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फ्लिपकॉर्ट में 77% हिस्सेदारी के बाद अब 85% की तैयारी में वॉलमार्ट

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब वॉलमार्ट 3 अरब डॉलर का निवेश कर फ्लिपकॉर्ट की 85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है।

 

इस बात की जानकारी दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर ने शुक्रवार को अमेरिकी सिक्यॉरिटीज और एक्सचेंज कमिशन को दी। रिटेलर ने ये भी बताया कि वॉलमार्ट के बाकी शेयर भी उसी कीमत पर खरीदे जाएंगे जिस कीमत पर 77 फीसदी शेयर खरीदे गए थे।

वॉलमार्ट ने किस दर पर फ्लिपकॉर्ट के शेयरों को हासिल किया यह जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। वॉलमार्ट की फाइलिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लिपकॉर्ट के बड़े निवेशक जापानी इंटरनेट और टैलीकॉम कंपनी सॉफ्टबैंक ने शेयरों को बेचने पर कोई फैसला नहीं किया है। सॉफ्टबैंक के पास फ्लिपकॉर्ट के करीब 22 फीसदी शेयर हैं। इससे पहले मीडिया रिपोर्टस से भी ये बात साने आई थी कि वॉलमार्ट और सॉफ्टबैंक पहले की कीमत पर ही शेयर ट्रांजेक्शन के लिए वक्त निकाल कर बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे।

एसईसी फाइलिंग के अनुसार, वॉलमार्ट 2 अरब डॉलर कैश में निवेश कर रहा है और फ्लिपकॉर्ट के मौजूदा शेयर होल्डर्स से 14 अरब डॉलर मूल्य के शेयर खरीद रहा है। वॉलमार्ट ने कहा है कि वह बोर्ड और फाउंडर की सलाह से फ्लिपकॉर्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीईओ और प्रिंसिपल एग्जिक्युटिव्ज को अपॉइंट या रिप्लेस कर सकता है। फिलहाल कल्याण कृष्णमूर्ति फ्लिपकॉर्ट के सीईओ हैं और को-फाउंडर बिन्नी बंसल ग्रुप सीईओ हैं। को-फाउंडर और एग्जिक्युटिव चैयरमैन सचिन बसंल ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया।

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मुम्बई इंडियन्स के सामने धराशाई हुई चेन्नई, 8 विकेट के बड़े अंतर से मिली शर्मनाक हार। देखें फोटो विश्लेषण!

IPL के 27वें मैच में पहले खेलते हुए चेन्नई ने 20 ओवर में 5 विकेट पर 169 रन बनाए। जीत के लिए मिले 170 रन के लक्ष्य को मुंबई ने 19.4 ओवर में 2 विकेट पर हासिल कर लिया और चेन्नई से अपने पहले हार का बदला भी ले लिया।

मुंबई के कप्तान रोहित शर्मा ने 33 गेंदों पर 56 रन की नाबाद पारी खेली और अपनी टीम को जीत दिलाई।

दूसरी पारी में चेन्नई के खिलाफ मुंबई के ओपनर बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव ने अपनी टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई साथ ही 34 गेंदों पर 44 रन बनाए।

मुंबई के ओपनर बल्लेबाज इवान लुईस ने 43 गेंदों पर 47 रन की अच्छी पारी खेली।

चेन्नई के मध्यक्रम के बल्लेबाज सुरेश रैना ने बेहतरीन पारी खेलते हुए 47 गेंदों पर नाबाद 75 रन बनाए।

मुंबई के खिलाफ पहली पारी में चेन्नई के ओपनर बल्लेबाज वॉटसन का बल्ला नहीं चला और वो 12 रन बनाकर आउट हुए।

अंबाती रायडू अर्धशतक के चूक गए और उन्होंने 35 गेंदों पर 46 रन की पारी खेली।

कप्तान धौनी ने अपनी टीम के लिए 21 गेंदों पर 26 रन की पारी खेली।

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घरेलू मैदान पर दिल्ली ने कोलकाता को 55 रन से हराया

IPL के 26वें मैच में पहले खेलते हुए दिल्ली ने 20 ओवर में 4 विकेट पर 219 रन बनाए। कोलकाता को जीत के लिए 220 रन बनाने थे लेकिन ये टीम 20 ओवर में 9 विकेट पर 164 रन ही बना पाई और उसे 55 रन से हार मिली।

आंद्र रसेल ने 30 गेंदों पर 44 रन की पारी खेलकर अपनी टीम को जीत दिलाने के भरपूर कोशिश की लेकिन वो इसमें कामयाब नहीं हो पाए।

केकेआर के कप्तान दिनेश कार्तिक दिल्ली के विशाल स्कोर के आगे नहीं टिक पाए और 18 रन पर पवेलियन लौट गए।

केकेआर के ओपनर बल्लेबाज क्रिस लीन ने टीम को निराश किया और 5 रन पर आउट हो गए।

मैच की दूसरी पारी में रॉबिन उथप्पा सिर्फ एक रन बनाकर कैच आउट हो गए।

पहली बार आइपीएल में दिल्ली की कप्तानी करने वाले श्रेयस अय्यर ने कमाल की पारी खेलते हुए 40 गेंदों पर नाबाद 93 रन बनाए।

दिल्ली के ओपनर बल्लेबाज पृथ्वी शॉ ने अपनी टीम के लिए कमाल की पारी खेली और 44 गेंदों पर 62 रन बनाए।

कोलिन मुनरो ने 18 गेंदों पर 33 रन बनाकर टीम को अच्छी शुरुआत की।

दिल्ली के दिलेर बल्लेबाज रिषभ पंत कोलकाता के खिलाफ फेल रहे और शून्य के स्कोर पर आउट हो गए।

ग्लेन मैक्सवेल ने 18 गेंदों पर 27 रन बनाए हालांकि उनके बड़ी पारी का इंतजार अब भी क्रिकेट फैंस को है।

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फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों को पहुंचाएगा फायदा प्राइवेसी लॉ!

