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किम जोंग उन से वार्ता के लिए प्योंगयोंग नहीं जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप, अब यहां होगी वार्ता

किम जोंग उन से वार्ता के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अब प्‍योंगयोंग नहीं जाएंगे। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि यह वार्ता रद कर दी गई है, दरअसल, अब ये दोनों नेता उसी जगह पर मिलेंगे जहां पिछले दिनों दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे ने किम जोंग उन से मुलाकात की थी। इसका सुझाव खुद ट्रंप की तरफ से आया था जिसको किम ने हरी झंडी दे दी है।

आपको बता दें कि किम और मून के बीच 27 अप्रैल को पुनमुंजोम गांव में बैठक हुई थी। यह उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। यहां 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद से ही युद्ध विराम लागू है। इसका एक हिस्‍सा उत्‍तर तो दूसरा हिस्‍सा दक्षिण कोरिया में पड़ता है। आपके लिए यह जानना भी बेहद दिलचस्‍प है कि यह सीमा रेखा दुनिया की सबसे खतरनाक सीमाओं में गिनी जाती है। यही वजह है कि उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा एक बार फिर से चर्चा का विषय बनने के साथ-साथ ऐतिहासिक वार्ता का भी गवाह बनने वाली है।

पीस हाउस में बैठक का सुझाव

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने ही किम जोंग उन के साथ पीस हाउस में बैठक करने का सुझाव दिया है। पीस हाउस उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि उत्तर कोरिया के साथ शिखर बैठक के लिए कई देशों पर विचार किया जा रहा है। लेकिन किसी तीसरे देश की अपेक्षा पीस हाउस/फ्रीडम हाउस ज्यादा महत्वपूर्ण और स्थायी जगह है। तीन से चार हफ्ते में ट्रंप और किम की मुलाकात होने की संभावना है। गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि किम के साथ शिखर वार्ता के लिए पांच जगहों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि वह कई बार यह भी कह चुके हैं कि बातचीत नहीं भी हो सकती है।

दोनों के बीच वार्ता के अहम बिंदु

किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच होने वाली वार्ता का सबसे अहम बिंदु कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाना है। हालांकि इसको लेकर किम के तेवर में अब काफी नरमी आ चुकी है। पिछले दिनों मून से हुई मुलाकात में किम ने कहा था कि अगर अमेरिका कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने का वादा करे और उत्तर कोरिया पर हमला नहीं करने का वचन दे, तो उनका देश परमाणु हथियारों को त्यागने को तैयार है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्‍हें एक बार फिर विचार करना पड़ेगा।

कई लिहाज से खास है बैठक

किम ने ट्रंप को संबोधित करते हुए ये भी कहा है कि हमारे बीच जब बातचीत शुरू हो जाएगी, तब अमेरिकी राष्‍ट्रपति जान जाएंगे कि मैं ऐसा शख्‍स नहीं हूं कि दक्षिण कोरिया या अमेरिका पर परमाणु हथियार से हमला करूंगा। उन्‍होंने इस बात की भी उम्‍मीद जताई है कि यदि दोनों देशों के बीच बैठकों का सिलसिला बढ़ा और आपसी विश्‍वास बहाली हो सकी यह काफी अच्‍छा होगा। हालांकि अभी इन दोनों नेताओं की बैठक का दिन और समय निश्चित नहीं हो पाया है। लेकिन इतना जरूर तय है कि इस बैठक में दक्षिण कोरिया भी मौजूद होगा। यह बैठक इस लिहाज से भी खास होगी क्‍योंकि पहली बार पद पर रहते हुए कोई अमे‍रिकी राष्‍ट्रपति उत्तर कोरिया के प्रमुख से बात करेगा।

