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जांच एजैंसियों की साख पर धब्बा है पी.एन.बी. घोटाला

बगैर सोचे-समझे उद्योगपतियों के आगे लाल कालीन बिछाने की सरकारी प्रवृत्ति का ही नतीजा है कि नीरव मोदी पी.एन.बी. से 11 हजार 300 करोड़ रुपए लेकर चम्पत हो गया। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय ने बगैर देरी किए भगौड़े हीरा व्यापारी की सम्पत्ति जब्त करने का काम शुरू कर दिया। सवाल यह नहीं है कि मोदी देश को चूना लगा कर कैसे फरार हो गया।

बड़ा प्रश्न यह है कि अरबों-खरबों कमाने वाले उद्यमियों का ऐसा दुस्साहस कैसे हो जाता है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों की मिलीभगत से देशद्रोह जैसा कृत्य करें। इससे पहले विजय माल्या और ललित मोदी भी सरकारी बैंकों से हजारों करोड़ का ऋण लेकर सरेआम सरकारों को अंगूठा दिखाते हुए देश छोड़ चुके हैं। हर्षद मेहता, सत्यम कम्प्यूटर, शारदा गु्रप घोटाला सहित दर्जनों चिटफंड कम्पनियों की ठगी जगजाहिर है। इन घोटालों ने न केवल देश की वित्तीय नींव हिला दी, बल्कि वित्तीय अंतर्राष्ट्रीय साख को भी भारी नुक्सान पहुंचाया। ऐसे घोटालों से ही विदेशी निवेशकों का विश्वास टूटता है।

सरकारें चाहे किसी भी दल की सत्ता में रही हों, देश के नागरिकों की खून-पसीने की कमाई पर ऐसे धोखेबाजों ने डाका डालने में कसर नहीं रखी। बैंकों और वित्तीय संस्थानों की मिलीभगत से अरबों-खरबों के वारे-न्यारे किए गए। सत्ता में चाहे कांग्रेस रही हो या भाजपा, सबकी नींद तभी खुली जब आम लोगों की कमाई बड़े पैमाने पर लुट गई। ऐसा भी नहीं है कि आंखों में धूल झोंक कर लूटने का यह सिलसिला यकायक हुआ है। बाकायदा सुनियोजित तरीके से इन्हें अंजाम दिया गया। ठगी के इन आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण हर दल ने दिया।

हद तो यह है कि तृणमूल कांग्रेस जैसे क्षेत्रीय दल तो शारदा के घोटालेबाजों के समर्थन में आ खड़े हुए हैं। लोगों की मेहनत की कमाई को बचाने की उम्मीद सरकारों से की जाती है। इसके विपरीत तृणमूल ने केन्द्र सरकार पर दुर्भावना से कार्रवाई के आरोप लगाए। आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई में बाधाएं खड़ी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राजनीतिक दलों की धनकुबेरों के समक्ष समर्पण करने की दुष्प्रवृत्तियों ने ऐसे घोटालों का बीजारोपण किया है। राजनीतिक दल उद्योगपतियों के पलक-पांवड़े बिछाने को तत्पर रहते हैं। भले ही उन पर कितने ही गंभीर आरोप क्यों न लगे हों।

ऐसे घोटालेबाजों को अच्छी तरह पता रहता है कि नौकरशाही और नेताओं को अपने स्वार्थों के लिए किस तरह इस्तेमाल करना है। सत्ता के करीबी होने का फायदा उठाते हुए मिलीभगत से ऐसे दगाबाज देश से धोखाधड़ी कर गए। राजनीतिक दलों के नेताओं और नौकरशाहों को विदेशों मेंं शाही दावतें चॢचत रही हैं। सिद्धांतों और कानून की दुहाई देने वालों को माल्या आईना दिखाते हुए अपना उल्लू सीधा कर गया। माल्या को पाला-पोसा कांग्रेस ने और राज्यसभा का सदस्य बनवा कर सिर पर चढ़ाया भाजपा ने। अब दोनों ही दल हीरा व्यापारी के घोटाले को लेकर एक-दूसरे पर आरोपों का कीचड़ उछालने का काम कर रहे हैं।

जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि देश को ठगने वाले ऐसे धोखेबाजों से राजनीतिक दलों ने कितना चंदा लिया। राजनीतिक दलों से करीबियां बढ़ाने के लिए ऐसे लोग चंदे का इस्तेमाल हथियार की तरह करते रहे हैं। व्यापार की आड़ में ऐसे फरेबियों की जानकारी निगरानी करने वाली सरकारी एजैंसियों को रहती है। नौकरशाही चेहरा देख कर तिलक करने में माहिर है। यह जानते हुए भी गैर-कानूनी काम हो रहा है, नौकरशाही सत्ता के करीब होने के कारण कार्रवाई करने से कतराती है। नीरव मोदी, ललित मोदी हो या माल्या सभी के मामलों में सरकारी एजैंसियों को पहले ही वित्तीय हेराफेरी की सूचना मिल चुकी थी। यही वजह रही नीरव मोदी प्रधानमंत्री के साथ दावोस यात्रा में जाने में कामयाब हो गया जबकि इसके विरुद्ध मामला दर्ज हो चुका था।

केन्द्र सरकार के भ्रष्टाचार से लडऩे के इरादों के विपरीत निगरानी और सुरक्षा एजैंसियों ने आरोपी को यात्रा से रोका नहीं। ऐसा भी नहीं है कि मोदी को यात्रा में साथ ले जाने से रोकने का एजैंसियां गंभीरता से प्रयास करतीं तो सरकार अड़ंगा लगा देती। बावजूद इसके अफसरों ने घुटने टेक दिए। किसी ने उसे रोकने का साहस नहीं दिखाया। यही वजह रही है कि वित्तीय भ्रष्टाचारों के ज्यादातर मामलों में आरोपी निगाहों से काजल चुरा कर देश छोडऩे में कामयाब हो गए।

