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धूल की चादर में लिपटा उत्‍तर भारत। जानें क्या है वजह और कैसे सुरक्षित रहें अगले 48 घंटों में!

धूलभरी हवा से राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सर्वाधिक प्रभावित रहे। धूलभरी हवाएं चलने का कारण पश्चिमी विक्षोभ माना जा रहा है। ऐसे में लोगों को जहां सांस लेने में दिक्कत हो रही है, वहीं हवाई परिचालन प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ही हालात रहे तो उत्तर भारत के लिए आने वाले 48 घंटे मुश्किलों भरे हो सकते हैं।

40 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही है धूल बढ़ते तापमान से परेशान उत्तर भारत के लोगों की मुश्किल तब और बढ़ गई, जब हवाएं चलने से वातावरण में धूल की मात्रा और बढ़ गई। स्काईमेट वेदर के मुख्य मौसम विज्ञानी महेश पलावत का कहना है कि राजस्थान और ब्लूचिस्तान की ओर से चल रही गर्म हवाओं के साथ धूल करीब 40 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दिल्ली की ओर आ रही है। चूंकि मौसम में नमी नहीं है, इस कारण धूल की इस चादर का असर कई दिन तक बना रहेगा। दिल्ली में कई गुना बढ़ा प्रदूषण का स्तर धूलभरी हवाओं ने दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचा दिया है।

पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 बुधवार को दिल्ली में तीन गुना से भी अधिक 200 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसका सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता है। इसी तरह पीएम 10 का सामान्य स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता है, जबकि बुधवार को यह 981 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया। घर व दफ्तर के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखने की सलाह मौसम विशेषज्ञों ने ऐसे हालात में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को घर के भीतर ही रहने की सलाह दी है। घर व दफ्तर की खिड़कियां-दरवाजे बंद रखने को कहा है। साथ ही कचरा न जलाने की सलाह दी है। इस दौरान निर्माण कार्य भी बंद रखने की भी बात कही है।

बठिंडा-जम्मू फ्लाइट रद
आसमान में धूल के कारण बठिंडा-जम्मू फ्लाइट रद आसमान में धूल होने के कारण बुधवार को बठिंडा से जम्मू और जम्मू से बठिंडा की फ्लाइट को रद कर दिया गया। जम्मू से सुबह 9:10 की फ्लाइट को बठिंडा 10:20 बजे पहुंचना था, लेकिन आसमान में धूल के कारण जम्मू से फ्लाइट उड़ान नहीं भर सकी।

यूपी में आंधी के बाद बरसे बदरा
उत्तर प्रदेश में आंधी के बाद बरसे बदरा, 10 की मौत भीषण तपन के बीच मौसम के प्रतिदिन अलग-अलग तेवर बेहाल कर रहे हैं। पश्चिमी उप्र के अधिकांश जिलों में बुधवार को आसमान में धुंध छायी रही। गर्म हवाएं और उमस ने झुलसाया तो कहीं आंधी-पानी ने तबाही मचाई। खासकर पूर्व और मध्य उप्र में। इस दौरान 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। पेड़, बिजली खंभे उखड़े, जिससे जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया।

हरियाणा में दो दिन और मुसीबत
हरियाणा में दो दिन और रहेगी मुसीबत हरियाणा के आसमान में भी बुधवार को धूल का गुबार छाया रहा। इससे दृश्यता कम हो गई। ऐसे हालात हो दिन और रह सकते हैं। धूल की वजह से सांस के मरीजों की तकलीफ भी बढ़ गई। वहीं, गर्मी के कारण हांसी में दो लोगों की मौत हो गई।

कोलकाता में मिली राहत 
कोलकाता में बारिश से मिली राहत कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के विभिन्ना जिलों में मानसून की हुई बारिश से तापमान सामान्य रहा। हालांकि, कोलकाता व आसपोड़स के जिलों में दोपहर तक तेज धूप थी। बाद में बादल छा जाने से मौसम अच्छा हो गया।

छत्‍तीसगढ़ में उमस 
छत्तीसगढ़ में उमस ने लोगों को किया परेशान छत्तीसगढ़ में बुधवार को दिन में उमस ने लोगों को परेशान किया। पूर्वानुमान है कि आने वाले 24 से 36 घंटों के बीच दक्षिण छत्तीसगढ़ से लेकर उत्तर छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से तेज बारिश होगी। छत्तीसगढ़ में आठ जून को मानसून पहुंच चुका है, लेकिन बारिश अपेक्षाकृत कम में हो रही है।

जम्‍मू-कश्‍मीर में पारा सामान्‍य से ऊपर
जम्मू-कश्मीर में सामान्य से ऊपर है पारा जम्मू-कश्मीर में तापमान सामान्य से ऊपर चल रहा है। जम्मू में बुधवार को दिन का अधिकतम तापमान 43.3 डिग्री सेल्सियस रहा। इससे पहले मई में तापामान 43.5 डिग्री रह चुका है। कश्मीर में भी तापमान सामान्य से करीब पांच डिग्री सेल्सियस ऊपर चल रहा है।

