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मॉब लिंचिंग पर मोदी सरकार का बड़ा कदम, बनेगा सख्त कानून

सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग के खिलाफ सख्त रूख अख्तियार करते हुए सरकार को कड़े कानून बनाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही कई दिशा-निर्देश भी जारी किये थे। गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उच्च स्तरीय समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट के इसी आलोक के मद्देनजर किया गया है।

गृह सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में गठित समिति में न्यायिक विभाग के सचिव, विधायी विभाग के सचिव, विधि मामलों के सचिव और समाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग के सचिव इसके सदस्य होंगे।

यह समिति को चार हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट पर विचार करने के लिए राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में अलग से मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया गया है। इसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्री नीतिन गडकरी, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत को सदस्य बनाया गया है। मंत्रिमंडलीय समिति अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देगी।

गृहमंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि कानून व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है और मंत्रालय की ओर से उन्हें इस मामले में कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किये गए हैं। इसके साथ ही कथित गोरक्षकों के उत्पाद और बच्चा चोरी की अफवाहों से जुड़े मॉब लिंचिंग को लेकर भी राज्यों के अलग एडवाइजरी जारी की गई थी। इन एडवाइजरी में राज्य सरकारों को ऐसी घटनाओं रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किये गए हैं।

लोकसभा में गूंजा अलवर कांड, सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा
राजस्थान के अलवर में गाय ले जा रहे एक मुस्लिम युवक की पीट-पीटकर हत्या का मामला सोमवार को लोकसभा के साथ देश के सियासी मंच पर गूंजा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यू इंडिया में मानवता का स्थान नफरत ने ले लिया है। यह मोदी का ‘क्रूर न्यू इंडिया’ है। राहुल के इस बयान पर दो केंद्रीय मंत्रियों ने जमकर पलटवार किया और विपक्ष के नेता को ‘नफरत का सौदागर’ और ‘वल्चर पॉलिटिक्स’ (गिद्ध की तरह हर शिकार पर झपटने की प्रवृत्ति) करार दिया। इस बीच केंद्र ने भीड़ की हिंसा के बढ़ते मामलों पर काबू के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों का समूह और गृह सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता में अफसरों की कमेटी गठित कर दी है।

अलवर में कुछ कथित गोरक्षकों ने शुक्रवार रात रकबर खान की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। वह गाय लेकर जा रहा था, इसलिए उसे गो तस्कर माना गया था। राहुल गांधी ने इस मामले में ट्विटर पर न्यूज रिपोर्ट शेयर करते हुए राजस्थान पुलिस पर सवाल उठाए। उन्होंने सवाल किया कि अलवर में पुलिस ने मॉब लिंचिंग के शिकार रकबर खान को 6 किमी दूर स्थित अस्पताल पहुंचाने में तीन घंटे लगाए, क्यों? उन्होंने रास्ते में टी-ब्रेक भी लिया। यह मोदी का क्रूर ‘न्यू इंडिया’ है, जहां मानवता की जगह नफरत ने ले ली है और लोगों को कुचला जा रहा है, मरने के लिए छोड़ा जा रहा है।’

चुनावी लाभ के लिए घड़ियाली आंसू बहा रहे राहुल : गोयल
पीएम मोदी पर राहुल के हमले का जवाबी हमला दो केंद्रीय मंत्रियों पीयूष गोयल व स्मृति ईरानी ने दिया। गोयल ने कहा कि हर अपराध के बाद खुशी के मारे झूमना छोड़े राहुल। राज्य सरकार कठोर व तुरंत कार्रवाई के लिए आश्वस्त कर चुकी है। आप चुनावी लाभ के लिए हर संभावित तरीके से समाज को तोड़ने का प्रयास करते हो और फिर घड़ियाली आंसू बहाते हो। आप ‘नफरत के सौदागर’ हो। गोयल के इस बयान ने 2007 के गुजरात चुनाव के वक्त तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के उस बयान की याद दिला दी, जिसमें उन्होंने राज्य के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहा था।

गिद्धिया राजनीति छोड़े राहुल : स्मृति
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने जवाबी हमले में आरोप लगाया, ‘राहुल गांधी ‘वल्चर पॉलिटिक्स’ (गिद्धिया राजनीति) करना छोड़े। वह चुनावी लाभ के लिए ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं जो सामाजिक ताने-बाने को तोड़ता न हो। राहुल गांधी के परिवार ने 1984, भागलपुर समेत कई अन्य दंगों के जरिए देश में नफरत की आग फैलाई। ये शर्मनाक है कि अब वह इस तरह की राजनीति कर रहे हैं।’

जब स्पीकर ने सिंधिया से कहा-राजनीति मत करो
अलवर मामला लोकसभा में भी गूंजा। कांग्रेस सांसद करण सिंह यादव ने कहा कि यह राज्य में चौथी घटना है। इस दौरान भाजपा व कांग्रेस सांसदों में तकरार भी हुई। इसी बीच कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कठुआ कांड व महिलाओं से दुष्कर्म के मामले उठाए। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मंत्री ने आरोपितों के समर्थन में जुलूस निकाला था, जबकि उप्र के उन्नाव कांड में भाजपा के एक विधायक आरोपित हैं। उन्होंने मप्र के मंदसौर दुष्कर्म कांड को भी उठाया, लेकिन स्पीकर सुमित्रा महाजन ने उन्हें रोका और ऐसी घटनाओं के लिए राजनीति करने पर उन्हें फटकारा। गुस्से महाजन ने कहा, ‘हर चीज पर राजनीति मत कीजिए, मैं भी महिला हूं। ‘

अवमानना याचिका दायर
उधर अलवर कांड को लेकर महात्मा गांधी के पौत्र तुषार गांधी व कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानन याचिका दायर कर दी। कोर्ट इस पर 28 अगस्त को सुनवाई करेगी।

पुलिस की भूमिका जांचने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी
अलवर मामले में पुलिस की भूमिका की जांच के लिए राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अफसरों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है। यह टीम सोमवार को ही मौके पर पहुंची और जांच भी शुरू कर दी। राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि डीजीपी को तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एक कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्रालय ने भी राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

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CM केजरीवाल को मानहानि मामले में लगा जोर का झटका

हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई पर अंतरिम रोक लगाने से बृहस्पतिवार को इंकार कर दिया। हालांकि दूसरी ओर कोर्ट ने दिल्ली सरकार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई के लिये 11 जुलाई की तारीख तय की है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने याचिका दायर निचली अदालत में चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई पर रोक लगाते हुये उसे खारिज करने की मांग की थी। मानहानि की यह शिकायत पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने 2012 में दायर की थी।

जस्टिस एके पाठक ने अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली सरकार व शिकायतकर्ता पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया। उस फैसले के मुताबिक सांसद व विधायकों के मामलों की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी होनी चाहिये।

याचिका पर जिरह करते हुये वरिष्ठ सुधीर नंदराजोग ने कहा कि मानहानि की यह शिकायत दायर करने का पवन खेड़ा को कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उनकी मानहानि नहीं हुई है। इसलिये इस मामले को खारिज किया जाना चाहिये।

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पूर्व राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने शिकायत दायर कर कहा था कि एक टीवी शो के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अक्तूबर 2012 में बिजली की बढ़ी दरों पर बोलते हुये ऐसी बातें कही जिससे तत्कालीन मुख्यमंत्री की बदनामी हुई थी।

पटियाला हाउस अदालत ने इस शिकायत पर अरविंद केजरीवाल को 31 जनवरी 2013 को बतौर आरोपी समन जारी किया गया था। इस शिकायत पर अदालत ने 28 अक्तूबर 2013 को आरोप तय किये थे।