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ब्रिटिश जज ने आपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटिश भूमिका की जाँच के लिए फाइल सार्वजनिक करने को कहा

न्यायाधीश मुरी शांक्स की अध्यक्षता में मार्च में लंदन में फ‌र्स्ट टीयर ट्रिब्यूनल (सूचना का अधिकार) में तीन दिनों तक सुनवाई चली थी। उन्होंने एक दिन पहले सोमवार को कहा कि अवधि से संबंधित अधिकांश फाइलें सार्वजनिक की जानी चाहिए।

न्यायाधीश ने ब्रिटिश सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया कि डाउनिंग स्ट्रीट कागजात को अवर्गीकृत करने से भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ता क्षतिग्रस्त हो जाएगा।

न्यायाधीश ने हालांकि ब्रिटेन की संयुक्त खुफिया समिति से ‘इंडिया पोलिटिकल’ के रूप में चिह्नित फाइल पर दलील स्वीकार नहीं की। इस फाइल में ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों एमआइ5, एमआइ6 और जीसीएचक्यू (गवर्नमेंट कम्युनिकेशन हेडक्वार्टर) से संबंधित सूचनाएं हो सकती हैं।

न्यायाधीश ने कहा कि इसलिए कैबिनेट कार्यालय तकनीकी रूप से उस व्यवस्था पर कायम रह सकता है जिसके तहत ऐसी सामग्री को सूचना की आजादी अपील से छूट मिली हुई है।

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पीएम मोदी ने पाकिस्तान को कहा आतंकवाद की फैक्ट्री, तो बचाव में उतरा चीन

चीन ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस्लामाबाद को आंतकवाद का निर्यात करने वाली फैक्ट्री बाताए जाने वाले बयान पर पाकिस्तान का बचाव किया। चीन ने इस संबंध में कहा कि पाकिस्तान की आंतकवाद से लड़ने में मदद किए जाने की जरूरत है।

लंदन में पीएम मोदी ने पाक पर निशाना साधते हुए कहा था कि भारत आतंकवाद को निर्यात करने वालों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। मोदी ने आगे कहा कि यहां आतंकवाद की फैक्ट्री लगा रही है और सीधे युद्ध में सामना न कर पाने की ताकत न होने के कारण पीठ पर वार करते हैं। ऐसी स्थिति में हमे पता है कि कैसे जबाव देना है। जाहिर तौर पर मोदी का इशारा पाकिस्तान की ओर था।

मोदी के इस बयान पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हु आ चुनयिंग ने कहा कि आतंकवाद सभी का दुश्मन है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों को मिलकर आतंकवाद से लड़ने की जरूरत है। साथ ही सभी देशों को पाकिस्तान की आतंकवाद से लड़ने में मदद करनी चाहिए।

इस बयान के साथ चीन ने इशारा किया है कि शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गेनाइजेशन(एससीओ) में आतंकवाद भी एक बड़ा मुद्दा होगा। पिछले साल एससीओ में भारत और पाकिस्तान दोनों शामिल थे। एससीओ का वार्षिक सम्मेलन अब जून में चीन के किंगदाओ शहर में होना है।

विदेश मंत्रियों के इस सम्मेलन में आतंकवाद पर चर्चा के सवाल पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मेरा मानना है कि एससीओ का उद्देश आतंकवाद के मुद्दे पर साथ मिलकर काम करने की दिशा में आगे बढ़ना है।

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पैगंबर मोहम्मद की वंशज हैं यहां की महारानी, सामने आए ऐसे दावे

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद की वंशज हैं। ये सुनने में भले ही थोड़ा अजीब लगे, लेकिन मोरक्को के एक न्यूजपेपर ने ऐसा दावा किया है। अखबार ने ये दावा एक रिसर्च स्टडी के हवाले से किया है, जो खबरों में है। हालांकि, महारानी के पैगंबर मोहम्मद की वंशज होने का ये दावा कोई पहली बार नहीं किया गया है। 1986 में भी इसी तरह की एक रिपोर्ट सामने आई थी।

