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ताजमहल Ownership केस: सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां का वक्फनामा पेश नहीं कर पाया सुन्नी बोर्ड

ताजमहल पर मालिकाना हक जताने वाला सुन्नी वक्फ बोर्ड मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां के दस्तखत वाला वक्फनामा पेश नहीं कर पाया। इस पर, चीफ जस्टिस ने कहा कि बोर्ड कोर्ट का वक्त बर्बाद कर रहा है। बता दें कि वक्फ बोर्ड ने पिछली सुनवाई में दावा किया था कि मुगल बादशाह शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में ताजमहल का वक्फनामा किया था। इस पर कोर्ट ने सबूत मांगे थे। यह विवाद सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच चल रहा है।

दावेदारी पर नरम पड़ा वक्फ बोर्ड
– ताजमहल पर दावेदारी कर रहा वक्फ बोर्ड मंगलवार को कोर्ट में नरम नजर आया। उसने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने कहा कि उसे कोई दिक्क्त नहीं है कि ताजमहल की देखरेख एएसआई करे, लेकिन बोर्ड का यहां नमाज पढ़ने और उर्स जारी रखने का हक बरकरार रहे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड से कहा कि उसे इस बारे में एएसआई से बात करनी चाहिए। इस पर एएसआई ने विचार करने के लिए वक्त मांगा। केस की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था- शाहजहां जेल में थे तो दस्तखत कैसे किए?
– पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने वक्फ बोर्ड के वकील से पूछा था, “शाहजहां ने वक्फनामे पर दस्तखत कैसे किए? वह तो जेल में बंद थे। वह हिरासत से ही ताजमहल देखते थे।”
– कोर्ट ने शाहजहां के दस्तखत वाला हलफनामा पेश करने को कहा तो बोर्ड के वकील ने एक हफ्ते की मोहलत मांगी थी।

बोर्ड के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था स्टे
– सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जुलाई 2005 में आदेश जारी कर ताजमहल को अपनी प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर करने को कहा था।
– एएसआई ने इसके खिलाफ 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस पर कोर्ट ने बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था।
– बता दें कि वक्फ का मतलब किसी मुस्लिम द्वारा धार्मिक, शैक्षणिक या चैरिटी के लिए जमीन का दान देना होता है।

एएसआई कहता है- ताजमहल भारत सरकार का
– एएसआई की ओर से पेश एडवोकेट एडीएन राव ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने जैसा दावा किया है, वैसा कोई वक्फनामा नहीं है।
– 1858 की घोषणा के मुताबिक, आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से ली गई संपत्तियों का स्वामित्व ब्रिटिश महारानी के पास चला गया था। वहीं, 1948 के कानून के तहत यह इमारतें अब भारत सरकार के पास हैं।

1666 में हुआ था शाहजहां का निधन
– बता दें कि वारियाना हक की लड़ाई के चलते शाहजहां के बेटे औरंगजेब ने जुलाई 1658 में उन्हें आगरा के किले में नजरबंद कर दिया था। अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाने के करीब 18 साल बाद 1666 में शाहजहां का निधन आगरा के किले में ही हुआ था।

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पैगंबर मोहम्मद की वंशज हैं यहां की महारानी, सामने आए ऐसे दावे

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद की वंशज हैं। ये सुनने में भले ही थोड़ा अजीब लगे, लेकिन मोरक्को के एक न्यूजपेपर ने ऐसा दावा किया है। अखबार ने ये दावा एक रिसर्च स्टडी के हवाले से किया है, जो खबरों में है। हालांकि, महारानी के पैगंबर मोहम्मद की वंशज होने का ये दावा कोई पहली बार नहीं किया गया है। 1986 में भी इसी तरह की एक रिपोर्ट सामने आई थी।

शाही फैमिली की बुक में भी ऐसे दावे…

– मोरक्को के अखबार के मुताबिक, शाही फैमिली की वंशावली की 43 पीढ़ियों को देखने के बाद इतिहासकारों का दावा है कि क्वीन एलिजाबेथ सेकंड असल में पैगंबर की दूर की रिश्तेदार हैं।
– ब्रिटिश वेबसाइट डेलीमेल ने भी दावा किया है कि इसी तरह की रिसर्च 1986 में बुर्केज पीराज (Burke’s Peerage) में भी पब्लिश हुई थी। इस बुक को शाही वंशावली के बारे में ऑथराइज्ड ब्रिटिश गाइड माना जाता है।
– हिस्टोरियंस के मुताबिक, एलिजाबेथ सेकंड की ब्लडलाइन 14वीं सदी के अर्ल ऑफ कैंब्रिज से जुड़ी हैं। ये ब्लडलाइन मध्यकालीन मुस्लिम स्पेन से लेकर पैगंबर साहब की बेटी फातिमा तक जाती हैं।
– फातिमा पैगंबर मोहम्मद की बेटी थीं और उनके वंशज स्पेन के राजा थे। इन्हीं से महारानी एलिजाबेथ का संबंध बताया जा रहा है। यही वजह है कि उन्हें पैगंबर का वंशज बताया जा रहा है।

