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सबसे मंहगी इस बाइक की खूबियां कर देंगी आपको हैरान, कीमत उड़ा देगी होश

दुनियाभर में सबसे ज्यादा कस्टमाइज्ड बाइक्स के शौकीनों के लिए हार्ले-डेविडसन पहली पसंद बनी हुई है और इसी पसंद को बरकरार रखने के लिए हार्ले-डेविडसन ने अपनी दुनिया की सबसे महंगी बाइक पेश की है, जिसका कीमत के आधार पर मुकाबला शायद ही कोई बाइक कर पाए। हार्ले डेविडसन की यह बाइक हीरों से जड़ी हुई है और इसे ब्लू एडिशन में बनाने के लिए वॉच और ज्वेलरी कंपनी बुकेरर के साथ बुंडनरबाइक के साथ साझेदारी की है।

हार्ले डेविडसन ब्लू एडिशन सॉफ्टेल स्लिम एस पर आधारित इस बाइक का बॉडीवर्क पर कस्टम रेट्रो-स्टाइल में काम किया गया है। कंपनी के मुताबिक इस मोटरसाइकिल के हर बॉडी पार्ट की वेल्डिंग, बीटिंग, शेप देना और पॉलिश करने जैसे सारे काम हाथों से किए गए हैं। इतना ही नहीं बाइक के व्हील रिम्स भी कस्टम-मेड हैं।

बाइक का लीवर, रिसर्वायरकैप, हेडलाइट कवर और फुट कंट्रोल जैसे पार्ट्स को गोल्ड ट्रीटमेंट दिया गया है। इस बाइक के हर पार्ट्स सिल्वर प्लेटेड हैं।

इतना ही नहीं बाइक में अलग-अलग रंगों के छह कोट्स किए गए हैं जिसे कंपनी की तरफ से ‘स्पेशल कोटिंग मेथड’ बताया गया है। बाइक के टॉप फ्यूल टैंक पर दो कटआउट्स हैं, जिसमें लेफ्ट वाले पर 5.40 कैरेट के हीरे वाला सॉलिटियर रिंग दिया गया है।

वहीं, दूसरी तरफ कस्टम-मेड वॉच का इस्तेमाल किया गया है और इसे साधने के लिए रिंग्स हैं ताकि वी-ट्विन मोटर के वाइब्रेशंस से इसे किसी तरह का कोई नुकसान न पहुंचे।

इस बाइक को बनाने के लिए दोनों कंपनियों के 8 लोग, स्विस क्राफ्ट्समेन, जर्मन मोटरसाइकिल डिजाइनर्स ने मिलकर 2500 घंटे तक काम किया है। हार्ले डेविडसन की इस ब्लू एडिशन बाइक को ज्यूरिक में पेश किया गया और करेंट एक्सचेज रेट के हिसाब से इसकी कीमत 12.2 करोड़ रुपये है।

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स्कूटर पर सामान बेचते थे ये दोनों, आज 1 लाख करोड़ रुपये में बेचे कंपनी के 75 फीसदी शेयर!

अमेरिकी कंपनी वाल्मार्ट ने Flipkart में 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है.

आइए जानते है फिल्पकार्ट के सफर के बारे में

 देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में...

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में…

 10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

 शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की. हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम 'Leaving Microsoft to Change the World' और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की.

हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम ‘Leaving Microsoft to Change the World’ और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

 सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

 ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.

ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.

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ICICI बैंक लोन मामलाः चंदा कोचर के पति से CBI कर सकती है पूछताछ

वीडियोकॉन लोन मामले में सीबीआई ने दीपक कोचर के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है. वीडियोकॉन समूह को दिए गए एक लोन मामले में कोचर और उनके परिवार के सदस्यों की कथित संलिप्तता की खबरें आई थीं, जिसके बाद सीबीआई ने शुक्रवार को दीपक कोचर के खिलाफ जांच प्रक्रिया शुरू की.

सीबीआई के एक अधिकारी ने आजतक को बताया कि सभी अधिकारियों जिनका लोन पास कराने में योगदान था, उनके बयान दर्ज कर लिए गए हैं. इसके अलावा सीबीआई ने इस लोन से जुड़े सभी दस्तावेजों को भी ज़ब्त कर लिया है, जिसका अध्ययन किया जा रहा है.

अब सीबीआई दीपक कोचर को पूछताछ के लिए बुला सकती है. दीपक के अलावा सीबीआई वीडियोकॉन ग्रुप के अहम लोगों से भी पूछताछ कर सकती है. यह पूछताछ सीबीआई की बैंक फ्रॉड एंड सिक्योरिटी विंग करेगी.

हालांकि, नियमों के मुताबिक, प्रारंभि‍क जांच के दौरान सीबीआई अधिकारिक नोटिस जारी नहीं कर सकती, लेकिन जरूरत पड़ने पर पूछताछ जरूर कर सकती है.

