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अंग्रेज भारत से कितना धन लूट के ले गए थे, जानें अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक की अनोखी खोज

इस बात को हर भारतीय कभी न कभी सोचता होगा कि अंग्रेजी शासन में जो लूट हुई उससे भारतीय अर्थव्यवस्था को कितनी हानि हुई। सोने की चिड़िया हिन्दुस्तान क्यों अभी भी विकासशील देश ही है।

ब्रिटिश शासन के औपनिवेश के समय की अर्थव्यवस्था पर शोध कर रहीं अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक के लिखे थीसिस से बताया है आखिर ब्रिटिश शासकों ने भारत से कितना धन लूटा है। ब्रिटिश शासकों की ओर से लूटे गए खजाने की वजह से अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ा है200 साल तक देश में अत्याचार करने वाले अंग्रेज वापस लौट तो गए, लेकिन इतने समय में उन्होंने हमारा काफी धन लूट लिया। जानी-मानी अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक ने अपने निबंध में लिखा कि अंग्रेज़ों ने भारत का करीब 45 ट्रिलियन डॉलर (3,19,29,75,00,00,00,000.50 रुपये) लूटा
इस निबंध को कोलंबिया यूनिवर्सिटी प्रेस ने प्रकाशित किया है। आगे उत्सा ने बताया कि अंग्रेज़ों ने भारत को लूटकर बर्बाद कर दिया और अपनी शान-ओ-शौकत के लिए कभी भी भारत का नाम तक नहीं लिया.

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भारत बंद की सफलता का श्रेय लेने उतरी कांग्रेस, बोले “सबसे पहले उठाई आवाज”

दलित उत्पीड़न कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ लड़ाई का श्रेय कांग्रेस खुद लेने की कोशिश में जुट गई है। कांग्रेस ने भारत बंद को पूरी तरह सफल बताते हुए दावा किया कि सबसे पहले उसी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था।

राजनीतिक मोर्चाबंदी करते हुए कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लेकर बंद के दौरान हुई हिंसा के लिए पूरी तरह से केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभालने आए राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद के पास अधिकार है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद कर दे। 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट पर जो फैसला दिया था उसे संसद में रद किया जा सकता था। सरकार कदम बढ़ाती को सभी दल साथ होते, लेकिन चुप्पी छाई रही। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तत्काल बाद सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कर देती तो सोमवार को बंद के दौरान हिंसा नहीं होती।

अब तक कांग्रेस पुनर्विचार याचिका की बात कहती रही थी। अब सरकार ने पुनर्विचार याचिका पेश कर दी है तो कांग्रेस ने संसद के जरिये इसे रद करने का दबाव बढ़ाया है। मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुसार, सिर्फ पुनर्विचार याचिका से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है क्योंकि इसकी सुनवाई समान बेंच में होती है। इसके लिए सरकार को क्यूरेटिव याचिका दाखिल करनी चाहिए या फिर संसद बजट सत्र के बचे हुए चार दिनों में विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरस्त करना चाहिए।

इसके साथ ही कांग्रेस ने देश में दलित उत्पीड़न कानून लागू करने और उसे और मजबूत करने का श्रेय भी लेने की कोशिश की। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि दलित उत्पीड़न कानून राजीव गांधी के कार्यकाल में लाया गया था और 2014 में संप्रग सरकार ने संशोधन का अध्यादेश लाकर इसे और कड़ा कर दिया था। मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस कानून के दुरुपयोग के सवाल को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि दुरुपयोग तो किसी भी कानून हो सकता है, लेकिन इसका उपाय उस कानून को खत्म करना नहीं होता। उनके अनुसार दलित उत्पीड़न कानून के दुरुपयोग के मामले 2-3 फीसद से अधिक नहीं हैं।