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उत्तर प्रदेश में है दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल, 300 रुपये कर्ज लेकर हुआ था शुरू

कम लोग ही ये जानते होंगे कि दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल भारत में है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बना ये स्कूल पूरी दुनिया में मशहूर है और यहां हजारों लोग पढ़ाई करते हैं. आइए जानते हैं दुनिया के सबसे बड़े इस स्कूल के बारे में और जानते हैं यहां क्या खास है…
बता दें कि लखनऊ का सिटी मोंटेसरी स्कूल दुनिया में सबसे बड़ा स्कूल है. यह स्कूल बच्चों की संख्या को लेकर सबसे बड़ा स्कूल है. इस स्कूल में करीब 55 हजार बच्चे पढ़ाई करते हैं.
इस स्कूल में 55 हजार बच्चों के लिए 4500 लोगों को स्टाफ काम करता है. स्कूल के लखनऊ शहर में 18 कैंपस हैं.
यह स्कूल साल 1959 में 5 बच्चों के साथ शुरू हुआ था. उस वक्त यह 300 रुपये की कैपिटल से शुरू किया गया था. आज इस स्कूल का नाम गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज है.
इसकी स्कूल की स्थापना डॉ जगदीश गांधी और डॉ भारती गांधी ने की थी. अब यह स्कूल से आईसीएसई से मान्यता प्राप्त है. इस स्कूल का रिजल्ट भी सर्वश्रेष्ठ रहता है.
वैसे तो लखनऊ के इस स्कूल ने 2005 में ही 29,212 छात्रों के साथ रिकॉर्ड बना लिया था. इससे पहले सबसे बड़े स्कूल का रिकॉर्ड फिलिपीन्स के मनीला स्थित रिजाल हाई स्कूल के नाम था, जिसमें केवल 19,738 छात्र थे.
इस स्कूल में 2,500 टीचर हैं, 3,700 कंप्यूटर और 1,000 क्लासरूम है, जहां हजारों बच्चे शिक्षा लेते हैं. हालांकि किसी भी अन्य निजी स्कूल की तरह यहां भी बच्चों के माता पिता को इन सब सुविधाओं की अच्छी खासी कीमत देनी होती है.
वहीं पढ़ाई के साथ यहां खेलकूद को लेकर भी खास ध्यान दिया जाता है. पहला मॉनटेसरी स्कूल खोलने वाली मारिया कभी शिक्षा को व्यवसाय नहीं मानती है.
स्कूल को यूनेस्को से भी पीस एजुकेशन का अवार्ड मिल चुका है.
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माइनस 60 डिग्री तापमान: टूटा थर्मामीटर, पलकों पर जमी बर्फ

 

  • दुनिया की सबसे ठंडी जगह साइबेरिया जहां इस बार रिकॉर्डतोड़ ठंड पड़ रही है. लगातार लुढ़कते पारे की वजह से थर्मामीटर भी जवाब देकर टूट गया है. और तो और लोगों की पलकों पर बर्फ जम गई है. तापमान माइनस 60 डिग्री के नीचे पहुंच गया है. लगातार लुढ़कते पारे के बीच स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है.

  • माइनस 60 डिग्री तापमान: टूटा थर्मामीटर, पलकों पर जमी बर्फ
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    रूस के साइबेरिया में याकुटिया इलाके का एक छोटा सा गांव- ओम्याकोन है. इस जनवरी के महीने में यहां सब कुछ फ्रीज हो गया है. कई दिनों से सूर्य की रोशनी नसीब नहीं हुई है.

  • माइनस 60 डिग्री तापमान: टूटा थर्मामीटर, पलकों पर जमी बर्फ
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    ओम्योकोन की आबादी करीब 500  है. 13 जनवरी को यहां पर तापमान माइनस 62 डिग्री के नीचे तक गिर गया. इसके साथ ही तापमान मापने के लिए लगाया गया थर्मामीटर भी जवाब दे गया. थर्मामीटर टूट गया. वहीं यहां के निवासियों का दावा है कि पारा माइनस 67 डिग्री तक लुढ़का.

  • माइनस 60 डिग्री तापमान: टूटा थर्मामीटर, पलकों पर जमी बर्फ
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    बता दें कि इससे पहले 1933 में इतना न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया था.