ऐसे जोड़ा गया कनेक्शन

– मोरक्को के अखबार में इस पर आर्टिकल देने वाले हामिद अल अवनी ने लिखा कि 11 वीं सदी में स्पेन के सेविले के किंग अबू अल कासिम मुहम्मद बिन अब्बाद पैगंबर साहब की बेटी फातिमा के वंशज थे।
– उनकी बेटी का नाम जायदा था। बुर्केज पीराज की स्टडी के मुताबिक, महारानी मुस्लिम प्रिसेंज जायदा की फैमिली से ताल्लुक रखती हैं।
– जायदा बाद में सेविले के शासक अल मुतामिद इब्न अब्बाद की चौथी वाइफ बनीं, जिनका सांचो नाम का एक बेटा था।
– अब्बादी साम्राज्य पर हमला हुआ तो जायदा सेविले भागकर स्पेन के राजा अल्फोंसो सिक्स्थ के पास पहुंच गई। वहां उन्होंने धर्म परिवर्तन करा लिया और ईसाई बन गई। उनका नाम जायदा से इसाबेला हो गया।
– इसके बाद उनके बेटे सांचो के वंशज ने थर्ड अर्ल ऑफ कैंब्रिज रिचर्ड ऑफ कोनिसबर्ग से शादी कर ली। अर्ल ऑफ कैंब्रिज इंग्लैंड के राजा एडवर्ड तृतीय के पोते थे।

दावों को लेकर मतभेद
– कुछ हिस्टोरियन इसके सपोर्ट में नहीं हैं, लेकिन इस दावे का प्रारंभिक मध्ययुगीन स्पेन की वंशावली के रिकॉर्ड ने समर्थन किया है। मिस्र के पूर्व ग्रैंड मुफ्ती अली गोमा द्वारा भी इसे सत्यापित किया गया था।

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CWG 2018: राहुल ने दिलाया भारत को चौथा गोल्ड, वेटलिफ्टिंग में हैटट्रिक

कॉमनवेल्थ गेम्स में शुक्रवार को भारतीय वेटलिफ्टर्स ने दो गोल्ड मेडल जीते। वेटलिफ्टर सतीश कुमार शिवलिंगम ने शनिवार को 77 किग्रा कैटेगरी में गोल्ड जीता। उधर, 85 किग्रा कैटेगिरी में वेंकट राहुल रागला ने भी भारत को सोना दिलाया। राहुल मां की बीमारी की वजह से रियो ओलंपिक में दावेदारी नहीं कर पाए थे। गोल्ड कोस्ट में भारत को अब तक 4 स्वर्ण पदक मिल चुके हैं।

बता दें कि भारत पहली बार 1934 में शामिल हुआ था। इस तरह 84 साल में भारत वेटलिफ्टिंग में अब तक 42 गोल्ड जीत चुका है।

सतीश ने कुल 317 किग्रा वजन उठाया

– 25 साल के सतीश ने स्नैच के पहली कोशिश में 136, दूसरी में 140 और तीसरी में 144 किग्रा का वजन उठाया। क्लीन एंड जर्क में पहली कोशिश में 169 और दूसरी में 173 किग्रा का वजन उठाया। इसके साथ ही उनका गोल्ड पक्का हो गया। इसलिए उन्होंने तीसरी कोशिश नहीं की।

– सतीश ने 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में इसी कैटेगरी (77 किग्रा) में गोल्ड जीता था। उन्होंने तब 328 (स्नैच में 149 और क्लीन एंड जर्क में 179) किग्रा का वजन उठाया था।

– 2016 रियो ओलिंपिक में वह 11वें स्थान पर रहे थे। रियो में उन्होंने 329 (स्नैच में 148 और क्लीन एंड जर्क में 181) किग्रा का वजन उठाया था।

जैक ने सतीश से 5 किग्रा कम वजन उठाया

– जैक ओलिवर ने कुल 312 किग्रा वजन उठाया। उन्होंने स्नैच की पहली कोशिश में 141, दूसरी में 145 किग्रा वजन उठाया। तीसरी कोशिश में 148 किग्रा ऑप्ट किया, लेकिन फाउल कर गए। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने पहली कोशिश में 167 किग्रा वजन उठाया। दूसरी और तीसरी कोशिश में 171 किग्रा ऑप्ट किया, लेकिन दोनों बार फाउल कर गए।

– इसी तरह फ्रांकोइस ने कुल 307 किग्रा वजन उठाया। फ्रांकोइस ने स्नैच की पहली कोशिश में 128, दूसरी में 133 और तीसरी में 136 किग्रा वजन उठाया। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने पहली कोशिश में 162 किग्रा वजन उठाया। दूसरी कोशिश में 168 किग्रा ऑप्ट किया, लेकिन फाउल कर गए। तीसरी कोशिश में 169 किग्रा का वजन उठाया।

कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में चार बार जीत चुके हैं गोल्ड
– सतीश कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में चार बार 2012, 2013, 2015 और 2017 में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।
– 2012 में समोआ के आपिया में उन्होंने 297 (स्नैच में 131 और क्लीन एंड जर्क में 166) किग्रा का वजन उठाया था।
– 2013 में मलेशिया के पेनांग में उन्होंने 317 (स्नैच में 142 और क्लीन एंड जर्क में 175) किग्रा का वजन उठाया था।
– 2015 में पुणे में उन्होंने 325 (स्नैच में 150 और क्लीन एंड जर्क में 175) किग्रा का वजन उठाया था।
– 2017 में गोल्ड कोस्ट में उन्होंने 320 (स्नैच में 148 और क्लीन एंड जर्क में 172) किग्रा का वजन उठाया था।
– 2014 अलमाटी (कजाखिस्तान) वर्ल्ड चैम्पियनशिप में वह 22 स्थान पर रहे थे। वहां उन्होंने 317 (स्नैच में 140 और क्लीन एंड जर्क में 177) किग्रा का वजन उठाया था।
– 2015 में अमेरिका के ह्यूस्टन में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप में उन्होंने स्नैच में 142 किग्रा का वजन उठाया था, लेकिन क्लीन एंड जर्क की तीनों कोशिश में फाउल कर गए थे।
– 2017 में अॅनाहाइम (अमेरिका) वर्ल्ड चैम्पियनशिप में 14वें नंबर पर रहे थे। वहां उन्होंने 328 (स्नैच में 148 और क्लीन एंड जर्क में 180) किग्रा का वजन उठाया था।

सतीश के पिता भी वेटलिफ्टर रहे
– तमिलनाडु के वेल्लोर में जन्मे सतीश सदर्न रेलवे में चेन्नई में सीनियर क्लर्क के पद पर तैनात हैं। उनके पिता सेना से रिटायर हैं। सेना से रिटायर होने के बाद वह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में वाचमैन थे। वह भी वेटलिफ्टर रहे हैं।

वेटलिफ्टिंग में एकमबारम करुणाकरन ने दिलाया था देश को पहला गोल्ड

वेटलिफ्टिंग में भारत के लिए पहली बार गोल्ड एकमबारम करुणाकरन ने जीता था। उन्होंने 1978 एडमोनटन कॉमनवेल्थ गेम्स में फ्लाईवेट ओवरऑल में 205 किग्रा वजन उठाया था। वह तमिलनाडु के तिरुवल्लूर के रहने वाले थे।

अपना बेस्ट करने से चूके वेंकट राहुल

– वेंकट राहुल ने स्नैच की पहली कोशिश में 147 किग्रा वजन उठाया, दूसरी में 151 किग्रा ऑप्ट किया, लेकिन फाउल कर गए। तीसरी कोशिश में 151 किग्रा वजन उठाया।

– क्लीन एंड जर्क में पहली कोशिश में 182 और दूसरी में 187 किग्रा वजन उठाया। तीसरी कोशिश में 191 किग्रा ऑप्ट किया, लेकिन फाउल कर गए।

– हालांकि वह अपना बेस्ट यहां नहीं कर सके। पिछले साल कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में उन्होंने 351 किग्रा वजन उठाया था।

351 किग्रा वजन उठाने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय वेटलिफ्टर हैं वेंकट राहुल
– 16 मार्च, 1997 को आंध्र प्रदेश के स्टुअर्टपुरम में जन्में वेंकट राहुल पहली बार तब सुर्खियों में आए थे, जब 2015 में पुणे में हुई कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में उन्होंने 85 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता था। तब उन्होंने 327 (स्नैच में 146 और क्लीन एंड जर्क में 181) किग्रा वजन उठाया था।

– 2017 में गोल्ड कोस्ट में हुई कॉमंनवेल्थ चैम्पियनशिप में 85 किग्रा कैटेगरी में उन्होंने गोल्ड जीता था। उन्होंने 351 (स्नैच में 156 और क्लीन एंड जर्क में 195) किग्रा वजन उठाया था। इतना वजन उठाने वाले सबसे युवा भारतीय वेटलिफ्टर हैं।

– 2015 में गोल्ड जीतने के बाद वह रियो ओलिंपिक की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन मां की तबियत खराब होने के कारण ट्रायल्स नहीं दे पाए।

84 साल में भारत वेटलिफ्टिंग में 42 गोल्ड जीते

साल गोल्ड मेडल
1978 1
1982 0
1986 भाग नहीं लिया
1990 12
1994 3
1998 3
2002 11
2006 3
2010 2
2014 3
2018 4
कुल 42

पदक तालिका: टॉप 5 देश

देश गोल्ड सिल्वर ब्रॉन्ज कुल
ऑस्ट्रेलिया 17 16 17 50
इंग्लैंड 14 11 4 29
कनाडा 5 5 6 16
भारत 4 1 1 6
स्कॉटलैंड 3 5 6 14

