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हर अंग के लिए उसी आकार के फल-सब्जी और अनाज, एक बार जानकर बच सकते हैं सैकड़ों बीमारियों से

यह कुदरत का करिश्मा है कि हमारे आसपास ऐसे फल, अनाज और सब्जियां हैं, जिनका आकार हमारे शरीर के किसी न किसी अंग से मिलता है और उन्हें खाने से शरीर विशेष की बीमारी होने का जोखिम कम किया जा सकता है। यही नहीं, अगर बीमारी हो जाए तो उसके ठीक होने की संभावना भी होती है।

हम जैसा खाते हैं वैसा ही होते हैं

यह प्राचीन मान्यता है कि हम जैसा खाते हैं, वैसा ही होते हैं। इसलिए सदियों से सात्विक भोजन पर जोर दिया जाता रहा है। अब आधुनिक शोधों से पता चल रहा है कि ये मान्यताएं बिल्कुल सही हैं। इसी क्रम में हम आपका उन अनाज, फल और सब्जियों से परिचय करा रहे हैं, जो शरीर के खास हिस्से के लिए फायदेमंद होते हैं और आपको सेहतमंद रखते हैं।

गाजर और रोशनी का रिश्ता

अखरोट के बारे में हम बता चुके हैं। इस क्रम में अगला नंबर गाजर का है। इसे काटकर देखिए तो यह बिल्कुल आंखों के बीच के गोल हिस्से की तरह दिखता है। तभी तो इसे खाने से आंखों की रोशनी ठीक रहती है। इसमें विटामिन और बीटा केरोटीन जैसे एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो आंखों की रोशनी को खराब होने से बचाते हैं।

स्तन कैंसर से क्यों बचाता है संतरा

संतरे को बीच के काटने पर जो आकृति उभरती है वह स्तन के मैमोग्राम से मिलती जुलती है। संतरे एवं साइट्रिक एसिड वाले इसी आकार के अन्य फलों में पाया जाने वाला लिमोनॉयड्स का प्रयोगशाला में जानवरों पर प्रयोग सफल रहा है और इससे कैंसर का असर करने में मदद मिली है।

दिल का दोस्त है टमाटर

टमाटर को काटने पर उसके अंदर से भी दिल की तरह चैंबर निकलते हैं। वैज्ञानिक शोधों से साबित हुआ है कि इसमें पाए जाने वाले लाइकोपिन नामक पदार्थ के कारण टमाटर खाने वालों से दिल की बीमारियां दूर रहती हैं। टमाटर में थोड़ा मक्खन, घी या कोई भी फैट मिलाकर खाने से लाइकोपिन का असर दस गुना तक बढ़ जाता है।

अदरक को ध्यान से देखिए

अदरक के फायदे के कायल लोग से इसके मुरीद है लेकिन कई लोग इसके स्वाद के कारण इससे कोसों दूर रहना पसंद करते हैं। खैर, कभी ध्यान से इसे देखिए। यह बिल्कुल आमाशय (स्टमक) की तरह दिखता है। अपने देश में तो इसके गुणों से हम सदियों से परिचित हैं, लेकिन यूएस ड्रग एडिमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए) तक ने इसका लोहा मान लिया है। इसकी सूची में अदरक के तेल को अजीर्ण और उल्टी में इस्तेमाल के लिए रामबाण बताया गया है।

एक बींस का नाम किडनी बींस क्यों है

कभी आपने सोचा है कि राजमा और फ्रेंच बींस या इस परिवार के अन्य बींस का आकार किडनी की तरह क्यों होता है। क्योंकि इनके सेवन से किडनी सेहमंद रहती है। यहां तक कि एक बींस का नाम ही किडनी बींस है। इसमें फाइबर, मैग्नीशियम और पोटैशियम पाया है। फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है, जबकि मैग्नीशियम और पोटैशियम किडनी स्टोन की समस्या से बचाता है।

आपके चेहरे पर मुस्कान लाता है केला

केला शायद दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला फल है और इसे कंप्लीट फूड भी कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके अंदर ट्रिप्टोफैन नामक एक प्रोटीन पाया जाता है जो केले के पचने के बाद सेरोटोनिन में बदल जाता है। यही सेरोटोनिन हमारे मूड को बुस्ट करता है। इसलिए, अगली बार जब भी आपका मूड डाउन हो तो उसे अप करने के लिए केला जरूर खाइएगा। शर्तिया फायदा होगा।

मशरूम भले न खाते हों लेकिन फायदा जान लीजिए

मशरूम को बीच के काटने पर यह बिल्कुल हमारे कान की तरह दिखता है। कान से ऊंचा सुनने वालों में मशरूम के सेवन से सुधार देखने को मिला है। कान के अलावा यह हड्डियों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें काफी मात्रा में विटामिन डी भी पाया जाता है।

