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यात्रा तुंगनाथ-चंद्रशिला: रोमांच से भरपूर हैं तृतीय केदार के दर्शन

तुंगनाथ बहुत ही जाना-माना मंदिर है। तुंगनाथ, पंच केदार ( केदारनाथ, मद्महेश्वर, तुंगनाथ, रूद्रनाथ और कल्पेश्वर) में से एक है और यह तीसरे स्थान पर आता है। ज्यादातर लोग सिर्फ केदारनाथ के बारे में ही जानते हैं लेकिन ये पांचों केदार भी उतना ही महत्व रखते हैं, जितना केदारनाथ। तुंगनाथ मंदिर से चंद्रशिला एक किलोमीटर दूर है, लेकिन चढ़ाई बहुत खड़ी है। कई बार तो लोग सिर्फ तुंगनाथ से ही वापस लौट जाते हैं। बर्फबारी की वजह से रास्ता और भी फिसलन वाला हो जाता है। चंद्रशिला पीक पर मां गंगा का मंदिर बना हुआ है और यहां से चारों तरफ बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां दिखाई देती हैं। यहां से नंदादेवी चोटी को साफ-साफ देखा जा सकता है।

कब और कैसे पहुंचे

मार्च से नवंबर तक यहां आने के लिए सही समय है। हालांकि आ तो कभी भी सकते है, लेकिन सर्दियों में बर्फ ज्यादा होने की वजह से रास्ता बंद हो जाता है, जिससे ट्रैकिंग बढ़ जाती है।

यहां पहुंचने के दो रास्ते हैं

1. ऋषिकेश से गोपेश्वर 212 किमी और गोपेश्वर से चोपता 40 किमी।

2. ऋषिकेश से ऊखीमठ 183 किमी और ऊखीमठ से चोपता 25 किमी। ऋषिकेश से गोपेश्वर के लिए नियमित बस सेवा उपलब्ध है। इससे आगे बस व शेयरिंग जीप व प्राइवेट टैक्सी करके भी जाया जा सकता है। नज़दीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार है जो देश के सभी हिस्सों से जुड़ा है। नज़दीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून में है।

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स्काई डाइविंग के लिए इंडिया की ये 5 जगहें हैं बेस्ट

स्काई डाइविंग, सिंपल पैराशूटिंग का मॉर्डन रूप है जिसमें एयरक्रॉफ्ट द्वारा एक तय ऊंचाई से खुली हवा में जंप करना होता है और उसके कुछ समय बाद अपना पैराशूट खोलकर लैंड करना होता है।

इस एडवेंचर में एन्जॉयमेंट के साथ सुरक्षा के लिए आपको कुछ रूल्स भी फॉलो करने पड़ते हैं। जिसके लिए ट्रैनर्स मौजूद होते हैं। जहां कई जगहों पर 1-2 घंटे की ट्रेनिंग दी जाती है वहीं कुछ जगहों पर महज कुछ घंटों की। जिसके बाद आप तैयार होते हैं खुली हवा में आजाद चीड़िया की तरह उड़ने के लिए। तो आज हम इंडिया की ऐसी ही जगहों के बारे में जानेंगे, जहां जाकर आप अपने स्काई डाइविंग के शौक को आसानी से पूरा कर सकते हैं।

इंडिया की ये 5 जगहें हैं स्काई डाइविंग के बेस्ट

मैसूर, कर्नाटक- बेस्ट स्काई डाइविंग डेस्टिनेशन्स की लिस्ट में मैसूर सबसे ज्यादा पॉप्युलर है। बैंगलुरू से कुछ ही घंटे की दूरी पर बसे मैसूर में बहुत सारे स्काई डाइविंग कैंप्स मिलेंगे। यहां आकर स्काई डाइविंग करना बिल्कुल अलग ही तरह का एक्सपीरियंस होता है। टैंडेम से लेकर स्टेटिक और एक्सीलेरेटेड हर तरह के जंप्स के लिए प्रोफेशनल ट्रेनर्स द्वारा आपको 2-3 दिन की ट्रैनिंग दी जाती है। इसके बाद ही आप स्काई डाइविंग का मजा ले सकते हैं। हवा में फ्री होकर उड़ते हुए आसपास के खूबसूरत नजारों को देखने का एहसास अलग ही होता है

