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किम जोंग उन से वार्ता के लिए प्योंगयोंग नहीं जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप, अब यहां होगी वार्ता

किम जोंग उन से वार्ता के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अब प्‍योंगयोंग नहीं जाएंगे। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि यह वार्ता रद कर दी गई है, दरअसल, अब ये दोनों नेता उसी जगह पर मिलेंगे जहां पिछले दिनों दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे ने किम जोंग उन से मुलाकात की थी। इसका सुझाव खुद ट्रंप की तरफ से आया था जिसको किम ने हरी झंडी दे दी है।

आपको बता दें कि किम और मून के बीच 27 अप्रैल को पुनमुंजोम गांव में बैठक हुई थी। यह उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। यहां 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद से ही युद्ध विराम लागू है। इसका एक हिस्‍सा उत्‍तर तो दूसरा हिस्‍सा दक्षिण कोरिया में पड़ता है। आपके लिए यह जानना भी बेहद दिलचस्‍प है कि यह सीमा रेखा दुनिया की सबसे खतरनाक सीमाओं में गिनी जाती है। यही वजह है कि उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा एक बार फिर से चर्चा का विषय बनने के साथ-साथ ऐतिहासिक वार्ता का भी गवाह बनने वाली है।

पीस हाउस में बैठक का सुझाव

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने ही किम जोंग उन के साथ पीस हाउस में बैठक करने का सुझाव दिया है। पीस हाउस उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि उत्तर कोरिया के साथ शिखर बैठक के लिए कई देशों पर विचार किया जा रहा है। लेकिन किसी तीसरे देश की अपेक्षा पीस हाउस/फ्रीडम हाउस ज्यादा महत्वपूर्ण और स्थायी जगह है। तीन से चार हफ्ते में ट्रंप और किम की मुलाकात होने की संभावना है। गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि किम के साथ शिखर वार्ता के लिए पांच जगहों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि वह कई बार यह भी कह चुके हैं कि बातचीत नहीं भी हो सकती है।

दोनों के बीच वार्ता के अहम बिंदु

किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच होने वाली वार्ता का सबसे अहम बिंदु कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाना है। हालांकि इसको लेकर किम के तेवर में अब काफी नरमी आ चुकी है। पिछले दिनों मून से हुई मुलाकात में किम ने कहा था कि अगर अमेरिका कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने का वादा करे और उत्तर कोरिया पर हमला नहीं करने का वचन दे, तो उनका देश परमाणु हथियारों को त्यागने को तैयार है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्‍हें एक बार फिर विचार करना पड़ेगा।

कई लिहाज से खास है बैठक

किम ने ट्रंप को संबोधित करते हुए ये भी कहा है कि हमारे बीच जब बातचीत शुरू हो जाएगी, तब अमेरिकी राष्‍ट्रपति जान जाएंगे कि मैं ऐसा शख्‍स नहीं हूं कि दक्षिण कोरिया या अमेरिका पर परमाणु हथियार से हमला करूंगा। उन्‍होंने इस बात की भी उम्‍मीद जताई है कि यदि दोनों देशों के बीच बैठकों का सिलसिला बढ़ा और आपसी विश्‍वास बहाली हो सकी यह काफी अच्‍छा होगा। हालांकि अभी इन दोनों नेताओं की बैठक का दिन और समय निश्चित नहीं हो पाया है। लेकिन इतना जरूर तय है कि इस बैठक में दक्षिण कोरिया भी मौजूद होगा। यह बैठक इस लिहाज से भी खास होगी क्‍योंकि पहली बार पद पर रहते हुए कोई अमे‍रिकी राष्‍ट्रपति उत्तर कोरिया के प्रमुख से बात करेगा।

छह देशों की बैठक पर लगी निगाह

इस बीच जानकारों की निगाह कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाने के लिए छह देशों की बैठक पर भी लगी है, जो वर्षों से निलंबित हैं। जानकारों की दिलचस्‍पी इस बात को लेकर है कि इस बाबत छह देशों की वार्ता दोबारा शुरू होगी या नहीं। इन छह देशों में उत्तर और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, रूस और अमेरिका शामिल हैं। यॉनहॉप एजेंसी की मानें तो जानकार इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि कोरिया प्रायद्वीप को लेकर इन देशों की बैठकों का दौर दोबारा शुरू हो सकता है। जानकारों के मुताबिक इसको लेकर उत्तर कोरिया भी शायद पीछे न हटे और ऐसा करने पर अपनी सहमति व्‍यक्त करे। इस बारे में जापान की मीडिया ने यहां तक कहा है कि पिछले दिनों किम ने जो बीजिंग की यात्रा कर शी चिनफिंग के समक्ष अपनी बात रखी है उसके बाद इस सिक्‍स नेशन टॉक को लेकर सहमति बनी है।

