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कमाई के रिकॉर्ड में संजू ने बाहुबली को पछाड़ा। सुल्तान का वीकेंड रिकॉर्ड अभी भी कायम।

राजकुमार हिरानी निर्देशित संजू 29 जून को सिनेमाघरों में पहुंची और जैसी कि उम्मीद की जा रही थी, फ़िल्म ने ओपनिंग वीकेंड में 120.06 करोड़ का कलेक्शन किया है, जो इस साल का सबसे बड़ा ओपनिंग वीकंड बन गया है।

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Team Sanju

संजू की यह बॉक्स ऑफ़िस उपलब्धि इसलिए भी काबिले-तारीफ़ है, क्योंकि संजू ने यह करिश्मा नॉन हॉलीडे वीकेंड में किया है। ट्रेड जानकारों के मुताबिक़, देशभर में फ़िल्म को लेकर ज़बर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है। संजू ने पहले दिन से ही ज़ोरदार कमाई के संकेत दे दिये थे, जब इसने 34.75 करोड़ की ओपनिंग ली। रिलीज़ के दूसरे दिन यानि पहले शनिवार को संजू की कमाई 38.60 करोड़ पर पहुंच गयी और पहले रविवार को फ़िल्म ने जैसे तबाही मचा दी। ओपनिंग वीकेंड के आख़िरी दिन संजू को 46.71 करोड़ का कलेक्शन मिला है। संजू ने सिंगल डे पर सबसे ज़्यादा कमाई का रिकॉर्ड भी बना लिया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड 2017 में आयी बाहुबली2 के नाम था, जिसने रिलीज़ के तीसरे दिन रविवार को 46.50 करोड़ जमा किये थे। हालांकि ओपनिंग वीकेंड की कमाई के मामले में संजू बाहुबली2 से पीछे है, जिसके हिंदी वर्ज़न ने 128 करोड़ का कलेक्शन ओपनिंग वीकेंड में किया था। बता दें कि बाहुबली 2 भी नॉन हॉलीडे वीकेंड में रिलीज़ हुई थी।
वहीं, 2016 में आयी सलमान ख़ान की सुल्तान हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ा ओपनिंग वीकेंड लेने वाली फ़िल्म है, जिसने 180.36 करोड़ का कलेक्शन किया था। मगर ईद के मौक़े पर रिलीज़ हुई सुल्तान को 5 दिन लंबे हॉलीडे वीकेंड का फायदा मिला था।

साल 2018 के पहले हाफ़ में संजू की रिलीज़ के बाद टॉप 10 ओपनिंग वीकेंड की लिस्ट इस प्रकार है-

10. दसवें स्थान पर जॉन अब्राहम की फ़िल्म ‘परमाणु द स्टोरी ऑफ़ पोखरण’ है, जिसने 20.78 करोड़ का कलेक्शन ओपनिंग वीकेंड में किया। इस फ़िल्म को अभिषेक शर्मा ने निर्देशित किया था। भारत के दूसरे परमाणु परीक्षण की घटना पर आधारित फ़िल्म में जॉन ने सुरक्षा अधिकारी का किरदार निभाया। डायना पेंटी फीमेल लीड रोल में थीं।

9. नौवें स्थान पर इस साल की सरप्राइज़ हिट ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ है। इस फ़िल्म को लव रंजन ने डायरेक्ट किया है, जो इससे पहले प्यार का पंचनामा सीरीज़ बनाते रहे हैं। लव की इसी विश्वसनीयता ने सोनू के टीटू की स्वीटी को शानदार ओपनिंग वीकेंड दिया। फ़िल्म ने 26.57 करोड़ पहले तीन दिन में जमा किये। 100 करोड़ से ज़्यादा जमा करके फ़िल्म सुपरहिट घोषित की गयी।

8. आठवें स्थान पर आलिया भट्ट की ‘राज़ी’ है, जिसने ओपनिंग वीकेंड में 32.94 करोड़ जमा किये। मेघना गुलज़ार निर्देशित ‘राज़ी’ इस साल की शानदार फ़िल्मों में शामिल है। हरिंदर सिक्का के नॉवल कॉलिंग सहमत पर बनी फ़िल्म में आलिया ने कश्मीरी लड़की का रोल निभाया, जो जासूसी के लिए पाकिस्तान जाती है।

