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रूस के साथ दो लाख करोड़ के लड़ाकू विमान समझौते से अलग हो सकता है भारत। जानें क्या है कारण

मालूम हो कि सैन्य संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के मकसद से भारत और रूस के बीच 2007 में लड़ाकू विमानों को संयुक्त रूप से तैयार करने का अंतर-सरकारी करार हुआ था।

लेकिन लागत साझा करने, इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक और तैयार किए जाने वाले विमानों की संख्या के मसले पर गंभीर मतभेदों के कारण पिछले 11 साल से यह परियोजना अटकी हुई है। परियोजना पर बातचीत में शामिल एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, ‘हमने परियोजना की लागत समेत तमाम मसलों पर अपनी राय रख दी है। लेकिन रूसी पक्ष की ओर से अब तक कोई प्रतिबद्धता व्यक्त नहीं की गई है।’

बता दें कि भारत ने लड़ाकू विमान के प्रारंभिक डिजायन के लिए दिसंबर, 2010 में 29.5 करोड़ डॉलर देने पर सहमति व्यक्त की थी। बाद में दोनों पक्षों ने अंतिम डिजाइन और पहले चरण में विमान के उत्पादन के लिए छह-छह अरब डॉलर का योगदान देने पर सहमति जताई, लेकिन इस पर कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका।

कहां फंसा है पेंच

भारत चाहता है कि विमान में इस्तेमाल होने वाली तकनीक पर दोनों देशों का समान अधिकार हो, लेकिन रूस विमान में इस्तेमाल की जाने वाली सभी अहम तकनीकों को भारत के साथ साझा करने के लिए तैयार नहीं है। वार्ता के दौरान भारत ने जोर देकर कहा कि उसे सभी जरूरी कोड और अहम तकनीक उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वह अपनी जरूरतों के हिसाब से विमान को अपग्रेड कर सके। फरवरी, 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर की सहमति से परियोजना पर वार्ता फिर शुरू हुई थी। दोनों देश गतिरोध वाले मसलों का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत परियोजना की बेहद ऊंची लागत की वजह से इसके फलदायी होने के प्रति आशान्वित नहीं है।

एचएएल कर रही पैरवी, वायुसेना की रुचि नहीं

दिलचस्प बात यह है कि सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) इस परियोजना की जोरदार पैरवी कर रही है। उसका मानना है कि इस परियोजना के जरिये भारत को अपने एरोस्पेस सेक्टर को बढ़ावा देने का सुनहरा मौका मिलेगा क्योंकि किसी अन्य देश ने भारत को आज तक ऐसी अहम तकनीक का प्रस्ताव नहीं दिया है। वहीं, दूसरी ओर ऊंची लागत की वजह से भारतीय वायुसेना ने इस परियोजना में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

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सीरिया में अपनी फौज बनाए रखने के पीछे अमेरिका के हैं तीन खास मकसद

सीरिया पर हुए ताजा हमले ने वहां पर शांति स्‍थापना की उम्‍मीद पर पानी फेर दिया है। अब अमेरिका ने सीरिया में अपनी फौज की स्थिति को यथावत रखने का फैसला करते हुए करीब दो सप्‍ताह पहले लिए फैसले को पूरी तरह से पलट दिया है।

यूएन में अमेरिकी राजदूत निक्‍की हेली के मुताबिक सीरिया में अमेरिकी फौज की मौजूदगी पर फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैन्‍युल मैक्रान ने भी अपनी सहमति जताई है। इसके अलावा अमेरिका सीरिया समेत रूस के खिलाफ नए प्रतिबंध भी लगाने वाला है, जिसकी घोषणा जल्‍द ही कर दी जाएगी। यह प्रतिबंध रूस के सीरिया को लगातार समर्थन देने के खिलाफ लगाए जाने वाले हैं।

पहले फौज को वापस बुलाने का हुआ था ऐलान

गौरतलब है कि 4 अप्रैल को अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि वह अमेरिकी फौज को सीरिया से वापस बुला लेंगे। हालांकि इसी दौरान उन्‍होंने यह भी कहा था कि सीरिया में जब तक उनका मकसद पूरा नहीं हो जाता और वहां मौजूद आएस आतंकियों को खत्‍म नहीं कर दिया जाता है तब तक करीब दो हजार जवान वहां पर तैनात रहेंगे। ताजा फैसले की जानकारी देते हुए यूएन में अमेरिकी राजदूत निक्‍की हेली ने एक बार फिर से यह साफ कर दिया है कि अमेरिका का मकसद पूरा होने तक अब अमेरिकी फौज सीरिया में मौजूद रहेंगी। इसमें कोई कटौती नहीं की जाएगी।