* यह तालिका भारतीय समयानुसार शनिवार शाम 5 बजे तक अपडेट है।

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हाफिज सईद का राजनीतिक दल आतंकी संगठन घोषित; यूएस की कार्रवाई का स्वागत- भारत

अमेरिका ने मंगलवार को मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) को आतंकी संगठन घोषित कर दिया। यह मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का राजनीतिक संगठन है। ये कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब पाकिस्तान में एमएमएल को एक राजनैतिक दल के रूप में मान्यता देने की कवायद चल रही थी। वहीं, भारत ने अमेरिका की कार्रवाई का स्वागत किया है।

एमएमएल के 7 मेंबर भी आतंकी घोषित
– द यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट ने एक संशोधन प्रस्ताव पेश किया। जिसके तहत लश्कर-ए-तैयबा के साथ ही एमएमएल और तहरीक-ए-आजादी-ए-कश्मीर (टीएजेके) को आतंकी संगठनों की लिस्ट में शामिल किया गया।
– इनके अलावा एमएमएल के 7 सदस्यों को लश्कर के लिए काम करने की वजह से आतंकी घोषित किया गया है।

पाकिस्तान ने नहीं की प्रभावी कार्रवाई

– भारतीय विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा, “भारत यूएस की कार्रवाई का स्वागत करता है। मिल्ली मुस्लिम लीग लश्कर-ए-तैयबा का ही दूसरा नाम है। यह लीग आतंकी संगठन के लिए काम कर रही थी। अमेरिका की कार्रवाई भारत के दावे को पुख्ता करती है कि पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।”

हाफिज जारी कर चुका अपना घोषणापत्र
– हाफिज ने 23 मार्च को एमएमएल का घोषणा पत्र जारी कर दिया था। मिल्ली मुस्लिम लीग को एक राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता देने के लिए इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने भी रास्ता साफ कर दिया था।

17 साल पहले लश्कर घोषित किया गया था आतंकी संगठन
– लश्कर-ए-तैयबा का गठन 1980 के दशक में हुआ था। वह 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है। इन हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी।
– अमेरिका ने लश्कर को 26 दिसंबर 2001 में विदेशी और वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके मुखिया हाफिज सईद को भी वैश्विक आतंकी घोषित किया गया था।

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SBI को छोड़ सभी सरकारी बैंकों पर भारी पड़ा बंधन बैंक, लिस्टिंग का मिला फायदा

कोलकाता की प्राइवेट सेक्टर की बंधन बैंक ने मार्केट कैप के मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को छोड़ सभी सरकारी बैंकों को पीछे छोड़ दिया। मंगलवार को बंधन बैंक की स्टॉक मार्केट में शानदार एंट्री हुई। बंधन बैंक का स्टॉक एनएसई पर 33 फीसदी प्रीमियम के साथ 499 रुपए पर लिस्ट हुआ। वहीं बीएसई पर स्टॉक 29.33 फीसदी प्रीमियम के साथ 485 रुपए पर लिस्ट हुआ। शुरुआती कारोबार में बीएसई पर स्टॉक 494.80 के हाई पहुंचा। हाई प्राइस बंधन बैंक मार्केट कैप 58,888.78 करोड़ रुपए हो गया।

21 सरकारी बैंकों पर पड़ा भारी

हाई प्राइस बंधन बैंक मार्केट कैप 58,888.78 करोड़ रुपए हो गया। मार्केट कैप के लिहाज से बंधन बैंक देश की 22 सरकारी बैंकों में 21 बैंकों से आगे निकल गई। बंधन बैंक देश की सबसे बड़ी सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) से पीछे है जिसका मार्केट कैप 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। सरकारी बैंकों में पीएनबी, कैनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, यूनियन बैंक, ओरिएंटल बैंक शामिल है।

प्राइवेट बैंकों के मार्केट कैप के लिहाज से बंधन बैंक सातवें नंबर पर पहुंच गई है। इससे आगे एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, इंडसइंड बैंक और यस बैंक है।

14.6 गुना भरा था आईपीओ

– बंधन बैंक के आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। बंधन बैंक का आईपीओ 15 मार्च को खुला था और 19 मार्च 2018 को बंद हुआ था।
– बंधन बैंक का आईपीओ 14.6 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
– क्यूआईपी हिस्सा 38.67 गुना भरा। वहीं एचएनआई हिस्से को 13.89 गुना बिड मिली।
– बंधन बैंक ने आईपीओ के लिए 370-375 रुपए प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था।

बैंक का बिजनेस

– बंधन बैंक लिमिटेड बैंकिंग और फाइनेंशियल कंपनी है। माइक्रो फाइनेंस कंपनी के रूप में यह शुरू हुआ था जिसे करीब 3 साल पहले बैंकिंग लाइसेंस मिला है। कंपनी का मार्केट कैप 45000 करोड़ रुपए है। इस फाइनेंशियल में कंपनी को 1500 करोड़ प्रॉफिट की उम्मीद है। पिछले 2 फाइनेंशियल से बैंक को अच्छा मुनाफा हो रहा है।