7. सातवें स्थान पर आ गयी है ‘वीरे दी वेडिंग’, जिसने ओपनिंग वीकेंड में 36.52 करोड़ जमा किये हैं। इस लिस्ट में आख़िरी एंट्री ‘वीरे दी वेडिंग’ की हुई है, जिसने ओपनिंग वीकेंड में 36.52 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था। एक जून को रिलीज़ हुई फ़िल्म को शशांक घोष ने डायरेक्ट किया है। चार दोस्तों की इस कहानी में करीना कपूर, सोनम कपूर, स्वरा भास्कर, शिखा तलसानिया और सुमित व्यास ने मुख्य भूमिकाएं निभायी हैं।

6. ओपनिंग वीकेंड कलेक्शन की लिस्ट में छठे नंबर पर ‘पैडमैन’ है, जिसने 40.05 करोड़ का कलेक्शन किया था। इस बायोपिक फ़िल्म में अक्षय कुमार ने अरुणाचलम मुरुगनाथम का किरदार निभाया, जबकि राधिका आप्टे उनकी पत्नी के किरदार में थीं। सोनम कपूर ने भी फ़िल्म में एक अहम किरदार प्ले किया था। अक्षय और निर्देशक आर बाल्की का ये पहला एसोसिशन था। ‘पैडमैन’ हिट रही।

5. पांचवें स्थान पर है राजकुमार गुप्ता निर्देशित ‘रेड’, जिसने ओपनिंग वीकेंड में 41.01 करोड़ जमा किये। इस फ़िल्म में अजय देवगन ने इनकम टैक्स अधिकारी का रोल निभाया। इलियाना डिक्रूज़ ने उनकी पत्नी का किरदार प्ले किया। 100 करोड़ से अधिक कमाकर ये फ़िल्म भी हिट रही।

4. ओपनिंग वीकेंड की लिस्ट में चौथे स्थान पर टाइगर श्रॉफ़ की ‘बाग़ी2’ है, जिसे अहमद ख़ान ने डायरेक्ट किया। इस एक्शन-रोमांटिक फ़िल्म में दिशा पाटनी पहली बार टाइगर के साथ आयीं। एक्शन को लेकर टाइगर की इमेज के चलते फ़िल्म ने 73.10 करोड़ का शानदार ओपनिंग वीकेंड किया।

3. तीसरे स्थान पर आ गयी है रेस 3, जिसने ओपनिंग वीकेंड में 106.47 करोड़ जमा किया है। रेमो डिसूज़ा निर्देशित फ़िल्म में सलमान के अलावा बॉबी देओल, जैकलीन फ़र्नांडिस, अनिल कपूर, साक़िब सलीम और डेज़ी शाह ने मुख्य किरदार निभाये हैं।

2. लिस्ट में ‘पद्मावत’ दूसरे स्थान पर आ गयी है। संजय लीला भंसाली की इस मैग्नम ओपस ने 114 करोड़ का कलेक्शन किया, जिसमें 19 करोड़ पेड प्रीव्यूज़ का भी शामिल है। पद्मावत काफ़ी समय तक विवादों में भी रही थी, जिसकी वजह से इसे 2017 से हटाकर 2018 में रिलीज़ किया गया। फ़िल्म में दीपिका पादुकोण ने चित्तौड़ की रानी पद्मावती, शाहिद कपूर ने राजा महारावल रतन सिंह और रणवीर सिंह ने दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी का किरदार निभाया था। पद्मावत 2018 की पहली 300 करोड़ की फ़िल्म भी है। हालांकि बजट अधिक होने की वजह से फ़िल्म बहुत फ़ायदे में नहीं माना गया है।

1. 120.06 करोड़ के साथ Top 10 Opening Weekend Collections की लिस्ट में टॉप पर आ गयी है संजू। राजकुमार हिरानी निर्देशित संजय दत्त की इस बायोपिक में रणबीर कपूर, परेश रावल, सोनम कपूर, विक्की कौशल और मनीषा कोईराला ने मुख्य किरदार निभाये।