रूस को अलग-थलग करने में यूएस कामयाब

सीरिया पर ताजा हमले के बाद बदले माहौल में रूस को अलग-थलग करने की भी पूरी कोशिश अमेरिका ने की है, जिसमें वह कामयाब भी रहा है। यूएन में सीरियाई हमले के खिलाफ रूस के प्रस्‍ताव का गिरना अमेरिका के लिए एक बड़ी कामयाबी है। वहीं संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में यह भी साफ कर दिया गया है कि यदि सीरियाई राष्‍ट्रपति बशर अल असद नहीं मानें तो इस तरह के हमले आगे भी किए जाएंगे। रूस के लिए यह दोनों ही बातें किसी बड़ी हार की तरह हैं। मौजूदा स्थिति में अमेरिका और रूस के बीच शीतयुद्ध का दूसरा दौर शुरू हो चुका है।

अमेरिका के तीन मकसद

अमेरिका की तरफ से यूएन में उसके तीन मकसद भी बेहद साफ जाहिर कर दिए गए हैं। इसमें पहला मकसद सीरिया में केमिकल वैपंस का आगे इस्‍तेमाल न होना, दूसरा आतंकी संगठन आईएस का खात्‍मा और तीसरा ईरान पर नजर रखना है। हेली ने यह भी कहा है कि इन मकसद के पूरा होने के बाद सीरिया से अमेरिकी फौज वापस लौट जाएंगी। इस बातचीत के दौरान हेली का ये भी कहना था कि सीरिया अमे‍रिका के साथ वन-टू-वन टॉक के लिए पहले ही इंकार कर चुका है। उनका कहना था कि सीरिया बातचीत करना ही नहीं चाहता है। यह बातें उन्‍होंने एक चैनल से हुई वार्ता के दौरान कही हैं।

केमिकल अटैक के बाद बदले हालात

आपको बता दें कि सीरिया में हुए कथित केमिकल अटैक और इसके बाद हुए संयुक्‍त हमले से पूरी दुनिया में तनाव पैदा हो गया है। इसके चलते रूस के अमेरिका और उसके समर्थित देशों से संबंध जो पहले से ही काफी नाजुक हालात में थे अब और ज्‍यादा खराब हो गए हैं। खासतौर पर ब्रिटेन और फ्रांस के साथ। ताजा हमले में अमेरिका का साथ फ्रांस और ब्रिटेन ने ही दिया है। तीनों ने मिलकर सीरिया के दमिश्‍क और होम्‍स में करीब 103 मिसाइलें दागी थीं। इस हमले में सीरिया के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इस बीच सीरिया की तरफ से यह भी कहा जा रहा है कि यदि उसके पास केमिकल वैपंस होते तो इस हमले में कुछ लीकेज जरूर होती लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसका अर्थ यही है कि सीरिया के पास केमिकल वैपंस नहीं हैं, जिनका जिक्र लगातार किया जा रहा है।

केमिकल वैपंस का इस्‍तेमाल

गौरतलब है कि वर्ष 2015 में कुर्द लड़ाकों ने दावा किया था कि इस्लामिक स्टेट ने उनके खिलाफ उत्तरी इराक में रासायनिक हथियार का इस्तेमाल किया था। वर्ष 1997 में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए हुए समझौते में यह तय हुआ था कि लड़ाई में क्लोरीन गैस का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। अमेरिका ने इराक पर केमिकल वेपंस रखने का आरोप लगाते हुए साल 2003 में इराक पर हमला कर दिया था। 30 दिसंबर 2006 को इराकी राष्‍ट्रपति सद्दाम हुसैन को फांसी की सजा दे दी गई।

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सीरिया में रासायनिक हमला: रूस के ख़िलाफ़ अमरीका हुआ आक्रामक

अमरीका ने कहा है कि सीरिया के डूमा में हुए कथित रासायनिक हमले के कसूरवारों को कड़ा जवाब दिया जाएगा.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि इस घटना का कड़ा जवाब दिया जाएगा और अमरीका के पास कई सारे सैन्य विकल्प हैं. उन्होंने कहा कि इन पर ‘आज रात’ या ‘शीघ्र’ फ़ैसला लिया जा सकता है.

