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जानिए कठुआ रेप कांड का पूरा सच। डी एन ए रिपोर्ट! #Kathua #JusticeForAsifa #Truth

जानिए डेली न्यूज़ एंड एनालिसिस रिपोर्ट से कठुआ रेप कांड से जुड़ा हर सच। किसी भी प्रतिक्रिया देने से पहले सच जानना जरुरी है। हम मांग करते हैं अगर उन्नाव केस की CBI जाँच हो सकती है तो कठुआ रेप कांड की भी CBI जाँच होनी चाहिए और केस को फ़ास्ट ट्रैक कर के सुप्रीम कोर्ट में जल्द से जल्द अपराधियों को सूली पर चढ़ाया जाये।

कठुआ रेप कांड का पूरा सच

 

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कनिष्‍क गोल्‍ड के डायरेक्‍टर भूपेश जैन, नीता जैन से CBI ने की पूछताछ, 824Cr का है फ्रॉड

करीब 824 करोड़ रुपए के एसबीआई फ्रॉड मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने कनिष्‍क गोल्‍ड प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्‍टर्स भूपेश जैन और नीता जैन से पूछताछ की। साथ ही सीबीआई ने कनिष्‍क गोल्‍ड के प्रमोटर्स और डायरेक्‍टर्स के खिलाफ लूक-आउट सर्कुलर जारी कर दिया है। चेन्‍नई की कंपनी कनिष्‍क गोल्‍ड को 14 बैंकों के कंसोर्टियम ने लोन दिया था, जिसमें एसबीआई सबसे आगे है। यह लोन अब एनपीए घोषित हो चुका है। इस मामले में जांच एजेंसी सीबीआई ने एसबीआई की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। पीएनबी में करीब 13 हजार करोड़ रुपए का घोटाला सामने आने के बाद फ्रॉड का यह दूसरा बड़ा मामला है।

2007 से कनिष्‍क गोल्‍ड ने लोन लेना शुरू किया 
एसबीआई की ओर से कहा गया, कनिष्क गोल्ड ने 2007 से कर्ज लेना शुरू किया और बाद में उसने अपनी क्रेडिट की सीमा बढ़वा लिया। कनिष्क का रजिस्टर्ड ऑफिस चेन्नई में है। इसके मालिक और प्रमोटर-डायरेक्टर भूपेश कुमार जैन और उनकी पत्नी नीता जैन हैं। एसबीआई ने शिकायत में कहा कि ज्वैलर ने सबसे पहले मार्च 2017 में ब्याज भुगतान में 8 सदस्य बैंकों से डिफॉल्ट किया। अप्रैल 2017 तक कनिष्क ने सभी 14 बैंकों को पेमेंट रोक दी। 5 अप्रैल 2017 को स्टॉक ऑडिट की शुरुआत के समय बैंकर्स प्रमोटर से संपर्क करने में असफल रहे।

मार्च 2017 में सामने आया डिफॉल्‍ट 
एसबीआई के मुताबिक, मार्च 2017 में कनिष्क ज्वैलरी का डिफॉल्ट सामने आया था। जब उसने 8 सदस्य बैंकों का ब्याज नहीं चुकाया। इसके बाद अप्रैल 2017 में सभी 14 बैंकों का ब्याज चुकाने में असमर्थता जताते हुए पेमेंट रोक दी। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने कंपनी के प्रमोटर और डायरेक्टर से संपर्क किया लेकिन वह नहीं मिले। 25 मई 2017 को कनिष्क के कॉर्पोरेट ऑफिस का दौरा करने बैंकर्स पहुंचे, लेकिन फैक्ट्री और शोरूम दोनों ही बंद थे। भूपेश जैन ने उसी दिन बैंकों को लेटर लिखकर दस्तावेजों में फर्जीवाड़े और सभी स्टॉक को हटाने के बारे में बताया। मद्रास ज्वैलर्स एंड डायमंड मर्चेंट एसोसिएशन के एक सदस्य के मुताबिक, कनिष्क गोल्ड लगातार घाटे में जा रही थी और उसके लिए काम जारी रखना संभव नहीं हो पा रहा था। मई 2017 में ही उसने घाटे से बचने के लिए अपने सभी आउटलेट्स बंद कर दिए।

