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PAK को ब्रह्मोस की जानकारी देता था DRDO का यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड हासिल कर चुके रुड़की के निशांत अग्रवाल, गिरफ्तार

वह ब्रह्मोस मिसाइल की गुप्त जानकारियां पाकिस्तान को पहुंचा रहा था। आशंका यह भी जताई जा रही है कि आईएसआई और अमेरिकी इंटेलिजेंस के लिए वह काम करता था। हाल ही यंग साइंटिस्ट का अवॉर्ड हासिल कर चुके निशांत अग्रवाल पर कई सनसनीखेज आरोप उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (यूपी एटीएस) की ओर से लगाए गए हैं। आइए, जानते हैं कथित ISI एजेंट की पूरी कहानी..
ऑफिशल सीक्रेट ऐक्ट के तहत हुआ अरेस्ट
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सोमवार को निशांत अग्रवाल नाम के साइंटिस्ट को नागपुर स्थित ब्रह्मोस ऐरोस्पेस सेंटर से गिरफ्तार किया गया है। आरोपी को उत्तर प्रदेश एटीएस और मिलिटरी इंटेलिजेंस के अधिकारियों द्वारा ऑफिशल सीक्रेट ऐक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है।
‘पाक’ के साथ इस मुल्क के लिए काम करने का आरोप
'पाक' के साथ इस मुल्क के लिए काम करने का आरोप
निशांत अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने खुफिया जानकारी को पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका को भी साझा किया है। एक टीम ने उन्हें रविवार रात ट्रैक किया और सोमवार को छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया।
2013 में मिशन ब्रह्मोस से जुड़े थे निशांत
2013 में मिशन ब्रह्मोस से जुड़े थे निशांत
रुड़की के रहने वाले निशांत अग्रवाल मिशन ब्रह्मोस में 31 जुलाई 2013 से काम कर रहे थे। ब्रह्मोस से पहले उन्होंने मुंबई में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ भी काम किया। निशांत ने एनआईटी कुरुक्षेत्र से पढ़ाई पूरी की है।
यंग साइंटिस्ट से बन गया ISI एजेंट?
यंग साइंटिस्ट से बन गया ISI एजेंट?
कथित तौर पर आईएसआई एजेंट निशांत अग्रवाल ब्रह्मोस ऐरोस्पेस में सीनियर सिस्टम इंजिनियर के रूप में काम करते थे। उनके पास सिस्टम इंजिनियरों, टेक्निकल सुपरवाइजर्स और टेक्निशन समेत 40 लोगों के प्रबंधन की जिम्मेदारी थी। निशांत को 2017-2018 का यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड भी मिला था।
साढ़े 11 घंटे तक ISI कनेक्शन खंगालती रही टीम
साढ़े 11 घंटे तक ISI कनेक्शन खंगालती रही टीम
निशांत के मकान मालिक मनोहर काले ने बताया कि यह इंजिनियर वर्धा रोड पर पिछले वर्ष (2017) से किराये के मकान में रह रहा था। काले ने बताया कि पुलिस टीम सुबह 5:30 बजे इमारत में पहुंची और शाम 5 बजे तक वहां रुकी।
जानिए, क्या है ब्रह्मोस ऐरोस्पेस
जानिए, क्या है ब्रह्मोस ऐरोस्पेस
ब्रह्मोस ऐरोस्पेस का गठन भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के ‘मिलिटरी इंडस्ट्रियल कंसोर्टियम’ (एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिया) के बीच संयुक्त उद्यम के रूप में किया गया है। भारत और रूस के बीच 12 फरवरी, 1998 को हुए एक अंतर-सरकारी समझौते के माध्यम से यह कंपनी स्थापित की गई थी।
निशांत के मकान मालिक ने बताई यह बात
निशांत के मकान मालिक ने बताई यह बात
पाकिस्तान के साथ अहम जानकारी साझा करने के आरोपी निशांत अग्रवाल के मकान मालिक ने यह भी कहा, ‘निशांत यहां पत्नी के साथ रह रहा था और उसने यहां आने पर मुझे अपने आधार कार्ड की प्रति और अपने नियोक्ता का एक प्रमाणपत्र दिया था।’

