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भाजपा का ‘संर्पक फॉर समर्थन’ अभियान शुरू, 50 लोगों से मिलेंगे शाह

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में केंद्र सरकार के चार साल पूरे होने पर भाजपा ने ‘संर्पक फॉर समर्थन’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को पूर्व सेना प्रमुख दलबीर सुहाग और संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप से उनके घर जाकर मुलाकात की। शाह ने सुहाग को केंद्र की भाजपा-नीत एनडीए सरकार की उपलब्धियों पर एक बुकलेट, एक पेन ड्राइव और इससे जुड़े अन्य साहित्य भी भेंट किये।

भाजपा के इस अभियान को 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी माना जा रहा है। इसके तहत पार्टी के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और पंचायत सदस्य समेत करीब 4000 कार्यकर्ता-नेता लोगों से खुद मिलेंगे। केंद्रीय आलाकमान ने पार्टी के हर एक कार्यकर्ता को कम से कम 25 लोगों से संपर्क कर सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के मुताबिक भाजपा के नेता देश के एक लाख प्रमुख व्यक्तियों से व्यक्तिगत संपर्क करेंगे, जिसमें कला जगत, संविधान विशेषज्ञ, सेना के रिटायर्ड अधिकारी, फिल्म और धर्म जगत की प्रमुख हस्तियाँ शामिल होगी।

इस अवसर पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार के इन चार सालों के दौरान विशेषकर दो क्षेत्रों – ग्रामीण जीवन से असुविधाओं को समाप्त कर उन्हें प्रगति की राह पर आगे बढ़ाने और गरीबों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में बहुत बड़ा काम हुआ है। साथ ही आने वाले पांचवें साल में केंद्र की भाजपा-नीत एनडीए सरकार का लक्ष्य लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देकर किसानों के जीवन में परिवर्तन लाने और देश के लगभग 50 करोड़ लोगों को पांच लाख रुपये तक का बीमा देकर उन्हें स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से मुक्त करने का है।

शाह ने विगत चार वर्षो के बारे मे बताया कि दुनिया में देश के गौरव को आजादी के बाद सबसे ऊँची सतह पर प्रतिष्ठित करने का काम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुआ है।

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छह माह में आ सकता है अयोध्या मंदिर विवाद का फैसला : कोकजे

सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का फैसला छह माह में आ सकता है, यह उम्मीद जताई है विहिप के नवनिर्वाचित अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे ने।

अध्यक्ष चुने जाने के बाद पहली बार रामनगरी पहुंचे कोकजे रामघाट स्थित रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला में मीडिया से मुखातिब थे।

उन्होंने कहा, मंदिर-मस्जिद का अदालती विवाद अंतिम चरण में है और अदालत जिस तरह की तत्परता बरत रही है, उससे यह नहीं लगता कि फैसले के लिए अधिक दिनों तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। विहिप अध्यक्ष ने भरोसा जताया कि अदालत का फैसला मंदिर के हक में आएगा। उन्होंने कहा, फैसले के बाद क्या करना होगा, इसके लिए अभी से व्याकुल होने की आवश्यकता नहीं है और आगे की दिशा निर्णय आने के बाद तय की जाएगी।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, प्रकरण अदालत में लंबित है और अदालत जिस तरह से इस मसले को संज्ञान में ले रही है, उससे मंदिर के लिए संसद में कानून बनाने की सोचना उचित नहीं है, क्योंकि कानून बनाने के बाद भी इसे अदालत में चुनौती मिल सकती है और मसला पुन: अदालत के हवाले हो सकता है। उन्होंने अदालत के फैसले से बचने की कोशिश करने वालों को यह सीख भी दी कि हम यह क्यों सोचें कि अदालत का फैसला मंदिर के हक में नहीं आएगा।

हाईकोर्ट पहले ही रामलला के पक्ष में निर्णय कर चुका है। कोकजे ने बताया, विहिप अदालती लड़ाई को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और पैरवी के लिए अच्छे से अच्छे वकील लगाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और कहा, ङ्क्षहदुओं के निकट मोदी जैसा कोई अन्य प्रधानमंत्री नहीं रहा है।

इस मौके पर विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार, उपाध्यक्ष चंपत राय, प्रबंध समिति के सदस्य दिनेशचंद्र, पुरुषोत्तमनारायण सिंह, राजेंद्र सिंह पंकज, प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा, सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रीय विचार केंद्र के अध्यक्ष शक्ति सिंह आदि मंदिर समर्थक मौजूद रहे।

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का एक और वीडियो वायरल। आरती की थाली में चढ़ावा चढ़ाने लगे Under The Thali स्टाइल में!?

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी जी को जब पूजा की थाली में चढ़ावा चढ़ाने की बात सूझी तो पहले तो उन्होंने थाली के नीचे रुपये रखने चाहे। देखें यह वायरल वीडियो ???