प्रवर्तन निदेशालय ने मोदी की संपत्ति जब्त करने का काम किया है। यही काम उसके फरार होने से पहले भी किया जा सकता था। यदि कड़ी कार्रवाई की जाती तो मोदी के साथ ऐसे दूसरे लोगों को भी सीख मिल जाती। केन्द्र सरकार मोदी के प्रत्यार्पण का प्रयास कर रही है। ललित मोदी और माल्या को वापस लाने में अभी तक सफलता नहीं मिली है। ऐसे में नीरव मोदी के प्रत्यार्पण के प्रयास भी केवल प्रयास ही लगते हैं। ऐसे धोखेबाज देश छोडऩे से पहले ही चाक-चौबंद इंतजाम करके जाते हैं। जिन देशों में शरण लेते हैं, यहां का धन वहां निवेश करते हैं। भारत की दोहरी नागरिकता की नीति का बेजा फायदा उठाते हुए दूसरे देश की नागरिकता ले लेते हैं। भारी पूंजी निवेश और नागरिकता लेने से भारतीय एजैंसियों के लिए उनका प्रत्यार्पण करना आसान नहीं होता।

सरकारी एजैंसियां जो तत्परता इनके प्रत्यार्पण के लिए कर रही हैं, यदि वही देश छोड़ कर फरार होने से पहले की जाती तो ऐसी नौबत ही नहीं आती।

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जिया खान केस में आरोप तय होने के बाद सलमान के इस ‘हीरो’ का फिल्मी भविष्य खतरे में

मुंबई के सत्र न्यायालय ने जिया खान आत्महत्या मामले में आरोपी अभिनेता सूरज पंचोली के ख़िलाफ़ आरोप तय कर दिए हैं। और इस कारण हिंदी फिल्मों में बतौर हीरो लॉन्च हुए सूरज का फिल्मी करियर अब खतरे में नज़र आ रहा है।

मंगलवार को मुंबई की एक अदालत ने सूरज के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत आरोप तय कर दिया और अब इस मामले में गवाहों की तफ़तीश 14 फरवरी से शुरू होगी। सूरज ने अदालत में ख़ुद को निर्दोष बताया है। अमिताभ बच्चन के साथ निशब्द सहित कई फिल्मों में काम कर चुकी जिया खान साल 2013 में तीन जून को अपने घर पर मृत पाई गई थीं। उन्होंने गले में फ़ांस लगा कर ख़ुदकुशी की थी लेकिन उनकी माँ ने अदालत में जिया के ख़ास दोस्त सूरज पंचोली के ख़िलाफ़ केस दर्ज़ करते हुए आरोप लगाया कि जिया सूरज के साथ पिछले दो दिन से रह रही थी और उसी दिन अपने घर वापस आई थी जिसके बाद उसने ये कदम उठाया। उसने सूरज की वजह से मौत को गले लगाया है। उसी साल अक्टूबर में जिया खान ने मुंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सीबीआई जांच की मांग करते हुए दावा किया कि उनकी बेटी की ह्त्या की गई है।

अभी हाल ही में जिया ख़ान की मां राबिया ख़ान की याचिका पर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने सूरज के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने के लिए निचली अदालत को निर्देश दिए थे। अपनी जांच के दौरान सीबीआई ने भी बताया कि सूरज ने पूछताछ में तथ्यों को छिपाया और मनगढ़ंत जानकारी दी। केस की जांच के दौरान सूरज ने ब्रेन मैपिंग टेस्ट करवाने से भी मना कर दिया था।

अब सवाल उठता है कि सूरज पंचोली के फिल्मी करियर का क्या होगा? आदित्य पंचोली और ज़रीना वहाब के बेटे सूरज ने साल 2015 में फिल्म हीरो से बॉलीवुड में एंट्री ली थी। ये सलमान खान प्रोडक्शन की फिल्म थी और इस फिल्म में उन्होंने सूरज के साथ सुनील शेट्टी की बेटी अतिया को भी लांच किया था। सूरज की अब तक वो पहली और आख़िरी फिल्म है क्योंकि उसके बाद से उनके नेक्स्ट प्रोजेक्ट को लेकर कई तरह की ख़बरें आई लेकिन कुछ फाइनल नहीं हुआ। अभी हाल ही में एक अवॉर्ड शो में आये सूरज ने बताया था कि उनकी अगली फिल्म की शूटिंग 20 से 25 दिनों में शुरू हो रही है। ये फिल्म भी प्रेम कहानी है। जिसमें अधिक एक्शन भी होगा। बताया जाता है कि ये फिल्म रेमो डिसूज़ा निर्देशित करने वाले हैं, जिसमें अजय देवगन भी होंगे लेकिन इस फिल्म का क्या हुआ कुछ पता नहीं क्योंकि रेमो इन दिनों सलमान खान की रेस 3 को डायरेक्ट कर रहे हैं।

पिछले साल जून में सूरज ने ट्विट कर बताया था कि वो प्रभुदेवा की फिल्म में काम करने जा रहे हैं, हालांकि उसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं है क्योंकि प्रभुदेवा कुछ महीनों बाद सलमान खान के साथ दबंग 3 को डायरेक्ट करेंगे। ऐसे में माना जा सकता है कि इस केस के चलते सूरज के फिल्मी भविष्य पर अभी संकट के बादल हैं।