प्रारंभिक जांच के तहत इस बात का पता लगाया जाएगा कि दीपक कोचर और उनके दो रिश्तेदारों द्वारा बनाई गई फर्म को वीडियोकॉन समूह के वेणुगोपाल धूत ने रिश्वत के रूप में कितने रुपये दिए. साथ ही उन आरोपों की भी जांच होगी, जिसमें कहा जा रहा है कि वीडियोकॉन समूह को आईसीआईसीआई बैंक द्वारा दी गयी कर्ज सहायता कुछ ले-दे कर दी गयी और इस में कोचर और उनके परिवार के कुछ सदस्यों की कथित संलिप्तता थी.

4000 करोड़ के लोन में हेरा-फेरी का आरोप

दरअसल, ICICI बैंक और वीडियोकॉन ग्रुप के निवेशक अरविंद गुप्ता ने चंदा कोचर पर आरोप लगाया था कि कोचर ने वीडियोकोन को कुल 4000 करोड़ रुपए के दो ऋण मंजूर करने के बदले में गलत तरीके से निजी लाभ लिया.

रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज में दर्ज जानकारी के मुताबिक ICICI बैंक चीफ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर ने धूत के साथ मिलकर दिसंबर 2008 में न्यू पॉवर रीन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (NRPL) के नाम से साझा कंपनी बनाई. NRPL में धूत, उनके परिवार के सदस्यों और करीबियों के 50 फीसदी शेयर थे.

बाकी शेयर चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और पैसेफिक कैपिटल के नाम थे. पैसेफिक कैपिटल का स्वामित्त्व दीपक कोचर के परिवार के पास ही था. एक साल बाद जनवरी 2009 में धूत ने NRPL के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया और अपने करीब 25000 शेयर दीपक कोचर को ट्रांसफर कर दिए. मार्च 2010 में NRPL को सुप्रीम एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से लोन मिला जो कि धूत की ही कंपनी थी.

मार्च 2010 के आखिर तक सुप्रीम एनर्जी ने NRPL का अधिकतर नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया. दीपक कोचर के पास 5 फीसदी शेयर ही रह गए. करीब 8 महीने बाद धूत ने सुप्रीम एनर्जी में अपनी सारी होल्डिंग अपने सहयोगी महेश चंद्र पुंगलिया के नाम कर दी. दो साल बाद पुंगलिया ने सुप्रीम एनर्जी में अपना सारा स्टेक दीपक कोचर की पिनेकल एनर्जी को 9 लाख रुपए में दे दिया.

2012 में दिया 3250 करोड़ का ऋण

अरविंद गुप्ता ने इंडिया टुडे से कहा, ‘हमें जानने की जरूरत है कि क्यों दीपक कोचर और धूत ने साझा उपक्रम बनाया और फिर धूत ने उसे छोड़ दिया. हमें जानने की जरूरत है कि मारिशियन कंपनी (डीएच रीन्यूएबल्स) के पीछे असल में कौन लोग हैं.’ गुप्ता के संदेह का कारण NRPL को उसी समय विदेशी फंड का बहुतायत में मिलना है.

ICICI बैंक ने करीब 4000 करोड़ रुपए ऋण के तौर पर वीडियोकोन ग्रुप को 2010 से 2012 के बीच दिए और डीएच रीन्यूएबल्स ने 325 करोड़ और 66 करोड़ रुपए NRPL में डाले. ICICI बैंक ने 3250 करोड़ 5 वीडियोकॉन कंपनियों को अप्रैल 2012 में दिए. इसके बाद केमेन आईलैंड्स की एक शैल कंपनी को 660 करोड़ रुपए का ऋण दिया गया.

सेबी भी कस सकता है ICICI बैंक पर शिकंजा

आईसीआईसीआई बैंक के विवादों में घिरने के बीच बाजार नियामक सेबी ने देखना शुरू किया है कि कहीं इस मामले में सूचनाओं के प्रकाशन या कंपनी संचालन से जुड़ा कोई मामला तो नहीं बनता है.

इसी तरह वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज व इसके प्रवर्तक भी एक मामले में नियामक की निगाह में हैं. यह मामला आईसीआईसीआई बैंक व कुछ सार्वजनिक बैंकों के समूह द्वारा कंपनी को दिए गए कर्ज में कथित प्रतिदान से जुड़ा है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि नियामक ने निजी क्षेत्र के इस बैंक द्वारा बीते कुछ साल में किए गए विभिन्न खुलासों में शुरुआती जांच शुरू की है.

वहीं शेयर बाजार भी 2012 तक के कुछ सौदों के संबंध में हालिया रपटों के बारे में अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांग सकते हैं. उल्लेखनीय है कि आईसीआईसीआई बैंक देश का चौथा सर्वाधिक मूल्यवान बैंक है, जिसका बाजार पूंजीकरण लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये है.

ICICI ने चंदा कोचर का किया बचाव

ICICI बैंक के बोर्ड ने अपनी एमडी और सीईओ चंदा कोचर पर पूरा भरोसा जताया है. आईसीआईसीआई बैंक के अध्यक्ष एमके शर्मा ने शुक्रवार को अपनी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चंदा कोचर के बचाव में उतरते हुए कहा कि बोर्ड को सीईओ पर पूरा भरोसा है.