यूरोप में अगले माह एक नया नियम का प्रस्ताव आने वाला है, जिसके तहत प्राइवेट लोगों के हाथ में लोगों के निजी डाटा को जाने से सुरक्षित रखा जा सकेगा।

इस नए नियम के तहत कंपनी डाटा शेयर करने से पहले उपभोक्ता से इसके लिए इजाजत लेगी। सरकार के इस कदम से जहां इंटरनेट पर बड़ी कंपनियों का वर्चस्व खत्म होगा। वहीं छोटी कंपनियों को भी फायदा होगा। हाल के वर्षों में कुछ छोटी कंपनियों ने निजता के नियमो का सम्मान किया है, जबकि बड़ी कंपनियों की ओर से हमेशा इन नियमों की अनदेखी की गई है।

टोरंटो विश्वविद्याल के मार्केटिंग प्रोफेसर एवी गोल्डफार्ब ने प्रतिस्पर्धा पर गोपनीयता नियमों के प्रभावों का अध्ययन किया। गोल्डफार्ब वर्ष 2013 की एक रिपोर्ट के सह-लेखक भी थे, जिसमें कहा गया था कि गोपनियाता से बाजार की प्रतिस्पर्धा पर नकारात्मक असर होगा क्योंकि उपभोक्ता से किसी चीज की इजाजत लेना एक छोटी कंपनी की लागत बढ़ा सकता है। ऐसे में ये स्टार्टअप के लिए नुकसानदायक होगा।

फेसुबक के मुताबिक एक राजनीतिक रिसर्च करने वाली कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के करीब 87 मिलियन यूजर्स की गोपनीय जानकारी हासिल करके उसका उपयोग किया। इसी को मुद्दा बनाकर कांग्रेस की ओर से मार्क जुकरबर्ग को निशाना बनाया गया। गूगल की वीडियो सर्विस यूट्यूब को लेकर भी कुछ इसी तरह के सवाल उठ रहे हैं।

मॉडल की जांच कर सकेंगे दूसरे देश

यूरोप और अमेरिका की तरह ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देश प्राइवेसी को लेकर फेसबुक औऱ गूगल जैसी कंपनियों के विज्ञापन आधारित मॉडल की जांच कर सकती है। अमेरिका के कानून निर्माताओं ने इस माह जुकरबर्गक की संसद में गवाही के दौरान सिलिकॉन वैली को गोपनियता के मुद्दे पर ज्यादा विनियमित बनाने पर जोर दिया। यूरोप में ऐसा ही एक प्रयोग सफल रहा है, जब वर्ष 2014 में वहां की उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया कि लोगों की इच्छा के मुताबिक उनके कंटेट को ऑनलाइट होने से हटाया जा सकेगा।

नहीं पड़ा व्‍यापार पर असर

इसके अलावा वर्ष 2011 के यूरोपियन कानून बेबसाइटों की ओर से लोगों को कूकीज के बारे में जानकारी देने को कहा गया, जिससे कि वो ब्राउजिंग हिस्ट्री को सुरक्षित रखा जा सके और कोई इसका दुरुपयोग न कर सके। इसके बाद पॉपअप वार्निंग को लेकर काम किया गया। इसी के साथ आज के दौर में डेटा की गोपनियता के बीच फेसबुक और गूगल के उपयोग को कम किया जा रहा है। फेसबुक की ओर से कहा गया कि कैंब्रिज एनालिटिका घोटाले से उनके व्यापार पर कोई असर नहीं पड़ा है, जबकि गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने कहा इस तिमाही में उनके कर संग्रह में 26 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है।

नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी कंपनियां

यूरोप में डेटा रेग्यूलेशन को लेकर लाए जा रहे कानून को ‘द जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेग्यूलेशन’ का नाम दिया गया है। इस कानून के तहत टेक कंपनियों की ओर से यूजर्स के डेटा कलेक्शन, स्टोर और उनके प्रयोग पर कंट्रोल रखा जा सकेगा। यह नया नियम 25 मई से प्रभाव में आएगा। इसके बाद टेक कंपनियों को बताना होगा कि उन्होंने लोगों का डेटा किस तरह से प्राप्त किया है, कहां प्रयोग किया है, और कहां सुरक्षित किया है। ऐसे में कंपनियां उपभोक्ताओं के समझौते को नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी।

कंपनियां होंगी मजबूत

कुछ लोगों का मानना है कि प्राइवेसी के नियन बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले होंगे। लेकिन छोटी कंपनियों को ये प्रतियोगिता से बाहर कर देंगे। लेकिन पेरिस की एक स्टार्टअप कंपनी के सीईओ की मानें तो डेटा प्रोटेक्शन के नए नियम से कंपनी मजबूत होगी क्योंकि उनका मूल संपत्ति ग्राहक का विश्वास है। गोपनियता कानून के बाद टारगेटेड विज्ञापनों को कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद भी फेसबूक और गूगल जैसी बड़ी कंपनियां फायदे में रहेगी, क्योंकि विज्ञापन देने वाले ज्यादा ऑडियंस उसकी ओर रुख करेंगे। ऐसे में फेसबुक और गूगल की यूट्यूब जैसी कंपनियों को ज्यादा विज्ञापन मिलेगा, जिनके पास क्रमश: 2.2 मिलियन और 1.5 बिलियन मासिक उपभोक्ता हैं।

यूजर्स देंगे सहमति

यूरोपीय डेटा संरक्षण पर्यवेक्षक जोवोवानी बुट्टारेली के मुताबिक गूगल और फेसबुक की निगरानी आयरिश डेटा अथॉरिटी की ओर से की जाएगी, उनके यूरोपीय मुख्यालय आयरलैंड में हैं। उन्होंने छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय को अलग तरह से ट्रीट करने की बात कही। गूगल प्राइवेसी इंजीनियर योनातन जुंगर के मुताबिक बड़ी कंपनियां डेटा को उपयोग करने के लिए शर्त जोड़ सकती हैं, जबकि छोटी कंपनियां ऐसी शर्त नहीं जोड़ पाएंगी। जैसा कि पिछले दिनों फेसबुक ने वैश्विक स्तर पर उपयोगकर्ताओं से नया सहमति फार्म भरवाना शुरु किया है, जिसके तहत थर्ड पार्टी को उपभोक्ता की जानकारी हासिल करने के लिए फेसबुक से इसकी इजाजत लेनी होगी।

नई चुनौती

गोपनियता के आलोचकों ने फेसबुक के नए सहमति फार्म की चुनौती दी है, उनके मुताबिक वे उपयोगकर्ताओं की सूचनाओं को व्यापक रुप में साझा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। न्यू अमेरिका के ओपन टेक्नोलॉजी इंसटीट्यूट के एक वरिष्ठ सलाहकार बेन स्कॉट के मुताबिक नए कानून जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेग्यूलेशन (जीडीपीआर) को लेकर मेरी चिताएं हैं। मैं उन लोगों को लेकर चिंतित हूं, जो जीडीपीआर में काफी कुछ निवेश करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोपनियता कानून कितना सफल होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे किस तरह से लागू किया गया है।

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मानो या न मानो षड्यंत्र बहुत ही योजनाबद्ध है। #JusticeForAsifa #CBI4KathuaCase #CBI4Ashifa

मैं बार-बार बस यही सोच रहा हूँ, आसिफा की ये फोटो किसने और क्यूँ ली?

