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PAK को ब्रह्मोस की जानकारी देता था DRDO का यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड हासिल कर चुके रुड़की के निशांत अग्रवाल, गिरफ्तार

वह ब्रह्मोस मिसाइल की गुप्त जानकारियां पाकिस्तान को पहुंचा रहा था। आशंका यह भी जताई जा रही है कि आईएसआई और अमेरिकी इंटेलिजेंस के लिए वह काम करता था। हाल ही यंग साइंटिस्ट का अवॉर्ड हासिल कर चुके निशांत अग्रवाल पर कई सनसनीखेज आरोप उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (यूपी एटीएस) की ओर से लगाए गए हैं। आइए, जानते हैं कथित ISI एजेंट की पूरी कहानी..
ऑफिशल सीक्रेट ऐक्ट के तहत हुआ अरेस्ट
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सोमवार को निशांत अग्रवाल नाम के साइंटिस्ट को नागपुर स्थित ब्रह्मोस ऐरोस्पेस सेंटर से गिरफ्तार किया गया है। आरोपी को उत्तर प्रदेश एटीएस और मिलिटरी इंटेलिजेंस के अधिकारियों द्वारा ऑफिशल सीक्रेट ऐक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है।
‘पाक’ के साथ इस मुल्क के लिए काम करने का आरोप
'पाक' के साथ इस मुल्क के लिए काम करने का आरोप
निशांत अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने खुफिया जानकारी को पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका को भी साझा किया है। एक टीम ने उन्हें रविवार रात ट्रैक किया और सोमवार को छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया।
2013 में मिशन ब्रह्मोस से जुड़े थे निशांत
2013 में मिशन ब्रह्मोस से जुड़े थे निशांत
रुड़की के रहने वाले निशांत अग्रवाल मिशन ब्रह्मोस में 31 जुलाई 2013 से काम कर रहे थे। ब्रह्मोस से पहले उन्होंने मुंबई में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ भी काम किया। निशांत ने एनआईटी कुरुक्षेत्र से पढ़ाई पूरी की है।
यंग साइंटिस्ट से बन गया ISI एजेंट?
यंग साइंटिस्ट से बन गया ISI एजेंट?
कथित तौर पर आईएसआई एजेंट निशांत अग्रवाल ब्रह्मोस ऐरोस्पेस में सीनियर सिस्टम इंजिनियर के रूप में काम करते थे। उनके पास सिस्टम इंजिनियरों, टेक्निकल सुपरवाइजर्स और टेक्निशन समेत 40 लोगों के प्रबंधन की जिम्मेदारी थी। निशांत को 2017-2018 का यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड भी मिला था।
साढ़े 11 घंटे तक ISI कनेक्शन खंगालती रही टीम
साढ़े 11 घंटे तक ISI कनेक्शन खंगालती रही टीम
निशांत के मकान मालिक मनोहर काले ने बताया कि यह इंजिनियर वर्धा रोड पर पिछले वर्ष (2017) से किराये के मकान में रह रहा था। काले ने बताया कि पुलिस टीम सुबह 5:30 बजे इमारत में पहुंची और शाम 5 बजे तक वहां रुकी।
जानिए, क्या है ब्रह्मोस ऐरोस्पेस
जानिए, क्या है ब्रह्मोस ऐरोस्पेस
ब्रह्मोस ऐरोस्पेस का गठन भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के ‘मिलिटरी इंडस्ट्रियल कंसोर्टियम’ (एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिया) के बीच संयुक्त उद्यम के रूप में किया गया है। भारत और रूस के बीच 12 फरवरी, 1998 को हुए एक अंतर-सरकारी समझौते के माध्यम से यह कंपनी स्थापित की गई थी।
निशांत के मकान मालिक ने बताई यह बात
निशांत के मकान मालिक ने बताई यह बात
पाकिस्तान के साथ अहम जानकारी साझा करने के आरोपी निशांत अग्रवाल के मकान मालिक ने यह भी कहा, ‘निशांत यहां पत्नी के साथ रह रहा था और उसने यहां आने पर मुझे अपने आधार कार्ड की प्रति और अपने नियोक्ता का एक प्रमाणपत्र दिया था।’

पाकिस्तान में चैटिंग, कंप्यूटर में संदिग्ध चीजें और…

पाकिस्तान में चैटिंग, कंप्यूटर में संदिग्ध चीजें और...
यूपी एटीएस के आईजी असीम अरुण ने बताया, ‘उसके निजी कंप्यूटर में कई संदिग्ध चीजें मिली हैं। हमें उसके खिलाफ सबूत मिला है कि वह फेसबुक पर पाकिस्तान से जुड़ी कुछ आईडी के संपर्क में है।’
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अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले के बिचौलिए के प्रत्यर्पण का आदेश, बढ़ सकती है कांग्रेस की मुश्किलें

