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कुमारस्वामी ने आठवीं पास को बनाया कर्नाटक का उच्च शिक्षा मंत्री

59 वर्षीय कुमारस्वामी खुद बीएससी डिग्रीधारक हैं। उन्होंने सवाल किया-‘क्या मुझे वित्त विभाग मिलना चाहिए?’ जीटी देवेगौड़ा ने मैसुरु जिले में चामुंडेश्वरी विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हराया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस नाते वह कोई अहम विभाग की अपेक्षा रखते थे।

इस संबंध में कुमारस्वामी ने कहा– ‘कुछ लोगों की इच्छा खास विभागों में काम करने की होगी, लेकिन सभी विभागों में प्रभावी तरीके से काम करने का मौका है। हमें दक्षतापूर्वक काम करना है।’ उन्होंने कहा-‘क्या काम करने के लिए उच्च शिक्षा और लघु सिंचाई से भी अच्छा विभाग है?’

कर्नाटक में विभागों के बंटवारे से जद एस कोटे के दो मंत्री नाराज बताए जा रहे हैं। उनमें एक हैं, जीटी देवेगौड़ा, जो आठवीं पास हैं और उन्हें उच्च शिक्षा विभाग मिला है।

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उत्तराखण्ड बोर्ड के 12वीं के रिजल्ट घोषित, दिव्यांशी ने किया टॉप

उत्तराखंड बोर्ड ने आज अपने 12वीं के नतीजे की घोषणा कर दी है. छात्र परीक्षा के रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रिजल्ट देख सकते हैं. इस 12वीं की परीक्षा 5 मार्च से 24 मार्च तक चली थी. बता दें, रिजल्ट 11 बजे जारी होनेा था पर रिजल्ट घोषित होने में देरी की गई. देहरादून स्थित शिक्षा निदेशालय में रिजल्ट की घोषणा शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने की.

इस साल 12वीं में ऑवरोल 78.97 प्रतिशत छात्र पास हुए हैं. इस साल 12वीं की परीक्षा में 75.03 प्रतिशत लड़के पास हुए हैं और 82.83 प्रतिशत लड़कियां पास हुई है. 12वीं में इस साल दिव्यांशी राज ने 98.4 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉप किया है.

ऐसे देखें रिजल्ट

– सबसे पहले उत्तराखंड बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.ubse.uk.gov.in और www.uaresults.nic.in. पर जाएं.

–  उत्तराखंड बोर्ड रिजल्ट 2018 कक्षा 12 पर लिंक पर क्लिक करें.

– अपना रोल नंबर और सभी जरूरी जानकारियां भरें.

– रिजल्ट स्क्रीन पर दिखने लगेगा.

– भविष्य के लिए प्रिंटआउट लेना न भूलें.

आपको बता दें,  इस साल 12वीं में 130094 छात्र शामिल हुए थे. पिछले साल 12वीं में 78.89 प्रतिशत छात्र पास हुए थे.

देखें पांच साल का कक्षा 12वीं  उत्तराखंड रिजल्ट

2013- 79.82 प्रतिशत

2014- 70.39 प्रतिशत

2015- 74.54 प्रतिशत

2016-  78.41 प्रतिशत

2017-  78.89 प्रतिशत

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सीबीआइ की गिरफ्त में सीजीएसटी सेंट्रल एक्साइज के कमिश्नर सहित आठ अफसर

सीजीएसटी, सेंट्रल एक्साइज कानपुर में कमिश्नर के पद पर तैनात संसार चंद के साथ आठ लोगों को सीबीआइ ने अपनी गिरफ्त में लिया है। इनके ऊपर घूस लेने का गंभीर आरोप है।