उत्तर कोरिया खफा हो जाए

हालांकि जानकारों का एक मत यह भी है कि मुमकिन है कि जापान की मौजूदगी से उत्तर कोरिया खफा हो जाए। इसकी वजह ये है कि जापान काफी समय से अपने अगवा किए नागरिकों की वापसी की मांग उत्तर कोरिया से करता रहा है। वहीं इसको लेकर उत्तर कोरिया साफ इंकार कर रहा है। आपको बता दें कि छह देशों की यह वार्ता सबसे पहले 2003 में हुई थी। 2005 में वार्ता के बाद एक अहम समझौता भी हुआ था जिसमें उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी तक दी गई थी। लेकिन वर्ष 2009 में उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु परिक्षण किए जाने के चलते इसको निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से इस मुद्दे को लेकर इन देशों के बीच कोई वार्ता नहीं हुई।

दोनों के बीच विवादित बोल

इसके अलावा यह बैठक इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच बदजुबानी का लंबा सिलसिला चला है। एक ओर जहां ट्रंप ने किम को रॉकेट मैन कहा वहीं किम ने ट्रंप को बूढ़ा तक कह डाला था। आइए जानते हैं दोनों नेताओं ने कब-कब और क्‍या-क्‍या कहा।

– नवंबर 2017 में ट्रंप को उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने ‘बूढ़ा पागल’ बताया था। इस पर ट्रंप ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और लिखा था, ‘भला किम जोग-उन मुझे बूढ़ा बुला कर मेरा अपमान क्यों करेंगे, जब मैं उन्हें कभी नाटा और मोटा नहीं कहूंगा।’

– इसी तरह सितंबर 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने किम जोंग उन को रॉकेट मैन कहा था और उनके देश को नेस्तनाबूद करने की धमकी दी थी।

– इसके जवाब में किम जोंग उन की तरफ से जिस तरह का बयान आया, अमेरिका और ट्रंप ने कल्पना भी नहीं की होगी। उत्तर कोरिया ने कहा था, ‘डरे हुए कुत्ते ज्यादा भौंकते हैं। ट्रंप आग से खेलने के शौकीन एक दुष्ट व्‍यक्ति हैं।’

– जनवरी के पहले हफ्ते में भी पूरी दुनिया इन दोनों नेताओं के अजीब-गरीब बयानों की गवाह बनी थीं। दरअसल, किम जोंग उन ने नए साल के मौके पर अपने संबोधन में अमेरिका को तबाह करने की धमकी दी थी और कहा था कि परमाणु बम का बटन हर वक्त उनकी टेबल पर होता है।

– इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘कोई किम जोंग उन को बताए कि मेरे पास भी न्यूक्लियर बटन है, जो उसके बटन से बहुत बड़ा और ताकतवर है। मेरा बटन काम करता है।’

– 23 फरवरी 2018 को डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए दबाव बढ़ाने को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कदम उठाया है।

– 30 जनवरी को अमेरिका में सीआईए के निदेशक माइक पोंपियो ने आशंका जताई थी कि उत्तर कोरिया के पास ऐसी परमाणु मिसाइल हैं, जिससे वह कुछ महीनों के भीतर अमेरिका पर हमला कर सकता है।

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अटवाल वीजा विवाद: भारत पर लगाए आरोपों पर विपक्ष ने मांगी NSA से सफाई, ट्रूडो की पार्टी ने रोका प्रस्ताव