हिमाचल में धूप से बढ़ा तापमान
हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन दिन से धूप खिलने के कारण तापमान में वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान ऊना में 43.4 डिर्ग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शिमला में सामान्य से अधिक गर्मी दर्ज की जा रही है।

उत्तराखंड के पहाड़ों में बारिश, मैदान में तपिश
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में जहां बुधवार को बारिश से लोगों को चढ़ते पारे से राहत मिली है, वहीं मैदानी जिलों में गर्मी व उमस ने लोगों को परेशान किया। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिन चढ़ते पारे से राहत मिलने के आसार कम ही हैं।

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किम जोंग उन से वार्ता के लिए प्योंगयोंग नहीं जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप, अब यहां होगी वार्ता

किम जोंग उन से वार्ता के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अब प्‍योंगयोंग नहीं जाएंगे। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि यह वार्ता रद कर दी गई है, दरअसल, अब ये दोनों नेता उसी जगह पर मिलेंगे जहां पिछले दिनों दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे ने किम जोंग उन से मुलाकात की थी। इसका सुझाव खुद ट्रंप की तरफ से आया था जिसको किम ने हरी झंडी दे दी है।

आपको बता दें कि किम और मून के बीच 27 अप्रैल को पुनमुंजोम गांव में बैठक हुई थी। यह उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। यहां 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद से ही युद्ध विराम लागू है। इसका एक हिस्‍सा उत्‍तर तो दूसरा हिस्‍सा दक्षिण कोरिया में पड़ता है। आपके लिए यह जानना भी बेहद दिलचस्‍प है कि यह सीमा रेखा दुनिया की सबसे खतरनाक सीमाओं में गिनी जाती है। यही वजह है कि उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा एक बार फिर से चर्चा का विषय बनने के साथ-साथ ऐतिहासिक वार्ता का भी गवाह बनने वाली है।

पीस हाउस में बैठक का सुझाव

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने ही किम जोंग उन के साथ पीस हाउस में बैठक करने का सुझाव दिया है। पीस हाउस उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर स्थित है। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि उत्तर कोरिया के साथ शिखर बैठक के लिए कई देशों पर विचार किया जा रहा है। लेकिन किसी तीसरे देश की अपेक्षा पीस हाउस/फ्रीडम हाउस ज्यादा महत्वपूर्ण और स्थायी जगह है। तीन से चार हफ्ते में ट्रंप और किम की मुलाकात होने की संभावना है। गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि किम के साथ शिखर वार्ता के लिए पांच जगहों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि वह कई बार यह भी कह चुके हैं कि बातचीत नहीं भी हो सकती है।

दोनों के बीच वार्ता के अहम बिंदु

किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच होने वाली वार्ता का सबसे अहम बिंदु कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाना है। हालांकि इसको लेकर किम के तेवर में अब काफी नरमी आ चुकी है। पिछले दिनों मून से हुई मुलाकात में किम ने कहा था कि अगर अमेरिका कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने का वादा करे और उत्तर कोरिया पर हमला नहीं करने का वचन दे, तो उनका देश परमाणु हथियारों को त्यागने को तैयार है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्‍हें एक बार फिर विचार करना पड़ेगा।

कई लिहाज से खास है बैठक

किम ने ट्रंप को संबोधित करते हुए ये भी कहा है कि हमारे बीच जब बातचीत शुरू हो जाएगी, तब अमेरिकी राष्‍ट्रपति जान जाएंगे कि मैं ऐसा शख्‍स नहीं हूं कि दक्षिण कोरिया या अमेरिका पर परमाणु हथियार से हमला करूंगा। उन्‍होंने इस बात की भी उम्‍मीद जताई है कि यदि दोनों देशों के बीच बैठकों का सिलसिला बढ़ा और आपसी विश्‍वास बहाली हो सकी यह काफी अच्‍छा होगा। हालांकि अभी इन दोनों नेताओं की बैठक का दिन और समय निश्चित नहीं हो पाया है। लेकिन इतना जरूर तय है कि इस बैठक में दक्षिण कोरिया भी मौजूद होगा। यह बैठक इस लिहाज से भी खास होगी क्‍योंकि पहली बार पद पर रहते हुए कोई अमे‍रिकी राष्‍ट्रपति उत्तर कोरिया के प्रमुख से बात करेगा।

छह देशों की बैठक पर लगी निगाह

इस बीच जानकारों की निगाह कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार मुक्‍त बनाने के लिए छह देशों की बैठक पर भी लगी है, जो वर्षों से निलंबित हैं। जानकारों की दिलचस्‍पी इस बात को लेकर है कि इस बाबत छह देशों की वार्ता दोबारा शुरू होगी या नहीं। इन छह देशों में उत्तर और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, रूस और अमेरिका शामिल हैं। यॉनहॉप एजेंसी की मानें तो जानकार इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि कोरिया प्रायद्वीप को लेकर इन देशों की बैठकों का दौर दोबारा शुरू हो सकता है। जानकारों के मुताबिक इसको लेकर उत्तर कोरिया भी शायद पीछे न हटे और ऐसा करने पर अपनी सहमति व्‍यक्त करे। इस बारे में जापान की मीडिया ने यहां तक कहा है कि पिछले दिनों किम ने जो बीजिंग की यात्रा कर शी चिनफिंग के समक्ष अपनी बात रखी है उसके बाद इस सिक्‍स नेशन टॉक को लेकर सहमति बनी है।