छह देशों की बैठक पर लगी निगाह

इस बीच जानकारों की निगाह कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाने के लिए छह देशों की बैठक पर भी लगी है, जो वर्षों से निलंबित हैं। जानकारों की दिलचस्‍पी इस बात को लेकर है कि इस बाबत छह देशों की वार्ता दोबारा शुरू होगी या नहीं। इन छह देशों में उत्तर और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, रूस और अमेरिका शामिल हैं। यॉनहॉप एजेंसी की मानें तो जानकार इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि कोरिया प्रायद्वीप को लेकर इन देशों की बैठकों का दौर दोबारा शुरू हो सकता है। जानकारों के मुताबिक इसको लेकर उत्तर कोरिया भी शायद पीछे न हटे और ऐसा करने पर अपनी सहमति व्‍यक्त करे। इस बारे में जापान की मीडिया ने यहां तक कहा है कि पिछले दिनों किम ने जो बीजिंग की यात्रा कर शी चिनफिंग के समक्ष अपनी बात रखी है उसके बाद इस सिक्‍स नेशन टॉक को लेकर सहमति बनी है।

उत्तर कोरिया खफा हो जाए

हालांकि जानकारों का एक मत यह भी है कि मुमकिन है कि जापान की मौजूदगी से उत्तर कोरिया खफा हो जाए। इसकी वजह ये है कि जापान काफी समय से अपने अगवा किए नागरिकों की वापसी की मांग उत्तर कोरिया से करता रहा है। वहीं इसको लेकर उत्तर कोरिया साफ इंकार कर रहा है। आपको बता दें कि छह देशों की यह वार्ता सबसे पहले 2003 में हुई थी। 2005 में वार्ता के बाद एक अहम समझौता भी हुआ था जिसमें उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी तक दी गई थी। लेकिन वर्ष 2009 में उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु परिक्षण किए जाने के चलते इसको निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से इस मुद्दे को लेकर इन देशों के बीच कोई वार्ता नहीं हुई।

दोनों के बीच विवादित बोल

इसके अलावा यह बैठक इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच बदजुबानी का लंबा सिलसिला चला है। एक ओर जहां ट्रंप ने किम को रॉकेट मैन कहा वहीं किम ने ट्रंप को बूढ़ा तक कह डाला था। आइए जानते हैं दोनों नेताओं ने कब-कब और क्‍या-क्‍या कहा।

– नवंबर 2017 में ट्रंप को उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने ‘बूढ़ा पागल’ बताया था। इस पर ट्रंप ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और लिखा था, ‘भला किम जोग-उन मुझे बूढ़ा बुला कर मेरा अपमान क्यों करेंगे, जब मैं उन्हें कभी नाटा और मोटा नहीं कहूंगा।’

– इसी तरह सितंबर 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने किम जोंग उन को रॉकेट मैन कहा था और उनके देश को नेस्तनाबूद करने की धमकी दी थी।

– इसके जवाब में किम जोंग उन की तरफ से जिस तरह का बयान आया, अमेरिका और ट्रंप ने कल्पना भी नहीं की होगी। उत्तर कोरिया ने कहा था, ‘डरे हुए कुत्ते ज्यादा भौंकते हैं। ट्रंप आग से खेलने के शौकीन एक दुष्ट व्‍यक्ति हैं।’

– जनवरी के पहले हफ्ते में भी पूरी दुनिया इन दोनों नेताओं के अजीब-गरीब बयानों की गवाह बनी थीं। दरअसल, किम जोंग उन ने नए साल के मौके पर अपने संबोधन में अमेरिका को तबाह करने की धमकी दी थी और कहा था कि परमाणु बम का बटन हर वक्त उनकी टेबल पर होता है।

– इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘कोई किम जोंग उन को बताए कि मेरे पास भी न्यूक्लियर बटन है, जो उसके बटन से बहुत बड़ा और ताकतवर है। मेरा बटन काम करता है।’

– 23 फरवरी 2018 को डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए दबाव बढ़ाने को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कदम उठाया है।

– 30 जनवरी को अमेरिका में सीआईए के निदेशक माइक पोंपियो ने आशंका जताई थी कि उत्तर कोरिया के पास ऐसी परमाणु मिसाइल हैं, जिससे वह कुछ महीनों के भीतर अमेरिका पर हमला कर सकता है।

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गगनशक्ति 2018: वायुसेना का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, एयरचीफ मार्शल बोले- आसमान को हिलाने का है माद्दा