फरवरी 2017 में मिशेल को यूएई में गिरफ्तार कर लिया गया था। मिशेल के वकील ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) उनके मुवक्किल पर दबाव बना रही है। हालांकि जांच एजेंसी ने इन आरोपों से साफ इन्कार किया था।

सीबीआइ के प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने जून में कहा था कि जांच एजेंसी ने अपना गुनाह कबूल कराने के लिए मिशेल को प्रभावित नहीं किया। यूएई में भगोड़े के खिलाफ प्रत्यर्पण की कार्यवाही जारी थी। पिछले कुछ समय में भारतीय मीडिया ने मिशेल के कई इंटरव्यू लिए थे। लिहाजा, दोनों जांच एजेंसियां जांच को आगे बढ़ाने के लिए उसे अपनी गिरफ्त में लेना चाहती हैं।

क्या है अगस्ता मामला
वीवीआइपी हेलिकॉप्टर अगस्ता वेस्टलैंड मामले में 12 चॉपर ख्ररीदे जाने थे। इसके लिए मिशेल समेत तीन बिचौलियों (गुइडो हश्के और कार्लो गेरोसा) के जरिए कथित रूप से दो भारतीयों को रिश्वत दी गई थी। मिशेल ने दुबई की अपनी कंपनी ग्लोबल सर्विसेज के जरिए यह रकम हासिल की थी।

बताया जाता है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में इन बिचौलियों ने भारतीय वायुसेना के अफसरों को प्रभावित करने की कोशिश की। कहा जाता है कि इसके बाद ही हेलिकॉप्टर खरीदने की एक अनिवार्य शर्त में छूट दी गई। वर्ष 2005 में हेलिकॉप्टर की उड़ान की ऊंचाई की सीमा 6000 मीटर से कम करके 4500 मीटर कर दी गई थी।

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सट्टेबाजी पर पूछे गए ये 5 सवाल, जवाब देते ही फंस गए अरबाज खान

ठाणे पुलिस की क्राइम ब्रांच 3 घंटे से ज्यादा वक्त तक अरबाज खान से पूछताछ की.

अरबाज खान को बुकी सोनू के सामने बिठाकर पूछताछ की गई. इसमें उनसे 5 सवाल दागे गए जिनका जवाब देकर अरबाज फंस गए. उनसे पूछा गया कि,

1. क्या आपने सोनू जालान के साथ सट्टा लगाया?

2. सोनू को कैसे जानते हैं आप?

3. क्या इस बारे में परिवार को पता था?

4. अब तक कितनी रकम का सट्टा लगाया है?

5. क्या जालान ने उन्हें फोन पर धमकी दी?

इन सवालों के जवाब में अरबाज ने बताया कि उन्होंने न सिर्फ आईपीएल मैचों पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैचों में भी सट्टा लगाया है. साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि पिछले साल IPL मैचों में लगाए गए पैसों में उन्हें करीब 2.75 करोड़ रुपये का नुकसाना भी हुआ था. अरबाज ने बताया कि करीब 4-5 साल से वह इस धंधे में शामिल हैं.

तनाव में शुरू की सट्टेबाजी

अभिनेता अरबाज ने पूछताछ में खुलासा किया कि उनका परिवार हमेशा से सट्टा लगाने के लिए मना करता था. परिवार इस काम को गलत मानता था लेकिन वह शौक के लिए क्रिकेट मैचों में करोड़ों रुपये का खेल करते थे. उन्होंने यह भी बताया कि पारिवारिक तनाव की वजह से वह सट्टेबाजी के खेल में शामिल हुए क्योंकि उनके निजी जीवन में काफी उतार-चढ़ाव था और पत्नी मलाइका अरोड़ा से तलाक की एक वजह सट्टेबाजी भी बताई जा रही है क्योंकि मलाइका हमेशा से उन्हें इसके लिए मना करती थीं.

पुलिस की पूछताछ में अरबाज ने सोनू से लिंक की बात कबूल की है लेकिन उन्हें याद नहीं कि वह कब और कैसे सोनू से मिले थे. उन्होंने बताया कि सोनू से उन्हें किसने मिलवाया इस बारे में ठीक से याद नहीं है.

इससे पहले ठाणे पुलिस की एंटी एक्टॉर्सन सेल ने शुक्रवार को अरबाज को समन किया था. पुलिस अब अरबाज का बयान दर्ज कर सट्टेबाजी रैकेट से उनके लिंक के बारे में पड़ताल की है. पुलिस को इंटरनेशनल बुकी सोनू जालान के साथ अरबाज की तस्वीरें मिली थीं. पुलिस सोनू पर मकोका के तहत नया केस भी दर्ज करेगी. अरबाज की ओर से उनके भाई सलमान खान की लीगल टीम इस मामले में उनका पक्ष रखेगी. सुबह अरबाज सलमान के बॉडीगार्ड शेरा के साथ क्राइम ब्रांच के दफ्तर पहुंचे थे.

