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पीएम मोदी ने इराक में मारे गए लोगों के परिवार वालों को 10 लाख रुपए की मदद की घोषणा की

इराक के मोसुल में मारे गए भारतीयों के परिवारों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 लाख रुपये का अनुग्रह राशि यानी मदद का ऐलान किया है. इससे पहले पीएम मोदी ने उनकी मौत की खबर की पुष्टि होने के बाद दुख जताया था. बता दें कि इससे पहले मारे गए लोगों के परिजनों की तरफ से मुआवजे की मांग किए जाने के सवाल पर विदेश राज्य मंत्री ने कहा था कि, ‘ये बिस्कुट बांटने वाला काम नहीं है’.

इराक के मोसुल में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) द्वारा मारे गए भारतीय नागरिकों के अवशेष लेकर विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह सोमवार को भारत पहुंचे थे. इसके बाद वह सबसे पहले पंजाब गए. मोसुल में 39 भारतीय मारे गए थे. इनमें से 38 के अवशेष भारत आए हैं. एक की पहचान नहीं हो पाई. इनमें से 27 लोग में पंजाब के थे. अमृतसर एयरपोर्ट पर मारे गए लोगों के परिजनों की तरफ से मुआवजेकी मांग किए जाने के सवाल पर विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि, ‘ये बिस्कुट बांटने वाला काम नहीं है’. विदेश राज्य मंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है.

विदेश राज्यमंत्री वी. के. सिंह ने कहा कि इराक में आतंकवादी समूह आईएसआईएस द्वारा बंधक बनाए गए 40 भारतीयों का कोई भी रिकॉर्ड किसी दूतावास में नहीं है क्योंकि वे वहां ट्रैवल एजेंट के माध्यम से अवैध रूप से गए थे.  आतंकवादी समूहों ने 40 में से 39 भारतीयों की हत्या कर दी थी जबकि उनमें से एक खुद को बांग्लादेशी बताकर बच गया था. सिंह सोमवार को कहा कि इराक से एक विशेष विमान से 38 भारतीयों का शव लेकर अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर पहुंचे. मारे गए लोगों में से एक के शव की अभी तक स्पष्ट रूप से पहचान नहीं हो पाई है.

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हाफिज सईद का राजनीतिक दल आतंकी संगठन घोषित; यूएस की कार्रवाई का स्वागत- भारत

अमेरिका ने मंगलवार को मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) को आतंकी संगठन घोषित कर दिया। यह मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का राजनीतिक संगठन है। ये कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब पाकिस्तान में एमएमएल को एक राजनैतिक दल के रूप में मान्यता देने की कवायद चल रही थी। वहीं, भारत ने अमेरिका की कार्रवाई का स्वागत किया है।

एमएमएल के 7 मेंबर भी आतंकी घोषित
– द यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट ने एक संशोधन प्रस्ताव पेश किया। जिसके तहत लश्कर-ए-तैयबा के साथ ही एमएमएल और तहरीक-ए-आजादी-ए-कश्मीर (टीएजेके) को आतंकी संगठनों की लिस्ट में शामिल किया गया।
– इनके अलावा एमएमएल के 7 सदस्यों को लश्कर के लिए काम करने की वजह से आतंकी घोषित किया गया है।

पाकिस्तान ने नहीं की प्रभावी कार्रवाई

– भारतीय विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा, “भारत यूएस की कार्रवाई का स्वागत करता है। मिल्ली मुस्लिम लीग लश्कर-ए-तैयबा का ही दूसरा नाम है। यह लीग आतंकी संगठन के लिए काम कर रही थी। अमेरिका की कार्रवाई भारत के दावे को पुख्ता करती है कि पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।”

हाफिज जारी कर चुका अपना घोषणापत्र
– हाफिज ने 23 मार्च को एमएमएल का घोषणा पत्र जारी कर दिया था। मिल्ली मुस्लिम लीग को एक राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता देने के लिए इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने भी रास्ता साफ कर दिया था।