बड़ी और गौर करने वाली बात ये है कि फोटो खींचने वाले को कैसे पता था ये फोटो पूरे भारत में एक एजेंडा चलाने में काम आएगी क्यूंकि आसिफा की लाश भी इन्हीं कपड़ों में मिली थी। क्या आपने निर्भया रेप कांड की प्रताड़ित दामिनी(जिसकी पहचान भी अब तक किसी को नहीं पता) की तस्वीर कभी देखी, तो सोचिये सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन्स के उलट एक रेप प्रताड़ित की तस्वीर वायरल होना भी एक बहुत बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है।

प्रारम्भिक जाँच के बाद लिखी गयी FIR में सिर्फ हत्या का केस दर्ज हुआ था और वारदात की जगह भी लकड़ी का गोदाम था। फिर जाँच राज्य की क्राइम ब्रांच के पास आते ही यह केस ऐसे पलटा की अब इसके सहारे कुछ नेतागण अपनी बिखर चुकी राजनीति पलटने की कोशिश कर रहे हैं!

कौन हैं आखिर वो लोग?? मानो या न मानो षड्यंत्र बहुत ही योजनाबद्ध है।

जहाँ एक तरफ आरोपियों के बार बार बोलने पर भी जम्मू कश्मीर क्राइम ब्रांच उनका नार्को टेस्ट नहीं करवा रही और बस आरोप थोप के कबूल करने के लिए प्रताड़ित कर रही है, यह बेहद ही संघीन है।

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती का CBI जाँच की मंजूरी अब तक न देना उनके कर्तव्य-परायण पर भी संदेह उत्पन्न करता है।

भारतीय राजनीतिज्ञों का स्तर भी अब इतना गिर चुका है कि बस रोटियां सिंकनी चाहिए, फिर चाहें वो छोटे बच्चों के रेप और मौत करने के बाद उनकी लाशों पर ही क्यों न सेंकनी पड़े!

आइये आपको ABP News का एक विश्लेषण दिखाएं जिसमे उस मंदिर के बारे में रची गयी मनगढ़ंत बातें बिलकुल साफ हो जाएँगी।

इस मुहीम को आगे बढ़ाएं और निष्पक्ष जाँच की मांग करें। #JusticeForAsifa #CBI4KathuaCase #CBI4Ashifa

(लेख: संपादकीय)

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Black Buck Poaching Case: सलमान खान को 5 साल की सजा

सुपरस्टार सलमान खान को आज (पांच अप्रैल) तगड़ा झटका लगा है। काले हिरण (ब्लैक बक) के शिकार मामले में कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया है। कोर्ट में उन्हें पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। सजा के ऐलान के बाद सलमान को कोर्ट से सीधे जोधपुर सेंट्रल जेल ले जाया गया। आज की रात सलमान यहीं गुजारेंगे। चूंकि सजा की समयावधि तीन साल से अधिक है। ऐसे में उन्हें जमानत सिर्फ सेशन कोर्ट से ही मिलेगी। वक्त की कमी के कारण सेशन कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी। शुक्रवार (छह अप्रैल) को अब इस पर सुनवाई होगी।

कोर्ट ने सजा का फैसला सुनाने के लिए लंच ब्रेक भी नहीं लिया, जो कि डेढ़ बजे होना था। कोर्ट ने इस मामले में अन्य आरोपियों (सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम) को बरी कर दिया। काले हिरण शिकार मामले में 20 साल बाद सलमान को सजा का ऐलान हुआ है। राजस्थान के जोधपुर कोर्ट में सीजेएम देव कुमार खत्री ने इस मामले में उन्हें दोषी करार दिया। सलमान इससे पहले इस संबंध में अपने होटल से कोर्ट के लिए रवाना हुए थे। वे कोर्ट पहुंच थे, जहां कार्रवाई शुरू हुई थी। सलमान यहां के ताज हरि महल होटल में ठहरे थे। उनके अलावा फैसले के लिए बॉलीवुड एक्टर सैफ, तब्बू, सोनाली और नीलम भी जोधपुर पहुंचे थे।

आपको बता दें कि कांकाणी काला हिरण शिकार केस साल 1998 का है। सलमान समेत पांच बॉलीवुड सितारों पर इस मामले में दो काले हिरणों का शिकार करने का आरोप है। अन्य कलाकारों में सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम पर भी आरोप था। ये कलाकार उस दौरान हम साथ-साथ हैं फिल्म की शूटिंग के लिए जोधपुर में थे।

यहां पढ़िए Salman Khan Blackbuck Poaching Case Verdict UPDATES

– सजा के ऐलान पर सलमान के वकील ने सेशन कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी है। लेकिन आज उस पर सुनवाई होना मुश्किल माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, कोर्ट के पास वक्त की कमी है। ऐसे में आज की रात सलमान को जेल में ही गुजारनी पड़ेगी।

– पुलिस हिरासत में सलमान को कोर्टरूम से बाहर लाया गया, जिसके बाद उन्हें जेल की ओर लेकर जाया जा रहा है। सलमान की गाड़ी व पुलिस की अन्य गाड़ियों का काफिला निकालने के लिए रास्ता खाली कराया गया था।

– सलमान को सजा के ऐलान के बाद उनके वकील सेशन कोर्ट जाना चाहते हैं। लेकिन वहां सुनवाई होना मुश्किल नजर आ रहा है। अगर आज सुनवाई नहीं हुई तो सल्लू को जेल में रात गुजरनी पड़ेगी। जेल ले जाने के पहले सलमान का मेडिकल कराया जाएगा।

