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IIT Roorkee: शोधकर्ताओं ने एक अविष्कार किया है जिससे कैंसर कोशिकाओं का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में मदद मिल सकती है।

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जनसांख्यिकी आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दशक में इस खतरनाक बीमारी ने 8 लाख से भी अधिक लोगों को अपने चपेट में ले लिया। हालांकि वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं और कैंसर से मुक्ति पाने की दवाएं विकसित करने में लगे हैं। भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान के कुछ शोधकर्ताओं ने भी ऐसा ही एक अविष्कार किया है जिससे कैंसर कोशिकाओं का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में मददगार साबित हो सकती है।

आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने फ्लोरोसेंट कार्बन नैनौडॉट विकसित किए हैं जो एक साथ ही कैंसर कोशिकाओं का पता लगा सकते हैं और उन्हें नष्ट भी कर सकते हैं। यह पदार्थ काफी सूक्ष्म आकार का है जिसे एक प्रकार की वनस्पति से निकाला गया है। इस पौधे में गुलाबी रंग के फूल होते हैं। इसलिए इन्हें फ्लोरेसेंट कार्बन नैनो डॉट्स नाम दिया गया है। जिस टीम ने इस पर रिसर्च किया उसका नेतृत्व कर रहे डॉ. पी गोपीनाथ के मुताबिक नैनो आकार (10-9 मीटर) के कार्बन कण को रोजी पेरिविंकल प्लांट की पत्तियों से तैयार किया गया है।

शोधकर्ताओं की इस उपलब्धि को साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड, डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी और भारत सरकार ने भी सराहा है। गोपीनाथ ने कहा, ‘नैनो कार्बन पार्टिकल की मदद से कैंसर कोशिकाओं को आसानी से देखा जा सकता है। इतना ही नहीं इमेजिंग सिस्टम की मदद से कहां जा रही हैं इसका भी पता लगाया जा सकता है। कैंसर कोशिकाओं की सही स्थिति का का पता चलने के बाद इसे खत्म करने में आसानी हो जाती है। गोपीनाथ के अनुसार नैनोटैग आधारित रिसर्च जानवरों और क्लीनिकल ट्रायल में सफल रही है। यह एक कम लागत नैनो दवा है जो कैंसर जैसे खतरनाक रोग को दूर करने में मदद करेगी। ‘

आईआईटी की टीम के इस शोध को साइंस एंड इंजीनयरिंग रिसर्च बोर्ड (सर्ब) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से सहयोग प्राप्त हुआ है। गोपीनाथ ने कहा कि कैंसर कोशिकाओं की पहचान और उन्हें नष्ट करना कैंसर उपचार और इसकी औषधि पर शोध के क्षेत्र में कई साल से चुनौती है। उन्होंने आगे कहा, ‘हम आगे का मूल्यांकन करने के लिए इन नैनोमटीरियल्स को जानवरों पर प्रयोग करेंगे ताकि जांच और उपचार का पता लगाया जा सके।’ कैंसर कोशिकाओं का पता लगाना काफी मुश्किल काम है और इस पर दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातारा शोध कर रहे हैं।

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कई जानलेवा बीमारियों के इलाज में रामबाण है मशरूम

अमेरिका की पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मार्गरीटा टी कैंटोर्न के अनुसार, यह निष्कर्ष चूहों पर किए गए अध्ययन के आधार पर निकाला गया है। चूहों को ह्वाइट बटन मशरूम खाने को दिया गया। इससे उनके गट (आंत) माइक्रोब्स के संयोजन में बदलाव देखने को मिला। इससे शॉर्ट चेन फैटी एसिड और खासतौर पर सुचिनेट एसिड की ज्यादा उत्पत्ति हुई। यह जाहिर हो चुका है कि सुचिनेट और प्रोपियोनेट ग्लूकोज उत्पत्ति को नियंत्रित करने वाले जीन में बदलाव कर सकते हैं।