जानिए, शकरकंद और पैंक्रियाज का रिश्ता

पैंक्रियाज का हमारे शरीर में काफी अहम रोल होता है। इस अंग का आकार शकरकंद से काफी मिलता-जुलता है। शोध से पता चला है कि शकरकंद में पाया जाने वाले तत्व पैंक्रियाज के ग्लाइसेमिक इंडेक्स को ठीक रखते हैं जिससे यह अंग सामान्य रूप से काम करता है।

अस्थमा से क्यों बचाता है अंगूर

हमारे फेफड़े के अंदर अंगूर के आकार की कई थैलीनुमा ग्रंथियां होती हैं जो कॉर्बन डाइ ऑक्साइड और ऑक्सीजन के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं। इन्हें एल्वियोली कहा जाता है। अंगूर के सेवन से फेफड़े के संक्रमण और एलर्जी से होने वाली अस्थमा जैसी बीमारियों से लड़ने में फायदा मिलता है।

प्याज के फायदे जान हो जाएंगे हैरान

प्याज को काटकर सलाद के रूप में खूब खाया जाता है। लोग इसे अलग-अलग आकार में काटते हैं, लेकिन गभी गोलाकार काटकर देखिए। यह आकार बिल्कुल इनसान की कोशिकाओं से मिलता है। शोधों से पता चला है कि प्याज में पाए जाने वाले फाइटोकेमिकल कोशिकाओं के अपशिष्ट पदार्थों की सफाई करते हैं और उन्हें स्वस्थ रखते हैं। हम सभी जानते हैं कि ये कोशिकाएं ही जीवन का आधार हैं। कोशिकाओं से ही मिलकर ऊतक (टिश्यू) बनते हैं और कई टिश्यू मिलकर ऑरगन यानी अंग का निर्माण करते हैं।

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कई जानलेवा बीमारियों के इलाज में रामबाण है मशरूम

अमेरिका की पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मार्गरीटा टी कैंटोर्न के अनुसार, यह निष्कर्ष चूहों पर किए गए अध्ययन के आधार पर निकाला गया है। चूहों को ह्वाइट बटन मशरूम खाने को दिया गया। इससे उनके गट (आंत) माइक्रोब्स के संयोजन में बदलाव देखने को मिला। इससे शॉर्ट चेन फैटी एसिड और खासतौर पर सुचिनेट एसिड की ज्यादा उत्पत्ति हुई। यह जाहिर हो चुका है कि सुचिनेट और प्रोपियोनेट ग्लूकोज उत्पत्ति को नियंत्रित करने वाले जीन में बदलाव कर सकते हैं।

कैंसर के लिए मशरूम
मशरूम का सेवन करने से प्रोस्‍टेट और ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाव होता है। क्योंकि इसमें बीटा ग्‍लूकन और कंजुगेट लानोलिक एसिड होता है जो कि एक एंटी कासिजेनिक प्रभाव छोड़ते हैं। कई शोध भी इस बात का समर्थन करती हैं कि मशरूम में मौजूद तत्व कैंसर के प्रभाव को कम करते हैं।

मशरूम है मधुमेह रोगियों के लिए उत्तम आहार
मधुमेह रोगियों के लिए मशरूम उत्तम आहार माना जाता है। मशरूम में शर्करा (0.5 प्रतिशत) और स्टार्च की मात्रा बहुत कम होते हैं। इनमें वो सब कुछ होता है जो किसी मधुमेह रोगी को चाहिये। मशरूम में विटामिन, मिनरल और फाइबर होते हैं। साथ ही इमसें फैट, कार्बोहाइड्रेट और शुगर भी नहीं होती, जो कि मधुमेह रोगी के लिये जानलेवा है। यह शरीर में इनसुलिन के निर्माण में भी मदद करता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक मशरूम में वसा भी नहीं होती, इसलिए मोटापे से बचाने के लिए भी इसका सेवन लाभप्रद होता है। इसके साथ मोटापे से ग्रस्‍त लोगों के लिए भी यह उपयोगी आहार है। मशरूम की सभी किस्में कैंसर, एचआईवी तथा अन्य खतरनाक बीमारियों में भी फायदेमंद पाई गई हैं।

हृदय रोगों से बचाव
मशरूम में हाइ न्‍यूट्रियंट्स पाये जाते हैं, इसलिये ये दिल के लिये भी अच्‍छे होते हैं। साथ ही मशरूम में कुछ प्रकार के एंजाइम और रेशे पाए जाते हैं जो हमारे कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करते हैं।

मैटाबॉलिज्‍म करे मजबूत
मशरूम में विटामिन ‘बी’ होता है जो कि भोजन को ग्‍लूकोज़ में बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन बी-2 और बी-3 भी मैटाबॉलिज्‍म को दुरुस्त रखते हैं। इसलिए मशरूम खाने से मैटाबॉलिज्‍म बेहतर बना रहता है।