ट्रंप ने कहा कि शनिवार को डूमा में जो घटना हुई उसके लिए कौन ज़िम्मेदार है, इस पर अमरीका ‘स्पष्टता’ चाह रहा था.

अमरीकी राष्ट्रपति ने इस घटना को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां से सोमवार शाम बात की और दोनों ही नेताओं ने एक ‘मज़बूत प्रतिक्रिया’ को लेकर इच्छा व्यक्त की है.

निक्की हेली

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Image captionनिक्की हेली ने कहा है कि रूस के हाथ ‘सीरियाई बच्चों के ख़ून’ से रंगे हुए हैं

संयुक्त राष्ट्र में अमरीका का आक्रामक रुख़

वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका और रूस ने एक दूसरे पर जमकर हमले किए.

रूस के प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़िया ने कहा कि सीरिया के डूमा में हुई घटना ‘गढ़ी गई है’ और इसके जवाब में अमरीकी सेना की कार्रवाई के ‘भयानक प्रभाव’ हो सकते हैं.

इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र में अमरीका की दूत निक्की हेली ने कहा कि सीरिया को सैन्य मदद देने वाले रूस के हाथ ‘सीरिया के बच्चों के ख़ून’ से रंगे हुए हैं.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने कहा था कि दुनिया की बड़ी शक्तियां रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की अनदेखी कर रही हैं.

वहीं, निक्की हेली ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद को “शैतान” करार देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र परिषद कार्रवाई करे न करे, ‘अमरीका किसी न किसी तरह से प्रतिक्रिया देगा.’

उन्होंने कहा, “बैठकें चल रही हैं और जिस समय हम बात कर रहे हैं, महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए जा रहे हैं.”

रूस का जवाब

संयुक्त राष्ट्र में रूस के प्रतिनिधि ने कहा कि डूमा में विद्रोहियों ने इस घटना को ख़ुद रचा. उन्होंने इसे अमरीका की शह पर उठाया गया क़दम बताया ताकि रूस को नुक़सान पहुंचाया जाए.

संयुक्त राष्ट्र में रूस और अमरीका के प्रतिनिधिइमेज कॉपीरइटAFP
Image captionसंयुक्त राष्ट्र में रूस और अमरीका के प्रतिनिधि

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं को जल्द से जल्द सीरिया जाकर जांच करने को कहा. उन्होंने कहा कि इस दौरान कथित हमले वाली जगह तक उन्हें रूस के सैनिक ले जाएंगे.

रूस ने कहा है कि उसे क्लोरीन या अन्य किसी रसायन के इस्तेमाल के संकेत नहीं मिले हैं.

अमरीका ने सैन्य हमला किए जाने की संभावनाओं को ख़ारिज नहीं किया है.

इससे पहले उसने पिछले साल अप्रैल में सीरिया के एयरबेस पर क्रूज़ मिसाइल से हमला किया था.

सीरिया में विद्रोहियों के नियंत्रण वाले शेखोन में सरीन गैस के इस्तेमाल से 80 लोगों की मौत के बाद यह क़दम उठाया गया था. जांचकर्ताओं ने इस हमले के लिए सीरिया को ज़िम्मेदार ठहराया था.

गूटा

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Image captionपूर्वी गूटा का डूमा विद्रोहियों के कब्ज़े वाला इकलौता शहर बचा है

क्या हुआ था डूमा में?

सीरिया में राहत बचावकर्मियों ने शनिवार को दावा किया था कि डूमा शहर में ज़हरीली गैस से हमले में कम से कम 70 लोगों की मौत हुई है.

हालांकि, अमरीकी विदेश विभाग का कहना था कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है.

सीरिया-अमरीकी मेडिकल सोसाइटी ने बताया था कि पूर्वी गूटा क्षेत्र के डूमा में 500 से अधिक लोगों को स्वास्थ्य केंद्रों पर लाया गया था.