कैंसर के लिए मशरूम
मशरूम का सेवन करने से प्रोस्‍टेट और ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाव होता है। क्योंकि इसमें बीटा ग्‍लूकन और कंजुगेट लानोलिक एसिड होता है जो कि एक एंटी कासिजेनिक प्रभाव छोड़ते हैं। कई शोध भी इस बात का समर्थन करती हैं कि मशरूम में मौजूद तत्व कैंसर के प्रभाव को कम करते हैं।

मशरूम है मधुमेह रोगियों के लिए उत्तम आहार
मधुमेह रोगियों के लिए मशरूम उत्तम आहार माना जाता है। मशरूम में शर्करा (0.5 प्रतिशत) और स्टार्च की मात्रा बहुत कम होते हैं। इनमें वो सब कुछ होता है जो किसी मधुमेह रोगी को चाहिये। मशरूम में विटामिन, मिनरल और फाइबर होते हैं। साथ ही इमसें फैट, कार्बोहाइड्रेट और शुगर भी नहीं होती, जो कि मधुमेह रोगी के लिये जानलेवा है। यह शरीर में इनसुलिन के निर्माण में भी मदद करता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक मशरूम में वसा भी नहीं होती, इसलिए मोटापे से बचाने के लिए भी इसका सेवन लाभप्रद होता है। इसके साथ मोटापे से ग्रस्‍त लोगों के लिए भी यह उपयोगी आहार है। मशरूम की सभी किस्में कैंसर, एचआईवी तथा अन्य खतरनाक बीमारियों में भी फायदेमंद पाई गई हैं।

हृदय रोगों से बचाव
मशरूम में हाइ न्‍यूट्रियंट्स पाये जाते हैं, इसलिये ये दिल के लिये भी अच्‍छे होते हैं। साथ ही मशरूम में कुछ प्रकार के एंजाइम और रेशे पाए जाते हैं जो हमारे कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करते हैं।

मैटाबॉलिज्‍म करे मजबूत
मशरूम में विटामिन ‘बी’ होता है जो कि भोजन को ग्‍लूकोज़ में बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन बी-2 और बी-3 भी मैटाबॉलिज्‍म को दुरुस्त रखते हैं। इसलिए मशरूम खाने से मैटाबॉलिज्‍म बेहतर बना रहता है।

पेट के विकार करे दूर
ताजे मशरूम में पर्याप्त मात्रा में रेशे (लगभग 1 प्रतिशत) व कार्बोहाइड्रेट तन्तु होते हैं, इसका सेवन करने से कब्ज, अपचन, अति अम्लीयता सहित पेट के विभिन्न विकारों से बचाव होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर में कोलेस्ट्राल एवं शर्करा का अवशोषण भी कम होता है।

हीमोग्लोबिन रखे ठीक
मशरूम का सेवन रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है। इसके अलावा इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है जो केवल मांसाहारी खाध पदार्थो में होता है। अत: लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी की शिकार अधिकांश शाकाहारी ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये ये सर्वोत्तम आहार है।

कुपोषण से बचाएं
मशरूम गर्भवस्था, बाल्यावस्था, युवावस्था तथा वृद्धावस्था तक सभी चरणों में उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, विटामिन, खनिज, वसा तथा कार्बोहाइड्रेट बाल्यावस्था से युवावस्था तक कुपोषण से बचाते हैं। इसलिए डॉक्टर भी इसे खाने की सलाह देते हैं।

विटामिन से भरपूर है मशरूम
मशरूम की सब्‍जी हर किसी को पसंद होती है और भला हो भी क्यों ना, यह स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त है, यह आसानी से पाचक भी है और बीमारियों को दूर करने में भी मददगार है। इसमें एमीनो एसिड, मिनरल, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं। छतरी के आकार के मशरूम को चीन में महा औषधि तो रोम के लोग इसे र्इश्वर का आहार मानते हैं। पौष्टिकता की दृष्टि से मशरूम शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों के भोजन में अहम स्थान रखता है।

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इटली के डॉक्टर ने किया सिर्फ 10 रुपये में हर स्टेज का कैंसर खत्म करने का दावा