कनाडा के नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर (NSA) डेनियल जेना के उस बयान पर विवाद बढ़ता जा रहा है, जिसमें उन्होंने खालिस्तान समर्थक जसपाल अटवाल को वीजा जारी करने के पीछे भारत की साजिश होने की बात कही थी। शुक्रवार को विपक्ष ने NSA से अपने बयान को साबित करने की मांग करते हुए संसद में एक प्रस्ताव पेश किया। हालांकि, ट्रूडो की लिबरल पार्टी ने बहुमत का इस्तेमाल करते हुए प्रस्ताव रोक दिया। बता दें कि जेना ने कहा था कि ट्रूडो का भारत दौरा नाकाम करने के पीछे भारत का हाथ है। उनके इस बयान का प्रधानमंत्री ट्रूडो ने भी समर्थन किया था।

खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ प्रस्ताव ला सकता है विपक्ष

– बता दें कि विपक्ष ने गुरुवार को भी ट्रूडो प्रशासन से भारत पर लगाए आरोपों के लिए सबूत की मांग की थी।

– विपक्षी कन्जर्वेटिव पार्टी के नेता एंड्रू शीर ने भारत पर लगाए गए आरोपों को बकवास बताते हुए पूछा कि क्या प्रधानमंत्री साजिश के दावों पर कोई सबूत भी देंगे?
– इसके साथ ही विपक्ष ने खालिस्तान समर्थकों की निंदा और भारत की एकता के सपोर्ट में संसद में एक प्रस्ताव लाने की बात भी कही थी।

ट्रूडो ने क्या कहा था?

– न्यूज एजेंसी के मुताबिक, साजिश के आरोपों पर ट्रूडो ने कहा, “जब हमारे सीनियर डिप्लोमैट और सिक्युरिटी अफसर देश के नागरिकों से कुछ कह रहे हैं तो वो जानते हैं कि इसमें कुछ सच्चाई हो सकती है।”
– साथ ही उन्होंने कहा, “यह पिछली कंजर्वेटिव (विपक्ष पार्टी) सरकार ही थी, जिसने पब्लिक सर्विस में हर संभव रुकावटें पैदा करने की कोशिश की।”

भारत ने आरोपों को बताया निराधार

– भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमने कनाडा की संसद में हाल की चर्चा को देखा है। हम साफ कहना चाहते हैं कि चाहे वह मुंबई में अटवाल की मौजूदगी हो या नई दिल्ली में डिनर में उसे न्योता दिए जाने का मामला हो, भारत की सुरक्षा एजेंसियों का अटवाल की मौजूदगी से कोई संबंध नहीं है। इस तरह की बातें आधारहीन हैं और हमें कतई मंजूर नहीं हैं।

ट्रूडो ने अटवाल को बुलाने पर क्या सफाई दी थी?

– अटवाल को स्पेशल डिनर में बुलाने के विवाद पर ट्रूडो ने कहा था, “हमने इस मसले को गंभीरता से लिया। उसे कोई भी न्योता नहीं दिया चाहिए था। जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली, कनाडा के हाईकमीशन ने इन्विटेशन रद्द कर दिया। पार्लियामेंट के एक मेंबर ने उसे पर्सनली बुलाया था।”
– कनाडा के पीएमओ ने कहा था, “यह साफ कर देना अहम है कि वह (अटवाल) पीएम (ट्रूडो) के ऑफिशियल डेलिगेशन का हिस्सा नहीं था, न ही उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन्वाइट किया था।”

किस-किस के साथ दिखा था अटवाल?

– मुंबई के एक इवेंट में अटवाल ट्रूडो की पत्नी सोफिया के साथ नजर आया। एक अन्य फोटो में वह ट्रूडो के मंत्री अमरजीत सोही के साथ भी दिखाई दिया था।
– तस्वीरें सामने आने पर विवाद हुआ तो कनाडा के सांसद रणदीप एस. सराई ने अटवाल को मुंबई के इवेंट में बुलाने की जिम्मेदारी ली थी।

कौन है जसपाल अटवाल?

– जसपाल अटवाल खालिस्तान समर्थक रहा है। वह बैन किए गए इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन में काम करता था।
– इस संगठन को 1980 के दशक की शुरुआत में कनाडा सरकार ने आतंकी संगठन घोषित किया था।
– अटवाल को पंजाब के पूर्व मंत्री मलकीत सिंह सिद्धू और तीन अन्य लोगों को 1986 में वैंकूवर आईलैंड में जानलेवा हमला करने के केस में दोषी ठहराया गया था।
– जसपाल उन चारों लोगों में शामिल था, जिन्होंने सिद्धू की कार पर घात लगाकर हमला किया था और गोलियां चलाई थीं। हालांकि, सिद्धू ने आरोपों से इनकार किया था।
– इसके अलावा अटवाल को 1985 में एक ऑटोमोबाइल फ्रॉड केस में भी दोषी पाया गया था।

क्या है खालिस्तान का विवाद?