– 31 दिसंबर 2017 तक बंधन बैंक के 887 ब्रांच और 430 एटीएम हैं और उसके 21.3 लाख कस्टमर्स हैं। ईस्ट और नॉर्थ-ईस्ट इंडिया के साथ बंगाल, असम और बिहार में बैंक का डिस्ट्रीब्यून नेटवर्क मजबूत है।

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न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर पाकिस्तान के पीएम अब्बासी की तलाशी, जांच के बाद बेल्ट कसते दिखे

 

यहां जॉन एफ केनेडी एयरपोर्ट पर सिक्युरिटी जांच के नाम पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी की तलाशी ली गई। पाकिस्तान मीडिया ने यह दावा किया। इसे एक रुटीन प्रॉसेस बताया जा रहा है, लेकिन पाकिस्तान मीडिया में इसे लेकर नाराजगी जाहिर की जा रही है।

क्या निजी दौरे की वजह से हुई चेकिंग?

– बताया जा रहा है कि पिछले दिनों अब्बासी अपनी बीमार बहन को देखने अमेरिका गए थे। यह उनका निजी दौरा था। हालांकि, इस दौरान वह अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस से भी मिले।

– पाकिस्तान मीडिया का कहना है कि यह निजी दौरा था तब भी प्रधानमंत्री के पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट है। ऐसे में उनकी जांच करना गलत है। पाकिस्तान के टीवी चैनल्स पर इस जांच का एक वीडियो भी जारी किया गया।

कुछ ने अब्बासी की तारीफ की, कुछ ने आलोचना

– जियो न्यूज के मुताबिक, अब्बासी ने सभी यात्रियों के लिए लागू स्टैंडर्ड सिक्युरिटी प्रोटोकॉल का पालन किया। जैसा कि वे अपनी सादगी के लिए ही जाने जाते हैं।
– कुछ मीडिया रिपोर्टों में अब्बासी की आलोचना की गई है, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रप्रमुख होने के लिहाज से एक शर्मिंदगी-भरी प्रक्रिया का पालन किया, जबकि उनके पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट था।

पाबंदियों को लेकर पाक-अमेरिका में चल रही तनातनी

– पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की चेकिंग से पहले अमेरिका ने 7 पाकिस्तानी कंपनियों को परमाणु व्यापार के शक में बैन कर दिया था।

– कहा जा रहा है कि अमेरिका पाकिस्तानी सरकार पर वीजा बैन समेत कई और प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है।

– बता दें कि आतंकवाद पर नरमी के चलते अमेरिका पाकिस्तान से खफा है। ट्रम्प प्रशासन ने उसे दी जाने वाली करीब 25.5 करोड़ डॉलर की सहायता राशि रोक दी है।

कलाम की तलाशी पर अमेरिका ने मांगी थी माफी

– 2011 में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर तलाशी ली गई थी। हालांकि, भारत की आपत्ति के बाद अमेरिका ने माफी मांगी थी।

जॉर्ज फर्नांडीज की कपड़े उतारकर ली गई थी तलाशी

– पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का वाशिंगटन के डल्लास अतंर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सन् 2002 और 2003 में स्ट्रिप सर्च किया गया था। जिस पर उन्होंने वहां के डिप्टी सेक्रेटरी स्ट्रोब टैलबॉट से गुस्से में शिकायत की थी।

शाहरुख समेत कई भारतीय लिए जा चुके हिरासत में

– अगस्त 2016 में शाहरुख खान को अमेरिका के लॉस एंजिल्स एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था। इसकी जानकारी खुद शाहरुख ने ट्वीटर पर दी।

– एक्टर इरफान खान को 2008 में लॉस एंजिल्स और 2009 में न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था।

– 2009 में ही नील नितिन मुकेश को न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया।

– 2010 में भारत के तत्कालीन एविएशन मिनिस्टर प्रफुल्ल पटेल से शिकागो के एयरपोर्ट पर पूछताछ की गई।

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डेटा लीक: भारत-ब्राजील में चुनाव को देखते हुए अपने सिक्युरिटी फीचर्स में इजाफा करेगा फेसबुक: जुकरबर्ग

डाटा लीक मामला सामने आने के बाद फेसबुक अब भारत-ब्राजील में आगामी चुनावों के मद्देनजर सिक्युरिटी फीचर्स को और सख्त करने जा रहा है। कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने गुरुवार को इसके संकेत दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए फेसबुक के सिक्युरिटी फीचर्स में और इजाफा किया जाएगा। इससे पहले जुकरबर्ग ने कहा था कि यूजर्स की डाटा सीक्रेसी को लेकर मेरी कंपनी ने गलती की है। किसी के पर्सनल डाटा का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे। बता दें कि अमेरिकी और ब्रिटिश मीडिया ने दावा किया है कि कैंब्रिज एनालिटिका ने 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स के डेटा का यूएस इलेक्शन में गलत इस्तेमाल किया था।