कानपुर रिश्वत मांगने के आरोप में सीजीएसटी कमिश्नर संसार चंद्र समेत छह लोगों को सीबीआइ एंटी करप्शन टीम ने अपनी कस्टडी में लिया है। उन पर तमाम क्लाइंट से मासिक और त्रैमासिक घूस लेने का भी आरोप है। सीबीआइ ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि संसार चंद्र, उनके कुछ अधीक्षक, कुछ निजी लोग मिलकर संगठित रूप कंपनियों पर अवैध तरीके से दबाव बनाकर वसूली कर रहे हैं।
सीबीआइ ने अपनी रिपोर्ट में कानपुर में इंद्रधनुष अपार्टमेंट सर्वोदय नगर में अधीक्षक अजय श्रीवास्तव, इसी अपार्टमेंट वासी अधीक्षक अमन शाह, सर्वोदय नगर स्थित शिवा अपार्टमेंट में निवासी अधीक्षक राजीव सिंह चंदेल, स्वरूप निवासी अमित अवस्थी, दिल्ली में सी-58, असिमा अपार्टमेंट, सेक्टर 9, रोहिणी निवासी अमन जैन, दिल्ली में सी 25 फस्र्ट फ्लोर शिवाजी पार्क, पंजाबी बाग निवासी चंद्र प्रकाश के साथ ही दिल्ली की डिफेंस कालोनी में डी-235 निवासी संसार चंद्र की पत्नी अविनाश कौर को भी आरोपी बनाया है। आरोप में यह भी कहा गया है कि तमाम कंपनियों की तरफ से बड़े-बड़े इलेक्ट्रानिक व अन्य सामान दिल्ली स्थित संसार चंद्र के आवास पर दिए जाते थे। रिपोर्ट में अधीक्षकों पर संसार चंद्र के साथ मिलकर वसूली करने का भी आरोप लगाया गया है। इसमें फिलहाल एक डिटरजेंट कंपनी का नाम भी आया है, जिससे फरवरी से अप्रैल 2018 की त्रैमासिक के लिए 1.5 लाख रुपये लिए जाने के लिए दबाव डाला जा रहा था। कंपनी का निदेशक खराब आर्थिक स्थिति की वजह से यह धन नहीं दे पा रहे थे जिसकी वजह से उन पर लगातार दबाव डाला जा रहा है। इसके साथ ही इस्पात कंपनी, पान मसाला की बड़ी कंपनियों से भी संसार चंद्र के दिल्ली स्थित आवास पर लगातार सामान भेजे जाने की रिपोर्ट सीबीआइ ने की है।
संसार चंद्र कानपुर में गुजैनी स्थित कस्टम कालोनी में रहते हैं। उनको सीबीआइ की टीम ने फैजाबाद से हिरासत में लिया है। अन्य सभी को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। जीएसटी कमिश्नर संसार चंद को घूस मांगने के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। संसारचन्द्र को फैजाबाद के पास से गिरफ्तार किया गया। इसकी आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। सीबीआई ने इस मामले में तीन सुपरिटेंडेंट और एक ऑफिस स्टाफ को भी गिरफ्तार किया है। जीएसटी कमिश्नर संसार चंद को डेढ़ लाख रुपया रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है।1986 बैच के आइआरएस अधिकारी संसार चंद के साथ ही जीएसटी एंड सेंट्रल एक्साइज के सुपरीटेंडेंट अजय श्रीवास्तव, अमन शाह व राजीव चंदेल, इनके ऑफिस स्टॅाफ सौरभ पाण्डेय, एक प्रतिष्ठान के मनीष शर्मा तथा संसार चंद की पत्नी अविनाश कौर को सीबीआई ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
एफआईआर के मुताबिक संसार चंद अपने सुपरिटेंडेंट अजय श्रीवास्तव, अमान शाह और आरएस चंदेल से समय समय पर कई लोगों से आने वाले अवैध धन के बारे में अपडेट लिया करते थे। जांच एजेंसी ने तीन कंपनियों शिशु सॉप एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड, सर पान मसाला और मैसर्स रिमझिम इस्पात लिमिटेड की पहचान की है, जिनसे जीएसटी अधिकारियों ने विभाग से जुड़े मामलों में अवैध वसूली की। सीबीआई ने इस संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 120(बी) और पीसी अधिनियम की धारा 7,11,12 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। सीबीआई की टीमों ने कानपुर में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की है।
अवैध रूप से उगाही करने का एक व्यवस्थित और संगठित गिरोह  
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) से जुड़ा अभी तक का यह अलग मामला है, जिसमें उच्च अधिकारी की गिरफ्तारी भी की गई। जीएसटी अधिकारियों ने विभागीय कार्रवाई को रोकने के लिए कंपनियों से रिश्वत ली थी। रिश्वत का पैसा हवाला के जरिए व्यवस्थित रूप से मासिक या त्रैमासिक किश्त की तरह अधिकारियों को दिया गया था। 1986 बैच के एक आईआरएस अधिकारी संसार चंद वर्तमान में जीएसटी के आयुक्त हैं। आरोप है वह केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, कानपुर में अपने अधिकार क्षेत्र से संबंधित मामलों में अवैध रूप से उगाही करने वाले एक व्यवस्थित और संगठित गिरोह का नेतृत्व कर रहे थे।

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बजट विशेष: जानिए कैसा रहा मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट

अरुण जेटली ने गुरुवार को मौजूदा मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट पेश किया। इस बजट में अगले 14 महीने में देश में होने वाले लोकसभा समेत 14 चुनावों का इफेक्ट नजर आया। मिडिल क्लास के लिए ऐसा कोई एलान नहीं हुआ, जिससे उसे टैक्स में फायदा मिले। लेकिन कांग्रेस के परंपरागत वोटरों को साधने के मकसद से गरीबों-किसानों के लिए कुछ एलान हुए। इनमें आयुष्मान भारत योजना शामिल है। इसके तहत 10 करोड़ परिवारों को हॉस्पिटलाइजेशन पर 5 लाख रुपए सालाना का हेल्थ कवर मिलेगा। इसका फायदा 40 से 50 करोड़ लोगों तक पहुंचेगा। वहीं, किसानों को ध्यान में रखते हुए खरीफ की फसलों पर डेढ़ गुना मिनिमम सपोर्ट प्राइज देने की भी जेटली ने घोषणा की। सरकार इनकम टैक्स में स्टैंडर्ड डिडक्शन से 8,000 करोड़ रुपए तो गंवाएगी, लेकिन हेल्थ और एजुकेशन पर 1% सेस बढ़ाकर 11 हजार करोड़ रुपए वसूल लेगी।

बजट में हमारी चिंताओं पर क्या?

1) इनकम टैक्स स्लैब नहीं बदला

– उम्मीद थी कि सरकार इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव करेगी ताकि मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों को फायदा हो, लेकिन स्लैब को बरकरार रखा गया। इससे देश के 4 करोड़ इंडीविजुअल टैक्स पेयर्स को निराशा हुई।
– 80C के तहत डेढ़ लाख रुपए इन्वेस्ट कर इनकम टैक्स में छूट हासिल करने की लिमिट भी नहीं बढ़ाई गई।

2) 1% सेस बढ़ाया, ताकि सरकार को 11000 करोड़ मिले
– पर्सनल इनकम टैक्स और कॉरपोरेशन टैक्स पर एजुकेशन पर 3% सेस लगता था। इसकी जगह अब हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर की फंडिंग के लिए 4% सेस लगेगा। इससे सरकार को 11 हजार करोड़ रुपए का एडिशनल रेवेन्यू मिलेगा।

3) पेट्रोल-डीजल पर जितनी एक्साइज ड्यूटी घटाई, उतना ही रोड सेस लगाया
– सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपए की बेसिक एक्साइज ड्यूटी कम की और 6 रुपए एडिशनल एक्साइज ड्यूटी खत्म कर दी। 8 रुपए की यह राहत आम आदमी को इसलिए नहीं मिलेगी, क्योंकि सरकार ने 8 रुपए का रोड सेस लगा दिया है।

4) स्टैंडर्ड डिडक्शन
– करीब 12 साल बाद सरकार सैलरीड क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन लाई है। ये डिडक्शन 40 हजार रुपए का होगा। लेकिन, इसे मेडिकल एक्सपेंस पर 15 हजार और ट्रैवलिंग अलाउंस पर 19200 रुपए की रिबेट के बदले लाया गया है यानी जो डिडक्शन पहले 34,200 रुपए का था, अब वह 40,000 रुपए का होगा। कुल फायदा साल में केवल 5,800 रुपए होगा।

14 महीने, 14 चुनाव. इसलिए गरीबों-किसानों-महिलाओं पर फोकस

# कब-कहां चुनाव
– 2018 में कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, नगालैंड, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम में चुनाव होंगे। अप्रैल-मई 2019 में लोकसभा चुनाव होंगे। इसी के साथ आंध्र, तेलंगाना, ओडिशा, अरुणाचल, सिक्किम के चुनाव होंगे। अभी लोकसभा में बीजेपी है, बाकी 13 चुनावी राज्यों में से 7 में वह या एनडीए सत्ता में है।
– इन्हीं 14 चुनावों के मद्देनजर आम बजट में गरीबों-किसानों-महिलाओं से जुड़े एलान किए गए हैं। गरीब और किसान कांग्रेस के परंपरागत वोट माने जाते रहे हैं।

1) दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ कवर स्कीम का दावा
– जेटली ने आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम का एलान किया। इसका फायदा 10 करोड़ गरीब परिवारों को मिलेगा। उन्हें हॉस्पिटलाइजेशन पर सालाना 5 लाख रुपए का कवर मिलेगा।
– बजट के बाद मोदी ने भी दावा किया कि आयुष्मान भारत योजना से 40 से 50 करोड़ लोगों को फायदा मिलेगा और ये दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस योजना है।

3) किसान
– रबी की फसलों की तरह सरकार ने खरीफ की फसलों पर भी किसानों को उत्पादन लागत का डेढ़ गुना ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने का एलान किया।
– सरकार 22,000 ग्रामीण हाटों को ग्रामीण एग्रीकल्चर मार्केट (Gram) में अपग्रेड करेगी। इन Grams को इलेक्ट्रॉनिकली e-NAM (नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) से जोड़ा जाएगा। इससे किसान अपनी उपज सीधे उपभोक्ता को बेच सकेंगे।