शाही फैमिली की बुक में भी ऐसे दावे…

– मोरक्को के अखबार के मुताबिक, शाही फैमिली की वंशावली की 43 पीढ़ियों को देखने के बाद इतिहासकारों का दावा है कि क्वीन एलिजाबेथ सेकंड असल में पैगंबर की दूर की रिश्तेदार हैं।
– ब्रिटिश वेबसाइट डेलीमेल ने भी दावा किया है कि इसी तरह की रिसर्च 1986 में बुर्केज पीराज (Burke’s Peerage) में भी पब्लिश हुई थी। इस बुक को शाही वंशावली के बारे में ऑथराइज्ड ब्रिटिश गाइड माना जाता है।
– हिस्टोरियंस के मुताबिक, एलिजाबेथ सेकंड की ब्लडलाइन 14वीं सदी के अर्ल ऑफ कैंब्रिज से जुड़ी हैं। ये ब्लडलाइन मध्यकालीन मुस्लिम स्पेन से लेकर पैगंबर साहब की बेटी फातिमा तक जाती हैं।
– फातिमा पैगंबर मोहम्मद की बेटी थीं और उनके वंशज स्पेन के राजा थे। इन्हीं से महारानी एलिजाबेथ का संबंध बताया जा रहा है। यही वजह है कि उन्हें पैगंबर का वंशज बताया जा रहा है।

ऐसे जोड़ा गया कनेक्शन

– मोरक्को के अखबार में इस पर आर्टिकल देने वाले हामिद अल अवनी ने लिखा कि 11 वीं सदी में स्पेन के सेविले के किंग अबू अल कासिम मुहम्मद बिन अब्बाद पैगंबर साहब की बेटी फातिमा के वंशज थे।
– उनकी बेटी का नाम जायदा था। बुर्केज पीराज की स्टडी के मुताबिक, महारानी मुस्लिम प्रिसेंज जायदा की फैमिली से ताल्लुक रखती हैं।
– जायदा बाद में सेविले के शासक अल मुतामिद इब्न अब्बाद की चौथी वाइफ बनीं, जिनका सांचो नाम का एक बेटा था।
– अब्बादी साम्राज्य पर हमला हुआ तो जायदा सेविले भागकर स्पेन के राजा अल्फोंसो सिक्स्थ के पास पहुंच गई। वहां उन्होंने धर्म परिवर्तन करा लिया और ईसाई बन गई। उनका नाम जायदा से इसाबेला हो गया।
– इसके बाद उनके बेटे सांचो के वंशज ने थर्ड अर्ल ऑफ कैंब्रिज रिचर्ड ऑफ कोनिसबर्ग से शादी कर ली। अर्ल ऑफ कैंब्रिज इंग्लैंड के राजा एडवर्ड तृतीय के पोते थे।

दावों को लेकर मतभेद
– कुछ हिस्टोरियन इसके सपोर्ट में नहीं हैं, लेकिन इस दावे का प्रारंभिक मध्ययुगीन स्पेन की वंशावली के रिकॉर्ड ने समर्थन किया है। मिस्र के पूर्व ग्रैंड मुफ्ती अली गोमा द्वारा भी इसे सत्यापित किया गया था।

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भगत सिंह के केस से जुड़ी सभी फाइलें पाक में सार्वजनिक, दस्तावेजों से सामने आई एक अनोखी बात

शहीद भगत सिंह और उनके साथियों पर चल रहे मुकदमे और फांसी से जुड़ी सभी फाइलों को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने सार्वजनिक कर दिया है। इस केस से जुड़ी कुछ फाइलें हफ्ते की शुरआत में ही सार्वजनिक कर दी गई थीं। पंजाब सरकार ने भगत सिंह की फांसी के 87 साल गुजर जाने के बाद यह फैसला लिया था।

(वीडियो: पाक मीडिया रिपोर्ट)

भगत सिंह और उनके साथी सुखदेव व राजगुरु को ब्रिटिश पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या में 23, मार्च, 1931 को लाहौर में फांसी दी गई थी। सार्वजनिक किए गए नए रिकार्ड में केस से जुड़ी खबरों की क्लिपिंग, सांडर्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुखदेव व राजगुरु को फांसी देने का वारंट समेत ब्रिटिश पुलिस द्वारा सिंह और उनके साथियों के अड्डे पर छाप मारने में बरामद हुए पिस्टल व बुलेट की तस्वीरें समेत कई अन्य दस्तावेज शामिल हैं।