– सलमान को जेल भेजने की तैयारियां हो चुकी हैं। उन्हें सेंट्रल जेल ले जाने के लिए वैन बुलाई गई है। जेल के बैरक नंबर एक या दो में से किसी एक में उन्हें रखा जाएगा। ये दोनों ही बैरक इसी बाबत खाली करा लिए गए हैं।

– सलमान को 5 साल की सजा सुनाए जाने के उनकी बहनें बुरी तरह रोने लगीं। पुलिस ने उन्हें सलमान से अलग कर दिया है। इस दौरान सलमान की आंखों में भी आंसूं छलक उठे थे। अब सलमान को सीधे जेल ले जाया जाएगा, जबकि कोर्ट के बाहर ‘सलमान हाय-हाय’ के नारे लग रहे हैं।

– सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि सजा के रूप में अगर सलमान को जेल हुई तो वह जोधपुर जेल नहीं जाएंगे। सुरक्षा के लिहाज से उन्हें उदयपुर भेजा जा सकता है।

– दोषी करार दिए जाने के बाद सलमान तनाव में नजर आए। उनके चेहरे पर शिकन देखते बन रही थी। बता दें कि कोर्टरूम में ठीक डेढ़ बजे लंच होता है। सलमान को सजा के ऐलान के लिए इसे स्थगित कर दिया गया। कोर्टरूम में फिलहाल फैसले की फोटोकॉपी आने का इंतजार हो रहा है। सलमान इस दौरान अपने वकील से बात कर रहे हैं।

– काला हिरण शिकार केस में बरी हुईं आरोपी नीलम के पति समीर सोनी ने इस बारे में एक न्यूज चैनल से बातचीत की। उन्होंने कहा, “जो बरी हुए उनके लिए खुशी है, मगर सलमान के दोषी ठहराए जाने पर मुझे निराशा हाथ लगी।”

– बिश्नोई टाइगर्स वन्य एवं पर्यावरण संस्था के प्रदेश अध्यक्ष रामपाल भवड़ ने कहा, “हम फैसले का आंकलन कर रहे हैं। हमारी मांग है कि बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ एक याचिका दायर की जाए और सलमान को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।”

– काला हिरण शिकार मामले में सलमान को तीन साल से कम की सजा हुई तो इसी कोर्ट से जमानत मिल जाएगी। अगर तीन साल से अधिक की सजा हुई, तब सुपरस्टार को सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।

– सुपरस्टार सलमान इस वक्त न्यायिक हिरासत में हैं। वह सजा का ऐलान होने से पहले कोर्ट परिसर को छोड़कर नहीं जा सकते हैं। सजा के फैसले की कॉपी की फोटो-स्टेट कराई जा रही है।

– जज साहब कोर्टरूम में लौट आए हैं। सलमान के लिए सजा लिखी जा चुकी है। कभी भी इसका ऐलान किया जा सकता है। हालांकि, सरकारी वकील इसके ऐलान होने में आधा घंटा बता रहे हैं।

– सजा के ऐलान को लेकर कोर्ट परिसर के बाहर भारी सुरक्षबल तैनात किया गया है। वहीं, बरी किए गए सैफ, तब्बू, सोनाली और नीलम मुंबई के लिए रवाना हो रहे हैं। वे दोपहर एक बजकर मिनट की फ्लाईट से निकलेंगे।

– सलमान को दोषी करार दिए जाने के दौरान बहन अलवीरा भी कोर्टरूम में थीं। वह इस वक्त कोर्टरूम में हैं। फैसले के बाद वह बेहद दुखी हैं और बुरी तरह से रो रही हैं।

– जज कोर्टरूम में लौट आए हैं। सलमान भी यहीं मौजूद हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोपहर दो बजे तक सलमान को सजा का ऐलान हो जाएगा। वहीं, सैफ अली खान कोर्ट से बाहर निकल चुके हैं।

– सलमान की सजा पर बहस पूरी हो गई है। जज थोड़ी देर के लिए अपने चैंबर में गए हैं। थोड़ी देर बाद सलमान को सजा सुनाई जाएगी।

– सरकारी वकील ने कहा कि सलमान आदतन अपराधी हैं। उन्हें अधिक से अधिक सजा मिलनी चाहिए। जवाब में सलमान के वकील ने पूछा है कि बाकी लोगों को बरी कर दिया गया है। ऐसे में सलमान को ही दोषी क्यों ठहराया गया है?

– काला हिरण शिकार केस में बरी हुए सैफ, नीलम, तब्बू और सोनाली कोर्ट के दूसरे कमरे में मौजूद है। वहीं, सलमान की सजा पर अभी भी बहस जारी है। सलमान इस दौरान कोर्टरूम में अकेले हैं।

– सलमान कोर्टरूम में शांत बैठे हैं। वह अपना चेहरा नीचे किए हुए हैं। वहीं, उनके वकील उनके लिए कम से कम सजा की मांग कर रहे हैं। कोर्ट में वह सलमान को तीन साल से कम की सजा देने की मांग कर रहे हैं।

– अब सलमान की सजा पर बहस शुरू हो गई है। सुपरस्टार को तीन साल की सजा पर इसी कोर्ट से जमानत मिल सकती है। सल्लू को एक से छह साल तक की सजा का ऐलान हो सकता है। सलमान पर इस मामले में 50 हजार रुपए का जुर्मान भी लग सकता है।

– काला हिरण शिकार मामले में सलमान के अलावा अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। वहीं, सल्लू को दोषी करार दिया गया है।

– सलमान के अलावा बाकी मामले में आरोपी बाकी कलाकार कोर्टरूम के अंदर मौजूद हैं। जज भी कोर्टरूम के भीतर हैं। थोड़ी देर में वह अपना फैसला सुनाएंगे। कोर्ट की कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

Blackbuck Poaching Case: काला हिरण शिकार मामले पर फैसले को लेकर जोधपुर कोर्ट के अंदर जाते एक्टर सलमान खान। (फोटोः पीटीआई)

– सलमान खान अपने होटल से कोर्ट पहुंच चुके हैं। उनके पीछे पीछे-पीछे सैफ और नीलम भी कोर्ट पहुंचे। इनके बाद तब्बू और सोनाली बेंद्रे भी आ गई हैं।