– पंजाब में कुछ लोगों ने 1980 के दशक में खालिस्तान नाम से अलग देश बनाने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने भारत विरोधी हिंसक आंदोलन किए। 1984 में भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर में घुसकर वहां छिपे खालिस्तान सपोर्टर्स पर कार्रवाई की। इसके बाद धीरे-धीरे यह आंदोलन खत्म हो गया।

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2G स्पेक्ट्रम घोटाले ने ऐसे बदल दी देश की टेलीकॉम इंडस्ट्री की सूरत

2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में गुरुवार को सीबीआई विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है. इस मामले में फंसे सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है. करीब 6 साल बाद इस मामले में फैसला आया है.

इन 6 सालों के दौरान टेलीकॉम सेक्टर भी काफी बदल चुका है. 2जी स्पेक्ट्रम ने टेलीकॉम सेक्टर को लेकर जहां सरकार को अपनी नीतियां बदलने पर मजबूर किया है वहीं, कॉरपोरेट्स ने भी अपनी रणनीत‍ि में भी बड़ा बदलाव किया है.

बदला स्पेक्ट्रम बेचने का तरीका

2-जी स्पेक्ट्रम से जुड़े इस घोटाले के सामने आने के बाद सरकार ने अपनी नीत‍ियों में बड़ा बदलाव किया और स्पेक्ट्रम बेचने का तरीका बदल दिया. अब स्पेक्ट्रम नीलामी के जरिये बेचे जाते हैं. 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने कई के टेलीकॉम लाइसेंस रद्द कर दिए थे. इसकी वजह से विदेशी टेलीकॉम कंपनियों ने भी भारत में अपना कारोबार शुरू करने से अपने हाथ पीछे खींचना शुरू कर दिया था.

बैंक लोन पर भी पड़ा असर

इस घोटाले का असर बैंकों की तरफ से टेलीकॉम कंपनियों को मिलने वाले लोन पर भी पड़ा. इसी साल की शुरुआत में भारतीय र‍िजर्व  बैंक ने टेलीकॉम सेक्टर को लेकर रेड फ्लैग जारी किया था.

उसने इस दौरान बैंकों से कहा था कि टेलीकॉम सेक्टर को लेकर अपने रुझान की समीक्षा करें. इसके अलावा सरकार ने अंतर-मंत्रालयी समित‍ि का गठन भी किया है, जो टेलीकॉम सेक्टर का दबाव कम करने के लिए उपाय ढूंढ़ने में जुटी हुई है.

मर्जर की ओर बढ़ी कंपनियां

2012 में जब सु्प्रीम कोर्ट ने 18 ऑपरेटर्स का लाइसेंस कैंसल कर दिया गया था. वर्तमान में 11 ऑपरेटर्स देश में मोबाइल सर्विस मुहैया करते हैं. 2012 के बाद  से टेलीकॉम सेक्टर पर जिस तेजी से दबाव बढ़ा है. इसके साथ ही  रिलायंस जियो की एंट्री ने यह दबाव बढ़ा दिया है. इसकी वजह से मर्जर की नई बयार भी  इस सेक्टर में चल पड़ी है.

भारत में रह जाएंगे सिर्फ 5 प्रमुख प्लेयर

अगर प्रस्तावित मर्जर होता है, तो भारत में भी विकसित देशों की तरह ही 5 प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर्स रह जाएंगे. इसमें भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, रिलायंस जियो, बीएसएनएल और एमटीएनएल जैसे प्रमुख प्लेयर हो सकते हैं.

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जीवित बच्चे को मृत घोषित करने वाले मैक्स हॉस्पिटल का दिल्ली सरकार ने लाइसेंस रद्द किया

दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स हॉस्पिटल के खिलाफ केजरीवाल सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है. जीवित बच्चे को मृत घोषित करने और सील करके परिजनों को सौंपने के मामले में दिल्ली सरकार ने मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द कर दिया है.