सोसाइटी का कहना था कि इन लोगों को सांस लेने में परेशानी के साथ-साथ त्वचा का रंग नीला पड़ने और मुंह से झाग निकलने जैसी दिक्कतें पेश आ रही थीं.

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चीन की हर चाल का जवाब देने के लिए भारत भी कर चुका है पूरी तैयारी

चीन एक बार फिर से भारत से लगती सीमा पर तनाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसको देखते हुए भारत ने सीमाओं पर अपने जवानों की संख्‍या बढ़ा दी है। दरअसल यह कवायद चीन की उस नापाक चाल के बाद की जा रही है जिसके तहत वह भारत की सीमा से सटे तिब्बती इलाके में तेजी से ढांचों का निर्माण करने में लगा है। इसके अलावा एक दिन पहले ही चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के किबिथू में लोहित घाटी के दूसरी और चीन की तरफ से टावर खड़ा करने और सैन्‍य गतिविधियों के लिए पक्‍का निर्माण करने की बात सामने आई है। लिहाजा यह जरूरी हो गया है कि भारत भी इन इलाकों में सड़कों का नेटवर्क बढ़ाए, जिससे सेना की शीघ्रता के साथ आवाजाही हो सके।

सीमा के नजदीक एक्‍सप्रेस वे

चीन की नापाक चाल को सफल होने से रोकने के लिए भारत भी अपनी तैयारी कर रहा है, लेकिन भारत की तैयारियों से पहले हम आपको बता दें कि चीन भारत से लगती सीमाओं पर क्‍या कुछ अब तक कर चुका है। सितंबर 2017 में तिब्‍बत से नेपाल को जोड़ने वाला हाईवे खोलने के बाद चीन ने अरुणाचल प्रदेश के करीब एक और एक्‍सप्रेसवे खोला जो तिब्‍बत की राजधानी ल्‍हासा और निंगची को जोड़ता है। यह एक्‍सप्रेसवे 5.8 अरब डॉलर की लागत से तैयार हुआ है और इसकी लंबाई करीब 409 किमी है। निंगची अरुणाचल प्रदेश की सीमा के नजदीक है। इस एक्‍सप्रेस वे के जरिए ल्हासा और निंगची के बीच की दूरी महज पांच घंटों में पूरी की जा सकती है। पहले इसमें करीब आठ घंटे का समय लगता था। यह एक्‍सप्रेस वे इस तरह से बनाया गया है कि समय आने पर सैन्‍य साजोसामान तेजी से सीमा तक ले जाया जा सके।

सीमा के नजदीक एयरपोर्ट

इसके अलावा पिछले वर्ष ही चीन ने अरुणाचल प्रदेश से लगती सीमा के नजदीक तिब्‍बत का दूसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट भी खोला है। भारतीय सीमा के नजदीक स्थित यह एयरपोर्ट टर्मिनल 10300 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। 2020 तक यह सालाना 750000 यात्रियों और 3 हजार टन माल संभालने लायक हो जाएगा। नया टर्मिनल तिब्बत में खुला छठा टर्मिनल है जो न्यिंगची मेनलिंग एयरपोर्ट पर स्थित है। चीन के इन कदमों ने भारत की चिंता को बढ़ा दिया है।

क्यूटीएस-11 सिस्टम से लैस चीन की वेस्टर्न थियेटर कमान

इन सभी के अलावा चीन ने इसी वर्ष फरवरी में भारत से लगती सीमा पर वेस्टर्न थियेटर कमान को क्यूटीएस-11 सिस्टम से लैस किया है। यह सब अमेरिकी फौज की तैयारियों की तर्ज पर किया गया है। आपको बता दें कि वेस्टर्न थियेटर कमान भारत से लगती 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की जिम्मेदारी संभालती है। क्यूटीएस-11 दरअसल, अमेरिकी सैनिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली की तरह है। इसके अलावा यह सभी तरह के फायरआर्म्‍स पर काबू पाने में सक्षम है। इसके अलावा यह एक पूरी तरह से डिजिटलीकृत समेकित व्यक्तिगत सैनिक लड़ाकू प्रणाली भी है। राइफल और 20 मिलीमीटर ग्रेनेड लांचर वाली यह प्रणाली लक्ष्य के अंदर के सैन्यकर्मियों को नष्ट करने में सक्षम है।

