Posted on Leave a comment

महामानव की महाफिल्म #NarendraModi का क्या पड़ेगा चुनाव पर प्रभाव। सूक्ष्म विश्लेषण!

हमारे प्रिय प्रधानमंत्री मोदी जी पर बनी विवेक ओबरॉय द्वारा अभिनीत फ़िल्म #NarendraModi 11 अप्रैल को रिलीज़ हो रही है।

इस अनुपम व्यक्ति की महाकथा देखने को सभी देशभक्त उत्साहित हैं।
एक चाय वाले का बेटा, हिमालय में सिद्धि प्राप्त करने वाला योगी, माँ भारती का अनन्य सेवक, वर्ल्ड बैंक के कर्ज के नीचे दबे राज्य को एशिया का सबसे सफल राज्य बनाने वाला मुख्यमंत्री, पहली बार पूर्ण बहुमत से प्रधानमंत्री बनने वाला गैर-कांग्रेसी नायक और न जाने कितने ही रूप इस महामानव के व्यक्तित्व में आत्मसात हैं। इनको और जानने के लिए हर व्यक्ति इस फ़िल्म का इंतजार कर रहा है।

कांग्रेसी पंडितों ने फ़िल्म की रिलीज़ रोकने को एड़ी चोटी का जोड़ लगाया परन्तु वो इस फ़िल्म के पीछे की सद्भावना को नहीं जान सके। आप कांग्रेसी पंडित एक व्यक्ति की कथा से इतने भयभीत हैं कि आप अपनी हार पहले ही स्वीकार कर चुके हैं। सिर्फ मौका ढूंढ रहें हैं कि होने वाली हार का बहाना क्या बनाया जाए।

यदि फ़िल्म ही किसी चुनाव को प्रभावित कर सकती है तो ये रैली और प्रचार छोड़ कर सभी दलों को अपने नायकों पर फ़िल्म बना देनी चाहिए लेकिन यह तभी संभव है जब उनके नायकों में वह प्रतिभा हो और उन्होंने वह संघर्ष किया हो जिससे जनमानस प्रभावित हो।

सभी जानते हैं कि अन्य दलों के नायक या तो वंशवाद से बड़े बने हैं या फिर दुसरो का इस्तेमाल करके। कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने अपने वंश को ही धोका देकर सत्ता हतिया ली। फिर भी सब एक साथ इसलिए हैं क्योंकि इस महामानव को किसी भी तरह से हराना संभव नहीं है। यह फिजूल कोशिश सिर्फ इसलिए है की अपने दल की इज्जत बचाई जा सके।

जो पिछली बार 2014 में लहर थी अब वो सुनामी है और विश्व भर में मोदी जी की साख के आगे किसी का भी टिक पाना मुमकिन नहीं है।

इन सब बातों से दूर यह फ़िल्म आपके भीतर एक प्रेरणा को प्रज्वलित करेगी और आप भी अपनी वर्तमान परिस्थितियों पर पछताने को छोड़कर माँ भारती की सेवा करने को अग्रसर होंगे। फ़िल्म का आनंद उठाएं तथा औरों को भी माँ भारती की सेवा हेतु प्रेरित करें।

नोट: यह लेख AdTO.in के चीफ एडिटर के विचारों और शोध पर आधारित है। इसका किसी भी मीडिया समूह से कोई लेना-देना नहीं है और न ही किसी राजनीतिक दल के प्रभाव से शब्दों का चयन किया गया है।

Posted on Leave a comment

CM केजरीवाल को मानहानि मामले में लगा जोर का झटका

हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई पर अंतरिम रोक लगाने से बृहस्पतिवार को इंकार कर दिया। हालांकि दूसरी ओर कोर्ट ने दिल्ली सरकार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई के लिये 11 जुलाई की तारीख तय की है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने याचिका दायर निचली अदालत में चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई पर रोक लगाते हुये उसे खारिज करने की मांग की थी। मानहानि की यह शिकायत पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने 2012 में दायर की थी।

जस्टिस एके पाठक ने अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली सरकार व शिकायतकर्ता पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया। उस फैसले के मुताबिक सांसद व विधायकों के मामलों की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी होनी चाहिये।