17 साल पहले लश्कर घोषित किया गया था आतंकी संगठन
– लश्कर-ए-तैयबा का गठन 1980 के दशक में हुआ था। वह 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है। इन हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी।
– अमेरिका ने लश्कर को 26 दिसंबर 2001 में विदेशी और वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके मुखिया हाफिज सईद को भी वैश्विक आतंकी घोषित किया गया था।

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Sonu Ke Titu Ki Sweety collection: Kartik Aryan’s cheeky comedy mints Rs 73 cr at Box Office

Produced by Krishan Kumar and Bhushan Kumar under the banner of T-Series, ‘Sonu Ke Titu Ki Sweety’ has performed extremely well in the International market as well.

The film also stars Alok Nath, Virendra Saxena and Ishita Raj Sharma in pivotal roles.

‘Sonu Ke Titu Ki Sweety’ marks the fourth collaboration between director Luv Ranjan and actors Kartik Aryan and Nushrat Bharucha after ‘Pyaar Ka Punchnama’, ‘Akaash Vani’ and ‘Pyaar Ka Punchnama 2’.

Looking at the Box Office figures, the film has turned out to be a success and has emerged as the third best opener of this year after ‘Padmaavat’ and ‘PadMan’.

The collection number of the film is surprisingly great as it does not feature any A-rated star. In addition, the film did not even see a festival or a Holiday release.

Anushka Sharma’s home production horror flick ‘Pari’, which released on March 2, has received a lukewarm response as the film has so far earned Rs 19.35 crore at the ticket counter.

‘Padmaavat’ starring Deepika Padukone, Ranveer Singh and Shahid Kapoor, has so far minted Rs 286 crore at the Box Office. On the other hand, Akshay Kumar-Radhika Apte-starrer ‘PadMan’ has pocketed 78 crore.

Ajay Devgn-Ileana D’Cruz-starrer ‘Raid’ is the next big release of the month before Rani Mukerji’s ‘Hichki’. ‘Raid’ releases on March 16 and Hichki hit the screens in the following week.

Kartik Aryan’s ‘Sonu Ke Titu Ki Sweety’ has turned out to be an impressive watch. After stunning the viewers with its collections on the first day, the film has crossed the 70 crore-mark on the thirteenth day.

The film, which is directed by Luv Ranjan made a net collection of Rs 2.58 crore on Wednesday thereby taking its total collections to Rs 73.26 crore.

Trade expert, Taran Adarsh took to Twitter to share the collections, he wrote, “#SonuKeTituKiSweety continues its HEROIC RUN… [Week 2] Fri 5.83 cr, Sat 6.55 cr, Sun 7.02 cr, Mon 2.71 cr, Tue 2.62 cr, Wed 2.59 cr. Total: ₹ 73.26 cr. India biz… SUPER-HIT… #SKTKS.”

Although ‘Sonu Ke Tweety’ has better chances of earning more in the coming week, one can not overlook the fact that Anushka’s ‘Pari’ has also made its way to the theatres. The audience would want to see Anushka in a spooky avatar and hence ‘Sonu…’ will end up having a tough competition at the box office.

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मालदीव में ‘महाभारत’ और भारत का धर्मसंकट

मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने देश के भीतर बढ़ते राजनीतिक गतिरोध के बीच 15 दिनों के आपातकाल की घोषणा की है.

देश के सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिया था कि सभी राजनीतिक क़ैदियों को रिहा किया जाए, राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट के इसा आदेश को मानने से इंकार कर दिया था.

जब से सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया, तभी से मालदीव के राष्ट्रपति एक तरह से झिड़का हुआ महसूस कर रहे थे.

वे काफी समय से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने और सत्ता की ताकत पूरी तरह से अपनी तरफ़ करने की कोशिशें कर रहे थे.