कैसे आया अरबाज का नाम

पिछले महीने पुलिस ने डोबिंवली में सट्टेबाजी रैकिट का भंडाफोड़ करते हुए 4 सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया. शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सट्टेबाजी रैकिट चल रहा था. इतना ही नहीं, डॉन दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी से भी सट्टेबाजी रैकिट के लिंक मिलते दिख रहे हैं.

पूछताछ में रैकेट के पीछे सोनू जालान का नाम सामने आया था. इसके बाद सोनू जालान को गिरफ्तार कर जब पूछताछ की गई तो उसने बताया कि बॉलीवुड के कई सेलिब्रिटी बेटिंग में अलग-अलग नामों से पैसा लगाते हैं. तब इस मामले में अरबाज खान को समन किया गया था. पुलिस को शक है कि इस खेल में बॉलीवुड की कई और हस्तियां भी शामिल हो सकती हैं.

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उन्नाव गैंगरेप: BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का भाई गिरफ्तार, पीड़िता बोली-फांसी पर लटका दो

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में युवती ने गैंगरेप मामले में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के आरोपी भाई अतुल सिंह सेंगर को गिरफ्तार कर लिया गया है. बताया जा रहा है कि यह गिरफ्तारी सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर हुई है. पीड़ित परिवार की ओर से लगातार आरोप लगाए जा रहे थे कि मौजूदा बीजेपी सरकार विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके परिवार को बचा रही है. इसके बाद सीएम योगी ने आश्वासन दिया था कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी.

इस गिरफ्तारी पर पीड़िता ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा, ‘कुलदीप सिंह सेंगर को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. मैं नहीं जानती की उसके भाई को गिरफ्तार किया गया है. मैं चाहती हूं कि उसे फांसी पर लटका दिया जाए. उन्होंने मेरी जिंदगी को नरक बना दिया है. मेरे पिता की हत्या कर दी.’

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ANI UP

@ANINewsUP

Kuldeep Singh (Sengar) isn’t being arrested. I don’t know if his brother is arrested. I demand that they be hanged till death. They’ve made my life miserable. I want justice. They killed my father: Woman who has leveled rape allegations against BJP MLA Kuldeep Singh Sengar #Unnao

BJP विधायक पर आरोप लगाने वाले शख्स की जेल में मौत
पीड़िता के पिता ने बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके परिवार वालों पर गैंगरेप का आरोप लगाया था. आरोप है कि पुलिस ने पीड़िता के पिता के कहने पर मुकदमा दर्ज करने से मना कर दिया था, लेकिन विधायक की ओर से छवि खराब करने का मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद पीड़िता के पिता को जेल में डाल दिया गया था, जहां रविवार रात उनकी मौत हो गई.

पीड़िता के पिता की मौत पर 2 अफसर समेत 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड
पुलिस हिरासत में पीड़िता के पिता की मौत पर 2 पुलिस अधिकारी और 4 कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है. उन्नाव की पुलिस अधीक्षक पुष्पांजलि देवी ने कहा, ‘घटना की गंभीरता को देखते हुए 2 पुलिस अधिकारी और 4 कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि बलात्कार पीड़िता के पिता को पीटने वाले चार आरोपियों सोनू, बउवा, विनीत और शैलू को गिरफ्तार कर लिया है.’ विधायक पर जेल में हत्या कराये जाने के आरोप के बारे में पूछे जाने पर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. मामले की मजिस्ट्रेट से जांच के आदेश दिये गए हैं. साथ ही मृतक का डाक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए गए हैं.

एफआईआर में विधायक का नाम नहीं
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक FIR की कॉपी में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का नाम ही दर्ज नहीं है. एफआईआर में विधायक का नाम नहीं होने को लेकर रेप पीड़ित की बहन ने कहा कि मेरे पिता की पहले ही मौत हो चुकी है, अब पुलिस कह रही है कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. आगे उन्होंने कहा कि मैं चाहती हूं कि FIR में विधायक कुलदीप सिंह और अरुण सिंह का नाम शामिल कर दोनों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए.

Unnao gangrape

आरोपों के बाद सीएम से मिलने पहुंचे थे विधायक
अपने ऊपर लगे आरोपों के बाद बीजेपी विधायक सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने एनेक्सी बिल्डिंग पहुंचे थे. आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ साजिश हुई है, मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है.

उन्होंने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आने को लेकर उन्होंने कहा कि मुझे बुलाया नहीं गया है, बल्कि मैं खुद उनसे मिलने आया हूं. उन्होंने कहा कि मुझे जांच से कोई समस्या नहीं है. जांच होने दीजिए और दोषी को कड़ी सजा होनी चाहिए. जांच में यदि मैं दोषी पाया जाता हूं तो मैं सजा का सामना करने के लिए तैयार हूं.