धाना, मध्यप्रदेश- धाना में इंडिया का पहला स्काई डाइविंग कैंप शुरू हुआ था। यहां आपको स्टेटिक और टैंडेम जंप्स के ऑप्शन्स मिलते हैं। 4000 फीट से जंप करते हुए यहां की खूबसूरती देखना वाकई बहुत अद्भुत होता हैशायद इसलिए ही धाना को इंडिया के बेस्ट स्काई डाइविंग डेस्टिनेशन्स में शामिल किया गया है

एंबी वैली, महाराष्ट्र- अगर आपको एंडवेंचर करना पसंद है तो महाराष्ट्र के एंबी वैली में स्काई डाइविंग जरूर ट्राय करें। 45 मिनट की ये डाइविंग आपको लाइफटाइम याद रहेगी। फिलहाल यहां 10,000 फीट से टैंडेम जंप की सुविधा अवेलेबल है जिसमें बेशक मज़ा तो आता है लेकिन उतना ही डर भी लगता है। तो अगर आप थ्रील के साथ इस एडवेंचर को वाकई एन्जॉय करना चाहते हैं तो फिर वीकेंड में महाराष्ट्र आने का प्लान करें

दीसा, गुजरात- एक्सपीरियंस्ड हो या फिर नौखिसिया, गुजरात का दीसा हर किसी को लाइफटाइम एक्सपीरियंस देने के लिए बेस्ट स्काई डाइविंग डेस्टिनेशन है।हां गुजरात स्पोर्ट्स अथॉरिटी और इंडियन पैराशूटिंग फेडरेशन द्वारा भी स्काई डाइविंग के कैंप्स लगाए जाते हैं

पांडिचेरी- इंडिया के खूबसूरत शहरों में शामिल पांडिचेरी सिर्फ स्कूवा ही नहीं स्काई डाइविंग के लिए भी बेस्ट डेस्टिनेशन है. ट्रैवलिंग के साथ एंडवेंचर पसंद वालों की तो ये सबसे पसंदीदा जगह है। पांडिचेरी में आपको स्टेटिक, टैंडेम और एक्सीलिरेटेड हर तरह के जंप्स के ऑप्शन मिलेंगे। फ्री बर्ड की तरह हवा में उड़ते हुए नैचुरल ब्यूटी को एक्सप्लोर करना है तो पांडिचेरी का ट्रिप रहेगा बेस्ट

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सुजुकी Intruder FI भारत में लॉन्च, जानें- कीमत और खूबियां

सुजुकी मोटरसाइकल्स ने भारत में Suzuki Intruder के फ्यूल इंजेक्शन (FI) वेरिएंट को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इसकी कीमत 1.06 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, दिल्ली) रखी है. फ्यूल इंजेक्टेड वेरिएंट कार्ब्युरेटर एडिशन की तुलना में 7,000 रुपये तक ज्यादा महंगी है. कार्ब्युरेटर एडिशन की मौजूदा कीमत 99,995 रुपये है.

इस बाइक में किसी तरह का मैकेनिकल और कॉस्मेटिक बदलाव नहीं किया गया है. ये बाइक मेटालिक ऊर्ट/ मेटालिक मैट ब्लैक नं. 2 और ग्लास स्पार्कल ब्लैक/ मेटालिक मैट टाइटेनियम सिल्वर कलर ऑप्शन में ग्राहकों को उपलब्ध होगी. Suzuki Intrude को पिछले साल नवंबर में लॉन्च किया गया था.

ये कंपनी की हाई एंड बाइक Intruder M1800 से इंस्पायर है जिसमें 1,800cc का इंजन दिया गया है. Suzuki Intruder में 155cc का इंजन है.

डिजाइन की बात करें तो यह Intruder M1800 से मिलती-जुलती है और इसे एक क्रूजर बनाने की पूरी कोशिश की गई है. हालांकि इसका चेसिस Suzuki Gixxer का ही है जिसे कंपनी ने भारत में काफी पहले लॉन्च किया था और यह पॉपुलर भी हुई है. इसमे दिया गया इंजन 14.8 PS का पावर और 14NM का टॉर्क जेनेरेट करता है. ये बाइक 5 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ आती है. इसमें 11 लीटर की फ्यूल कैपेसिटी दी गई है.