उत्तर कोरिया खफा हो जाए

हालांकि जानकारों का एक मत यह भी है कि मुमकिन है कि जापान की मौजूदगी से उत्तर कोरिया खफा हो जाए। इसकी वजह ये है कि जापान काफी समय से अपने अगवा किए नागरिकों की वापसी की मांग उत्तर कोरिया से करता रहा है। वहीं इसको लेकर उत्तर कोरिया साफ इंकार कर रहा है। आपको बता दें कि छह देशों की यह वार्ता सबसे पहले 2003 में हुई थी। 2005 में वार्ता के बाद एक अहम समझौता भी हुआ था जिसमें उत्तर कोरिया को सुरक्षा की गारंटी तक दी गई थी। लेकिन वर्ष 2009 में उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु परिक्षण किए जाने के चलते इसको निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से इस मुद्दे को लेकर इन देशों के बीच कोई वार्ता नहीं हुई।

दोनों के बीच विवादित बोल

इसके अलावा यह बैठक इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच बदजुबानी का लंबा सिलसिला चला है। एक ओर जहां ट्रंप ने किम को रॉकेट मैन कहा वहीं किम ने ट्रंप को बूढ़ा तक कह डाला था। आइए जानते हैं दोनों नेताओं ने कब-कब और क्‍या-क्‍या कहा।

– नवंबर 2017 में ट्रंप को उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने ‘बूढ़ा पागल’ बताया था। इस पर ट्रंप ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और लिखा था, ‘भला किम जोग-उन मुझे बूढ़ा बुला कर मेरा अपमान क्यों करेंगे, जब मैं उन्हें कभी नाटा और मोटा नहीं कहूंगा।’

– इसी तरह सितंबर 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने किम जोंग उन को रॉकेट मैन कहा था और उनके देश को नेस्तनाबूद करने की धमकी दी थी।

– इसके जवाब में किम जोंग उन की तरफ से जिस तरह का बयान आया, अमेरिका और ट्रंप ने कल्पना भी नहीं की होगी। उत्तर कोरिया ने कहा था, ‘डरे हुए कुत्ते ज्यादा भौंकते हैं। ट्रंप आग से खेलने के शौकीन एक दुष्ट व्‍यक्ति हैं।’

– जनवरी के पहले हफ्ते में भी पूरी दुनिया इन दोनों नेताओं के अजीब-गरीब बयानों की गवाह बनी थीं। दरअसल, किम जोंग उन ने नए साल के मौके पर अपने संबोधन में अमेरिका को तबाह करने की धमकी दी थी और कहा था कि परमाणु बम का बटन हर वक्त उनकी टेबल पर होता है।

– इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘कोई किम जोंग उन को बताए कि मेरे पास भी न्यूक्लियर बटन है, जो उसके बटन से बहुत बड़ा और ताकतवर है। मेरा बटन काम करता है।’

– 23 फरवरी 2018 को डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए दबाव बढ़ाने को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कदम उठाया है।

– 30 जनवरी को अमेरिका में सीआईए के निदेशक माइक पोंपियो ने आशंका जताई थी कि उत्तर कोरिया के पास ऐसी परमाणु मिसाइल हैं, जिससे वह कुछ महीनों के भीतर अमेरिका पर हमला कर सकता है।

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कई देशों केेेे बाद अब भारत में भी मासूमों से दुष्कर्म की सजा मौत

नाबालिग बच्चियों से दुष्‍कर्म के मामलों पर कठोर निर्णय लेते हुए पॉकसो एक्‍ट में बदलाव पर मोदी सरकार ने मुहर लगा दी है। इसके लिए पीएम आवास पर चली ढाई घंटे की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया कि दुष्‍कर्म के दोषियों को फांसी देने के लिए अध्यादेश लाया जाएगा।

इस बैठक में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्‍कर्म के मामलों में दोषियों को मौत की सजा दिए जाने का रास्ता साफ हो गया। इसके अलावा इस बैठक में यह निर्णय भी लिया गया है कि ऐसे मामलों में जांच तेजी से पूरी की जाएगी। आपको बता दें कि दुष्‍कर्म की हालिया घटना के बाद देश में काफी गुस्‍सा व्‍याप्‍त है। देश की जनता बार-बार इस तरह के मामलों में कठोर से कठोर सजा दिए जाने की मांग भी लगातार करती रही है। इसी जनभावना का सम्‍मान करते हुए केंद्र ने यह फैसला लिया है।

