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सीएम योगी ने खोया आपा, कुशीनगर में दी ‘नौटंकी’ बंद करने की चेतावनी

कुशीनगर में गुरुवार को रेलवे क्रॉसिंग पर स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत की घटना के बाद घायलों को देखने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना आपा खो बैठे। योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘यह एक दुखद घटना है और इस वक्त नारेबाजी बंद कर दें। मैं अभी भी बोल रहा हूं नोट कर लो। यह नौटंकी बंद करो। दुखद घटना है और हम शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।’

कुशीनगर में एक मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर गुरुवार सुबह हुए भीषण हादसे में 13 स्‍कूली बच्‍चों की मौत हो गई। हादसे के बाद घायलों को देखने पहुंचे मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने माना कि ड्राइवर ने कान में ईयरफोन लगा रखा था जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ।

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CM केजरीवाल को मानहानि मामले में लगा जोर का झटका

हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई पर अंतरिम रोक लगाने से बृहस्पतिवार को इंकार कर दिया। हालांकि दूसरी ओर कोर्ट ने दिल्ली सरकार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई के लिये 11 जुलाई की तारीख तय की है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने याचिका दायर निचली अदालत में चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई पर रोक लगाते हुये उसे खारिज करने की मांग की थी। मानहानि की यह शिकायत पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने 2012 में दायर की थी।

जस्टिस एके पाठक ने अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली सरकार व शिकायतकर्ता पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया। उस फैसले के मुताबिक सांसद व विधायकों के मामलों की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी होनी चाहिये।

याचिका पर जिरह करते हुये वरिष्ठ सुधीर नंदराजोग ने कहा कि मानहानि की यह शिकायत दायर करने का पवन खेड़ा को कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उनकी मानहानि नहीं हुई है। इसलिये इस मामले को खारिज किया जाना चाहिये।

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पूर्व राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने शिकायत दायर कर कहा था कि एक टीवी शो के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अक्तूबर 2012 में बिजली की बढ़ी दरों पर बोलते हुये ऐसी बातें कही जिससे तत्कालीन मुख्यमंत्री की बदनामी हुई थी।

पटियाला हाउस अदालत ने इस शिकायत पर अरविंद केजरीवाल को 31 जनवरी 2013 को बतौर आरोपी समन जारी किया गया था। इस शिकायत पर अदालत ने 28 अक्तूबर 2013 को आरोप तय किये थे।

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सांसद की बेटी ने विदेश में नौकरी को ठुकरा चुनी देश सेवा, आर्मी ज्‍वाइन की

पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद डॉ. निशंक की बेटी डॉ. श्रेयशी पोखरियाल ने सेना में बतौर अफसर आर्मी मेडिकल कोर ज्वाइंन किया। वे रुड़की के मिलिट्री हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं देंगी। शनिवार को कमांडेंट और परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में डॉ. श्रेयशी ने विधिवत रूप से सेना ज्वाइंन की।

बेटी के सेना ज्वाइन करने पर डॉ. निशंक ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि अभी तक हमारे परिवार में सेना में कोई नहीं था। अब बेटी ने सेना में जाकर मुझे गर्व महसूस करवाया है। उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक क्षेत्र से हैं और शुरुआत से ही देशभक्ति के गीत और कविताएं लिखते रहे हैं। ऐसे में हमेशा से उनकी ख्वाहिश थी कि उनके परिवार से भी कोई सेना में जाए।

आज उनकी इस इच्छा को बेटी ने पूरा कर दिखाया है। उन्हें इस बात को लेकर अपनी बेटी पर और गर्व है कि उसे मॉरीशस में एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल यूनिवर्सिटी में उप निदेशक का ऑफर मिला था, लेकिन बेटी ने उसे अस्वीकार कर सेना को चुना। डॉ. निशंक बताते हैं कि उनकी बेटी श्रेयशी बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन करीब दो साल पहले उसने सेना में जाने की ठानी।