साथ ही, उन्होंने वीडियोकॉन समूह को दिए लोन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज कर दिया है. शर्मा ने कहा कि बैंक ने कर्ज मंजूरी के लिए अपनी आंतरिक प्रक्रिया की समीक्षा की और उन्हें मजबूत पाया.

उन्होंने कहा कि बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि विभिन्न अफवाहों में लगाए गए आरोपों जैसी कोई गड़बड़ी/ भाई भतीजावाद/हितों का टकराव नहीं है. उन्होंने कहा कि बैंक और इसके शीर्ष प्रबंधन की छवि खराब करने के लिए अफवाहें फैलाई जा रही हैं.

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कनिष्‍क गोल्‍ड के डायरेक्‍टर भूपेश जैन, नीता जैन से CBI ने की पूछताछ, 824Cr का है फ्रॉड

करीब 824 करोड़ रुपए के एसबीआई फ्रॉड मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने कनिष्‍क गोल्‍ड प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्‍टर्स भूपेश जैन और नीता जैन से पूछताछ की। साथ ही सीबीआई ने कनिष्‍क गोल्‍ड के प्रमोटर्स और डायरेक्‍टर्स के खिलाफ लूक-आउट सर्कुलर जारी कर दिया है। चेन्‍नई की कंपनी कनिष्‍क गोल्‍ड को 14 बैंकों के कंसोर्टियम ने लोन दिया था, जिसमें एसबीआई सबसे आगे है। यह लोन अब एनपीए घोषित हो चुका है। इस मामले में जांच एजेंसी सीबीआई ने एसबीआई की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। पीएनबी में करीब 13 हजार करोड़ रुपए का घोटाला सामने आने के बाद फ्रॉड का यह दूसरा बड़ा मामला है।

2007 से कनिष्‍क गोल्‍ड ने लोन लेना शुरू किया 
एसबीआई की ओर से कहा गया, कनिष्क गोल्ड ने 2007 से कर्ज लेना शुरू किया और बाद में उसने अपनी क्रेडिट की सीमा बढ़वा लिया। कनिष्क का रजिस्टर्ड ऑफिस चेन्नई में है। इसके मालिक और प्रमोटर-डायरेक्टर भूपेश कुमार जैन और उनकी पत्नी नीता जैन हैं। एसबीआई ने शिकायत में कहा कि ज्वैलर ने सबसे पहले मार्च 2017 में ब्याज भुगतान में 8 सदस्य बैंकों से डिफॉल्ट किया। अप्रैल 2017 तक कनिष्क ने सभी 14 बैंकों को पेमेंट रोक दी। 5 अप्रैल 2017 को स्टॉक ऑडिट की शुरुआत के समय बैंकर्स प्रमोटर से संपर्क करने में असफल रहे।

मार्च 2017 में सामने आया डिफॉल्‍ट 
एसबीआई के मुताबिक, मार्च 2017 में कनिष्क ज्वैलरी का डिफॉल्ट सामने आया था। जब उसने 8 सदस्य बैंकों का ब्याज नहीं चुकाया। इसके बाद अप्रैल 2017 में सभी 14 बैंकों का ब्याज चुकाने में असमर्थता जताते हुए पेमेंट रोक दी। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने कंपनी के प्रमोटर और डायरेक्टर से संपर्क किया लेकिन वह नहीं मिले। 25 मई 2017 को कनिष्क के कॉर्पोरेट ऑफिस का दौरा करने बैंकर्स पहुंचे, लेकिन फैक्ट्री और शोरूम दोनों ही बंद थे। भूपेश जैन ने उसी दिन बैंकों को लेटर लिखकर दस्तावेजों में फर्जीवाड़े और सभी स्टॉक को हटाने के बारे में बताया। मद्रास ज्वैलर्स एंड डायमंड मर्चेंट एसोसिएशन के एक सदस्य के मुताबिक, कनिष्क गोल्ड लगातार घाटे में जा रही थी और उसके लिए काम जारी रखना संभव नहीं हो पा रहा था। मई 2017 में ही उसने घाटे से बचने के लिए अपने सभी आउटलेट्स बंद कर दिए।

SBI ने अकेले 240 करोड़ का लोन दिया
जानकारी के अनुसार एसबीआई ने ज्वैलरी कंपनी को 240 करोड़ रुपए लोन दिया था। इसके अलावा पीएनबी ने 128 करोड़, आईडीबीआई ने 49 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया ने 46 करोड़, सिंडिकेट बैंक ने 54 करोड़, यूनियन बैंक ने 53 करोड़, यूकों बैंक ने 45 करोड़, सेंट्रल बैंक ने 22 करोड़, कॉरपोरेशन बैंक ने 23 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 32 करोड़, तमिलनाडु बैंक ने 27 करोड़, एचडीएफसी बैंक ने 27 करोड़, आईसीआईसीआई बैंक ने 27 करोड़ और आंध्रा बैंक ने 32 करोड़ रुपए लोन दिया था।