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दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी लेने वाले शख्स बने निकेश अरोड़ा, अब हैं पालो अल्टो नेटवर्क के नए CEO

50 साल के अरोड़ा ने मार्क मिकलॉकलीन जगह ली है. जो पिछले सात सालों से पालो अल्टो के सीईओ के पद पर बने हुए थे. निकेश अरोड़ा सीईओ के साथ ही इस ग्रुप के नए चेयरमैन भी बन गए हैं. निकेश का सालाना वेतन 1 मिलियन डॉलर यानी लगभग 6.7 करोड़ रुपये होगा और इतना ही उन्हें बोनस मिलेगा. इसके साथ ही उन्हें 40 मिलियन डॉलर यानी 268 करोड़ रुपए के रिस्ट्रीक्टेड शेयर मिलेंगे।

कौन हैं निकेश अरोड़ा?
निकेश अरोड़ा का जन्म 6 फरवरी 1968 को उत्तर प्रदेश के गाजि‍याबाद में हुआ. निकेश के पिता इंडियन एयरफ़ोर्स में अधिकारी थे. उन्होंने दिल्ली के एयरफ़ोर्स के स्कूल से पढ़ाई की. उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग आआईटी वाराणसी (बीएचयू) से साल 1989 में किया. आईआईटी की डिग्री के बाद उन्हें विप्रो में नौकरी मिली लेकिन उन्होंने जल्द ही ये नौकरी छोड़ दी औऱ आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. इसके बाद उन्होंने अमेरिका नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली.

निकेश अरोड़ा ने साल 2004 में गूगल कंपनी ज्वाइन की. गूगल में वे कई ऑपरेशन के लीडर के तौर पर काम करते रहे. साल 2004 से 2007 के बीच वे गूगल के यूरोप ऑपरेशन के वाइस प्रेसिडेंट रहे. इसके बाद अफ्रीका रिजन के लिए साल 2009 तक काम किया. साल 2009 से 2010 तक वे गूगल के ग्लोबल बिजनेस डेवपमेंट के प्रेसिडेंट रहे. 2011 में वो गूगल में चीफ़ बिज़नेस ऑफिसर बन गए और इसके साथ ही वो उस लीग में आ गए जिन्हें गूगल सबसे ज्यादा सैलरी देता है. साल 2014 में अरोड़ा ने गूगल की नौकरी छोड़ दी.

इसके बाद निकेश ने बतौर सीओओ (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर) सॉफ़्ट बैंक ज्वाइन किया था और यहां उन्हें दो सालों में 200 मिलियन डॉलर का कंपेंसेशन पैकेज मिला. निकेश यहां जून 2016 तक रहे थे. अब जून 2018 में उन्होंने पालो अल्टो का हाथ थामा है.

 

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उत्तर प्रदेश में है दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल, 300 रुपये कर्ज लेकर हुआ था शुरू

