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मुख्य सचिव मारपीट केस में पुलिस के पास है ये अहम सबूत, घेरे में केजरीवाल व सिसोदिया

मुख्य सचिव से मारपीट मामले में पुलिस मुख्यमंत्री आवास से बरामद सीसीटीवी फुटेज की फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। हाई प्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस सीसीटीवी फुटेज को देख भी नहीं पाई। घटनास्थल से पुलिस ने चार डीवीआर जब्त किए हैं।

बढ़ सकती हैं ‘आप’ विधायकों की मुश्किलें 

माना जा रहा है कि जांच की रिपोर्ट सोमवार तक आ जाएगी। इसके बाद पुलिस आगे की कार्रवाई शुरू करेगी।मुख्य सचिव मारपीट मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर रिपोर्ट सौंप दी है। माना जा रहा है कि मामले में आरोपी ‘आप’ विधायकों मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

केजरीवाल व सिसोदिया से हो सकती है पूछताछ 

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जांच रिपोर्ट के अनुसार घटनास्थल पर मौजूद विधायकों की लिस्ट तैयार कर पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगी। इस मामले में विधायकों पर कार्रवाई के अलावा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से भी पूछताछ हो सकती है।

‘आप’ विधायकों पर कसने लगा शिकंजा 

अंशु प्रकाश सभी आरोपी विधायकों को नहीं पहचानते थे। शुरुआत में उन्होंने मारपीट करने वाले ‘आप’ विधायक अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जारवाल के बारे में बताया था। बाद में उन्होंने अंबेडकर नगर के विधायक अजय दत्त और लक्ष्मी नगर के विधायक नितिन त्यागी की पहचान की थी। जिसके बाद पुलिस ने अमानतुल्लाह और प्रकाश जारवाल को गिरफ्तार कर अजय और नितिन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था।

अहम है सीसीटीवी कैमरे की फुटेज

वहीं, पुलिस को वारदात के वक्त मुख्यमंत्री आवास पर जनकपुरी के पूर्व विधायक राजेश ऋषि, वजीरपुर के पूर्व विधायक राजेश गुप्ता, किराड़ी के विधायक ऋतुराज गोविंद, कस्तूरबा नगर के पूर्व विधायक मदन लाल, जंगपुरा के पूर्व विधायक प्रवीण कुमार, संगम विहार के विधायक दिनेश मोहनिया और बुराड़ी के पूर्व विधायक संजीव झा के भी मौजूद होने का पता चला है। पुलिस इनपर कार्रवाई से पूर्व पुख्ता सबूत एकत्र कर लेना चाहती है। सलाहकार वीके जैन की अदालत में घटना के बारे में स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस के पास दूसरा सबूत सीसीटीवी कैमरे की फुटेज ही होगी।

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रूस ने उत्‍तर कोरिया के मुद्दे पर बातचीत के लिए अमेरिका को भेजा बुलावा

उत्‍तर कोरिया के मुद्दे को सुलझाने के लिए रूस अब अमेरिका से सीधे बातचीत करना चाहता है। रूस के उप-विदेश मंत्री इगोर मोर्गुलोव ने शनिवार को उत्तर कोरिया के मुद्दे पर संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच प्रत्यक्ष वार्ता करने का प्रस्‍ताव रखा है।

टीएएसएस समाचार एजेंसी के मुताबिक, अमेरिका की चेतावनी को लगातार अनदेखा करते हुए परमाणु और मिसाइल परीक्षण करने वाले उत्तर कोरिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। उत्‍तर कोरिया के खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने कई प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिका द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधों की घोषणा के बाद रूस के उप-विदेश मंत्री ने ये टिप्‍पणी की है।

खबर के मुताबिक इगोर मोर्गुलोव ने कहा, ‘मुझे यकीन है कि कोरियाई प्रायद्वीप पर वर्तमान स्थिति का को बातचीत के जरिए ही सुलझाया जा सकता है। इसलिए हम मुद्दे पर सक्रिय रूस-अमेरिकी वार्ता की मांग करते हैं।’ उन्‍होंने बताया कि मॉस्को ने उत्तर कोरिया नीति के यूएस विशेष प्रतिनिधि जोसेफ यून को वार्ता के लिए निमंत्रण भेजा है। वार्ता की तारीख के लिए अभी चर्चा चल रही है। रूसी राजनयिक ने भी वाशिंगटन और प्योंगयांग के बीच वार्ता की बात फिर से दोहराई।

