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चीन की हर चाल का जवाब देने के लिए भारत भी कर चुका है पूरी तैयारी

चीन एक बार फिर से भारत से लगती सीमा पर तनाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसको देखते हुए भारत ने सीमाओं पर अपने जवानों की संख्‍या बढ़ा दी है। दरअसल यह कवायद चीन की उस नापाक चाल के बाद की जा रही है जिसके तहत वह भारत की सीमा से सटे तिब्बती इलाके में तेजी से ढांचों का निर्माण करने में लगा है। इसके अलावा एक दिन पहले ही चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के किबिथू में लोहित घाटी के दूसरी और चीन की तरफ से टावर खड़ा करने और सैन्‍य गतिविधियों के लिए पक्‍का निर्माण करने की बात सामने आई है। लिहाजा यह जरूरी हो गया है कि भारत भी इन इलाकों में सड़कों का नेटवर्क बढ़ाए, जिससे सेना की शीघ्रता के साथ आवाजाही हो सके।

सीमा के नजदीक एक्‍सप्रेस वे

चीन की नापाक चाल को सफल होने से रोकने के लिए भारत भी अपनी तैयारी कर रहा है, लेकिन भारत की तैयारियों से पहले हम आपको बता दें कि चीन भारत से लगती सीमाओं पर क्‍या कुछ अब तक कर चुका है। सितंबर 2017 में तिब्‍बत से नेपाल को जोड़ने वाला हाईवे खोलने के बाद चीन ने अरुणाचल प्रदेश के करीब एक और एक्‍सप्रेसवे खोला जो तिब्‍बत की राजधानी ल्‍हासा और निंगची को जोड़ता है। यह एक्‍सप्रेसवे 5.8 अरब डॉलर की लागत से तैयार हुआ है और इसकी लंबाई करीब 409 किमी है। निंगची अरुणाचल प्रदेश की सीमा के नजदीक है। इस एक्‍सप्रेस वे के जरिए ल्हासा और निंगची के बीच की दूरी महज पांच घंटों में पूरी की जा सकती है। पहले इसमें करीब आठ घंटे का समय लगता था। यह एक्‍सप्रेस वे इस तरह से बनाया गया है कि समय आने पर सैन्‍य साजोसामान तेजी से सीमा तक ले जाया जा सके।

सीमा के नजदीक एयरपोर्ट

इसके अलावा पिछले वर्ष ही चीन ने अरुणाचल प्रदेश से लगती सीमा के नजदीक तिब्‍बत का दूसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट भी खोला है। भारतीय सीमा के नजदीक स्थित यह एयरपोर्ट टर्मिनल 10300 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। 2020 तक यह सालाना 750000 यात्रियों और 3 हजार टन माल संभालने लायक हो जाएगा। नया टर्मिनल तिब्बत में खुला छठा टर्मिनल है जो न्यिंगची मेनलिंग एयरपोर्ट पर स्थित है। चीन के इन कदमों ने भारत की चिंता को बढ़ा दिया है।

क्यूटीएस-11 सिस्टम से लैस चीन की वेस्टर्न थियेटर कमान

इन सभी के अलावा चीन ने इसी वर्ष फरवरी में भारत से लगती सीमा पर वेस्टर्न थियेटर कमान को क्यूटीएस-11 सिस्टम से लैस किया है। यह सब अमेरिकी फौज की तैयारियों की तर्ज पर किया गया है। आपको बता दें कि वेस्टर्न थियेटर कमान भारत से लगती 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की जिम्मेदारी संभालती है। क्यूटीएस-11 दरअसल, अमेरिकी सैनिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली की तरह है। इसके अलावा यह सभी तरह के फायरआर्म्‍स पर काबू पाने में सक्षम है। इसके अलावा यह एक पूरी तरह से डिजिटलीकृत समेकित व्यक्तिगत सैनिक लड़ाकू प्रणाली भी है। राइफल और 20 मिलीमीटर ग्रेनेड लांचर वाली यह प्रणाली लक्ष्य के अंदर के सैन्यकर्मियों को नष्ट करने में सक्षम है।