सीएम ने ADG लखनऊ को सौंपी है मामले की जांच
सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर दुख जताया है. उन्होंने कहा कि लखनऊ के ADG को इस मामले की गंभीरता से जांच के आदेश दे दिए गए हैं. इस मामले में जो कोई आरोपी होगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा. युवती और उसके परिवार वालों ने रविवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर खुदकुशी करने की कोशिश की थी. युवती ने रविवार दोपहर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास के पास परिवार के साथ पहुंचकर आत्मदाह करने की कोशिश की थी.

जिलाधिकारी रवि कुमार एनजी ने कहा कि जब दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था तो एक पक्ष को ही जेल क्यों भेजा गया, इसकी जांच कराई जाएगी.

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CBSE PAPER LEAK 2018 दिल्ली पुलिस ने बतायी इकोनॉमिक्स पेपर लीक करने वाले रोहित-ऋषभ व तौकीर की साठ-गांठ की कहानी

कड़कड़डूमा कोर्ट से पुलिस को पर्चा लीक करने वाले तीनों लोगों की दो दिन की पुलिस कस्टडी मिल गयी है.

#WATCH Delhi Police Joint CP Crime Branch briefs the media on #CBSEPaperLeak case

ANI @ANI_news

#WATCH Delhi Police Joint CP Crime Branch briefs the media on #CBSEPaperLeak case

सीबीएसइ पेपर लीक मामले में आज दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच के डीसीपी आलोक कुमार ने एक प्रेस कान्फ्रेंस कर इस संंबंध में मीडिया को जानकारी दी. उन्होंने कहा आज तड़के रोहित व ऋषभ नाम के दो स्कूल टीचर और कोचिंग के एक ट्यूटर तौकीर को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि प्रश्न खुलने के समय पौने दस बजे से 30 से 40 मिनट पहले 12वीं इकोनॉमिक्स का प्रश्न पत्र खोल लिया गया और रोहित व ऋषभ नामक टीचर ने उसे कोचिंग ट्यूटर तौकीर को वाट्सएप पर भेजा, जिसने उसे बच्चों को भेज दिया. उन्होंने कहा कि एक बच्चे से इस संबंध में पूछताछ की गयी थी. डीसीपी ने यह नहीं बताया कि इस मामले का मास्टमाइंड तीनों में कौन है, हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि ऋषभ के कहने पर रोहित ने प्रश्नपत्र तौकीर को भेजा और इन तीनों में अच्छी पहचान व दोस्ती है.

डीसीपी आलोक कुमार ने कहा कि पेपर लीक मामले की जांच की दो हिस्सों में हो रही है. इकोनॉमिक्स पेपर लीक की जांच डॉ रामगोपाल नायक व दसवीं मैथ्स पेपर लीक की जांच जॉय तिर्की की अगुवाई में हो रही है और पूरी जांच का सुपरविजन डॉ रामगोपाल नायक कर रहे हैं.

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 Two teachers and a tutor were arrested. Police custody remand of all three has been taken, they will be questioned: Delhi Police Joint CP Crime Branch on #CBSEPaperLeak

उन्होंने दसवीं पेपर लीक मामले की जांच के संबंध में अभी कोई तथ्य बताने से इनकार करते हुए कहा कि अभी जांच चल रही है. उन्होंने कहा कि कोर्ट से दो दिन की पुलिस कस्टडी मिली है, पुलिस दो दिन इनसे पूछताछ करेगी और मामले के तह तक जाने का प्रयास करेगी. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि तौकीर 26-27 साल का एक युवक है, जो कोचिंग में पढ़ाता है.

ऐसे लीक किया इकोनॉमिक्स का पेपर 

नयी दिल्ली : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीबीएसइ पेपर लीक मामले में दो टीचर व एक कोचिंग सेंटर के मालिक सहित कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. न्यूज एजेंसी एएनआइ के अनुसार, दोनों शिक्षकों ने 9.15 बजे सुबह हाथ से लिखे प्रश्न पत्र की तसवीर उतारी थी और फिर उसे कोचिंग सेंटर के ट्यूटर को भेज दिया था. फिर कोचिंग सेंटर के ट्यूटर ने उसे स्टूडेंट्स को भेज दिया. कोचिंग ट्यूटर एनसीआर के बवाना का है, जबकि दोनों टीचर प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं. 26 मार्च को 12वीं इकोनॉमिक्स पेपर लीक की पूरी घटना परीक्षा शुुरू होने के समय 9.45 बजे के डेढ़ घंटे पहले तक में घटी. यह जानकारी दिल्ली पुलिस ने दी है. इन पर आरोप है कि उन्होंने 26 मार्च को परीक्षा के  पहले इकोनाॅमिक्स के पेपर को लीक किया. हालांकि पुलिस ने यह खुलासा नहीं किया है वे दोनों टीचर किस स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं.

