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यूएन के महासचिव ने किया नरेंद्र मोदी को चैंपियंस ऑफ अर्थ अवॉर्ड से सम्मानित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को एक विशेष समारोह में संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण अवॉर्ड चैंपियंस ऑफ अर्थ से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री को यह अवॉर्ड यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दिया। इस मौके पर मोदी ने कहा, ‘मैं इस सम्मान के लिए संयुक्त राष्ट्र का आभारी हूं। यह सम्मान भारत के सवा सौ करोड़ लोगों की प्रतिबद्धता का फल है। चैंपियन अर्थ अवॉर्ड भारत के जंगलों में बसे आदिवासियों का सम्मान है, जो अपने जीवन से ज्यादा जंगल से प्यार करते हैं।’

ये देश के किसानों और महिलाओं का सम्मान :प्रधानमंत्री ने कहा- ‘यह देश के किसानों और महिलाओं का सम्मान है। महिलाएं पौधों में भी भगवान देखती हैं, वे पत्तियां भी गिनकर तोड़ती हैं। मैं इस सम्मान के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूं। भारत के लिए यह दोहरे सम्मान का मौका है। कोच्चि एयरपोर्ट को ऊर्जा क्षेत्र में सम्मान मिला है। पर्यावरण और प्रकृति का सीधा रिश्ता कल्चर से है। पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदना को विश्व स्वीकार कर रहा है। हम उस समाज का हिस्सा हैं, जहां सुबह उठने से पहले धरती पर पांव रखने से पहले क्षमा मांगी जाती है। क्योंकि हम उस पर वजन डालने वाले हैं।’

भारतीयों के लिए प्रकृति ही सर्वोपरि है : उन्होंने कहा, ‘हमारे व्रत और त्योहारों में प्रकृति का जुड़ाव है। हमारे यहां प्रकृति को सर्वोपरि माना गया है। यजुर्वेद से लिए शांतिपाठ में वातावरण में शांति की प्रार्थना की गई है। यूएन ने जो सम्मान दिया, वह लोगों की आस्था का सम्मान है। देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। हर साल लाखों लोग गरीबी से बाहर आ रहे हैं। आबादी के एक हिस्से को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते हैं। सूखे की वजह से सीमित संसाधन वाले गरीब परेशान हो रहे हैं। आज प्रकृति पर अतिरिक्त दवाब डाले बगैर विकास की जरूरत है।’

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अमेजन के मालिक दुनिया में सबसे रईस, मुकेश अंबानी 19वें स्थान पर

फोर्ब्स की सालाना अरबपतियों की सूची में इस वर्ष अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन डॉट कॉम के मालिक जेफरी प्रेस्टन बेजॉस ने धमाकेदार प्रदर्शन के साथ बिल गेट्स से दुनिया के सबसे बड़े धनकुबेर का रुतबा छीन लिया है। सूची के मुताबिक 110 अरब डॉलर (करीब 7.15 लाख करोड़ रुपये) मूल्य की संपत्ति के साथ जेफ बेजॉस दुनिया के सबसे बड़े धनकुबेर बन गए हैं। इसके साथ ही जेफ 100 अरब डॉलर से ज्यादा संपत्ति वाले पहले अरबपति भी बन गए हैं।

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और सामाजिक कार्यों के लिए भरपूर दान देने वाले बिल गेट्स को वर्षों बाद पहली बार दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा है। फोर्ब्स की नवीनतम सूची में गेट्स की कुल संपत्ति 90 अरब डॉलर आंकी गई है। वहीं, भारत के सबसे बड़े धनकुबेर और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी 40.1 अरब डॉलर (करीब 2.61 लाख करोड़ रुपये) संपत्ति के साथ सूची में एक पायदान चढ़कर 19वें स्थान पर रहे हैं। पिछले वर्ष वे 20वें स्थान पर थे और उनकी संपत्ति में करीब आठ अरब डॉलर का इजाफा हुआ है।

