- 79.82 प्रतिशत

2014- 70.39 प्रतिशत

2015- 74.54 प्रतिशत

2016-  78.41 प्रतिशत

2017-  78.89 प्रतिशत

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स्वदेशी लाइसेंस से इन 8 देशों में चला सकते हैं गाड़ी!

कई देशों में दूसरे देशों के लाइसेंस को कुछ समय तक वैध माना जाता है. आइए जानते हैं भारत के ड्राइविंग लाइसेंस से आप कहां-कहां गाड़ी चला सकते हैं.

अमेरिका- अमेरिका में भारतीय लाइंसेस के साथ एक साल तक गाड़ी चला सकते हैं. हालांकि इसके साथ ही आपके पास I-94 फॉर्म होना आवश्यक है, जिससे पता चलता है कि आपको अमेरिका में आए कितने दिन हुए हैं.

ग्रेट ब्रिटेन- ग्रेट ब्रिटेन (इंग्लैंड, सकॉटलैंड) में विदेशी अपने देश के लाइसेंस के साथ एक साल तक गाड़ी चला सकते हैं.

ऑस्ट्रेलिया- ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड, साउथ ऑस्ट्रेलिया और ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरीटरी में भारतीय लाइंसेस के साथ गाड़ी चला सकते हैं.

जर्मनी- भारत से जर्मनी घूमने आए लोग यहां 6 महीने तक इंडियन ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए गाड़ी चला सकते हैं. यहां इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस की जरुरत नहीं पड़ती.

साउथ अफ्रीका- साउथ अफ्रीका में गाड़ी चलाने के लिए आपका ड्राइविंग लाइसेंस वैध और अंग्रेजी में होना चाहिए. साथ ही आपके लाइसेंस पर आपकी फोटो और सिग्नेचर होना जरुरी है. अगर आपके लाइसेंस में ऐसा है तो आप वहां गाड़ी चला सकते हैं.

स्विट्ज़रलैंड- यहां भी आप एक साल तक गाड़ी चला सकते हैं.

नॉर्वे- मिडनाइट सन की भूमि कहे जाने वाले इस देश में गाड़ियां सड़क के दाईं तरफ चलायीं जाती हैं. यहां आप इंडियन ड्राइविंग लाइसेंस पर सिर्फ 3 महीने ही गाड़ी चला सकते हैं, इसके साथ ही लाइसेंस का अंग्रेजी में होना भी जरूरी है.

न्यूजीलैंड- यहां गाड़ी चलाने के लिए 21 साल का होना जरुरी है. इसके अलावा आपका लाइसेंस अंग्रेजी में होना चाहिए.

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अच्छी खबर करिश्माई खेती की: डेढ़ लाख लगाकर इस किसान ने 70 दिन में कमाए 21 लाख रुपये

गुजरात के बनासकांठा जिले में एक सातवीं पास किसान सुर्खियों में छाया हुआ है. दरअसल, उसने फसल उगाने की ऐसी तरकीब अपनाई कि महज 70 दिन में 21 लाख रुपये का मुनाफा कमा लिया.

इस किसान का नाम है खेताजी सोलंकी. उसने अपने सात बीघा के खेत में आलू की जगह खरबूजे की फसल बोने का फैसला किया, लेकिन इसमें उन्होंने आधुनिक तकनीकों की मदद ली.

खेताजी सोलंकी ने बेहतर बीज, टपक सिंचाई और सोलर वॉटर पंप का इस्तेमाल किया. उनके खेत में 140 टन खरबूजा पैदा हुए. उन्होंने 1.21 लाख रुपये खर्च किए थे. पैदावार इतनी अच्छी थी कि उन्हें उसे बेचने के लिए कहीं जाना भी नहीं पड़ा बल्कि दूसरे राज्यों से व्यापारी उनके पास आकर खरबूजा खरीदकर ले गए. उन्हें इसके काफी अच्छे पैसे मिले. फरवरी में लगाई फसल अप्रैल में तैयार हो गई और 70 दिन में उन्होंने 21 लाख रुपये कमा लिए.

 

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उत्तर प्रदेश में है दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल, 300 रुपये कर्ज लेकर हुआ था शुरू

कम लोग ही ये जानते होंगे कि दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल भारत में है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बना ये स्कूल पूरी दुनिया में मशहूर है और यहां हजारों लोग पढ़ाई करते हैं. आइए जानते हैं दुनिया के सबसे बड़े इस स्कूल के बारे में और जानते हैं यहां क्या खास है…
बता दें कि लखनऊ का सिटी मोंटेसरी स्कूल दुनिया में सबसे बड़ा स्कूल है. यह स्कूल बच्चों की संख्या को लेकर सबसे बड़ा स्कूल है. इस स्कूल में करीब 55 हजार बच्चे पढ़ाई करते हैं.
इस स्कूल में 55 हजार बच्चों के लिए 4500 लोगों को स्टाफ काम करता है. स्कूल के लखनऊ शहर में 18 कैंपस हैं.
यह स्कूल साल 1959 में 5 बच्चों के साथ शुरू हुआ था. उस वक्त यह 300 रुपये की कैपिटल से शुरू किया गया था. आज इस स्कूल का नाम गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज है.
इसकी स्कूल की स्थापना डॉ जगदीश गांधी और डॉ भारती गांधी ने की थी. अब यह स्कूल से आईसीएसई से मान्यता प्राप्त है. इस स्कूल का रिजल्ट भी सर्वश्रेष्ठ रहता है.
वैसे तो लखनऊ के इस स्कूल ने 2005 में ही 29,212 छात्रों के साथ रिकॉर्ड बना लिया था. इससे पहले सबसे बड़े स्कूल का रिकॉर्ड फिलिपीन्स के मनीला स्थित रिजाल हाई स्कूल के नाम था, जिसमें केवल 19,738 छात्र थे.
इस स्कूल में 2,500 टीचर हैं, 3,700 कंप्यूटर और 1,000 क्लासरूम है, जहां हजारों बच्चे शिक्षा लेते हैं. हालांकि किसी भी अन्य निजी स्कूल की तरह यहां भी बच्चों के माता पिता को इन सब सुविधाओं की अच्छी खासी कीमत देनी होती है.
वहीं पढ़ाई के साथ यहां खेलकूद को लेकर भी खास ध्यान दिया जाता है. पहला मॉनटेसरी स्कूल खोलने वाली मारिया कभी शिक्षा को व्यवसाय नहीं मानती है.
स्कूल को यूनेस्को से भी पीस एजुकेशन का अवार्ड मिल चुका है.