पेट के विकार करे दूर
ताजे मशरूम में पर्याप्त मात्रा में रेशे (लगभग 1 प्रतिशत) व कार्बोहाइड्रेट तन्तु होते हैं, इसका सेवन करने से कब्ज, अपचन, अति अम्लीयता सहित पेट के विभिन्न विकारों से बचाव होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर में कोलेस्ट्राल एवं शर्करा का अवशोषण भी कम होता है।

हीमोग्लोबिन रखे ठीक
मशरूम का सेवन रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है। इसके अलावा इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है जो केवल मांसाहारी खाध पदार्थो में होता है। अत: लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी की शिकार अधिकांश शाकाहारी ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये ये सर्वोत्तम आहार है।

कुपोषण से बचाएं
मशरूम गर्भवस्था, बाल्यावस्था, युवावस्था तथा वृद्धावस्था तक सभी चरणों में उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, विटामिन, खनिज, वसा तथा कार्बोहाइड्रेट बाल्यावस्था से युवावस्था तक कुपोषण से बचाते हैं। इसलिए डॉक्टर भी इसे खाने की सलाह देते हैं।

विटामिन से भरपूर है मशरूम
मशरूम की सब्‍जी हर किसी को पसंद होती है और भला हो भी क्यों ना, यह स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त है, यह आसानी से पाचक भी है और बीमारियों को दूर करने में भी मददगार है। इसमें एमीनो एसिड, मिनरल, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं। छतरी के आकार के मशरूम को चीन में महा औषधि तो रोम के लोग इसे र्इश्वर का आहार मानते हैं। पौष्टिकता की दृष्टि से मशरूम शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों के भोजन में अहम स्थान रखता है।

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मानसून के बदलते मौसम में स्वस्थ रहने के लिए खान-पान में क्या करें शामिल

जीवनशैली और नजरिए में थोड़ा सा फर्क लाकर हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बना सकते हैं…

बरसात में इनका सेवन जरूरी

तुलसी: तुलसी दल एक उत्कृष्ट रसायन है। यह गर्म और त्रिदोषशामक है। रक्तविकार, ज्वर, वायु, खांसी एवं कृमि निवारक है तथा हृदय के लिए हितकारी है। सफेद तुलसी के सेवन से त्वचा, मांस और हड्डियों के रोग दूर होते हैं। काली तुलसी के सेवन से सफेद दाग दूर होते हैं। तुलसी की जड़ और पत्ते ज्वर में उपयोगी हैं। तुलसी की चाय पीने से ज्वर, आलस्य, सुस्ती तथा वातपित्त विकार दूर होते हैं, भूख बढ़ती है।

शहद: शहद का सेवन हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। कारण, शहद में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं और यह एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है। शक्कर की तुलना में शहद में बीस प्रतिशत कम कैलोरी होती है। इसलिए शहद के सेवन से शरीर को भरपूर ऊर्जा और शक्कर की तुलना में कम कैलोरीज मिलती हैं। शहद में अन्य पोषक तत्वों के अलावा शरीर के लिए जरूरी विटामिन्स बी-1, बी-2, बी-5, बी-6 और विटामिन सी पाए जाते हैं। ये विटामिन्स हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।

हर्बल टी: इसमें सिट्रॉल नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो कई बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से बचाता है। इससे पेट साफ रहता है और रक्त संचरण में सुधार होता है। इसका सेवन एग्जि़मा और त्वचा संबंधी संक्रमणों से भी बचाता है। आप चाहे तो इसमें अदरक, काली मिर्च और शहद का भी प्रयोग कर सकते हैं।

सूखे मेवे: सूखे मेवे में जिंक और विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है। जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बहुत सहायता करते हैं। इसलिए अपनी डाइट में हर रोज किसी भी रूप में एक मुट्ठी मेवों को शामिल करें। शरीर भीतर से मजबूत होगा और बदलते मौसम का शरीर पर असर नहीं पड़ेगा।

लहसुन: खाली पेट कच्‍चे लहसुन से ब्‍लड प्रेशर नियंत्रित रहता है एवं भुना हुआ लहसुन खाने से शरीर की आंतरिक सफाई होती है। लहसुन से हमारा वजन भी कंट्रोल में रहता है। यह एक प्राकृतिक एंटी-बायोटिक का काम करता है। लहसुन आपके शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ायेगा और टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकाल फेकेगा।

करेला: करेले में कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन पाया जाता है। करेला खाने से खून साफ होता है और ये हीमोग्लोबिन बढ़ाने का अच्छा स्त्रोत है। लीवर संबंधी रोगों के लिये करेला बहुत लाभकारी है। श्वांस और दमे के रोगियों को करेले की सादी सब्जी का सेवन करना चाहिये। करेला हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।

नीबू: नीबू में ए, बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा है। इसमें पोटेशियम, लोहा, सोडियम, मैगनेशियम, तांबा, फास्फोरस और क्लोरीन तत्त्व तो हैं ही, प्रोटीन, वसा और कार्बोज भी पर्याप्त मात्रा में हैं। विटामिन सी से भरपूर नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है और कोलेस्ट्राल भी कम करता है।