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कांग्रेस में राहुल युग की शुरुआत, निर्विरोध चुने गए अध्यक्ष; जश्न का माहौल

राहुल गांधी आज सोमवार को 132 साल पुरानी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। चूंकि किसी और ने नामांकन दाखिल नहीं किया था, इसलिए नाम वापसी के अंतिम दिन यानी सोमवार को उन्हें निर्विरोध का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया है। वैसे औपचारिक रूप से कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनकी ताजपोशी 16 दिसंबर को होगी। 47 साल के राहुल कांग्रेस का शीर्ष पद संभालने वाले नेहरू-गांधी परिवार के छठे सदस्य होंगे। वह पिछले 13 साल से मां और वर्तमान पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के मार्गदर्शन में राजनीति की बारीकियां सीख रहे हैं। चार साल से संगठन में उनकी हैसियत दूसरे नंबर की रही है। इस दौरान पार्टी बिखरी-बिखरी सी दिखी। गिने-चुने प्रदेशों में ही उसकी सरकारें रह गई हैं। ऐसे प्रतिकूल समय में राहुल की ताजपोशी को भले ही नया दौर बताया जा रहा हो, लेकिन उनके सामने चुनौतियों की फेहरिस्त लंबी होगी।

दिल्ली पार्टी कार्यालय के बाहर जश्न का माहौल

राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष चुने जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। दिल्ली में कांग्रेस कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने बैंड-बाजे के साथ राहुल की ताजपोशी का जश्न मनाया। भारी संख्या में कार्यकर्ता दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय पर पहुंचे और राहुल गांधी को निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी।

नेहरू-गांधी छाया से निकलना

राहुल गांधी नेहरू-गांधी विरासत के उत्तराधिकारी हैं, लेकिन युवा मतदाताओं का भरोसा जीतने के लिए सिर्फ यही काफी नहीं रह गया है। युवा भारत की उम्मीदें-आकांक्षाएं बदल चुकी हैं। लिहाजा राहुल गांधी को नेहरू-गांधी परिवार की परछाईं से बाहर निकलकर लोगों तक पहुंचना होगा। प्रधानमंत्री मोदी मतदाताओं से सीधे जुड़ने के लिए जाने जाते हैं। इसी तरह राहुल गांधी को भी जनता से सीधे जुड़ने के लिए अपना रास्ता खोजना होगा।

सिर्फ छह राज्य रह गए हैं

पार्टी में नेता अधिक, कैडर कम हैं। नए अध्यक्ष के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती होगी कि 2014 के लोकसभा चुनाव सहित एक के बाद दूसरे राज्य खोती जा रही पार्टी का जनाधार कैसे मजबूत किया जाए? पार्टी की खोई साख कैसे वापस आए? कभी पूरे देश में एकछत्र राज करने वाली पार्टी के पास सिर्फ छह राज्य बचे हैं। इनमें केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी भी है। ऐसे में पार्टी और इसके कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करना पार्टी अध्यक्ष के लिए बड़ी चुनौती होगी। चुनावी सफलताएं ही पार्टी में ऊर्जा का संचार करेंगी।

नेहरू गांधी परिवार से अध्यक्ष (बनते समय उम्र)

मोतीलाल नेहरू (58)

जवाहर लाल नेहरू(40)

इंदिरा गांधी (42)

राजीव गांधी (41)

सोनिया गांधी (52)

राहुल गांधी (47)

बड़े राज्यों में जीत से ही साबित हो पाएगा नेतृत्व

अब हर चुनाव की जीत-हार का सेहरा पार्टी अध्यक्ष के सिर बंधेगा। गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव नतीजे सबसे पहले आएंगे। अगले साल मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में चुनाव होंगे जो 2019 के लोकसभा का रुझान तय करेंगे। इन राज्यों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर ही 2019 के नतीजों का दारोमदार होगा। कांग्रेस के बारे में यह किसी से छिपा नहीं कि वहां जीत का सेहरा गांधी परिवार के माथे पर ही बंधता है, जबकि हार की जिम्मेदारी सामूहिक होती है।

मोदी की लहर सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती

प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के बूते भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में एक के बाद एक राज्य कांग्रेस से छीनती जा रही है। असम जैसे परंपरागत कांग्रेसी राज्य भी भाजपा के पास आ चुके हैं। ऐसे में मोदी लहर से पार पाना राहुल के सामने बड़ी चुनौती होगी। राहुल को इस चुनौती का अहसास है। इसीलिए वह गुजरात के चुनाव में प्रचार के दौरान बार-बार सीधे प्रधानमंत्री पर हमला बोल रहे हैं।

वरिष्ठ और युवा नेताओं के बीच बनाना होगा संतुलन

पार्टी में वरिष्ठ नेताओं के साथ नए और युवा नेताओं के बीच संतुलन बनाना नए अध्यक्ष के सामने बड़ा काम होगा। कई राज्यों की पार्टी इकाइयों में इन दोनों तरह के नेताओं के बीच सत्ता संग्राम सामने आ चुका है। राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट का मामला सबके सामने है। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह और दिल्ली में शीला दीक्षित व अजय माकन इसके उदाहरण हैं। कांग्रेस में सीनियर और युवा नेताओं के बीच खींचतान का इतिहास रहा है। कहना कठिन है कि राहुल के राज में क्या होगा।