चीन ने सीमा पर तैनात किए हैं फाइटर जेट

भारतीय सीमा से सटे इलाकों में अपने सेना के जमावड़े के साथ-साथ चीन ने इसी वर्ष तिब्‍बत से लगती भारतीय सीमा के निकट स्थित अपने वायुसेना के ठिकानों पर फाइटर जेट्स की संख्या 47 से बढ़ाकर 51 कर दी है। ल्हासा-गोंगका में चीन ने आठ फाइटर जेट्स तैनात किए हैं। इसके अलावा एयर मिसाइल सिस्टम्स समेत 22 एमआई-17 हेलिकॉप्टर्स सहित कई अन्य हथियार भी तैनात हैं। होपिंग-रिकाजे में चीनी वायु सेना के 18 एयरक्राफ्ट्स तैनात हैं। इसके अलावा 11 एमआई-17 अनमैन्ड एरियल वीकल्स भी शामिल हैं। यही नहीं चीन ने तिब्बत में भारत से लगती सीमा में जमीन से हवा पर मार करने वाली मिसाइलों को भी तैनात कर दिया है।

चीन को देखते हुए भारत की तैयारी

चीन की इस रणनीति ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। लिहाजा भारत ने चीन सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ा दी है। बीजिंग की हर चाल पर पैनी नजर रखने के लिए सामरिक रूप से महत्वूपर्ण अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्रों दिबांग, दाउ देलाई और लोहित घाटी में सैनिकों की संख्या बढ़ाने के साथ ही गश्त भी तेज कर दी गई है। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, भारत ने तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में चीन की हर चाल पर पैनी नजर रखने के लिए अपने निगरानी तंत्र को भी बेहद चाकचौबंद कर लिया है। इन क्षेत्रों की टोह लेने के लिए नियमित रूप से हेलीकॉप्टरों से भी गश्त की जा रही है। भारत दिबांग, दाउ देलाई और लोहित घाटी जैसे दुर्गम इलाकों में अपना ध्यान केंद्रित किए हुए है। इन इलाकों में 17 हजार फीट ऊंची बर्फीली पहाड़ियां और नदियां हैं। इन क्षेत्रों से लगती सीमाओं पर चीन के बढ़ते सैन्य दबाव की काट के तौर पर भारत ने यह रणनीति अपनाई है।

अहम सामरिक इलाकों पर भी ध्यान

चीन के तिब्बती क्षेत्र से लगते अरुणाचल के गांव किबिथू में तैनात सेना के एक अधिकारी का कहना है, ‘डोकलाम के बाद हमने सीमा पर अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। हम किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। भारत, चीन और म्यांमार के ट्राई जंक्शन समेत अहम सामरिक इलाकों में सेना की तैनाती बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि सेना अब अपनी लंबी दूरी की गश्त (लांग रेंज पेट्रोल्स) को बढ़ा रही है। इसमें छोटी-छोटी टुकड़ियां 15 से 30 दिनों के लिए गश्त पर भेजी जाती है।

टी 72 से लेकर सुखोई तक तैनात

भारत ने पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में टी-72 टैंकों की तैनाती की है, जबकि अरुणाचल में ब्रह्मोस और होवित्जर मिसाइलों की तैनाती करके चीन के सामने शक्ति प्रदर्शन किया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर में सुखोई-30 एमकेआई स्क्वेड्रन्स को भी उतारा गया है। अकेले अरुणाचल प्रदेश की रक्षा के लिए चार इंफेंटरी माउंटेन डिविजन लगाई गई हैं जिसमें 3 कॉर्प्स (दीमापुर) और 4 कॉर्प्स (तेजपुर) की हैं और दो कॉर्प्स को रिजर्व में रखा गया है। हर डिवीजन में करीब 1200 जवान तैनात हैं। तवांग जिसपर कि चीन दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता रहा है वहां भी सैनिकों की संख्या ज्यादा है जो किसी भी तरह की नापाक हरकत को विफल कर सकती हैं।

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सांसद की बेटी ने विदेश में नौकरी को ठुकरा चुनी देश सेवा, आर्मी ज्‍वाइन की

पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद डॉ. निशंक की बेटी डॉ. श्रेयशी पोखरियाल ने सेना में बतौर अफसर आर्मी मेडिकल कोर ज्वाइंन किया। वे रुड़की के मिलिट्री हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं देंगी। शनिवार को कमांडेंट और परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में डॉ. श्रेयशी ने विधिवत रूप से सेना ज्वाइंन की।

बेटी के सेना ज्वाइन करने पर डॉ. निशंक ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि अभी तक हमारे परिवार में सेना में कोई नहीं था। अब बेटी ने सेना में जाकर मुझे गर्व महसूस करवाया है। उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक क्षेत्र से हैं और शुरुआत से ही देशभक्ति के गीत और कविताएं लिखते रहे हैं। ऐसे में हमेशा से उनकी ख्वाहिश थी कि उनके परिवार से भी कोई सेना में जाए।

आज उनकी इस इच्छा को बेटी ने पूरा कर दिखाया है। उन्हें इस बात को लेकर अपनी बेटी पर और गर्व है कि उसे मॉरीशस में एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल यूनिवर्सिटी में उप निदेशक का ऑफर मिला था, लेकिन बेटी ने उसे अस्वीकार कर सेना को चुना। डॉ. निशंक बताते हैं कि उनकी बेटी श्रेयशी बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन करीब दो साल पहले उसने सेना में जाने की ठानी।

वे बताते हैं कि लगभग दो साल पहले वे परिवार के साथ केदारनाथ की यात्रा पर गए थे। उसी दौरान श्रेयशी ने काफी कम समय में पैदल यात्रा पूरी कर ली। ऐसे में उन्होंने श्रेयशी को कहा कि वे बेहद कर्मठ है और सेना को ऐसे ही कर्मठ और जोशीले लोगों की जरुरत है। डॉ. निशंक कहते हैं कि मुझे लगता है कि श्रेयशी के मन में यह बात घर कर गई। उसके बाद ही वह कमीशन में बैठी और सफल हो गई। मुझे बेहद खुशी हो रही है कि अब श्रेयशी सेना में अपनी सेवाएं देकर देश सेवा करेगी।
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जम्मू कश्मीर: सुरक्षाबलों की बड़ी कार्यवाही, मुठभेड़ में 11 आतंकी ढेर, 3 जवान शहीद

जम्मू कश्मीर के शोपियां में सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही की है। सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 11 आतंकवादियों को मार गिराया है। इन कार्यवाही में सेना के तीन जवान शहीद भी हो गए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक शोपियां जिले के द्रागाद इलाके में कुछ आतंकियों के छिपे होने की सूचना सुरक्षाबलों को मिली थी। इस सूचना पर कार्यवाही करते हुए सुरक्षाबलों ने इस इलाके को चारों तरफ से घेर लिया। घेराबंदी और तलाशी अभियान से घबराए आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। जिसके बाद सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभालते हुए 8 आतंकियों को ढेर कर दिया। जानकारी के मुताबिक इस मुठभेड़ में सेना का एक जवान भी जख्मी हो गया है। इधर खबर यह भी है कि शोपियां के कचदूरा इलाके में भी पुलिस और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई है। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैध ने बतालाया है कि कचदूरा इलाके के एक घर में छिपे 4-5 आतंकियों को सुरक्षाबलों ने घेर लिया है। लेकिन ऐसी आशंका है कि इस घर में कुछ आम नागरिक भी फंस गए हैं जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रयास जारी है।

पुलिस का कहना है कि दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में भी आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हुई है।अनंतनाग जिले में सुरक्षा बलों के साथ रविवार (01-04-2018) को अहले सुबह आतंकवादियों से मुठभेड़ हुई। इस एनकाउंटर में एक आतंकवादी मारा गया। अनंतनाग के पेठ दियालगाम में आतंकवादियों की मौजूदगी की खबर मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने इस इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया, जबकि यह भी खबर मिली है कि इस मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी को जिंदा पकड़ा गया है। दोनों आतंकवादियों की पहचान हिज्बुल मुजाहिद्दीन के सदस्यों के तौर पर हुई है। इस मुठभेड़ के बाद पुलिस ने मौके से कुछ हथियार भी बरामद किये हैं।