वे बताते हैं कि लगभग दो साल पहले वे परिवार के साथ केदारनाथ की यात्रा पर गए थे। उसी दौरान श्रेयशी ने काफी कम समय में पैदल यात्रा पूरी कर ली। ऐसे में उन्होंने श्रेयशी को कहा कि वे बेहद कर्मठ है और सेना को ऐसे ही कर्मठ और जोशीले लोगों की जरुरत है। डॉ. निशंक कहते हैं कि मुझे लगता है कि श्रेयशी के मन में यह बात घर कर गई। उसके बाद ही वह कमीशन में बैठी और सफल हो गई। मुझे बेहद खुशी हो रही है कि अब श्रेयशी सेना में अपनी सेवाएं देकर देश सेवा करेगी।
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विपक्ष के बर्हिगमन के बीच विधानसभा में UP-COCA विधेयक पारित

विपक्ष के व्यापक विरोध और सदन से बर्हिगमन के बीच विधानसभा में उत्तर प्रदेश संगठित अपराध निरोधक विधेयक (यूपीकोका)आज एक बार फिर पारित हो गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधेयक पेश करते हुए इसे राज्य की कानून व्यवस्था के लिये जरुरी बताया, जबकि विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक लोकतंत्र विरोधी है और इसका जमकर दुरुपयोग किया जायेगा। विपक्ष का कहना था कि विधेयक में कई खामियां हैं, इसलिये इसे विधानसभा की प्रवर समिति को सौंप दिया जाये। इससे पहले विधानसभा से गत 21 दिसंबर को विधेयक पारित होने के बाद विधान परिषद भेजा गया था।

परिषद ने विधेयक को प्रवर समिति के हवाले कर दिया था। प्रवर समिति से बिना संशोधन के विधेयक परिषद वापस कर दिया गया था। परिषद में विपक्ष का बहुमत होने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। इसलिये सरकार ने आज इसे फिर सदन में पेश किया। विपक्ष के व्यापक विरोध के बीच यूपीकोका विधेयक पारित हो गया।

विधेयक के पारित होने के बाद अब इसे मंजूरी के लिये राज्यपाल रामनाईक के पास भेजा जायेगा। अगर जरूरी हुआ तो राज्यपाल विधेयक को राष्ट्रपति के पास भी संदर्भित कर सकते है। सरकार का दावा है कि यूपीकोका से भूमाफिया, खनन माफिया समेत अन्य संगठित अपराधों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी। सफेदपोशों को बेनकाब करने वाले इस कानून में 28 ऐसे प्रावधान है जो गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) का हिस्सा नही थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपीकोका के जरिये फिरौती के लिये अपहरण,अवैध खनन, अवैध शराब की बिक्री, बाहुबल के बूते ठेकों को हथियाना, वन क्षेत्र में अतिक्रमण और वन संपत्तियों का दोहन,वन्य जीवों का शिकार और बिक्री, फर्जी दवाओं का कारोबार, सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जा, रंगदारी जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लग सकेगा। इसके जरिये संगठित अपराध करने वाले लोगों की मदद करने वालों पर भी नकेल कसी जा सकेगी।

योगी ने कहा कि समाज और राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा पैदा करने वालों के खिलाफ यह कानून प्रभावी होगा। पांच वर्ष में एक से अधिक मामलों में जिसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होंगें, उन्हीं पर यह कानून लागू होगा। यूपीकोका लगाने से पहले पुलिस महानिरीक्षक या उपमहानिरीक्षक से अनुमोदन लेना जरुरी होगा। इसमें अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने से पहले भी इन्हीं अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी।

उन्होंने कहा कि इस कानून का दुरुपयोग रोकने के लिये उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय अपील प्राधिकरण बनाया जायेगा। इसमें प्रमुख सचिव और पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी सदस्य होगा। इसके लिये प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय निगरानी समिति का भी गठन किया जायेगा। ऐसी ही समिति जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित होगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि इस कानून का कोई दुरुपयोग नहीं कर सकता। हाँ, समाज की व्यवस्था और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये एक साल में किये गये कार्यों का सिलसिलेवार ब्याैरा दिया।

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कभी न चलने वाली सरकारी बंदूकें उगल रही हैं गोलियां, अब तक 1350

यूपी में पिछले 11 महीनों की योगी सरकार में करीब 1350 एनकाउंटर किए हैं. यानी हर महीने सौ से भी ज्यादा एनकाउंटर. इस दौरान 3091 वॉन्टेड अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं जबकि 43 अपराधियों को मार गिराया गया. यूपी पुलिस का दावा है कि मरने वालों बदमाशों में 50 फीसदी इनामी अपराधी थे, जिन्हें पुलिस शिद्दत से तलाश रही थी.