पिछले तीन दशक में भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े अभ्यास ‘गगन शक्ति-2018’ में पिछले तीन दिनों के अंदर करीब 1100 विमानों ने हिस्सा लिया। जिनमें करीब आधा लड़ाकू विमान थे। वायुसेनाध्यक्ष बी.एस. धनोवा ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान बेहद करीब से इस ऑपरेशन पर नज़र रख रहा था जो “आसमान को हिला रहा है और धरती को चीर रहा है।”

अब वायुसेना अपना अभ्यास वेस्टर्न सेक्टर से ईस्टर्न सेक्टर में करने जा रही है। धनोवा ने कहा कि सभी तरह के प्रशिक्षण को 22 अप्रैल तक दो चरणों में चलनेवाले अभ्यास के चलते सस्पेंड किया जा रहा है। अमूमन यह युद्ध के समय में ऐसा होता है जब सेना की तरफ से सभी गतिविधियों को रोक दिया जाता है।

वायुसेना ने आकाश से दुश्मन के खात्मे का दम दिखाया
भारतीय वायुसेना का युद्धाभ्यास ‘गगन शक्ति 2018’ पिछले एक सप्ताह से पश्चिमी क्षेत्र में जारी है। पैराशुट ब्रिगेड की बटालियन के साथ वायुसेना ने आकाश से दुश्मन की धरती पर निशाना साधने का अभ्यास किया। वहीं पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित कलाईकुंडा एयरबेस से उड़े सुखाई 30 लड़ाकू विमानों ने भी दुश्मन को नेस्तेनाबूत करने का दम दिखाया। इस दौरान लक्षद्वीप तक की उड़ान के दौरान दो बार आकाश में ही सुखोई से सुखोई में ईंधन भरा गया।

वायुसेना ने तैयारी और दमखम को दो हिस्सों में परखा है। पहला पश्चिमी सीमा में और दूसरा उत्तरी सीमा पर। पश्चिमी सीमा के लिए पाकिस्तान सरकार को पूर्व सूचना दी गई। इस चरण में भारतीय सेना पाकिस्तान की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए दम दिखाया। दूसरे चरण में तिब्बत की ओर से चीन की सेना के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए अभ्यास किया।

जैसलमेर, जोधपुर, खड़गपुर में सैन्य विमानों ने हिस्सा लिया
लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना में शामिल होने के बाद पहली बार गगन शक्ति युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहा है। सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, मिग 27, जगुआर व मिराज जैसे 600 लड़ाकू विमान शामिल हैं। बड़े परिवहन विमान सी-17 ग्लोब मास्टर, सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस और अटैक हेलिकॉप्टर एमआई 35, एमआई 17 वी 5, एमआई 17, एएलएच ध्रुव, एएलएच भी शामिल हैं।

अड्डों पर धुआंधार गोलीबारी की गई
जैसलमेर में वायुसेना के विमानों ने विभिन्न ठिकानों को निशाना बनाकर युद्धाभ्यास किया।
‘गगन शक्ति 2018’ युद्धाभ्यास में पहली बार महिला फाईटर पायलट हिस्सा ले रही हैं। युद्धाभ्यास के दौरान स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की पूरी स्कवाड्रन ताकत दिखा रही है।

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पाक पर कब्जे की कोशिश में चीन, बड़ी योजना पर कर रहा काम

पाकिस्तान के लोगों का दिल जीतने के लिए चीन ने नई चाल चली है। हाल ही में चीन ने पाकिस्तान के छोटे से तटीय शहर ग्वादर के लिए 50 करोड़ डॉलर यानी करीब 3300 करोड़ रुपए  ग्रांट दी है । इस छोटे से शहर के् लिए इतनी बड़ी ग्रांट देकर चीन का पाकिस्तान में पैर जमाने का है। पाक पर कब्जे के लिए  वो योजना बनाकर काम कर रहा है। ग्वादर शहर में चीन कई महत्वकांशी योजनाओं पर काम कर रहा है। ये जगह अरब सागर के तट पर स्थित है और ये कमर्शियल तौर पर चीन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