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जब पस्‍त हुए चिकित्‍सक, तो काम आए योगगुरु

यह सच मध्‍यप्रदेश के एक छोटे जिले मंदसौर का है। योग ने मंदसौर के 50 से अधिक बुजुर्गों को 70 और 80 की उम्र में फिर से युवा बना दिया है। दशपुर कुंज, रामटेकरी और मेघदूत नगर में प्रतिदिन सुबह योग के लिए 200 से अधिक लोग जुटते हैं। इनमें ऐसे बुजुर्ग भी हैं, जो कुछ समय पहले चलने में मोहताज थे। अब युवाओं की तरह दौड़ लगा रहे हैं। शाजापुर में तो योग से पेरालिसिस तक ठीक होने का उदाहरण सामने आया है।

1- 70 के पारिख कर रहे हैं कमाल

मध्‍यप्रदेश के मंदसौर जिले के रहने वाले दिनेशचंद्र पारिख 70 वर्ष के हैं। पारिख का कहना है कि हम योग के लाभ को शब्‍दों में बयां नहीं कर सकते । वो बताते हैं कि नौ साल पहले हम योग से जुड़े। इसके बाद योग साधना से कुछ लाभ दिखा और मेरी दिलचस्‍पी इसमें गहरी होती गई। धीरे-धीरे योग से शारीरिक और मानसिक लाभ मिला और आस्‍था पैदा होने लगी। उन्‍होंने कहा कि 2008 से मैं नियमित योग कर रहा हूं।

स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त पारिख बताते हैं कि घुटने में तकलीफ से सीढि़यां चढ़ना दूभर हो गया था। इस परेशानी से आजिज आकर मैंने एक साल पहले ही सेवानिवत्ति का मन बना लिया था। चिकित्सकों ने घुटने बदलने की सलाह दी। ऐसे में योग गुरु सुरेंद्र जैन के संपर्क में आकर योग शुरू किया। इससे चलना-फिरना आसान हो गया। छह माह में पैर ठीक हो गया।

2- अब सीढ़ियों पर दौड़ते हैं 70 वर्षीय पामेचा

इसी जिले के निवासी 70 वर्षीय पामेचा 10 वर्ष पूर्व योग से जुड़े। उनका योग में अपार विश्‍वास है। पमोचा कहते हैं कि वह दस वर्षों से निरंतर योगाभ्‍यास कर रहे हैं। उनका यह विश्‍वास अनायास नहीं है। योग से जुड़ने से पहले पोचा चलने-फ‍िरने में मोहताज थे। आज वह योगाभ्‍यास से दौड़ सकते हैं, सीढि़यों पर चढ़ सकते हैं। पामेचा कहते हैं कि 2008 में 70 वर्ष की उम्र में योग से जुड़ा, तब घर की सी़ढ़ियां एक पैर से ही चढ़ पाता था, दूसरा पैर काम नहीं करता था। योग शुरू करते ही पैर ठीक हो गया। मंदसौर के भंवरलाल पामेचा योग को जीवन के लिए हवा और भोजन की तरह ही जरूरी मानते हैं।

3- बीमा एजेंट यशपाल शर्मा पेरालिसिस ठीक हो गया

बीमा एजेंट यशपाल शर्मा को वर्ष 2001 में हार्ट अटैक हुआ। उनके दुखों का यहीं अंत नहीं हुआ। कुछ दिनों बाद वह पेरालिसिस से भी ग्रसित हो गए। यशपाल का कहना है कि वह तीन वर्षों तक चिकित्‍सकों से इलाज कराते रहे। इलाज में करीब 10 लाख रुपये भी खर्च हो गए। लेकिन स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ा। हमें कोई आराम नहीं मिला। यशपाल ने कहा कि हारा मन योग की शरण जा पहुंचा। योगाभ्‍यास से धीरे-धीरे आराम मिला। और मैं सालभर में पूरी तरह स्वस्थ हो गया। यशपाल अब योग में डिप्लोमा करने के बाद लोगों को योग सिखाने का काम कर रहे हैं।

4- रीतेश के जीवन में योग से फैला उजियारा

शहडोल निवासी रीतेश मिश्रा के जीवन में योग ने उजियारा फैलाया। रीतेश का कहना है कि छह साल की उम्र में ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी चली गई थी। उन्‍होंने बताया कि मैं लगातार 14 साल तक योग कर रोशनी वापस लाने में कामयाब हुआ हूं। मुझे 80 प्रतिशत चीजें नजर आ जाती हैं। मार्कर से लिखे बड़े अक्षर पढ़ लेता हूं। मोबाइल को भी नजदीक से देखकर चला लेते हैं। रीतेश की तारीफ योग गुर बाबा रामदेव भी करते हैं। रीतेश बताते हैं कि बाबा रामदेव से मेरी पहली मुलाकात रीवा में 2008 में हुई थी। इसके बाद योग के प्रति लगाव पैदा हुआ।