– सलमान होटल से कोर्ट के लिए निकल चुके हैं। उनके अलावा बहनें भी कोर्ट के लिए रवाना हुई हैं। अर्पिता और अलवीरा कोर्ट परिसर में पहुंच गई हैं।

– मामले पर फैसले को लेकर सुपस्टार सलमान के वकील हस्तीमल सारस्वत ने पूजा-अर्चना की है और उनके बरी होने के लिए दुआएं मांगी हैं। बुधवार (तीन अप्रैल) को कटरीना रैफ मुंबई में सिद्धीविनायक मंदिर सलमान के लिए दुआ मांगने गई थीं।

– काला हिरण शिकार केस पर फैसला आने के लेकर जोधपुर कोर्ट के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है। सैफ, नीलम और सोनाली के वकीलों का कहना है कि अगर वे दोषी पाए गए तो सभी को बराबर की सजा मिले। अधिकतम सजा छह साल के लिए होगी, जबकि न्यूनतम सजा एक साल है।

क्या है 1998 का काला हिरण शिकार केस? आरोप था कि तब एक और दो अक्टूबर की रात सलमान समेत सैफ, तब्बू, सोनाली और नीलम देर रात लूणी थाना क्षेत्र के कांकाणी गांव पहुंचे थे। यहां इन्होंने दो काले हिरणों का शिकार किया था। ये सभी कलाकार उस दौरान जीप में बैठे थे। हिरणों के झुंड पर सलमान ने गोली चलाई थी, जिसके लिए उन्हें अन्य सितारों ने उकसाया था। गोली चलने के बाद आवाज सुनकर ग्रामीण वहां जुटे थे। ऐसे में सलमान दो मृत हिरणों को छोड़कर वहां से गाड़ी सहित फरार हो गए थे। बता दें कि काला हिरण लुप्तप्राय जाति है और इसके शिकार पर रोक है। बीते दिनों इस मामले पर सुनवाई होने के बाद जोधपुर ग्रामीण जिला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देव कुमार खन्नी ने फैसला सुरक्षित रखा था।

सलमान पर वन्य जीव संरक्षण की धारा 9/51 में आरोप लगे हैं, जबकि सैफ, तब्बू, सोनाली और नीलम पर वन्य जीव संरक्षण की धारा 9/52 व भारतीय दंड संहिता की धारा 149 के अंतर्गत आरोप हैं। सलमान व अन्य सितारों को अगर सजा होगी तो उन्हें वाल्ड लाइफ एक्ट 9/51 और 9/52 के तहत एक साल से छह साल तक जेल की सजा सुनाई जा सकती है। याद दिला दें कि संरक्षित जानवरों के शिकार से संबंधित तीन मामलों में दो बार सलमान खान जेल जा चुके हैं। साल 2006 और 2007 में उन्हें जोधपुर जेल की हवा खानी पड़ी थी।

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ICICI बैंक लोन मामलाः चंदा कोचर के पति से CBI कर सकती है पूछताछ

वीडियोकॉन लोन मामले में सीबीआई ने दीपक कोचर के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है. वीडियोकॉन समूह को दिए गए एक लोन मामले में कोचर और उनके परिवार के सदस्यों की कथित संलिप्तता की खबरें आई थीं, जिसके बाद सीबीआई ने शुक्रवार को दीपक कोचर के खिलाफ जांच प्रक्रिया शुरू की.

सीबीआई के एक अधिकारी ने आजतक को बताया कि सभी अधिकारियों जिनका लोन पास कराने में योगदान था, उनके बयान दर्ज कर लिए गए हैं. इसके अलावा सीबीआई ने इस लोन से जुड़े सभी दस्तावेजों को भी ज़ब्त कर लिया है, जिसका अध्ययन किया जा रहा है.

अब सीबीआई दीपक कोचर को पूछताछ के लिए बुला सकती है. दीपक के अलावा सीबीआई वीडियोकॉन ग्रुप के अहम लोगों से भी पूछताछ कर सकती है. यह पूछताछ सीबीआई की बैंक फ्रॉड एंड सिक्योरिटी विंग करेगी.

हालांकि, नियमों के मुताबिक, प्रारंभि‍क जांच के दौरान सीबीआई अधिकारिक नोटिस जारी नहीं कर सकती, लेकिन जरूरत पड़ने पर पूछताछ जरूर कर सकती है.

प्रारंभिक जांच के तहत इस बात का पता लगाया जाएगा कि दीपक कोचर और उनके दो रिश्तेदारों द्वारा बनाई गई फर्म को वीडियोकॉन समूह के वेणुगोपाल धूत ने रिश्वत के रूप में कितने रुपये दिए. साथ ही उन आरोपों की भी जांच होगी, जिसमें कहा जा रहा है कि वीडियोकॉन समूह को आईसीआईसीआई बैंक द्वारा दी गयी कर्ज सहायता कुछ ले-दे कर दी गयी और इस में कोचर और उनके परिवार के कुछ सदस्यों की कथित संलिप्तता थी.

4000 करोड़ के लोन में हेरा-फेरी का आरोप

दरअसल, ICICI बैंक और वीडियोकॉन ग्रुप के निवेशक अरविंद गुप्ता ने चंदा कोचर पर आरोप लगाया था कि कोचर ने वीडियोकोन को कुल 4000 करोड़ रुपए के दो ऋण मंजूर करने के बदले में गलत तरीके से निजी लाभ लिया.

रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज में दर्ज जानकारी के मुताबिक ICICI बैंक चीफ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर ने धूत के साथ मिलकर दिसंबर 2008 में न्यू पॉवर रीन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (NRPL) के नाम से साझा कंपनी बनाई. NRPL में धूत, उनके परिवार के सदस्यों और करीबियों के 50 फीसदी शेयर थे.

बाकी शेयर चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और पैसेफिक कैपिटल के नाम थे. पैसेफिक कैपिटल का स्वामित्त्व दीपक कोचर के परिवार के पास ही था. एक साल बाद जनवरी 2009 में धूत ने NRPL के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया और अपने करीब 25000 शेयर दीपक कोचर को ट्रांसफर कर दिए. मार्च 2010 में NRPL को सुप्रीम एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से लोन मिला जो कि धूत की ही कंपनी थी.