इटली के एक डॉक्टर ने चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि कैंसर का इलाज आपके घर में ही मौजूद है। डॉक्टर टुलियो का कहना है कि कैंसर एक तरह का फंगल है और इसे बेकिंग सोडा की मदद से आसानी से खत्म किया जा सकता है। हमारे घर में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला बेकिंग सोडा कैंसर को खत्म करने के लिए रामबाण है। महज 2 से 10 रुपए की कीमत पर मिलने वाले बेकिंग सोडा की मदद से इटली के डॉ टुलियो सिमोनसिनी सैकड़ों मरीजों का इलाज कर चुके हैं। उनका दावा है कि इस तरीके के उपायोग से वो अब तक सभी स्टेज के कैंसर मरीजों का इलाज कर चुके हैं और सभी लोगों पर यह दवा 100 फीसद प्रभावी है।

डॉ. टुलियो कहते हैं कि यह थेरेपी बिल्कुल हानिकारक नहीं है। अधिक से अधिक कैंसर के मामलों की दर्दनाक वास्तविकता किसी न किसी तरह से ऑन्कोलॉजी की विफलताओं से जुड़ी हुई है। हमें यह साबित करना है कि आधुनिक ऑन्कोलॉजी कैंसर रोगियों के सभी सवालों के जवाब देने में असमर्थ है। यह हमारे समय की सबसे कठिन और घातक बीमारी है, जिसके असली इलाज खोजना हमारी नैतिक जिम्मेदारी और नैतिक प्रतिबद्धता है।

उनके मुताबिक, बेकिंग सोडा की मदद से हम जो इलाज कर रहे हैं उससे 10 दिन में किसी भी स्टेज के कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि फंगी हमेशा अपने साथ एक ट्यूमर लेकर आते हैं। यह विवो और इन विट्रो, दोनों तरह के अध्ययनों में साबित हुआ है। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि वे बीमारी के बाद विकसित होते हैं। मगर, डॉ. टुलियो का मानना है कि वे पहले से ही मौजूद होते हैं।

उनके अनुसार, फंगस कैंसर को पैदा करते हैं, प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं और इसके बाद पूरे शरीर पर हमला करते हैं। हर तरह का कैंसर कैंडिडा फंगस की वजह से ही होता है। इसकी कई अध्ययनों से पुष्टि भी हो चुकी है। समय के साथ-साथ हमारी कोशिकाएं कमजोर और थकी हुई हो जाती हैं और अज्ञात कोशिकाओं को उत्पादन शुरू कर देती हैं। उन्होंने कहा कि कैंसर एक अल्सर है, जिसमें विकृत कोशिकाएं जमा होती हैं और कॉलोनीज बना लेती हैं।

डॉ. टुलियो ने कहा कि सामान्य एंटी फंगल दवाएं कैंसर के खिलाफ अप्रभावी होती हैं क्योंकि वे केवल कोशिकाओं की सतह पर ही काम करती हैं। मुख्य संक्रमण एक बैक्टीरिया से अधिक शक्तिशाली है। यही कारण है कि फंगल संक्रमण इतने लंबे समय तक शरीर में बना रहता है। डॉ. टूलिओ का दावा है कि उन्होंने उन चीजों की पहचान की है, जो फंगस की कॉलोनीज पर हमला कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि स्किन कैंसर के लिए बेकिंग सोडा और आयोडीन टिंचर सबसे अच्छा पदार्थ है। कई अध्ययनों में यह बात साबित हुई है कि कैंसर के खिलाफ बेकिंग सोडा ने इंट्रासेल्यूलर एक्शन किया है। उन्होंने कहा कि मैंने 20 से अधिक वर्षों से अपने मरीजों पर इलाज का उपयोग किया है। इन रोगियों में से कई ऐसे रोगी भी थे, जिन्हें डॉक्टरों ने कहा था कि उनकी बीमारी लाइलाज है, लेकिन वे पूरी तरह से ठीक हो गए। ट्यूमर को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका बेकिंग सोडा के संपर्क में आना है।