याचिका पर जिरह करते हुये वरिष्ठ सुधीर नंदराजोग ने कहा कि मानहानि की यह शिकायत दायर करने का पवन खेड़ा को कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उनकी मानहानि नहीं हुई है। इसलिये इस मामले को खारिज किया जाना चाहिये।

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पूर्व राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने शिकायत दायर कर कहा था कि एक टीवी शो के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अक्तूबर 2012 में बिजली की बढ़ी दरों पर बोलते हुये ऐसी बातें कही जिससे तत्कालीन मुख्यमंत्री की बदनामी हुई थी।

पटियाला हाउस अदालत ने इस शिकायत पर अरविंद केजरीवाल को 31 जनवरी 2013 को बतौर आरोपी समन जारी किया गया था। इस शिकायत पर अदालत ने 28 अक्तूबर 2013 को आरोप तय किये थे।

Posted on Leave a comment

भारत बंद की सफलता का श्रेय लेने उतरी कांग्रेस, बोले “सबसे पहले उठाई आवाज”

दलित उत्पीड़न कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ लड़ाई का श्रेय कांग्रेस खुद लेने की कोशिश में जुट गई है। कांग्रेस ने भारत बंद को पूरी तरह सफल बताते हुए दावा किया कि सबसे पहले उसी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था।

राजनीतिक मोर्चाबंदी करते हुए कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लेकर बंद के दौरान हुई हिंसा के लिए पूरी तरह से केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभालने आए राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद के पास अधिकार है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद कर दे। 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट पर जो फैसला दिया था उसे संसद में रद किया जा सकता था। सरकार कदम बढ़ाती को सभी दल साथ होते, लेकिन चुप्पी छाई रही। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तत्काल बाद सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कर देती तो सोमवार को बंद के दौरान हिंसा नहीं होती।

अब तक कांग्रेस पुनर्विचार याचिका की बात कहती रही थी। अब सरकार ने पुनर्विचार याचिका पेश कर दी है तो कांग्रेस ने संसद के जरिये इसे रद करने का दबाव बढ़ाया है। मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुसार, सिर्फ पुनर्विचार याचिका से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है क्योंकि इसकी सुनवाई समान बेंच में होती है। इसके लिए सरकार को क्यूरेटिव याचिका दाखिल करनी चाहिए या फिर संसद बजट सत्र के बचे हुए चार दिनों में विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरस्त करना चाहिए।

इसके साथ ही कांग्रेस ने देश में दलित उत्पीड़न कानून लागू करने और उसे और मजबूत करने का श्रेय भी लेने की कोशिश की। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि दलित उत्पीड़न कानून राजीव गांधी के कार्यकाल में लाया गया था और 2014 में संप्रग सरकार ने संशोधन का अध्यादेश लाकर इसे और कड़ा कर दिया था। मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस कानून के दुरुपयोग के सवाल को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि दुरुपयोग तो किसी भी कानून हो सकता है, लेकिन इसका उपाय उस कानून को खत्म करना नहीं होता। उनके अनुसार दलित उत्पीड़न कानून के दुरुपयोग के मामले 2-3 फीसद से अधिक नहीं हैं।

Posted on Leave a comment

मुख्य सचिव मारपीट केस में पुलिस के पास है ये अहम सबूत, घेरे में केजरीवाल व सिसोदिया

मुख्य सचिव से मारपीट मामले में पुलिस मुख्यमंत्री आवास से बरामद सीसीटीवी फुटेज की फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। हाई प्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस सीसीटीवी फुटेज को देख भी नहीं पाई। घटनास्थल से पुलिस ने चार डीवीआर जब्त किए हैं।

बढ़ सकती हैं ‘आप’ विधायकों की मुश्किलें 

माना जा रहा है कि जांच की रिपोर्ट सोमवार तक आ जाएगी। इसके बाद पुलिस आगे की कार्रवाई शुरू करेगी।मुख्य सचिव मारपीट मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर रिपोर्ट सौंप दी है। माना जा रहा है कि मामले में आरोपी ‘आप’ विधायकों मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