यूपी पुलिस के इन आंकड़ों ने अपराधियों में इस कदर खौफ भर दिया कि पुलिस एक्शन के डर से पिछले 10 महीने में 5409 अपराधियों ने बाकायदा अदालत से अपनी ज़मानत ही रद्द कराई है ताकि ना वो बाहर आएं और ना गोली खाएं. एक तरफ यूपी की सरकारी बंदूकें चलती ही नहीं थी, और अब अचानक वहीं बंदूकें दनादन गोलियां उगल रही हैं.

बदमाशों में एनकाउंटर का खौफ

बीते दिनों शामली के झिंझाना इलाके में एनकाउंटर के डर से हत्यारोपी ने खुद थाने पहुंचकर सरेंडर किया था. हत्यारोपी ने एसपी अजय पाल शर्मा को एक शपथ पत्र दिया है, जिसमें लिखा है कि वह भविष्य में किसी भी अपराध में शामिल नहीं होंगे.

इनामी बदमाश ने थाने में किया सरेंडर

हापुड़ में 15 हजार इनामी एक बदमाश ने थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया. बदमाश की पहचान अंकित के रूप में हुई है. शामली के कैराना में योगी सरकार के एनकाउंटर का असर देखने को मिला, जहां दो सगे भाई ने अपने हाथ में पोस्टर लेकर घूमते नज़र आए. उस पोस्टर पर लिखा था कि वे लोग अब से अपराध नहीं करेंगे.

यूपी में एनकाउंटर का आंकड़ा

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के 11 महीने के कार्यकाल में अब तक प्रदेश में पुलिस और अपराधियों के बीच 1350 एनकाउंटर हो चुके हैं. 3091 अपराधी गिरफ्तार किए जा चुके हैं. वहीं, 43 अपराधियों को पुलिस ने मार गिराया. इस मामले में पश्चिम उत्तर प्रदेश में सबसे आगे रहा.

करीब 800 हिस्ट्रीशीटरों ने लिया शपथ

सीतापुर के एसपी आनंद कुलकर्णी के निर्देश पर हरगांव, सदरपुर और इमिलिया सुल्तानपुर समेत जनपद के लगभग सभी थानों में शपथ दिलाई जा रही है. एसपी आनंद कुलकर्णी ने न्यूज18 हिंदी से बातचीत में बताया कि अब तक जिले के करीब 800 नामी अपराधी और हिस्ट्रीशीटर शपथ लेकर एफिडेविट दे चुके हैं कि वो भविष्य में किसी अपराध में शामिल नहीं रहेंगे. उन्होंने बताया कि उनका मकसद इन बदमाशों को समाज की मुख्यधारा में लाना है.

एनकाउंटर पर सवाल

यूपी पुलिस द्वारा लगातार किए जा रहे एनकाउंटर पर सवाल भी उठने लगे हैं. यूपी राज्‍य मानवाधिकार आयोग ने यूपी पुलिस से चार मुठभेड़ से जुड़ी रिपोर्ट तलब की है. बताया जाता है कि इन मुठभेड़ों में मारे गए लोगों के परिजनों का आरोप है कि यूपी पुलिस ने फर्जी तरीके से एनकाउंटर किए हैं जबकि मारे गए लोगों का कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है.

1982 में हुआ था पहला एनकाउंटर

एनकाउंटर यानी मुठभेड़ शब्द का इस्तेमाल हिंदुस्तान और पाकिस्तान में बीसवीं सदी में शुरू हुआ. एनकाउंटर का सीधा-सीधा मतलब होता है. बदमाशों के साथ पुलिस की मुठभेड़. हिंदुस्तान में पहला एनकाउंटर 11 जनवरी 1982 को मुंबई के वडाला कॉलेज में हुआ था.