4) महिलाओं के लिए 8 करोड़ मुफ्त गैस कनेक्शन

– सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जाने का एलान किया। सौभाग्य योजना के तहत 4 करोड़ इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन दिए जाएंगे। फॉर्मल सेक्टर जॉब्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए EPF में महिलाओं की हिस्सेदारी पहले तीन सालों के लिए घटाकर 8% कर दी गई।

– नेशनल रूरल लिवली हुड मिशन के लिए बजट में 5750 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। महिलाओं के स्व सहायता समूहों के लिए लोन भी 75 हजार करोड़ रुपए तक बढ़ा दिया गया।

5) सीनियर सिटिजन

– बजट में सीनियर सिटिजन को डिपॉजिट पर मिलने वाले इंट्रेस्ट पर छूट 10,000 से बढ़ाकर 50,000 सालाना कर दी गई। वहीं, 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर डिडक्शन की लिमिट भी 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया गया है। गंभीर बीमारियों के केस में डिडक्शन लिमिट 1 लाख कर दी गई।
– प्रधानमंत्री वय वंदना योजना मार्च 2020 तक बढ़ाई जाएगी। इस योजना में लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) सीनियर सिटीजन्स को 8% निश्चित रिटर्न देता है। स्कीम में सीनियर सिटीजन के इन्वेस्टमेंट की लिमिट 7.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 15 लाख कर दी गई है।

– जेटली ने कहा, “सोशियो-इकोनॉमिक कॉस्ट सेंसस के मुताबिक, सरकार हर बुजुर्ग, विधवा, अनाथ बच्चे, वंचितों तक सरकार पहुंचने की कोशिश करेगी। इस साल नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम के तहत 9,975 करोड़ रुपए के बजट का एलान किया गया।”

6) महंगा-सस्ता

महंगा सस्ता
कार कच्चा काजू, निकल
मोटरसाइकिल सोलर टेम्पर्ड ग्लास
सोना-चांदी सोलर पैनल और मॉड्यूल वाले ग्लास
वेजिटेबल, फ्रूट जूस एलएनजी, मेक इन इंडिया वाटर प्यूरीफायर
चश्मे
परफ्यूम, टॉयलेट वाटर्स
सनस्क्रीन, सनटैन, मैनीक्योर, पैडीक्योर प्रिपरेशंस
ओरल डेंटल हाईजीन प्रिपरेशंस, पेस्ट, पाउडर, डेंटल फ्लॉस
प्री शेव, शेविंग, आफ्टर शेव प्रिपरेशंस, सेंटेड स्प्रे, टॉयलेट स्प्रे
ट्रक, बस टायर
सिल्क फैब्रिक, फुटवियर, रंगीन पत्थर, हीरा,
स्मार्ट वॉच, वियरेबल डिवाइस, एलसीडी, एलईडी, फर्नीचर
मैट्रेस, लैंप, रिस्ट वॉच, पॉकेट वॉच, क्लॉक्स
ट्राइ साइकिल, स्कूटर, पैडल कार्स, व्हील्ड टॉयज, डॉल्स कैरिएज, टॉयज
वीडियो गेम्स कंसोल, स्पोर्ट्स और आउटडोर स्पोर्ट्स इक्विपमेंट
सिगरेट और दूसरे लाइटर्स, कैंडल्स, काइट्स
खाने का तेल

7) सफर में सहूलियत

रेलवे:आम बजट में रेलवे को 1.48 लाख करोड़ रुपए दिए गए। लगातार चौथे साल किराए में बढ़ोत्तरी नहीं की गई। सामान की ढुलाई में तेजी लाने का वादा किया गया। सबसे ज्यादा फोकस सेफ्टी और ट्रैक मेंटेनेंस पर किया गया। इसके तहत देश की सभी नैरोगज लाइनों को ब्रॉडगेज में बदला जाएगा। 4267 अनमैन्ड रेलवे क्रॉसिंग को बंद किया जाएगा। ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे फिट किए जाएंगे। प्लेटफॉर्म पर इनकी तादाद बढ़ाई जाएगी। रेलवे का ग्रॉस बजटरी सपोर्ट बढ़कर 3 लाख करोड़ किया गया है।