आपको बता दें कि इससे पहले शनिवार (31-03-2018) को आतंकियों ने जम्मू कश्मीर के पुलवामा और अनंतनाग में पुलिस पर दो हमले किए थे। इस हमले में एसपीओ (स्पेशल पुलिस ऑफिसर) शहीद हो गए थे तथा एक एसपीओ घायल हो गये थे। इससे पूर्व सुरक्षाबलों ने श्रीनगर और बारामुला में दो स्थानीय आतंकियों समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पिछले तीन दिनों में एसपीओ पर तीन आतंकी हमले हो चुके हैं। बीते गुरुवार की रात को भी बिजबिहाड़ा में आतंकियों ने मुश्ताक अहमद शेख नामक एक एसपीओ की उनके घर में घुसकर हत्या कर दी थी। इस हमले में एसपीओ की पत्नी भी गंभीर रूप से जख्मी हो गई थी।

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जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

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भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बल भारत की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं. देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा में भारतीय सेना के साथ सीआरपीएफ, बीएसफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी का अहम योगदान होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं ये सुरक्षा बल, भारतीय सेना से अलग होते हैं और इन्हें मिलने वाली सुविधाएं भी काफी अलग होती है. आइए जानते हैं पैरा मिलिट्री फोर्सेज और सेना में क्या अंतर होता है…
जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

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बता दें कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स और भारतीय सेना में काफी अंतर होता है. कई सुरक्षा बल गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं, जिसमें सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, आसाम राइफल्स और एसएसबी शामिल है. वहीं सेना में भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना आते हैं.

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग
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अर्धसैनिक बल देश में रहकर या सीमा पर देश की सुरक्षा करते हैं और अर्धसैनिक बल पूरे देश में आतंकवाद औऱ नक्सलवाद विरोधी अभियानों में भी लगे हुए हैं. वहीं वीआईपी सिक्योरिटी में भी मुख्यतौर पर अर्धसैनिक बलों के जवान ही होते हैं. सुविधाओं के नाम पर जो सहूलियतें भारतीय सेना को मिलती हैं, वैसी सुविधाएं अर्धसैनिक बलों को नहीं मिलती है.

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग
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बीएसएफ पीस-टाइम के दौरान तैनात की जाती है, जबकि सेना युद्ध के दौरान मोर्चा संभालती है. बीएसएफ के जवानों को हमेशा सीमा की सुरक्षा के लिए तैयार रहना पड़ता है.

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बीएसएफ के जवानों को सीमा पर तैनात किया जाता है, जबकि भारतीय सेना के जवान सीमा से दूर रहते हैं और युद्ध के लिए खुद को तैयार करते हैं. साथ ही यह क्रॉस बोर्डर ऑपरेशन भी करती है.

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भारतीय सेना के जवानों को बीएसएफ के जवानों से ज्यादा सुविधा मिलती है, इसमें कैंटीन, आर्मी स्कूल आदि की सेवाएं शामिल है.

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भारतीय सेना रक्षा मंत्रालय के अधीन आती है, जबकि बीएसएफ गृह मंत्रालय के अधीन होती है.

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भारतीय सेना में रैंक लेफ्टिनेंट, मेजर, कर्नल, ब्रिगेडियर, मेजर जर्नल आदि होती है, लेकिन बीएसएफ में पोस्ट कांस्टेबल, हैड कांस्टेबल, एएसआई, डीएआई, आईजी आदि होती है.

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भारतीय सेना में अधिकारी एनडीए और सीडीएस के माध्यम से चुने जाते हैं और इस परीक्षा का चयन यूपीएससी की ओर से किया जाता है. वहीं बीएसएफ में एसआई तक के उम्मीदवार एसएससी की ओर से चुने जाते हैं. वहीं बीएसएफ के डीजी आईपीएस बनते हैं.