रीतेश ने कहा पहले माता-पिता (सीमा मिश्रा व देवानंद मिश्रा) टीवी पर आसन देखकर योग कराते थे। मेरे माता-पिता मुझे लेकर काफी चिंतित थे। खासकर मेरी शिक्षा को लेकर। लेकिन समस्‍याओं के बावजूद रीतेश ने उच्‍च शिक्षा पूरी की। अब वह लोगों को योग सिखा रहे हैं। हाई प्रोफाइल लोगों की योग कक्षा पुलिस लाइन में सुबह साढ़े पांच बजे से शुरू हो जाती है। वेलफेयर फंड से इन्हें कुछ राशि बतौर मेहनताना मिलती है। इनकी योग कक्षा में शामिल रहने वालों में पुलिस अफसर, जज, डॉक्टर, सीए, इंजीनियर्स शामिल हैं।

बता दें कि 21 जून का पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। इसके अलावा 150 से अधिक देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है। पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए करीब 5000 आयोजन हो रहे हैं।

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Photos: जब मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदिवासी महिला को पहनाई चप्पल, पढ़ें, पूरा मामला

अंबेडकर जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को छत्तीसगढ़ के बीजापुर पहुंचे। जहां उन्होंने ‘आयुष्मान भारत’ योजना के तहत देश के पहले वेलनेस सेंटर के लॉन्च कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक आदिवासी महिला को मंच पर चप्पल भेंट की। चरण-पादुका (फुटवियर) योजना के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने इस आदिवासी महिला को चप्पल पहनाईं। इस योजना का लक्ष्य तेंदूपत्ता जमा करने वालों को चप्पलें उपलब्ध कराना है।

पीएम मोदी ने भेंट की चप्पल शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अंबेडकर जयंती के मौके पर छत्तीसगढ़ के बीजापुर पहुंचे। उन्होंने बीजापुर में कई केन्द्रीय और राज्य सरकार की विभिन्न परियोजनाओं की नींव रखी। बीजापुर में पीएम मोदी ने ‘आयुष्मान भारत’ योजना के पहले वेलनेस सेंटर का उद्घाटन किया। स्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने एक आदिवासी महिला को चप्पल का एक जोड़ा भेंट किया। प्रधानमंत्री ने मंच पर ही महिला को चप्पल पहनाई। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, अनंत कुमार के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह भी मौजूद थे। चरण-पादुका योजना के तहत दिया गया चप्पलों का जोड़ा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरण-पादुका योजना के तहत आदिवासी महिला को चप्पलों का जोड़ा दिया।

जानकारी के मुताबिक चरण-पादुका (फुटवियर) योजना का लक्ष्य तेंदूपत्ता जमा करने वालों को चप्पलें उपलब्ध कराना होता है। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि विकास की दौड़ में पीछे छूट गए और पीछे छोड़ दिए गए समुदायों में आज जो चेतना जागी है, वो चेतना बाबा साहब की ही देन है।

योजना के तहत तेंदूपत्ता जमा करने वालों को चप्पलें उपलब्ध कराना है पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि एक गरीब मां का बेटा, पिछड़े समाज से आने वाला आपका ये भाई अगर आज देश का प्रधानमंत्री है, तो ये भी बाबा साहेब की ही देन है। उन्होंने कहा कि आज बाबा साहेब की प्रेरणा से, मैं बीजापुर के लोगों में, यहां के प्रशासन में, यही भरोसा जगाने आया हूं। ये कहने आया हूं कि केंद्र की आपकी सरकार, आपकी आशाओं-आकांक्षाओं, आपकी ‘aspirations’ के साथ खड़ी है।

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एक ऐसी चाय जिससे आपके शरीर में मौजूद हर बीमारी छूमंतर हो जाएगी। उत्तराखंड की मशरूम गर्ल ने खोजा यह फार्मूला!

अब चाय बनाएगी आपकी सेहत। जी हां! पहली बार एक ऐसी चाय को तैयार किया गया है, जो आपके स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं। मशरूम गर्ल कही जाने वाली दिव्या रावत ने इसे तैयार किया है। आपको बता दें कि दिव्या को मशरूम फार्मिंग के लिए राष्ट्रपति से सम्मान मिल चुका है। अब उन्होंने एक ऐसी चाय तैयार की है जिससे आपकी हर बीमारी छूमंतर हो जाएगी।

कीड़ाजड़ी की चाय
दिव्या ने हाल ही में अपनी दून स्थित लैब में कीड़ाजड़ी जैसी बहुमूल्य औषधि उगाई थी। इसके जरिए वो अब अलग अलग पहलुओं पर काम कर रही हैं। बिस्ट्रो रेस्तरां के सहयोग से आप इस फॉर्मूले वाली चाय को आजमा सकते हैं।

अब आपको बताते हैं कि आखिर इस चाय के फायदे क्या क्या हैं;