गौरतलब है कि अमेरिका ने शुक्रवार को उत्तर कोरिया की शिपिंग इंडस्ट्री और ट्रेडिंग कंपनियों पर कई प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, ताकि किम जोंग-उन अपने घातक हथियारों के निर्माण पर विराम लगाए। बताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से उत्तर कोरिया के खिलाफ उठाया गया यह अब का सबसे बड़ा कदम है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने जिन 28 जलपोत और नौपरिवहन से जुड़ी जिन 27 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है, वे उत्तर कोरिया, चीन और सिंगापुर में पंजीकृत हैं। लेकिन ऐसी आशंका जताई जा रही है कि ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई से अमेरिका और उत्‍तर कोरिया के बीच तनाव बढ़ सकता है।

दरअसल, उत्‍तर कोरिया लगातार अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है जिससे पूरे विश्‍व पर खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका उत्‍तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग-उन का रोकने की हर संभव कोशिश कर रहा है। लेकिन उत्‍तर कोरिया लगातार अमेरिका को परमाणु हमले की धमकी दे रहा है। शायद रूस और अमेरिका के बीच होने वाली वार्ता में उत्‍तर कोरिया के मुद्दे का कोई हल निकले।

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13 हजार किमी तक मार कर सकती उत्तर कोरिया की हॉसॉन्ग मिसाइल, खतरे में यूएस

उत्तर कोरिया ने एक बार फिर से मिसाइल परीक्षण कर जहां अपनी मंशा जता दी है वहीं इस परीक्षण के बाद दक्षिण कोरिया समेत जापान में दहशत का माहौल है। इस मिसाइल परीक्षण के बाद अमेरिका को सीधेतौर पर खतरा बढ़ गया है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इस बार उत्तर कोरिया ने जिस मिसाइल का परीक्षण किया है वह न सिर्फ पहले से ज्‍यादा उन्‍नत है बल्कि ज्‍यादा घातक भी है। यह एक इंटर कॉंटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल आईसीबीएम थी जिसका नाम हॉसॉन्‍ग-15 बताया गया है। इस मिसाइल परिक्षण के बाद दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप से करीब 20 मिनट तक बात की और अपनी चिंता भी जताई। इस दौरान उन्‍होंने अमेरिका से उत्तर कोरिया पर फिर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्‍होंने ने यहां तक कहा है कि यदि उत्तर कोरिया बातचीत की मेज पर आता है तो सभी का भविष्‍य उज्जवल हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ इस मिसाइल के सफल परीक्षण से उत्साहित किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया को एक न्‍यूक्लियर स्‍टेट घोषित कर दिया है। मिसाइल परिक्षण के बाद उन्‍होंने इसके लिए वैज्ञानिकों को बधाई भी दी है।

13 हजार किमी की दूरी तक जा सकती है मिसाइल

रक्षा विशेषज्ञ सी उदय भास्‍कर की नजर में उत्तर कोरिया का ताजा मिसाइल परीक्षण काफी शक्तिशाली है। उन्‍होंने सीधेतौर पर इसको अमेरिका के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। दैनिक जागरण से बात करते हुए उन्‍होंने बताया कि यह मिसाइल आईसीबीएम रेंज की है। इस लिहाज से यह दस हजार या इससे भी ज्‍यादा किमी तक जा सकती है। इन हालातों में यह अमेरिका के लिए सीधा खतरा है। उनके अलावा योनहैप एजेंसी ने वैज्ञानिक डेविड राइट के ब्‍लॉग के हवाले से बताया है कि यदि आंकड़े सही हैं तो इस मिसाइल की रेंज करीब 13 हजार किमी तक हो सकती है।