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने बताया कि हमने हॉस्पिटल को आपराधिक लापरवाही बरतने का दोषी पाया है. हॉस्पिटल की यह पहली गलती नहीं है. ऐसा करना उसकी आदत में शुमार हो चुका है. लिहाजा मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है. उन्होंने कहा कि नवजात शिशु की मौत मामले में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती है.

सत्येंद्र जैन ने कहा कि जो मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, उनका उपचार जारी रखा जा सकता है, लेकिन नए मरीजों की भर्ती नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि मरीज अगर चाहें, तो दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि सरकार ने जिस जांच के आदेश दिए थे, उसकी अंतिम रिपोर्ट शुक्रवार को मिल गई और उसके बाद यह निर्णय लिया गया.

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पिछले महीने उन्होंने मैक्स शालीमार अस्पताल को ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) श्रेणी के तहत मरीजों के उपचार में समस्याओं के लिए नोटिस जारी किया था. उन्होंने कहा कि इसके अस्पताल खास अवधि के लिए आवंटित अतिरिक्त बेड का उपयोग जारी रखे हुए था, जबकि उसके उपयोग की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी.

दरअसल, 30 नवंबर को दिल्ली के शालीमार बाग स्थित MAX हॉस्पिटल ने जीवित बच्चो को मृत घोषित कर दिया था और शव को प्लास्टिक के थैले में भरकर परिजनों को दे दिया था. इसके बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की थी और मामला मेडिकल की लीगल सेल को फॉरवर्ड कर दिया था. इसके बाद परिजनों ने हॉस्पिटल में जमकर हंगामा किया. मैक्स हॉस्पिटल ने वहीं बयान जारी कर कहा है कि वह बच्चे के परिजनों से अस्पताल लगातार संपर्क में है.

मैक्स हॉस्पिटल ने कहा है, “दोनों बच्चों का जन्म 30 नवंबर 2017 को हुआ था. डिलीवरी के वक्त बच्चों की उम्र 22 सप्ताह थी. हम इस दुर्लभ घटना से सदमे में हैं. हमने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, बच्चे को मृत घोषित करने वाले डॉक्टर को तत्काल छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया गया है.”

क्या था मामला?

30 नवंबर को मैक्स हॉस्पिटल में एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था. इनमें एक लड़का था और दूसरी लड़की. परिवार वालों ने बताया कि डिलीवरी के साथ ही बच्ची की मौत हो गई थी. डॉक्टरों ने दूसरे जीवित बचे बच्चे का इलाज शुरू कर दिया था, लेकिन एक घंटे बाद अस्पताल ने दूसरे बच्चे को भी मृत घोषित कर दिया था.

इसके बाद अस्पताल ने दोनों बच्चों की डेड बॉडी को प्लास्टिक में पैक करके परिजनों को सौंप दिया. दोनों बच्चों की डेड बॉडी लेकर परिजन लौट रहे थे. दोनों पार्सलों को महिला के पिता ने ले रखा था. रास्ते में उन्हें एक पार्सल में हलचल महसूस हुई. उन्होंने तुरंत उस पार्सल को फाड़ा, तो अंदर बच्चा जीवित मिला. इसके बाद उसको अग्रवाल अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई.

फोर्टिस हॉस्पिटल में भी धांधली का मामला

मैक्स हॉस्पिटल के अलावा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में भी इलाज के दौरान धांधली का एक मामला सामने आया है. इसमें हॉस्पिटल ने सात साल की बच्ची के डेंगू के इलाज के लिए 15 लाख 59 हजार रुपये का बिल थमा दिया. इसमें बच्ची की मौत भी हो गई. इसके बाद मामले की जांच में हॉस्पिटल को दोषी पाया गया.

हरियाणा सरकार ने हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी. हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि मामले में राज्य सरकार फोर्टिस हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई करेगी. हॉस्पिटल ने लामा प्रोटोकॉल नहीं माना और बच्ची के परिजनों से हर मामले में ज्यादा फीस वसूला.

विज ने बताया कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को भी खत लिखकर फोर्टिस हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द करने को कहा गया है. उन्होंने कहा कि यह एक तरीके की हत्या है. लिहाजा मामले में हरियाणा सरकार एफआईआर दर्ज कराने जा रही है. उन्होंने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304-A के तहत मामला दर्ज कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने लीगल विभाग को एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश भेजी है.