Posted on Leave a comment

यूएन के महासचिव ने किया नरेंद्र मोदी को चैंपियंस ऑफ अर्थ अवॉर्ड से सम्मानित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को एक विशेष समारोह में संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण अवॉर्ड चैंपियंस ऑफ अर्थ से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री को यह अवॉर्ड यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दिया। इस मौके पर मोदी ने कहा, ‘मैं इस सम्मान के लिए संयुक्त राष्ट्र का आभारी हूं। यह सम्मान भारत के सवा सौ करोड़ लोगों की प्रतिबद्धता का फल है। चैंपियन अर्थ अवॉर्ड भारत के जंगलों में बसे आदिवासियों का सम्मान है, जो अपने जीवन से ज्यादा जंगल से प्यार करते हैं।’

ये देश के किसानों और महिलाओं का सम्मान :प्रधानमंत्री ने कहा- ‘यह देश के किसानों और महिलाओं का सम्मान है। महिलाएं पौधों में भी भगवान देखती हैं, वे पत्तियां भी गिनकर तोड़ती हैं। मैं इस सम्मान के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूं। भारत के लिए यह दोहरे सम्मान का मौका है। कोच्चि एयरपोर्ट को ऊर्जा क्षेत्र में सम्मान मिला है। पर्यावरण और प्रकृति का सीधा रिश्ता कल्चर से है। पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदना को विश्व स्वीकार कर रहा है। हम उस समाज का हिस्सा हैं, जहां सुबह उठने से पहले धरती पर पांव रखने से पहले क्षमा मांगी जाती है। क्योंकि हम उस पर वजन डालने वाले हैं।’

भारतीयों के लिए प्रकृति ही सर्वोपरि है : उन्होंने कहा, ‘हमारे व्रत और त्योहारों में प्रकृति का जुड़ाव है। हमारे यहां प्रकृति को सर्वोपरि माना गया है। यजुर्वेद से लिए शांतिपाठ में वातावरण में शांति की प्रार्थना की गई है। यूएन ने जो सम्मान दिया, वह लोगों की आस्था का सम्मान है। देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। हर साल लाखों लोग गरीबी से बाहर आ रहे हैं। आबादी के एक हिस्से को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते हैं। सूखे की वजह से सीमित संसाधन वाले गरीब परेशान हो रहे हैं। आज प्रकृति पर अतिरिक्त दवाब डाले बगैर विकास की जरूरत है।’

Posted on Leave a comment

हर अंग के लिए उसी आकार के फल-सब्जी और अनाज, एक बार जानकर बच सकते हैं सैकड़ों बीमारियों से

यह कुदरत का करिश्मा है कि हमारे आसपास ऐसे फल, अनाज और सब्जियां हैं, जिनका आकार हमारे शरीर के किसी न किसी अंग से मिलता है और उन्हें खाने से शरीर विशेष की बीमारी होने का जोखिम कम किया जा सकता है। यही नहीं, अगर बीमारी हो जाए तो उसके ठीक होने की संभावना भी होती है।

हम जैसा खाते हैं वैसा ही होते हैं

यह प्राचीन मान्यता है कि हम जैसा खाते हैं, वैसा ही होते हैं। इसलिए सदियों से सात्विक भोजन पर जोर दिया जाता रहा है। अब आधुनिक शोधों से पता चल रहा है कि ये मान्यताएं बिल्कुल सही हैं। इसी क्रम में हम आपका उन अनाज, फल और सब्जियों से परिचय करा रहे हैं, जो शरीर के खास हिस्से के लिए फायदेमंद होते हैं और आपको सेहतमंद रखते हैं।

गाजर और रोशनी का रिश्ता

अखरोट के बारे में हम बता चुके हैं। इस क्रम में अगला नंबर गाजर का है। इसे काटकर देखिए तो यह बिल्कुल आंखों के बीच के गोल हिस्से की तरह दिखता है। तभी तो इसे खाने से आंखों की रोशनी ठीक रहती है। इसमें विटामिन और बीटा केरोटीन जैसे एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो आंखों की रोशनी को खराब होने से बचाते हैं।

स्तन कैंसर से क्यों बचाता है संतरा

संतरे को बीच के काटने पर जो आकृति उभरती है वह स्तन के मैमोग्राम से मिलती जुलती है। संतरे एवं साइट्रिक एसिड वाले इसी आकार के अन्य फलों में पाया जाने वाला लिमोनॉयड्स का प्रयोगशाला में जानवरों पर प्रयोग सफल रहा है और इससे कैंसर का असर करने में मदद मिली है।