पाकिस्तान में चैटिंग, कंप्यूटर में संदिग्ध चीजें और…

पाकिस्तान में चैटिंग, कंप्यूटर में संदिग्ध चीजें और...
यूपी एटीएस के आईजी असीम अरुण ने बताया, ‘उसके निजी कंप्यूटर में कई संदिग्ध चीजें मिली हैं। हमें उसके खिलाफ सबूत मिला है कि वह फेसबुक पर पाकिस्तान से जुड़ी कुछ आईडी के संपर्क में है।’
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उन्नाव केस: BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने पीड़िता के साथ किया था रेप, CBI ने की पुष्टि

 उन्नाव केस की जांच कर रही सीबीआई ने बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर लगे रेप के आरोपों की पुष्टि कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने आरोपों की पुष्टि कर दी है. वहीं दुष्कर्म में शशि सिंह की भूमिका पर सीबीआई ने कहना है कि शशि सिंह ही पीड़ित को नौकरी दिलाने का झांसा देकर कुलदीप सिंह के घर लाई थी. 4 जून 2017 को बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह ने उसके साथ रेप किया था और 11 जून को पीड़िता को तीन युवकों ने अगवा किया और कार में गैंगरेप किया. सूत्रों का कहना है कि अब सीबीआई स्थानीय पुलिस की भूमिका की भी जांच कर रही है.

बयानों से नहीं पलटी पीड़िता
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट के समक्ष पीड़िता का बयान दर्ज किए. कोर्ट के समझ भी उसने वहीं बयान दिए जो उसने पुलिस को अपनी शिकायत में दिए थे.

सीबीआई ने आमने-सामने बैठकर की थी जांच
आपको बता दें कि उन्नाव रेप केस की जांच कर रही सीबीआई ने आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और पीड़िता का आमना-सामना कराया था. पीड़िता ने पिछले वर्ष चार जून को विधायक द्वारा रेप किए जाने का आरोप दोहराया लेकिन, विधायक इससे इनकार करते रहे. सीबीआई के अफसरों ने दोनों से अलग-अलग हुई पूछताछ के तथ्यों को भी सामने रखा और एक-दूसरे से पुष्टि की.

सेंगर को सीतापुर जेल में किया गया शिफ्ट
आपको बता दें, बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मंगलवार (8 मई) को सुबह उन्नाव जेल से सीतापुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया है. पीड़िता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अपील दायर कर आरोपी विधायक को उन्नाव जेल से शिफ्ट करने की याचिका दायर की थी, जिसके बाद ये फैसला लिया गया.

अब तक मामले में क्या-क्या हुआ

  • रेप पीड़िता ने 11 जून 2017 को कोर्ट में शिकायत दर्ज की.
  • कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए और आरोपी अवधेश तिवारी, शुभम तिवारी व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, इस मुकदमे में विधायक और शशि सिंह का नाम नहीं था.
  • 3 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह ने केस वापस लेने के लिए पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया.
  • जब पिता द्वारा इनकार किया तो उसकी बेरहमी से पिटाई की गई और फर्जी मुकदमा लिखवाकर उसे जेल भिजवा दिया.
  • 8 अप्रैल, 2018 को पीड़िता ने परिवार समेत सीएम आवास के बाहर आत्मदाह की कोशिश की.
  • 9 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता की उन्नाव जेल में मौत हो गई.
  • 10 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह को गिरफ्तार किया गया.

केस में अब आगे क्या होगा

  • विधायक कुलदीप पर रेप के आरोपों की पुष्टि हुई.
  • अब आरोपी विधायक पर शिकंजा कस सकता है.
  • बीजेपी भी विधायक कुलदीप के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है.
  • ये भी संभव है कि पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दे.
  • सीबीआई अब मामले में पूरी जांच करने के बाद रिपोर्ट सौंपेगी.
  • सीबीआई की रिपोर्ट पर कोर्ट मामले में फैसला सुनाएगा.
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जांच एजैंसियों की साख पर धब्बा है पी.एन.बी. घोटाला