इस चाय के फायदे
इस चाय में आपको प्रोटीन, पेपटाइड्स, अमीनो एसिड, विटामिन बी-1, बी-2 और बी-12 जैसे पोषक तत्व मिलेंगे। ये सभी पोषक तत्व तत्काल रूप में प्राकृतिक तौर पर शरीर को ताक़त देते हैं।

इतना जरूर है कि कीड़ाजड़ी की चाय आपके स्वास्थ्य में जबरदस्त तरीके से वृद्धि कर सकती है। इस दवा का इस्तेमाल चीन और तिब्बत जैसे इलाकों में किया जाता है।

चीन और तिब्बत में इस्तेमाल
तिब्बत और चीन में इसे यार्सागुम्बा या यारसागम्बू कहा जाता है। प्राकृतिक इलाज के तौर पर इसका

सबसे बेहतर इस्तेमाल किया जाता है। खास बात ये है कि इस चाय का शरीर पर कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। आमतौर पर गंभीर रोगों के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल सांस और गुर्दे की बीमारी में भी किया जाता है।

बुढ़ापा बढ़ने से रोकती है
साथ ही इसके बारे में कहा जाता है कि ये उम्र के असर यानी बुढ़ापे को भी बढ़ने से रोकती है। ये शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से इंसान का शरीर गंभीर से गंभीर बीमारियों से लड़ता है। बुढ़ापे में वजन बढ़ने से रोकने के लिए इससे बेहतर कोई इलाज नहीं है। इस वजह से कीड़ाजड़ी की चाय की दुनियाभर में भी काफी डिमांड है।

हर बीमारी का इलाज
इसके अलावा इसका उपयोग सांस और गुर्दे की बीमारी में भी होता है। दरअसल यार्सागुम्बा यानी कीड़ाजड़ी एक तरह का कीड़ा होता है। ये खास तरह के पौधों पर ही पैदा होता है। सर्दियों में इन पौधों से रस निकलता है और ये पैदा होते हैं। इसका जीवन 6 महीने का ही होता है। अब दिव्या ने इससे एक चाय को तैयार किया है, जो शरीर के लिए बेहद ही फायदेमंद है।

आपको इस चाय की कीमत के बारे में भी बता देते हैं। बकौल दिव्या एक कप की कीमत 1000 रुपये के करीब होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि कीड़ाजड़ी की ही कीमत 2 लाख रुपये किलोग्राम है। इसकी महीन सी मात्रा ही आपके शरीर में मौजूद हर बींमारी से लड़ने में कारगर होती है। इसलिए अब इस चाय का सेवन कीजिए और आपके शरीर की हर बीमारी छूमंतर हो जाएगी।

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(Source: दिव्या रावत सोशल मीडिया)

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सरकार ने चीनी पर खत्म की एक्सपोर्ट ड्यूटी, इंडस्ट्री को मिली राहत

सरकार ने डॉमेस्टिक मार्केट में चीनी की गिरती कीमतों को थामने के लिए उस पर 20 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी हटा दी है। सरकार के इस फैसले से शुगर इंडस्ट्री को खासी राहत मिली है, जो इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही है। इस संबंध में सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार ने कहा कि ड्यूटी खत्म होने से सरकार को मौजूदा एक्सपोर्ट वॉल्यूम पर सालाना 75 करोड़ रुपए का नुकसान होगा।

 

इंडस्ट्री ने की थी डिमांड
इंडस्ट्री ने डॉमेस्टिक सप्लाई को थामने और इस सीजन रिकॉर्ड आउटपुट को देखते हुए कीमतों को सही लेवल पर बनाए रखने में मदद करने के लिए ड्यूटी हटाने की मांग की थी। चीनी पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को हटाने की मांग को लेकर खाद्य मंत्रालय ने दो बार अपनी सिफारिश वित्त मंत्रालय को भेजी थी। चीनी मिलों के ऑर्गनाइजेशन ने भी  सरकार से एक्सपोर्ट ड्यूटी हटाने का अनुरोध किया था।
केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कुछ दिन पहले कहा था कि रिकॉर्ड प्रोडक्शन को देखते हुए उन्होंने फरवरी में चीनी का निर्यात शुल्क घटाने की अपनी सिफारिश वित्त मंत्रालय को भेजी है।

 

इस साल चीनी के रिकॉर्ड प्रोडक्शन की उम्मीद
चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक देश में इस साल चीनी का उत्पादन 2.95 करोड़ टन होने की उम्मीद है, जो गत साल से 92 लाख टन ज्यादा है। चीनी के तीन प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में क्रमश: 93.8 लाख टन, 84.3 लाख टन और 35.1 लाख टन चीनी का प्रोडक्शन हुआ है। पिछले शुगर सीजन 2016-17 (अक्टूबर-सितंबर) में देश में 2.03 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

 

किसानों का बकाया हुआ 20 हजार करोड़ रु
इस्मा ने कहा कि चीनी का स्टॉक बढ़ने से घरेलू बाजार में इसकी कीमत घटकर काफी कम हो गई है जिससे मिलों का घाटा लगातार बढ़ रहा है। इस्मा के मुताबिक, जनवरी तक गन्ने की बकाया राशि बढ़कर 14,000 करोड़ रुपए थी जो इस महीने के अंत तक बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है।