दिल का दोस्त है टमाटर

टमाटर को काटने पर उसके अंदर से भी दिल की तरह चैंबर निकलते हैं। वैज्ञानिक शोधों से साबित हुआ है कि इसमें पाए जाने वाले लाइकोपिन नामक पदार्थ के कारण टमाटर खाने वालों से दिल की बीमारियां दूर रहती हैं। टमाटर में थोड़ा मक्खन, घी या कोई भी फैट मिलाकर खाने से लाइकोपिन का असर दस गुना तक बढ़ जाता है।

अदरक को ध्यान से देखिए

अदरक के फायदे के कायल लोग से इसके मुरीद है लेकिन कई लोग इसके स्वाद के कारण इससे कोसों दूर रहना पसंद करते हैं। खैर, कभी ध्यान से इसे देखिए। यह बिल्कुल आमाशय (स्टमक) की तरह दिखता है। अपने देश में तो इसके गुणों से हम सदियों से परिचित हैं, लेकिन यूएस ड्रग एडिमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए) तक ने इसका लोहा मान लिया है। इसकी सूची में अदरक के तेल को अजीर्ण और उल्टी में इस्तेमाल के लिए रामबाण बताया गया है।

एक बींस का नाम किडनी बींस क्यों है

कभी आपने सोचा है कि राजमा और फ्रेंच बींस या इस परिवार के अन्य बींस का आकार किडनी की तरह क्यों होता है। क्योंकि इनके सेवन से किडनी सेहमंद रहती है। यहां तक कि एक बींस का नाम ही किडनी बींस है। इसमें फाइबर, मैग्नीशियम और पोटैशियम पाया है। फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है, जबकि मैग्नीशियम और पोटैशियम किडनी स्टोन की समस्या से बचाता है।

आपके चेहरे पर मुस्कान लाता है केला

केला शायद दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला फल है और इसे कंप्लीट फूड भी कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके अंदर ट्रिप्टोफैन नामक एक प्रोटीन पाया जाता है जो केले के पचने के बाद सेरोटोनिन में बदल जाता है। यही सेरोटोनिन हमारे मूड को बुस्ट करता है। इसलिए, अगली बार जब भी आपका मूड डाउन हो तो उसे अप करने के लिए केला जरूर खाइएगा। शर्तिया फायदा होगा।

मशरूम भले न खाते हों लेकिन फायदा जान लीजिए

मशरूम को बीच के काटने पर यह बिल्कुल हमारे कान की तरह दिखता है। कान से ऊंचा सुनने वालों में मशरूम के सेवन से सुधार देखने को मिला है। कान के अलावा यह हड्डियों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें काफी मात्रा में विटामिन डी भी पाया जाता है।

जानिए, शकरकंद और पैंक्रियाज का रिश्ता

पैंक्रियाज का हमारे शरीर में काफी अहम रोल होता है। इस अंग का आकार शकरकंद से काफी मिलता-जुलता है। शोध से पता चला है कि शकरकंद में पाया जाने वाले तत्व पैंक्रियाज के ग्लाइसेमिक इंडेक्स को ठीक रखते हैं जिससे यह अंग सामान्य रूप से काम करता है।

अस्थमा से क्यों बचाता है अंगूर

हमारे फेफड़े के अंदर अंगूर के आकार की कई थैलीनुमा ग्रंथियां होती हैं जो कॉर्बन डाइ ऑक्साइड और ऑक्सीजन के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं। इन्हें एल्वियोली कहा जाता है। अंगूर के सेवन से फेफड़े के संक्रमण और एलर्जी से होने वाली अस्थमा जैसी बीमारियों से लड़ने में फायदा मिलता है।

प्याज के फायदे जान हो जाएंगे हैरान

प्याज को काटकर सलाद के रूप में खूब खाया जाता है। लोग इसे अलग-अलग आकार में काटते हैं, लेकिन गभी गोलाकार काटकर देखिए। यह आकार बिल्कुल इनसान की कोशिकाओं से मिलता है। शोधों से पता चला है कि प्याज में पाए जाने वाले फाइटोकेमिकल कोशिकाओं के अपशिष्ट पदार्थों की सफाई करते हैं और उन्हें स्वस्थ रखते हैं। हम सभी जानते हैं कि ये कोशिकाएं ही जीवन का आधार हैं। कोशिकाओं से ही मिलकर ऊतक (टिश्यू) बनते हैं और कई टिश्यू मिलकर ऑरगन यानी अंग का निर्माण करते हैं।

Posted on Leave a comment

UPSC और Aadhaar की साइट एक ही दिन हैक, देश की साइबर सिक्‍योरिटी पर बड़ा सवाल

हैकर्स ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की वेबसाइट को सोमवार रात हैक कर लिया।