कम लोग ही ये जानते होंगे कि दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल भारत में है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बना ये स्कूल पूरी दुनिया में मशहूर है और यहां हजारों लोग पढ़ाई करते हैं. आइए जानते हैं दुनिया के सबसे बड़े इस स्कूल के बारे में और जानते हैं यहां क्या खास है…
बता दें कि लखनऊ का सिटी मोंटेसरी स्कूल दुनिया में सबसे बड़ा स्कूल है. यह स्कूल बच्चों की संख्या को लेकर सबसे बड़ा स्कूल है. इस स्कूल में करीब 55 हजार बच्चे पढ़ाई करते हैं.
इस स्कूल में 55 हजार बच्चों के लिए 4500 लोगों को स्टाफ काम करता है. स्कूल के लखनऊ शहर में 18 कैंपस हैं.
यह स्कूल साल 1959 में 5 बच्चों के साथ शुरू हुआ था. उस वक्त यह 300 रुपये की कैपिटल से शुरू किया गया था. आज इस स्कूल का नाम गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज है.
इसकी स्कूल की स्थापना डॉ जगदीश गांधी और डॉ भारती गांधी ने की थी. अब यह स्कूल से आईसीएसई से मान्यता प्राप्त है. इस स्कूल का रिजल्ट भी सर्वश्रेष्ठ रहता है.
वैसे तो लखनऊ के इस स्कूल ने 2005 में ही 29,212 छात्रों के साथ रिकॉर्ड बना लिया था. इससे पहले सबसे बड़े स्कूल का रिकॉर्ड फिलिपीन्स के मनीला स्थित रिजाल हाई स्कूल के नाम था, जिसमें केवल 19,738 छात्र थे.
इस स्कूल में 2,500 टीचर हैं, 3,700 कंप्यूटर और 1,000 क्लासरूम है, जहां हजारों बच्चे शिक्षा लेते हैं. हालांकि किसी भी अन्य निजी स्कूल की तरह यहां भी बच्चों के माता पिता को इन सब सुविधाओं की अच्छी खासी कीमत देनी होती है.
वहीं पढ़ाई के साथ यहां खेलकूद को लेकर भी खास ध्यान दिया जाता है. पहला मॉनटेसरी स्कूल खोलने वाली मारिया कभी शिक्षा को व्यवसाय नहीं मानती है.
स्कूल को यूनेस्को से भी पीस एजुकेशन का अवार्ड मिल चुका है.
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फ्लिपकॉर्ट में 77% हिस्सेदारी के बाद अब 85% की तैयारी में वॉलमार्ट

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब वॉलमार्ट 3 अरब डॉलर का निवेश कर फ्लिपकॉर्ट की 85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है।

 

इस बात की जानकारी दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर ने शुक्रवार को अमेरिकी सिक्यॉरिटीज और एक्सचेंज कमिशन को दी। रिटेलर ने ये भी बताया कि वॉलमार्ट के बाकी शेयर भी उसी कीमत पर खरीदे जाएंगे जिस कीमत पर 77 फीसदी शेयर खरीदे गए थे।

वॉलमार्ट ने किस दर पर फ्लिपकॉर्ट के शेयरों को हासिल किया यह जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। वॉलमार्ट की फाइलिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लिपकॉर्ट के बड़े निवेशक जापानी इंटरनेट और टैलीकॉम कंपनी सॉफ्टबैंक ने शेयरों को बेचने पर कोई फैसला नहीं किया है। सॉफ्टबैंक के पास फ्लिपकॉर्ट के करीब 22 फीसदी शेयर हैं। इससे पहले मीडिया रिपोर्टस से भी ये बात साने आई थी कि वॉलमार्ट और सॉफ्टबैंक पहले की कीमत पर ही शेयर ट्रांजेक्शन के लिए वक्त निकाल कर बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे।

एसईसी फाइलिंग के अनुसार, वॉलमार्ट 2 अरब डॉलर कैश में निवेश कर रहा है और फ्लिपकॉर्ट के मौजूदा शेयर होल्डर्स से 14 अरब डॉलर मूल्य के शेयर खरीद रहा है। वॉलमार्ट ने कहा है कि वह बोर्ड और फाउंडर की सलाह से फ्लिपकॉर्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीईओ और प्रिंसिपल एग्जिक्युटिव्ज को अपॉइंट या रिप्लेस कर सकता है। फिलहाल कल्याण कृष्णमूर्ति फ्लिपकॉर्ट के सीईओ हैं और को-फाउंडर बिन्नी बंसल ग्रुप सीईओ हैं। को-फाउंडर और एग्जिक्युटिव चैयरमैन सचिन बसंल ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया।

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स्कूटर पर सामान बेचते थे ये दोनों, आज 1 लाख करोड़ रुपये में बेचे कंपनी के 75 फीसदी शेयर!

अमेरिकी कंपनी वाल्मार्ट ने Flipkart में 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है.

आइए जानते है फिल्पकार्ट के सफर के बारे में

 देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में...

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में…

 10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

 शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की. हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम 'Leaving Microsoft to Change the World' और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की.

हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम ‘Leaving Microsoft to Change the World’ और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

 सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

 ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.

ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.