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20 साल तक त्रि‍पुरा के CM रहे माणिक सरकार के पास नहीं है अपना घर, अब यहां करेंगे पत्‍नी संग गुजर

एक ओर जहां केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की घोषणा के बाद बिप्लब देब त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 20 साल तक त्रि‍पुरा के CM रहे माणिक सरकार अब इस पद से मुक्‍त हो चुके हैं। ऐसे में अब लोगों के मन में माणिक सरकार के रहने को लेकर सवाल उठ रहे हैं क‍ि आख‍िर अब यह कहां रहेंगे। देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री के रूप में जानें वाले माणिक के पास खुद का घर नहीं हैं। हालांक‍ि इस दौरान बिप्लब देब ने उनके रहने को लेकर एक बड़ा ऐलान क‍िया है।

छवि देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री के तौर पर बनी
जी हां माणिक सरकार ने त्रि‍पुरा में एक दो नहीं बल्‍क‍ि 20 साल तक एक मुख्‍यमंत्री के रूप में ज‍िम्‍मेदारी संभाली। इस दौरान वह राज्‍य की जनता के बीच काफी लोकप्रि‍य रहे। उनकी छवि देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री के तौर पर बनी है। उनके पास कुछ खास संपत्‍त‍ि भी नहीं है। उनकी पत्‍नी भी केंद्रीय कर्मचारी के रूप में सेवानिवृत्त हो चुकी हैं।
माणिक सरकार ने कोई अलग से संपत्‍त‍ि नहीं बनाई
माणिक की पत्नी जमीन जायदाद की मालिक हैं लेक‍िन उनकी भी जमीन न‍िर्माण कार्य के दौरान व‍िवादों में घ‍िर गई है। वहीं मणि‍क सरकार ने अपना पैतृक घर अपनी बहन को देने के साथ ही अपने ल‍िए कोई अलग से संपत्‍त‍ि नहीं बनाई है। वह अपनी सैलरी से स‍िर्फ अपने खर्च भर की रकम रखते थे और बाकी पार्टी को दान कर कर देते थे।

पत्नी संग सीपीएम के दफ्तर में रहेंगे मण‍िक सरकार
मुख्‍यमंत्री के रूप में सरकार का रहन-सहन काफी साधारण रहा है। ऐसे में त्रिपुरा की कमान संभालने जा रहे बिप्लब देब का कहना है क‍ि सरकार को सरकारी आवास में रहने के साथ ही दूसरी सुविधाएं पाने का हक है। विपक्ष के नेता के रूप में उन्‍हें कैबिनेट स्तर की सुविधाएं म‍िलेंगी। इसल‍िए वह अब अपनी पत्‍नी के साथ सीपीएम के दफ्तर में रहेंगे।

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मेघालय में 2 सीट वाली बीजेपी बना रही NDA सरकार, आज CM पद की शपथ लेंगे कोनराड संगमा

पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में आए चुनावी नतीजों के बाद अब सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. मंगलवार को कोनराड संगमा मेघालय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. गौरतलब है कि एनपीपी की अगुवाई में बन रही सरकार में बीजेपी भी हिस्सेदार है. संगमा करीब सुबह 10 बजे शपथ लेंगे. कोनराड के साथ करीब 11 विधायक भी मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले गठबंधन में हिस्सेदार HSPDP की मांग थी कि वे गैर बीजेपी-गैर कांग्रेस सरकार का गठन चाहते हैं.

कोनराड संगमा, मुख्यमंत्री समेत 7 मंत्री NPP के, दोनकुपर रॉय (यूडीपी) के दो मंत्री, बीजेपी की तरफ से ए.एल. हेक मंत्री पद की शपथ लेंगे.

ऐसी है विधानसभा की स्थिति

3 मार्च को आए नतीजों में 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के खाते में 21 , एनपीपी के खाते में 19 और बीजेपी के खाते में दो सीटें आई थीं. वहीं, यूनाईटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के छह विधायक और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के दो विधायक चुने गए थे. एनसीपी और खुन हनीट्रैप नेशनल अवेकिंग मूवमेंट के खाते में एक-एक सीट आई है. इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायक भी चुनाव जीते हैं.