क्राइम ब्रांच के डीसीपी आलोक कुमार शनिवार रात मीडिया को जानकादी देते हुए.


उधर, क्राइम ब्रांच की टीम शनिवार रात इस मामले में सीबीएसइ के मुख्यालय भी पहुंची थी. सूत्रों का कहना है कि सीबीएसइ 12वीं के इकोनॉमिक्स एवं 10वीं के मैथ्स पेपर लीक मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम को कुछ अहम तथ्यों की जानकारी हाथ लगी है. पुलिस ने अबतक इस मामले में 60 लोगों से पूछताछ की है. इसमें वे दस वाट्सएप ग्रुप के संचालक भी शामिल हैं, जिनके ग्रुप में प्रश्न वायरल किया गया था.

दिल्ली के प्रीत विहार स्थित सीबीएसइ मुख्यालय पहुंची पुलिस. 

इस पूरे मामले में पुलिस को उस विह्सलब्लोअर की भी जानकारी मिली है, जिन्होंने मेल के जरिये सीबीएसइ प्रमुख को गणित के प्रश्न पत्र लीक होने की जानकारी दी थी. पुलिस ने उस शख्स का पता लगाने के लिए गूगल की मदद मांगी थी, क्योंकि उस व्यक्ति ने जीमेल से मेल भेजा था.

ध्यान रहे कि सीबीएसइ 12वीं के इकोनॉमिक्स की परीक्षा 25 अप्रैल को ली जाएगी.

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कनिष्‍क गोल्‍ड के डायरेक्‍टर भूपेश जैन, नीता जैन से CBI ने की पूछताछ, 824Cr का है फ्रॉड

करीब 824 करोड़ रुपए के एसबीआई फ्रॉड मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने कनिष्‍क गोल्‍ड प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्‍टर्स भूपेश जैन और नीता जैन से पूछताछ की। साथ ही सीबीआई ने कनिष्‍क गोल्‍ड के प्रमोटर्स और डायरेक्‍टर्स के खिलाफ लूक-आउट सर्कुलर जारी कर दिया है। चेन्‍नई की कंपनी कनिष्‍क गोल्‍ड को 14 बैंकों के कंसोर्टियम ने लोन दिया था, जिसमें एसबीआई सबसे आगे है। यह लोन अब एनपीए घोषित हो चुका है। इस मामले में जांच एजेंसी सीबीआई ने एसबीआई की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। पीएनबी में करीब 13 हजार करोड़ रुपए का घोटाला सामने आने के बाद फ्रॉड का यह दूसरा बड़ा मामला है।

2007 से कनिष्‍क गोल्‍ड ने लोन लेना शुरू किया 
एसबीआई की ओर से कहा गया, कनिष्क गोल्ड ने 2007 से कर्ज लेना शुरू किया और बाद में उसने अपनी क्रेडिट की सीमा बढ़वा लिया। कनिष्क का रजिस्टर्ड ऑफिस चेन्नई में है। इसके मालिक और प्रमोटर-डायरेक्टर भूपेश कुमार जैन और उनकी पत्नी नीता जैन हैं। एसबीआई ने शिकायत में कहा कि ज्वैलर ने सबसे पहले मार्च 2017 में ब्याज भुगतान में 8 सदस्य बैंकों से डिफॉल्ट किया। अप्रैल 2017 तक कनिष्क ने सभी 14 बैंकों को पेमेंट रोक दी। 5 अप्रैल 2017 को स्टॉक ऑडिट की शुरुआत के समय बैंकर्स प्रमोटर से संपर्क करने में असफल रहे।

मार्च 2017 में सामने आया डिफॉल्‍ट 
एसबीआई के मुताबिक, मार्च 2017 में कनिष्क ज्वैलरी का डिफॉल्ट सामने आया था। जब उसने 8 सदस्य बैंकों का ब्याज नहीं चुकाया। इसके बाद अप्रैल 2017 में सभी 14 बैंकों का ब्याज चुकाने में असमर्थता जताते हुए पेमेंट रोक दी। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने कंपनी के प्रमोटर और डायरेक्टर से संपर्क किया लेकिन वह नहीं मिले। 25 मई 2017 को कनिष्क के कॉर्पोरेट ऑफिस का दौरा करने बैंकर्स पहुंचे, लेकिन फैक्ट्री और शोरूम दोनों ही बंद थे। भूपेश जैन ने उसी दिन बैंकों को लेटर लिखकर दस्तावेजों में फर्जीवाड़े और सभी स्टॉक को हटाने के बारे में बताया। मद्रास ज्वैलर्स एंड डायमंड मर्चेंट एसोसिएशन के एक सदस्य के मुताबिक, कनिष्क गोल्ड लगातार घाटे में जा रही थी और उसके लिए काम जारी रखना संभव नहीं हो पा रहा था। मई 2017 में ही उसने घाटे से बचने के लिए अपने सभी आउटलेट्स बंद कर दिए।