पॉक्सो के मौजूदा प्रावधान

पॉक्सो के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, दुष्कर्म के दोषियों के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है और न्यूनतम सात साल की जेल है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का यौन व्यवहार इस कानून के दायरे में आता है। इसके तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है। यह कानून लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है। गौरतलब है कि देश के कुछ राज्‍य जिनमें राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश, हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश शामिल हैं, में केबिनेट ने 12 वर्ष से कम उम्र की बच्‍ची के साथ दुष्‍कर्म के मामलों में फांसी की सजा पर मुहर लगा दी है। हालांकि इन्‍हें अभी राष्‍ट्रपति से मंजूरी मिलना बाकी है, लेकिन इससे यह बात साफ हो गई है कि राज्‍य इसको लेकर काफी सख्‍त रुख अपना चुके हैं।

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भारत बंद की सफलता का श्रेय लेने उतरी कांग्रेस, बोले “सबसे पहले उठाई आवाज”

दलित उत्पीड़न कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ लड़ाई का श्रेय कांग्रेस खुद लेने की कोशिश में जुट गई है। कांग्रेस ने भारत बंद को पूरी तरह सफल बताते हुए दावा किया कि सबसे पहले उसी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था।

राजनीतिक मोर्चाबंदी करते हुए कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लेकर बंद के दौरान हुई हिंसा के लिए पूरी तरह से केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभालने आए राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद के पास अधिकार है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद कर दे। 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट पर जो फैसला दिया था उसे संसद में रद किया जा सकता था। सरकार कदम बढ़ाती को सभी दल साथ होते, लेकिन चुप्पी छाई रही। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तत्काल बाद सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कर देती तो सोमवार को बंद के दौरान हिंसा नहीं होती।

अब तक कांग्रेस पुनर्विचार याचिका की बात कहती रही थी। अब सरकार ने पुनर्विचार याचिका पेश कर दी है तो कांग्रेस ने संसद के जरिये इसे रद करने का दबाव बढ़ाया है। मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुसार, सिर्फ पुनर्विचार याचिका से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है क्योंकि इसकी सुनवाई समान बेंच में होती है। इसके लिए सरकार को क्यूरेटिव याचिका दाखिल करनी चाहिए या फिर संसद बजट सत्र के बचे हुए चार दिनों में विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरस्त करना चाहिए।

इसके साथ ही कांग्रेस ने देश में दलित उत्पीड़न कानून लागू करने और उसे और मजबूत करने का श्रेय भी लेने की कोशिश की। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि दलित उत्पीड़न कानून राजीव गांधी के कार्यकाल में लाया गया था और 2014 में संप्रग सरकार ने संशोधन का अध्यादेश लाकर इसे और कड़ा कर दिया था। मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस कानून के दुरुपयोग के सवाल को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि दुरुपयोग तो किसी भी कानून हो सकता है, लेकिन इसका उपाय उस कानून को खत्म करना नहीं होता। उनके अनुसार दलित उत्पीड़न कानून के दुरुपयोग के मामले 2-3 फीसद से अधिक नहीं हैं।

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ट्राई ने दी अनुमति: हवाई यात्रा के दौरान यात्रियों को मिलेगी इंटरनेट की सुविधा

हवाई जहाज में यात्रा के दौरान इंटरनेट की सुविधा न मिलने से अक्सर लोग परेशान रहते थे लेकिन अब परेशानी खत्म होने वाली है. दरअसल ट्राई इस पक्ष में है कि हवाई यात्रा के दौरान इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध हो.

ट्राई, हवाई यात्रा के दौरान विमान में इंटरनेट सेवा की अनुमति देने को लेकर काफी समय से विचार कर रहा था ताकि इस विषय पर नियम तय किए जा सकें. लेकिन अब ट्राई ने हवाई सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों की सिफारिशों को मान लिया है.

अब आप यात्रा के दौरान विमान में इंटरनेट इस्तेमाल कर सकेंगे. इस दौरान आपका फोन फ्लाईट मोड पर ही रहेगा और आप विमान में लगे वाईफाई की मदद से इंटरनेट की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे.हांलाकि ट्राई ने कहा है कि मोबाईल डाटा के इस्तेमाल को अनुमति नहीं दी जा सकती है. माना जा रहा है कि ट्राई के इस कदम से हवाई यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा.

यात्रा के दौरान वाईफाई के जरिए ऑनलाइन कॉल की सुविधा मुहैया कराई जाएगी वे भी तब जब विमान तीन हजार मीटर की उंचाई पर हो. इसके पीछे ट्राई की दलील है कि यात्रियों को टैक्सी बुक करने के लिए वाईफाई की जरुरत पड़ती है ऐसे में इंटरनेट की सुविधा का होना जरूरी है.