भगत सिंह द्वारा 27 अगस्त, 1930 को कोर्ट के फैसले की कॉपी मांगने के साथ सिंह की सजा के खिलाफ उनके पिता सरदार किशन सिंह की कोर्ट में दाखिल की गई याचिका को पहले ही सार्वजनिक कर दिया गया था।

23 मार्च, 1931 को जेल निरीक्षक द्वारा बनाए गए मुत्यु प्रमाण पत्र को भी सार्वजनिक किया गया है। साथ ही जेल में किताबों और अखबार मुहैया कराने की मांग के लिए भगत सिंह के पत्र को भी आम नागरिकों के सामने प्रत्यक्ष किया गया है। कई दस्तावेज भगत सिंह के साथियों के ठिकानों पर ब्रिटिश पुलिस की छापेमारी से भी संबंधित हैं।

दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद भगत सिंह से जुड़ी एक अनोखी बात भी सामने आई है। सिंह अपने किसी भी पत्र में आपका आभारी या आज्ञाकारी लिखने की जगह आपका आदि, आदि लिखा करते थे। पंजाब के अभिलेख विभाग का कहना है कि अभी सिंह के केस से जुड़ी कुछ फाइलों को ही सार्वजनिक किया जा रहा है। बाकी दस्तावेज मंगलवार को सार्वजनिक किए जाएंगे।

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200 साल पुरानी जंग की बरसी पर पुणे में हिंसा, एक की मौत; मुंबई समेत महाराष्ट्र के 13 शहरों में धारा 144 लागू

भीमा-कोरेगांव की 200 साल पुरानी जंग की बरसी के मौके पर भीमा, पबल और शिकरापुर गांव में दलितों और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई। ये विवाद पुणे से करीब 30 किलोमीटर दूर पुणे-अहमदनगर हाइवे में पेरने फाटा के पास हुआ। लोगों ने हाईवे पर करीब 100 गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की। इस घटना के विरोध में मुंबई समेत महाराष्ट्र के 13 शहरों में हिंसा और प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इन शहरों में धारा 144 लागू कर दी गई है। उधर, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने घटना की ज्यूडिशियल इन्क्वॉयरी के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने के लिए हिंसा फैलाई है। ऐसी हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

Q&A में समझें पूरा मामला?

किस जंग की बरसी मना रहे थे लोग?

– 1 जनवरी 1818 में कोरेगांव भीमा की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर अंग्रेजों ने जीत दर्ज की थी। इसमें कुछ संख्या में दलित भी शामिल थे।

– अंग्रेजों ने कोरेगांव भीमा में अपनी जीत की याद में जयस्तंभ का निर्माण कराया था। बाद में यह दलितों का प्रतीक बन गया।

विवाद की वजह क्या है?

– हर साल हजारों की संख्या में दलित समुदाय के लोग जयस्तंभ पर श्रद्धांजलि देते हैं। सोमवार को रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) ने जंग की 200वीं बरसी पर खास कार्यक्रम कराया था। इसमें महाराष्ट्र के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री गिरीश बापट, बीजेपी सांसद अमर साबले, डेप्युटी मेयर सिद्धार्थ डेंडे और अन्य नेता शामिल हुए। इस मौके पर देशभर से करीब 2 लाख दलित यहां इकट्ठा हुए थे। मराठा कम्युनिटी इस प्रोग्राम का विरोध कर रही थी।

सोमवार को कैसे शुरू हुआ विवाद?

– शनिवार रात वढू बुद्रुक गांव में दो गुटों में विवाद हो गया था। इसके बाद सोमवार को भी तनाव के हालात थे। भीमा परिसर में कार्यक्रम के दौरान कुछ लोग भगवा झंडे लेकर पहुंचे और हिंसा शुरू हो गई।

कार्यक्रम के लिए प्रशासन ने क्या इंतजाम किए थे?