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गगनशक्ति 2018: वायुसेना का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, एयरचीफ मार्शल बोले- आसमान को हिलाने का है माद्दा

पिछले तीन दशक में भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े अभ्यास ‘गगन शक्ति-2018’ में पिछले तीन दिनों के अंदर करीब 1100 विमानों ने हिस्सा लिया। जिनमें करीब आधा लड़ाकू विमान थे। वायुसेनाध्यक्ष बी.एस. धनोवा ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान बेहद करीब से इस ऑपरेशन पर नज़र रख रहा था जो “आसमान को हिला रहा है और धरती को चीर रहा है।”

अब वायुसेना अपना अभ्यास वेस्टर्न सेक्टर से ईस्टर्न सेक्टर में करने जा रही है। धनोवा ने कहा कि सभी तरह के प्रशिक्षण को 22 अप्रैल तक दो चरणों में चलनेवाले अभ्यास के चलते सस्पेंड किया जा रहा है। अमूमन यह युद्ध के समय में ऐसा होता है जब सेना की तरफ से सभी गतिविधियों को रोक दिया जाता है।

वायुसेना ने आकाश से दुश्मन के खात्मे का दम दिखाया
भारतीय वायुसेना का युद्धाभ्यास ‘गगन शक्ति 2018’ पिछले एक सप्ताह से पश्चिमी क्षेत्र में जारी है। पैराशुट ब्रिगेड की बटालियन के साथ वायुसेना ने आकाश से दुश्मन की धरती पर निशाना साधने का अभ्यास किया। वहीं पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित कलाईकुंडा एयरबेस से उड़े सुखाई 30 लड़ाकू विमानों ने भी दुश्मन को नेस्तेनाबूत करने का दम दिखाया। इस दौरान लक्षद्वीप तक की उड़ान के दौरान दो बार आकाश में ही सुखोई से सुखोई में ईंधन भरा गया।

वायुसेना ने तैयारी और दमखम को दो हिस्सों में परखा है। पहला पश्चिमी सीमा में और दूसरा उत्तरी सीमा पर। पश्चिमी सीमा के लिए पाकिस्तान सरकार को पूर्व सूचना दी गई। इस चरण में भारतीय सेना पाकिस्तान की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए दम दिखाया। दूसरे चरण में तिब्बत की ओर से चीन की सेना के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए अभ्यास किया।

जैसलमेर, जोधपुर, खड़गपुर में सैन्य विमानों ने हिस्सा लिया
लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना में शामिल होने के बाद पहली बार गगन शक्ति युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहा है। सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, मिग 27, जगुआर व मिराज जैसे 600 लड़ाकू विमान शामिल हैं। बड़े परिवहन विमान सी-17 ग्लोब मास्टर, सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस और अटैक हेलिकॉप्टर एमआई 35, एमआई 17 वी 5, एमआई 17, एएलएच ध्रुव, एएलएच भी शामिल हैं।

अड्डों पर धुआंधार गोलीबारी की गई
जैसलमेर में वायुसेना के विमानों ने विभिन्न ठिकानों को निशाना बनाकर युद्धाभ्यास किया।
‘गगन शक्ति 2018’ युद्धाभ्यास में पहली बार महिला फाईटर पायलट हिस्सा ले रही हैं। युद्धाभ्यास के दौरान स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की पूरी स्कवाड्रन ताकत दिखा रही है।

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आखिर ऐसा क्या हुआ जिसे याद कर आज भी कपिल शर्मा की आंखों से निकल जाते हैं आंसू, जानें

टेलीविजन किंग कॉमेडियन कपिल शर्मा ने फिर से छोटे पर्दे पर वापसी कर ली है. कपिल शर्मा ने सोनी टीवी पर फैमिली टाइम विद कपिल से कमबैक किया है. यूं तो कपिल शर्मा का नाम सुनते ही सभी के चेहरों पर मुस्कराहाट छा जाती है लेकिन पिछले कुछ समय से कपिल शर्मा का विवादों से चोली दामन का साथ सा बन गया था. आगे जानिए कॉमेडियन कपिल शर्मा के बारे में कुछ दिलचस्प बातें.