SBI ने अकेले 240 करोड़ का लोन दिया
जानकारी के अनुसार एसबीआई ने ज्वैलरी कंपनी को 240 करोड़ रुपए लोन दिया था। इसके अलावा पीएनबी ने 128 करोड़, आईडीबीआई ने 49 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया ने 46 करोड़, सिंडिकेट बैंक ने 54 करोड़, यूनियन बैंक ने 53 करोड़, यूकों बैंक ने 45 करोड़, सेंट्रल बैंक ने 22 करोड़, कॉरपोरेशन बैंक ने 23 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 32 करोड़, तमिलनाडु बैंक ने 27 करोड़, एचडीएफसी बैंक ने 27 करोड़, आईसीआईसीआई बैंक ने 27 करोड़ और आंध्रा बैंक ने 32 करोड़ रुपए लोन दिया था।

नीरव मोदी केस से कैसे अलग है ये फ्रॉड?
यह मामला नीरव मोदी और मेहुल चौकसी द्वारा पीएनबी में किए गए फ्रॉड से अलग है। पीएनबी के मामले में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग का गलत इस्तेमाल कर बैंक से पैसे लिए गए। कनिष्‍क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड के मामले में बैंक को गलत फाइनेंशियल एस्टेमेंट और रिकॉर्ड दिखाकर लोन लिया गया। कुल लोन 824 करोड़ रुपए का है, लेकिन ब्याज सहित यह र‍कम इससे कहीं ज्यादा बताई जा रही है।

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सीबीआइ की एक छापेमारी पड़ी भारी, लपेटे में आए कार्ति चिदंबरम

सियासी लोगों की पोशाक अक्सर सफेद होती है ये दिखाने के लिए वो दिल और दिमाग दोनों से पाकसाफ हैे। उनके लिए जनता की सेवा करना ही महान लक्ष्य है। लेकिन उन पोशाकों पर आरोपों के छीटें पड़ते ही रहते हैं। वो उस कमीज को दागदार करते हैं, तो कमीज बेदाग भी बनी रहती है। आइएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस में कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब वो विदेश से स्वदेश वापस लौट रहे थे। कार्ति की गिरफ्तारी किसी एक सामान्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं है बल्कि इसमें सियासत भी जुड़ी हुई है।

2014 के आम चुनाव से पहले और प्रचार के दौरान भाजपा नेता कहा करते थे कि कांग्रेस का मतलब अब भ्रष्टाचार है ऐसी कोई जगह नहीं है जहां भ्रष्टाचार की गंगा न बह रही हो। चुनावी सभाओं में पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी कहा करते थे कि अगर उनकी सरकार बनी तो एक एक गुनहगार जेल के अंदर होंगे। सरकार के चार साल बीत जाने के बाद लोग पूछते हैं कि आखिर मौजूदा सरकार क्यों नहीं कुछ कर पा रही है। इस सवाल के जवाब में भाजपा की तरफ से ये तर्क दिया जाता रहा है कि राजनीतिक विद्वेष की भावना से वो काम करने में यकीन नहीं रखते हैं। जिस किसी आरोपी के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध होंगे तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी की अलग अलग ढंग से व्याख्या हो सकती है लेकिन ये तो साफ है कि कांग्रेस बैकफुट पर आ चुकी है। आगे हम बताएंगे कि भ्रष्टाचार के कुछ मामलों के सामने आने के बाद कांग्रेस बजट सत्र के दौरान सरकार को घेरती लेकिन क्या ये दिलचस्प नहीं है कि हमलावर कांग्रेस के सामने अब रक्षात्मक उपाय अपनाने के अलावा और कोई दूसरा चारा नहीं है।

चेन्नई में हुई कार्ति की गिरफ्तारी

आइएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिग केस में ईडी ने कार्ति चिदंबरम को चेन्नई से गिरफ्तार किया। सीबीआइ का कहना है कि जांच प्रक्रिया में वो सहयोग नहीं कर रहे हैं। इससे पहले एस भास्कर रमन कार्ति का सीए था जिसे सीबीआइ ने कुछ दिन पहले गिरफ्तार किया था। विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड एफआइपीबी ने आइएनएक्स मीडिया को वर्ष 2007 में विदेशी पूंजी जुटाने की अनुमति दी थी। इस मामले में कार्ति का नाम सामने आया। कार्ति चिदंबरम, कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के बेटे हैं जो उस समय वित्त मंत्री थे। ईडी ने दावा किया था कि सीए भास्कर रमन ने गलत तरीके के अर्जित संपत्ति के प्रबंधन में कार्ति की मदद की थी।