पिछड़ गई कांग्रेस

मेघालय में कांग्रेस को सबसे ज्यादा 21 सीटें मिली हैं, लेकिन वह 60 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए जरूरी आंकड़े जुटाने से 10 सीट पीछे रह गई. कांग्रेस की ओर से पार्टी के बड़े नेता अहमद पटेल, कमलनाथ समेत चार नेता वहां पर सरकार बनाने की संभावना तलाशने गए थे, लेकिन सफल नहीं हो सके.

और बन गई बीजेपी सरकार!

वहीं, दूसरे नंबर पर रही नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के पास 19 विधायक हैं. बीजेपी (2 विधायक), यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (6 विधायक), एचएसपीडीपी (2 विधायक), पीडीएफ (4 विधायक) और 1 निर्दलीय विधायक के साथ आने से इस गठबंधन के पास 34 विधायकों का समर्थन हो गया है.

कोनराड संगमा कौन हैं?

मेघालय में मजबूत नेता के रूप में सामने आए कोनराड संगमा राज्य में आठवीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं. उन्होंने नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के विधायक के रूप में सदन में विपक्ष का नेतृत्व किया. 27 जनवरी 1978 को जन्मे कोनराड संगमा वेस्ट गारो हिल्स जिले के सेलसेल्ला निर्वाचन क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया. इससे पहले कोनराड संगमा 2008 में मेघालय के सबसे युवा वित्त मंत्री बने थे और अभी वह मेघालय की तुरा सीट से लोकसभा सदस्य हैं.

सियासी करियर की शुरुआत

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कोनराड संगमा 1990 दशक के अंतिम दिनों में पिता पीए संगमा के प्रचार प्रबंधक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की. उस समय पीए संगमा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में थे. बता दें कि राकांपा से विवाद के बाद अलग होकर पीए संगमा ने जुलाई 2012 में नेशनल पीपुल्स पार्टी का गठन किया था.

मेघालय विधानसभा में 2009-2013 तक कोनराड संगमा विपक्ष के नेता रहे. वह अभी तुरा सीट से लोकसभा सांसद हैं, जो उनके पिता पीए संगमा के निधन के बाद खाली हुई थी.

मेघालय में बन रही बीजेपी सरकार को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी बीजेपी पर निशाना साधा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि मेघालय में बीजेपी धोखे से सत्ता आ रही है. उन्होंने कहा है कि इसी तरह से बीजेपी गोवा और मणिपुर में भी सत्ता में आई थी. राज्य के विधानसभा चुनावों में केवल दो सीटें पाने वाली बीजेपी सरकार में शामिल होने जा रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट किया, ‘सिर्फ 2 सीटों के साथ ही बीजेपी मेघालय में अपनी सरकार बनाने में कामयाब रही. मणिपुर और गोवा की तरह, मेघालय में भी जनादेश का अपमान हुआ. सत्ता के लालच में बीजेपी बड़े पैमाने पर पैसों का इस्तेमाल करके एक अवसरवादी गठबंधन बनाने में कामयाब रही है.’

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हरिद्वार सीट से लडूंगा आगामी लोस चुनाव : हरीश

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वह एनएच-74 घोटाले की जांच में हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हैं। बशर्ते कि जांच हाईकोर्ट की निगरानी में करानी होगी। रावत ने आगामी आम चुनाव हरिद्वार लोकसभा सीट से लड़ने का दावा किया है। साथ ही दोहराया कि प्रदेश की पांचों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मंगलौर के मोहल्ला किला निवासी पूर्व राज्यमंत्री सैय्यद अली हैदर जैदी के आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। जहां प्रेसवार्ता में हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार कांग्रेस सरकार के कार्यो की जांच कराने के नाम पर अपने गलत कार्यों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की ओर से चलाई गई जनकल्याण योजनाओं को रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में केवल महापौर और चेयरमैन को पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ाया जाएगा। जबकि सभासद के चुनाव में स्थानीय विधायक और चेयरमैन अपने स्तर से मदद करके चुनाव को जीतने का काम करेंगे।

इस अवसर पर कौसर कैरानवी, रजि हेदर, विधायक काजी निजामुददीन, नगर पालिका चेयरमैन इस्लाम चौधरी, नईम, शराफत, परवेज नंबरदार, अशोक कुमार, रईस हैदर, काजिम रजा आदि मौजूद रहे।