आपको बताते हैं आखिर देश का सबसे बड़े कॉमेडियन कैसे बने कपिल शर्मा. कपिल शर्मा का सफर शुरू हुआ अमृतसर से. कपिल शर्मा का जन्म पंजाब के अमृतसर में 2 अप्रैल 1981 को हुआ था. कपिल के पिता पुलिस डिपार्टमेंट में हेड कांस्टेबल थे और मां जनक रानी एक हाउसवाइफ हैं. कपिल का बचपन अमृतसर की पुलिस कॉलोनी में बीता. यही वजह है कि कपिल अपने करियर की शुरुआत में अक्सर शमशेर सिंह नाम के पुलिसवाले के किरदार में नजर आते थे. कपिल ने अपनी पढ़ाई अमृतसर के हिंदू कॉलेज से की है लेकिन कपिल की जिंदगी इतनी आसान नहीं थी. जब कपिल दसवीं क्लास मे पढ़ रहे थे तो उन्होंने अपनी पॉकेट मनी के लिए अमृतसर के एक टेलीफोन बूथ में भी काम किया था.

कपिल ने एक इंटरव्यू मे बताया कि उन्होंने चंद पैसों के लिए कोल्ड ड्रिंक्स के क्रेट्स तक उठाए हैं. साथ ही कपिल ने अपने कॉलेज में पढ़ाई करने के साथ साथ ऑर्ट ऑफ परफॉर्मेंस की क्लासेज भी देनी शुरू कर दी यानि अपने ही कॉलेज में कपिल स्टूडेंट भी थे और टीचर भी. कपिल की जिंदगी का एक अहम हिस्सा थियेटर करते हुए भी गुजरा. कपिल जिंदगी में स्ट्रगल कर रहे थे. वो सबको हंसाना चाहते थे लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब कपिल की आंखों में आ गए थे आंसू और आज भी उन बातों को याद कर भावुक हो जाते हैं कपिल. दरअसल, कैंसर से पीड़ित पिता का साया उनके सिर से 2004 में उठ गया तो वहीं दूसरी और परिवार को एक वक्त खाने कि दिक्कत देखनी पड़ी पर कपिल ने कभी हार नहीं मानी.

कपिल बड़े कॉमेडियन बनना चाहते थे लेकिन किस्मत उनका साथ नहीं दे रही थी. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद कपिल को लगा कि उनकी जिंदगी बदल जाएगी. साल 2007 में कपिल को स्टार टीवी के कॉमेडी शो ‘ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज 3’ में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया लेकिन किस्मत ने यहां कपिल का साथ नहीं दिया और वो शो में सेलेक्ट नहीं हुए. कपिल को तो शो में नहीं लिया गया लेकिन कपिल के दोस्त चंदन प्रभाकर को सेलेक्ट कर लिया. चंदन प्रभाकर इन दिनों कपिल के शो में उनके नौकर राजू का किरदार निभाते हैं.

इस रिजेक्शन के बाद जैसे कपिल का दिल टूट गया. लेकिन किस्मत को अभी एक और करवट लेनी थी. कपिल को इस शो में वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली और उसके बाद तो कपिल ने अपनी कॉमेडी का खूब जादू चलाया और ये शो जीत गए. कपिल शर्मा ने जब लाफ्टर चैलेंज जीता तो उन्हें 10 लाख रुपए का इनाम मिला. उस वक्त कपिल को अपनी बहन की सगाई करनी थी और उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे. लेकिन जब ये दस लाख रुपए हाथ आए तो कपिल ने सबसे पहले अपनी बहन की ही ये बात बताई और फिर कपिल ने अपनी बहन की शादी धूमधाम से की.

लॉफ्टर चैलेज जीतने के बाद कपिल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. इसके बाद कपिल सोनी टीवी के शो कॉमेडी सर्कस में नजर आए जहां कपिल ने अलग अलग किरादरों के जरिए दर्शकों को खूब हंसाया. कलर्स टीवी ने साल 2013 में कपिल के साथ एक नया शो शुरू किया जिसका नाम था कॉमेडी नाइट्स विद कपिल. ये शो कपिल के नाम से शुरू किया. कपिल ने इस शो से एक नई तरह की कॉमेडी की शुरुआत की. दर्शकों ने इस शो को खूब पसंद किया और देखते ही देखते कपिल ने कामयाबी का एक नया इतिहास रच दिया. कपिल के शो की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बॉलीवुड का हर बड़ा कलाकार अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए कपिल के शो में आता था.