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पद्मावत फैसला: कोर्ट ने कहा पूरे देश में कहीं रोक नहीं, करणी सेना बोली हम तो रोकेंगे

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संजय लीला भंसाली की फिल्म फिल्म ‘पद्मावत’ को 25 जनवरी को पूरे देश में रिलीज़ किये जाने का रास्ता साफ़ हो गया है। कोर्ट ने राजस्थान और गुजरात सरकार के उस आदेश और नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है जिसके तहत पद्मावत को इन राज्यों ने अपने यहां रिलीज़ करने पर रोक लगाई थी। इस बीच शुरू से ही इस फिल्म का विरोध कर रही करणी सेना ने कहा है कि उनका विरोध जारी रहेगा और वो फिल्म को रिलीज़ नहीं होने देंगे।

सुप्रीम कोर्ट में आज तीन सदस्यीय बेंच ने,(न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड) जिसके प्रमुख मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिसरा थे, ये कहा कि अपने यहां कानून और व्यवस्था को बनाये रखना राज्यों का कर्तव्य है। सिर्फ राजस्थान और गुजरात ही नहीं बल्कि उन सभी राज्यों ने जिन्होंने पद्मावत की रिलीज़ को रोके जाने संबंधी आदेश दिया है, उसे खारिज़ किया जाता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह से फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने के तरीके ने उन्हें स्तब्ध कर दिया है। इस दौरान वायकॉम 18 की तरफ़ से कोर्ट में मौजूद वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी ने बेंच को बताया कि जब सेंसर ने इस फिल्म को रिलीज़ के लिए पास कर दिया है तो राज्यों के पास उसे रोकने के कोई अधिकार नहीं हैं। साल्वे ने 2011 के प्रकाश झा के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट का उदहारण देते हुए कहा कि कानून और व्यवस्था बनाये रखना राज्यों का संवैधानिक कर्तव्य है।

बता दें कि फिल्म के निर्माता ने गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा सरकार की तरफ़ से अपने यहां फिल्म को रिलीज़ न होने देने के ख़िलाफ़ अदालत में याचिका दाखिल की थी। इन राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि सिर्फ दो राज्यों(गुजरात और राजस्थान) ने ही इस तरह के आदेश जारी किये हैं । उन्होंने सुनवाई को आगे बढ़ाने की भी गुजारिश की और कहा कि इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों में पद्मावत रिलीज़ होने की स्थिति में लॉ एंड ऑर्डर की बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिसके बारे में संभवतः सेंसर बोर्ड ने सर्टिफिकेट देते समय संज्ञान में नहीं लिया । फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन का मतलब चीजों को तोड़ मरोड़ कर पेश किये जाने से नहीं हो सकता। सेंसर, सुपर सेंसर बोर्ड नहीं बन सकता। इस बीच राजपूत करणी सेना ने अदालत के फैसले के बाद भी अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया है। राजपूत करणी सेना के प्रमुख लोकेन्द्र सिंह कलवी ने कहा है कि किसी भी हालत में पद्मावत को रिलीज़ नहीं होने दिया जाएगा। राजस्थान में सिनेमाहाल मालिको ने लेटर के जरिये भरोसा दिलाया है कि वो इस बारे में करणी सेना से पूछेंगे। राजस्थान में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार इस मामले को लेकर विचार विमर्श कर रही है। उधर राष्ट्रीय करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेडी ने इस मामले में राष्ट्रपति से गुहार लगाने की बात कही है।

24 जनवरी को भी दिखाई जायेगी

पद्मावत संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत 25 जनवरी को देश भर में रिलीज़ होगी लेकिन ये फिल्म कुछ लोग 24 जनवरी को भी देख सकते हैं। फिल्म की निर्माता कंपनी ने 24 जनवरी को पेड-प्रीव्यू रखने का फ़ैसला किया है। आमतौर पर बड़ी फिल्मों के पेड-प्रीव्यू किये जाते हैं। 25 जनवरी को अक्षय कुमार की पैड मैन भी रिलीज़ हो रही है, यानि बॉक्स ऑफ़िस पर बड़ा मुकाबला होने वाला है।

सशर्त पास है पद्मावत

सेंसर बोर्ड ने दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर स्टारर इस फिल्म को 30 दिसंबर को यू/ए सर्टिफिकेट के साथ पास कर दिया था, लेकिन साथ में पांच शर्ते भी थीं, जिसमें फिल्म का नाम बदल कर पद्मावती से पद्मावत करना और डिस्क्लेमर लगाना शामिल था। दरअसल पद्मावती का विरोध, चित्तौड़ की महारानी रानी पद्मिनी के गलत चरित्र चित्रण को लेकर शुरू हुआ था और उसके बाद पूरे देश में फिल्म के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए।

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अमेरिका के H-1B वीजा पॉलिसी में बदलाव के प्रपोजल से 75 हजार भारतीयों की नौकरी खतरे में

ट्रम्प एडमिस्ट्रेशन के H-1B वीजा पॉलिसी में बदलाव के प्रपोजल से अमेरिका में 75 हजार भारतीयों की नौकरी खतरे में आ सकती है। सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की संस्था नैस्कॉम ने इसे लेकर चिंता जताई है। आने वाले दिनों में उसकी प्रस्तावित बदलावों पर एडमिस्ट्रेशन से बातचीत हो सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकन युवाओं को प्रियॉरटी देने के लिए अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन ‘बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ की पॉलिसी पर काम कर रहा है।

