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ममता ने दी गृहमंत्री राजनाथ सिंह को धमकी “NRC बंगाल पर थोपा गया तो गृह युद्ध”

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) के मुद्दे पर गर्म हो रही सियासत के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने एनआरसी बिल की जगह नया बिल लाने पर विचार करने का आश्वासन दिया है। साथ ही कहा है कि एनआरसी से बाहर रह गए लोगों को केंद्र या राज्य सरकार कतई परेशान नहीं करेगी। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एनआरसी का प्रकाशन असम समझौते और केंद्र सरकार, असम सरकार एवं अॉल असम स्टूडेंट यूनियन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता के तहत किया गया है। जिनका नाम इस लिस्ट में नहीं है उन्हें पर्याप्त मौका दिया जाएगा।

इससे पहले ममता बनर्जी ने दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एक कार्यक्रम में एनआरसी के मसले पर केंद्र सरकार को जमकर आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा सिर्फ चुनाव जीतने के लिए यह सरकार लोगों को निशाना नहीं बना सकती। क्या उन्हें इस बात का आभास भी है कि जिनका नाम इस लिस्ट में नहीं होगा वे अपनी पहचान खो देंगे। केंद्र को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि विभाजन से पहले भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश एक ही थे। मार्च 1971 तक जो भी व्यक्ति बांग्लादेश से भारत में आ गया वह भारतीय नागरिक है।

फिर देश का क्या होगा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अगर बंगाली लोग बिहार के लोगों को बंगाल में न रहने दें, दक्षिण भारत के लोग उत्तर भारतीयों से वापस लौटने को कह दें और उत्तर भारतीय लोग दक्षिण भारत के लोगों को अपने वहां नहीं रहने देंगे तो फिर इस देश का क्या होगा। हम सब साथ हैं, हमारा देश एक परिवार की तरह है।’

ये तो आश्चर्य की बात है
ममता बनर्जी ने कहा, ‘मुझे आश्चर्य है कि पूर्व राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद के परिवार के सदस्यों का नाम एनआरसी की लिस्ट में नहीं है। इसमें मैं और क्या-क्या कहूं? बहुत से ऐसे लोग हैं जिनका नाम इस लिस्ट में नहीं है।’ उन्होंने कहा, हम बंगाल में ऐसा नहीं होने देंगे क्योंकि वहां पर हम हैं। आज स्थिति यह है कि इन लोगों के पास मतदान का अधिकार भी नहीं है।

अपने ही देश में रिफ्यूजी हो गए लोग
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ‘आज आसाम में एनआरसी को लेकर जो कुछ हो रहा है। इसमें सिर्फ बंगाली लोग ही नहीं पिस रहे, इसमें अल्पसंख्यक, हिंदू, बिहारी सब लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कल की ही बात है जब 40 लाख से ज्यादा लोगों ने सत्तारूढ़ दल के लिए मतदान किया था और आज अचानक उन्हें अपने ही देश में रिफ्यूजी बना दिया गया है।’

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वाराणसी फ्लाइओवर हादसे में 18 की मौत, 4 अधिकारी सस्पेंड, योगी ने किया दौरा

वाराणसी में मंगलवार शाम को बड़ा हादसा हुआ । कैंट रेलवे स्टेशन के समीप एईएन कॉलोनी के सामने निर्माणाधीन चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर की दो बीम मंगलवार की शाम साढ़े पांच बजे सड़क पर गिर पड़ीं।

बीम के नीचे एक महानगर सेवा की बस सहित एक दर्जन वाहन दब गए। रात नौ बजे तक 18 लोगों के मरने की खबर है। 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बीम के नीचे दबे वाहनोें को गैस कटर से काट कर सेना और एनडीआरएफ के जवानों ने 16 शव और छह घायलों को बाहर निकाल लिया है।

घायलों का बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर सहित शहर के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। हादसे की जानकारी मिलने पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शहर पहुंच गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी देर रात पहुंचे। अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की।

इधर बीच,  हादसे के बाद यहां पहुंचे डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने सेतु निगम के चार अभियंताओं को निलंबित कर दिया है। चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर एचसी तिवारी, प्रोजेक्ट मैनेजर राजेन्द्र सिंह और केआर सुदन व अवर अभियंता लालचंद पर यह कार्रवाई की गई है। वाईके गुप्ता की अध्यक्षता में तकनीकी टीम का गठन किया गया है। यह 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी।