फोर्ब्स के मुताबिक इस वर्ष इन्वेस्टमेंट गुरु वारेन बफेट (84 अरब डॉलर) तीसरे, बर्नार्ड अर्नाल्ट (72 अरब डॉलर) चौथे और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग (71 अरब डॉलर) पांचवें स्थान पर रहे। दुनिया के शीर्ष 100 धनकुबेरों की सूची में देश के अन्य दिग्गजों में हिंदुजा परिवार, अजीम प्रेमजी (विप्रो), लक्ष्मी निवास मित्तल (आर्सेलरमित्तल), शिव नाडर (एचसीएल), दिलीप सांघवी (सन फार्मा), उदय कोटक (कोटक महिंद्रा बैंक), राधाकिशन दमानी, सायरस पूनावाला (सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया), सुनील मित्तल और परिवार (भारती एयरटेल) तथा आचार्य बालकृष्ण (पतंजलि) शामिल हैं।

फोर्ब्स की सूची में शीर्ष 10 में कोई महिला नहीं है। अमेरिकी रिटेल चेन वालमार्ट की उत्तराधिकारी एलिस वाल्टन 16वें स्थान के साथ पहली महिला हैं।

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मस्क का एक और करिश्मा: अंतरिक्ष में भेजा गया दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट, मकसद है बेहद खास

बिजनेस टाइकून एलन मस्‍क की दिग्‍गज कंपनी ‘स्‍पेसएक्‍स’ ने दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट ‘फॉल्‍कन हैवी’ को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजकर इतिहास रच दिया है। मंगल पर मानव बस्‍ती बसाने की मस्‍क की महत्‍वाकांक्षी योजना की दिशा में यह पहला महत्‍वपूर्ण कदम है। इसके साथ एक दिलचस्‍प बात ये भी है कि इस रॉकेट के साथ एक स्‍पोर्ट्स कार को भी अंतरक्षि में भेजा गया है और ये भी गौर फरमाने वाली बात है कि पहली बार किसी प्राइवेट कंपनी ने बिना किसी सरकारी मदद से इतना बड़ा रॉकेट लॉन्‍च किया है। यह भी कहा जा रहा है कि इस रॉकेट को किसी 23 मंजिला इमारत के बराबर माना जा सकता है।

‘फॉल्‍कन हैवी’ के लॉन्‍च का हुआ लाइव प्रसारण

फॉल्‍कन हैवी को फ्लोरिडा के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से भारतीय समयानुसार मंगलवार देर रात 2 बजकर 25 मिनट पर लॉन्‍च किया गया और स्‍पेसएक्‍स ने इस पूरी प्रकिया का लाइव प्रसारण किया। इसको लेकर लोगों में जबरदस्‍त उत्‍साह देखने को मिला। फॉल्‍कन हैवी के लांच होने के बाद स्पेसएक्स के कमेंटेटर लॉरेन लियॉन्स ने कहा, ‘वाह, क्या आप लोगों ने देखा? यह बेहद शानदार था।’

स्‍पेसएक्‍स का है सबसे महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट

फॉल्‍कन हैवी पृथ्वी की ऑर्बिट से मंगल की ऑर्बिट तक चक्कर लगाता रहेगा। मस्‍क ने बताया था कि अपने ऑर्बिट में पहुंचने के बाद इसकी रफ्तार 11 किलोमीटर/सेकंड की होगी। हालांकि इसमें किसी इंसान को नहीं, बल्कि फ्यूचर स्‍पेस सूट पहने एक पुतले को भेजा गया है। यह स्‍पेसएक्‍स का अब तक का सबसे महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट है और विशेषज्ञों ने इसकी सराहना करते हुए इसे गेम-चेंजर करार दिया है।

इस वजह से नासा की भी है इस पर नजर

नासा की भी इस पर नजर है। चांद-मंगल पर लोगों को भेजने के मकसद को देखते हुए वह भी इस ताकतवर रॉकेट का इस्‍तेमाल कर सकता है। स्‍पेसएक्‍स का दावा है कि यह मौजूदा समय में इस्तेमाल हो रहे सबसे पॉवरफुल रॉकेट डेल्टा-4 हैवी से दोगुना वजन ले जा सकता है। मस्क ने यह दावा भी किया था कि यह रॉकेट मनुष्यों को चांद और मंगल ग्रह तक ले जा सकेगा। उन्‍होंने बताया था कि फॉल्कन हैवी को ठीक उसी जगह से लॉन्च किया जाएगा, जहां से ‘सैटन 5 अपोलो 11 मून रॉकेट’ को लॉन्च किया गया था।