एयरपोर्ट:जेटली ने कहा, “56 अनसर्व्ड एयरपोर्ट्स और 31 अनसर्व्ड हेलिपैड्स को उड़ान योजना के तहत कनेक्ट किया जाएगा। 16 ऐसे एयरपोर्ट्स पर ऑपरेशंस पहले ही शुरू किए जा चुके हैं। एयरपोर्ट्स की कैपेसिटी को पांच गुना ज्यादा बढ़ाया जाएगा ताकि आने वाले वक्त में एक अरब सालाना उड़ानों को हैंडल किया जा सके। तीन साल में डोमेस्टिक एयर पैसेंजर ट्रैफिक 18% कीदर से बढ़ा है। हमारी एयरलाइंस कंपनियों ने 900 नए एयरक्राफ्ट्स का ऑर्डर दिया है। रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम उड़ान पिछले साल लॉन्च हुई। इसके लिए अनसर्व्ड, अंडरसर्व्ड एयरोपोर्ट्स को कनेक्ट करने की जरूरत है, साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए हवाई सफर मुहैया कराने की जरूरत है। उड़ान योजना से देश के हवाई चप्पल पहनने वाले लोग भी हवाई जहाज में यात्रा कर रहे हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया 124 एयरपोर्ट मैनेज करती है।”

8) राष्ट्रपति-सांसदों की सैलरी बढ़ाई

– अरुण जेटली ने बजट में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और गवर्नर्स की सैलरी बढ़ाए जाने का एलान किया। प्रेसिडेंट को अभी 1.5 लाख सैलरी मिलती है, उन्हें 5 लाख सैलरी दी जाएगी। वाइस प्रेसिडेंट की सैलरी 1.2 लाख से बढ़ाकर 4 लाख की गई। गवर्नर्स को 1.1 लाख की बजाय अब 3.5 लाख सैलरी दी जाएगी।

– सासंदों की सैलरी को लेकर बहस होती रही हैं। अब सांसदों की सैलरी हर 5 साल में रिवाइज्ड की जाएगी। हालांकि, ये रिवीजन महंगाई को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।

9) डिफेंस

– डिफेंस बजट में इस साल महज 7.81 फीसदी बढ़ोतरी की गई। डिफेंस के लिए 2018-19 में 2.95 लाख करोड़ रुपए अलॉट किए गए हैं। डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन को बढ़ाने के इंडस्ट्री के प्रमोशन के लिए सरकार 2 डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाएगी। इसके अलावा इंडस्ट्री फ्रैंडली मिलिट्री प्रोडक्शन पॉलिसी लाई जाएगी। इसमें से 99,947 करोड़ रुपए से नए हथियार, एयरक्राफ्ट्स, वारशिप्स और दूसरे मिलिट्री हार्डवेयर खरीदे जाएंगे।

10) इन्फ्रास्ट्रक्चर

– जेटली ने कहा, “इकोनॉमी के विकास के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर ड्राइवर की तरह है। हम इन्फ्रास्ट्रक्चर का बजट 1 लाख करोड़ से ज्यादा बढ़ाकर 5.97 लाख करोड़ रुपए कर रहे हैं। हमारे देश को जीडीपी ग्रोथ और रेल-रोड-एयर-इनलैंड वाटर के जरिए देश को कनेक्ट करने के लिए करीब 50 लाख करोड़ रुपए के बड़े इन्वेस्टमेंट की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने खुद इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में टारगेट और अचीवमेंट का रिव्यू किया। ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम प्रगति के जरिए पता चला है कि 9.46 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट फास्ट ट्रैक मोड पर शुरू हो चुके हैं। 2018-19 तक 9000 किलोमीटर तक नेशनल हाईवे पूरे हो जाएंगे। भारत माला प्रोजेक्ट के तहत भारत के दूरदराज और पिछड़े इलाकों को जोड़ा जाएगा। इसमें पहले चरण में 5.35 लाख करोड़ की लागत से 35,000 किलोमीटर हाईवे बनाए जाएंगे।”

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भारतीय राजनीति का सबसे बेबाक और बिंदास चेहरा यानी राम मनोहर लोहिया

महज चार साल में भारतीय संसद को अपने मौलिक राजनीतिक विचारों से झकझोर देने का करिश्मा राम मनोहर लोहिया ने कर दिखाया था.

चाहे वो जवाहर लाल नेहरू के प्रतिदिन 25 हज़ार रुपये खर्च करने की बात हो, या फिर इंदिरा गांधी को गूंगी गुड़िया कहने का साहस रहा हो. या फिर ये कहने के हिम्मत कि महिलाओं को सती-सीता नहीं होना चाहिए, द्रौपदी बनना चाहिए.

राम मनोहर लोहिया वो पहले राजनेता रहे जिन्होंने कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान करते हुए कहा था जिंदा कौमें पांच साल तक इंतज़ार नहीं करतीं.

उत्तर भारत में आज भी आप राजनीतिक रुझान रखने वाले किसी युवा से बात करें तो वे इस नारे का जिक्र ज़रूर करेगा- ‘जब जब लोहिया बोलता है, दिल्ली का तख़्ता डोलता है.’