कैंट-लहरतारा मार्ग पर एईएन कॉलोनी के सामने शाम साढ़े पांच बजे के लगभग निर्माणाधीन फ्लाईओवर पर मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान सड़क की दाईं लेन पर पिलर के ऊपर रखी 50-50 फीट लंबी दो बीम तेज धमाके और धूल के गुबार के साथ सड़क पर गिर पड़ीं।

तेज धमाका सुनकर वसुंधरा और एईएन कॉलोनी के लोग अपने घरों से बाहर निकल कर भागे। राहगीरों में भी भगदड़ मच गई। हादसे के लगभग आधा घंटे बाद पुलिस पहुंची और तकरीबन डेढ़ घंटे बाद राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ।

जिन बीम के नीचे वाहन दबे थे, उसे हटाने के लिए एक-एक कर नौ क्रेन आईं लेकिन उठा नहीं सकीं। सभी नौ क्रेन की मदद से बीम को हल्का सा उठाया गया तो दो ऑटो, दो बोलेरो, एक कार और एक अप्पे को बाहर निकाल कर महानगर बस को खींचा गया।

इस दौरान देरी से राहत और बचाव कार्य शुरू होने के कारण भीड़ में मौजूद लोगों ने पुलिस-प्रशासन के विरोध में जमकर नारेबाजी की और अधिकारियों से नोकझोंक हुई। हादसे के बाद इंग्लिशिया लाइन और लहरतारा चौराहे के बीच वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

ये दुर्घटना वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के पास जीटी रोड पर कमलापति त्रिपाठी इंटर कॉलेज के सामने घटित हुई है। मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। पूरे शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है।

अस्पतालों को अलर्ट मोड पर

हादसे में घायलों की अधिक संख्या को देखते हुए अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है। कबीरचौरा अस्पताल में डॉक्टरों और कंपाउंडरों की इमरजेंसी टीम तैनात किया गया है। इसके अलावा अस्पतालों में इमरजेंसी के मद्देनजर अतिरिक्ति ओटी की व्यवस्था की गई है। हादसे के कारण उधर जाने वाले वाहनों का रूट डायवर्ट किया गया है।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के कैंट एरिया में हुए दर्दनाक हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और मदद के लिए दो मंत्रियों को रवाना किया है। घटनास्थल पर बचाव कार्य जारी है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व मंत्री नीलकंठ तिवारी को मदद के लिए भेजा है।

वाराणसी में एक निर्माणाधीन फ्लाईओवर के गिरने से हुए दर्दनाक हादसे पर पीएम मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने लिखा कि मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल जल्द ही ठीक हो जाएं। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों से बात की और मदद करने के निर्देश दिए हैं।

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आज सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे येदियुरप्पा, BJP सबसे बड़ी पार्टी लेकिन बहुमत से 8 सीट दूर

चुनाव के नतीजे आ गए हैं. लेकिन किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है. 104 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. कर्नाटक में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार येदुरप्पा ने आज सुबह साढे दस बजे विधायक दल की बैठक बुलाई है. बैठक के बाद, येदुरप्पा विधायक दल के नेता चुने जाने की जानकारी राज्यपाल को देंगे और सरकार बनाने का आधिकारिक दावा पेश करेंगे.

राज्यपाल के पाले में है गेंद

वहीं, एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस की बैठक भी आज है. जेडीएस कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा कर रही है. बता दें कि कांग्रेस को 78 सीटें मिली है वो दूसरे नंबर की पार्टी बनी है. जबकि जेडीएस को सिर्फ 38 सीटें मिली हैं. अब गेंद राज्यपाल के पाले में है और देखना होगा कि वह सरकार बनाने का न्योता किसे देते हैं.

हम सबसे बड़ी पार्टी, मौका मिले- येदियुरप्पा

बीएस येदियुरप्पा ने कहा है, ‘’हम सबसे बड़ी पार्टी हैं और ऐसे में सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए. बीजेपी 100 प्रतिशत सरकार बनाएगी और विधानसभा में बहमत भी साबित करेगी.’’