नीरव मोदी केस से कैसे अलग है ये फ्रॉड?
यह मामला नीरव मोदी और मेहुल चौकसी द्वारा पीएनबी में किए गए फ्रॉड से अलग है। पीएनबी के मामले में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग का गलत इस्तेमाल कर बैंक से पैसे लिए गए। कनिष्‍क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड के मामले में बैंक को गलत फाइनेंशियल एस्टेमेंट और रिकॉर्ड दिखाकर लोन लिया गया। कुल लोन 824 करोड़ रुपए का है, लेकिन ब्याज सहित यह र‍कम इससे कहीं ज्यादा बताई जा रही है।

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Box Office पर इस हफ़्ते पड़ेगी Raid, जानिये कितना माल बरामद होगा

अजय देवगन ने रोमांटिक फिल्मों से अपना फिल्मी सफ़र शुरू किया था और फिर एक्शन, इमोशन से लेकर कॉमेडी में भी हाथ आजमाया। रियलिस्टिक फिल्मों में भी उनका खासा दखल रहा और अब वो बड़े परदे पर एक और सच्ची कहानी लेकर आ रहे हैं फिल्म रेड के जरिये।

‘नो वन किल्ड जेसिका और आमिर जैसी फिल्म बनाने वाले निर्देशक राजकुमार गुप्ता रेड (Raid) इसी हफ़्ते यानि 16 मार्च रिलीज़ हो रही है। फिल्म के नाम से ही तय है कि ये कहानी छापामारी की है। इस बार मामला आयकर विभाग से जुड़ा है और कहानी भी उसी इनकम टैक्स के रेड की है, जिसके बारे में सुनकर बड़े बड़े मालदार हिल जाते हैं। फिल्म रेड, 1981 में उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में हुई एक सच्ची घटना पर आधारित है। फिल्म में अजय इनकम टैक्स ऑफिसर बने हैं और उनकी भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिम है।

…ये कहानी है लखनऊ के इनकम टैक्स कमिश्नर शारदा प्रसाद पांडे की, जिसने साल 1981 में लखनऊ के बड़े उद्योगपति सरदार इंदर सिंह के यहां छापा मारा था। इस दौरान 420 करोड़ रूपये मूल्य के गहने और कैश की संपत्ति बरामद की गई। करीब 18 घंटे तक चली इस रेड में नोट गिनने के लिए 45 लोग लगे थे।…

फिल्म में इलियाना डिक्रूज़, अजय की पत्नी के किरदार में हैं और फिल्म सौरभ शुक्ला, अमित सयाल और पुष्पा जोशी का बड़ा रोल है। इस फिल्म की कहानी ‘पिंक’ जैसी बेहतरीन फिल्म के राइटर रितेश शाह ने लिखी है। फिल्म रेड में अजय का काफ़ी इंटेंस लुक दिख रहा है। अजय की पिछली फिल्म गोलमाल रिटर्न्स के फैन्स के लिए ये काफ़ी अलग फिल्म होगी लेकिन अजय देवगन को ऐसे किरदार बहुत सूट करते हैं ये सभी जानते हैं। करीब दो घंटे की इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने यू/ए सर्टिफिकेट के साथ पास किया है।

पाकिस्तान ने फिल्म रेड को अपने यहाँ रिलीज़ की हरी झंडी दे दी है।

जानकारी के मुताबिक रेड को दस करोड़ के प्रचार खर्च के साथ करीब 40 करोड़ रूपये में बनाया गया है और इसे देश भर में 2500 से अधिक स्क्रीन्स में रिलीज़ किया जाएगा। ट्रेड सर्किल के मुताबिक फिल्म को पहले दिन 10 से 12 करोड़ रूपये के कलेक्शन का अनुमान है। रेड के लिए सबसे ख़ास बात ये है कि इसके साथ इस हफ़्ते को भी आल इंडिया रिलीज़ नहीं है और अगले हफ़्ते भी रानी मुखर्जी की हिचकी को छोड़ कर कोई बड़ी फिल्म नहीं है। हां, सोनू के टीटू की स्वीटी का अच्छा बिज़नेस थोड़ा प्रभावित कर सकता है।

अजय देवगन की पिछले साल आई फिल्म गोलमाल अगेन ने पहले दिन 30 करोड़ 14 लाख रूपये का कलेक्शन किया था।

अजय देवगन-इलियाना डिक्रूज़ के कम्बीनेशन वाली बादशाहो ने पहले दिन 12 करोड़ 60 लाख रूपये का कलेक्शन किया था।

राजकुमार गुप्ता की नो वन किल्ड जेसिका को पहले दिन तीन करोड़ 25 लाख रूपये की कमाई हुई थी।

वैसे अजय देवगन, अक्षय कुमार की तरह सोशल रेस्पोंसिबिल्टी निभाने वाली फिल्मों की तरफ़ तो नहीं मुड़े हैं लेकिन सच्ची घटनाओं से जुड़े सस्पेंस और थ्रिलर में उनकी ख़ासी दिलचस्पी रही है।

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Sonu Ke Titu Ki Sweety collection: Kartik Aryan’s cheeky comedy mints Rs 73 cr at Box Office

Produced by Krishan Kumar and Bhushan Kumar under the banner of T-Series, ‘Sonu Ke Titu Ki Sweety’ has performed extremely well in the International market as well.

