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फ्लिपकॉर्ट में 77% हिस्सेदारी के बाद अब 85% की तैयारी में वॉलमार्ट

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब वॉलमार्ट 3 अरब डॉलर का निवेश कर फ्लिपकॉर्ट की 85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है।

 

इस बात की जानकारी दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर ने शुक्रवार को अमेरिकी सिक्यॉरिटीज और एक्सचेंज कमिशन को दी। रिटेलर ने ये भी बताया कि वॉलमार्ट के बाकी शेयर भी उसी कीमत पर खरीदे जाएंगे जिस कीमत पर 77 फीसदी शेयर खरीदे गए थे।

वॉलमार्ट ने किस दर पर फ्लिपकॉर्ट के शेयरों को हासिल किया यह जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। वॉलमार्ट की फाइलिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लिपकॉर्ट के बड़े निवेशक जापानी इंटरनेट और टैलीकॉम कंपनी सॉफ्टबैंक ने शेयरों को बेचने पर कोई फैसला नहीं किया है। सॉफ्टबैंक के पास फ्लिपकॉर्ट के करीब 22 फीसदी शेयर हैं। इससे पहले मीडिया रिपोर्टस से भी ये बात साने आई थी कि वॉलमार्ट और सॉफ्टबैंक पहले की कीमत पर ही शेयर ट्रांजेक्शन के लिए वक्त निकाल कर बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे।

एसईसी फाइलिंग के अनुसार, वॉलमार्ट 2 अरब डॉलर कैश में निवेश कर रहा है और फ्लिपकॉर्ट के मौजूदा शेयर होल्डर्स से 14 अरब डॉलर मूल्य के शेयर खरीद रहा है। वॉलमार्ट ने कहा है कि वह बोर्ड और फाउंडर की सलाह से फ्लिपकॉर्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीईओ और प्रिंसिपल एग्जिक्युटिव्ज को अपॉइंट या रिप्लेस कर सकता है। फिलहाल कल्याण कृष्णमूर्ति फ्लिपकॉर्ट के सीईओ हैं और को-फाउंडर बिन्नी बंसल ग्रुप सीईओ हैं। को-फाउंडर और एग्जिक्युटिव चैयरमैन सचिन बसंल ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया।

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स्कूटर पर सामान बेचते थे ये दोनों, आज 1 लाख करोड़ रुपये में बेचे कंपनी के 75 फीसदी शेयर!

अमेरिकी कंपनी वाल्मार्ट ने Flipkart में 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है.

आइए जानते है फिल्पकार्ट के सफर के बारे में

 देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में...

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) बिक गई है. अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने इसमें 75 फीसदी हिस्सेदारी 1500 करोड़ डॉलर यानी एक लाख करोड़ रुपये में खरीदी है. हालांकि, सचिन बंसल और विनी बंसल ने कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत मेहनत की है. उन्होंने कंपनी को 11 साल पहले महज 10 हजार रुपये में शुरू किया था. आइए जानते हैं कंपनी के इस सफर के बारे में…

 10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

10 हजार में शुरू की थी कंपनी- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से पढ़ाने करने वाले सचिन और बिन्नी ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत अक्टूबर 2007 में की थी. शुरू में इसका नाम फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड था. इतना ही नहीं, ये सिर्फ बुक्स सेलिंग का काम करते थे. दोनों इस कंपनी को शुरू करने से पहले अमेजन डॉट कॉम के साथ काम कर चुके थे. सचिन और बिन्नी बताते हैं कि दोनों ने सिर्फ 10 हजार रुपए से अपनी कंपनी को शुरू किया था, जो आज 2000 करोड़ डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो गई है.

 शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की. हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम 'Leaving Microsoft to Change the World' और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

शुरू के 10 दिन कुछ नहीं बिका- सचिन और बिन्नी ने अपनी कंपनी की शुरुआत बेंगलुरु से की थी. दोनों ने 2-2 लाख रुपए मिलाकर एक अपार्टमेंट में 2 बैडरूम वाला फ्लैट किराए पर लिया और 2 कम्प्यूटर के साथ कंपनी शुरू की.

हालांकि, कंपनी शुरू करने के 10 दिन तक कोई सेल नहीं हुई. इसके बाद, आंध्र प्रदेश के एक कस्टमर ने पहला ऑर्डर बुक किया. ये एक किताब थी जिसका नाम ‘Leaving Microsoft to Change the World’ और राइटर जॉन वुड थे. बीते सालों में फ्लिपकार्ट फर्श से अर्श पर पहुंच चुकी है और बेंगलुरु में कंपनी के कई ऑफिस हैं.

 सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

सरनेम एक, लेकिन रिश्ता नहीं-सचिन बंसल और बिन्नी बंसल इन दोनों नाम को सुनकर ऐसा लगता है कि ये भाई होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. दोनों के सरनेम भले ही एक हैं, लेकिन दोनों सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं. इन दोनों में कुछ समानताएं और भी हैं, जैसे दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं और दोनों की स्कूलिंग सेंट ऐनी कॉन्वेंट स्कूल, चंडीगढ़ से हुई हैं. इतना ही नहीं, दोनों इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली से साथ पढ़े हैं. सचिन ने साल 2005 में IIT करने के बाद एक कंपनी टेकस्पेन ज्वाइन कर ली थी. जहां सिर्फ कुछ महीने ही काम किया. इसके बाद, उन्होंने अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजिनियर के तौर पर काम किया. साल 2007 में दोनों ने अपनी कंपनी फ्लिपकार्ट को शुरू किया.

 ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.

ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट गैजेट्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लायंस, क्लॉथ, किचिन अप्लायंस, ऑटो एंड स्पोर्ट्स एक्सेसरीज, बुक्स एंड मीडिया, ज्वैलरी के साथ अन्य प्रोडक्ट भी सेल करती है. इस साइट की खास बात ये है कि ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर बिग डिस्काउंट मिलता है. वहीं, यूजर्स के पास शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-गिफ्ट बाउचर, कूपन कोड जैसे कई ऑप्शन मौजूद होते हैं.

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सरकार ने एक बार फिर बताया 670 करोड़ रुपये में खरीदा है एक राफेल जेट

राफेल सौदे को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक बार फिर सरकार ने संसद में बताया कि एक राफेल फाइटर जेट की कीमत 670 करोड़ रूपये है. रक्षा राज्यमंत्री सुभाषराव भामरे ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा में बताया कि ये कीमत बिना किसी साजों-सामान, हथियार और मेंटनेंस इत्यादि के है.

Once again, the government told that they bought a Rafael jet for Rs 670 crore
लेकिन आज ही देश के गोला-बारूद पर हुए एक सेमिनार के बाद मीडिया से बात करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीडिया से कहा कि राफेल जेट की कीमत क्या है उसपर पहले ही लिखित जवाब दे दिया गया है. मीडिया ने दरअसल, निर्मला सीतारमण से ये सवाल पूछा था कि क्या जो राफेल जेट भारत ने फ्रांस से खऱीदा है उसकी कीमत कतर और मिश्र से कम है या ज्यादा. लेकिन उन्होनें ये कहकर सवाल टाल दिया कि इस बारे में पहले ही लिखित जवाब दे दिया गया है.

एबीपी न्यूज के पास आज राज्यसभा में रक्षा राज्यमंत्री ने जो लिखित जवाब दिया है उसकी कॉपी मौजूद है. इसमें साफ तौर से लिखा है कि नबम्बर 2016 में जो मुद्रा विनियम का जो रेट था उसके हिसाब से बिना राफेल जेट के जरूरी साजों-सामान, हथियार, मेंटनेंट स्पोर्ट और सर्विस तथा भारत के हिसाब से जरूरी इन्हेंसमेंट के एक राफेल जेट की कीमत करीब 670 करोड़ रूपये है.

रक्षा राज्यमंत्री ने ये भी बताया कि ये तथ्य गलत है कि पिछली (यूपीए) सरकार ने 126 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा 10.2 बिलियन डॉलर (यानि 66 हजार करोड़ रुपये) में किया था. उन्होनें कहा 126 विमानों के लिए आरएफपी यानि रिक्यूस्ट फॉर प्रपोजल वर्ष 2007 में दी गई थी लेकिन 2014 तक भी कीमत का मोल-भाव नहीं हो पाया था.

साथ ही 108 विमानों के लिए सिर्फ बनाने का लाईसेंस था ना कि ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी यानि तकनीकी हस्तांतरण था. सुभाषराव भामरे के मुताबिक“इसलिए 126 विमानों की कीमत का उन 36 विमानों से तुलना नहीं की जा सकती जिन्हें सीधे फ्लाई-वे हालत में खरीदा जा रहा है.”

रक्षा राज्यमंत्री ने बताया कि 36 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे के लिए सीसीएस यानि कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से 24 अगस्त 2016 को मंजूरी ली गई थी और 23 सितम्बर 2016 को सौदे पर हस्ताक्षर किए गए थे.