बगैर सोचे-समझे उद्योगपतियों के आगे लाल कालीन बिछाने की सरकारी प्रवृत्ति का ही नतीजा है कि नीरव मोदी पी.एन.बी. से 11 हजार 300 करोड़ रुपए लेकर चम्पत हो गया। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय ने बगैर देरी किए भगौड़े हीरा व्यापारी की सम्पत्ति जब्त करने का काम शुरू कर दिया। सवाल यह नहीं है कि मोदी देश को चूना लगा कर कैसे फरार हो गया।

बड़ा प्रश्न यह है कि अरबों-खरबों कमाने वाले उद्यमियों का ऐसा दुस्साहस कैसे हो जाता है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों की मिलीभगत से देशद्रोह जैसा कृत्य करें। इससे पहले विजय माल्या और ललित मोदी भी सरकारी बैंकों से हजारों करोड़ का ऋण लेकर सरेआम सरकारों को अंगूठा दिखाते हुए देश छोड़ चुके हैं। हर्षद मेहता, सत्यम कम्प्यूटर, शारदा गु्रप घोटाला सहित दर्जनों चिटफंड कम्पनियों की ठगी जगजाहिर है। इन घोटालों ने न केवल देश की वित्तीय नींव हिला दी, बल्कि वित्तीय अंतर्राष्ट्रीय साख को भी भारी नुक्सान पहुंचाया। ऐसे घोटालों से ही विदेशी निवेशकों का विश्वास टूटता है।

सरकारें चाहे किसी भी दल की सत्ता में रही हों, देश के नागरिकों की खून-पसीने की कमाई पर ऐसे धोखेबाजों ने डाका डालने में कसर नहीं रखी। बैंकों और वित्तीय संस्थानों की मिलीभगत से अरबों-खरबों के वारे-न्यारे किए गए। सत्ता में चाहे कांग्रेस रही हो या भाजपा, सबकी नींद तभी खुली जब आम लोगों की कमाई बड़े पैमाने पर लुट गई। ऐसा भी नहीं है कि आंखों में धूल झोंक कर लूटने का यह सिलसिला यकायक हुआ है। बाकायदा सुनियोजित तरीके से इन्हें अंजाम दिया गया। ठगी के इन आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण हर दल ने दिया।

हद तो यह है कि तृणमूल कांग्रेस जैसे क्षेत्रीय दल तो शारदा के घोटालेबाजों के समर्थन में आ खड़े हुए हैं। लोगों की मेहनत की कमाई को बचाने की उम्मीद सरकारों से की जाती है। इसके विपरीत तृणमूल ने केन्द्र सरकार पर दुर्भावना से कार्रवाई के आरोप लगाए। आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई में बाधाएं खड़ी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राजनीतिक दलों की धनकुबेरों के समक्ष समर्पण करने की दुष्प्रवृत्तियों ने ऐसे घोटालों का बीजारोपण किया है। राजनीतिक दल उद्योगपतियों के पलक-पांवड़े बिछाने को तत्पर रहते हैं। भले ही उन पर कितने ही गंभीर आरोप क्यों न लगे हों।

ऐसे घोटालेबाजों को अच्छी तरह पता रहता है कि नौकरशाही और नेताओं को अपने स्वार्थों के लिए किस तरह इस्तेमाल करना है। सत्ता के करीबी होने का फायदा उठाते हुए मिलीभगत से ऐसे दगाबाज देश से धोखाधड़ी कर गए। राजनीतिक दलों के नेताओं और नौकरशाहों को विदेशों मेंं शाही दावतें चॢचत रही हैं। सिद्धांतों और कानून की दुहाई देने वालों को माल्या आईना दिखाते हुए अपना उल्लू सीधा कर गया। माल्या को पाला-पोसा कांग्रेस ने और राज्यसभा का सदस्य बनवा कर सिर पर चढ़ाया भाजपा ने। अब दोनों ही दल हीरा व्यापारी के घोटाले को लेकर एक-दूसरे पर आरोपों का कीचड़ उछालने का काम कर रहे हैं।

जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि देश को ठगने वाले ऐसे धोखेबाजों से राजनीतिक दलों ने कितना चंदा लिया। राजनीतिक दलों से करीबियां बढ़ाने के लिए ऐसे लोग चंदे का इस्तेमाल हथियार की तरह करते रहे हैं। व्यापार की आड़ में ऐसे फरेबियों की जानकारी निगरानी करने वाली सरकारी एजैंसियों को रहती है। नौकरशाही चेहरा देख कर तिलक करने में माहिर है। यह जानते हुए भी गैर-कानूनी काम हो रहा है, नौकरशाही सत्ता के करीब होने के कारण कार्रवाई करने से कतराती है। नीरव मोदी, ललित मोदी हो या माल्या सभी के मामलों में सरकारी एजैंसियों को पहले ही वित्तीय हेराफेरी की सूचना मिल चुकी थी। यही वजह रही नीरव मोदी प्रधानमंत्री के साथ दावोस यात्रा में जाने में कामयाब हो गया जबकि इसके विरुद्ध मामला दर्ज हो चुका था।

केन्द्र सरकार के भ्रष्टाचार से लडऩे के इरादों के विपरीत निगरानी और सुरक्षा एजैंसियों ने आरोपी को यात्रा से रोका नहीं। ऐसा भी नहीं है कि मोदी को यात्रा में साथ ले जाने से रोकने का एजैंसियां गंभीरता से प्रयास करतीं तो सरकार अड़ंगा लगा देती। बावजूद इसके अफसरों ने घुटने टेक दिए। किसी ने उसे रोकने का साहस नहीं दिखाया। यही वजह रही है कि वित्तीय भ्रष्टाचारों के ज्यादातर मामलों में आरोपी निगाहों से काजल चुरा कर देश छोडऩे में कामयाब हो गए।

प्रवर्तन निदेशालय ने मोदी की संपत्ति जब्त करने का काम किया है। यही काम उसके फरार होने से पहले भी किया जा सकता था। यदि कड़ी कार्रवाई की जाती तो मोदी के साथ ऐसे दूसरे लोगों को भी सीख मिल जाती। केन्द्र सरकार मोदी के प्रत्यार्पण का प्रयास कर रही है। ललित मोदी और माल्या को वापस लाने में अभी तक सफलता नहीं मिली है। ऐसे में नीरव मोदी के प्रत्यार्पण के प्रयास भी केवल प्रयास ही लगते हैं। ऐसे धोखेबाज देश छोडऩे से पहले ही चाक-चौबंद इंतजाम करके जाते हैं। जिन देशों में शरण लेते हैं, यहां का धन वहां निवेश करते हैं। भारत की दोहरी नागरिकता की नीति का बेजा फायदा उठाते हुए दूसरे देश की नागरिकता ले लेते हैं। भारी पूंजी निवेश और नागरिकता लेने से भारतीय एजैंसियों के लिए उनका प्रत्यार्पण करना आसान नहीं होता।

सरकारी एजैंसियां जो तत्परता इनके प्रत्यार्पण के लिए कर रही हैं, यदि वही देश छोड़ कर फरार होने से पहले की जाती तो ऐसी नौबत ही नहीं आती।

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PNB में हुआ 11500 करोड़ का देश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला

पंजाब नेशनल बैंक में देश का बड़ा बैंकिंग घोटाला हुआ है. ये घोटाला करीब साढ़े 11000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का है. पीएनबी ने बुधवार को शेयर बाज़ार को मुंबई स्थित शाखा में घोटाले की जनाकारी दी. इस घोटाले में कारोबारी नीरव मोदी का नाम सामने आया है. घोटाला सामने आने के बाद पीएनबी ने अपने 10 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. पीएनबी ने बताया कि कुछ खाताधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए लेन-देन की गई. इन लेन-देन के आधार पर ग्राहकों को दूसरे बैंकों ने विदेशों में क़र्ज़ दिए हैं. इस ख़बर के बाद पंजाब नेशनल बैंक के शेयर 10 फीसदी तक टूटे हैं.
10 बातें
  1. पीएनबी ने माना है कि कुछ लोगों की मिलीभगत से कुछ खातेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए ये घपला किया गया है। बैंक का ये भी कहना है कि इस लेनदेन के आधार पर ऐसा लगता है कि दूसरे बैंकों ने भी विदेश में भी इन ग्राहकों को एडवांस दिए हैं यानी दूसरे बैंकों पर भी इसका असर पड़ सकता है. ये खबर ऐसे समय आई है कि जब भारत का बैंकिंग सेक्टर एक संकट से पहले ही गुज़र रहा है.
  2. दस दिन से भी कम के समय में यह बैंक धोखाधड़ी का दूसरा मामला सामने आया है. इससे पहले पांच फरवरी को सीबीआई ने अरबपति हीरा कारोबारी नीरव मोदी, उनकी पत्नी, भाई और एक व्यापारिक भागीदार के खिलाफ वर्ष 2017 में पीएनबी के साथ 280.70 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था.
  3. पीएनबी की शिकायत पर सीबीआई ने मोदी, उनके भाई निशाल, पत्नी एमी और मेहुल चिनूभाई चौकसी ने बैंक अधिकारियों के साथ साजिश में बैंक के साथ धोखाधड़ी करने और उसके गलत तरीके से नुकसान पहुंचने का केस दर्ज किया है.
  4. सीबीआई ने मोदी, उनके भाई निशाल, पत्नी एमी और मेहुल चीनूभाई चौकसी के आवास पर छापेमारी भी की है. ये सभी डायमंड्स आर यूएस, सोलर एक्सपोर्ट्स और स्टेलर डायमंड्स में भागीदार हैं. दो बैंक अधिकारियों के आवास पर भी छापेमारी की गई है.
  5. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में हुई 280 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के संबंध में नीरव मोदी एवं अन्य के खिलाफ मनी लॉड्रिंग का मामला दर्ज किया है। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी के आधार पर दर्ज किया गया है।
  6. वित्त मंत्रालय ने पीएनबी के 11,300 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को खारिज किया और कहा कि यह मामला ‘नियंत्रण के बाहर’ नहीं है और इस बारे में उचित कार्रवाई की जा रही है.
  7. वित्त मंत्रालय ने सभी बैंकों को इस मामले से जुड़ी या इस प्रकार की घटनाओं के संबंध में इस सप्ताह के अंत तक रिपोर्ट देने को कहा है.
  8. चार बड़ी आभूषण कंपनियां गीतांजलि, गिन्नी, नक्षत्र और नीरव मोदी जांच के घेरे में हैं. सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय उनकी विभिन्न बैंकों से सांठगाठ और धन के अंतिम इस्तेमाल की जांच कर रहे हैं.’’ इन कंपनियों से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है.
  9. नीरव मोदी फोर्ब्स की भारतीय अमीरों की सूची में भी शामिल रहे हैं.
  10. वर्ष 2015 में बैंक आफ बड़ौदा में भी दिल्ली के दो कारोबारियों द्वारा 6,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था.
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जयपुर ब्लास्ट सहित 4 राज्यों में 165 जानें लीं, 10 साल बाद पकड़ा गया आईएम का आतंकी

करीब 10 साल से फरार इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) का आतंकी आरिज खान उर्फ जुनैद (32) पकड़ा गया। यह आतंकी जयपुर में सीरियल ब्लास्ट सहित 4 राज्यों में 165 लोगों की जान लेने में शामिल था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे भारत-नेपाल बॉर्डर से पकड़ा। आजमगढ़, यूपी का यह आतंकी 2008 के जयपुर धमाकों के बाद से ही फरार था। इन धमाकों में गिरफ्तार होने वाला वह 8वां आतंकी है। आरिज राजस्थान के अलावा अहमदाबाद, दिल्ली व उप्र में मोस्ट वांटेंड था। सिमी व आईएम के बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद वह दोनों आतंकी संगठन खड़े करने में जुटा था। एटीएस जयपुर के एडीजी उमेश मिश्रा ने बताया कि उसे प्रोडक्शन वारंट पर जयपुर लाया जाएगा।