आर्टीफिशियल टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है फेसबुक
– जुकरबर्ग ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताया कि इलेक्शन के दौरान न्यूज में हेरफेर (मैनुपुलेट) करने और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करने वाले फेक अकाउंट का पता लगाने के लिए फेसबुक आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है। ये टूल पहली बार फ्रेंच इलेक्शन में इस्तेमाल किए गए थे।

– “इन नए टूल्स को 2016 में 30,000 से ज्यादा फेक अकाउंट मिलने के बाद बनाया गया था। हमारा मानना है कि इन सभी का रशियन कनेक्शन था। इन्होंने उसी तरह की टैक्टिक्स अपनाने की कोशिश की थी, जो 2016 इलेक्शन में यूएस में अपनाई गई थींं। हम इन्हें बंद करने में कामयाब रहे। उधर, फ्रांस इलेक्शन में ऐसा होने से हमने बड़े स्तर पर रोका भी।”

2017 में भी हमने ऐसा ही किया?
– “पिछले साल अलबामा के विशेष चुनाव के दौरान हमने कुछ नए एआई टूल्स फेक अकाउंट और झूठी खबरों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया था। हमें बड़ी तादाद में मैसेडोनियन अकाउंट्स भी मिले थे, जो झूठी खबरें फैलाने की कोशिश कर रहे थे। हमने इन्हें हटा दिया था।”

भारत में चुनाव हमारे लिए अहम
– बकौल जुकरबर्ग, “हम 2018 में अमेरिका में होने वाले चुनावों पर ही नजर नहीं रख रहे। भारत समेत अन्य जगहों पर भी इस साल होने वाले आम चुनाव हमारे लिए अहमियत रखते हैं। रूस जैसे देशों के दखल को रोकने के लिए फेसबुक को कड़ी मशक्कत करनी होगी। हमें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि फेक न्यूज न फैलाई जाए। ये साल काफी अहम है। ब्राजील में भी चुनाव होने हैं। दुनियाभर में कई जगह इलेक्शन हैं। हम हर चीज के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम भरोसा दिलाते हैं कि फेसबुक की सुरक्षा कायम रहेगी ताकि चुनावों की विश्वसनीयता बनी रहे।”
– सीएनएन को दिए इंटरव्यू में जुकरबर्ग ने आशंका जताई थी कि कोई 2018 में अमेरिकी मिड-टर्म इलेक्शन में दखलअंदाजी कर सकता है।

जुकरबर्ग ने फेसबुक पोस्ट में क्या लिखा?

– “मैंने फेसबुक शुरू किया था। इस प्लेटफॉर्म पर जो होता है, उसके लिए अंत में मैं ही जिम्मेदार हूं। डाटा लीक रोकने के लिए मैं काफी गंभीर हूं। अपने यूजर्स का डाटा लीक होने से रोकने के लिए फेसबुक ही जिम्मेदार है। लेकिन हम इसमें नाकाम रहे। हम आपको सेवाएं देने के लिए लायक नहीं हैं। अब हमारी कंपनी को बहुत कुछ करने की जरूरत है। हमने गलती की है। हम जरूरी कदम उठाएंगे। और हम ऐसा कर रहे हैं।”

5 प्वाइंट में समझिए क्या हैं ये मामला?

2016: ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव जीतने से शुरुआत
– आरोप लगा कि ट्रम्प को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जिताने के लिए रूसी दखल था। हिलेरी की रणनीतियां हैक करके ट्रम्प को भेजी गईं। सोशल मीडिया डेटा का गलत इस्तेमाल हुआ। एफबीआई ने रूस के 13 लोगों और तीन कंपनियों पर आरोप तय किए हैं।

17 मार्च 2018: अमेरिकी-ब्रिटिश मीडिया में खुलासा
– गार्डियन और न्यूयॉर्क टाइम्स ने छापा कि ट्रम्प के कैंपेन से जुड़ी ब्रिटिश फर्म कैंब्रिज एनालिटिका ने 2014 में 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा गलत तरीके से हासिल किया था। फेसबुक को इसका पता था, पर यूजर्स को सतर्क नहीं किया गया।

18 मार्च 2018: वादा नहीं निभाया एनालिटिका ने
– फेसबुक ने एनालिटिका को अपने प्लेटफॉर्म से सस्पेंड कर दिया। साथ ही सफाई दी कि 2015 में ही उसका एप बैन कर दिया था। एनालिटिका ने सारा डेटा डिलिट करने का भरोसा दिया था, पर अब पता चला कि उसने ऐसा नहीं किया।

19 मार्च 2018: सीईओ का स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा
– ब्रिटिश चैनल 4 ने एनालिटिका के सीईओ एलेग्जेंडर निक्स का स्टिंग किया। उन्होंने माना कि क्लाइंट को जिताने के लिए हर हथकंडा अपनाते हैं। डेटा पर काम करने के चलते ट्रम्प को बड़ी जीत हासिल हुई।

