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जानिए आखिर क्यों दिल्ली में क्यों बार-बार आते भूकंप, इलाकों में भूकंप का सबसे ज्यादा खतरा…

दिल्ली भूकंपीय क्षेत्रों के जोन 4 में स्थित है देश को इस तरह के चार जोन में बांटा गया है जोन-4 में होने की वजह से दिल्ली भूकंप का एक भी भारी झटका बर्दाश्त नहीं कर सकती। दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।

दिल्ली हिमालय के निकट है जो भारत और यूरेशिया जैसी टेक्टॉनिक प्लेटों के मिलने से बना था धरती के भीतर की इन प्लेटों में होने वाली हलचल की वजह से दिल्ली कानपुर और लखनऊ जैसे इलाकों में भूकंप का खतरा सबसे ज्यादा है।

दिल्ली के पास सोहना मथुरा और दिल्ली-मुरादाबाद तीन फॉल्ट लाइन मौजूद हैं जिसके चलते भूकंप की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

दिल्ली रिज क्षेत्रकम खतरे वाला क्षेत्र है वहीं मध्यम खतरे वाले क्षेत्र हैं दक्षिण पश्चिम उत्तर पश्चिम और पश्चिमी इलाका सबसे ज्यादा खतरे वाले क्षेत्र हैं उत्तर पूर्वी क्षेत्र।

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दोस्ती की मिसाल: बोले विनोद कांबली- सचिन के कारण फिर से आया क्रिकेट मैदान पर

भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज विनोद कांबली ने कहा कि उन्होंने कोच बनने का फैसला दोस्त और टीम के साथी रहे सचिन तेंदुलकर की सलाह पर किया. तेंदुलकर और कांबली दिग्गज क्रिकेट कोच रमाकांत आचरेकर के शिष्य हैं. अपनी दोस्ती के लिए मशहूर इन दोनों खिलाड़ियों ने भारत का प्रतिनिधित्व किया.

कांबली ने कहा कि क्रिकेट मैदान वह खिलाड़ी नहीं, बल्कि कोच के रूप में वापसी कर रहे हैं, जिसका श्रेय तेंदुलकर को जाता है. उन्होंने कहा,‘जब मैंने क्रिकेट से संन्याय लिया था, तब मैंने कमेंट्री या टीवी पर विशेषज्ञ बनने के बारे में सोचा, लेकिन क्रिकेट के प्रति मेरा प्यार हमेशा बना रहा, इसलिए मैं फिर से मैदान पर आ रहा हूं.’

बाएं हाथ का यह पूर्व बल्लेबाज मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के बांद्रा कुर्ला परिसर में एक क्रिकेट कोचिंग अकादमी के लॉन्च के मौके पर मौजूद था. इस अकादमी में वह कोचिंग सत्र आयोजित करेंगे. लगातार दो टेस्ट मैच में दोहरा शतक लगाने वाले देश के पहले बल्लेबाज कांबली ने कहा, ‘सचिन को पता है मुझे क्रिकेट से कितना लगाव है, इसलिए उन्होंने मुझ से कहा कि मैं कोचिंग देना शुरू करूं. उन्होंने मुझे जो रास्ता दिखाया मैं उस पर चलने की कोशिश कर रहा हूं.’

उन्होंने कहा कि कोचिंग लेने वाले छात्रों को वह उन मूल्यों के बारे में बताएंगे जो उन्होंने आचरेकर से सिखा है. कांबली ने कहा, ‘आचरेकर सर से मिले मूल्यों को मैं छात्रों के साथ साझा करूंगा.’