रक्षा राज्यमंत्री ने ये भी बताया कि हिन्दुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड या फिर किसी अन्य सरकारी उपक्रम का राफेल जेट बनाने वाली कंपनी, दसॉल्ट एवियेशन से किसी भी तरह का कोई करार नहीं हुआ था. क्योंकि (पिछली) सरकार कभी भी ना तो सौदे को लेकर किसी नतीजे पर पहुंच पाई थी और ना ही कोई करार कर पाई थी.

आपको बता दें कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर सवाल खड़ी कर रही है. सवालों के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले संसद सत्र में जवाब दिया था कि सरकार राफेल सौदे की कीमत फ्रांस से हुए सुरक्षा समझौते को लेकर नहीं बता सकती है. लेकिन खुद रक्षा राज्यमंत्री नबम्बर 2016 में ही एक राफेल लड़ाकू विमान की कीमत संसद में बता चुके थे. आज दूसरी बार सरकार ने एक राफेल की कीमत बताई है.

सौदे में ऑफसेट को लेकर रिलायंस कंपनी से हुए करार पर भी रक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि राफेल जेट बनाने वाली कंपनी किसी भी भारतीय कंपनी को अपना ऑफसेट-पार्टनर चुनने के लिए स्वतंत्र है.

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भारत-वियतनाम के बीच परमाणु समेत 3 समझौते हुए, मोदी बोले- इंडो-पैसिफिक के लिए मिलकर काम करेंगे

पीएम नरेन्द्र माेदी और वियतनाम के प्रेसिडेंट त्रान दाई क्‍वांग के बीच बात-चीत के बाद शनिवार को दोनों देशों ने परमाणु सहयोग समेत तीन समझौतों पर दस्तखत किए। इस दौरान नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमने फैसला किया है कि डिफेंस प्रोडक्शन में आपसी सहयोग बढ़ाने के साथ टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान की संभावनाआें की तलाश करेंगे। भारत के आसियान देशों से संबंध और एक्ट ईस्ट पॉलिसी के फ्रेमवर्क में वियतनाम महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बता दें कि क्‍वांग तीन दिन के भारत दौरे पर आए हैं। शनिवार को दिल्ली पहुंचने पर राष्ट्रपति भवन में उनको गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

किन क्षेत्रों में हुए समझौते?
– एटॉमिक एनर्जी के क्षेत्र में सहयोग
– इकोनाॅमिक एंड ट्रेड क्षेत्र में सहयोग
– टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान और एग्रीकल्चर से जुड़े फील्ड में टेक्नीकल एक्सपर्ट्स की विजिट में सहयोग

मोदी ने और क्या कहा?
– नरेन्द्र मोदी ने कहा, “हम मिलकर ऐसे खुले, आजाद और समृद्ध इंडो-पैसिफिक एरिया के लिए काम करेंगे, जहां संप्रभुता और अंतर्राष्ट्रीय कानून का पूरा सम्मान किया जाएगा।”
– मोदी ने कहा, “भारत और वियतनाम रिन्यूएवल एनर्जी (हाइड्रो एनर्जी, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल-विद्युत ऊर्जा, बायोमास, जैव ईंधन) एग्रीकल्चर, टेक्सटाइल, तेल और गैस समेत अन्य क्षेत्रों में अपने रिश्ते और मजबूत करेंगे।”
– मोदी ने कहा, “हम न केवल गैस और तेल के सेक्टर में द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाएंगे, बल्कि अन्य देशों के साथ मिलकर त्रिपक्षीय संबंधों को भी आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

बिजनेस 15 अरब डॉलर तक बढ़ाने पर बनी सहमति
-विदेश मंत्रालय के स्पोक्सपर्सन रवीश कुमार ने ट्वीट किया है कि भारत और वियतनाम का 2016-17 में बिजनेस 6.24 अरब डॉलर रहा। दोनों देशों के बीच बिजनेस को 2020 तक 15 अरब डॉलर तक बढ़ाने पर सहमति बनी है।

शुक्रवार को भारत पहुंचे थे क्वांग
– प्रेसिडेंट त्रान दाई क्‍वांग शुक्रवार को भारत पहुंचे। इसके बाद वे बौद्धों के पवित्र तीर्थस्थल बिहार के बोधगया गए।
– शनिवार सुबह क्वांग का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। इस दौरान प्रेसिडेंट रामनाथ कोविंद और नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे। क्वांग ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी दी।

– वहीं, समझौतों से पहले क्‍वांग ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी मुलाकात की।

– प्रेसिडेंट क्‍वांग के साथ अाए प्रतिनिधिमंडल में वियतनाम के वाइस प्रेसिडेंट और विदेश मंत्री फाम बिन मिन्ह के अलावा कई मंत्री शामिल हैं। इनके साथ एक कारोबारी शिष्टमंडल भी है।