चीन ने सीमा पर तैनात किए हैं फाइटर जेट

भारतीय सीमा से सटे इलाकों में अपने सेना के जमावड़े के साथ-साथ चीन ने इसी वर्ष तिब्‍बत से लगती भारतीय सीमा के निकट स्थित अपने वायुसेना के ठिकानों पर फाइटर जेट्स की संख्या 47 से बढ़ाकर 51 कर दी है। ल्हासा-गोंगका में चीन ने आठ फाइटर जेट्स तैनात किए हैं। इसके अलावा एयर मिसाइल सिस्टम्स समेत 22 एमआई-17 हेलिकॉप्टर्स सहित कई अन्य हथियार भी तैनात हैं। होपिंग-रिकाजे में चीनी वायु सेना के 18 एयरक्राफ्ट्स तैनात हैं। इसके अलावा 11 एमआई-17 अनमैन्ड एरियल वीकल्स भी शामिल हैं। यही नहीं चीन ने तिब्बत में भारत से लगती सीमा में जमीन से हवा पर मार करने वाली मिसाइलों को भी तैनात कर दिया है।

चीन को देखते हुए भारत की तैयारी

चीन की इस रणनीति ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। लिहाजा भारत ने चीन सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ा दी है। बीजिंग की हर चाल पर पैनी नजर रखने के लिए सामरिक रूप से महत्वूपर्ण अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्रों दिबांग, दाउ देलाई और लोहित घाटी में सैनिकों की संख्या बढ़ाने के साथ ही गश्त भी तेज कर दी गई है। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, भारत ने तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में चीन की हर चाल पर पैनी नजर रखने के लिए अपने निगरानी तंत्र को भी बेहद चाकचौबंद कर लिया है। इन क्षेत्रों की टोह लेने के लिए नियमित रूप से हेलीकॉप्टरों से भी गश्त की जा रही है। भारत दिबांग, दाउ देलाई और लोहित घाटी जैसे दुर्गम इलाकों में अपना ध्यान केंद्रित किए हुए है। इन इलाकों में 17 हजार फीट ऊंची बर्फीली पहाड़ियां और नदियां हैं। इन क्षेत्रों से लगती सीमाओं पर चीन के बढ़ते सैन्य दबाव की काट के तौर पर भारत ने यह रणनीति अपनाई है।

अहम सामरिक इलाकों पर भी ध्यान

चीन के तिब्बती क्षेत्र से लगते अरुणाचल के गांव किबिथू में तैनात सेना के एक अधिकारी का कहना है, ‘डोकलाम के बाद हमने सीमा पर अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। हम किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। भारत, चीन और म्यांमार के ट्राई जंक्शन समेत अहम सामरिक इलाकों में सेना की तैनाती बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि सेना अब अपनी लंबी दूरी की गश्त (लांग रेंज पेट्रोल्स) को बढ़ा रही है। इसमें छोटी-छोटी टुकड़ियां 15 से 30 दिनों के लिए गश्त पर भेजी जाती है।

टी 72 से लेकर सुखोई तक तैनात

भारत ने पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में टी-72 टैंकों की तैनाती की है, जबकि अरुणाचल में ब्रह्मोस और होवित्जर मिसाइलों की तैनाती करके चीन के सामने शक्ति प्रदर्शन किया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर में सुखोई-30 एमकेआई स्क्वेड्रन्स को भी उतारा गया है। अकेले अरुणाचल प्रदेश की रक्षा के लिए चार इंफेंटरी माउंटेन डिविजन लगाई गई हैं जिसमें 3 कॉर्प्स (दीमापुर) और 4 कॉर्प्स (तेजपुर) की हैं और दो कॉर्प्स को रिजर्व में रखा गया है। हर डिवीजन में करीब 1200 जवान तैनात हैं। तवांग जिसपर कि चीन दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता रहा है वहां भी सैनिकों की संख्या ज्यादा है जो किसी भी तरह की नापाक हरकत को विफल कर सकती हैं।

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जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

जानें- क्या है BSF और सेना में अंतर, सैलरी-सुविधाएं भी होती है अलग

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भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बल भारत की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं. देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा में भारतीय सेना के साथ सीआरपीएफ, बीएसफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी का अहम योगदान होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं ये सुरक्षा बल, भारतीय सेना से अलग होते हैं और इन्हें मिलने वाली सुविधाएं भी काफी अलग होती है. आइए जानते हैं पैरा मिलिट्री फोर्सेज और सेना में क्या अंतर होता है…
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बता दें कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स और भारतीय सेना में काफी अंतर होता है. कई सुरक्षा बल गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं, जिसमें सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, आसाम राइफल्स और एसएसबी शामिल है. वहीं सेना में भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना आते हैं.