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मुख्य सचिव मारपीट केस में पुलिस के पास है ये अहम सबूत, घेरे में केजरीवाल व सिसोदिया

मुख्य सचिव से मारपीट मामले में पुलिस मुख्यमंत्री आवास से बरामद सीसीटीवी फुटेज की फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। हाई प्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस सीसीटीवी फुटेज को देख भी नहीं पाई। घटनास्थल से पुलिस ने चार डीवीआर जब्त किए हैं।

बढ़ सकती हैं ‘आप’ विधायकों की मुश्किलें 

माना जा रहा है कि जांच की रिपोर्ट सोमवार तक आ जाएगी। इसके बाद पुलिस आगे की कार्रवाई शुरू करेगी।मुख्य सचिव मारपीट मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर रिपोर्ट सौंप दी है। माना जा रहा है कि मामले में आरोपी ‘आप’ विधायकों मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

केजरीवाल व सिसोदिया से हो सकती है पूछताछ 

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जांच रिपोर्ट के अनुसार घटनास्थल पर मौजूद विधायकों की लिस्ट तैयार कर पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगी। इस मामले में विधायकों पर कार्रवाई के अलावा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से भी पूछताछ हो सकती है।

‘आप’ विधायकों पर कसने लगा शिकंजा 

अंशु प्रकाश सभी आरोपी विधायकों को नहीं पहचानते थे। शुरुआत में उन्होंने मारपीट करने वाले ‘आप’ विधायक अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जारवाल के बारे में बताया था। बाद में उन्होंने अंबेडकर नगर के विधायक अजय दत्त और लक्ष्मी नगर के विधायक नितिन त्यागी की पहचान की थी। जिसके बाद पुलिस ने अमानतुल्लाह और प्रकाश जारवाल को गिरफ्तार कर अजय और नितिन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था।

अहम है सीसीटीवी कैमरे की फुटेज

वहीं, पुलिस को वारदात के वक्त मुख्यमंत्री आवास पर जनकपुरी के पूर्व विधायक राजेश ऋषि, वजीरपुर के पूर्व विधायक राजेश गुप्ता, किराड़ी के विधायक ऋतुराज गोविंद, कस्तूरबा नगर के पूर्व विधायक मदन लाल, जंगपुरा के पूर्व विधायक प्रवीण कुमार, संगम विहार के विधायक दिनेश मोहनिया और बुराड़ी के पूर्व विधायक संजीव झा के भी मौजूद होने का पता चला है। पुलिस इनपर कार्रवाई से पूर्व पुख्ता सबूत एकत्र कर लेना चाहती है। सलाहकार वीके जैन की अदालत में घटना के बारे में स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस के पास दूसरा सबूत सीसीटीवी कैमरे की फुटेज ही होगी।

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‘थप्‍पड़कांड’ की गूंज, एलजी से मिले केजरीवाल, बोले- बैठक में भाग नहीं ले रहे अधिकारी

दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ हुई मारपीट के मामले में लेफ्टिनेंट गवर्नर अनिल बैजल से मिलने सीएम अरविंद केजरीवाल राजनिवास पहुंचे। यहां दोनों की बैठक लगभग 10 मिनट तक चली। बैठक के बाद सीएम केजरीवाल ने ट्वीट कर बैठक के दौरान हुई बातों का ब्योरा दिया।

बैठक में हिस्सा नहीं ले रहे हैं अधिकारी 

सीएम केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि अधिकारी पिछले 3 दिनों से बैठकों में भाग नहीं ले रहे हैं। दिल्ली में शासन के काम में बाधा आ रही है। एलजी ने आश्वासन दिया है कि अधिकारियों को सामान्य रूप से काम शुरू करने के लिए वे सभी कदम उठाएंगे। मंत्रिपरिषद ने सभी सहयोग का आश्वासन दिया है। हम सभी को दिल्ली की भलाई के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