The film also stars Alok Nath, Virendra Saxena and Ishita Raj Sharma in pivotal roles.

‘Sonu Ke Titu Ki Sweety’ marks the fourth collaboration between director Luv Ranjan and actors Kartik Aryan and Nushrat Bharucha after ‘Pyaar Ka Punchnama’, ‘Akaash Vani’ and ‘Pyaar Ka Punchnama 2’.

Looking at the Box Office figures, the film has turned out to be a success and has emerged as the third best opener of this year after ‘Padmaavat’ and ‘PadMan’.

The collection number of the film is surprisingly great as it does not feature any A-rated star. In addition, the film did not even see a festival or a Holiday release.

Anushka Sharma’s home production horror flick ‘Pari’, which released on March 2, has received a lukewarm response as the film has so far earned Rs 19.35 crore at the ticket counter.

‘Padmaavat’ starring Deepika Padukone, Ranveer Singh and Shahid Kapoor, has so far minted Rs 286 crore at the Box Office. On the other hand, Akshay Kumar-Radhika Apte-starrer ‘PadMan’ has pocketed 78 crore.

Ajay Devgn-Ileana D’Cruz-starrer ‘Raid’ is the next big release of the month before Rani Mukerji’s ‘Hichki’. ‘Raid’ releases on March 16 and Hichki hit the screens in the following week.

Kartik Aryan’s ‘Sonu Ke Titu Ki Sweety’ has turned out to be an impressive watch. After stunning the viewers with its collections on the first day, the film has crossed the 70 crore-mark on the thirteenth day.

The film, which is directed by Luv Ranjan made a net collection of Rs 2.58 crore on Wednesday thereby taking its total collections to Rs 73.26 crore.

Trade expert, Taran Adarsh took to Twitter to share the collections, he wrote, “#SonuKeTituKiSweety continues its HEROIC RUN… [Week 2] Fri 5.83 cr, Sat 6.55 cr, Sun 7.02 cr, Mon 2.71 cr, Tue 2.62 cr, Wed 2.59 cr. Total: ₹ 73.26 cr. India biz… SUPER-HIT… #SKTKS.”

Although ‘Sonu Ke Tweety’ has better chances of earning more in the coming week, one can not overlook the fact that Anushka’s ‘Pari’ has also made its way to the theatres. The audience would want to see Anushka in a spooky avatar and hence ‘Sonu…’ will end up having a tough competition at the box office.

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जांच एजैंसियों की साख पर धब्बा है पी.एन.बी. घोटाला

बगैर सोचे-समझे उद्योगपतियों के आगे लाल कालीन बिछाने की सरकारी प्रवृत्ति का ही नतीजा है कि नीरव मोदी पी.एन.बी. से 11 हजार 300 करोड़ रुपए लेकर चम्पत हो गया। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय ने बगैर देरी किए भगौड़े हीरा व्यापारी की सम्पत्ति जब्त करने का काम शुरू कर दिया। सवाल यह नहीं है कि मोदी देश को चूना लगा कर कैसे फरार हो गया।

बड़ा प्रश्न यह है कि अरबों-खरबों कमाने वाले उद्यमियों का ऐसा दुस्साहस कैसे हो जाता है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों की मिलीभगत से देशद्रोह जैसा कृत्य करें। इससे पहले विजय माल्या और ललित मोदी भी सरकारी बैंकों से हजारों करोड़ का ऋण लेकर सरेआम सरकारों को अंगूठा दिखाते हुए देश छोड़ चुके हैं। हर्षद मेहता, सत्यम कम्प्यूटर, शारदा गु्रप घोटाला सहित दर्जनों चिटफंड कम्पनियों की ठगी जगजाहिर है। इन घोटालों ने न केवल देश की वित्तीय नींव हिला दी, बल्कि वित्तीय अंतर्राष्ट्रीय साख को भी भारी नुक्सान पहुंचाया। ऐसे घोटालों से ही विदेशी निवेशकों का विश्वास टूटता है।

सरकारें चाहे किसी भी दल की सत्ता में रही हों, देश के नागरिकों की खून-पसीने की कमाई पर ऐसे धोखेबाजों ने डाका डालने में कसर नहीं रखी। बैंकों और वित्तीय संस्थानों की मिलीभगत से अरबों-खरबों के वारे-न्यारे किए गए। सत्ता में चाहे कांग्रेस रही हो या भाजपा, सबकी नींद तभी खुली जब आम लोगों की कमाई बड़े पैमाने पर लुट गई। ऐसा भी नहीं है कि आंखों में धूल झोंक कर लूटने का यह सिलसिला यकायक हुआ है। बाकायदा सुनियोजित तरीके से इन्हें अंजाम दिया गया। ठगी के इन आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण हर दल ने दिया।