पहली प्राथमिकता सरकार का गठन, शर्तों पर फैसला बाद में- सिद्धारमैया

उधर, राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद मीडिया से मुखातिब सिद्धारमैया ने कहा, कांग्रेस ने बिना शर्त जेडीएस को समर्थन दिया है. सिद्धारमैया ने कहा कि गठबंधन की शर्तों पर बाद में फैसला होगा. पहली प्राथमिकता सरकार का गठन है. सिद्धारमैया ने दावा किया कि उनके पास मैजिक नंबर है.  उन्होंने कहा कि दो निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन के साथ है

बता दें कि अगर कांग्रेस और जेडीएस का गठबंधन का दावा चल गया तो जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के सीएम भी बन सकते हैं.

कौन हैं कुमारस्वामी?

कुमारस्वामी साल 2006 से 2007 तक कर्नाटक के सीएम रह चुके हैं. कुमारस्वामी रामानगरम से तीन बार विधायक रह चुके हैं. रामानगरम सीट कुमारस्वामी का गढ़ मानी जाती है. साल 2013 में कुमारस्वामी रामानगरम से 40 हजार वोटों से जीते थे. कुमारस्वामी दो बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं.

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सीएम योगी ने खोया आपा, कुशीनगर में दी ‘नौटंकी’ बंद करने की चेतावनी

कुशीनगर में गुरुवार को रेलवे क्रॉसिंग पर स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत की घटना के बाद घायलों को देखने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना आपा खो बैठे। योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘यह एक दुखद घटना है और इस वक्त नारेबाजी बंद कर दें। मैं अभी भी बोल रहा हूं नोट कर लो। यह नौटंकी बंद करो। दुखद घटना है और हम शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।’

कुशीनगर में एक मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर गुरुवार सुबह हुए भीषण हादसे में 13 स्‍कूली बच्‍चों की मौत हो गई। हादसे के बाद घायलों को देखने पहुंचे मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने माना कि ड्राइवर ने कान में ईयरफोन लगा रखा था जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ।

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CM केजरीवाल को मानहानि मामले में लगा जोर का झटका

हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई पर अंतरिम रोक लगाने से बृहस्पतिवार को इंकार कर दिया। हालांकि दूसरी ओर कोर्ट ने दिल्ली सरकार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई के लिये 11 जुलाई की तारीख तय की है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने याचिका दायर निचली अदालत में चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई पर रोक लगाते हुये उसे खारिज करने की मांग की थी। मानहानि की यह शिकायत पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने 2012 में दायर की थी।

जस्टिस एके पाठक ने अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली सरकार व शिकायतकर्ता पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया। उस फैसले के मुताबिक सांसद व विधायकों के मामलों की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी होनी चाहिये।

याचिका पर जिरह करते हुये वरिष्ठ सुधीर नंदराजोग ने कहा कि मानहानि की यह शिकायत दायर करने का पवन खेड़ा को कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उनकी मानहानि नहीं हुई है। इसलिये इस मामले को खारिज किया जाना चाहिये।

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पूर्व राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने शिकायत दायर कर कहा था कि एक टीवी शो के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अक्तूबर 2012 में बिजली की बढ़ी दरों पर बोलते हुये ऐसी बातें कही जिससे तत्कालीन मुख्यमंत्री की बदनामी हुई थी।

पटियाला हाउस अदालत ने इस शिकायत पर अरविंद केजरीवाल को 31 जनवरी 2013 को बतौर आरोपी समन जारी किया गया था। इस शिकायत पर अदालत ने 28 अक्तूबर 2013 को आरोप तय किये थे।

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सांसद की बेटी ने विदेश में नौकरी को ठुकरा चुनी देश सेवा, आर्मी ज्‍वाइन की

पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद डॉ. निशंक की बेटी डॉ. श्रेयशी पोखरियाल ने सेना में बतौर अफसर आर्मी मेडिकल कोर ज्वाइंन किया। वे रुड़की के मिलिट्री हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं देंगी। शनिवार को कमांडेंट और परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में डॉ. श्रेयशी ने विधिवत रूप से सेना ज्वाइंन की।