आखिर डेटा का गलत इस्तेमाल होता कैसे है…
– एनालिटिका के सीईओ ने बताया कि कंपनी फेसबुक यूजर्स के साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग के साथ अपने क्लाइंट के समर्थन में और विरोधी के खिलाफ सूचनाएं प्लांट करती है। इससे जनमत बदलता है।

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कनिष्‍क गोल्‍ड के डायरेक्‍टर भूपेश जैन, नीता जैन से CBI ने की पूछताछ, 824Cr का है फ्रॉड

करीब 824 करोड़ रुपए के एसबीआई फ्रॉड मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने कनिष्‍क गोल्‍ड प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्‍टर्स भूपेश जैन और नीता जैन से पूछताछ की। साथ ही सीबीआई ने कनिष्‍क गोल्‍ड के प्रमोटर्स और डायरेक्‍टर्स के खिलाफ लूक-आउट सर्कुलर जारी कर दिया है। चेन्‍नई की कंपनी कनिष्‍क गोल्‍ड को 14 बैंकों के कंसोर्टियम ने लोन दिया था, जिसमें एसबीआई सबसे आगे है। यह लोन अब एनपीए घोषित हो चुका है। इस मामले में जांच एजेंसी सीबीआई ने एसबीआई की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। पीएनबी में करीब 13 हजार करोड़ रुपए का घोटाला सामने आने के बाद फ्रॉड का यह दूसरा बड़ा मामला है।

2007 से कनिष्‍क गोल्‍ड ने लोन लेना शुरू किया 
एसबीआई की ओर से कहा गया, कनिष्क गोल्ड ने 2007 से कर्ज लेना शुरू किया और बाद में उसने अपनी क्रेडिट की सीमा बढ़वा लिया। कनिष्क का रजिस्टर्ड ऑफिस चेन्नई में है। इसके मालिक और प्रमोटर-डायरेक्टर भूपेश कुमार जैन और उनकी पत्नी नीता जैन हैं। एसबीआई ने शिकायत में कहा कि ज्वैलर ने सबसे पहले मार्च 2017 में ब्याज भुगतान में 8 सदस्य बैंकों से डिफॉल्ट किया। अप्रैल 2017 तक कनिष्क ने सभी 14 बैंकों को पेमेंट रोक दी। 5 अप्रैल 2017 को स्टॉक ऑडिट की शुरुआत के समय बैंकर्स प्रमोटर से संपर्क करने में असफल रहे।

मार्च 2017 में सामने आया डिफॉल्‍ट 
एसबीआई के मुताबिक, मार्च 2017 में कनिष्क ज्वैलरी का डिफॉल्ट सामने आया था। जब उसने 8 सदस्य बैंकों का ब्याज नहीं चुकाया। इसके बाद अप्रैल 2017 में सभी 14 बैंकों का ब्याज चुकाने में असमर्थता जताते हुए पेमेंट रोक दी। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने कंपनी के प्रमोटर और डायरेक्टर से संपर्क किया लेकिन वह नहीं मिले। 25 मई 2017 को कनिष्क के कॉर्पोरेट ऑफिस का दौरा करने बैंकर्स पहुंचे, लेकिन फैक्ट्री और शोरूम दोनों ही बंद थे। भूपेश जैन ने उसी दिन बैंकों को लेटर लिखकर दस्तावेजों में फर्जीवाड़े और सभी स्टॉक को हटाने के बारे में बताया। मद्रास ज्वैलर्स एंड डायमंड मर्चेंट एसोसिएशन के एक सदस्य के मुताबिक, कनिष्क गोल्ड लगातार घाटे में जा रही थी और उसके लिए काम जारी रखना संभव नहीं हो पा रहा था। मई 2017 में ही उसने घाटे से बचने के लिए अपने सभी आउटलेट्स बंद कर दिए।

SBI ने अकेले 240 करोड़ का लोन दिया
जानकारी के अनुसार एसबीआई ने ज्वैलरी कंपनी को 240 करोड़ रुपए लोन दिया था। इसके अलावा पीएनबी ने 128 करोड़, आईडीबीआई ने 49 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया ने 46 करोड़, सिंडिकेट बैंक ने 54 करोड़, यूनियन बैंक ने 53 करोड़, यूकों बैंक ने 45 करोड़, सेंट्रल बैंक ने 22 करोड़, कॉरपोरेशन बैंक ने 23 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 32 करोड़, तमिलनाडु बैंक ने 27 करोड़, एचडीएफसी बैंक ने 27 करोड़, आईसीआईसीआई बैंक ने 27 करोड़ और आंध्रा बैंक ने 32 करोड़ रुपए लोन दिया था।

नीरव मोदी केस से कैसे अलग है ये फ्रॉड?
यह मामला नीरव मोदी और मेहुल चौकसी द्वारा पीएनबी में किए गए फ्रॉड से अलग है। पीएनबी के मामले में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग का गलत इस्तेमाल कर बैंक से पैसे लिए गए। कनिष्‍क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड के मामले में बैंक को गलत फाइनेंशियल एस्टेमेंट और रिकॉर्ड दिखाकर लोन लिया गया। कुल लोन 824 करोड़ रुपए का है, लेकिन ब्याज सहित यह र‍कम इससे कहीं ज्यादा बताई जा रही है।