मार्च 2010 के आखिर तक सुप्रीम एनर्जी ने NRPL का अधिकतर नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया. दीपक कोचर के पास 5 फीसदी शेयर ही रह गए. करीब 8 महीने बाद धूत ने सुप्रीम एनर्जी में अपनी सारी होल्डिंग अपने सहयोगी महेश चंद्र पुंगलिया के नाम कर दी. दो साल बाद पुंगलिया ने सुप्रीम एनर्जी में अपना सारा स्टेक दीपक कोचर की पिनेकल एनर्जी को 9 लाख रुपए में दे दिया.

2012 में दिया 3250 करोड़ का ऋण

अरविंद गुप्ता ने इंडिया टुडे से कहा, ‘हमें जानने की जरूरत है कि क्यों दीपक कोचर और धूत ने साझा उपक्रम बनाया और फिर धूत ने उसे छोड़ दिया. हमें जानने की जरूरत है कि मारिशियन कंपनी (डीएच रीन्यूएबल्स) के पीछे असल में कौन लोग हैं.’ गुप्ता के संदेह का कारण NRPL को उसी समय विदेशी फंड का बहुतायत में मिलना है.

ICICI बैंक ने करीब 4000 करोड़ रुपए ऋण के तौर पर वीडियोकोन ग्रुप को 2010 से 2012 के बीच दिए और डीएच रीन्यूएबल्स ने 325 करोड़ और 66 करोड़ रुपए NRPL में डाले. ICICI बैंक ने 3250 करोड़ 5 वीडियोकॉन कंपनियों को अप्रैल 2012 में दिए. इसके बाद केमेन आईलैंड्स की एक शैल कंपनी को 660 करोड़ रुपए का ऋण दिया गया.

सेबी भी कस सकता है ICICI बैंक पर शिकंजा

आईसीआईसीआई बैंक के विवादों में घिरने के बीच बाजार नियामक सेबी ने देखना शुरू किया है कि कहीं इस मामले में सूचनाओं के प्रकाशन या कंपनी संचालन से जुड़ा कोई मामला तो नहीं बनता है.

इसी तरह वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज व इसके प्रवर्तक भी एक मामले में नियामक की निगाह में हैं. यह मामला आईसीआईसीआई बैंक व कुछ सार्वजनिक बैंकों के समूह द्वारा कंपनी को दिए गए कर्ज में कथित प्रतिदान से जुड़ा है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि नियामक ने निजी क्षेत्र के इस बैंक द्वारा बीते कुछ साल में किए गए विभिन्न खुलासों में शुरुआती जांच शुरू की है.

वहीं शेयर बाजार भी 2012 तक के कुछ सौदों के संबंध में हालिया रपटों के बारे में अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांग सकते हैं. उल्लेखनीय है कि आईसीआईसीआई बैंक देश का चौथा सर्वाधिक मूल्यवान बैंक है, जिसका बाजार पूंजीकरण लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये है.

ICICI ने चंदा कोचर का किया बचाव

ICICI बैंक के बोर्ड ने अपनी एमडी और सीईओ चंदा कोचर पर पूरा भरोसा जताया है. आईसीआईसीआई बैंक के अध्यक्ष एमके शर्मा ने शुक्रवार को अपनी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चंदा कोचर के बचाव में उतरते हुए कहा कि बोर्ड को सीईओ पर पूरा भरोसा है.

साथ ही, उन्होंने वीडियोकॉन समूह को दिए लोन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज कर दिया है. शर्मा ने कहा कि बैंक ने कर्ज मंजूरी के लिए अपनी आंतरिक प्रक्रिया की समीक्षा की और उन्हें मजबूत पाया.

उन्होंने कहा कि बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि विभिन्न अफवाहों में लगाए गए आरोपों जैसी कोई गड़बड़ी/ भाई भतीजावाद/हितों का टकराव नहीं है. उन्होंने कहा कि बैंक और इसके शीर्ष प्रबंधन की छवि खराब करने के लिए अफवाहें फैलाई जा रही हैं.

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अगर फ़ेसबुक बंद हो गया तो क्या होगा?

दिन हो या रात, ऑफ़िस का डेस्कटॉप हो या हाथों में समाने वाला स्मार्टफ़ोन, फ़ेसबुक वो दुनिया है जो हमारी दुनिया का अब अहम हिस्सा है.

घर-परिवार की तस्वीरें हों या फिर ऑफ़िस से जुड़ी कोई अच्छी-बुरी ख़बर, अब निजी ज़िंदगी की ख़बरें फ़ेसबुक पर ब्रेक होती हैं.

इस ख़बर को पढ़ने वाले ज़्यादातर लोग ऐसा करते होंगे, इसलिए फ़ेसबुक से जुड़ी हालिया घटना और उसके संभावित नतीजे के बारे में आपको ज़रूर ख़बर होनी चाहिए.

दरअसल, फ़ेसबुक से जुड़ी एक ख़बर ने दुनिया के होश उड़ा दिए हैं. सुनने में ये कहानी बड़ी जटिल है. लेकिन जितनी जटिल है, उससे कहीं ज़्यादा मुश्किल सामने ला सकती है.

फ़ेसबुक फंसा कैसे?

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रिसर्च फ़र्म कैम्ब्रिज एनालिटिका पर आरोप लगा है कि उसने 5 करोड़ फ़ेसबुक यूज़र से जुड़ी जानकारी का ग़लत इस्तेमाल किया है.

ये बहस एक बार फिर शुरू हो गई है कि सोशल नेटवर्क पर लोगों से जुड़ी जानकारी कैसे और किसके साथ साझा की जाती है और फ़ेसबुक के लिए ये सारी जानकारी या कहें डेटा, कमाई का मुख्य स्रोत है क्योंकि यही विज्ञापन देने वाली कंपनियों को उसके पास खींच लाती हैं और उसे कमाई कराती हैं.

लेकिन कैम्ब्रिज एनालिटिका से जुड़ी घटना ने फ़ेसबुक को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इतने कि सोशल मीडिया में फ़ेसबुक डिलीट करने से जुड़ा हैशटैग #deletefacebook भी वायरल बना दिया है.

फ़ेसबुक डिलीट करने की सलाह

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वॉट्सऐप के को-फ़ाउंडर ब्रायन एक्टन ने टि्वटर पर ये सलाह दी है. फ़ेसबुक ने कुछ साल पहले 16 अरब डॉलर या 1 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा में वॉट्सऐप ख़रीदा था.