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आप सांसद पर 5000 करोड़ की मानहानि का मुकदमा

फ्रांस से खरीदे गए लड़ाकू विमान राफेल के सौदे को लेकर देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अंबानी ने आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह पर 5000 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। अंबानी का आरोप है कि संजय सिंह ने झूठे आरोप लगाकर उनकी कंपनी को राफेल सौदे में खींचा था। उद्योगपति ने यह भी दलील दी है कि आप सांसद संजय सिंह के आरोपों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। उद्योगपति अंबानी दिल्ली के दो तिहाई हिस्से में बिजली की आपूर्ति करने वाली निजी बिजली कंपनी बीएसईएस के मालिक भी हैं।

आम आदमी पार्टी के नेता व सांसद संजय सिंह ने बीते 13 फरवरी को कहा था कि भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल विमानों को लेकर 56000 करोड़ रुपए का सौदा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें रिलायंस डिफेंस लिमिटेड फ्रांस की एविएशन कंपनी डसॉल्ट एविएशन को 22000 करोड़ का ठेका मिला। उन्होंने सौदे की गोपनीयता पर भी सवाल उठाए थे। इस सौदे पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए संजय सिंह ने ट्वीट कर लिखा- राफेल डील ही साबित होगी मोदी सरकार के ताबूत में आखिरी कील, 500 करोड़ का जहाज 1500 करोड़ में, अनुभवहीन रिलायंस कंपनी को जहाज के पार्ट बनाने का 22000 करोड़ का ठेका मिला।

सांसद के इसी आरोप को अपनी मानहानि करार देते हुए अंबानी ने संजय सिंह को मानहानि का नोटिस भेजा है। मानहानि का दावा किए जाने पर संजय सिंह ने अंबानी पर पलटवार किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उद्योगपतियों की दबंगई चरम पर है, पहले घोटाला करेंगे, फिर उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों पर मानहानि करेंगे। राफेल रक्षा सौदे का घोटाला उजागर करने पर अंबानी ने मेरे ऊपर देश का सबसे बड़ा 5000 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। मैं अपनी बात पर कायम हूं। बंदर घुड़की नहीं चलेगी। पार्टी के एक अन्य नेता आशतोष ने ट्वीट करके कहा कि अब तो डर लग रहा है कहीं नीरव मोदी भी 11400 करोड़ का मानहानि का मुकदमा न कर दे।

बता दें कि राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस ने भी केंद्र की राजग सरकार को लगातार कठघरे में खड़ा कर रखा है। खुद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी बार-बार, संसद के भीतर और बाहर आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में जवाब मांग रहे हैं। आम आदमी पार्टी नेताओं ने भी इस मुद्दे को बार-बार उठाया है। अब पार्टी सांसद पर मानहानि का मुकदमा होने के बाद इस मुद्दे पर नए सिरे से सियासत गरमा गई है।

उद्योगपतियों की दबंगई चरम पर है। पहले घोटाला करेंगे, फिर उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों पर मानहानि करेंगे। राफेल रक्षा सौदे का घोटाला उजागर करने पर अंबानी ने मेरे ऊपर देश का सबसे बड़ा 5000 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। मैं अपनी बात पर कायम हूं।

– संजय सिंह का ट्वीट

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2 दिन में 65% फीसद उछल गया आरकॉम का शेयर, कर्ज घटाने की खबर का असर

मंगलवार को अनिल अंबानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रिलायंस कम्युनिकेशन पर बढ़ते कर्ज को घटाने के लिए शेयरधारकों  के सामने अपनी स्ट्रैटजी रखी। अनिल अंबानी ने कहा कि उनकी कंपनी जियो के साथ 4G स्पेक्ट्रम शेयरिंग करार करेगी। वहीं कंपनी के ऊपर लदे भारी भरकम कर्ज के संबंध में उन्होंने कहा, “हमारे पास कंपनी का कर्ज करने की पूरी रणनीति तैयार है और हमने इसे 45,000 करोड़ से घटाकर 6,000 करोड़ करने का लक्ष्य रखा है।” इस खबर के बाद रिलायंस कम्युनिकेशन के शेयर में जबरदस्त  उछाल देखने को मिला। दो  दिन  में  कंपनी का शेयर करीब 65 फीसद उछल गया।

बीएसई पर 1.30 बजे आरकॉम का प्रदर्शन
दिन के करीब 1.30 बजे बीएसई पर रिलायंस कम्युनिकेशन्स के शेयर्स 32.63 फीसद के उचाल के साथ 28.29 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। इसका दिन का उच्चतम 28.58 का स्तर और निम्नतम 23.46 का स्तर रहा है। वहीं इसका 52 हफ्तों का उच्चतम 41 रुपये का स्तर और निम्नतम 9.60 रुपये रहा है।