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अर्धसैनिक बल देश में रहकर या सीमा पर देश की सुरक्षा करते हैं और अर्धसैनिक बल पूरे देश में आतंकवाद औऱ नक्सलवाद विरोधी अभियानों में भी लगे हुए हैं. वहीं वीआईपी सिक्योरिटी में भी मुख्यतौर पर अर्धसैनिक बलों के जवान ही होते हैं. सुविधाओं के नाम पर जो सहूलियतें भारतीय सेना को मिलती हैं, वैसी सुविधाएं अर्धसैनिक बलों को नहीं मिलती है.

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बीएसएफ पीस-टाइम के दौरान तैनात की जाती है, जबकि सेना युद्ध के दौरान मोर्चा संभालती है. बीएसएफ के जवानों को हमेशा सीमा की सुरक्षा के लिए तैयार रहना पड़ता है.

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बीएसएफ के जवानों को सीमा पर तैनात किया जाता है, जबकि भारतीय सेना के जवान सीमा से दूर रहते हैं और युद्ध के लिए खुद को तैयार करते हैं. साथ ही यह क्रॉस बोर्डर ऑपरेशन भी करती है.

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भारतीय सेना के जवानों को बीएसएफ के जवानों से ज्यादा सुविधा मिलती है, इसमें कैंटीन, आर्मी स्कूल आदि की सेवाएं शामिल है.

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भारतीय सेना रक्षा मंत्रालय के अधीन आती है, जबकि बीएसएफ गृह मंत्रालय के अधीन होती है.

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भारतीय सेना में रैंक लेफ्टिनेंट, मेजर, कर्नल, ब्रिगेडियर, मेजर जर्नल आदि होती है, लेकिन बीएसएफ में पोस्ट कांस्टेबल, हैड कांस्टेबल, एएसआई, डीएआई, आईजी आदि होती है.

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भारतीय सेना में अधिकारी एनडीए और सीडीएस के माध्यम से चुने जाते हैं और इस परीक्षा का चयन यूपीएससी की ओर से किया जाता है. वहीं बीएसएफ में एसआई तक के उम्मीदवार एसएससी की ओर से चुने जाते हैं. वहीं बीएसएफ के डीजी आईपीएस बनते हैं.

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BSF ने बेनकाब की चीन-पाक की साजिश, भारत को 5 तरीके से घेरने का था प्लान

चीन और पाकिस्तान का नापाक गठजोड़ भारत को 5 तरीकों से घेरने की साजिश में जुटा है. आज तक/इंडिया टुडे के पास उन सभी जगह की जानकारी मौजूद है जहां पाकिस्तान को चीन आधुनिक हथियारों और सर्विलांस सिस्टम से लैस कर रहा है. चीन और पाकिस्तान की क्या है चाल और कैसे भारत को इससे सतर्क रहने की है जरूरत?

1. हथियारों की ट्रेनिंग और सर्विलांस सिस्टम

केंद्र सरकार को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की ओर से सौंपी रिपोर्ट में राजौरी सेक्टर में एलओसी के उस पार पाकिस्तान और चीन की खुराफातों को लेकर आगाह किया गया है. इस साल 20 अक्टूबर को सौंपी गई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह कब्रिस्तान जियारत टॉप और फॉरवर्ड डिफेंडेड लोकेलिटी 26 छलीरा पर पाकिस्तानी सैनिकों को चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की ओर से आधुनिक हथियारों की ट्रेनिंग दी जा रही है. साथ ही सर्विलांस सिस्टम से पूरे इलाके को लैस करने में भी चीन पाकिस्तान की मदद कर रहा है.