SBI ने अकेले 240 करोड़ का लोन दिया
जानकारी के अनुसार एसबीआई ने ज्वैलरी कंपनी को 240 करोड़ रुपए लोन दिया था। इसके अलावा पीएनबी ने 128 करोड़, आईडीबीआई ने 49 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया ने 46 करोड़, सिंडिकेट बैंक ने 54 करोड़, यूनियन बैंक ने 53 करोड़, यूकों बैंक ने 45 करोड़, सेंट्रल बैंक ने 22 करोड़, कॉरपोरेशन बैंक ने 23 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 32 करोड़, तमिलनाडु बैंक ने 27 करोड़, एचडीएफसी बैंक ने 27 करोड़, आईसीआईसीआई बैंक ने 27 करोड़ और आंध्रा बैंक ने 32 करोड़ रुपए लोन दिया था।

नीरव मोदी केस से कैसे अलग है ये फ्रॉड?
यह मामला नीरव मोदी और मेहुल चौकसी द्वारा पीएनबी में किए गए फ्रॉड से अलग है। पीएनबी के मामले में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग का गलत इस्तेमाल कर बैंक से पैसे लिए गए। कनिष्‍क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड के मामले में बैंक को गलत फाइनेंशियल एस्टेमेंट और रिकॉर्ड दिखाकर लोन लिया गया। कुल लोन 824 करोड़ रुपए का है, लेकिन ब्याज सहित यह र‍कम इससे कहीं ज्यादा बताई जा रही है।

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देशभर के लाखों छात्रों के लिए 10वीं में पास होना हुआ आसान, बदला गया है यह नियम

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के पास होने का मानदंड बदल दिया है। अब आंतरिक व बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन को मिलाकर 33 फीसद अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी भी पास हो जाएंगे।

पहले विद्यार्थियों को पास होने के लिए आंतरिक व बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में अलग-अलग 33 फीसद अंक प्राप्त करने होते थे। शैक्षणिक सत्र 2017- 18 की दसवीं की बोर्ड परीक्षा में विभिन्न मूल्यांकन पृष्ठभूमि से आए परीक्षार्थियों की परिस्थतियों को देखते हुए सीबीएसई की परीक्षा समिति ने 16 फरवरी को हुई बैठक में यह फैसला लिया है। हालांकि, पास होने का यह मानदंड सिर्फ इसी सत्र की बोर्ड परीक्षा के लिए लागू रहेगा।

सीबीएसई अध्यक्ष अनिता करवल द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार वर्ष 2018 में परीक्षा दे रहे दसवीं के विद्यार्थियों के लिए यह बदलाव किया गया है। इसके तहत 20 अंक वाली आंतरिक परीक्षा व 80 अंक वाली विषय परीक्षा के अंकों को मिलाकर 33 फीसद अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी पास माने जाएंगे।

यह नियम पांचों मुख्य विषयों के लिए लागू होगा। अगर किसी विद्यार्थी ने अतिरिक्त विषय के तौर पर छठा या सातवां विषय भी लिया है, तो उन विषयों के पास होने का मानदंड भी अन्य पांचों विषयों की तरह ही रहेगा।

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सीबीआइ की एक छापेमारी पड़ी भारी, लपेटे में आए कार्ति चिदंबरम

सियासी लोगों की पोशाक अक्सर सफेद होती है ये दिखाने के लिए वो दिल और दिमाग दोनों से पाकसाफ हैे। उनके लिए जनता की सेवा करना ही महान लक्ष्य है। लेकिन उन पोशाकों पर आरोपों के छीटें पड़ते ही रहते हैं। वो उस कमीज को दागदार करते हैं, तो कमीज बेदाग भी बनी रहती है। आइएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस में कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब वो विदेश से स्वदेश वापस लौट रहे थे। कार्ति की गिरफ्तारी किसी एक सामान्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं है बल्कि इसमें सियासत भी जुड़ी हुई है।

2014 के आम चुनाव से पहले और प्रचार के दौरान भाजपा नेता कहा करते थे कि कांग्रेस का मतलब अब भ्रष्टाचार है ऐसी कोई जगह नहीं है जहां भ्रष्टाचार की गंगा न बह रही हो। चुनावी सभाओं में पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी कहा करते थे कि अगर उनकी सरकार बनी तो एक एक गुनहगार जेल के अंदर होंगे। सरकार के चार साल बीत जाने के बाद लोग पूछते हैं कि आखिर मौजूदा सरकार क्यों नहीं कुछ कर पा रही है। इस सवाल के जवाब में भाजपा की तरफ से ये तर्क दिया जाता रहा है कि राजनीतिक विद्वेष की भावना से वो काम करने में यकीन नहीं रखते हैं। जिस किसी आरोपी के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध होंगे तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी की अलग अलग ढंग से व्याख्या हो सकती है लेकिन ये तो साफ है कि कांग्रेस बैकफुट पर आ चुकी है। आगे हम बताएंगे कि भ्रष्टाचार के कुछ मामलों के सामने आने के बाद कांग्रेस बजट सत्र के दौरान सरकार को घेरती लेकिन क्या ये दिलचस्प नहीं है कि हमलावर कांग्रेस के सामने अब रक्षात्मक उपाय अपनाने के अलावा और कोई दूसरा चारा नहीं है।