वेबसाइट http://www.upsc.gov.in/ के होमपेज पर जाने पर एक कार्टून कैरेक्टर डोरेमॉन की तस्वीर लगी दिख रही थी, जिस पर लिखा था, ‘डोरेमॉन!!! फोन उठाओ.’ इस पेज के निचले हिस्से में ‘आई.एम. स्ट्यूपीड’ (I.M. STEWPEED) लिखा था और साथ ही बैकग्राउंड में इस कार्टून सीरियल का टाइटल ट्रैक बज रहा था। वहीं दूसरी ओर आधार की साइट को भी हैक किए जाने की खबर है।

2500 रुपये के सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार हो सकता है नया आधार कार्ड
आधार कार्ड की सुरक्षा को लेकर देश में काफी समय से विवाद चल रहा है। कुछ दिनों पहले भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने कहा है कि वह आधार के लिए फेस रिकॉग्निशन तकनीक (चेहरा पहचानने) पर काम कर रही है और इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि आधार के सॉफ्टवेयर को हैक कर लिया गया है।

व्हाट्सएप पर बेचा जा रहा है सॉफ्टवेयर

रिपोर्ट में हफिंगटनपोस्ट डॉट इन ने दावा किया है कि आधार कार्ड का सॉफ्टवेयर हैक किया जा चुका है और भारत के करीब एक अरब लोगों की निजी जानकारी दांव पर लगी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आधार कार्ड के सॉफ्टवेयर एक लूपहोल (गड़बड़ी) है, जिसकी मदद से एक सॉफ्टवेयर के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति किसी के भी नाम से वास्तविक आधार कार्ड बना सकता है।
इस सॉफ्टवेयर की कीमत सिर्फ 2,500 रुपये है। हफिंगटनपोस्ट डॉट इन का दावा कि उसने तीन महीने की जांच के बाद इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है। इस रिपोर्ट को तैयार करने में दुनियाभर के पांच विशेषज्ञों की मदद ली गई है। रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अभी भी इस सॉफ्टवेयर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। दरअसल, इस सॉफ्टवेयर की मदद से आधार की सिक्योरिटी फीचर को बंद किया जा सकता है और नया आधार तैयार किया जा सकता है।

आधार कार्ड को हैक करने वाला यह सॉफ्टवेयर 2,500 रुपये में व्हाट्सएप पर बेचा जा रहा है। साथ ही यूट्यूब पर भी कई वीडियो मौजूद हैं, जिनमें एक कोड के जरिए किसी के भी आधार कार्ड से छेड़छाड़ हो सकती है और नया आधार कार्ड बनाया जा सकता है।

Posted on Leave a comment

जानिए भारत में कैसे बढ़ती-घटती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमत

आइये जानते हैं वे कौन से फैक्टर हैं जो पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर प्रभाव डालते हैं।

कैसे तय होते हैं दाम

सबसे पहले खाड़ी या दूसरे देशों से तेल खरीदते हैं, फिर उसमें ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़ते हैं। क्रूड आयल यानी कच्चे तेल को रिफाइन करने का व्यय भी जोड़ते हैं। केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और डीलर का कमीशन जुड़ता है। राज्य वैट लगाते हैं और इस तरह आम ग्राहक के लिए कीमत तय होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में बदलाव घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमत को सीधे प्रभावित करता है। भारतीय घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार यह सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से है। अंतरराष्ट्रीय मांग में वृद्धि, कम उत्पादन दर और कच्चे तेल के उत्पादक देशों में किसी तरह की राजनीतिक हलचल पेट्रोल की कीमत को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

बढ़ती मांग

भारत और अन्य विकासशील देशों में आर्थिक विकास ने भी पेट्रोल और अन्य आवश्यक ईंधन की मांग में वृद्धि की है। हाल ही में निजी वाहनों के मालिकों की संख्या बढ़ी है, जिससे भारत में पेट्रोल की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

आपूर्ति और मांग में असंतुलन
कच्चे तेल के इनपुट मूल्य की उच्च लागत के कारण भारत में तेल रिफाइनरी कंपनियों को बाजार की मांगों को पूरा करने में समस्या का सामना करना पड़ता है। जिससे देश में पेट्रोल की कम आपूर्ति और अधिक मांग होती है।

टैक्स रेट
पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स पर भी काफी हद तक निर्भर करती हैं। सरकार की ओर से टैक्स दरें बढ़ाने की स्थिति में कंपनियां अक्सर उसका बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि होती है।