21 सीसीटीवी कैमरे सीज 

इससे पहले अरविंद केजरीवाल के सलाहकार वीके जैन की गवाही के बाद मुख्य सचिव से मारपीट के मामले में दिल्‍ली पुलिस मुख्‍यमंत्री के आवास पर पहुंची। दिल्‍ली पुलिस ने मुख्‍यमंत्री आवास में लगे 21 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को सीज कर दिया है। पुलिस सीसीटीवी के जरिए उन सबूतों को जुटा रही है कि आखिर इस मारपीट में और कौन-कौन विधायक शामिल थे। इसके अलावा मारपीट के समय मौजूद अरविंद केजरीवाल की भूमिका पर भी उसकी पैनी नजर है।

मारपीट वाले कमरे तक पहुंची पुलिस

मुख्‍यमंत्री आवास में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के साथ-साथ उस कमरे का भी निरीक्षण किया  जहां पर यह घटना घटित हुई थी। वीके जैन के बयान के बाद सीसीटीवी की फुटेज इस मामले की जांच के लिए सबसे अहम सबूत होंगे। दिल्‍ली पुलिस को शक है कि मुख्‍यमंत्री आवास से मीडिया में जो सीसीटीवी फुटेज लीक की गई है, उसमें टाइम के साथ कुछ छेड़छाड़ की गई है।

मुश्किल में दिल्‍ली सरकार 

वीके जैन के अहम बयान के बाद दिल्‍ली सरकार की मुश्किलें बढ़ गई है। मुख्य सचिव से मारपीट के समय मुख्यमंत्री आवास में मौजूद अन्य विधायकों और कर्मचारियों की भी गिरफ्तारी होना तय है। दिल्‍ली पुलिस घटना वाली रात मुख्यमंत्री आवास में मौजूद अन्य विधायकों व ‘आप’ नेताओं के बारे में जानकारी जुटा रही है।

अरविंद केजरीवाल का फंसना तय

इस मामले में मुख्यमंत्री के सलाहकार वीके जैन ने सात लोगों के नाम लिए हैं। जैन ने कोर्ट में साफ कहा कि मुख्य सचिव के साथ ‘आप’ विधायकों ने मारपीट की शुरुआत की थी, लेकिन मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने बचाने की कोई कोशिश नहीं की। दिल्‍ली पुलिस ने शुरू से ही मुख्‍यमंत्री के सलाहकार वीके जैन को ही पूछताछ के केंद्र में रखा। दिल्ली पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं यह घटना मुख्‍यमंत्री के इशारे पर तो नहीं की गई।

मुख्‍यमंत्री ने हस्‍तक्षेप क्‍यों नहीं किया

इस बड़े सवाल का जवाब पुलिस भी खोज रही है कि अगर यह घटना पूर्व नियोजित नहीं थी तो रात में मुख्‍यमंत्री आवास पर मुख्‍य सचिव को बुलाने के क्‍या निहितार्थ हैं। आखिर केजरीवाल के आवास पर इतनी देर रात आप विधायक के रुकने के क्‍या औचित्‍य था। इस मामले में मुख्‍यमंत्री ने हस्‍तक्षेप क्‍यों नहीं किया।

मुख्य सचिव की FIR में क्‍या है

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अमानतुल्लाह खान और एक अन्य विधायक ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने उनके सरकारी आवास में उनसे मारपीट की थी। एफआईआर के मुताबिक, मुख्यमंत्री के सलाहकार वीके जैन ने मुख्य सचिव को सोमवार की रात पौने नौ बजे फोन पर कहा कि सरकार के तीन साल पूरा होने पर कुछ टीवी विज्ञापनों के प्रसारण में हो रही देरी पर बातचीत होगी। इसके लिए रात 12 बजे मुख्यमंत्री आवास पहुंचना है। वहां सीएम व उप मुख्यमंत्री उनसे विचार-विमर्श करेंगे। जैन ने रात नौ बजे और फिर घंटे भर बाद भी फोन किया।

LG ने गृह मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट

उधर, दिल्ली के मुख्य सचिव से मारपीट मामले पर एक रिपोर्ट उपराज्यपाल अनिल बैजल ने गृह मंत्रालय को सौंप दी है। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि उन्हें दिल्ली के उपराज्यपाल से एक रिपोर्ट मिली है। इस पर विचार चल रहा है। दिल्ली पुलिस इस मामले के आपराधिक पहलू को देख रही है, जबकि गृह मंत्रालय इस रिपोर्ट के प्रशासनिक मुद्दों को देख रहा है।