बम बनाने में माहिर है आरिज, आईएम व सिमी को मजबूत कर रहा था

13मई 2008 को चारदीवारी में हुए थे 8 धमाके

8आतंकीअब तक गिरफ्तार

1लाख का इनाम था प्रदेश में आरिज पर

बटला हाउस से बचकर नेपाल भागा, टीचर बना

स्पेशल सेल के अनुसार 19 सितंबर, 2008 को दिल्ली के जामिया नगर में हुए एनकाउंटर के वक्त आरिज बटला हाउस में था, पर भागने में कामयाब रहा। एनकाउंटर में आईएम के दो आतंकी मारे गए थे व इंस्पेक्टर मोहन चंद शहीद हुए थे। एनकाउंटर के बाद वह दिल्ली, यूपी, राजस्थान व महाराष्ट्र में रिश्तेदारों के पास गया। शरण नहीं मिली। एक माह भटकने के बाद नेपाल गया। फर्जी दस्तावेजों पर सलीम नाम से नागरिकता ली। साथी तौकीर के साथ स्कूल में पढ़ाने लगा। 2014 में भटकल के संपर्क में आया। सऊदी अरब जाकर आईएम व सिमी के हमदर्दों से मिला। लौटकर भारत में संगठन खड़ा करने लगा।

आरिज बटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आईएम के आतंकी आतिफ अमीन के साथ जुड़ा था। आरिज बम बनाने में माहिर है। वह जयपुर सीरियल ब्लास्ट के अलावा 2007 में यूपी की अदालतों में ब्लास्ट, 2008 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट और अहमदाबाद ब्लास्ट में भी वांटेड है। इन हमलों में 165 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जबकि 535 से ज्यादा घायल हुए थे। उस पर राजस्थान पुलिस ने एक लाख, एनआईए ने 10 लाख व दिल्ली पुलिस ने 5 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।

अभी जयपुर के तीन गुनहगार फरार

13 मई, 2008 को चारदीवारी में छह स्थानों पर आठ सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इनमें 78 लोगों की जानें गई थीं, जबकि 186 लोग घायल हुए थे। 8 आतंकी गिरफ्तार किए गए। इनमें आईएम के आतंकी शाहबाज हुसैन, सरवर, सलमान, सैफ और सैफुर्रहमान तथा दो अन्य आतंकी हैदराबाद की जेल में हैं। अब आरिज गिरफ्तार हो चुका है। मामले में शादाब उर्फ मलिक, साजिद बड़ा और मोहम्मद खालिद फरार हैं। इन पर भी एक-एक लाख रुपए का इनाम घोषित है।

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जानिए क्या है देश का सबसे बड़ा 2G स्पेक्ट्रम घोटाला

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की पटियाला हाऊस स्थित विशेष अदालत ने आज 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा और द्रमुक नेता कनिमोझी सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया।अदालत ने 2010 के इस मामले पर अपना निर्णय देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा। इस मामले में राजा एवं कई अन्य आरोपी थे। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले को 1,76,000 करोड़ रुपए का बताया गया था। हालांकि सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में करीब 31,000 करोड़ रुपए के घोटाले का उल्लेख किया था। 2014 के आम चुनाव में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन बड़ा मुद्दा बना था।

जानें कब क्या-क्या हुआ

मई 2007: ए राजा ने दूरसंचार मंत्री के रूप में प्रभार संभाला।
अगस्त 2007: दूरसंचार विभाग ने यूनिफाइड एक्सेस र्सिवसेस (यूएएस) लाइसेंसों के साथ 2 जी स्पेक्ट्रम के आवंटन की प्रक्रिया आरंभ की।
25 सितंबर, 2007: दूरसंचार मंत्रालय ने आवेदन के लिए एक अक्तूबर, 2007 की अंतिम तिथि तय करते हुए प्रेस नोट जारी किए।
1 अक्तूबर, 2007: दूरसंचार विभाग को 46 कंपनियों के 575 आवेदन मिले।
2 नवंबर, 2007: तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने निष्पक्ष लाइसेंस आवंटन एवं प्रविष्टि शुल्क की उचित समीक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजा को पत्र लिखा।
22 नवंबर, 2007: वित्त मंत्रालय ने अपनाई गई प्रक्रिया के संबंध में चिंताएं व्यक्त करते हुए दूरसंचार विभाग को पत्र लिखा।

10 जनवरी, 2008: दूरसंचार विभाग ने ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की तर्ज पर लाइसेंस जारी करने का निर्णय लिया। आवेदन की अंतिम तारीख निर्धारित तिथि से पहले कर 25 सितंबर तय की गई।

2009: केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआई को 2 जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में अनियमितताओं के आरोपों की जांच का आदेश दिया।
21 अक्तूबर, 2009: सीबीआई ने दूरसंचार विभाग के अज्ञात अधिकारियों, अज्ञात निजी व्यक्तियों/कंपनियों और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