  • माइनस 60 डिग्री तापमान: टूटा थर्मामीटर, पलकों पर जमी बर्फ
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    तापमान गिरने के कारण यहां नल से पानी निकलना बंद हो गया है. गाड़ियों को एक्टिव मोड में रखने के लिए गैराज में हीटर का इंतजाम करना पड़ रहा है. या फिर जरूरत ना होने पर भी उन्हें स्टार्ट रखा जा रहा है. मोबाइल फोन का सिग्नल भी दम तोड़ चुका है.

  • माइनस 60 डिग्री तापमान: टूटा थर्मामीटर, पलकों पर जमी बर्फ
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    फ्रीज करने वाली जिंदगी की वजह से ही इसका नाम ‘पोर्ट सिटी ऑफ कोल्ड’ पड़ गया है.

  • माइनस 60 डिग्री तापमान: टूटा थर्मामीटर, पलकों पर जमी बर्फ
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    यहां का इमरजेंसी विभाग लगातार मौसम पर नजर बनाए हुए है. लेकिन साइबेरिया के मंत्रालय ने आशंका जताई है कि फिलहाल राहत की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही.

    (PHOTO CREDIT: INSTAGRAM- anastasiagav)

 

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नॉर्थ कोरिया से हुई बड़ी गलती, अपने ही शहर पर दागी मिसाइल

लगातार अपनी मिसाइल का परीक्षण कर पूरी दुनिया में हड़कंप मचानवाले उत्तरी कोरिया से एक बुरी ख़बर सामने आ रही है। ख़बरों के मुताबिक, उत्तर कोरिया की एक मिसाइल लांच करने के फौरन बाद ही इसके अपने ही एक शहर के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त हो गयी।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल 28 अप्रैल को ह्वासोंग-12 नाम की यह अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईआरबीएण) के बारे में शुरूआत में यह समझा गया कि वह फटकर बेकार हो गई थी। लेकिन, जो नए तथ्य सामने आ रहे हैं उसके मुताबिक वह मिसाइल उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयोंग से करीब 90 मील दूल टोकचोन शहर के ऊपर जाकर गिरी है। टोकचोन शहर की कुल आबादी करीब दो लाख से ज्यादा है।

डिप्लोमेट मैग्जीन ने अमेरिकी खुफिया सूत्रों और सैटेलाइट तस्वीर के हवाले से बताया है कि ऐसा माना जा रहा है कि इस शहर के ऊपर मिसाइल के आकर फटने से इंडस्ट्रियल और एग्रीकल्चरल बिल्डिंग्स को काफी नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुकचांग हवाईक्षेत्र से इस मिसाइल को छोड़े जाने के बाद ये उत्तर-पूरब की दिशा में 24 मील तक गयी। उसके बाद यह 43 मील से ज्यादा नहीं नहीं जा पायी। अमेरिकी सरकार के सूत्र ने बताया कि इस मिसाइल के छोड़े जाने के बाद पहले ही चरण में इसका इंजन फेल हो गया।

ऐसा माना जा रहा है कि इस मिसाइल के गिरने के बाद उसमें से निकले लिक्विड के चलते बड़ा धमका हुआ है। मिसाइल परीक्षण के बाद गूगल अर्थ की तरफ से ली गई तस्वीर से यह साफ पता चलता है कि जिस जगह पर ये मिसाइल गिरी वह जगह साफ है जहां ऐसा माना जा रहा है कि पहले एक बिल्डिंग थी। इसके साथ ही एक ग्रीन हाउस को भी क्षति पहुंची है।

हालांकि, पब्लिकेशन की तरफ से ये साफ कहा गया है कि नॉर्थ कोरिया के तानाशाह की सीक्रेसी के चलते यह पुष्टि करना संभव नहीं है कि इसके चलते कितनी मौत हुई है। रिपोर्ट में यह कहा गया है कि एक और मिसाइल गलत समय पर फेल हुई है। अगर ये मिसाइल जापान में गलती से गिरी होती तो इसकी प्रतिक्रिया में टोक्यो से हमला तक किया जा सकता था।