जानिए क्‍या है ‘फॉल्‍कन हैवी’ की खासियत

पिछले साल दिसंबर में मस्क ने 27 मर्लिन इंजन वाले इस रॉकेट की तस्‍वीरें सोशल मीडिया पर साझा की थीं। इसे फॉल्कन 9 नामक तीन रॉकेट को मिलाकर बनाया गया है। यह 40 फीट चौड़ा व 230 फीट लंबा है और इसका कुल वजन 63.8 टन है, जो दो स्पेस शटल के वजन के बराबर है। जमीन से उठने पर यह 50 लाख पाउंड का थ्रस्ट पैदा करता है जो बोइंग 747 एयरक्राफ्ट के 18 प्लेन द्वारा मिलाकर पैदा करने वाले थ्रस्ट के बराबर है। इससे लगभग एक लाख 40 हजार पाउंड का वजन अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है।

इस रॉकेट का हो सकता है दोबारा इस्‍तेमाल

स्पेसएक्स काफी लंबे समय से ऐसे रॉकेट पर प्रयोग कर रही थी, जिसे एक से अधिक बार इस्तेमाल किया जा सके। मगर उसे सफलता अब जाकर मिली है। कंपनी का दावा था कि दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट से इसकी लॉन्चिंग पर होने वाले खर्च में काफी कमी आएगी। यूरोपियन स्पेस एजेंसियां, रूस और जापान भी इस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, मगर अभी वह प्रायोगिक दौर में ही हैं। आपको बता दें कि अंतरिक्ष में किसी सेटेलाइट को स्थापित करने के लिए रॉकेट की सहायता ली जाती है। इसलिए ऐसे अनुसंधानों पर प्रोग्राम से ज्यादा खर्च स्थापित करने वाले सेटेलाइट व्हिकल पर होता है।

सैटर्न-5 था अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट

आपको बता दें कि सैटर्न-5 अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट था, जिसका अब इस्तेमाल बंद हो गया है। सैटर्न-5 में 140 टन पेलोड ले जाने की ताकत थी। नासा ने सैटर्न-5 की मदद से ही चांद पर खोज के लिए कई मिशन भेजे थे। स्काईलैब भी इसी से लॉन्च की गई थी। यह 1973 तक प्रचलन में था।

अंतरिक्ष में भेजी गई मस्‍क की रोडस्टर कार भी

फॉल्‍कन हैवी के साथ मस्‍क की रोडस्‍टर कार को भी अंतरिक्ष में भेजा गया। ऐसा पहली बार हुआ है। मस्क ने इस बारे में बताया था कि वह फॉल्‍कन हैवी के साथ मंगल ग्रह की ओर अपनी टेस्ला कंपनी की रोडस्टर कार भी लॉन्च करेंगे। यह एक स्पो‌र्ट्स कार है और एक बार चार्जिंग में यह एक हजार किमी की यात्रा कर सकती है। वहीं 1.9 सेकंड में 0 से 100 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। इस कार की अधिकतम रफ्तार 400 किमी प्रतिघंटे है।

मंगल-चांद पर मानव बस्‍ती बसाना है सपना

पृथ्‍वी से इतर दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं को ले‍कर पिछले काफी लंबे दशक से दुनियाभर में शोध और प्रयोग होते आ रहे हैं। खास तौर से सभी की नजरें मंगल और चांद पर मानव बस्‍ती बसाने पर टिकी हुई है। स्‍पेसएक्‍स के सीईओ मस्‍क का भी यह सपना है और इस सपने को पूरा करने की दिशा में उन्‍होंने अपना पहला कदम बढ़ा दिया है और इसमें उन्‍हें सफलता भी मिल गई है। फाल्‍कन हैवी को लॉन्‍च करने का मुख्‍य मकसद मंगल और चांद पर लोगों को भेजना और वहां मानव बस्‍ती बसाना ही है। यह लोगों के लिए भी बेहद रोमांचकारी है, मगर देखना होगा कि मस्‍क का यह सपना पूरा होता है या नहीं।