– आईजीपी (कोल्हापुर रेंज) विश्वास नांगरे-पाटिल ने बताया कि इलाके में सोमवार सुबह से ही तनावपूर्ण माहौल था। जिसके चलते कार्यक्रम वाली जगह पर भारी सुरक्षा की गई थी।

हिंसा का असर कहां-कहां हुआ?

– हिंसा को लेकर असर औरंगाबाद, ठाणे, मुंबई के कुछ इलाकों में दलित संगठन आरपीआई से जुड़े लोगों ने प्रोटेस्ट किया है। इसके अलावा बीड, परभणी, सोलापुर, जालना और बुलढाणा में भी प्रोटेस्ट हुआ है। कई जगहों से तोड़फोड़ की खबरें हैं। चेंबुर और गोवंडी के बीच प्रदर्शन के बाद हार्बर लाइन पर लोकल ट्रेन सर्विस प्रभावित हुई है। मुंबई और परभणी में भी लोगों ने ट्रेन रोकी।

हालात काबू में करने के लिए क्या कदम उठाए गए?

– मुंबई समेत महाराष्ट्र के 13 शहरों में धारा 144 लागू कर दी गई है। मोबाइल टॉवर बंद करने और नेटवर्क जैमर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। सीआरपीएफ की दो टुकड़ियां शिकरापुर स्टेशन में तैनात की गई है। पुलिस की 6 कंपनियां लगाई गई हैं। एंटी रॉइट स्क्वॉड भी तैनात की गई है।

सरकार ने क्या एक्शन लिया?

– देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर करीब तीन लाख लोग आए थे। हमने पुलिस की 6 कंपनियां तैनात की थीं। कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने के लिए हिंसा फैलाई। इस तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. मृतक के परिवार वालों को 10 लाख के मुआवजा दिया जाएगा।”

– सीएम ने मृतक की फैमिली को 10 लाख मुआवजा देने का एलान किया है। साथ ही घटना की ज्यूडिशियल इन्क्वॉयरी के आदेश दे दिए गए हैं।

अपोजिशन ने क्या कहा?
– एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने इस हिंसा के लिए दक्षिणपंथी संगठनों की जिम्मेदार बताया है और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
– पवार ने कहा, “भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह मनाई जा रही थी। हर साल यह दिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है। लेकिन इस बार कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने यहां की फिजा को बिगाड़ दिया।”
– आरपीआई लीडर रामदास अठावले ने जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि 200 साल में ऐसी घटना नहीं हुई है।

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जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए माफी मांगे ब्रिटिश सरकार: लंदन के मेयर

लंदन के मेयर सादिक खान ने अपने अमृतसर दौरे पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वक्त आ गया है कि ब्रिटिश सरकार जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए माफी मांगे। पाकिस्तानी मूल के खान भारत और पाकिस्तान के तीन-तीन शहरों की आधिकारिक यात्रा के तहत अमृतसर दौरे पर आए थे।

उन्होंने जलियांवाला बाग नरसंहार के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और विजिटर्स बुक में लिखा कि अब वक्त आ गया है कि ब्रिटिश सरकार सन् 1919 में हुए जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए माफी मांगे। सादिक खान ने बताया कि उनके लिए जलियांवाला आना एक अद्भुत अनुभव रहा है। उन्होंने लिखा ‘जलियांवाला बाग आने का अनुभव अद्भुत है और यहां जो त्रासदी हुई थी उसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।’ सादिक खान ‘शहीदों का कुआं’ देखने भी गए।

वह पहले मुस्लिम मेयर हैं जो श्री हरिमंदिर साहिब में नतमस्तक हुए। माथा टेकने के बाद उन्होंने लंगर छका और लंगर पकाने की सेवा भी निभाई। एसजीपीसी ने उन्हें श्री हरिमंदर साहिब का मॉडल, सिरोपा और धार्मिक किताबें भेंट कर सम्मानित किया। इससे पहले वह अमृतसर में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर द्वारा रखे गए डिनर में भी शामिल हुए थे।

सादिक खान बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय सीमा के जरिए पाकिस्तान के लाहौर के लिए रवाना हो गए। सादिक खान इससे पहले दिल्ली भी कई जगह गए थे और वहां अक्षरधाम मंदिर गए और महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल के छात्रों से मिले थे।