उन्होंने अपने विपक्षियों को जेल में डाल दिया था और फिर धीरे-धीरे सत्ता का केंद्रीकरण होने लगा था, ऐसे में उन्हें लग रहा था कि अब ताकत पूरी तरह उनके हाथों में है.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि उन्हें अपने फ़ैसले बदलने पड़ेंगे!

मालदीवइमेज कॉपीरइटAFP

सेना की भूमिका अहम

आपातकाल की घोषणा करने के बाद ऐसा लगता है कि वे अपना आखिरी दांव खेल रहे हैं और इसके अलावा उनके पास कोई दूसरा चारा नहीं बचा था.

पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे तख्तापलट की तरह बताया है.

अबदुल्ला यमीन के पास दरअसल इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता बचा ही नहीं था.

अगर वे सत्ता दोबारा नशीद के हाथों में सौंप देते तो ज़ाहिर सी बात है कि उनके ख़िलाफ़ कार्यवाही होती.

लेकिन अब ऐसा लगता है कि सेना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है.

इसके साथ ही विपक्षी नेता किस तरह एकजुट होते हैं और उनका समर्थन कर रहे अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर क्या कदम उठाते हैं, ये देखने वाली बात होगी.

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भारत की भूमिका

मालदीव के भीतर चल रही इस राजनीतिक उठापटक में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.

मौजूदा वक्त में नशीद और यमीन के बीच जब रस्साकशी चल रही थी तब भारत पीछे से अपनी भूमिका निभा रहा था.

कई लोगों ने इसकी आलोचना भी की थी कि जब लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई नशीद सरकार को हटाया गया था तो उस समय भारत को खुलकर उनका समर्थन करना चाहिए था और लोकतांत्रिक ताकतों के बचाव के लिए भारत और अधिक मुखर होकर सामने आना चाहिए था.

लेकिन ये समझना चाहिए कि भारत के अपने भी कई हित हैं, जैसे भारत कभी भी ये नहीं चाहेगा कि मालदीव पूरी तरह चीन की तरफ चला जाए.

लेकिन अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि भारत को अपना रुख स्पष्ट करना ही पड़ेगा हालांकि भारत के पास कई दूसरे रास्ते अभी मौजूद हैं.

चीन मालदीवइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

क्या चीन देगा यामीन का साथ?

आपातकाल लगाने के बाद अब अब्दुल्ला यामीन के पास कौन से रास्ते बाकी हैं. इस मसले मे अब ये देखना होगा कि बाहरी दबावों से वे किस तरह निपटते हैं.

यामीन ये भी सोच रहे होंगे कि उन्होंने चीन के साथ अपनी घनिष्टता बढ़ाई है तो चीन उनका पक्षधर बनेगा और जब पश्चिमी देशों और भारत की तरफ से उन पर दबाव बनाया जाएगा तब चीन उनका साथ देगा.

लेकिन शायद वो चीन की रणनीति को थोड़ा गलत समझ रहे हैं क्योंकि ऐसा कभी नहीं हुआ जब सभी वैश्विक ताकतों के ख़िलाफ़ चीन अलग से किसी का अकेले समर्थन करने आया हो, इसलिए फिलहाल तो यामीन के पास बहुत कम विकल्प नजर आते हैं.

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मालदीव में इमरजेंसी का एलान, SC जज समेत कई गिरफ्तार, भारत ने जारी की चेतावनी

मालदीव का राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट से टकराव की राह पर चलते हुए राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की सरकार ने 15 दिनों के लिए इमरजेंसी लागू कर दी है। राजनेताओं की धरपकड़ तेज हो गई है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के जज अली हमीद के अलावा पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयुम को गिरफ्तार कर लिया है।

वहीं राष्ट्रपति यामीन के सौतेले भाई और 30 साल तक देश के राष्ट्रपति रहे ममून अब्दुल गयूम को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। वह विपक्षी नेताओं का साथ दे रहे हैं। मालदीव की स्थिति को देखते हुए भारत ने अपने यात्रियों को चेतावनी जारी की है और कहा है कि जरूरी ना हो तो वहां की यात्रा पर ना जाएं। दूसरी तरफ मालदीव की सेना ने संसद पर कब्जा कर लिया है।