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अयोध्या में बने राम मंदिर, हम जमीनी हक छोड़ देंगे: शिया वक्फ बोर्ड का नया फॉर्मूला

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या विवाद पर नया प्रपोजल दिया है। अगले महीने सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले वक्फ बोर्ड की तरफ से ये प्रस्ताव आया है। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा कि हमने एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इसे 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिया है। ड्राफ्ट में अयोध्या में राम मंदिर और लखनऊ में मस्जिद बनाने की बात कही है। इस प्रपोजल पर कई महंतों ने सहमति जताई है। 5 दिसंबर को इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

शिया वक्फ बोर्ड का फॉर्मूला, 5 प्वाइंट

1) विवादित जमीन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का हक नहीं
– शिया वक्फ बोर्ड का दावा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड का पूरा केस 26 फरवरी 1944 को जारी एक नोटिफिकेशन पर बेस्ड है। इसमें उसने बाबरी मस्जिद पर हक जताया था। लेकिन कोर्ट ने इस नोटिफिकेशन की वैलिडिटी पर शक जताया था। बाबरी मस्जिद पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का रजिस्ट्रेशन भी फैजाबाद कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर अवैध घोषित हो चुका था। लिहाजा, सुन्नी वक्फ बोर्ड को इस मामले में फैसला लेने का हक नहीं है।

2) हम अयोध्या में जमीन का पूरा हक छोड़ने को तैयार
– शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि हिंदुओं की आस्था का सम्मान करते हुए और राष्ट्र हित में विवाद खत्म करने के मकसद से हम राम मंदिर बनाने के लिए पूरी जमीन पर अपना हक छोड़ते हैं।

3) लखनऊ में मस्जिद के लिए मिले जगह
लखनऊ के मोहल्ला हुसैनाबाद में नजूल की खाली पड़ी एक एकड़ जमीन शिया समुदाय को मस्जिद बनाने के लिए मिले। यह जमीन उत्तर प्रदेश सरकार दे।

4) लखनऊ में मस्जिद किसी मुगल बादशाह के नाम पर नहीं होगी
– मीर बाकी या किसी मुगल बादशाह के नाम पर मस्जिद नहीं होगी। इसे अमन की मस्जिद नाम दिया जाएगा।

– इस प्रपोजल पर यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी, हनुमान गढ़ी निर्मोही अखाड़े के महंत रामदास, नृत्य गोपालदास, रामविलास वेदान्ती, श्रीपंच निर्वाणी अखाड़ा के महंत धर्मदास जैसे नेताओं के दस्तखत हैं।

5) बाबर का सेनापति शिया मुसलमान था

– ड्राफ्ट में कहा गया है कि बाबरी मस्जिद को 1528 से 1529 के बीच मीर बाकी ने अयोध्या में बनवाया था। मीर बाकी बाबर के सेनापति थे और वो शिया मुसलमान थे।
– बाबरी मस्जिद बनने के बाद उसके मुतल्लवी (केयरटेकर) मीर बाकी ही रहे। मीर बाकी के बाद 1945 तक उनके परिवार के लोगों ने इस मस्जिद के मुतल्लवी का जिम्मा संभाला। ये सभी लोग शिया मुसलमान थे।

शिया कमेटी ही वसीम रिजवी को नहीं मानती: इकबाल अंसारी

– हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने कहा कि वसीम रिजवी को तो शिया कमेटी भी नहीं मानती है। घोटालों से बचने के लिए यह राम मंदिर बनाना चाहते हैं। हमारे यहां सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड जो करेगा वही माना जाएगा। ड्राफ्ट भले ही दे दिया गया हो लेकिन कोर्ट का फैसला ही माना जाएगा।

– हाशिम, बाबरी विवाद में ही पक्षकार थे। उनकी मौत हो चुकी है।

अयोध्या विवाद में कौन-कौन से पक्ष हैं ?

– निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड।

तीनों पक्षों का दावा क्या है ?

– निर्मोही अखाड़ा: गर्भगृह में विराजमान रामलला की पूजा और व्यवस्था निर्मोही अखाड़ा शुरू से करता रहा है। लिहाजा, वह स्थान उसे सौंप दिया जाए।
– रामलला विराजमान: रामलला विराजमान का दावा है कि वह रामलला के करीबी मित्र हैं। चूंकि भगवान राम अभी बाल रूप में हैं, इसलिए उनकी सेवा करने के लिए वह स्थान रामलला विराजमान पक्ष को दिया जाए, जहां रामलला विराजमान हैं।
– सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड:सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का दावा है कि वहां बाबरी मस्जिद थी। मुस्लिम वहां नमाज पढ़ते रहे हैं। इसलिए वह स्थान मस्जिद होने के नाते उनको सौंप दिया जाए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

– 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित 2.77 एकड़ की जमीन को मामले से जुड़े 3 पक्षों में बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।