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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देश भर के छात्रों के साथ करेंगे ‘परीक्षा पर चर्चा’

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. इस कार्यक्रम में देश भर से छात्र इसमें हिस्सा लेंगे और जानेंगे कि कैसे बिना तनाव के परीक्षा दी जाए. प्रधानमंत्री ने दो हफ़्ते पहले ही ‘Exam Warriors’ किताब का विमोचन किया है, जिसमें बिना तनाव के परीक्षा देने पर 25 बातें लिखी हुई हैं. सीबीएसई ने सभी स्कूलों से ज़रूरी तैयारी करने को कहा है ताकी छात्र प्रधानमंत्री से जुड़ सकें.

मानव संसाधन मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 16 फरवरी को दिन में 11 बजे दिल्ली स्थित तालकटोरा स्टेडियम में परिचर्चा सत्र में हिस्सा लेंगे. प्रधानमंत्री वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में छात्रों से जुड़ेंगे जिसमें काफी संख्या में छात्र हिस्सा ले रहे हैं.  परिचर्चा के दौरान मुख्य विषय आसन्न बोर्ड परीक्षा और परीक्षा से जुड़ी समस्या होंगे जिसमें परीक्षा संबंधी तनाव से जुड़ी बातें शामिल होंगी.  इस परिचर्चा का शीर्षक ‘‘ मेकिंग एक्जाम फन : चैट विद पीएम मोदी’’ रखा गया है.

कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा था कि ‘‘ मेरे युवा दोस्तो, मैं इस महीने की 16 तरीख को आपसे चर्चा करने को लेकर उत्सुक हूं. मैं आपसे परीक्षा के दौरान तनाव मुक्त और प्रसन्न रहने की जरूरत पर चर्चा करूंगा । इसमें प्रौद्योगिकी के माध्यम से देशभर से हजारों की संख्या में छात्र जुड़ेंगे.’’

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…जब पीएम मोदी ने दावोस के मंच से पढ़े ये श्लोक

दावोस में विश्व में आर्थिक क्षेत्र की महान हस्तियों के सम्मेलन के संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने संस्कृत के श्लोकों का सहारा लेते हुए भारतीय परंपरा और विचारधारा को लोगों के सामने रखा. पीएम ने दावोस संस्कृत के श्लोकों को पढ़ा और उसका मतलब भी बताया. वर्ल्‍ड इकोनॉमिक फोरम के उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय मनीषियों ने विश्‍व को समावेशी विचार दिए. हमारी संस्‍कृति समावेशी रही है और हमारी सरकार भी सबका साथ सबका विकास की विचारधारा पर चल रही है.

हजारों साल पहले हमारे मनीषियों ने इसी विचार को आत्‍मसात कर विश्‍व को राह दिखाने का काम किया और आज हम भी उसी विचार मानने वाले हैं. प्रकृति से प्‍यार करने की सीख हमारे ग्रंथों में, हमारी जीवन शैली में शामिल है. पूरे विश्‍व को परिवार मानने की सीख हमारे मनीषियों ने दी.

पीएम मोदी ने कहा कि इसी सोच का नतीजा है कि भारत ने कभी किसी के भूभाग और संसाधन का दोहन खुद के लिए नहीं किया.

इसके अलावा पीएम मोदी ने दुनिया के दुखों को दूर करने की बात कही.

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत

अर्थात “सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मङ्गलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े.”

पीएम ने वसुधैव कुटुंबकम की बात कही. इसका अर्थ है- धरती ही परिवार है (वसुधा एवं कुटुम्बकम्). यह वाक्य भारतीय संसद के प्रवेश कक्ष में भी अंकित है. इसका पूरा श्लोक कुछ इस प्रकार है.

अयं बन्धुरयं नेतिगणना लघुचेतसाम् ।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥
(महोपनिषद्, अध्याय ४, श्‍लोक ७१)

अर्थ यह है – यह अपना बन्धु है और यह अपना बन्धु नहीं है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते हैं. उदार हृदय वाले लोगों की तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार है.