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आगे चलकर चीन ग्वादर में नौसेना का बेस  तैयार करने की योजना बना रहा है जिससे भारत और अमरीका की चिंताओं को बल मिला है, क्योंकि दोनों देश इस बात को जानते हैं कि आने वाले समय चीन ग्वादर को अपनी नौसेना के बेस के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। ग्वादर में चीन एक मेगापोर्ट विकसित करके दुनिया भर में निर्यात करना चाहता है। यहां से चीन पश्चिमी क्षेत्र से जुड़ने के लिए एनर्जी पाइपलाइन्स, सड़कों और रेल का लिंक का जाल बिछाएगा। पाकिस्तानी अधिकारी यहां अगले साल 12 लाख टन कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं जो साल 2022 में बढ़कर 1.3 करोड़ टन तक पहुंच जाएगा।

पाकिस्तान का ये इलाका प्राकृतिक तेल और गैस के परिवहन के लिए जाना जाता है। चीन यहां अपने लिए भविष्य में कई फायदे देख रहा है। हाल ही में ग्वादर में नया इंटरनैशनल एयरपोर्ट बनाने के लिए भी चीन ने 23 करोड़ डॉलर यानी करीब 1500 करोड़ रुपए की ग्रांट दी थी।  ग्वादर में चीन के लिए काफी चुनौतियां भी हैं। यहां पीने के पानी की गंभीर समस्या के साथ-साथ बिजली की समस्या भी आम लोगों को काफी परेशान करती है। इतना ही नहीं पाकिस्तानी अलगाववादी विद्रोहियों से भी चीन के प्रॉदेक्ट्स को खतर बना हुआ है। स्थानीय लोगों का संतुष्ट होना अलगाववादियों के लिए मुश्किलें पैदा करता है।

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इस देश में है दुनिया की सबसे तेज इन्टरनेट स्पीड

भारत में इन्टरनेट की बात करे बीते कुछ सालों में काफी तेजी से विकास हुआ है लेकिन अभी भी भारत में इन्टरनेट की स्पीड काफी कम है। हालाकि भारत में इन्टरनेट यूज़ करने वाले यूजर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। वैसे देखा जाए तो इसमें जियो का भी काफी योगदान है क्योंकि जियो से पहले लोग इन्टरनेट चलाने में हिचकिचाते थे क्योंकि इन्टरनेट चलाने का खर्चा काफी ज्यादा होता था।

जियो के लांच होते ही भारत में इन्टरनेट के दाम काफी कम हो गए है अब लोग खुलकर इन्टरनेट का इस्तेमाल कर रहे  है। जियो के सस्ते प्लान के चलते दूसरी टेलिकॉम कंपनियों को अपने इन्टरनेट प्लान में भारी कटौती करनी पड़ी है लेकिन इसमें भारत के इन्टरनेट यूजर्स को काफी फायदा हुआ है।

अभी भी भारत में कई इलाके ऐसे है जहां इन्टरनेट की स्पीड काफी कम है या यूँ कहे की भारत में टेलिकॉम कंपनियां इन्टरनेट की तेज स्पीड प्रोवाइड नहीं कर पा रही हैं जिस वजह यूजर्स अपने इन्टरनेट की स्पीड को लेकर परेशान रहते हैं।

दुनिया की सबसे तेज इन्टरनेट स्पीड है इस देश में 

आप ये भी जानना चाहेंगे कि ऐसा कौन सा देश है जहां सबसे तेज इन्टरनेट चलता है तो आपको बता दे कि सबसे तेज इन्टरनेट के मामले में इंटरनेशनल ब्रॉडबैंड स्पीड इन्वेस्टिगेशन एजेंसी UCLA के मुताबिक एक छोटा सा देश नॉर्वे सबसे आगे है।

Speedtest.net के आंकड़ों के मुताबिक नॉर्वे में पिछले साल मोबाइल फोन की औसत इंटरनेट की स्पीड 69% बढ़ी है और यह वर्तमान में 52.6 मेगाबाइट प्रति सेकेंड हो गई है. मतलब अगर आप 400 mb की कोई फिल्म डाउनलोड करते है उसे डाउनलोड होने में महज 8 सेकेंड का समय लगता है।