कपिल शर्मा टेलीविजन तक ही सीमित नहीं रहे. साल 2015 में कपिल को अबास-मस्तान की फिल्म ‘किस किस को प्यार करूं’ में काम किया. कपिल की इस फिल्म को दर्शकों ने पसंद तो किया लेकिन फिल्म समीक्षकों ने यही कहा कि ये फिल्म कपिल के टीवी शो कॉमेडी नाइट्स विद कपिल जैसी ही है. कपिल की कामयाबी और उनकी पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने टेलीविजन शो कौन बनेगा करोड़पति सीजन 8 के पहले एपिसोड में कपिल को बतौर गेस्ट बुलाया.

कपिल को करण जौहर भी अपने शो ‘कॉफी विद करण’ में बुला चुके हैं. जबकि कपिल बहुत अच्छी इंग्लिश नहीं बोल पाते और करण का शो अंग्रेजी भाषा का शो है लेकिन ये कपिल की पॉपुलैरिटी ही है कि करण को उन्हें अपने शो में बुलाना पड़ा.

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Bollywood: Story of Big B इस फोटो को दिखाकर अमिताभ बच्‍चन ने मांगा था काम, हो गये थे रिजेक्‍ट

बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्‍चन सोशल मीडिया पर सबसे ज्‍यादा एक्टिव रहनेवाले सेलेब्‍स में गिने जाते हैं. वे फोटोज़ और वीडियोज़ तो शेयर करते ही हैं, प्‍लेटफॉर्म पर अपने फैंस से बात भी करते रहते हैं. अब उन्‍होंने अपनी एक पुरानी याद साझा की है. हाल ही में अमिताभ बच्‍चन एक तसवीर इंस्‍टाग्राम पर शेयर की है जो बेहद दिलचस्‍प है.

उन्‍होंने फोटो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा,’ फिल्‍मों में जॉब के लिए मेरी ऐप्‍ल‍िकेशन पिक्‍चर.. 1968.. कोई आश्‍चर्य नहीं कि मैं रिजेक्‍ट हो गया था!!’ इस तसवीर में बिग बी ने ऑफ-वाइट कलर का कुर्ता-पजामा पहन रखा है और एक पेड़ के नीचे बैठे हैं.

बता दें कि 75 वर्षीय अमिताभ बच्‍चन ने साल 1969 में रिलीज हुई फिल्‍म ‘सात हिंदुस्‍तानी’ से बॉलीवुड में कदम रखा था. अमिताभ खुद ही बता चुके हैं कि शुरुआती दिनों में काम पाने के लिए उन्‍हें काफी संघर्ष करना पड़ा था. बिग बी यह तसवीर को फैंस को बेहद पसंद आ रही हैं और वे उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं.

गौरतलब है कि महानायक अमिताभ बच्‍चन इनदिनों अपनी आनेवाली फिल्‍म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ की शूटिंग में बिजी हैं. 75 की उम्र में भी बिग बी अपने काम को लेकर बेहद सीरियस हैं. हाल ही में फिल्म की शूटिंग के दौरान बिग बी की तबीयत खराब हो गई थी जिसके बाद डॉक्टर्स की टीम ने उनका चेकअप किया था और वे शूटिंग प पर लौट गये आये थे. फिलहाल बिग बी बिल्‍कुल ठीक हैं.