नैस्कॉम ने प्रपोजल पर जताई चिंता

– इसे लेकर अमेरिकी सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की संस्था नैस्कॉम ने वीजा नियमों में बदलाव और नए नियमों को लेकर अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन के सामने चिंता जताई है। आने वाले दिनों प्रस्तावित बदलावों पर बातचीत हो सकती है।
– दरअसल, अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन ने यह कदम अपने ‘Protect and Grow American Jobs बिल के तहत उठाया है। इस बिल में H-1B वीजा के मिस यूज रोकने के लिए बदलाव प्रस्तावित हैं। इसके तहत, न्यूनतम सेलरी और टेलंट के मूवमेंट को लेकर पाबंदियां लगाए जाने की बात कही गई है।

क्यों बदलने पड़ रहे हैं H-1B वीजा पर नियम?

– अमेरिका में बढ़ती बेरोजगारी पर लगाम लगाने के लिए H-1B के रूल्स को सख्त बनाने की बात कही गई है। प्रेसिडेंट इलेक्शन में भी डोनॉल्ड ट्रंप ने यह मुददा उठाया था। उन्होंने अमेरिकी युवाओं को नौकरी में प्राथमिकता देने की बात कही थी। इसके बाद ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ‘बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ पॉलिसी अपना रहा है।
– माना जाता है कि कई अमेरिकी कंपनियां दूसरे देशों से कम सैलरी पर वर्कर्स को हायर करती हैं। इसमें भारतीय सबसे आगे हैं। इससे अमेरिकी युवाओं को नौकरी मिलने के मौके कम हो जाते हैं। चुनाव के बाद एडमिनिस्ट्रेशन ने एक पॉलिसी मेमोरेंडम जारी किया था। इसमें कहा गया था कि कम्प्‍यूटर प्रोग्रामर्स H-1B वीजा के लिए एलिजिबल नहीं होंगे।

भारतीयों पर क्यों असर पड़ेगा?

– अमेरिका में सबसे ज्यादा H-1B वीजा भारतीयों के पास हैं। अप्रैल, 2017 में इससे जुड़ा आंकड़ा जारी किया गया था। यूएस सिटिजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विस (USCIS) की रिपोर्ट में कहा गया था कि 2007 से जून 2017 तक USCIS को 34 लाख H-1B वीजा एप्लीकेशन मिलीं। इनमें भारत से 21 लाख एप्लीकेशन थीं।
– इसी दौरान अमेरिका ने 26 लाख लोगों को को H-1B वीजा दिया। हालांकि, रिपोर्ट में ये साफ नहीं हो पाया कि अमेरिका ने किस देश के कितने लोगों को वीजा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, H-1B वीजा पाने वालों में 23 लाख की उम्र 25 से 34 साल के बीच है। इनमें 20 लाख आईटी सेक्टर की नौकरियों से जुड़े हुए हैं।

– दूसरी ओर, अप्रैल 2017 में USCIS ने 1 लाख 99 हजार H-1B पिटीशन रिसीव कीं। अमेरिका ने 2015 में 1 लाख 72 हजार 748 वीजा जारी किए, यानी 103% ज्यादा।

भारतीयों का H-1B एक्सटेंड नहीं होगा

– डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटी (डीएचएस) का ये प्रपोजल उन विदेशी वर्कर्स को अपना H-1B वीजा रखने से रोक सकता है जिनके ग्रीन कार्ड एप्लीकेशन अटके हुए हैं। इसमें बड़ी संख्या भारतीय पेशेवरों की है।
– ट्रम्प सरकार के फैसले से अमेरिका में हजारों भारतीयों का H-1B एक्सटेंड नहीं होगा क्योंकि वहां स्थायी निवास की इजाजत के लिए उनके ग्रीन कार्ड एप्लीकेशन फिलहाल अटके हुए हैं। इस नियम के लागू होने पर करीब 75 हजार नौकरीपेशा लोगों पर असर पड़ेगा। भारत के अलावा दूसरों देशों के युवाओं को भी अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है।

क्या है H-1B वीजा?

– H-1B वीजा एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी थ्योरिटिकल या टेक्निकल एक्सपर्ट्स को अपने यहां रख सकती हैं। इस वीजा के तहत आईटी कंपनियां हर साल हजारों इम्प्लॉइज की भर्ती करती हैं।
– यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) जनरल कैटेगरी में 65 हजार फॉरेन इम्प्लॉइज और हायर एजुकेशन (मास्टर्स डिग्री या उससे ज्यादा) के लिए 20 हजार स्टूडेंट्स को H-1B वीजा जारी करता है।

बढ़ चुकी है ये वीजा पाने की फीस

– अमेरिका आने वाले लोगों की संख्या कम करने के लिए ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन पहले ही वीजा को पाने की फीस बढ़ा चुका है। जनवरी 2016 में एच-1बी और एल-1 वीजा फीस बढ़ा चुकी है। एच-1बी के लिए यह 2000 डॉलर से बढ़ाकर 6000 डॉलर और एल-1 के लिए 4500 डॉलर किया गया है।

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2G स्पेक्ट्रम घोटाले ने ऐसे बदल दी देश की टेलीकॉम इंडस्ट्री की सूरत

2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में गुरुवार को सीबीआई विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है. इस मामले में फंसे सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है. करीब 6 साल बाद इस मामले में फैसला आया है.