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BJP की मीटिंग में भावुक हुए नरेंद्र मोदी, बोले- इंदिरा गांधी की 18 राज्यों में सत्ता थी, हमारी 19 में है

बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड की मीटिंग में गुजरात-हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में जीत के लिए बुधवार को नरेंद्र मोदीऔर अमित शाह का सम्मान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी नेताओं से 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बूथ लेवल पर बीजेपी को मजबूत करने की बात कही। नए चेहरों को पार्टी में अहम जिम्मेदारियां दी जाएं। इस दौरान गुजरात में पार्टी के संघर्ष के दिनों और अटल बिहारी वाजपेयी के कामकाज को याद करते हुए नरेंद्र मोदी कुछ देर के लिए भावुक हो गए। मोदी ने कहा कि एक वक्त इंदिरा गांधी की 18 राज्यों में सरकार थी, अब हमारी 19 राज्यों में है। वहीं, मीटिंग में जाते वक्त केंद्रीय मंत्री कृष्णा राज गिर गए। उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया।

बूथ लेवल कैंपेन चुनाव के लिए मां की तरह

– मीटिंग के बाद पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर अनंत कुमार ने बताया कि नरेंद्र मोदी ने 2019 का लोकसभा इलेक्शन जीतने के लिए देशभर में बूथ लेवल पर पार्टी को मजबूत करने की बात कही है। यह चुनाव में जीत के लिए मां की तरह होता है।
– साथ ही मोदी ने कहा कि बीजेपी में युवा चेहरों को अहम जिम्मेदारियां दी जाएं। सभी नेता सरकार के 2022 के न्यू इंडिया विजन के लिए साथ मिलकर काम करें। पीएम ने पार्टी नेताओं से कहा कि गुजरात और हिमाचल के चुनावों में विपक्ष के झूठे प्रचार से डरने की जरूरत नहीं है।

संघर्ष के दिनों को याद करते हुए मोदी भावुक हुए

– पार्टी सूत्रों ने बताया कि नरेंद्र मोदी गुजरात में पार्टी के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कुछ वक्त के लिए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि एक वक्त 18 राज्यों में इंदिरा गांधी (कांग्रेस) की सरकार थी। आज बीजेपी इससे आगे 19 राज्यों तक पहुंच चुकी है।

– मोदी ने बताया कि अटलजी ने कैसे युवाओं में नई जान फूंकी थी। उन्होंने मुझे लोकसभा चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी। तब मैं आरएसएस में स्टेट जनरल सेक्रेटरी था और बीजेपी में नई भूमिका मिली थी। मोदी ने बताया कि कैसे उन्होंने अपने से 14 साल छोटे अमित शाह को पॉलिटिक्स के लिए ग्रूम किया।
– केंद्र में सरकार चलाते हुए बीजेपी ने पिछले तीन सालों में विधानसभा चुनावों जिस प्रकार से जीत हासिल की। अब तक कोई पार्टी ऐसा नहीं कर पाई।

रूपाणी अभी भी पहली पसंद

– गुजरात और हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री कौन होगा, इसे लेकर अटकलें तेज हैं। गुजरात में सीटें कम होने के बावजूद मौजूदा सीएम विजय रूपाणी पहली पसंद बताए जा रहे हैं।फिर भी 2012 से इस बार सीटें कम होने के बाद दबी जुबान में उठ रहे सवालों की वजह से यहां बदलाव भी मुमकिन है। सीएम की रेस में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का भी नाम है।स्मृति अभी गुजरात से ही राज्यसभा सांसद हैं।

स्मृति इसलिए रेस में

– बीजेपी उत्तर प्रदेश की तरह गुजरात में भी नया चेहरा दे सकती है। संगठन क्षमता और गुजराती भाषा जानने की वजह से स्मृति और पाटीदार कम्युनिटी से आने वाले केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया का नाम भी सीएम रेस में चल रहा है। हालांकि, बीजेपी में ये ट्रेंड रहा है कि जिनके नाम सामने आते हैं, वो मुख्यमंत्री नहीं बनते।