छह सत्रों में 125 फीसद उछला आरकॉम-
कंपनी की ओर से 39000 करोड़ रुपये के डेट रेजोल्यूशन प्लान की घोषणा के बाद बीते छह सत्रों में कंपनी के शेयर्स में 125 फीसद तक का उछाल देखने को मिला है। बुधवार सुबह 11 बजे आरकॉम 20.39 फीसद की बढ़त के साथ 25.68 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान शेयर 22 फीसद के उछाल के साथ 25.92 रुपये जो कि पांच महीने का उच्चतम स्तर है, पर पहुंच गया था। यह लेवल आखिरी 28 जुलाई को देखा गया था। वहीं, 18 दिसंबर से अबतक शेयर्स में 125.36 फीसद की तेजी दर्ज की गई है।

मंगलवार को 34 फीसद तक उछला आरकॉम
मंगलवार को बीएसई पर रिलायंस कम्युनिकेशन्स 34 फीसद के उछाल के साथ 21 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसका दिन का उच्चतम 22.49 और निम्नतम 16.50 का स्तर रहा था।

जियो के साथ करार करेगी छोटे अंबानी की कंपनी: अनिल अंबानी ने यहां पर जानकारी दी है कि वो जियो के साथ 4G स्पेक्ट्रम शेयरिंग करार करेंगे। उन्होंने कहा कि अंडर सी केबल कारोबार के लिए उनकी कंपनी जियो के साथ समझौता करेगी। उन्होंने कहा कि एसएसटीएल (SSTL) के जरिए कंपनी को 4जी और 5जी का लाइसेंस मिला है।

भारी भरकम कर्ज पर बोले अनिल अंबानी: अनिल अंबानी ने कहा कि साल 2018 तक कंपनी का कर्ज घटकर 25,000 करोड़ रुपए तक आ जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने कर्ज को 45,000 करोड़ से घटाकर 6,000 करोड़ करने का लक्ष्य रखा है। अंबानी ने यहां पर यह भी कहा कि बीते कुछ महीने कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण रहे हैं। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के सामने एनसीएलटी से जुड़ी कई दिक्कतें सामने आई हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बैंको का कर्ज इक्विटी में भी नहीं बदला जाएगा, उन्हें पूरा पैसा वापस किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बैंकों को एडीएजी को दिए कर्जे राइट ऑफ नहीं करने होंगे। उन्होंने बताया कि कुछ हफ्तों में लेनदारों के मामले सुलझा लिए जाएंगे।

कंपनी के कारोबार बिक्री पर बोले अंबानी: उन्होंने कहा कि कंपनी स्पेक्ट्रम, फाइबर और पॉवर कारोबार बिक्री की तैयारी कर चुकी है। कंपनी की ऐसेट सेल की रणनीति का खुलासा करते हुए अनिल अंबानी ने कहा कि आरकॉम में हिस्सा बेचने के लिए 9 ऑफर्स मिले हैं। कर्ज कम करने के लिए ऐसेट बिक्री की योजना बनाई गई है। अंबानी ने कहा कि ऐसेट बिक्री की पिछली प्रक्रिया 49 दिनों में पूरी कर ली गई थी।

घोषणा के तुरंत बाद दोपहर तीन बजे अनिल अंबानी की कंपनियों का हाल:

रिलायंस पावर: रिलायंस पावर बीएसई पर 3.85 फीसद की बढ़त के साथ 43.15 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका दिन का उच्चतम 43.20 और निम्नतम 41.55 का स्तर रहा है। वहीं, इसका 52 हफ्तों का उच्चतम 50.80 और निम्नतम 34.65 का स्तर रहा।

रिलायंस कैपिटल लिमिटेड: बीएसई पर रिलायंस कैपिटल 6.69 फीसद की बढ़त के साथ 517.35 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका दिन का उच्चतम स्तर 519 का और निम्नतम 481.45 का स्तर रहा है। वहीं इसका 52 हफ्तों का उच्चतम 877.80 का और निम्नतम 397 का स्तर रहा।

रिलायंस कम्युनिकेशन्स: बीएसई पर रिलायंस कम्युनिकेशन्स 34.76 फीसद के उछाल के साथ 21.98 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका दिन का उच्चतम 22.49 और निम्नतम 16.50 का स्तर रहा है। वहीं 52 हफ्तों का उच्चतम 41 का स्तर और निम्नतम 9.60 का स्तर रहा है।