नेहरू का विरोध

जब देश जवाहर लाल नेहरू को अपना सबसे बड़ा नेता मान रहा था, ये लोहिया ही थे जिन्होंने नेहरू को सवालों से घेरना शुरू किया था. नेहरू से उनकी तल्खी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक बार ये भी कहा था कि बीमार देश के बीमार प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

1962 में लोहिया फूलपुर में जवाहर लाल नेहरू के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने चले गए. उस चुनाव में लोहिया की चुनाव प्रचार की टीम का हिस्सा रहे सतीश अग्रवाल याद करते हैं, “लोहिया जी कहते थे मैं पहाड़ से टकराने आया हूं. मैं जानता हूं कि पहाड़ से पार नहीं पा सकता लेकिन उसमें एक दरार भी कर दिया तो चुनाव लड़ना सफल हो जाएगा.”

जवाहर लाल नेहरू- महात्मा गांधीइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

बिहार में समाजवादी राजनीति का अहम चेहरा माने जाने वाले शिवानंद तिवारी को राम मनोहर लोहिया को करीब से देखने का मौका मिला था. 1967 में भोजपुर के शाहपुर विधानसभा सीट से शिवानंद तिवारी के पिता रामानंद तिवारी चुनाव लड़ रहे थे, उनके चुनाव प्रचार में लोहिया गए थे.

शिवानंद तिवारी कहते हैं, “मुझे उनके साथ चार सभाओं में जाने का मौका मिला था. वे एक भविष्यवक्ता के भांति बोल रहे थे. उन्होंने लोगों से कहा था कि आप ये सोचकर वोट दीजिए कि आप जिसे चुन रहे हैं वो मंत्री बनने वाला है या वो मंत्री बनाने वाला है.”

लोहिया की राजनीतिक विरासत

शिवानंद तिवारी के मुताबिक जब 1967 में जब हर तरफ कांग्रेस का जलवा था, तब राम मनोहर लोहिया इकलौते ऐसे शख़्स थे जिन्होंने कहा था कि कांग्रेस के दिन जाने वाले हैं और नए लोगों का जमाना आ रहा है. नौ राज्यों में कांग्रेस हार गई थी.

राम मनोहर लोहिया
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Image captionजर्मनी में डॉक्टरेट की पढ़ाई करने के दौरान लोहिया की तस्वीर

लोहिया की मौत के बाद उनकी विरासत और उनके नाम की राजनीति ख़ूब देखने को मिली. कम से कम उत्तर प्रदेश और बिहार में. मुलायम सिंह यादव तो अपनी पार्टी को लोहिया की विरासत को मानने वाली पार्टी के तौर पर देखते रहे हैं.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कहते हैं, “लोहिया जी हमारे पार्टी के सबसे बड़े आदर्श हैं. 1967 में पहली बार उन्होंने ही नेताजी को टिकट दिया था. जसवंत नगर विधानसभा सीट से. लोहिया समाज में गरीब गुरबों की आवाज़ उठाना चाहते थे, वे पिछड़ों को सत्ता में भागीदारी देना चाहते थे. उनका सपना था सौ में पावें पिछड़े साठ.”

मुलायम की राजनीतिक क्षमता को सबसे पहले लोहिया जी ने ही देखा था. मुलायम सिंह यादव ने जल्दी ही प्रकाशित होने वाली अपनी राजनीतिक जीवनी द सोशलिस्ट में याद किया है, “1963 में फर्रूख़ाबाद सीट से उपलोकसभा चुनाव में मैं अपने साथियों के साथ उनके प्रचार में जुटा था. विधुना विधानसभा में उन्होंने मुझसे पूछा था कि प्रचार के दौरान क्या खाते हो, कहां रहते हो. मैं ने कहा कि लैइया चना रखते हैं, लोग भी खिला देते हैं और जहां रात होती है उसी गांव में सो जाते हैं. उन्होंने मेरे कुर्ते की जेब में सौ रूपये का नोट रख दिया था.”

राम मनोहर लोहिया के साथ मुलायम की तस्वीरइमेज कॉपीरइटALAMY

हालांकि मुलायम को बाद में शिवानंद तिवारी से बहुत ज्यादा मिलने जुलने का मौका नहीं मिला, लेकिन परिवारवाद के पहलू को छोड़कर लोहिया के राजनीतिक विरासत पर मुलायम लगातार अपना दावा जताते रहे.