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सुरक्षा बलों को मिली बड़ी कामयाबी, छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 10 नक्सली ढेर

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। बीजापुर के नक्सल प्रभावित पुजारी कांकेर इलाके में तेलंगाना पुलिस और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में 10 नक्सलियों को मार गिराया गया। स्पेशल डीजी डीएम अवस्थी (नक्सल ऑपरेशंस) ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान में मिली इस सफलता की पुष्टि की है। इस ऑपरेशन में एक पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गया।

सुरक्षाबलों की यह कामयाबी इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि हाल ही में छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में नक्सलियों ने घात लगाकर सुरक्षाबलों को निशाना बनाया था। नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन पुलिस जवान घायल हो गए थे। संयुक्त दल जब मुंगारी और दुलारगुफा के मध्य पहाड़ी में था, तभी घात लगाए नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी थी।

25 फरवरी को भी नक्सलियों ने विस्फोट कर छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) के दो जवान को जख्मी कर दिया था। घायलों में एक सहायक प्लाटून कमांडर भी शामिल था। वहीं, बीते 18 फरवरी को सुकमा में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो जवान शहीद हो गए थे। शहीद जवानों में एक एसटीएफ और एक डीआरजी से जुड़े थे।

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सऊदी अरब: सभी आला सैन्य अधिकारी बर्ख़ास्त

सऊदी अरब ने देर रात एक शाही फ़रमान जारी कर देश के सभी आला सैन्य अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है. इनमें सेना के प्रमुख भी शामिल हैं.

जिन अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है उनमें वायुसेना और थल सेना के आला अधिकारी शामिल हैं.

इसके अलावा कई उप-मंत्रियों की भी नियुक्तियां की गई हैं. इन नए नामों में तमादुर बिंत यूसुफ़ अल-रमाह नाम की महिला उप-मंत्री भी शामिल हैं.

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमानइमेज कॉपीरइटEPA
Image captionसऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान

सऊदी अरब में किसी महिला का उप-मंत्री बनना आम बात नहीं है.

ये फ़ैसला ऐसे वक्त आया है जब यमन में सऊदी नेतृत्व में गठबंधन सेना की विद्रोहियों के साथ लड़ाई के लगभग तीन साल पूरे होने वाले हैं.

यमन में लड़ाईइमेज कॉपीरइटFAYEZ NURELDINE/AFP/GETTY IMAGES

यमन में सऊदी हस्तक्षेप के कारण हूथी विद्रोही देश के दक्षिण की तरफ सीमित हो गए हैं, लेकिन अभी भी वो राजधानी सना और कई इलाकों में मज़बूती से डटे हुए हैं.

लगभग तीन सालों से लड़ रही सऊदी सेना का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ की शक्ल में पड़ा है. साथ ही हूथी विद्रोहियों ने देश की राजधानी रियाद पर मिसाइल दाग़ने की धमकी दी है.

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परमाणु क्षमता से लैस ‘धनुष’ मिसाइल का सफल परीक्षण, सेना को मिलेगी जबरदस्त ताकत

भारत ने गुरूवार को परमाणु क्षमता से लैस बैलिस्टिक मिसाइल ‘धनुष’ का सफल परीक्षण किया है। ओडिशा तट के पास नौसेना के एक पोत से इस मिसाइल को प्रक्षेपित किया गया। इससे पहले इसी महीने भारत ने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम स्वदेशी ‘अग्नि-1’ बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था, जो अग्नि-1 का 18वां संस्करण था। इस मिसाइल की क्षमता 350 किलोमीटर है।

सूत्रों के अनुसार धनुष मिसाइल बिल्कुल सटीक तरीके से अपना निशाना भेदने में सफल है यह धरती और समुद्र दोनों जगहों से 500 किलो तक की वजनी क्षमता के साथ मार करने में सक्षम है। यह मिसाइल हल्के मुखास्त्रों के साथ 500 किलोमीटर तक मार कर सकती है।

इस मिसाइल की मारक क्षमता की निगरानी डीआरडीओ द्वारा की गई। आपको बता दें कि यह मिसाइल समुद्र और जमीन दोनों जगहों से अपने लक्ष्य को भेद सकती है और इसे पहले ही सशस्त्र बलों में शामिल किया जा चुका है। धनुष मिसाइल का पिछला परीक्षण 9 अप्रैल, 2015 को किया गया था।

अगर भारत की स्वदेशी मिसाइलों की बात करें तो उसके पास नाग मिसाइल है जिसका सफल परीक्षण 1990 में किया गया। इसी तरह भारत ने 1990 में आकाश मिसाइल का परीक्षण किया। जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल की तुलना अमेरिका के पेटियॉट मिसाइल से की जाती है। इसके अलावा भारत के पास ब्रह्मोस और अग्नि मिसाइल भी हैं।