ISS से तिगुनी ऊंचाई तक गई हॉसॉन्‍ग 15

यहां पर आपको बता दें कि किम जोंग उन के नेतृत्‍व में उत्तर कोरिया अब तक दर्जनों परमाणु परीक्षण कर चुका है। इस बार उसने इंटर कॉंटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल हॉसॉन्‍ग 15 का परिक्षण किया है जो जापान के स्‍पेशल इकॉ‍नमिक जोन में जाकर गिरी है। यह मिसाइल परिक्षण इसलिए भी खास है क्‍योंकि यह करीब 4475 किमी की ऊंचाई तक गई जो कि इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन से भी तीगुनी ऊंचाई है। इसके अलावा इसने करीब 950 किमी की दूरी तय करने में करीब 53 मिनट का समय लगाया। इस लिहाज से भी यह उत्तर कोरिया की अब तक की सबसे उन्नत परमाणु मिसाइल है। यह मिसाइल हॉसॉन्‍ग 14 का ही उन्‍नत स्‍वरूप है। इस मिसाइल को लोफ्टेड एंगल से दागा गया था। जानकारों के मुताबिक यदि इसको स्‍टेंडर्ड तरीके से दागा जाता तो यह दस हजार किमी से अधिक ऊंचाई तक चली जाती।

 

पहले से ही मिल रहे थे मिसाइल परीक्षण के संकेत

यहां पर हम आपको यह भी बता देते हैं कि इस मिसाइल परीक्षण से पहले ही जापान को इस तरह के संकेत मिल रहे थे कि प्योंगयांग एक और मिसाइल परीक्षण की तैयारी कर रहा है। हालांकि किसी भी उपग्रह से परीक्षण स्थल पर इस तरह की किसी गतिविधि का पता नहीं लग सका था। इसी तरह के संकेत सियोल, टोक्यो और वाशिंगटन की सैन्य खुफिया एजेंसियों को भी हासिल हुए थे। उत्तर कोरिया के ताजा प‍रीक्षण के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री ने एक बार फिर कहा कि किम की कारगुजारियों से पूरी दुनिया को खतरा पैदा हो गया है।

खुद को बताया न्‍यूक्लियर पावर

सफल मिसाइल टेस्‍ट से उत्‍साहित किम ने अपने संदेश में कहा है कि य‍ह मिसाइल अमेरिका के किसी भी हिस्‍से को निशाना बना सकती है। हालांकि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस मिसाइल से अमेरिका को कोई खतरा नहीं है। यह मिसाइल परीक्षण हमेशा की ही तरह किम जोंग उन की देखरेख में ही किया गया है। इसके सफल परीक्षण के बाद किम ने यह भी कहा है कि इस मिसाइल परीक्षण के बाद आखिरकार हमने न्‍यूक्लियर पावर होने का अहसास हो रहा है। उन्‍होंने उत्तर कोरिया को एक उत्तरदायी परमाणु ताकत करार दिया है, जो अपने देश की रक्षा करना जानता है। इस दौरान किम ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए ही मिसाइलें और घातक हथियार विकसित किए हैं। उन्‍होंने इस मौके पर अमेरिका को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अमेरिका परमाणु हमले की धमकी देकर बार-बार उत्तर कोरिया को धमकाता रहा है।

पहले भी कर चुका है हाइड्रोजन बम का परीक्षण

गौरतलब है कि 3 सितंबर को भी उत्तर कोरिया ने सबसे ताकतवर हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया था। यह परीक्षण करीब 100 किलोटन के हाईड्रोजन बम का था। इस परीक्षण के बाद उत्तरी हमक्योंग प्रांत के किजी इलाके में करीब 5.7 और 4.6 तीव्रता के भूकंप महसूस किए गए थे। यह परीक्षण जनवरी में किए गए परमाणु परीक्षण से करीब 11.8 गुणा अधिक शक्तिशाली था। इतना ही नहीं यह बम जापान में दूसरे विश्‍व युद्ध के दौरान गिराए गए परमाणु बमों से भी करीब पांच गुणा शक्तिशाली था। इसके अलावा 15 सितंबर को भी उत्तर कोरिया की तरफ से एक बैलेस्टिक मिसाइल परीक्षण किया गया था। यह मिसाइल जापान के होकाइडो द्वीप ऊपर से गुजरी थी। इस साल उसका यह 14वां बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण था। उस वक्‍त जापान के नागरिकों को चेतावनी देने के लिए लगाए गए सायरन बज उठे थे। उस वक्‍त भी दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंध लगाने की भी अपील की थी। उत्तर कोरिया इससे पहले 2006, 2009, 2013 और 2016 में परमाणु बमों का परीक्षण कर चुका है।

(Source: Jagran)