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सरकार ने चीनी पर खत्म की एक्सपोर्ट ड्यूटी, इंडस्ट्री को मिली राहत

सरकार ने डॉमेस्टिक मार्केट में चीनी की गिरती कीमतों को थामने के लिए उस पर 20 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी हटा दी है। सरकार के इस फैसले से शुगर इंडस्ट्री को खासी राहत मिली है, जो इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही है। इस संबंध में सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार ने कहा कि ड्यूटी खत्म होने से सरकार को मौजूदा एक्सपोर्ट वॉल्यूम पर सालाना 75 करोड़ रुपए का नुकसान होगा।

 

इंडस्ट्री ने की थी डिमांड
इंडस्ट्री ने डॉमेस्टिक सप्लाई को थामने और इस सीजन रिकॉर्ड आउटपुट को देखते हुए कीमतों को सही लेवल पर बनाए रखने में मदद करने के लिए ड्यूटी हटाने की मांग की थी। चीनी पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को हटाने की मांग को लेकर खाद्य मंत्रालय ने दो बार अपनी सिफारिश वित्त मंत्रालय को भेजी थी। चीनी मिलों के ऑर्गनाइजेशन ने भी  सरकार से एक्सपोर्ट ड्यूटी हटाने का अनुरोध किया था।
केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कुछ दिन पहले कहा था कि रिकॉर्ड प्रोडक्शन को देखते हुए उन्होंने फरवरी में चीनी का निर्यात शुल्क घटाने की अपनी सिफारिश वित्त मंत्रालय को भेजी है।

 

इस साल चीनी के रिकॉर्ड प्रोडक्शन की उम्मीद
चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक देश में इस साल चीनी का उत्पादन 2.95 करोड़ टन होने की उम्मीद है, जो गत साल से 92 लाख टन ज्यादा है। चीनी के तीन प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में क्रमश: 93.8 लाख टन, 84.3 लाख टन और 35.1 लाख टन चीनी का प्रोडक्शन हुआ है। पिछले शुगर सीजन 2016-17 (अक्टूबर-सितंबर) में देश में 2.03 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

 

किसानों का बकाया हुआ 20 हजार करोड़ रु
इस्मा ने कहा कि चीनी का स्टॉक बढ़ने से घरेलू बाजार में इसकी कीमत घटकर काफी कम हो गई है जिससे मिलों का घाटा लगातार बढ़ रहा है। इस्मा के मुताबिक, जनवरी तक गन्ने की बकाया राशि बढ़कर 14,000 करोड़ रुपए थी जो इस महीने के अंत तक बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है।

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भारत दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाला देश, चार साल में हमारी 12% हिस्सेदारी: रिपोर्ट

हथियार खरीदने के मामले में भारत दुनिया में टॉप पर बना हुआ है। यह खुलासा सोमवार को स्टॉकहोम के थिंक टैंक इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में हुआ है। सोमवार को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने 2013-2017 के दौरान दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार खरीदे हैं। इस मामले में दुनिया में उसकी हिस्सेदारी 12% है।रिपोर्ट के मुताबिक, 2008 से 2013 की तुलना में भारत ने 2013 से 2017 के बीच 24% ज्यादा हथियार खरीदे हैं।

सऊदी अरब दूसरे नंबर पर
– इस रिपोर्ट में भारत के बाद सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वालों में सऊदी अरब, मिस्र, यूएई, चीन, ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया, इराक, पाकिस्तान और इंडोनेशिया हैं।

 

भारत ने रूस से सबसे ज्यादा हथियार खरीदे
– भारत ने 2013 से 2017 तक सबसे ज्यादा हथियार रूस से खरीदे। कुल खरीदे गए हथियारों में रूस की हिस्सेदारी 62% है।

– इसके बाद भारत ने अमेरिका से 15% और इजरायल से 11% हथियार खरीदे हैं।

 

चीन से मुकाबले के लिए अमेरिका से बेहतर रिश्ते कर रहा भारत

– एशिया में चीन का दबदबा कम करने के लिए अमेरिका भारत के साथ दे रहा है। जिसका नतीजा है कि 2008 से 2012 की तुलना में 2013 से 2017 तक में भारत ने अमेरिका से काफी हथियार खरीदे हैं। इस दौरान अमेरिका से भारत के हथियारों की खरीद में लगभग 557% की बढ़ोत्तरी हुई है।

 

सबसे ज्यादा हथियार बेच रहा अमेरिका

– हथियार बेचने वाले देशों में अमेरिका टॉप पर है। इसके बाद रूस, फ्रांस और जर्मनी हैं। चीन पांचवे नंबर पर है। चीन सबसे ज्यादा हथियार पाकिस्तान को बेचता है।