हिमाचल में धूमल की हार से बढ़ी मुश्किल
– हिमाचल में प्रेम कुमार धूमल के चुनाव हार जाने के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और 5 बार के विधायक जयराम ठाकुर रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं।

– हालांकि, सातवीं बार चुनाव जीतने वाले मोहिंदर सिंह, पांचवीं बार विधायक बने राजीव बिंदल, हिमाचल के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष सुरेश भारद्वाज और चौथी बार चुनाव जीतने वाले कृष्ण कपूर के नाम भी चल रहे हैं।

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लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे बना Battlefield, जमीन से लेकर आसमान तक हुई भयंकर गर्जन

आगरा एक्सप्रेस-वे आज कुछ देर के लिए रणक्षेत्र में तब्दील हो गया जहां वायु सेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े की रीढ़ माने जाने वाले प्रमुख विमानों और विशालकाय हरक्यूलिस विमान ने अपने जौहर तथा हैरतअंगेज कौशल का नमूना पेश करते हुए देशवासियों को आश्वस्त किया कि वे युद्ध तथा शांति के समय में किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वायुसेना के जगुआर, मिराज और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों तथा विशाल मालवाहक विमान सी-130 ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर उन्नाव के बांगरमऊ के पास तीन किलोमीटर हिस्से का हवाई पट्टी के तौर पर इस्तेमाल करते हुए इस पर ‘लैंडिंग तथा टेक ऑफ’ कर वायु सेना की तैयारियों का नमूना पेश किया।

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15 लड़ाकू विमानों ने दिखाए करतब
उत्तर प्रदेश सरकार और वायु सेना के इस संयुक्त अभियान के तहत 15 लड़ाकू विमानों तथा एक हरक्यूलिस विमान ने अपने करतब दिखाए जिससे एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा जमीन से लेकर आसमान तक थर्रा उठा। एक्सप्रेस-वे के 3.3 किमी़ लंबे तथा 33 मीटर चौड़े हिस्से को खासतौर पर तैयार किया गया था। विशाल हरक्यूलिस विमान सी-130 ने अभियान की शुरुआत करते हुए वायु सेना के जांबाज दस्ते गरूड़ के कमांडो तथा उनके वाहनों को एक्सप्रेस-वे पर उतारा। कमांडो ने पलक झपकते ही दुश्मन के खिलाफ एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर अपने मोर्चे संभाल लिए और स्थिति को काबू में करते हुए घेराबंदी कर ली।

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मिराज ने दिखाई बाज जैसी फुर्ती
रक्षा-एक्सप्रेस-वे लड़ाकू विमान दो अंतिम उन्नाव इसके बाद वायु सेना के 15 घातक लड़ाकू विमानों ने एक्सप्रेस वे पर आपात स्थिति में उतरने तथा उड़ान भरने के असाधारण कौशल का प्रदर्शन किया। सबसे पहले छह मिराज लड़ाकू विमानों ने बाज जैसी फुर्ती के साथ लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेस-वे को छुआ और पलक झपकते ही उड़ान भर हैरतअंगेज कारनामा किया। इसके बाद तीन-तीन के समूह में छह सुखोई विमानों और तीन जगुआर विमानों ने इस रोंगटे खड़े कर देने वाले करतब का अछ्वुत नजारा पेश किया। विमानों ने हवा में मार करने वाले अंदाज में आक्रामक रूख अपनाते हुए जमीन से लेकर आसमान तक भयंकर गर्जन किया।