हद तो यह है कि तृणमूल कांग्रेस जैसे क्षेत्रीय दल तो शारदा के घोटालेबाजों के समर्थन में आ खड़े हुए हैं। लोगों की मेहनत की कमाई को बचाने की उम्मीद सरकारों से की जाती है। इसके विपरीत तृणमूल ने केन्द्र सरकार पर दुर्भावना से कार्रवाई के आरोप लगाए। आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई में बाधाएं खड़ी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राजनीतिक दलों की धनकुबेरों के समक्ष समर्पण करने की दुष्प्रवृत्तियों ने ऐसे घोटालों का बीजारोपण किया है। राजनीतिक दल उद्योगपतियों के पलक-पांवड़े बिछाने को तत्पर रहते हैं। भले ही उन पर कितने ही गंभीर आरोप क्यों न लगे हों।

ऐसे घोटालेबाजों को अच्छी तरह पता रहता है कि नौकरशाही और नेताओं को अपने स्वार्थों के लिए किस तरह इस्तेमाल करना है। सत्ता के करीबी होने का फायदा उठाते हुए मिलीभगत से ऐसे दगाबाज देश से धोखाधड़ी कर गए। राजनीतिक दलों के नेताओं और नौकरशाहों को विदेशों मेंं शाही दावतें चॢचत रही हैं। सिद्धांतों और कानून की दुहाई देने वालों को माल्या आईना दिखाते हुए अपना उल्लू सीधा कर गया। माल्या को पाला-पोसा कांग्रेस ने और राज्यसभा का सदस्य बनवा कर सिर पर चढ़ाया भाजपा ने। अब दोनों ही दल हीरा व्यापारी के घोटाले को लेकर एक-दूसरे पर आरोपों का कीचड़ उछालने का काम कर रहे हैं।

जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि देश को ठगने वाले ऐसे धोखेबाजों से राजनीतिक दलों ने कितना चंदा लिया। राजनीतिक दलों से करीबियां बढ़ाने के लिए ऐसे लोग चंदे का इस्तेमाल हथियार की तरह करते रहे हैं। व्यापार की आड़ में ऐसे फरेबियों की जानकारी निगरानी करने वाली सरकारी एजैंसियों को रहती है। नौकरशाही चेहरा देख कर तिलक करने में माहिर है। यह जानते हुए भी गैर-कानूनी काम हो रहा है, नौकरशाही सत्ता के करीब होने के कारण कार्रवाई करने से कतराती है। नीरव मोदी, ललित मोदी हो या माल्या सभी के मामलों में सरकारी एजैंसियों को पहले ही वित्तीय हेराफेरी की सूचना मिल चुकी थी। यही वजह रही नीरव मोदी प्रधानमंत्री के साथ दावोस यात्रा में जाने में कामयाब हो गया जबकि इसके विरुद्ध मामला दर्ज हो चुका था।

केन्द्र सरकार के भ्रष्टाचार से लडऩे के इरादों के विपरीत निगरानी और सुरक्षा एजैंसियों ने आरोपी को यात्रा से रोका नहीं। ऐसा भी नहीं है कि मोदी को यात्रा में साथ ले जाने से रोकने का एजैंसियां गंभीरता से प्रयास करतीं तो सरकार अड़ंगा लगा देती। बावजूद इसके अफसरों ने घुटने टेक दिए। किसी ने उसे रोकने का साहस नहीं दिखाया। यही वजह रही है कि वित्तीय भ्रष्टाचारों के ज्यादातर मामलों में आरोपी निगाहों से काजल चुरा कर देश छोडऩे में कामयाब हो गए।

प्रवर्तन निदेशालय ने मोदी की संपत्ति जब्त करने का काम किया है। यही काम उसके फरार होने से पहले भी किया जा सकता था। यदि कड़ी कार्रवाई की जाती तो मोदी के साथ ऐसे दूसरे लोगों को भी सीख मिल जाती। केन्द्र सरकार मोदी के प्रत्यार्पण का प्रयास कर रही है। ललित मोदी और माल्या को वापस लाने में अभी तक सफलता नहीं मिली है। ऐसे में नीरव मोदी के प्रत्यार्पण के प्रयास भी केवल प्रयास ही लगते हैं। ऐसे धोखेबाज देश छोडऩे से पहले ही चाक-चौबंद इंतजाम करके जाते हैं। जिन देशों में शरण लेते हैं, यहां का धन वहां निवेश करते हैं। भारत की दोहरी नागरिकता की नीति का बेजा फायदा उठाते हुए दूसरे देश की नागरिकता ले लेते हैं। भारी पूंजी निवेश और नागरिकता लेने से भारतीय एजैंसियों के लिए उनका प्रत्यार्पण करना आसान नहीं होता।

सरकारी एजैंसियां जो तत्परता इनके प्रत्यार्पण के लिए कर रही हैं, यदि वही देश छोड़ कर फरार होने से पहले की जाती तो ऐसी नौबत ही नहीं आती।

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BOX OFFICE: 10 करोड़ की ओपनिंग के साथ अय्यारी, अक्षय कुमार का रोकेगी रास्ता!