बेटी के सेना ज्वाइन करने पर डॉ. निशंक ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि अभी तक हमारे परिवार में सेना में कोई नहीं था। अब बेटी ने सेना में जाकर मुझे गर्व महसूस करवाया है। उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक क्षेत्र से हैं और शुरुआत से ही देशभक्ति के गीत और कविताएं लिखते रहे हैं। ऐसे में हमेशा से उनकी ख्वाहिश थी कि उनके परिवार से भी कोई सेना में जाए।

आज उनकी इस इच्छा को बेटी ने पूरा कर दिखाया है। उन्हें इस बात को लेकर अपनी बेटी पर और गर्व है कि उसे मॉरीशस में एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल यूनिवर्सिटी में उप निदेशक का ऑफर मिला था, लेकिन बेटी ने उसे अस्वीकार कर सेना को चुना। डॉ. निशंक बताते हैं कि उनकी बेटी श्रेयशी बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन करीब दो साल पहले उसने सेना में जाने की ठानी।

वे बताते हैं कि लगभग दो साल पहले वे परिवार के साथ केदारनाथ की यात्रा पर गए थे। उसी दौरान श्रेयशी ने काफी कम समय में पैदल यात्रा पूरी कर ली। ऐसे में उन्होंने श्रेयशी को कहा कि वे बेहद कर्मठ है और सेना को ऐसे ही कर्मठ और जोशीले लोगों की जरुरत है। डॉ. निशंक कहते हैं कि मुझे लगता है कि श्रेयशी के मन में यह बात घर कर गई। उसके बाद ही वह कमीशन में बैठी और सफल हो गई। मुझे बेहद खुशी हो रही है कि अब श्रेयशी सेना में अपनी सेवाएं देकर देश सेवा करेगी।
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विपक्ष के बर्हिगमन के बीच विधानसभा में UP-COCA विधेयक पारित

विपक्ष के व्यापक विरोध और सदन से बर्हिगमन के बीच विधानसभा में उत्तर प्रदेश संगठित अपराध निरोधक विधेयक (यूपीकोका)आज एक बार फिर पारित हो गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधेयक पेश करते हुए इसे राज्य की कानून व्यवस्था के लिये जरुरी बताया, जबकि विपक्ष का कहना था कि यह विधेयक लोकतंत्र विरोधी है और इसका जमकर दुरुपयोग किया जायेगा। विपक्ष का कहना था कि विधेयक में कई खामियां हैं, इसलिये इसे विधानसभा की प्रवर समिति को सौंप दिया जाये। इससे पहले विधानसभा से गत 21 दिसंबर को विधेयक पारित होने के बाद विधान परिषद भेजा गया था।

परिषद ने विधेयक को प्रवर समिति के हवाले कर दिया था। प्रवर समिति से बिना संशोधन के विधेयक परिषद वापस कर दिया गया था। परिषद में विपक्ष का बहुमत होने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। इसलिये सरकार ने आज इसे फिर सदन में पेश किया। विपक्ष के व्यापक विरोध के बीच यूपीकोका विधेयक पारित हो गया।

विधेयक के पारित होने के बाद अब इसे मंजूरी के लिये राज्यपाल रामनाईक के पास भेजा जायेगा। अगर जरूरी हुआ तो राज्यपाल विधेयक को राष्ट्रपति के पास भी संदर्भित कर सकते है। सरकार का दावा है कि यूपीकोका से भूमाफिया, खनन माफिया समेत अन्य संगठित अपराधों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी। सफेदपोशों को बेनकाब करने वाले इस कानून में 28 ऐसे प्रावधान है जो गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) का हिस्सा नही थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपीकोका के जरिये फिरौती के लिये अपहरण,अवैध खनन, अवैध शराब की बिक्री, बाहुबल के बूते ठेकों को हथियाना, वन क्षेत्र में अतिक्रमण और वन संपत्तियों का दोहन,वन्य जीवों का शिकार और बिक्री, फर्जी दवाओं का कारोबार, सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जा, रंगदारी जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लग सकेगा। इसके जरिये संगठित अपराध करने वाले लोगों की मदद करने वालों पर भी नकेल कसी जा सकेगी।