बता दे कि नॉर्वे में तीन बड़ी टेलिकॉम कंपनियां है जिनमें टेलिनॉर का नाम भी शामिल इसके अलावा टेलिया और आईस डॉट नेट भी नॉर्वे की बड़ी टेलिकॉम कंपनियां हैं बात करे टेलिनॉर की तो इस कंपनी ने इन्टरनेट स्पीड बढ़ाने के लिए पिछले साल काफी निवेश किया है।

अब नोर्वे में सबसे तेज इन्टरनेट की स्पीड मिलती है इसके साथ ही नॉर्वे दुनिया का सबसे तेज इन्टरनेट स्पीड वाला देश बन गया है। अगर भारत की टेलिकॉम कंपनियां भी इस तरह निवेश करके अपनी इन्टरनेट स्पीड बढ़ाये तो इससे भारत के इन्टरनेट यूजर्स को काफी फायदा हो सकता हैं।

अगर आप अपने इन्टरनेट की स्पीड चेक करना चाहते है तो इंटरनेशनल ब्रॉडबैंड स्पीड इन्वेस्टिगेशन एजेंसी UCLA द्वारा बनाई गयी वेबसाइट Speedtest.net पर जा सकते है इस वेबसाइट से आप आसानी से अपनी इन्टरनेट की स्पीड टेस्ट कर सकते हैं और पता कर सकते है कि आपको इन्टरनेट की कितनी स्पीड मिल रही है।

आपको यह जानकारी कैसी लगी कमेंट में लिखे। अगर अच्छी लगी तो लाइक और शेयर जरुर कीजियेगा।

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सचिन का रिकॉर्ड तोड़ने वाले इस खिलाड़ी को एशिया कप टीम में नहीं मिली जगह

नवंबर में खेले जाने वाले एशिया कप के लिए भारतीय अंडर-19 टीम का ऐलान कर दिया गया है। टीम की कमान हरियाणआ के ऑलराउंडर हिमाशु राना के हाथों में दी गई है। अभिषेक शर्मा टीम के उपकप्तान नियुक्त किए गए हैं। इस बार मलेशिया में अंडर-19 एशिया कप के चौथे संस्करण का आयोजन किया जाएगा। इस टूर्नामेंट का आयोजन 9 से 20 नवंबर तक किया जाएगा। पिछले कुछ दिनों से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे पृथ्वी शॉ को टीम में जगह नहीं दी गई है।

पृथ्वी शॉ ने दुलीप ट्रॉफी में अपने पदार्पण मैच में ही शतक लगाया था और इस टूर्नामेंट में सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले खिलाड़ी बने थे। उन्होंने सिचन का रिकॉर्ड तोड़ा था। इंडिया रेड के लिए खेलते हुए शॉ ने 154 रनों की शानदार पारी खेली थी। हालांकि टीम में उनके चयन पर सेलेक्टर्स का कहना है कि उन्हें अभी रणजी ट्रॉफी में खेलना चाहिए। पृथ्वी शॉ ने रणजी मैच में मुंबई के लिए इस वर्ष की शुरुआत में तमिलनाडु के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में शतक लगाकर सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया था।

एक बार फिर से अगले कुछ महीनों में अंडर-19 विश्व कप न्यूजीलैंड में खेला जाता है। ऐसे में एशिया कप हर खिलाड़ी के लिए काफी अहम है क्योंकि इसमें किए गए प्रदर्शन के दम पर आगे टीम में उनकी जगह तय की जाएगी साथ ही विश्व कप को देखते हुए टीम के कोच राहुल द्रविड़ भी टीम को तराशने में जुटे हुए हैं। हालांकि टीम की कमान हिमांशु राना के हाथों में है जो काफी अनुभवी हैं साथ ही इस वक्त उनका फॉर्म भी शानदार है।

एशिया कप के लिए अंडर-19 टीम

हिमांशु राना (कप्तान), अभिषेक शर्मा (उप कप्तान), अनुज रावत, अथर्व तायडे, मनोज कालरा, सलमान खान,  हार्विक देसाई, रियान पराग, अनुकुल रॉय, शिवा सिंह, तनुश कोटियान, दर्शन नालकंडे, विवेकानंद तिवारी, आदित्य ठाकरे और मनदीप सिंह।