संसद के पूर्व स्पीकर अब्दुल्ला शाहीद ने ट्वीट कर पूर्व राष्ट्रपति की गिरफ्तारी की पुष्टि कर दी है। उन्होंने लिखा है कि पूर्व राष्ट्रपति और उनके दामाद को मालदीव की स्पेशल ऑपरेशन पुलिस ने गिरफ्तार कर दिया है।

इससे पहले सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मद नशीद समेत राजनीतिक बंदियों की रिहाई का सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानने से इन्कार कर दिया। उसने कहा कि वह इन सभी के खिलाफ फिर से मुकदमा चलाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि इमरजेंसी लागू होने पर संसद को दो दिन में इसकी जानकारी देनी होती है। लेकिन, इसे सरकार पहले ही अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर चुकी है। इस बीच, भारत सरकार ने मालदीव की राजनीतिक परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए अपने नागरिकों से कहा है कि अगर बहुत ज्यादा जरूरी न हो, तो वहां नहीं जाएं।

राष्ट्रपति यामीन के कार्यकाल में दूसरी बार इमरजेंसी लगाई गई है। इससे पहले नवंबर 2015 में उन्होंने अपनी जान का खतरा बताते हुए इमरजेंसी लगा दी थी। इस बीच, मालदीव के विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति यामीन पर दबाव बनाने के लिए भारत समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुहार लगाई है। देश में इमरजेंसी लगाने का एलान कानूनी मामलों की मंत्री अजिमा शकूर ने सोमवार को किया।

उन्होंने इस सिलसिले में सरकार का फैसला टेलीविजन पर पढ़ा। उन्होंने कहा कि सरकार राजनीतिक बंदियों की रिहाई के आदेश पालन नहीं करेगी। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी नेताओं के खिलाफ मामले को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया था और उन्हें रिहा करने का आदेश दिया था। साथ ही 12 सांसदों की सदस्यता बहाल कर दी थी। राष्ट्रपति यामीन की पार्टी छोड़ने के बाद इनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई थी।

इस बीच मालदीव के स्वास्थ्य मंत्री हुसैन रशीद ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश न मानने के सरकार के फैसले के विरोध में सोमवार को इस्तीफा दे दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से इस्तीफा देने वाले वह पहले मंत्री हैं।

उधर, मालदीव के विपक्षी नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से राजनीतिक नेताओं को रिहा करने और लोकतंत्र बहाल करने के लिए राष्ट्रपति यामीन पर दबाव डालने को कहा है। उन्होंने कहा कि हमने भारत, श्रीलंका, अमेरिका, ब्रिटेन समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पत्र लिखकर यह आग्रह किया है।

गौरतलब है कि भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, आस्ट्रेलिया और संयुक्त राष्ट्र ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया था। इस बीच मालदीव के न्यायिक प्रशासन विभाग ने इस खबर का खंडन किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश को लागू कराने के लिए भारत सरकार से सहायता मांगी है।

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तो क्या अगले साल फरवरी से पहले हो जायेगी कंगना रनौत की शादी!

फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने कहा कि वह जल्द शादी करेंगी लेकिन इसके लिए उन्हें अगले साल फरवरी तक का टाइम दिया जाय।

मुंबई में हुए फैशन वीक में एक शो के लिए शो स्टॉपर बनने के बाद मीडिया के सामने आईं कंगना रनौत ने जब शादी की बात पर जवाब देना शुरू किया तो वो ख़ूब खिलखिला कर हंस रही थीं। ऐसे में उनकी बात का मतलब क्या निकाला जाय ये वहीं बता सकती हैं। कंगना ने कहा कि अपनी शादी के लिए वो फरवरी 2019 तक की डेडलाइन चाहती हैं ताकि वह उस बीच शादी कर सकें। शादी का सवाल आते ही कंगना ने कहा “ बहुत जल्द, मुझे आशा है बहुत जल्द। यह कौन सा महीना है। जनवरी या फरवरी। फरवरी। तो मुझे अगले साल फरवरी तक की डेडलाइन दीजिये।“ कंगना रनौत उनकी बेबाकी के लिए जानी जाती है। इसके पहले भी वह ऐसे कई मुद्दों पर खुलकर उनकी राय रख चुकी है। जिसके चलते वह कई बार सुर्ख़ियों में भी आ चुकी है। वंशवाद के मामले में उनकी बयानबाजी के चलते ही उनका और करण जौहर का मनमुटाव हुआ था।