चेन्नई में हुई कार्ति की गिरफ्तारी

आइएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिग केस में ईडी ने कार्ति चिदंबरम को चेन्नई से गिरफ्तार किया। सीबीआइ का कहना है कि जांच प्रक्रिया में वो सहयोग नहीं कर रहे हैं। इससे पहले एस भास्कर रमन कार्ति का सीए था जिसे सीबीआइ ने कुछ दिन पहले गिरफ्तार किया था। विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड एफआइपीबी ने आइएनएक्स मीडिया को वर्ष 2007 में विदेशी पूंजी जुटाने की अनुमति दी थी। इस मामले में कार्ति का नाम सामने आया। कार्ति चिदंबरम, कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के बेटे हैं जो उस समय वित्त मंत्री थे। ईडी ने दावा किया था कि सीए भास्कर रमन ने गलत तरीके के अर्जित संपत्ति के प्रबंधन में कार्ति की मदद की थी।

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के तहत कार्ति और कई दूसरे आरोपियों पर पिछले साल मई में केस दर्ज किया गया था। कार्ति पर आरोप है अपने पिता के वित्त मंत्री रहते वक्त उन्होंने आइएनएक्स मीडिया को एफआइपीबी की मंजूरी दिलाने के एवज में 3.5 करोड़ की घूस ली थी। दरअसल ये मामला आसानी से नहीं खुला होता अगर शीना बोरा हत्याकांड में सीबीआइ ने पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी के घर में छापेमारी न की होती। सीबीआइ की छापेमारी में कुछ अहम दस्तावेज बरामद हुए जिससे पता चला कि एफआइपीबी को धता बता कर कार्ति ने फायदा उठाया था।

घोटालों के घेरे में कार्ति
-कार्ति चिदंबरम को 45 करोड़ रुपए के फॉरेन एक्सनचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) उल्लंघन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी आरोपी बना चुका है।

-कार्ति पर वासन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से कथित तौर पर जुड़ने का मामला है।
-इस कंपनी से जुड़े विदेशी निवेशकों से कई अलग नामों से करीब 2100 करोड़ रुपए और इसके साथ ही 162 करोड़ रुपए अलग से भी लिए गए।
– आरोपों के मुताबिक इस लेन-देन में कार्ति चिदंबरम की कंपनी मैसर्स एडवांटेज स्ट्रैटजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल थी। इस कंपनी को इसमें करीब 45 करोड़ रुपए मिले थे।
-कार्ति पर एयरसेल-मैक्सिस डील में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप।
-कार्ति की कंपनी मैसर्स एडवांटेज स्ट्रेटजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड जांच के घेरे में
– पी. चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुए कई गैर कानूनी क्लीरियेंस दिलाने का आरोप।

मामले में पहली बार कार्ति का नाम सुब्रमण्यम स्वामी ने उछाला। साल 2015 में तत्कालीन जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यन स्वामी ने कार्ति चिदंबरम की विभिन्न कंपनियों के बीच वित्तीय लेनदेन का खुलासा किया। स्वामी ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहते पी. चिदंबरम ने बेटे कार्ति को एयरसेल-मैक्सिस मर्जर से लाभ उठाने में मदद की। इसके लिए उन्होंने दस्तावेजों को जानबूझकर रोका और अधिग्रहण प्रक्रिया को नियंत्रित किया ताकि उनके बेटे को अपनी कंपनियों के शेयर की कीमत बढ़ाने की दिशा में कारोबारी कदम उठाने का वक्त मिल जाए।

कौन हैं कार्ति चिदंबरम ? 