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हरक्यूलिस-हिंडन ने भरी उड़ान
वायु सेना के हरक्यूलिस विमान ने हिंडन एयरबेस गाजियाबाद, मिराज ने ग्वालियर, जगुआर ने गोरखपुर और सुखोई ने बरेली एयरबेस से उड़ान भरी। अभियान में हिस्सा लेने वाले गरुड़ कमांडो वायुसेना के आगरा एयरबेस से आए थे। यह समूचा अभियान वायुसेना की मध्य कमान की देखरेख में हुआ और इसका नेतृत्व एयर मार्शल ए़ एस़ बुटौला ने किया। एयर मार्शल बुटौला ने कहा कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य वायुसेना की क्षमता और रणकौशल को बढाना है। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेस-वे के एक हिस्से को हवाई पट्टी के रुप में विकसित करना बहुत अच्छी पहल है। इससे वायुसेना को कम लागत में सामरिक महत्व की जगहों पर सस्ती और टिकाऊ हवाई पट्टी मिलती हैं। जिनका युद्ध और शांति के समय किसी भी आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की भविष्य में अन्य एक्सप्रेस-वे पर भी इस तरह की हवाई पट्टियां बनाने की योजना है और इसे केवल युद्ध की दृष्टि से देखा जाना सही नहीं है। इस अभ्यास को एक साथ दो मोर्चों पर लड़ाई की आशंका के मद्देनजर किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने की वायु सेना की तैयारियों के रूप में भी देखा जा रहा है। साथ ही इसका उद्देश्य मानवीय सहायता या आपदा राहत जैसी स्थितियों में वायु सेना की तैयारियों को कसौटी पर परखने का भी है।

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आपात लैडिंग के लिए 12 राजमार्गों पर मिली मंजूरी
सरकार ने विभिन्न आपात परिस्थितियों से निपटने की रणनीति के तहत लगभग 12 राजमार्गों में वायुसेना के विमानों की लैंडिंग के लिए मंजूरी दी थी लेकिन अभी तक केवल दो में इसका परीक्षण किया गया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान, चीन और स्विटजरलैंड जैसे देश युद्ध और आपात स्थितियों में हवाई आपरेशन सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के अभ्यास करते रहे हैं। सबसे पहले यह अभ्यास मिराज-2000 लड़ाकू विमान ने मई 2015 में यमुना एक्सप्रेस-वे पर किया। इसके बाद नवंबर 2016 में सुखोई और मिराज विमानों ने लखनऊ आगरा एक्सप्रेस-वे पर इस कारनामे को दोबारा अंजाम देकर देशवासियों को आश्वस्त किया कि वायु सेना किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस अभ्यास के लिए एक्सप्रेस-वे के इस हिस्से को विशेष रूप से तैयार किया गया था और एक्सप्रेस को दो दिन पहले वाहनों के लिए बंद कर दिया गया था।

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अब सीरिया का सिर्फ 8 प्रतिशत हिस्सा आईएस के नियंत्रण में: रूस

खास बातें

  1. अब सीरिया का सिर्फ 8 प्रतिशत हिस्सा आईएस के नियंत्रण में: रूस
  2. आईएस के कब्जे वाले 5,841 वर्ग किलोमीटर इलाकों में कमी आई है
  3. 142 इलाकों को मुक्त कराया गया है.

रूसी सेना का कहना है कि सीरियाई क्षेत्र के आठ प्रतिशत से भी कम हिस्से पर ही इस्लामिक स्टेट (आईएस) का नियंत्रण बचा है, क्योंकि सीरियाई सरकारी बलों ने रूसी विमानों की मदद से देश के ज्यादातर भाग को आईएस के कब्जे से मुक्त करा लिया है. एक समाचार एजेंसी के रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी सशस्त्र बल जनरल स्टाफ के मुख्य संचालन निदेशालय के प्रमुख सर्गेई रुदस्कोई ने  मीडिया को बताया कि पिछले महीनों में आईएस के कब्जे वाले 5,841 वर्ग किलोमीटर इलाकों में कमी आई है और 142 इलाकों को मुक्त कराया गया है.

उन्होंने कहा कि सीरियाई सैनिक हजारों आईएस आतंकवादियों के हमलों को नाकाम करते हुए देश के पूर्वी भाग में आगे बढ़ रहे हैं. रुदस्कोई ने कहा कि सरकारी बलों ने मध्य सीरिया में अकेरबाट शहर में आईएस का पूरी तरह सफाया कर दिया है.

उन्होंने कहा कि सीरियाई सैनिक और रूसी वायु सेना आईएस आतंकवादियों और अन्य आतंकवादी संगठनों के पूरे सफाये तक उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रखेंगे. सीरिया में जारी गृह युद्ध की शुरुआत 2011 में हुई थी.