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के तहत कार्ति और कई दूसरे आरोपियों पर पिछले साल मई में केस दर्ज किया गया था। कार्ति पर आरोप है अपने पिता के वित्त मंत्री रहते वक्त उन्होंने आइएनएक्स मीडिया को एफआइपीबी की मंजूरी दिलाने के एवज में 3.5 करोड़ की घूस ली थी। दरअसल ये मामला आसानी से नहीं खुला होता अगर शीना बोरा हत्याकांड में सीबीआइ ने पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी के घर में छापेमारी न की होती। सीबीआइ की छापेमारी में कुछ अहम दस्तावेज बरामद हुए जिससे पता चला कि एफआइपीबी को धता बता कर कार्ति ने फायदा उठाया था।

घोटालों के घेरे में कार्ति
-कार्ति चिदंबरम को 45 करोड़ रुपए के फॉरेन एक्सनचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) उल्लंघन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी आरोपी बना चुका है।

-कार्ति पर वासन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से कथित तौर पर जुड़ने का मामला है।
-इस कंपनी से जुड़े विदेशी निवेशकों से कई अलग नामों से करीब 2100 करोड़ रुपए और इसके साथ ही 162 करोड़ रुपए अलग से भी लिए गए।
– आरोपों के मुताबिक इस लेन-देन में कार्ति चिदंबरम की कंपनी मैसर्स एडवांटेज स्ट्रैटजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल थी। इस कंपनी को इसमें करीब 45 करोड़ रुपए मिले थे।
-कार्ति पर एयरसेल-मैक्सिस डील में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप।
-कार्ति की कंपनी मैसर्स एडवांटेज स्ट्रेटजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड जांच के घेरे में
– पी. चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुए कई गैर कानूनी क्लीरियेंस दिलाने का आरोप।

मामले में पहली बार कार्ति का नाम सुब्रमण्यम स्वामी ने उछाला। साल 2015 में तत्कालीन जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यन स्वामी ने कार्ति चिदंबरम की विभिन्न कंपनियों के बीच वित्तीय लेनदेन का खुलासा किया। स्वामी ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहते पी. चिदंबरम ने बेटे कार्ति को एयरसेल-मैक्सिस मर्जर से लाभ उठाने में मदद की। इसके लिए उन्होंने दस्तावेजों को जानबूझकर रोका और अधिग्रहण प्रक्रिया को नियंत्रित किया ताकि उनके बेटे को अपनी कंपनियों के शेयर की कीमत बढ़ाने की दिशा में कारोबारी कदम उठाने का वक्त मिल जाए।

कौन हैं कार्ति चिदंबरम ? 

तमिलनाडु के शिवगंगा में 16 नवंबर 1971 को जन्मे कार्ति चिदंबरम कांग्रेस के नेता और व्यापारी हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सास और कैंब्रिज से उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और लॉ की पढ़ाई की है। वह तामिलनाडु टेनिस एसोसिएशन के वाइस प्रेसीडेंट रहे हैं। भरतनाट्यम नृत्यांगना श्रीनिधि रंगराजन से उनकी शादी हुई है।

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मुख्य सचिव मारपीट केस में पुलिस के पास है ये अहम सबूत, घेरे में केजरीवाल व सिसोदिया

मुख्य सचिव से मारपीट मामले में पुलिस मुख्यमंत्री आवास से बरामद सीसीटीवी फुटेज की फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। हाई प्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस सीसीटीवी फुटेज को देख भी नहीं पाई। घटनास्थल से पुलिस ने चार डीवीआर जब्त किए हैं।

बढ़ सकती हैं ‘आप’ विधायकों की मुश्किलें 

माना जा रहा है कि जांच की रिपोर्ट सोमवार तक आ जाएगी। इसके बाद पुलिस आगे की कार्रवाई शुरू करेगी।मुख्य सचिव मारपीट मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर रिपोर्ट सौंप दी है। माना जा रहा है कि मामले में आरोपी ‘आप’ विधायकों मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

केजरीवाल व सिसोदिया से हो सकती है पूछताछ 

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जांच रिपोर्ट के अनुसार घटनास्थल पर मौजूद विधायकों की लिस्ट तैयार कर पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगी। इस मामले में विधायकों पर कार्रवाई के अलावा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से भी पूछताछ हो सकती है।

‘आप’ विधायकों पर कसने लगा शिकंजा 

अंशु प्रकाश सभी आरोपी विधायकों को नहीं पहचानते थे। शुरुआत में उन्होंने मारपीट करने वाले ‘आप’ विधायक अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जारवाल के बारे में बताया था। बाद में उन्होंने अंबेडकर नगर के विधायक अजय दत्त और लक्ष्मी नगर के विधायक नितिन त्यागी की पहचान की थी। जिसके बाद पुलिस ने अमानतुल्लाह और प्रकाश जारवाल को गिरफ्तार कर अजय और नितिन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था।