समाजवादी राजनीति को शिवानंद तिवारी लंबे समय से देख रहे हैं. लोहिया की राजनीति के असली वारिस की बात होने पर शिवानंद तिवारी कहते हैं, “लोहिया जिस तरह की राजनीति की बात करते थे, उसके ठीक ठीक अपनाने वाले तो केवल किशन पटनायक ही हो पाए. हालांकि उनको वो सम्मान नहीं मिला. बिहार की राजनीति में लोहिया को जिन्होंने काफी हद तक अपने जीवन में उतारा वो लालू ही रहे हैं.”

हिंदी के हिमायती रहे लोहिया

शिवानंद तिवारी आगे कहते हैं, “अगर आप 1990 से 1995 के बीच के लालू के भाषणों को देखें तो उनमें लोहिया की झलक मिलती थी. हालांकि बाद में उनके क़दम डगमगाए और उनमें उतना बड़ा विजन भी विकसित नहीं हो पाया. लालू लोहिया के जितने करीब पहुंच सकते थे, वहां तक पहुंचने में वो चूक गए.”

चाहे मुलायम हों या फिर लालू या शरद या राम विलास पासवान, इन सब पर लोहिया का असर दिखा ज़रूर लेकिन ये सब उस जातिवादी राजनीति के दायरे से नहीं निकल पाए, जिसका लोहिया आजीवन विरोध करते रहे.

शिवानंद तिवारी के मुताबिक लोहिया होने आसान नहीं हैं क्योंकि लोहिया को देश और दुनिया के राजनीति की जितनी समझ थी, उससे ज्यादा वे भारतीय परंपराओं और भारतीय समाज को जानते बूझते थे, वे लगातार पढ़ने लिखने वाले राजनेता थे.

राम मनोहर लोहियाइमेज कॉपीरइटLOHIA TRUST

ये कम ही लोग जानते होंगे कि लोहिया ने जर्मनी से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की थी. वे अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, मराठी और बांग्ला धड़ल्ले से बोल सकते थे, लेकिन वे हमेशा हिंदी में बोलते थे, ताकि आम लोगों तक उनकी बात ज्यादा से ज्यादा पहुंचे.

लोहिया ने चाहे आम लोगों के हितों की बात की हो, या समाज में महिलाओं की बराबरी देने की बात कही हो, ऐसे लगता है कि वे भारतीय राजनीति के सबसे दूरदर्शी नेताओं में शामिल थे, लेकिन उनके अंदर एक आग हमेशा धधकती रहती थी.

लोहिया की जीवनीकार श्रीमति इंदू केलकर ने लोहिया की रामधारी सिंह दिनकर से एक मुलाकात का जिक्र किया है, वे लिखती हैं, “निधन से एक महीने पहले ही दिनकर लोहिया से मिले थे और कहा था कि क्रोध कम कीजिए, देश आपसे बहुत प्रसन्न है, कहीं ऐसा न हो कि भार जब आपके कंधों पर आए तब आपका अतीत आपकी राह का कांटा बन जाए. लोहिया बोले थे- आपको लगता है तब तक मैं जी पाऊंगा?”

लोहिया का निजी जीवन भी कम दिलचस्प नहीं था. लोहिया अपनी ज़िंदगी में किसी का दख़ल भी बर्दाश्त नहीं करते थे. हालांकि महात्मा गांधी ने उनके निजी जीवन में दख़ल देते हुए उनसे सिगरेट पीना छोड़ देने को कहा था. लोहिया ने बापू को कहा था कि सोच कर बताऊंगा. और तीन महीने के बाद उनसे कहा कि मैंने सिगरेट छोड़ दी.

बिंदास जीवन था लोहिया का

लोहिया जीवन भर रमा मित्रा के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहे. रमा मित्रा दिल्ली के मिरांडा हाउस में प्रोफेसर रहीं. दोनों के एक दूसरे को लिखे पत्रों की किताब भी प्रकाशित हुई. शिवानंद तिवारी बताते हैं, “लोहिया ने अपने संबंध को कोई छिपाकर नहीं रखा था. लोग जानते थे, लेकिन उस दौर में निजता का सम्मान किया जाता था. लोहिया जी ने जीवन भर अपने संबंध को निभाया और रमा जी ने उसे आगे तक निभाया.”

राम मनोहर लोहियाइमेज कॉपीरइटLOHIA TRUST

50-60 के दशक में भारत में आम लोगों की राजनीति करने वाला कोई नेता अपने निजी जीवन में इतना बिंदास हो सकता है, इसकी कल्पना आज भी मुश्किल ही है. लोहिया महिलाओं को समान अधिकार दिए जाने की वकालत करते हुए कहते थे कि देश की सती-सीता की ज़रूरत नहीं बल्कि द्रौपदी की ज़रूरत है जो संघर्ष कर सके, सवाल पूछ सके.