ये बात तो हुई ख़ुद फ़ेसबुक डिलीट करने की सलाह की, लेकिन क्या साल 2017 की अंतिम तिमाही में 2.2 अरब मासिक एक्टिव यूज़र रखने वाला फ़ेसबुक बंद भी हो सकता है? और अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा? समाज में इसकी वजह से कितना बड़ा बदलाव आएगा?

फ़ेसबुक के आकार को देखकर आज ऐसा लग सकता है कि ये मुमकिन नहीं है. लेकिन टेक्नोलॉजी की दुनिया में चीज़ें इतनी तेज़ी से बदलती हैं कि आज नामुमकिन-सी लगने वाली बात कल को सामान्य लग सकती है.

सीएनएन के मुताबिक ज़्यादा दिन नहीं बीते जब चुनिंदा इंटरनेट कंपनियों ने मिलकर पूरी दुनिया बदल दी थी. फ़ेसबुक ने पारंपरिक मीडिया को बदलकर रख दिया. उबर, नेटफ़्लिक्स और एयरबीएनबी जैसी चीज़ों ने टैक्सी, मूवी थियेटर और होटलों की जगह ले ली है.

क्या ज़रूरत से ज़्यादा बड़ा हुआ FB

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लेकिन कभी क्रांतिकारी दिखने वाली ये अपस्टार्ट कंपनियां अब ताक़तवर दिखने लगी हैं और वे अब हमारे बारे में काफ़ी कुछ जानती हैं और लोगों को इससे परेशानी हो रही है.

यही वजह है कि अब हमें ब्लॉकचेन शब्द बार-बार सुनाई दे रहा है. दूसरी चीज़ों के अलावा ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी वो हथियार है जो फ़ेसबुक की ताक़त ख़त्म कर सकता है. बिटकॉइन में इसकी झलक मिलती है.

बिना बैंक और सरकार की मदद के डिजिटल मनी पूरी दुनिया में फैल रहा है. दूसरे शब्दों में कहें तो ब्लॉकचेन मध्यस्थों को हटाता है और ये टेक्नोलॉजी कई इंडस्ट्री की मदद कर सकती है.

ब्लॉकगीक के मुताबिक डिजिटल इंफ़ॉर्मेशन को कॉपी नहीं बल्कि डिस्ट्रीब्यूट करने का ज़रिया देने वाली ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी नए तरह के इंटरनेट की रीढ़ है. इसे शुरुआत में बिटकॉइन के लिए बनाया गया था लेकिन आगे चलकर ये फ़ॉर्मूला दूसरे लोगों के भी काम आ सकता है.

ब्लॉकचेन से फ़ायदा क्या?

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ब्लॉकचेन होने से कई लोग रिकॉर्ड इंफॉर्मेशन में कई सारी एंट्री डाल सकते हैं और यूज़र मिलकर (कम्युनिटी) इस बात का कंट्रोल अपने हाथ में रख सकते हैं कि इस रिकॉर्ड को कैसे इस्तेमाल करना है, बदलाव और अपडेट कैसे करना है.

कॉइनडेस्क के अनुसार इसे सबसे आसान तरीके से समझने के लिए विकीपीडिया का उदाहरण है. इस वेबसाइट पर कोई भी एक पब्लिशर मौजूद जानकारी पर अधिकार नहीं रखता.

हालांकि, ये दोनों ही डिस्ट्रीब्यूटेड नेटवर्क पर चलते हैं, लेकिन विकीपीडिया वर्ल्ड वाइड वेब पर बिल्ट किया गया है जिसमें क्लाइंट-सर्वर नेटवर्क मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है.

एकाउंट से ज़रिए मिलने वाली परमिशन के साथ कोई क्लाइंट या यूज़र सेंट्रलाइज़्ड सर्वर पर रखी विकीपीडिया की जानकारी बदल सकता है.

विकीपीडिया से समझें

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जब कोई यूज़र विकीपीडिया पेज पर जाता है तो उन्हें विकीपीडिया एंट्री की मास्टर कॉपी का अपडेटेड वर्ज़न मिलता है.

लेकिन डेटाबेस का कंट्रोल विकीपीडिया एडमिनिस्ट्रेटर के पास रहता है, जो ऐक्सेस और परमिशन देने से जुड़ी बातों का फ़ैसला सेंट्रल अथॉरिटी के खाते में रखते हैं.

अब फ़र्ज़ कीजिए कि फ़ेसबुक जैसी कोई साइट ऐसी ही बने जिस पर मौजूद डेटा का कंट्रोल किसी कंपनी नहीं बल्कि सभी के पास या कम्युनिटी के पास रहे तो कैसा होगा?

विकीपीडिया का डिजिटल आधार भी उन्हीं सुरक्षित और सेंट्रलाइज़्ड डेटाबेस की तरह है जो आम तौर पर सरकारें या बैंक या बीमा कंपनियां रखती हैं. इनका कंट्रोल भी सबसे ऊपर वाले लोगों के पास रहता है.

कैसे काम करती है ये टेक्नोलॉजी?

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कंट्रोल में अपडेट, एक्सेस और साइबर हमलों से बचने के तौर-तरीके भी शामिल हैं. लेकिन ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में बुनियादी रूप से अलग डिजिटल आधार होता है. ये इस टेक्नोलॉजी का सबसे ख़ास और अलग फ़ीचर भी है.

विकीपीडिया की मास्टर कॉपी सर्वर पर एडिट होती है और सभी यूज़र को नया वर्ज़न दिखता है.

ब्लॉकचेन के मामले में नेटवर्क में मौजूद हर नोड एक ही निष्कर्ष तक पहुंचता है और उनमें से हरेक स्वतंत्र रूप से रिकॉर्ड को अपडेट करते हैं.

इसके बात जो सबसे ज़्यादा लोकप्रिय रिकॉर्ड होता है, वो मास्टर कॉपी की जगह आधिकारिक रिकॉर्ड माना जाता है. लेकिन फ़ेसबुक के बदलने या ऐसा कोई नया विकल्प आने में अभी वक़्त है.

जब तक फ़ेसबुक पर हैं, बचे रहें

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  • फ़ेसबुक पर लॉगइन करें और ऐप सेटिंग पेज पर जाएं
  • ऐप्स, वेबसाइट एंड प्लगइन के तहत एडिट बटन को क्लिक करें
  • प्लेटफ़ॉर्म को डिसएबल करें

इसका ये मतलब हुआ कि आपको फ़ेसबुक पर थर्ड-पार्टी साइट इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे और अगर आपको इतना करना भी ज़्यादा लगता है तो ऐप इस्तेमाल करने के बावजूद पर्सनल इंफॉर्मेशन तक पहुंच सीमित बनाई जा सकती है.

  • फ़ेसबुक के ऐप सेटिंग पेज पर लॉगइन करें
  • हर वो कैटेगरी को अनक्लिक करें जिस तक आप किसी को पहुंचने नहीं देना चाहते. इनमें बायो, बर्थडे, फ़ैमिली, रेलीजियस व्यूज़ शामिल हैं.
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Shocking! JNU student’s protests blocked way to hospital, lead by Shehla Rashid.

Shocking! JNU student’s protests blocked way to hospital. When people tried to reason with them for a child in critical conditionbleeding in mother’s arm.. stuck in the jam caused by them, the JNU students said – THAT IS NOT OUR PROBLEM!!!
The post even mentions it lead by Shehla Rashid.

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जब ब्रह्मांड नहीं था, तब क्‍या था? स्‍टीफन हॉकिंग ने खोला राज!

बिगबैंग थ्‍योरी के बारे में तो आप शायद जानते ही होंगे। हमारा संसार, आकाश गंगाएं, सौरमंडल और सारे ग्रह Big Bang के कारण अपने अस्तित्‍व में हैं। सालों से वैज्ञानिक यही मानते और बताते चले आ रहे हैं कि इस संसार में सबसे पहले बिगबैंग हुआ और उसके कारण ही पूरे ब्रह्मांड का उदय हुआ। अब दुनिया के फेमस वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने वो राज खोला है, जिसे पूरी दुनिया बरसों से जानता चाहती है। स्‍टीफन हॉकिंग ने हाल ही में बिगबैंग के पहले के संसार के बारे में कुछ ऐसा बताया है, जिसे जानकर विज्ञान भी अचंभित है।

बिगबैंग के पहले क्‍या था संसार में? स्‍टीफन हॉकिंग ने किया खुलासा

आज से करीब 13.8 अरब साल पहले ब्रह्मांड बहुत छोटे से आकार से बढ़ना शुरु हुआ था। फिर बहुत ज्‍यादा तापमान और फोर्स के दम पर इसका आकार बढ़ना शुरु हुआ। इसके बाद अणुओं को आपस में मिलना शुरु हुआ। पहले उनका आकार बहुत बढ़ा और फिर उनका विघटन शुरु हुआ, जिससे तमाम तारा मंडल, ग्रह और आकाश गंगाएं अस्तित्‍व में आईं। यही बिगबैंग था, जिससे हमारा संसार बना और आजतक ब्रह्मांड का आकार धीरे धीरे बढ़ रहा है। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक ब्रह्मांड के बारे में यही जानते हैं, लेकिन इस बिगबैंग के पहले क्‍या था या कहें कि दुनिया कैसी थी, इस पर अब तक वैज्ञानिक कुछ खास नहीं जान सके हैं और इस पर वैज्ञानिकों की बहस का कोई रिजल्‍ट नहीं निकल पाया है। इसी बीच वर्ल्‍ड फेमस वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने टीवी शो StarTalk पर खुलासा करते हुए बताया है कि बिगबैंग के पहले आखिर क्‍या हुआ करता था।

क्‍या बताया स्‍टीफन हॉकिंग ने

वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने इस शो के होस्‍ट और एस्‍ट्रोफिजीसिस्‍ट नील डिग्रास से बात करते हुए बताया कि बिगबैंग के पहले क्‍या था, इस बारे में मेरा यह कहना है कि वो जितना आसान था उतना ही ज्‍यादा कॉम्‍प्‍लेक्‍स था, क्‍योंकि वास्‍तव में बिगबैंग से पहले कुछ नहीं था। हॉकिंग ने कहा कि एल्‍बर्ट आइंसटाइन की जनरल थ्‍योरी ऑफ रिलेटीविटी के अनुसार स्‍पेस और टाइम ने साथ मिलकर दुनिया में स्‍पेस और समय का कभी न रुकने वाला चक्र बनाया है, लेकिन सच में वो बिल्‍कुल सपाट नहीं है बल्कि ऊर्जा और भौतिक पदार्थ के दबाव के कारण ये आपस में घूमा हुआ है। यहीं वजह है कि इसे समझ पाना आसान नहीं है।

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स्‍टीफन हॉकिंग ने बताया, बिगबैंग के पहले समय’ का भी अस्तित्‍व नहीं था

बिगबैंग के पहले की दुनिया को लेकर स्‍टीफन हॉकिंग ने एक काफी नया विचार इस रखा है जो चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि बिगबैंग के पहले टाइम यानि समय का भी कोई अस्तित्‍व नहीं था। वो कहते हैं कि Einstein के सिद्धांत के मुताबिक ब्रह्मांड की उत्‍पत्ति के समय संसार में मौजूद सभी भौतिक पदार्थ और ऊॅर्जा बहुत ही छोटी जगहों पर केंद्रित थी, लेकिन उनकी यह थ्‍योरी बिगबैंग के पहले और बाद की कंडीशन के बीच कोई गणितीय लिंक नहीं बताती।

स्‍टीफन हॉकिंग की थ्‍योरीज दुनिया के लिए अचंभा

वैसे तो स्‍टीफन हॉकिंग हमारी दुनिया और हमारे भविष्‍य के बारे में इससे पहले भी बहुत कुछ बता चुके हैं। जैसे कि उनका मानना है कि कोई भी एलियन प्रजाति हम इसांनो को खत्‍म नहीं करेंगे, बल्कि विज्ञान द्वारा बनाया गया आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस ही धरती पर हम इसांनों को रिप्‍लेस कर देगा। उनका तो यह भी कहना है कि इंसानों जल्‍दी से जल्‍दी इस धरती को छोड़ देना चाहिए। स्‍टीफन हॉकिंग के लॉजिक्‍स भले ही कई बार आम लोगों को समझ नहीं आते हैं, लेकिन वैज्ञानिक उनके दिमाग का लोहा मानते हैं।