सिद्धार्थ मल्होत्रा और मनोज बाजपेयी की बहुप्रतीक्षित फिल्म अय्यारी आखिरकार इस शुक्रवार, 16 फरवरी को रिलीज हो रही है। नीरज पांडे के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक्शन- क्राइम थ्रिलर फिल्म है। लिहाजा, फैंस को इसका बेसब्री से इंतजार है।

25 जनवरी से पोस्टपोंड होते होते आखिकार फिल्म 16 फरवरी को रिलीज होने के लिए तैयार है। देखना दिसचस्प होगा कि क्या अय्यारी बॉक्स ऑफिस पर अब पैडमैन का रास्ता रोक देगी? या पैडमैन अपनी जबरदस्त गति बनाएगी रखेगी! ट्रेड पंडितों की मानें तो अय्यारी 8-10 करोड़ तक की ओपनिंग दे सकती है। जबकि पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ का फायदा फिल्म को वीकेंड पर मिल सकता है।

सच कहा जाए नीरज पांडे के फिल्मों की शानदार फैन फॉलोइंग है, जिन्हें उनकी फिल्म का इंतजार होता है।  लिहाजा, देखना दिलचस्प होगा कि अय्यारी बॉक्स ऑफिस पर कैसा कमाल दिखाती है।

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PNB में हुआ 11500 करोड़ का देश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला

पंजाब नेशनल बैंक में देश का बड़ा बैंकिंग घोटाला हुआ है. ये घोटाला करीब साढ़े 11000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का है. पीएनबी ने बुधवार को शेयर बाज़ार को मुंबई स्थित शाखा में घोटाले की जनाकारी दी. इस घोटाले में कारोबारी नीरव मोदी का नाम सामने आया है. घोटाला सामने आने के बाद पीएनबी ने अपने 10 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. पीएनबी ने बताया कि कुछ खाताधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए लेन-देन की गई. इन लेन-देन के आधार पर ग्राहकों को दूसरे बैंकों ने विदेशों में क़र्ज़ दिए हैं. इस ख़बर के बाद पंजाब नेशनल बैंक के शेयर 10 फीसदी तक टूटे हैं.
10 बातें
  1. पीएनबी ने माना है कि कुछ लोगों की मिलीभगत से कुछ खातेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए ये घपला किया गया है। बैंक का ये भी कहना है कि इस लेनदेन के आधार पर ऐसा लगता है कि दूसरे बैंकों ने भी विदेश में भी इन ग्राहकों को एडवांस दिए हैं यानी दूसरे बैंकों पर भी इसका असर पड़ सकता है. ये खबर ऐसे समय आई है कि जब भारत का बैंकिंग सेक्टर एक संकट से पहले ही गुज़र रहा है.
  2. दस दिन से भी कम के समय में यह बैंक धोखाधड़ी का दूसरा मामला सामने आया है. इससे पहले पांच फरवरी को सीबीआई ने अरबपति हीरा कारोबारी नीरव मोदी, उनकी पत्नी, भाई और एक व्यापारिक भागीदार के खिलाफ वर्ष 2017 में पीएनबी के साथ 280.70 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था.
  3. पीएनबी की शिकायत पर सीबीआई ने मोदी, उनके भाई निशाल, पत्नी एमी और मेहुल चिनूभाई चौकसी ने बैंक अधिकारियों के साथ साजिश में बैंक के साथ धोखाधड़ी करने और उसके गलत तरीके से नुकसान पहुंचने का केस दर्ज किया है.
  4. सीबीआई ने मोदी, उनके भाई निशाल, पत्नी एमी और मेहुल चीनूभाई चौकसी के आवास पर छापेमारी भी की है. ये सभी डायमंड्स आर यूएस, सोलर एक्सपोर्ट्स और स्टेलर डायमंड्स में भागीदार हैं. दो बैंक अधिकारियों के आवास पर भी छापेमारी की गई है.
  5. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में हुई 280 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के संबंध में नीरव मोदी एवं अन्य के खिलाफ मनी लॉड्रिंग का मामला दर्ज किया है। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी के आधार पर दर्ज किया गया है।
  6. वित्त मंत्रालय ने पीएनबी के 11,300 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को खारिज किया और कहा कि यह मामला ‘नियंत्रण के बाहर’ नहीं है और इस बारे में उचित कार्रवाई की जा रही है.
  7. वित्त मंत्रालय ने सभी बैंकों को इस मामले से जुड़ी या इस प्रकार की घटनाओं के संबंध में इस सप्ताह के अंत तक रिपोर्ट देने को कहा है.
  8. चार बड़ी आभूषण कंपनियां गीतांजलि, गिन्नी, नक्षत्र और नीरव मोदी जांच के घेरे में हैं. सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय उनकी विभिन्न बैंकों से सांठगाठ और धन के अंतिम इस्तेमाल की जांच कर रहे हैं.’’ इन कंपनियों से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है.
  9. नीरव मोदी फोर्ब्स की भारतीय अमीरों की सूची में भी शामिल रहे हैं.
  10. वर्ष 2015 में बैंक आफ बड़ौदा में भी दिल्ली के दो कारोबारियों द्वारा 6,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था.
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BOX OFFICE पर थम ही नहीं पा रही टाईगर की दहाड़, 41 दिन और पीके को पछाड़ा !