योगी ने कहा कि समाज और राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा पैदा करने वालों के खिलाफ यह कानून प्रभावी होगा। पांच वर्ष में एक से अधिक मामलों में जिसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होंगें, उन्हीं पर यह कानून लागू होगा। यूपीकोका लगाने से पहले पुलिस महानिरीक्षक या उपमहानिरीक्षक से अनुमोदन लेना जरुरी होगा। इसमें अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने से पहले भी इन्हीं अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी।

उन्होंने कहा कि इस कानून का दुरुपयोग रोकने के लिये उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय अपील प्राधिकरण बनाया जायेगा। इसमें प्रमुख सचिव और पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी सदस्य होगा। इसके लिये प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय निगरानी समिति का भी गठन किया जायेगा। ऐसी ही समिति जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित होगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि इस कानून का कोई दुरुपयोग नहीं कर सकता। हाँ, समाज की व्यवस्था और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये एक साल में किये गये कार्यों का सिलसिलेवार ब्याैरा दिया।

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कभी न चलने वाली सरकारी बंदूकें उगल रही हैं गोलियां, अब तक 1350

यूपी में पिछले 11 महीनों की योगी सरकार में करीब 1350 एनकाउंटर किए हैं. यानी हर महीने सौ से भी ज्यादा एनकाउंटर. इस दौरान 3091 वॉन्टेड अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं जबकि 43 अपराधियों को मार गिराया गया. यूपी पुलिस का दावा है कि मरने वालों बदमाशों में 50 फीसदी इनामी अपराधी थे, जिन्हें पुलिस शिद्दत से तलाश रही थी.

यूपी पुलिस के इन आंकड़ों ने अपराधियों में इस कदर खौफ भर दिया कि पुलिस एक्शन के डर से पिछले 10 महीने में 5409 अपराधियों ने बाकायदा अदालत से अपनी ज़मानत ही रद्द कराई है ताकि ना वो बाहर आएं और ना गोली खाएं. एक तरफ यूपी की सरकारी बंदूकें चलती ही नहीं थी, और अब अचानक वहीं बंदूकें दनादन गोलियां उगल रही हैं.

बदमाशों में एनकाउंटर का खौफ

बीते दिनों शामली के झिंझाना इलाके में एनकाउंटर के डर से हत्यारोपी ने खुद थाने पहुंचकर सरेंडर किया था. हत्यारोपी ने एसपी अजय पाल शर्मा को एक शपथ पत्र दिया है, जिसमें लिखा है कि वह भविष्य में किसी भी अपराध में शामिल नहीं होंगे.

इनामी बदमाश ने थाने में किया सरेंडर

हापुड़ में 15 हजार इनामी एक बदमाश ने थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया. बदमाश की पहचान अंकित के रूप में हुई है. शामली के कैराना में योगी सरकार के एनकाउंटर का असर देखने को मिला, जहां दो सगे भाई ने अपने हाथ में पोस्टर लेकर घूमते नज़र आए. उस पोस्टर पर लिखा था कि वे लोग अब से अपराध नहीं करेंगे.

यूपी में एनकाउंटर का आंकड़ा

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के 11 महीने के कार्यकाल में अब तक प्रदेश में पुलिस और अपराधियों के बीच 1350 एनकाउंटर हो चुके हैं. 3091 अपराधी गिरफ्तार किए जा चुके हैं. वहीं, 43 अपराधियों को पुलिस ने मार गिराया. इस मामले में पश्चिम उत्तर प्रदेश में सबसे आगे रहा.

करीब 800 हिस्ट्रीशीटरों ने लिया शपथ

सीतापुर के एसपी आनंद कुलकर्णी के निर्देश पर हरगांव, सदरपुर और इमिलिया सुल्तानपुर समेत जनपद के लगभग सभी थानों में शपथ दिलाई जा रही है. एसपी आनंद कुलकर्णी ने न्यूज18 हिंदी से बातचीत में बताया कि अब तक जिले के करीब 800 नामी अपराधी और हिस्ट्रीशीटर शपथ लेकर एफिडेविट दे चुके हैं कि वो भविष्य में किसी अपराध में शामिल नहीं रहेंगे. उन्होंने बताया कि उनका मकसद इन बदमाशों को समाज की मुख्यधारा में लाना है.