चीन और पाकिस्तान की इन चालों पर भारतीय सुरक्षा बलों की पैनी नजर है. भारत के जवान जहां पूरी तरह मुस्तैद हैं वहीं एलओसी के पार से होने वाले किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं.

2.  जैसलमेर सेक्टर में सरहद के उस पार हलचल तेज

चालबाज चीन सिर्फ राजौरी सेक्टर में ही पाक की मदद नहीं कर रहा है. राजस्थान के जैसलमेर सेक्टर में सरहद के उस पार भी पाकिस्तानी सेना को चीन सर्विलांस इक्विपमेंट से मजबूत करने में जुटा है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक जैसलमेर बॉर्डर एरिया में सरहद के उस पार 16 पहिया वाले वाहन में इस सर्विलांस सिस्टम को लाद कर पहुंचाया गया. जब ये वाहन मूवमेंट कर रहा था तब रेत में फंस भी गया. आज तक/इंडिया टुडे को मिली जानकारी के मुताबिक इस सर्विलांस इक्विपमेंट का नंबर UC 8451****0/G-NOM है.

3. चीन की मदद से पाक ने बनाए 200 से ज्यादा कंक्रीट बंकर

रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के श्रीगंगानगर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर से लगती सरहद के उस पार पाकिस्तान धड़ाधड़ कंक्रीट के बंकर बनाने में लगा है. स्ट्रैटेजिक लोकेशन्स में एक महीने में करीब 200 पक्के बंकर बना लिए गए हैं. साथ ही 100 बंकर और बनाने की तैयारी है. इन बंकरों को बनाने में पाकिस्तान को चीन तकनीकी मदद दे रहा है.

4. भुज सेक्टर में सरहद से 50 किलोमीटर दूर एयरपोर्ट का निर्माण

चीन और पाकिस्तान की नापाक हरकतों से गुजरात से सटा बॉर्डर भी अछूता नहीं है. इस साल 13 अक्टूबर की खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में भुज सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के उस पार महज 50 किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर मीठी एयरपोर्ट बना रहा है. यहां चीनी नागरिकों की मौजूदगी देखी गई है. पाकिस्तानी सेना, पाक रेंजर्स और पाकिस्तान पुलिस के अधिकारी यहां निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे हैं.

5. आतंकियों की घुसपैठ के लिए सर्द मंसूबा

चीन ने पाकिस्तान को आधुनिक कॉनवाई जैमिंग सिस्टम खऱीदने में मदद की है. सूत्रों के मुताबिक चीन की मदद से ये सिस्टम स्विट्जरलैंड से खरीदा गया है. सूत्रों से मिली जानकारी के पाकिस्तान इस सिस्टम का इस्तेमाल बॉर्डर एरिया में करने की फिराक में है.

यहीं नहीं पाकिस्तान ने हांगकांग की एक कंपनी से सर्दियों में इस्तेमाल होने वाले कपड़े और अन्य सामग्री भी खरीदी है. इनमें स्पेशल जैकेट्स, ट्राउजर, हाई एल्टीट्यूड बूट्स और स्लीपिंग बैग्स शामिल हैं. बड़ी संख्या में खास तरह के दस्तानों (Mitten Gloves) का भी आर्डर दिया गया है. खुफिया रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी सेना ने आतंकियो की घाटी में घुसपैठ कराने के लिए सुपर हाई एल्टीट्यूड क्लॉथ (super high altitude cloth) खरीदे हैं. ऐसे कपड़ों का इस्तेमाल अक्सर सैनिक करते हैं. लेकिन पाकिस्तान इसका इस्तेमाल माइनस 50 डिग्री तापमान में भी आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए कर सकता है.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर का कहना है कि पाकिस्तान हमेशा ऐसी हरकतें करता रहा है, इसके लिए उसकी कोशिश बाहर से भी मदद लेने की रहती है. अहीर के मुताबिक किसी भी दूसरे देश को पाकिस्तान की नापाक गतिविधियों में साथ नहीं देना चाहिए.चीन का नाम लिए बिना अहीर ने कहा कि अगर कोई हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान की मदद करता भी है तो भी हम पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं.