Posted on

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, अब बैंक अकाउंट और मोबाइल सिम के लिए जरूरी नहीं आधार

कोर्ट ने कहा कि आधार कानून निजता का हनन नहीं करता इस अधिकार पर तर्क संगत नियंत्रण लगाया जा सकता है। आधार योजना के पीछे कानून है और इसके पीछे सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को सामाजिक योजनाओं का लाभ देना है। आधार कानून पूर्णता के सिद्धांत पर खरा उतरता है। निजता के अधिकार और भोजन, आश्रय आदि के अधिकार के बीच संतुलन कायम है क्योंकि व्यक्ति के बारे में सूचना बहुत कम एकत्रित की जाती है। कोर्ट ने मनी बिल के रूप में आधार को पास करने को सही ठहराया है।

कोर्ट की केंद्र को हिदायत
कोर्ट ने यह भी कहा है कि सरकार बायॉमीट्रिक डेटा को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कोर्ट की इजाजत के बिना किसी और एजेंसी से शेयर नहीं करेगी।कोर्ट ने केंद्र को हिदायत भी दी है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड न मिले। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट की धारा 57 को रद कर दिया है। अब प्राइवेट कंपनियां आधार की मांग नहीं कर सकती हैं।

मोबाइल और बैंक से आधार लिंक करना जरूरी नहीं

कोर्ट ने कहा कि मोबाइल और बैंक से आधार को लिंक करने का आदेश रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि बैंक खाते के बारे में यह अनिवार्यता सिर्फ नये खाते खोलने के लिए नहीं रखी गई है बल्कि पुराने खातों के लिए भी आधार से लिंक कराना जरूरी किया गया अन्यथा खाता निष्कि्रय कर दिया जाएगा। ऐसा करना व्यक्ति को अपनी संपत्ति के अधिकार से वंचित करना है। ये नियम मनमाना है।

नहीं बढ़ाया जा सकता दायरा
कोर्ट यह भी साफ किया है कि सब्सिडी, सेवाओं का लाभ देने के लिए आधार का दायरा नहीं बढाया जा सकता। जाहिर तौर पर संदेश यह था कि किसी भी ऐसी योजना से आधार को नहीं जोड़ा जा सकता है जिसमें सिर्फ थोडी बहुत छूट हो। कोर्ट ने कहा कि धारा 7 के तहत सब्सिडी का लाभ देने वाली योजनाओं और वंचित वर्ग के लिए चलने वाली कल्याणकारी योजनाओं में आधार लागू होगा।

आधार कहां जरूरी कहां नहीं
1- सिर्फ उन्हीं योजनाओं में आधार लागू किया जा सकता है जो कि समेकित निधि से खर्च पर चल रही हों।
2- सीबीएससी, नीट, जेईई, यूजीसी आदि पर आधार लागू नहीं होगा
3- बच्चों को आधार कानून में इनरोल करने के लिए उनके मातापिता की सहमति जरूरी होगी।
4- माता पिता की सहमति से आधार में इनरोल हुए बच्चे बालिग होने पर अगर योजना का लाभ नहीं लेना चाहते तो उन्हें आधार से बाहर जाने का विकल्प दिया जाएगा
5- स्कूल में एडमीशन के लिए आधार जरूरी नहीं होगा क्योंकि न तो ये सेवा है और न ही सब्सिडी
6- संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत 6 से 14 साल के बच्चों के लिए शिक्षा मौलिक अधिकार है ऐसे में उसे लाभ में नहीं गिना जा सकता
7- छह से चौदह साल के बच्चे सर्व शिक्षा अभियान में आते हैं और उनके लिए आधार जरूरी नहीं होगा
8- धारा 7 के तहत कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए बच्चों को मातापिता की सहमति से आधार नंबर के लिए इनरोल किया जा सकता है
9- आधार नंबर न होने के कारण किसी भी बच्चे को योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा। अन्य दस्तावेजों के आधार पर पहचान करके उसे लाभ दिया जाएगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सूचना साझा करने का कानून रद
कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सूचना साझा करने की धारा 33 (2) के मौजूदा स्वरूप को अस्वीकार्य बताते हुए रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि वैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर किसी व्यक्ति की सूचना साझा करने की अवधारणा में कोई खामी नहीं है लेकिन इसके लिए संयुक्त सचिव से ऊंची रैंक के अधिकारी की मंजूरी होनी चाहिए। इसके अलावा दुरुपयोग रोकने के लिए हाईकोर्ट के जज को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मौजूदा कानून रद करते हुए सरकार को इस बारे में नया प्रावधान बनाने की छूट दी है।

पांच न्यायाधीशों में से कुल तीन फैसले दिये गए जिसमें जस्टिस एके सीकरी ने स्वयं, मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस एएम खानविलकर की ओर से कानून को संवैधानिक ठहराने वाला फैसला दिया जबकि जस्टिस अशोक भूषण ने अलग से दिये फैसले में तीन न्यायाधीशों के फैसले के अधिकतर हिस्से से सहमति जताते हुए कुछ मुद्दों पर अपना अलग फैसला दिया और कानून के संवैधानिक ठहराया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने असहमति वाला अलग से फैसला सुनाया। तीन न्यायाधीशों का मिला कर कुल 1448 पेज का फैसला है।

Posted on

मॉब लिंचिंग पर मोदी सरकार का बड़ा कदम, बनेगा सख्त कानून

सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग के खिलाफ सख्त रूख अख्तियार करते हुए सरकार को कड़े कानून बनाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही कई दिशा-निर्देश भी जारी किये थे। गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उच्च स्तरीय समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट के इसी आलोक के मद्देनजर किया गया है।

गृह सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में गठित समिति में न्यायिक विभाग के सचिव, विधायी विभाग के सचिव, विधि मामलों के सचिव और समाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग के सचिव इसके सदस्य होंगे।

यह समिति को चार हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट पर विचार करने के लिए राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में अलग से मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया गया है। इसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्री नीतिन गडकरी, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत को सदस्य बनाया गया है। मंत्रिमंडलीय समिति अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देगी।

गृहमंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि कानून व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है और मंत्रालय की ओर से उन्हें इस मामले में कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किये गए हैं। इसके साथ ही कथित गोरक्षकों के उत्पाद और बच्चा चोरी की अफवाहों से जुड़े मॉब लिंचिंग को लेकर भी राज्यों के अलग एडवाइजरी जारी की गई थी। इन एडवाइजरी में राज्य सरकारों को ऐसी घटनाओं रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किये गए हैं।

लोकसभा में गूंजा अलवर कांड, सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा
राजस्थान के अलवर में गाय ले जा रहे एक मुस्लिम युवक की पीट-पीटकर हत्या का मामला सोमवार को लोकसभा के साथ देश के सियासी मंच पर गूंजा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यू इंडिया में मानवता का स्थान नफरत ने ले लिया है। यह मोदी का ‘क्रूर न्यू इंडिया’ है। राहुल के इस बयान पर दो केंद्रीय मंत्रियों ने जमकर पलटवार किया और विपक्ष के नेता को ‘नफरत का सौदागर’ और ‘वल्चर पॉलिटिक्स’ (गिद्ध की तरह हर शिकार पर झपटने की प्रवृत्ति) करार दिया। इस बीच केंद्र ने भीड़ की हिंसा के बढ़ते मामलों पर काबू के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों का समूह और गृह सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता में अफसरों की कमेटी गठित कर दी है।

अलवर में कुछ कथित गोरक्षकों ने शुक्रवार रात रकबर खान की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। वह गाय लेकर जा रहा था, इसलिए उसे गो तस्कर माना गया था। राहुल गांधी ने इस मामले में ट्विटर पर न्यूज रिपोर्ट शेयर करते हुए राजस्थान पुलिस पर सवाल उठाए। उन्होंने सवाल किया कि अलवर में पुलिस ने मॉब लिंचिंग के शिकार रकबर खान को 6 किमी दूर स्थित अस्पताल पहुंचाने में तीन घंटे लगाए, क्यों? उन्होंने रास्ते में टी-ब्रेक भी लिया। यह मोदी का क्रूर ‘न्यू इंडिया’ है, जहां मानवता की जगह नफरत ने ले ली है और लोगों को कुचला जा रहा है, मरने के लिए छोड़ा जा रहा है।’

चुनावी लाभ के लिए घड़ियाली आंसू बहा रहे राहुल : गोयल
पीएम मोदी पर राहुल के हमले का जवाबी हमला दो केंद्रीय मंत्रियों पीयूष गोयल व स्मृति ईरानी ने दिया। गोयल ने कहा कि हर अपराध के बाद खुशी के मारे झूमना छोड़े राहुल। राज्य सरकार कठोर व तुरंत कार्रवाई के लिए आश्वस्त कर चुकी है। आप चुनावी लाभ के लिए हर संभावित तरीके से समाज को तोड़ने का प्रयास करते हो और फिर घड़ियाली आंसू बहाते हो। आप ‘नफरत के सौदागर’ हो। गोयल के इस बयान ने 2007 के गुजरात चुनाव के वक्त तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के उस बयान की याद दिला दी, जिसमें उन्होंने राज्य के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहा था।

गिद्धिया राजनीति छोड़े राहुल : स्मृति
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने जवाबी हमले में आरोप लगाया, ‘राहुल गांधी ‘वल्चर पॉलिटिक्स’ (गिद्धिया राजनीति) करना छोड़े। वह चुनावी लाभ के लिए ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं जो सामाजिक ताने-बाने को तोड़ता न हो। राहुल गांधी के परिवार ने 1984, भागलपुर समेत कई अन्य दंगों के जरिए देश में नफरत की आग फैलाई। ये शर्मनाक है कि अब वह इस तरह की राजनीति कर रहे हैं।’

जब स्पीकर ने सिंधिया से कहा-राजनीति मत करो
अलवर मामला लोकसभा में भी गूंजा। कांग्रेस सांसद करण सिंह यादव ने कहा कि यह राज्य में चौथी घटना है। इस दौरान भाजपा व कांग्रेस सांसदों में तकरार भी हुई। इसी बीच कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कठुआ कांड व महिलाओं से दुष्कर्म के मामले उठाए। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मंत्री ने आरोपितों के समर्थन में जुलूस निकाला था, जबकि उप्र के उन्नाव कांड में भाजपा के एक विधायक आरोपित हैं। उन्होंने मप्र के मंदसौर दुष्कर्म कांड को भी उठाया, लेकिन स्पीकर सुमित्रा महाजन ने उन्हें रोका और ऐसी घटनाओं के लिए राजनीति करने पर उन्हें फटकारा। गुस्से महाजन ने कहा, ‘हर चीज पर राजनीति मत कीजिए, मैं भी महिला हूं। ‘

अवमानना याचिका दायर
उधर अलवर कांड को लेकर महात्मा गांधी के पौत्र तुषार गांधी व कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानन याचिका दायर कर दी। कोर्ट इस पर 28 अगस्त को सुनवाई करेगी।

पुलिस की भूमिका जांचने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी
अलवर मामले में पुलिस की भूमिका की जांच के लिए राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अफसरों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है। यह टीम सोमवार को ही मौके पर पहुंची और जांच भी शुरू कर दी। राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि डीजीपी को तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एक कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्रालय ने भी राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

Posted on

ब्रिटिश जज ने आपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटिश भूमिका की जाँच के लिए फाइल सार्वजनिक करने को कहा

न्यायाधीश मुरी शांक्स की अध्यक्षता में मार्च में लंदन में फ‌र्स्ट टीयर ट्रिब्यूनल (सूचना का अधिकार) में तीन दिनों तक सुनवाई चली थी। उन्होंने एक दिन पहले सोमवार को कहा कि अवधि से संबंधित अधिकांश फाइलें सार्वजनिक की जानी चाहिए।

न्यायाधीश ने ब्रिटिश सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया कि डाउनिंग स्ट्रीट कागजात को अवर्गीकृत करने से भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ता क्षतिग्रस्त हो जाएगा।

न्यायाधीश ने हालांकि ब्रिटेन की संयुक्त खुफिया समिति से ‘इंडिया पोलिटिकल’ के रूप में चिह्नित फाइल पर दलील स्वीकार नहीं की। इस फाइल में ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों एमआइ5, एमआइ6 और जीसीएचक्यू (गवर्नमेंट कम्युनिकेशन हेडक्वार्टर) से संबंधित सूचनाएं हो सकती हैं।

न्यायाधीश ने कहा कि इसलिए कैबिनेट कार्यालय तकनीकी रूप से उस व्यवस्था पर कायम रह सकता है जिसके तहत ऐसी सामग्री को सूचना की आजादी अपील से छूट मिली हुई है।

Posted on

पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने पत्नी सुनंदा पुष्कर हत्याकांड पर दी सफाई। जाने पूरा मामला!

थरूर ने अपनी सफाई में एक पत्र जारी किया है। इसमें उन्‍होंने कहा, ‘मुझ पर जो आरोप लगाए गए हैं, वो ऊटपटांग और आधारहीन हैं। मेरे खिलाफ द्वेषपूर्ण और बदला लेने के उद्देश्‍य से अभियान चलाया जा रहा है।’ दरअसल, सुनंदा पुष्कर की मौत मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में आरोपी बनाए गए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान शशि थरूर को 7 जुलाई को पेश होने का आदेश दिया है। यहां पर बता दें कि दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में सुनंदा पुष्कर के पति शशि थरूर को खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोपी माना है।

वहीं, सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर भी सुनवाई हुई। स्वामी ने कहा कि अपराध हुआ था, उस समय सबूत मिटाए गए थे। एक साल बाद एफआईआर दर्ज की गई, दिल्ली पुलिस ने सही तरीके से जांच नहीं की। इस पर कोर्ट ने कहा कि स्वामी की याचिका पर हम अलग से गौर करेंगे। इस पर पुलिस को अगली सुनवाई में जवाब देना है।

यहां पर बता दें कि पिछले महीने 14 मई को बहुचर्चित सुनंदा पुष्कर मौत मामले में सवा चार साल बाद विशेष जांच दल (एसआइटी) ने पटियाला हाउस कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इस चार्जशीट में सुनंदा के पति व पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की भूमिका को संदिग्ध माना था। तकरीबन 4 साल बाद दिल्ली पुलिस ने सुनंदा पुष्कर मामले में कोर्ट में 3000 पेज की चार्जशीट पेश की थी। चार्जशीट में आईपीसी की धारा 306 यानी आत्महत्या के लिए उकसाने और वैवाहिक जीवन में प्रताड़ित करने के की बात कही गई है।

प्रताड़ना से तंग आकर सुनंदा ने की थी खुदकशी

गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा की 17 जनवरी 2014 को चाणक्यपुरी स्थित पांच सितारा होटल लीला पैलेस के सुइट नंबर 345 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

मौत को पहले आत्महत्या बताया गया था, लेकिन एक साल बाद विसरा रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया था। मामले की जांच के लिए एसआइटी बनाई गई। लेकिन, सवा चार साल बाद भी न तो केस सुलझ सका और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई।

एम्स के मेडिकल बोर्ड ने सुनंदा के शव का पोस्टमार्टम किया था। 29 सितंबर 2014 को मेडिकल बोर्ड ने दिल्ली पुलिस को रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि सुनंदा की मौत जहर से हुई है। बोर्ड ने कहा था कि कई ऐसे रसायन हैं जो पेट में जाने या खून में मिलने के बाद जहर बन जाते हैं। लिहाजा, बाद में उनके वास्तविक रूप के बारे में पता लगाना बहुत मुश्किल होता है।

इस रिपोर्ट के बाद 1 जनवरी, 2015 को सरोजनी नगर थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। इसके बाद सुनंदा के विसरा को जांच के लिए फोरेंसिक ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआइ), अमेरिका की लैब में भेज दिया गया था। लेकिन, वहां की लैब में भी जहर के बारे में पता नहीं लग सका। उस वक्त दवाओं के ओवरडोज को मौत की वजह बताया गया था।

केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्‍‌नी सुनंदा पुष्कर का शव दिल्ली के होटल लीला से बरामद किया गया था। सुनंदा का शव कमरे के बिस्तर पर मिला था। सुनंदा और शशि थरूर की शादी 2010 में ही हुई थी। यह सुनंदा की तीसरी और शशि थरूर की दूसरी शादी थी।

Posted on

अच्छी खबर: वेटिंग लिस्ट ई-टिकट वाले यात्री अब कर सकेंगे ट्रेन में सफर

रेलवे के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये अहम फैसला सुनाया है। जिसके तहत अगर किसी भी रेल यात्री के पास ई-टिकट है और उसका नाम वेटिंग लिस्ट में शामिल है, तो उन्हें भी यात्रा करने का पूरा अधिकार रहेगा। हालांकि अब तक सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर रेलवे की ओर से कोई बयान नहीं आया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

दरअसल, साल 2014 में दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि काउंटर टिकट धारकों की तरह वेटिंग वाले ई-टिकट वालों यात्रियों का भी टिकट कैंसिल नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ई-टिकट वालों को भी राहत दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने रेलवे को यह भी आदेश दिया है कि वह जल्द से जल्द एक ऐसी स्कीम लागू करे जिससे कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फर्जी नामों से टिकट बुक कराने वालें एजेंट्स पर रोक लगाई जा सके।

वेटिंग ई-टिकट यात्रियों के लिए खुशखबरी

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 2014 में विभास कुमार झा द्वारा दायर की गई एक याचिका में कहा गया था कि काउंटर टिकट धारकों की तरह वेटिंग वाले ई-टिकट वालों का टिकट नहीं कैंसिल होना चाहिए। रेलवे के अभी तक के नियम के अनुसार वेटिंग ई-टिकट रखने वाले यात्रियों को ट्रेन मे चढ़ने की इजाजत नहीं मिलती थी, जबकि काउंटर टिकट रखने वाले लोगों पर ऐसी कोई रोक नहीं थी। इसलिए अगर कोई कन्फर्म टिकट वाला व्यक्ति नहीं आता था तो वह सीट इन्हें दे दी जाती थी।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की

जस्टिस मदन बी लोकुर की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को रद किए जाने की याचिका को खारिज कर दिया। याचिका रद किए जाने के बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश के मुताबिक रेलवे को नियम बनाने पड़ेंगे, ताकि दोनों तरह की टिकटों के बीच के अंतर को खत्म किया जा सके। बता दें कि हाईकोर्ट ने कहा था कि काउंटर टिकट और ई-टिकट लेने वाले यात्रियों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता है।

Posted on

उन्नाव केस: BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने पीड़िता के साथ किया था रेप, CBI ने की पुष्टि

 उन्नाव केस की जांच कर रही सीबीआई ने बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर लगे रेप के आरोपों की पुष्टि कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने आरोपों की पुष्टि कर दी है. वहीं दुष्कर्म में शशि सिंह की भूमिका पर सीबीआई ने कहना है कि शशि सिंह ही पीड़ित को नौकरी दिलाने का झांसा देकर कुलदीप सिंह के घर लाई थी. 4 जून 2017 को बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह ने उसके साथ रेप किया था और 11 जून को पीड़िता को तीन युवकों ने अगवा किया और कार में गैंगरेप किया. सूत्रों का कहना है कि अब सीबीआई स्थानीय पुलिस की भूमिका की भी जांच कर रही है.

बयानों से नहीं पलटी पीड़िता
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट के समक्ष पीड़िता का बयान दर्ज किए. कोर्ट के समझ भी उसने वहीं बयान दिए जो उसने पुलिस को अपनी शिकायत में दिए थे.

सीबीआई ने आमने-सामने बैठकर की थी जांच
आपको बता दें कि उन्नाव रेप केस की जांच कर रही सीबीआई ने आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और पीड़िता का आमना-सामना कराया था. पीड़िता ने पिछले वर्ष चार जून को विधायक द्वारा रेप किए जाने का आरोप दोहराया लेकिन, विधायक इससे इनकार करते रहे. सीबीआई के अफसरों ने दोनों से अलग-अलग हुई पूछताछ के तथ्यों को भी सामने रखा और एक-दूसरे से पुष्टि की.

सेंगर को सीतापुर जेल में किया गया शिफ्ट
आपको बता दें, बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मंगलवार (8 मई) को सुबह उन्नाव जेल से सीतापुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया है. पीड़िता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अपील दायर कर आरोपी विधायक को उन्नाव जेल से शिफ्ट करने की याचिका दायर की थी, जिसके बाद ये फैसला लिया गया.

अब तक मामले में क्या-क्या हुआ

  • रेप पीड़िता ने 11 जून 2017 को कोर्ट में शिकायत दर्ज की.
  • कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए और आरोपी अवधेश तिवारी, शुभम तिवारी व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, इस मुकदमे में विधायक और शशि सिंह का नाम नहीं था.
  • 3 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह ने केस वापस लेने के लिए पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया.
  • जब पिता द्वारा इनकार किया तो उसकी बेरहमी से पिटाई की गई और फर्जी मुकदमा लिखवाकर उसे जेल भिजवा दिया.
  • 8 अप्रैल, 2018 को पीड़िता ने परिवार समेत सीएम आवास के बाहर आत्मदाह की कोशिश की.
  • 9 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता की उन्नाव जेल में मौत हो गई.
  • 10 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह को गिरफ्तार किया गया.

केस में अब आगे क्या होगा

  • विधायक कुलदीप पर रेप के आरोपों की पुष्टि हुई.
  • अब आरोपी विधायक पर शिकंजा कस सकता है.
  • बीजेपी भी विधायक कुलदीप के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है.
  • ये भी संभव है कि पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दे.
  • सीबीआई अब मामले में पूरी जांच करने के बाद रिपोर्ट सौंपेगी.
  • सीबीआई की रिपोर्ट पर कोर्ट मामले में फैसला सुनाएगा.
Posted on

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट हैक, ब्राजील के हैकर्स पर शक

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट गुरुवार को हैक हो गई. इस साइबर अटैक में ब्राजीलियन हैकर्स का हाथ बताया जा रहा है. वेबसाइट supremecourtofindia.nic.in खोलने पर ‘पत्ती’ जैसी तस्वीर और ‘hackeado por HighTech Brazil HacTeam’ मैसेज दिख रहा है. हालांकि, अब वेबसाइट पर Site Under Maintenance लिखा दिख रहा है.

बताया जाता है कि 2013 में भी इन हैकरों ने भारतीय वेबसाइट को निशाना बनाया था. सुप्रीम कोर्ट के वेबसाइट न खुलने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसके हैक होने की सूचना भी दी. यूजर्स ने दावा कि साइट डाउन नहीं हुई है बल्‍कि हैक की गई है.

इससे पहले रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट भी हैक हो चुकी है. उस समय अधिकारियों ने बताया था कि वेबसाइट पर चीनी अक्षर में कुछ नजर आ रहा है, जिसके बाद बताया गया कि वेबसाइट हैक हो चुकी है.

Posted on

ताजमहल Ownership केस: सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां का वक्फनामा पेश नहीं कर पाया सुन्नी बोर्ड

ताजमहल पर मालिकाना हक जताने वाला सुन्नी वक्फ बोर्ड मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां के दस्तखत वाला वक्फनामा पेश नहीं कर पाया। इस पर, चीफ जस्टिस ने कहा कि बोर्ड कोर्ट का वक्त बर्बाद कर रहा है। बता दें कि वक्फ बोर्ड ने पिछली सुनवाई में दावा किया था कि मुगल बादशाह शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में ताजमहल का वक्फनामा किया था। इस पर कोर्ट ने सबूत मांगे थे। यह विवाद सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच चल रहा है।

दावेदारी पर नरम पड़ा वक्फ बोर्ड
– ताजमहल पर दावेदारी कर रहा वक्फ बोर्ड मंगलवार को कोर्ट में नरम नजर आया। उसने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने कहा कि उसे कोई दिक्क्त नहीं है कि ताजमहल की देखरेख एएसआई करे, लेकिन बोर्ड का यहां नमाज पढ़ने और उर्स जारी रखने का हक बरकरार रहे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड से कहा कि उसे इस बारे में एएसआई से बात करनी चाहिए। इस पर एएसआई ने विचार करने के लिए वक्त मांगा। केस की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था- शाहजहां जेल में थे तो दस्तखत कैसे किए?
– पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने वक्फ बोर्ड के वकील से पूछा था, “शाहजहां ने वक्फनामे पर दस्तखत कैसे किए? वह तो जेल में बंद थे। वह हिरासत से ही ताजमहल देखते थे।”
– कोर्ट ने शाहजहां के दस्तखत वाला हलफनामा पेश करने को कहा तो बोर्ड के वकील ने एक हफ्ते की मोहलत मांगी थी।

बोर्ड के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था स्टे
– सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जुलाई 2005 में आदेश जारी कर ताजमहल को अपनी प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर करने को कहा था।
– एएसआई ने इसके खिलाफ 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस पर कोर्ट ने बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था।
– बता दें कि वक्फ का मतलब किसी मुस्लिम द्वारा धार्मिक, शैक्षणिक या चैरिटी के लिए जमीन का दान देना होता है।

एएसआई कहता है- ताजमहल भारत सरकार का
– एएसआई की ओर से पेश एडवोकेट एडीएन राव ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने जैसा दावा किया है, वैसा कोई वक्फनामा नहीं है।
– 1858 की घोषणा के मुताबिक, आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से ली गई संपत्तियों का स्वामित्व ब्रिटिश महारानी के पास चला गया था। वहीं, 1948 के कानून के तहत यह इमारतें अब भारत सरकार के पास हैं।

1666 में हुआ था शाहजहां का निधन
– बता दें कि वारियाना हक की लड़ाई के चलते शाहजहां के बेटे औरंगजेब ने जुलाई 1658 में उन्हें आगरा के किले में नजरबंद कर दिया था। अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाने के करीब 18 साल बाद 1666 में शाहजहां का निधन आगरा के किले में ही हुआ था।

Posted on

जानिए कठुआ रेप कांड का पूरा सच। डी एन ए रिपोर्ट! #Kathua #JusticeForAsifa #Truth

जानिए डेली न्यूज़ एंड एनालिसिस रिपोर्ट से कठुआ रेप कांड से जुड़ा हर सच। किसी भी प्रतिक्रिया देने से पहले सच जानना जरुरी है। हम मांग करते हैं अगर उन्नाव केस की CBI जाँच हो सकती है तो कठुआ रेप कांड की भी CBI जाँच होनी चाहिए और केस को फ़ास्ट ट्रैक कर के सुप्रीम कोर्ट में जल्द से जल्द अपराधियों को सूली पर चढ़ाया जाये।

कठुआ रेप कांड का पूरा सच