इन 6 सालों के दौरान टेलीकॉम सेक्टर भी काफी बदल चुका है. 2जी स्पेक्ट्रम ने टेलीकॉम सेक्टर को लेकर जहां सरकार को अपनी नीतियां बदलने पर मजबूर किया है वहीं, कॉरपोरेट्स ने भी अपनी रणनीत‍ि में भी बड़ा बदलाव किया है.

बदला स्पेक्ट्रम बेचने का तरीका

2-जी स्पेक्ट्रम से जुड़े इस घोटाले के सामने आने के बाद सरकार ने अपनी नीत‍ियों में बड़ा बदलाव किया और स्पेक्ट्रम बेचने का तरीका बदल दिया. अब स्पेक्ट्रम नीलामी के जरिये बेचे जाते हैं. 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने कई के टेलीकॉम लाइसेंस रद्द कर दिए थे. इसकी वजह से विदेशी टेलीकॉम कंपनियों ने भी भारत में अपना कारोबार शुरू करने से अपने हाथ पीछे खींचना शुरू कर दिया था.

बैंक लोन पर भी पड़ा असर

इस घोटाले का असर बैंकों की तरफ से टेलीकॉम कंपनियों को मिलने वाले लोन पर भी पड़ा. इसी साल की शुरुआत में भारतीय र‍िजर्व  बैंक ने टेलीकॉम सेक्टर को लेकर रेड फ्लैग जारी किया था.

उसने इस दौरान बैंकों से कहा था कि टेलीकॉम सेक्टर को लेकर अपने रुझान की समीक्षा करें. इसके अलावा सरकार ने अंतर-मंत्रालयी समित‍ि का गठन भी किया है, जो टेलीकॉम सेक्टर का दबाव कम करने के लिए उपाय ढूंढ़ने में जुटी हुई है.

मर्जर की ओर बढ़ी कंपनियां

2012 में जब सु्प्रीम कोर्ट ने 18 ऑपरेटर्स का लाइसेंस कैंसल कर दिया गया था. वर्तमान में 11 ऑपरेटर्स देश में मोबाइल सर्विस मुहैया करते हैं. 2012 के बाद  से टेलीकॉम सेक्टर पर जिस तेजी से दबाव बढ़ा है. इसके साथ ही  रिलायंस जियो की एंट्री ने यह दबाव बढ़ा दिया है. इसकी वजह से मर्जर की नई बयार भी  इस सेक्टर में चल पड़ी है.

भारत में रह जाएंगे सिर्फ 5 प्रमुख प्लेयर

अगर प्रस्तावित मर्जर होता है, तो भारत में भी विकसित देशों की तरह ही 5 प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर्स रह जाएंगे. इसमें भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, रिलायंस जियो, बीएसएनएल और एमटीएनएल जैसे प्रमुख प्लेयर हो सकते हैं.

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न्यूयॉर्क धमाके के बाद ट्रंप ने की आव्रजन नीति सख्त करने की वकालत

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क के मेट्रो स्टेशन में हुए धमाके के बाद आव्रजन नीति को सख्त करने की वकालत की है। ट्रंप ने कांग्रेस (संसद) से कहा कि वह अमरीकियों की सुरक्षा के लिए आव्रजन प्रणाली की खामियों को दूर करे।आतंकी संगठन आइएस से प्रेरित बांग्लादेशी मूल के व्यक्ति ने एक दिन पहले मेट्रो स्टेशन में धमाका किया था। इसमें 4 लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने बताया कि बांग्लादेशी मूल का अकायद उल्लाह (27) तारों को खुद से लपेटे हुए था। उसके पास एक पाइप बम और एक बैटरी पैक था। इस डिवाइस में न्यूयॉर्क के पोर्ट अथॉरिटी के पास 2 सबवे प्लेटफार्मो के बीच आंशिक रूप से विस्फोट हो गया था। इस घटना के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। इसमें अकायद समेत 4 लोग घायल हो गए थे।

ट्रंप ने कहा, ‘न्यूयॉर्क में 2 महीने में दूसरी बार लोगों की हत्या का प्रयास किया गया। इस घटना से इसकी तत्काल आवश्यकता आन पड़ी है कि कांग्रेस अमरीकियों की रक्षा के लिए कानूनों में सुधार करे।’ न्यूयॉर्क में धमाका करने वाला अकायद सात साल पहले फेमिली वीजा पर बांग्लादेश से अमेरिका आया था। उन्होंने कहा, ‘संदिग्ध आतंकी विस्तारित पारिवारिक श्रृंख्‍ला आव्रजन पर अमरीका आया।’ ट्रंप ने इस प्रणाली के तहत परिवारों के रिश्तेदारों को अमेरिका आने की अनुमति खत्म करने की मांग की है।

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कट्टर देश रहे सऊदी अरब में अब बदलाव की बयार, 5 बड़े फैसले

 

रूढ़िवादी मुस्लिम देश सऊदी अरब तेजी से सामाजिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है. इस बदलाव की नई फेहरिस्त में वहां सिनेमाघरों पर लगे 3 दशक पुराने प्रतिबंध को हटाना शामिल है. वहां के संस्कृति और सूचना मंत्रालय का कहना है कि विभाग तत्काल प्रभाव से सिनेमाघरों को लाइसेंस जारी करना शुरू कर देगा और अगले साल मार्च तक पहला सिनेमाघर शुरू हो सकता है.

 

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    बदलाव के राजकुमारपिछले कुछ समय में सऊदी अरब के 32 वर्षीय राजकुमार मुहम्मद बिन सलमान ने कई साहसिक फैसले लिए हैं जिसकी दुनियाभर में तारीफ हुई, खासकर महिलाओं की स्थिति में सुधार वास्ते. वह अपने उस वादे पर आगे बढ़ रहे हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका देश अब उदारवादी इस्लाम को अपनाएगा. आइए, जानते हैं कुछ ऐसे ही बड़े बदलाव के बारे में जिसका फायदा यह मुल्क उठाएगा.

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    महिलाओं को गाड़ी चलाने की अनुमतिसऊदी अरब ने इस साल सितंबर में एक आदेश जारी कर महिलाओं को पहली बार ड्राइविंग की अनुमति दी थी. यह आदेश जून, 2018 से लागू होगा. सऊदी अरब दुनिया का एकमात्र ऐसा देश था जहां महिलाओं के गाड़ी चलाने पर प्रतिबंध लगा हुआ था. अब इस बैन के हटते ही यहां की महिलाएं भी सड़क पर गाड़ी चला सकेंगी. हालांकि महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति इतनी आसानी से नहीं मिली. महिलाओं को ड्राइविंग का अधिकार दिलाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष चला. कई महिलाओं को बैन के खिलाफ गाड़ी चलान पर सजा भी दी गई. अब 2018 के मध्य से महिलाओं और पुरुषों के लिए एक जैसे ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाएंगे.

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    स्टेडियम में मैच देखने की इजाजतसऊदी अरब बदल रहा है, इसकी मिसाल इस बात से मिलती है कि वह लगातार अपनी परंपराओं में सुधार ला रहा है. सऊदी अरब ने महिलाओं को स्टेडियम में खेल मुकाबले देखने की अनुमति दी है. हालांकि इसकी शुरुआत भी अगले साल से ही हो सकेगी. इस देश के तीन बड़े शहरों रियाद, जेद्दा और दम्माम में लोग महिलाओं के साथ स्टेडियम में मैच देखने जा सकेंगे. यहां के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सऊदी समाज के आधुनिकीकरण और अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए लगातार सुधार कर रहे हैं, इससे पहले वहां पर सिर्फ पुरुष ही स्टेडियम जा सकते थे.

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    व्हॉट्सएप और स्काइप से हटी पाबंदी सुधारों की दिशा में सऊदी अरब ने सितंबर, 2017 में एक और ऐतिहासिक फैसला लिया. यह फैसला था व्हॉट्सएप और स्काइप जैसी वॉइस और वीडियो कॉल ऐप से पाबंदी हटाने का. वहां के लोगों के लिए इससे पहले वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) के इस्तेमाल पर बैन था, अब वे इसका इस्तेमाल कर सकेंगे. 2011 में चर्चित अरब क्रांति के बाद सरकार के खिलाफ कई प्रदर्शन और व्यापक आंदोलन के बाद सऊदी अरब सरकार ने इंटरनेट पर सेंसर लगा दिया था. जिस कारण करीब चार लाख वेबसाइट लोगों की पहुंच से दूर हो गया था.

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    खेलों में महिला भागीदारीसऊदी अरब सरकार ने 2013 में पहली बार निजी स्कूलों में लड़कियों के लिए खेल में भाग लेने की अनुमति दे दी. वहीं 2012 में इस देश ने पहली बार किसी महिला खिलाड़ी को किसी ओलंपिक में भाग लेने की अनुमति दी. लंदन ओलंपिक में सराह अतर ने महिलाओं की 800 मीटर रेस में भाग लिया था. सराह ने इस्लामी परंपराओं की तरह सिर तक कपड़े ढंक रेस में भाग लिया था. प्रिंसेज रीमा को नई गठित विभाग महिला खेल प्राधिकरण का मुखिया नियुक्त किया गया.

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    स्टॉक बाजार में महिला बॉसइसी साल सऊदी अरब के स्टॉक बाजार को भी महिलाओं की मौजूदगी का एहसास हुआ. फरवरी, 2017 में सऊदी स्टॉक एक्सचेंज तडावुल ने पहली महिला चेयरपर्सन सराह अल सुहैमी के रूप में चुना. तडावुल अपने क्षेत्र का सबसे बड़ा और दुनिया में 26वें नंबर पर है यह स्टॉक बाजार.