तमिलनाडु के शिवगंगा में 16 नवंबर 1971 को जन्मे कार्ति चिदंबरम कांग्रेस के नेता और व्यापारी हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सास और कैंब्रिज से उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और लॉ की पढ़ाई की है। वह तामिलनाडु टेनिस एसोसिएशन के वाइस प्रेसीडेंट रहे हैं। भरतनाट्यम नृत्यांगना श्रीनिधि रंगराजन से उनकी शादी हुई है।

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PNB और Rotomac के बाद अब CBI ने तीन नए घोटालों से उठाया पर्दा, मामला दर्ज

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले और रोटोमैक घोटाले से अभी देश ठंग से उबरा भी नहीं था कि अब सीबाआई ने कई और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को उजागर किया है। इन तीन मामलों में सीबीआई ने एक ज्वैलर, एक बिजनेस मैन और एक पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ मामला दर्ज किया है क्योंकि इनके खिलाफ तीन अलग अलग बैंकों ने शिकायत दर्ज कराई है। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने दी है।

ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में हुआ 3.9 बिलियन का फ्रॉड

गुरुवार को सीबीआई ने कथित धोखाधड़ी के इस मामले में द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। 389.85 करोड़ रुपये का यह कथित कर्ज घोटाला ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) में हुआ है। ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने आरोप लगाया है कि दिल्ली जौहरी द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल और उसके मालिक सभ्या सेठ ने उन्हें धोखा दिया। उनको दिया गया लोन 2014 में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में बदल गया, लेकिन बैंक ने पिछले साल 16 अगस्त को ही एजेंसी से संपर्क किया था, जब कंपनी ने अपना कारोबार समेट लिया और सेठ देश से भाग गए। सभ्या की कंपनी ने ओबीसी से 2007 से 2012 के दौरान कुल 389 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। बैंक की ओर से कराई गई जांच में पाया गया कि कंपनी ने लेटर ऑफ क्रेडिट का इस्तेमाल सोने और दूसरे कीमती रत्नों की खरीद का भुगतान करने के लिए किया। कंपनी ने फर्जी लेनदेन का उपयोग कर सोने और धन को देश से बाहर भेजा।

पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से नीरव मोदी और रोटोमैक ग्लोबाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पीएनबी के बाड़मेर ऑफिस ने सीबीआई का दरवाजा खटखटाया, धोखाधड़ी की शिकायतों के साथ-साथ, इन्होंने एजेंसी के समक्ष ने तीन अलग-अलग मामले दर्ज कराए।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र बैंक घोटाला: सीबीआई ने बुधवार को बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायत के आधार पर व्यापारी अमित सिंगला और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। बैंक ने आरोप लगाया कि जाली दस्तावेजों के आधार पर लोन लिया गया और इसका गलत गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने दिल्ली के कारोबारी अमित सिंगला के खिलाफ 9.5 करोड़ रुपए के गबन का मामला दर्ज कराया है। शिकायत के मुताबिक सिंगला की कंपनी आशीर्वाद चेन ने बैंक से लोन लिया, लेकिन अब चुकाने में वो टालमटोल कर रहे हैं। सिंगला ने ये लोन कैश क्रेडिट फैसिलिटी के जरिए साल 2010 और 2012 में लिया था। आरोपी ने दिल्ली और हरियाणा में एक ही परिवार की तीन संपत्तियों को पेश किया था। लोन लेने के दौरान इन तीनों संपत्तियों का कुल मूल्य टेक महिंद्रा इंटरनेशनल की ओर से 180 मिलियन लगाया गया था।

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सीबीआइ की गिरफ्त में सीजीएसटी सेंट्रल एक्साइज के कमिश्नर सहित आठ अफसर

सीजीएसटी, सेंट्रल एक्साइज कानपुर में कमिश्नर के पद पर तैनात संसार चंद के साथ आठ लोगों को सीबीआइ ने अपनी गिरफ्त में लिया है। इनके ऊपर घूस लेने का गंभीर आरोप है।