एनकाउंटर पर सवाल

यूपी पुलिस द्वारा लगातार किए जा रहे एनकाउंटर पर सवाल भी उठने लगे हैं. यूपी राज्‍य मानवाधिकार आयोग ने यूपी पुलिस से चार मुठभेड़ से जुड़ी रिपोर्ट तलब की है. बताया जाता है कि इन मुठभेड़ों में मारे गए लोगों के परिजनों का आरोप है कि यूपी पुलिस ने फर्जी तरीके से एनकाउंटर किए हैं जबकि मारे गए लोगों का कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है.

1982 में हुआ था पहला एनकाउंटर

एनकाउंटर यानी मुठभेड़ शब्द का इस्तेमाल हिंदुस्तान और पाकिस्तान में बीसवीं सदी में शुरू हुआ. एनकाउंटर का सीधा-सीधा मतलब होता है. बदमाशों के साथ पुलिस की मुठभेड़. हिंदुस्तान में पहला एनकाउंटर 11 जनवरी 1982 को मुंबई के वडाला कॉलेज में हुआ था.

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20 साल तक त्रि‍पुरा के CM रहे माणिक सरकार के पास नहीं है अपना घर, अब यहां करेंगे पत्‍नी संग गुजर

एक ओर जहां केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की घोषणा के बाद बिप्लब देब त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 20 साल तक त्रि‍पुरा के CM रहे माणिक सरकार अब इस पद से मुक्‍त हो चुके हैं। ऐसे में अब लोगों के मन में माणिक सरकार के रहने को लेकर सवाल उठ रहे हैं क‍ि आख‍िर अब यह कहां रहेंगे। देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री के रूप में जानें वाले माणिक के पास खुद का घर नहीं हैं। हालांक‍ि इस दौरान बिप्लब देब ने उनके रहने को लेकर एक बड़ा ऐलान क‍िया है।

छवि देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री के तौर पर बनी
जी हां माणिक सरकार ने त्रि‍पुरा में एक दो नहीं बल्‍क‍ि 20 साल तक एक मुख्‍यमंत्री के रूप में ज‍िम्‍मेदारी संभाली। इस दौरान वह राज्‍य की जनता के बीच काफी लोकप्रि‍य रहे। उनकी छवि देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री के तौर पर बनी है। उनके पास कुछ खास संपत्‍त‍ि भी नहीं है। उनकी पत्‍नी भी केंद्रीय कर्मचारी के रूप में सेवानिवृत्त हो चुकी हैं।
माणिक सरकार ने कोई अलग से संपत्‍त‍ि नहीं बनाई
माणिक की पत्नी जमीन जायदाद की मालिक हैं लेक‍िन उनकी भी जमीन न‍िर्माण कार्य के दौरान व‍िवादों में घ‍िर गई है। वहीं मणि‍क सरकार ने अपना पैतृक घर अपनी बहन को देने के साथ ही अपने ल‍िए कोई अलग से संपत्‍त‍ि नहीं बनाई है। वह अपनी सैलरी से स‍िर्फ अपने खर्च भर की रकम रखते थे और बाकी पार्टी को दान कर कर देते थे।

पत्नी संग सीपीएम के दफ्तर में रहेंगे मण‍िक सरकार
मुख्‍यमंत्री के रूप में सरकार का रहन-सहन काफी साधारण रहा है। ऐसे में त्रिपुरा की कमान संभालने जा रहे बिप्लब देब का कहना है क‍ि सरकार को सरकारी आवास में रहने के साथ ही दूसरी सुविधाएं पाने का हक है। विपक्ष के नेता के रूप में उन्‍हें कैबिनेट स्तर की सुविधाएं म‍िलेंगी। इसल‍िए वह अब अपनी पत्‍नी के साथ सीपीएम के दफ्तर में रहेंगे।

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मेघालय में 2 सीट वाली बीजेपी बना रही NDA सरकार, आज CM पद की शपथ लेंगे कोनराड संगमा

पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में आए चुनावी नतीजों के बाद अब सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. मंगलवार को कोनराड संगमा मेघालय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. गौरतलब है कि एनपीपी की अगुवाई में बन रही सरकार में बीजेपी भी हिस्सेदार है. संगमा करीब सुबह 10 बजे शपथ लेंगे. कोनराड के साथ करीब 11 विधायक भी मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले गठबंधन में हिस्सेदार HSPDP की मांग थी कि वे गैर बीजेपी-गैर कांग्रेस सरकार का गठन चाहते हैं.