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ये है भैयाजी जोशी के फिर से सरकार्यवाह बनने के पीछे की कहानी

तमाम कयासों के बाद आज आरएसएस की प्रतिनिधि सभा की बैठक में 70 साल के भैयाजी जोशी को चौथी बार सर्वसम्मति से सरकार्यवाह चुना गया. भैयाजी जोशी 2009 से सरकार्यवाह की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

शनिवार को दोपहर 3.40 बजे  सरकार्यवाह के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई. मध्य क्षेत्र के अशोक सोनी को चुनाव अधिकारी बनाया गया. पश्चिम क्षेत्र के जयंती भाई भदेसिया ने भैयाजी के कार्यकाल में जो काम हुए उसका उल्लेख करते भैयाजी जोशी का नाम फिर से सरकार्यवाह के लिए प्रस्तावित किया. उसके बाद जयंती भाई भदेसिया के प्रस्ताव का विरेंद्र सिंह पराक्रमदित्य, दक्षिण क्षेत्र रजेंद्रन, विठ्ठल जी और उमेश चक्रवर्ती ने समर्थन किया.

मजेदार बात ये है कि भैयाजी जोशी के अलावा किसी और उम्मीदवार ने अपनी दावेदारी पेश नहीं की और प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से भैयाजी जोशी को एक बार फिर से 3 साल के लिए सरकार्यवाह के लिए चुन लिया.

हर तीन साल में नागपुर में होने वाली बैठक में सरकार्यवाह का चुनाव होता है. सूत्रों की माने तो संघ के कुछ नेता चाहते थे कि इस बार सरकार्यवाह भैयाजी जोशी की जगह सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की जिम्मेदारी दी जाए. लेकिन दूसरी तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत और संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी चाहते थे कि भैयाजी जोशी को एक और सरकार्यवाह का कार्यकाल देना चाहिए.

पिछली बार की ही तरह भैयाजी जोशी ने सरकार्यवाह के चुनाव में भावुक भाषण दिया और कहा कि दो बार से मैं कह रहा हूं कि मुझे इस जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए और यंग ब्लड को आगे लाकर जिम्मेदारी दी जाये. तब आप लोगों ने मेरी बात को नहीं माना लेकिन इस बार मान लीजिए. लेकिन भैयाजी जोशी के कहने के बाद भी प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से उनको ही सरकार्यवाह चुना.

2015 में प्रतिनिधि सभा की बैठक में सरकार्यवाह के चुनाव के समय भैयाजी जोशी के स्वास्थ को लेकर संघ के वरिष्ठ नेताओं को चिंता थी लेकिन उसके बावजूद, उन्हें ही तीसरी बार सरकार्यवाह की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

सूत्रों की माने तो संघ के कई नेताओं का मानना है कि सहसरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह की ज़िम्मेदारी दी तो वो वैसी ही परिस्तिथि पैदा होगी जैसी अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के समय में केसी सुदर्शन संघ प्रमुख और मोहन भागवत सरकार्यवाह के रहते समय आयी थी. सुदर्शन पद में बड़े जरूर थे, लेकिन वो उम्र और तजुर्बे में कम थे. इस बार संघ नहीं चाहता था कि दोबारा ऐसी समस्या खड़ी हो.

सूत्रों की मानें तो दत्तात्रेय होसबोले को संघ के कई बड़े नेता इसीलिए सरकार्यवाह बनाने के पक्ष में नहीं थे क्योंकि उनका इतिहास संघ के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का रहा है और संघ में हमेशा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को एक राजनीतिक संगठन के तौर पर ही देखा जाता है. दत्तात्रेय होसबोले की ही तरह का इतिहास कभी संघ के सह सरकार्यवाह रहे मदनदास देवी का भी रहा है.

दत्तात्रेय होसबोले की ही तरह मदनदास देवी में सरकार्यवाह बनने की योग्यताएं थीं लेकिन उसके बाद भी उन्हें सरकार्यवाह की जिम्मेदारी नहीं दी गई. सूत्रों की मानें तो दत्तात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह नहीं बनाने के पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि मोदी सरकार और बीजेपी संगठन में उनके अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के समकालीन जुड़े नेता से अच्छे रिश्ते भी हैं.

मतलब साफ है कि संघ भले ही परदे के पीछे से राजनीति से जुड़ा हो लेकिन अभी संघ अपने दो सर्वोच्च पदों को राजनीति से जुड़ाव रखने वाले अपने नेताओं को ये पद नहीं देना चाहता था.