सलमान खान स्टारर टाईगर ज़िंदा है बॉक्स ऑफिस पर थमने का नाम ही नहीं ले रही है। फिल्म की रिलीज़ को 41 दिन हो चुके हैं और आखिरकार पीके की कमाई खा चुके हैं।

दरअसल, 40 दिन में ही सलमान इस आंकड़े से केवल 2.5 करोड़ की दूरी पर थे और अब आधिकारिक रूप से सलमान ने पीके के 338 करो़ड को पीछे छोड़ दिया है।

अब सलमान खान का अगला टार्गेट होगा दंगल के 380 करोड़ जिसे छूना फिलहाल तो मुश्किल लग रहा है क्योंकि टाईगर ज़िंदा अब केवल 600 स्क्रीन पर लगी है। अगले शुक्रवार दो बड़ी फिल्में रिलीज़ हो रही हैं।

ऐसे में सलमान का दंगल का रिकॉर्ड तोड़ना मुश्किल ही लग रहा है। लेकिन टाईगर ज़िंदा है के साथ बॉलीवुड को मिल गई है उसकी पांचवीं 300 करोड़ी फिल्म।

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जी हां, अभी तक बॉलीवुड का 300 करोड़ क्लब इसी तरह सूखा पड़ा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ, ये तय है कि सलमान खान ने 300 करोड़ क्लब में एंट्री लेने के बाद भी आमिर को मात नहीं दी।

टाईगर ज़िंदा है ने रिलीज़ के 17 दिन बाद जाकर 300 करोड़ क्लब में एंट्री ले पाई। जबकि आमिर की हालिया फिल्मों ने ये काम काफी फटाक से किया है।

जानिए बॉलीवुड के 300 करोड़ क्लब का रिपोर्ट कार्ड

दंगल

दंगल

आमिर खान स्टारर दंगल, इस समय 300 करोड़ क्लब की टॉप फिल्म है। नितेश तिवारी की इस फिल्म ने ग्लोबल बॉक्स ऑफिस में झंडा गाड़ते हुए कुल 2100 करोड़ की कमाई कर डाली है।

13 दिन में 300

दंगल की शुरआत धीमी थी लेकिन फिल्म का वर्ड ऑफ माउथ काफी तगड़ा था। और इसलिए हर दिन फिल्म की कमाई ने शानदार इज़ाफा किया था। फिल्म 23 दिसंबर 2016 को रिलीज़ हुई और 13 दिन में 300 करोड़ कमा चुकी थी।

पीके

पीके

पीके जब से खबरों में आई तब से ही पीके ने धमाका करना शुरू कर दिया था। फिल्म ने ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर 790 करोड़ की कमाई की। और आमिर खान ने साबित किया था कि उनसे बेहतर इस बिज़नेस को कोई नहीं जानता।

17 दिन में 300

17 दिन में 300

पीके को 300 करोड़ कमाने में केवल 17 दिन लगे थे। हालांकि फिल्म की शुरूआत, हर आमिर खान फिल्म की तरह धीमी थी। लेकिन धीरे धीरे इसने कंट्रोवर्सी के दम पर तेज़ी पकड़ी।

बजरंगी भाईजान

बजरंगी भाईजान

सलमान खान स्टारर बजरंगी भाईजान, कबीर खान का बेस्ट कही जाती है। फिल्म ने सलमान खान का इमोशनल रूप सबके सामने लाया था। और इसी बदौलत फिल्म ने वर्ल्डवाइड 626 करोड़ की कमाई की।

25 दिन में 300

25 दिन में 300

बजरंगी भाईजान ने शुरूआत ताबड़तोड़ की थी लेकिन धीरे धीरे फिल्म ने अपनी गति छोड़ दी थी। फिल्म को 300 करोड़ कमाने में 25 दिन लगे और फिल्म ने कुल 320 करोड़ की कमाई की थी।

सुलतान

सुलतान

सलमान खान का सुलतान अवतार किसी ने पहले नहीं देखा था। और इसलिए उन्हें ऐसे देख सब चौंक गए। फिल्म ने वर्ल्डवाइड 589 करोड़ की कमाई की।

पूरे 35 दिन

पूरे 35 दिन

सुलतान को 300 करोड़ की कमाई तक पहुंचने के लिए पूरे 35 दिन लगे। दिलचस्प ये है कि फिल्म 300 करोड़ कमाई कर के वहीं रूक भी गई।

टाईगर नहीं तोड़ पाया रिकॉर्ड

टाईगर नहीं तोड़ पाया रिकॉर्ड

अब ये तो तय है कि टाईगर ज़िंदा है आमिर खान से पीछे ही है। लेकिन ये तय है कि सलमान खान पीके का रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं। अब देखना है कि दंगल उनके हाथ आती है या नहीं।

अपना रिकॉर्ड तोड़ेंगे सलमान

अपना रिकॉर्ड तोड़ेंगे सलमान

सलमान खान अपनी दोनों फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं औऱ टाईगर ज़िंदा है, सबसे तेज़ 300 करोड़ कमाने वाली सलमान की पहली फिल्म है।