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मशरूम के होते हैं अनेक फायदे: घर बैठे पाइये 100% सेहतमंद मशरूम प्रोडक्ट्स

मशरूम स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त रोगरोधक सुपाच्य खाध पदार्थ है। इसमें एमीनो एसिड, खनिज, लवण, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं।

सेहत का खजाना ‘मशरूम’

वेजिटेरियन हों या फिर नॉन वेजिटेरियन, मशरूम की सब्‍जी हर किसी को पसंद होती है। और भला हो भी क्यों ना, यह स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त रोगरोधक सुपाच्य खाध पदार्थ जो है। इसमें एमीनो एसिड, खनिज, लवण, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं। चीन में तो इसे महौषधि एवं रसायन सदृश्य माना जाता है। वहीं रोम के लोग मशरूम को र्इश्वर का आहार मानते हैं। भारत में उगने वाले मशरूम की दो सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रजातियां वाइट बटन मशरूम और ऑयस्टर मशरूम है।

सेहत का खजाना 'मशरूम'

प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए मजबूत

मशरूम में मौजूद एंटी ऑक्‍सीडेंट हमें हानिकारक फ्री रेडिकल्‍स से बचाते हैं। मशरूम का सेवन करने से शरीर में एंटीवाइरल और अन्‍य प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है, जो शरीर की कोशिकाओं को रिपेयर करता है। यह एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है जो कि माइक्रोबियल और अन्‍य फंगल संक्रमण को भी ठीक करता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए मजबूत

हृदय रोगों से बचाव

मशरूम में हाइ न्‍यूट्रियंट्स पाये जाते हैं, इसलिये ये दिल के लिये भी अच्‍छे होते हैं। साथ ही मशरूम में कुछ प्रकार के एंजाइम और रेशे पाए जाते हैं जो हमारे कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करते हैं।

हृदय रोगों से बचाव

कैंसर के लिए मशरूम

मशरूम का सेवन करने से प्रोस्‍टेट और ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाव होता है। क्योंकि इसमें बीटा ग्‍लूकन और कंजुगेट लानोलिक एसिड होता है जो कि एक एंटी कासिजेनिक प्रभाव छोड़ते हैं। कई शोध भी इस बात का समर्थन करती हैं कि मशरूम में मौजूद तत्व कैंसर के प्रभाव को कम करते हैं।

कैंसर के लिए मशरूम

मधुमेह

मधुमेह रोगियों के लिए मशरूम उत्तम आहार माना जाता है। मशरूम में शर्करा (0.5 प्रतिशत) और स्टार्च की मात्रा बहुत कम होते हैं। इनमें वो सब कुछ होता है जो किसी मधुमेह रोगी को चाहिये। मशरूम में विटामिन, मिनरल और फाइबर होते हैं। साथ ही इमसें फैट, कार्बोहाइड्रेट और शुगर भी नहीं होती, जो कि मधुमेह रोगी के लिये जानलेवा है। यह शरीर में इनसुलिन के निर्माण में भी मदद करता है।

मधुमेह

मोटापा से बचाए

मशरूम में लीन प्रोटीन होता है जो कि वजन घटाने में मददगार होता है। मोटापा कम करने वालों को प्रोटीन डाइट लेने की सलाह दी जाती है, जिसके लिए मशरूम खाना बेहतर विकल्पों में से एक माना जाता है।

मोटापा से बचाए

मैटाबॉलिज्‍म करे मजबूत

मशरूम में विटामिन ‘बी’ होता है जो कि भोजन को ग्‍लूकोज़ में बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन बी-2 और बी-3 भी मैटाबॉलिज्‍म को दुरुस्त रखते हैं। इसलिए मशरूम खाने से मैटाबॉलिज्‍म बेहतर बना रहता है।

मैटाबॉलिज्‍म करे मजबूत

पेट के विकार करे दूर

ताजे मशरूम में पर्याप्त मात्रा में रेशे (लगभग 1 प्रतिशत) व कार्बोहाइड्रेट तन्तु होते हैं, इसका सेवन करने से कब्ज, अपचन, अति अम्लीयता सहित पेट के विभिन्न विकारों से बचाव होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर में कोलेस्ट्राल एवं शर्करा का अवशोषण भी कम होता है।

पेट के विकार करे दूर

हीमोग्लोबिन रखे ठीक

मशरूम का सेवन रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है। इसके अलावा इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है जो केवल मांसाहारी खाध पदार्थो में होता है। अत: लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी की शिकार अधिकांश शाकाहारी ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये ये सर्वोत्तम आहार है।