13 सितंबर, 2010: उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और राजा से 2008 में टेलीकॉम लाइसेंस की मंजूरी में 70,000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाने वाली तीन याचिकाओं का 10 दिन में जवाब देने को कहा।
10 नवंबर, 2010: कैग ने 2जी स्पेक्ट्रम पर सरकार को रिपोर्ट सौंपी, राजस्व को 1.76 लाख करोड़ रुपए की हानि का दावा किया।
14, 15 नवंबर, 2010: राजा ने दूरसंचार मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।

2 फरवरी, 2011: सीबीआई ने 2जी मामले में राजा को गिरफ्तार किया। पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव रविंद्र कुमार चंदोलिया को भी गिरफ्तार किया गया।
8 फरवरी, 2011: स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर शाहिद उस्मान बलवा को सीबीआई ने गिरफ्तार किया।
14 मार्च, 2011: दिल्ली उच्च न्यायालय ने विशेष रूप से 2जी मामलों के निपटान के लिए विशेष अदालत का गठन किया।
29 मार्च, 2011: उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई को 31 मार्च के बजाए दो अप्रैल को आरोपपत्र दायर करने की अनुमति दी।
2 अप्रैल, 2011: सीबीआई ने पहला आरोपपत्र दायर किया। राजा, चंदोलिया और बेहुरा का नाम शामिल किया गया। रिलायंस एडीएजी ग्रुप के प्रबंध निदेशक गौतम दोशी, इसके वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरि नायर, समूह के अध्यक्ष सुरेंद्र पिपारा, स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद उस्मान बलवा एवं विनोद गोयनका और यूनीटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा को आरोपी बनाया गया।  रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड और यूनीटेक वायरलेस (तमिलनाडु) प्राइवेट लिमिटेड का नाम भी आरोप पत्र में शामिल किया गया।
25 अप्रैल, 2011: सीबीआई ने द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि की बेटी एवं सांसद कनिमोझी और चार अन्य का नाम भी दूसरे आरोप पत्र में शामिल किया।
23 अक्तूबर, 2011: सभी 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए।
11 नवंबर, 2011: मामले की सुनवाई शुरू।
23 नवंबर, 2011: उच्चतम न्यायालय ने पांच आरोपियों हरि नायर, गौतम दोशी, सुरेंद्र पिपारा, संजय चंद्रा और विनोद गोयनका की जमानत मंजूर की।
28 नवंबर, 2011: दिल्ली उच्च न्यायालय ने कनीमोई, शरद कुमार, करीम मोरानी, आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल की जमानत मंजूर की।
29 नवंबर, 2011: विशेष अदालत ने शाहिद बलवा की जमानत मंजूर की।
1 दिसंबर, 2011: विशेष अदालत ने चंदोलिया की जमानत मंजूर की।
12 दिसंबर, 2011: सीबीआई ने तीसरा आरोपपत्र दायर किया। एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रवि रुइया और अंशुमन रुइया, इसके निदेशक (रणनीति एवं योजना) विकास सर्राफ, लूप टेलीकॉम की प्रमोटर किरण खेतान और उनके पति आई पी खेतान का नाम शामिल किया गया।  लूप टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड, लूप मोबाइल इंडिया लिमिटेड और एस्सार टेली होल्डिंग का नाम भी आरोपपत्र में शामिल किया गया।

2 फरवरी, 2012: उच्चतम न्यायालय ए राजा के कार्यकाल में मंजूर किए गए 122 लाइसेंस रद्द किए। चार महीनों में लाइसेंसों की नीलामी के निर्देश दिए।
4 फरवरी, 2012: विशेष अदालत ने 2जी मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सह आरोपी बनाने की स्वामी की याचिका खारिज की।
24 अगस्त, 2012: उच्चतम न्यायालय ने 2जी मामले में चिदंबरम के खिलाफ जांच की याचिका खारिज की और कहा कि प्रथमष्टया किसी सामग्री से यह पता नहीं चलता कि चिदंबरम को आर्थिक लाभ भी मिला।

