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बिना सिम के भी कर सकेंगे मोबाइल से कॉल। जाने कैसे

यह सर्विस मोबाइल यूजर को नजदीकी पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क के जरिए कॉल कनेक्ट करने में मदद करेगी। DoT ने टेलिकॉम कंपनियों से कहा है कि उन्हें सब्सक्राइबर्स को इस सर्विस से संबंधित डिटेल में जानकारी देनी आवश्यक है जिससे वो ठीक से निर्णय ले पाएं। इसके साथ ही DoT से सभी टेलिकॉम कंपनियों को वॉयस कॉल वाई-फाई से कनेक्ट करते समय एक दूसरे के डाटा नेटवर्क इस्तेमाल करने की भी इजाजत दे दी है। साथ ही अगर थर्ड पार्टी लाइसेंस खरीदती है तो उन्हें भी इस सर्विस की इजाजत मिल जाएगी। वहीं, DoT ने टेलिकॉम कंपनियों से यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि कंपनियां इस सर्विस से संबंधित सभी नियमों का पालन कर रही हैं।

कॉल्स की सफलता दर में होगी बढ़ोतरी:

ट्राई के मुताबिक, यह सर्विस वॉयस कॉल का एक प्रभावी विकल्प साबित होगा। इससे वॉयस कॉलिंग की सफलता दर में बढ़ोतरी होने की पूरी उम्मीद है। खासतौर से यह सर्विस खराब या लो नेटवर्क क्षेत्रों में काफी कारगर साबित होगी जहां इंटरनेट सर्विस तो उपलब्ध रहती है लेकिन मोबाइल नेटवर्क नहीं आते हैं। वहीं, टेलिकॉम कंपनियों के विरोध पर ट्राई ने असहमति जताई है। ट्राई का कहना है कि इससे यूजर्स को कॉल करने के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे।

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UN टीम को हाफिज सईद-आतंकी संगठनों की सीधी जांच नहीं करने देगा PAK

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और उसके आतंकी संगठनों की जांच के लिए पाकिस्तान आ रही UN की जांच टीम की राह में पहले ही रोढ़े अटका दिए गए हैं। पाकिस्तान ने कहा है कि UN की स्पेशल जांच टीम को सईद और उसके संगठनों की सीधी जांच नहीं करने दी जाएगी। ये टीम 25 और 26 जनवरी को पाकिस्तान में रहेगी। इस टीम की पाकिस्तान विजिट इसलिए भी खास हो जाती है कि क्योंकि पिछले ही हफ्ते पाकिस्तान के पीएम शाहिद खकान अब्बासी ने कहा था कि पाकिस्तान में हाफिज सईद के खिलाफ कोई केस नहीं है, लिहाजा उसके खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की जा सकती।

सईद तक सीधी पहुंच मुमकिन नहीं

– पाकिस्तान के अखबार ‘द नेशन’ ने यूएन टीम की जांच के बारे में एक रिपोर्ट पब्लिश की। इसमें पाकिस्तान सरकार के सूत्रों के हवाले से कई अहम जानकारियां दी गई हैं।
– इन सूत्रों के मुताबिक, यूएन सिक्युरिटी काउंसिल की sanctions monitoring team टीम को हाफिज सईद या जमात-उद-दावा के अलावा इससे जुड़े बाकी संगठनों तक सीधी पहुंच (direct access) नहीं दी जाएगी।
– एक और रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार ने तय किया है कि हाफिज सईद के मामले में वो दबाव में नहीं आएगी।

अभी मंजूरी नहीं मांगी गई

– रिपोर्ट में पाकिस्तान सरकार के एक बड़े अफसर के हवाले से कहा गया- उन्होंने (UNSC टीम) ने फिलहाल, हमसे हाफिज सईद तक सीधी पहुंच की मंजूरी नहीं मांगी है। लेकिन, वो इसकी इजाजत मांगते भी हैं तो उन्हें ये नहीं दी जाएगी। हम उनसे बातचीत कर रहे हैं।
– एक और अफसर ने कहा- ये टीम पाकिस्तान के अफसरों से मिलेगी और बैन किए गए संगठनों की लिस्ट मांगेगी। हमने यूएन के ऑर्डर फॉलो किए हैं। इसलिए, इस मामले में परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।

किन संगठनों पर बैन

– यूएन ने पाकिस्तान में कई संगठनों को बैन किया है। इनमें जमात-उद-दावा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, लश्कर-ए-झांगवी, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन और लश्कर-ए-तैयबा शामिल हैं। इनके अलावा इन संगठनों के सरगनाओं जिनमें हाफिज सईद भी शामिल को भी बैन किया गया है।

पाकिस्तान सरकार के दावों पर भरोसा नहीं

– पाकिस्तान सरकार ने दावा किया था कि उसने हाफिज सईद के जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन के चंदा लगाने और पब्लिक प्रोग्राम करने पर रोक लगा दी है। हालांकि, उसके इन दावों की हकीकत पर सवाल उठते रहे।
– पाकिस्तान के ही कुछ सांसदों ने हाफिज सईद को देश के लिए खतरा बताया। मीडिया रिपोर्ट्स में भी दावा किया गया कि सईद पर किसी तरह की कोई बंदिशें नहीं हैं और वो अपने संगठनों के नाम बदलकर काम कर रहा है।
– खतरा तब और बढ़ता नजर आया है जब पता लगा कि पाकिस्तान के स्टॉक मार्केट में फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को रजिस्टर कराने की कोशिश खुद पाकिस्तान सरकार कर रही है। इसके बाद भारत और अमेरिका ने पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा दिया।

 अमेरिका की पाकिस्तान को दो टूक

– शुक्रवार को अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने पाकिस्तान से दो टूक कहा कि हाफिज सईद एक आतंकवादी है और उसके खिलाफ पूरी तरह कार्रवाई होनी चाहिए।
– अमेरिका का यह बयान पाकिस्तान के पीएम द्वारा सईद को क्लीन चिट देने के बाद आया। अब्बासी ने कहा था कि सईद के खिलाफ कानूनी तौर पर कोई केस दर्ज नहीं है और इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती।
– सईद को 9 महीने हाउस अरेस्ट में रखने के बाद पिछले साल नवंबर में ही रिहा किया गया था। जमात-उद-दावा को 2014 में आतंकी संगठन घोषित किया गया था।