हीमोग्लोबिन रखे ठीक

कुपोषण से बचाए

मशरूम गर्भवस्था, बाल्यावस्था, युवावस्था तथा वृद्धावस्था तक सभी चरणों में उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, विटामिन, खनिज, वसा तथा कार्बोहाइड्रेट बाल्यावस्था से युवावस्था तक कुपोषण से बचाते हैं। इसलिए डॉक्टर भी इसे खाने की सलाह देते हैं।

कुपोषण से बचाए

ट्यूमर को रोके

मशरूम में कालवासिन, क्यूनाइड, लेंटीनिन, क्षारीय एवं अम्लीय प्रोटीन की उपस्थिति मानव शरीर में टयूमर बनने से रोकती है। साथ  ही इसमें लगभग 22-35 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। जो पौधों से प्राप्त प्रोटीन से कही अधिक होती है तथा यह शाकभाजी व जन्तु प्रोटीन के मध्यस्थ का दर्जा रखता है।
इसमें प्यूरीन, पायरीमिडीन, क्यूनान, टरपेनाइड इत्यादि तत्व भी होते है जो जीवाणुरोधी क्षमता प्रदान करते है।

ट्यूमर को रोके

मशरूम और AdTo.In

आपको जानकर ख़ुशी होगी की हमारी कंपनी उत्तराखंड की एक अग्रणी मशरूम उत्पादक कंपनी सौम्या फूड्स के साथ हाथ मिला चुकी है और जल्द ही AdTo पर मशरूम के कई उत्पादों जैसे ओएस्टर मशरूम, बटन मशरूम, मिल्की मशरूम पिकल, बटन मशरूम पिकल, ओएस्टर मशरूम पिकल, मिक्स मशरूम पिकल, शिटाके और गैनोडर्मा मशरूम के साथ साथ औषिधीय गुणों से युक्त पहाड़ों की अनमोल खाद्य वस्तु कीड़ाजड़ी भी आप ऑनलाइन आर्डर कर घर बैठे प्राप्त कर सकेंगे।
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फिटकरी के फायदे जानकर आप दंग रह जायेंगे

हम बात करने वाले है कि फिटकरी हमारे जीवन में कैसे उपयोगी साबित हो सकती है.दोस्तों हर घर में फिटकरी जरूर रखना चाहिए. आपको बता दें फिटकरी केवल पानी ही साफ करने के काम ही नहीं आती बल्कि इसके कई हेल्थ बेनिफिट्स भी हैं. यह न केवल चोट, कटने-छिलने से हुई ब्लीडिंग रोकने में सहायक होती है बल्कि स्किन डिजीज, झुर्रियां दूर करने, खांसी, पाइल्स जैसी कई प्रॉब्लम्स में फायदेमंद होती है. फिटकरी में मैग्नीशियम सल्फेट होता है जो हमारे शरीर को हेल्दी बनता है.तो आइये जान लेते है इसके 5 बेस्ट फायदों के बारे में.

 

फिटकरी के 5 बेस्ट फायदे-

  1. फिटकरी के पाउडर को एक चम्मच ले और एक गिलास पानी में घोल लें.इसे पीने से यूरिन की जलन ठीक होती है.
  2. फिटकरी के पानी से बाल धोने से बालों की गंदगी और डैंड्रफ साफ हो जाते हैं. जुओं से भी छुटकारा मिलता है.
  3. आग में भूनी हुई फिटकरी को मिश्री के साथ लेने से अस्थमा के मरीजों को फायदा होता है.
  4. अगर हल्का बुखार है तो एक चम्मच भुनी हुई फिटकरी में दो चुटकी शक्कर मिलाकर देने से बुखार में आराम मिलता है.
  5. सांस की बदबू और दांतों में दर्द होने पर फिटकरी के पानी से गरारा करने से फायदा होता है.

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आधार से भारत सरकार के 9 बिलियन डॉलर बचे: नंदन नीलेकणी

इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी ने आधार कार्ड पर बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि भारत सरकार की आधार कार्ड स्कीम ने करीब 1 बिलियन लोगों को जोड़ा है जिससे सरकारी खजाने के 9 अरब डॉलर बचे हैं.

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, इस योजना को यूपीए सरकार ने लॉन्च किया था. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे काफी जोरशोर से सपोर्ट किया. नीलेकणी ने ये बातें वर्ल्ड बैंक पैनल में डिजिटल इकोनॉमी पर चर्चा के दौरान कही. नीलेकणी बोले कि विकासशील देशों के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना आसान है. आधार कार्ड अब 100 करोड़ लोगों के पास है.

नीलेकणी ने कहा कि आधार कार्ड के यूनिक नंबर होने के कारण अब आप लोगों की पहचान कर सकते हो. जिससे पैसा सीधे उनके खाते में जाता है. उन्होंने कहा कि लगभग 50 करोड़ लोगों ने अपनी आईडी को बैंक खाते से जोड़ दिया है. भारत सरकार लगभग 12 बिलियन डॉलर सीधा बैंक खातों में भेज रही है, जो कि दुनिया का सबसे बड़ा कैश ट्रांसफर सिस्टम है.