चार साल में 12 बार बढ़ीं कीमतें
बीते चार साल में सरकार ने कम से कम एक दर्जन बार ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क में इजाफा किया है। नतीजतन मौजूदा सरकार को पेट्रोल पर मनमोहन सिंह की सरकार के कार्यकाल में 2014 में मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी के मुकाबले 10 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मुनाफा होने लगा। इसी तरह डीजल में सरकार को पिछली सरकार के मुकाबले 11 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मिल रहे हैं।

पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 105. 49 फीसदी और डीजल में 240 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। दरअसल, फिलहाल पेट्रोल डीजल में कई सारे टैक्स शामिल हैं। मसलन, एक्साइज ड्यूटी और वैट (मूल्य संवर्धित कर)। इसके अलावा डीलर की ओर से लगाया गया रेट और कमीशन भी कीमतों में जुड़ते हैं। एक्साइज ड्यूटी तो केंद्र सरकार लेती है, जबकि वैट राज्यों की आमदनी (राजस्व) में जुड़ता है।

89.97 प्रति लीटर
महाराष्ट्र के परभणी में पेट्रोल सोमवार को हो गया। यह पूरे देश में पेट्रोल की सर्वाधिक कीमत है।

रुपये की हालत
डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत भी उन प्रमुख कारकों में से एक है, जो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत को प्रभावित करती हैं। भारतीय तेल कंपनियां अन्य देशों से आयातित तेल का भुगतान डॉलर में करती हैं। लेकिन उनके खर्च रुपये में दर्ज होते हैं। जब डॉलर की तुलना में रुपये में गिरावट आती है, तो कंपनियों के लाभ पर असर पड़ता है और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ जाती है। इसी तरह रुपया मजबूत होने पर कीमतों में राहत मिलती है।

Posted on Leave a comment

दुनिया के कई देशों को आधी कीमत पर पेट्रोल डीजल बेच रहा है भारत, जानिए कारण!

पंजाब के रोहित सभ्रवाल की आरटीआई से पता चला है कि मैंग्लोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमि. से 1 जनवरी 2018 से 30 जून 2018 के बीच पांच देशों – हांगकांग, मलेशिया, मॉरिशस, सिंगापुर और यूएई को 32 से 34 रुपए प्रति लीटर में रिफाइंड पेट्रोल और 34 से 36 रुपए में रिफाइंड डीजल बेचा गया। इस दैरान भारत में पेट्रोल की कीमत 69.97 रुपए से 75.55 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 59.70 रुपए से 67.38 रुपए प्रति लीटर रही।

– इन पांच देशों के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, ईराक, इजराइल, जॉर्डन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका में भारत से रिफाइन्ड पेट्रोल-डीजल निर्यात किया जाता है।

देशवासियों पर 150 फीसद तक टैक्स

रोहित सभ्रवाल कहते हैं, बाकी देशों को भारत से भले ही बेहद सस्ता रिफाइंड पेट्रोल-डीजल मिल रहा हो, लेकिन यहां के लोगों पर 125 से 150 फीसद तक टैक्स लगाया जा रहा है। यही कारण है कि भारत के अधिकांश राज्यों में पेट्रोल 75 से 82 रुपए लीटर और डीजल 66 से 74 रुपए लीटर तक बेचा जा रहा है। ताजा खबर तो यह भी है कि सरकार ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लेने से इन्कार कर दिया है। यानी दाम कम होने की यह उम्मीद भी खत्म हो गई है।

यही 35.90 रुपए प्रति लीटर वाला कच्चा पेट्रोल रिफाइन करने के बाद भारत में 77 से 82 रुपए लीटर हो जाता है, क्योंकि इसमें करीब 19.48 रुपए की एक्साइज ड्यूटी, 16.47 रुपए प्रति लीटर का VAT, अन्य टैक्स और डीलर कमीशन शामिल हो जाता है। डीजल पर भी ये सभी टैक्स लगते हैं।

Posted on Leave a comment

बेहद रोमांचक रहा लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव। देखें राहुल के सवालों पर प्रधानमंत्री मोदी के जवाब!

आइए देखते हैं एक विश्लेषण जो दर्शाता है राहुल जी ले हर तीर को जो उन्होंने भाजपा पर छोड़े तथा मोदी जी के जवाब जिन्होंने संसद में हंगामा मचा दिया,

(सौजन्य: Zee News)

हालांकि परिणाम वही हुआ जो सबको मालूम था, भाजपा समर्थकों की संख्या घटने की जगह बढ़ गयी और शिव सेना के समर्थन के साथ ही एन डी ए सरकार को 325 सांसदों का साथ मिला।