अहम है सीसीटीवी कैमरे की फुटेज

वहीं, पुलिस को वारदात के वक्त मुख्यमंत्री आवास पर जनकपुरी के पूर्व विधायक राजेश ऋषि, वजीरपुर के पूर्व विधायक राजेश गुप्ता, किराड़ी के विधायक ऋतुराज गोविंद, कस्तूरबा नगर के पूर्व विधायक मदन लाल, जंगपुरा के पूर्व विधायक प्रवीण कुमार, संगम विहार के विधायक दिनेश मोहनिया और बुराड़ी के पूर्व विधायक संजीव झा के भी मौजूद होने का पता चला है। पुलिस इनपर कार्रवाई से पूर्व पुख्ता सबूत एकत्र कर लेना चाहती है। सलाहकार वीके जैन की अदालत में घटना के बारे में स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस के पास दूसरा सबूत सीसीटीवी कैमरे की फुटेज ही होगी।

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जयपुर ब्लास्ट सहित 4 राज्यों में 165 जानें लीं, 10 साल बाद पकड़ा गया आईएम का आतंकी

करीब 10 साल से फरार इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) का आतंकी आरिज खान उर्फ जुनैद (32) पकड़ा गया। यह आतंकी जयपुर में सीरियल ब्लास्ट सहित 4 राज्यों में 165 लोगों की जान लेने में शामिल था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे भारत-नेपाल बॉर्डर से पकड़ा। आजमगढ़, यूपी का यह आतंकी 2008 के जयपुर धमाकों के बाद से ही फरार था। इन धमाकों में गिरफ्तार होने वाला वह 8वां आतंकी है। आरिज राजस्थान के अलावा अहमदाबाद, दिल्ली व उप्र में मोस्ट वांटेंड था। सिमी व आईएम के बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद वह दोनों आतंकी संगठन खड़े करने में जुटा था। एटीएस जयपुर के एडीजी उमेश मिश्रा ने बताया कि उसे प्रोडक्शन वारंट पर जयपुर लाया जाएगा।

बम बनाने में माहिर है आरिज, आईएम व सिमी को मजबूत कर रहा था

13मई 2008 को चारदीवारी में हुए थे 8 धमाके

8आतंकीअब तक गिरफ्तार

1लाख का इनाम था प्रदेश में आरिज पर

बटला हाउस से बचकर नेपाल भागा, टीचर बना

स्पेशल सेल के अनुसार 19 सितंबर, 2008 को दिल्ली के जामिया नगर में हुए एनकाउंटर के वक्त आरिज बटला हाउस में था, पर भागने में कामयाब रहा। एनकाउंटर में आईएम के दो आतंकी मारे गए थे व इंस्पेक्टर मोहन चंद शहीद हुए थे। एनकाउंटर के बाद वह दिल्ली, यूपी, राजस्थान व महाराष्ट्र में रिश्तेदारों के पास गया। शरण नहीं मिली। एक माह भटकने के बाद नेपाल गया। फर्जी दस्तावेजों पर सलीम नाम से नागरिकता ली। साथी तौकीर के साथ स्कूल में पढ़ाने लगा। 2014 में भटकल के संपर्क में आया। सऊदी अरब जाकर आईएम व सिमी के हमदर्दों से मिला। लौटकर भारत में संगठन खड़ा करने लगा।

आरिज बटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आईएम के आतंकी आतिफ अमीन के साथ जुड़ा था। आरिज बम बनाने में माहिर है। वह जयपुर सीरियल ब्लास्ट के अलावा 2007 में यूपी की अदालतों में ब्लास्ट, 2008 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट और अहमदाबाद ब्लास्ट में भी वांटेड है। इन हमलों में 165 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जबकि 535 से ज्यादा घायल हुए थे। उस पर राजस्थान पुलिस ने एक लाख, एनआईए ने 10 लाख व दिल्ली पुलिस ने 5 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।

अभी जयपुर के तीन गुनहगार फरार

13 मई, 2008 को चारदीवारी में छह स्थानों पर आठ सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इनमें 78 लोगों की जानें गई थीं, जबकि 186 लोग घायल हुए थे। 8 आतंकी गिरफ्तार किए गए। इनमें आईएम के आतंकी शाहबाज हुसैन, सरवर, सलमान, सैफ और सैफुर्रहमान तथा दो अन्य आतंकी हैदराबाद की जेल में हैं। अब आरिज गिरफ्तार हो चुका है। मामले में शादाब उर्फ मलिक, साजिद बड़ा और मोहम्मद खालिद फरार हैं। इन पर भी एक-एक लाख रुपए का इनाम घोषित है।