केजरीवाल व सिसोदिया से हो सकती है पूछताछ 

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जांच रिपोर्ट के अनुसार घटनास्थल पर मौजूद विधायकों की लिस्ट तैयार कर पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगी। इस मामले में विधायकों पर कार्रवाई के अलावा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से भी पूछताछ हो सकती है।

‘आप’ विधायकों पर कसने लगा शिकंजा 

अंशु प्रकाश सभी आरोपी विधायकों को नहीं पहचानते थे। शुरुआत में उन्होंने मारपीट करने वाले ‘आप’ विधायक अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जारवाल के बारे में बताया था। बाद में उन्होंने अंबेडकर नगर के विधायक अजय दत्त और लक्ष्मी नगर के विधायक नितिन त्यागी की पहचान की थी। जिसके बाद पुलिस ने अमानतुल्लाह और प्रकाश जारवाल को गिरफ्तार कर अजय और नितिन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था।

अहम है सीसीटीवी कैमरे की फुटेज

वहीं, पुलिस को वारदात के वक्त मुख्यमंत्री आवास पर जनकपुरी के पूर्व विधायक राजेश ऋषि, वजीरपुर के पूर्व विधायक राजेश गुप्ता, किराड़ी के विधायक ऋतुराज गोविंद, कस्तूरबा नगर के पूर्व विधायक मदन लाल, जंगपुरा के पूर्व विधायक प्रवीण कुमार, संगम विहार के विधायक दिनेश मोहनिया और बुराड़ी के पूर्व विधायक संजीव झा के भी मौजूद होने का पता चला है। पुलिस इनपर कार्रवाई से पूर्व पुख्ता सबूत एकत्र कर लेना चाहती है। सलाहकार वीके जैन की अदालत में घटना के बारे में स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस के पास दूसरा सबूत सीसीटीवी कैमरे की फुटेज ही होगी।

Posted on Leave a comment

आप सांसद पर 5000 करोड़ की मानहानि का मुकदमा

फ्रांस से खरीदे गए लड़ाकू विमान राफेल के सौदे को लेकर देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अंबानी ने आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह पर 5000 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। अंबानी का आरोप है कि संजय सिंह ने झूठे आरोप लगाकर उनकी कंपनी को राफेल सौदे में खींचा था। उद्योगपति ने यह भी दलील दी है कि आप सांसद संजय सिंह के आरोपों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। उद्योगपति अंबानी दिल्ली के दो तिहाई हिस्से में बिजली की आपूर्ति करने वाली निजी बिजली कंपनी बीएसईएस के मालिक भी हैं।

आम आदमी पार्टी के नेता व सांसद संजय सिंह ने बीते 13 फरवरी को कहा था कि भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल विमानों को लेकर 56000 करोड़ रुपए का सौदा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें रिलायंस डिफेंस लिमिटेड फ्रांस की एविएशन कंपनी डसॉल्ट एविएशन को 22000 करोड़ का ठेका मिला। उन्होंने सौदे की गोपनीयता पर भी सवाल उठाए थे। इस सौदे पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए संजय सिंह ने ट्वीट कर लिखा- राफेल डील ही साबित होगी मोदी सरकार के ताबूत में आखिरी कील, 500 करोड़ का जहाज 1500 करोड़ में, अनुभवहीन रिलायंस कंपनी को जहाज के पार्ट बनाने का 22000 करोड़ का ठेका मिला।

सांसद के इसी आरोप को अपनी मानहानि करार देते हुए अंबानी ने संजय सिंह को मानहानि का नोटिस भेजा है। मानहानि का दावा किए जाने पर संजय सिंह ने अंबानी पर पलटवार किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उद्योगपतियों की दबंगई चरम पर है, पहले घोटाला करेंगे, फिर उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों पर मानहानि करेंगे। राफेल रक्षा सौदे का घोटाला उजागर करने पर अंबानी ने मेरे ऊपर देश का सबसे बड़ा 5000 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। मैं अपनी बात पर कायम हूं। बंदर घुड़की नहीं चलेगी। पार्टी के एक अन्य नेता आशतोष ने ट्वीट करके कहा कि अब तो डर लग रहा है कहीं नीरव मोदी भी 11400 करोड़ का मानहानि का मुकदमा न कर दे।