Intruder 150 में Intruder 1,800 की तरह ही ट्राइएंगुलर हेडलैंप दिया गया है और इसमे डुअल सीट सेटअप है जैसा आम तौर पर क्रूजर बाइक्स में देखने को मिलता है. इस बाइक में फ्रंट और रियर दोनों चक्कों में डिस्क ब्रेक लगाया गया है और सिक्योरिटी के लिए इसमें ABS स्टैंडर्ड भी दिया गया है. इसके अलावा इसमे एलईडी टेल लाइट्स दी गई है.

कंपनी ने दावा किया है कि Suzuki Intruder 44 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देगी. कुछ दूसरे फीचर्स की बात करें तो इसमें Dual Exhaust दिए गए हैं और इसमें डिजिटल कंसोल दिया गया है. Suzuki Intruder में 17 इंच के तीन स्पोक एलॉय व्हील दिए गए हैं. फ्रंट में 41mm का टेलिस्कोपिक फोर्क है रियर में 7 स्टेप मोनोशॉक दिया गया है.

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भारत की पहली शीशे की छत वाली ट्रेन हुई शुरू, मुंबई से गोवा का सफर होगा दिलचस्प

किसी जगह की ट्रिप का मजा और भी दुगुना हो जाता है, जब सफर सुकूनभरा होता है. पिछले एक दशक से यात्रियों के सफर को सुकूनभरा बनाने के लिए सरकार काफी कदम उठा रही है. देश भर के शहरों को छोटे कस्बे और गांवों से जोड़ने का काम तेजी से हो रहा है. होली और दिवाली जैसे कई त्योहारों पर स्पेशल ट्रेन और बस चलाई जाती है. इसी तरह अब मुंबई से गोवा का सफर और भी दिलचस्प हो जाएगा. 18 सितंबर से दादर और मडगांव के बीच चलने वाली जन शताब्दीट एक्सलप्रेस में एक विस्टािडोम (ग्लास-टॉप) कोच शुरू किया जाएगा.

जानें क्या है खास बातें

एसी विस्टाडोम ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्री इस विशेष कोच में रोटेटेबल कुर्सियों पर बैठेंगे. साथ ही इसमें मनोरंजन के लिए हैंगिंग एलसीडी टीवी भी है. 40 सीटों वाले इस कोच की लागत 3.38 करोड़ रुपये है. इस ट्रेन में 360 डिग्री पर घूमने वाली चौड़ी सीटें हैं, जिससे सफर में बाहर के नजारों का बेहतरीन अनुभव मिलेगा.

कितने दिन चलेगी ट्रेन?

इस खास कोच को सितंबर के पहले हफ्ते में केंद्रीय रेलवे ने अपने मुख्यालय छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल पर रिसीव किया था. जानकारी के अनुसार मॉनसून में यह ट्रेन सप्तामह में तीन दिन चलेगी और मॉनसून खत्म होने के बाद सप्ताह में पांच दिन चलेगी. जन शताब्दी एक्सप्रेस के दादर से चलने का समय सुबह 5.25 बजे है और यह उसी दिन शाम 4 बजे तक मडगांव पहुंच जाती है.

एक्जीक्यूटिव क्लास जितना किराया

विस्टाडोम कोचों को चेन्नई की द इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में बनाया गया है. इन कोचों का किराया शताब्दी एक्सप्रेस के एक्जीयक्यूटिव क्लास जितना होगा. मूल किराए के अतिरिक्त रिजर्वेशन चार्ज, जीएसटी और कोई अन्य‍ चार्ज जोड़ा जा सकता है. उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई कंसेशन (छूट) नहीं मिलेगा और सभी यात्रियों को पूरा किराया देना होगा. इसकी न्यूनतम यात्रा दूरी 50 किलोमीटर होगी.’

पर्यटन को बढ़ाने के लिए उठाया गया कदम

विस्टाडोम कोच देश में पहली बार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लॉन्च किए जा रहे हैं. जिससे मुंबई या गोवा घूमने के अलावा लोग इस ट्रेन का सफर भी यात्रियों को दिलचस्प लग सके.