1962 के आम चुनाव में लोहिया का फूलपुर में चुनाव प्रचार में हिस्सा ले चुके सतीश अग्रवाल बताते हैं, “लोहिया किस हद तक बिंदास थे, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक बार तारकेश्वरी सिन्हा ने उनसे कहा कि आप महिलाओं और उनके अधिकारों के बारे में काफ़ी बात करते हैं लेकिन आपने तो शादी नहीं की. लोहिया ने तत्काल जवाब दे दिया- भई तुमने तो मौका ही नहीं दिया.”

हुसेन की पेंटिंग- लोहिया- नेहरू
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राम मनोहर लोहिया ऐसे राजनेता थे जो अमरीका जा कर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन से समाजवाद पर बहस कर सकते थे और मक़बूल फ़िदा हुसेन जैसे कलाकार की कला को भी राह दिखा सकते थे. दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में लोहिया ने ही मक़बूल फ़िदा हुसेन को कहा था, “ये जो तुम बिरला और टाटा के ड्राइंग रूम में लटकने वाली तस्वीरों से घिरे हो, उससे बाहर निकलो. रामायण को पेंट करो.”

अस्पताल की लापरवाही के चलते मौत

लोहिया की मौत भी कम विवादास्पद नहीं रही. उनका प्रोस्टेट ग्लैंड्स बढ़ गया था और इसका ऑपरेशन दिल्ली के सरकारी विलिंग्डन अस्पताल में किया गया था.

उनकी मौत के बारे में वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपनी ऑटो बायोग्राफी बियांड द लाइन्स में भी किया है. इसमें उन्होंने लिखा है, “मैं राम मनोहर लोहिया से अस्पताल में मिलने गया था. उन्होंने मुझसे कहा कुलदीप मैं इन डॉक्टरों के चलते मर रहा हूं.”

कुलदीप आगे लिखते हैं कि लोहिया की बात सच ही निकली क्योंकि डॉक्टरों ने उनकी बीमारी का गलत इलाज कर दिया था. उनकी मौत के बाद सरकार ने दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों के निरीक्षण करवाने हेतु एक समिति नियुक्त की गई थी. आज यही अस्पताल राम मनोहर लोहिया अस्पताल के रूप में जाना जाता है.

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इस समिति की रिपोर्ट का एक हिस्सा 26 जनवरी, 1968 को टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित हुआ था, इसमें समिति ने दावा किया था, “अगर अस्पताल के अधिकारी आवश्यक और अनिवार्य सावधानी से काम लेते तो लोहिया का दुखद निधन नहीं होता.”

शिवानंद तिवारी याद करते हैं कि तब वो बड़ा मुद्दा बना था लेकिन बाद वो बात दबा दी गई. 1977 में केंद्र सरकार में राजनारायण स्वास्थ्य मंत्री बने तो उन्होंने लोहिया की मौत के कारणों की जांच करने के लिए विशेषज्ञों की समिति नियुक्त या, लेकिन अस्पताल में तब सारे कागज़ ग़ायब थे.

पैनी नज़र थी लोहिया की

लोहिया के जीवन और उनके विचारों को संजोने की कोशिश उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के समाजिक कार्यकर्ता नितेश अग्रवाल जैन कर रहे हैं. उन्होंने लोहिया पर करीब 90 मिनट की डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म बनाने का जोख़िम उठाया है.

लोहिया के जीवन पर फ़िल्मइमेज कॉपीरइटNITESH JAIN

वे कहते हैं, “उनके विचारों को पढ़ने के बाद मुझे लगा कि इनकी बात आम लोगों तक पहुंचनी चाहिए. मेरी फ़िल्म एंबैसडर ऑफ सोशलिज्म डॉक्टर राम मनोहर लोहिया लगभग तैयार है. उनके जन्म दिन पर अगले साल रिलीज करेंगे ताकि उनका संदेश देश दुनिया के कोने कोने तक पहुंचे.”

लोहिया की राजनीतिक दृष्टि जितनी पैनी थी, उतनी ही सामाजिक दृष्टिकोण. उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में सुधार की बात हो या फिर गंगा की सफ़ाई का मुद्दा हो या फिर हिंदु मुस्लिम सांप्रदायिकता की बात हो, इन सब मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी थी. वो भी पचास साल पहले.

हालांकि कुछ राजनीतिक विश्लेषक लोहिया पर जनसंघ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हैं हालांकि ये समझना मुश्किल नहीं कि कांग्रेस के विरोध के लिए दूसरे तमाम लोगों को एक साथ लाना पड़ा. अखिलेश यादव कहते हैं, “लोहिया के जमाने में कांग्रेस की जो स्थिति थी वही अब बीजेपी की है. बीजेपी के ख़िलाफ़ हमने भी कांग्रेस को साथ लिया है.”