बता दें कि राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस ने भी केंद्र की राजग सरकार को लगातार कठघरे में खड़ा कर रखा है। खुद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी बार-बार, संसद के भीतर और बाहर आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में जवाब मांग रहे हैं। आम आदमी पार्टी नेताओं ने भी इस मुद्दे को बार-बार उठाया है। अब पार्टी सांसद पर मानहानि का मुकदमा होने के बाद इस मुद्दे पर नए सिरे से सियासत गरमा गई है।

उद्योगपतियों की दबंगई चरम पर है। पहले घोटाला करेंगे, फिर उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों पर मानहानि करेंगे। राफेल रक्षा सौदे का घोटाला उजागर करने पर अंबानी ने मेरे ऊपर देश का सबसे बड़ा 5000 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। मैं अपनी बात पर कायम हूं।

– संजय सिंह का ट्वीट

Posted on Leave a comment

ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामला : ‘आप’ विधायकों को राहत, हाईकोर्ट ने उपचुनाव की नोटिफिकेशन जारी करने पर लगाई रोक

ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में आम आदमी पार्टी के लिए थोड़ी राहत भरी खबर है. दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘आप’ के 20 विधायकों की अयोग्यता के फैसले पर सुनवाई करते हुए मामले की अगली सुनवाई होने तक दिल्ली में उपचुनाव की नोटिफिकेशन जारी नहीं करने को कहा है. इसके साथ ही अदालत ने केंद्र की अधिसूचना पर अंतरिम स्थगनादेश जारी करने से इनकार कर दिया है. अयोग्य करार दिए जाने को चुनौती देने वाली आप विधायकों की याचिकाओं पर अदालत ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार से जवाब भी मांगा है. मामले की अगली सुनावाई सोमवार को होगी.

दिल्ली हाईकोर्ट में आम आदमी पार्टी के अयोग्य विधायकों की तरफ से कहा गया था कि चुनाव आयोग ने हमें पहले नहीं बताया था कि वह फैसला करने जा रहा है. न्यूज पेपर के माध्यम से हमें पता चला कि चुनाव आयोग फ़ैसला कर रहा है. अरोड़ा ने कभी हमें नहीं सुना न ही वह तस्वीर में थे, लेकिन ऑर्डर में उनका भी नाम है. चुनाव आयोग के एक सदस्य ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था, जबकि दूसरे ने कभी सुनवाई ही नहीं की. 18 मार्च 2016 को नोटिस हमें मिला जिसका जवाब हमनें दिया.

दिल्ली हाईकोर्ट में चुनाव आयोग ने कहा कि ये स्पीकर चुनाव आयोग को कहते हैं कि सीट खाली है. उसके बाद चुनाव आयोग चुनाव को लेकर काम करता है. दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने कहा कि कोई भी पक्ष इस दरमियान कोई कदम नहीं उठाएगा और चुनाव की घोषणा नहीं की जाएगी.

ये हैं अयोग्य करार दिए गए ‘आप’ के 20 विधायक

  1. आदर्श शास्त्री
  2. अलका लांबा
  3. संजीव झा
  4. कैलाश गहलोत
  5. विजेंदर गर्ग
  6. प्रवीण कुमार
  7. शरद कुमार चौहान
  8. मदन लाल
  9. शिव चरण गोयल
  10. सरिता सिंह
  11. नरेश यादव
  12. राजेश गुप्ता
  13. राजेश ऋषि
  14. अनिल कुमार बाजपेई
  15. सोम दत्त
  16. अवतार सिंह
  17. सुखबीर सिंह
  18. मनोज कुमार
  19. नितिन त्यागी
  20. जरनैल सिंह

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि हम अगले हफ्ते सोमवार को सुनवाई करेंगे. तब तक चुनाव आयोग जवाब दाखिल करे.
दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को कहा कि अगर आप इस मामले में लिखित आदेश चाहते हैं तो हम दे सकते हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि सोमवार को मामले की सुनवाई करे और उसी दिन इस पूरे मामले का निपटारा भी कर दे. हाईकोर्ट ने फिलहाल राष्ट्रपति के अयोग्य करार देने को नोटिफिकेशन पर रोक लगाने से इंकार किया.