कोनराड संगमा, मुख्यमंत्री समेत 7 मंत्री NPP के, दोनकुपर रॉय (यूडीपी) के दो मंत्री, बीजेपी की तरफ से ए.एल. हेक मंत्री पद की शपथ लेंगे.

ऐसी है विधानसभा की स्थिति

3 मार्च को आए नतीजों में 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के खाते में 21 , एनपीपी के खाते में 19 और बीजेपी के खाते में दो सीटें आई थीं. वहीं, यूनाईटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के छह विधायक और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के दो विधायक चुने गए थे. एनसीपी और खुन हनीट्रैप नेशनल अवेकिंग मूवमेंट के खाते में एक-एक सीट आई है. इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायक भी चुनाव जीते हैं.

पिछड़ गई कांग्रेस

मेघालय में कांग्रेस को सबसे ज्यादा 21 सीटें मिली हैं, लेकिन वह 60 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए जरूरी आंकड़े जुटाने से 10 सीट पीछे रह गई. कांग्रेस की ओर से पार्टी के बड़े नेता अहमद पटेल, कमलनाथ समेत चार नेता वहां पर सरकार बनाने की संभावना तलाशने गए थे, लेकिन सफल नहीं हो सके.

और बन गई बीजेपी सरकार!

वहीं, दूसरे नंबर पर रही नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के पास 19 विधायक हैं. बीजेपी (2 विधायक), यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (6 विधायक), एचएसपीडीपी (2 विधायक), पीडीएफ (4 विधायक) और 1 निर्दलीय विधायक के साथ आने से इस गठबंधन के पास 34 विधायकों का समर्थन हो गया है.

कोनराड संगमा कौन हैं?

मेघालय में मजबूत नेता के रूप में सामने आए कोनराड संगमा राज्य में आठवीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं. उन्होंने नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के विधायक के रूप में सदन में विपक्ष का नेतृत्व किया. 27 जनवरी 1978 को जन्मे कोनराड संगमा वेस्ट गारो हिल्स जिले के सेलसेल्ला निर्वाचन क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया. इससे पहले कोनराड संगमा 2008 में मेघालय के सबसे युवा वित्त मंत्री बने थे और अभी वह मेघालय की तुरा सीट से लोकसभा सदस्य हैं.

सियासी करियर की शुरुआत

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कोनराड संगमा 1990 दशक के अंतिम दिनों में पिता पीए संगमा के प्रचार प्रबंधक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की. उस समय पीए संगमा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में थे. बता दें कि राकांपा से विवाद के बाद अलग होकर पीए संगमा ने जुलाई 2012 में नेशनल पीपुल्स पार्टी का गठन किया था.

मेघालय विधानसभा में 2009-2013 तक कोनराड संगमा विपक्ष के नेता रहे. वह अभी तुरा सीट से लोकसभा सांसद हैं, जो उनके पिता पीए संगमा के निधन के बाद खाली हुई थी.

मेघालय में बन रही बीजेपी सरकार को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी बीजेपी पर निशाना साधा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि मेघालय में बीजेपी धोखे से सत्ता आ रही है. उन्होंने कहा है कि इसी तरह से बीजेपी गोवा और मणिपुर में भी सत्ता में आई थी. राज्य के विधानसभा चुनावों में केवल दो सीटें पाने वाली बीजेपी सरकार में शामिल होने जा रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट किया, ‘सिर्फ 2 सीटों के साथ ही बीजेपी मेघालय में अपनी सरकार बनाने में कामयाब रही. मणिपुर और गोवा की तरह, मेघालय में भी जनादेश का अपमान हुआ. सत्ता के लालच में बीजेपी बड़े पैमाने पर पैसों का इस्तेमाल करके एक अवसरवादी गठबंधन बनाने में कामयाब रही है.’