25 अप्रैल, 2014: ईडी ने 2जी संबंधी धनशोधन मामले में राजा, कनिमोझी और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर किए।
31 अक्तूबर, 2014: धनशोधन मामले में आरोप तय किए गए।

5 दिसंबर, 2017: विशेष अदालत ने 2जी मामले में फैसला सुनाने के लिए 21 दिसंबर की तारीख तय की।
21 दिसंबर, 2017: विशेष अदालत ने सभी तीनों मामलों में राजा समेत सभी आरोपियों को बरी किया।

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प्रद्युम्न मामले में अभियुक्त पर बालिग की तरह मुकदमा चलेगा

गुड़गांव के चर्चित प्रद्युम्न हत्याकांड में एक बड़ा फ़ैसला आया है.

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने फ़ैसला दिया है कि प्रद्युम्न की हत्या के नाबालिग अभियुक्त पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जाएगा.

11वीं में पढ़ने वाले इस अभियुक्त को सीबीआई ने आठ नवंबर को गिरफ़्तार किया था.

इस फ़ैसले के बाद अब जुवेनाइल बोर्ड ने ये मामला ज़िला सत्र अदालत को सौंप दिया है जहां 22 दिसंबर को अभियुक्त की पेशी होगी.

सात साल के प्रद्युम्न ठाकुर की हत्या आठ सितंबर को हुई थी. उनका शव गुड़गांव के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में शौचालय के बाहर मिला था.

अभियुक्त भी उसी स्कूल का छात्र है. सीबीआई का दावा है कि अभियुक्त ने प्रद्युम्न की हत्या परीक्षाएं टलवाने के लिए की थी.

जुवेनाइल जस्टिस क़ानून में बदलाव के बाद ये पहला मामला है जिसमें किसी नाबालिग को जघन्य अपराध करने की वजह से बालिग मानकर मुकदमा चलाया जाएगा.

दिसंबर 2012 में हुए निर्भया हत्याकांड के बाद जुवेनाइल जस्टिस क़ानून को सख़्त किया गया था. नया क़ानून जनवरी 2016 में लागू हुआ.

रेयान इंटरनेशनल स्कूल, गुड़गांवइमेज कॉपीरइट/AFP/GETTY

इस क़ानून के मुताबिक़

  • अगर जुर्म ‘जघन्य’ हो, यानी आईपीसी में उसकी सज़ा सात साल से ज़्यादा हो तो, 16 से 18 साल की उम्र के नाबालिग़ को वयस्क माना जा सकता है.
  • ऐसा होने पर किशोर अपराधी पर सामान्य कोर्ट में मुकदमा चलाए जाने के बारे में निर्णय लेने का अधिकार जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के पास होगा.
  • पुराने क़ानून के तहत 18 साल से कम उम्र के अभियुक्त पर मुकदमा अदालत की जगह जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चलता था.
  • जघन्य अपराधों में दोषी पाए गए किशोर अपराधी को जेल की सज़ा दी जा सकती है, हालांकि उसे उम्र क़ैद या मौत की सज़ा नहीं होगी.
  • दोषी पाए जाने की सूरत में अपराधी को अधिकतम तीन साल की अवधि के लिए किशोर सुधार गृह भेजा जाता है.
रेयान इंटरनेशनल स्कूल, गुड़गांवइमेज कॉपीरइट/PTI

बालिग की तरह मुकदमा

किस अभियुक्त को बालिग माना जाए, इसकी सिफ़ारिश जांच एजेंसी करती है.

प्रद्युम्न मामले में सीबीआई ने अभियुक्त पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने की सिफ़ारिश की थी. साथ ही प्रद्युम्न के पिता ने भी इसके लिए अर्ज़ी लगाई थी.

जुवेनाइल बोर्ड के वजह पूछने पर सीबीआई ने बताया कि अभियुक्त का जुर्म जघन्य की श्रेणी में आता है.

  • अभियुक्त को अगले तीन साल तक सुधार गृह में रखा जा सकता है.
  • उसके बाद भी अगर ज़मानत न मिली तो उसे जेल भेज दिया जाएगा.
  • उस पर मुकदमा बालिग के तौर पर चलेगा लेकिन उसे उम्र क़ैद या फांसी की सज़ा नहीं हो सकती