कानपुर रिश्वत मांगने के आरोप में सीजीएसटी कमिश्नर संसार चंद्र समेत छह लोगों को सीबीआइ एंटी करप्शन टीम ने अपनी कस्टडी में लिया है। उन पर तमाम क्लाइंट से मासिक और त्रैमासिक घूस लेने का भी आरोप है। सीबीआइ ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि संसार चंद्र, उनके कुछ अधीक्षक, कुछ निजी लोग मिलकर संगठित रूप कंपनियों पर अवैध तरीके से दबाव बनाकर वसूली कर रहे हैं।
सीबीआइ ने अपनी रिपोर्ट में कानपुर में इंद्रधनुष अपार्टमेंट सर्वोदय नगर में अधीक्षक अजय श्रीवास्तव, इसी अपार्टमेंट वासी अधीक्षक अमन शाह, सर्वोदय नगर स्थित शिवा अपार्टमेंट में निवासी अधीक्षक राजीव सिंह चंदेल, स्वरूप निवासी अमित अवस्थी, दिल्ली में सी-58, असिमा अपार्टमेंट, सेक्टर 9, रोहिणी निवासी अमन जैन, दिल्ली में सी 25 फस्र्ट फ्लोर शिवाजी पार्क, पंजाबी बाग निवासी चंद्र प्रकाश के साथ ही दिल्ली की डिफेंस कालोनी में डी-235 निवासी संसार चंद्र की पत्नी अविनाश कौर को भी आरोपी बनाया है। आरोप में यह भी कहा गया है कि तमाम कंपनियों की तरफ से बड़े-बड़े इलेक्ट्रानिक व अन्य सामान दिल्ली स्थित संसार चंद्र के आवास पर दिए जाते थे। रिपोर्ट में अधीक्षकों पर संसार चंद्र के साथ मिलकर वसूली करने का भी आरोप लगाया गया है। इसमें फिलहाल एक डिटरजेंट कंपनी का नाम भी आया है, जिससे फरवरी से अप्रैल 2018 की त्रैमासिक के लिए 1.5 लाख रुपये लिए जाने के लिए दबाव डाला जा रहा था। कंपनी का निदेशक खराब आर्थिक स्थिति की वजह से यह धन नहीं दे पा रहे थे जिसकी वजह से उन पर लगातार दबाव डाला जा रहा है। इसके साथ ही इस्पात कंपनी, पान मसाला की बड़ी कंपनियों से भी संसार चंद्र के दिल्ली स्थित आवास पर लगातार सामान भेजे जाने की रिपोर्ट सीबीआइ ने की है।
संसार चंद्र कानपुर में गुजैनी स्थित कस्टम कालोनी में रहते हैं। उनको सीबीआइ की टीम ने फैजाबाद से हिरासत में लिया है। अन्य सभी को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। जीएसटी कमिश्नर संसार चंद को घूस मांगने के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। संसारचन्द्र को फैजाबाद के पास से गिरफ्तार किया गया। इसकी आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। सीबीआई ने इस मामले में तीन सुपरिटेंडेंट और एक ऑफिस स्टाफ को भी गिरफ्तार किया है। जीएसटी कमिश्नर संसार चंद को डेढ़ लाख रुपया रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है।1986 बैच के आइआरएस अधिकारी संसार चंद के साथ ही जीएसटी एंड सेंट्रल एक्साइज के सुपरीटेंडेंट अजय श्रीवास्तव, अमन शाह व राजीव चंदेल, इनके ऑफिस स्टॅाफ सौरभ पाण्डेय, एक प्रतिष्ठान के मनीष शर्मा तथा संसार चंद की पत्नी अविनाश कौर को सीबीआई ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
एफआईआर के मुताबिक संसार चंद अपने सुपरिटेंडेंट अजय श्रीवास्तव, अमान शाह और आरएस चंदेल से समय समय पर कई लोगों से आने वाले अवैध धन के बारे में अपडेट लिया करते थे। जांच एजेंसी ने तीन कंपनियों शिशु सॉप एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड, सर पान मसाला और मैसर्स रिमझिम इस्पात लिमिटेड की पहचान की है, जिनसे जीएसटी अधिकारियों ने विभाग से जुड़े मामलों में अवैध वसूली की। सीबीआई ने इस संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 120(बी) और पीसी अधिनियम की धारा 7,11,12 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। सीबीआई की टीमों ने कानपुर में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की है।
अवैध रूप से उगाही करने का एक व्यवस्थित और संगठित गिरोह  
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) से जुड़ा अभी तक का यह अलग मामला है, जिसमें उच्च अधिकारी की गिरफ्तारी भी की गई। जीएसटी अधिकारियों ने विभागीय कार्रवाई को रोकने के लिए कंपनियों से रिश्वत ली थी। रिश्वत का पैसा हवाला के जरिए व्यवस्थित रूप से मासिक या त्रैमासिक किश्त की तरह अधिकारियों को दिया गया था। 1986 बैच के एक आईआरएस अधिकारी संसार चंद वर्तमान में जीएसटी के आयुक्त हैं। आरोप है वह केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, कानपुर में अपने अधिकार क्षेत्र से संबंधित मामलों में अवैध रूप से उगाही करने वाले एक व्यवस्थित और संगठित गिरोह का नेतृत्व कर रहे थे।