कंगना रनौत इन दिनों फिल्म ‘मणिकर्णिका- द क्वीन ऑफ़ झाँसी ‘ की शूटिंग में व्यस्त है। इस फिल्म में वह रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका निभा रही है। इस फिल्म का निर्देशन कृष कर रहे हैं और फिल्म अब संभवतः जून में रिलीज़ होगी।

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भारत की ‘सुपरस्टार’ चीन में ऐसे बनी ‘बाहुबली’

आमिर खान फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार ने चीन के बॉक्स ऑफ़िस पर 500 करोड़ का कलेक्शन करने के साथ अपना बाहुबल दिखा दिया है। आमिर खान ने 14वें दिन ये मुकाम हासिल किया है।

इस फिल्म को अब चीन का बाहुबली भी कहा जा सकता है क्योंकि एस एस राजमौली की बाहुबली 2 को इंडियन बॉक्स ऑफ़िस पर 510 करोड़ 99 लाख रूपये का लाइफ़ टाइम कलेक्शन मिल चुका है और ये फिल्म भारत की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन चुकी है। आमिर खान प्रोडक्शन में बनी ज़ायरा वसीम स्टारर फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार ने चीन के बॉक्स ऑफ़िस पर रिलीज़ के 14वें दिन 2.82 मिलियन डॉलर यानि करीब साढ़े 18 करोड़ रूपये का कलेक्शन किया और इसी के साथ चीन में इस भारतीय फिल्म ने 500 करोड़ रूपये के जादूई आंकड़े को छू लिया है। सीक्रेट सुपरस्टार का चीन के बॉक्स ऑफ़िस पर अब कुल कलेक्शन 79.42 मिलियन डॉलर यानि 509 करोड़ रूपये हो गया है।

हाल के दिनों में चीन के बॉक्स ऑफ़िस पर रिलीज़ दुनिया की कई बेहतरीन फिल्मों को पटखनी दे कर आमिर खान की सीक्रेट सुपरस्टार पहले ही नंबर वन का स्थान हासिल कर चुकी है। लेकिन एक मामले में सीक्रेट सुपरस्टार पीछे रह गई है और वो भी आमिर खान से ही, जिनकी दंगल ने चीन के बॉक्स ऑफ़िस पर 14दिनों में 91.61 मिलियन डॉलर यानि 587 करोड़ 17 लाख रूपये जमा कर लिए थे। दंगल, चीन में 13वें दिन ही 500 करोड़ रूपये के आंकड़े को छू गई थी। सीक्रेट सुपरस्टार एक ऐसी लड़की की इमोशनल कहानी है जो अपने भीतर के गायकी के हुनर को दुनिया के सामने लाना चाहती है लेकिन उसके पिता, समाज के डर से उसे ऐसा करने से रोकते हैं। बाद में वो इंटरनेट पर वीडियो डाल कर फेमस हो जाती है। और इसी कारण फिल्म चीन वालों के दिल को छू गई।

फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार ने चीन के बॉक्स ऑफ़िस पहले चार दिन में ही 200 करोड़ रूपये का आंकड़ा पार कर लिया था।

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जन्म शताब्दी विशेष: हर कोई नहीं बन सकता नाना जी देशमुख

“मैं अपने लिए नहीं अपनों के लिए हूं”, इस ध्येय वाक्य पर चलते हुए महाराष्ट्र के एक समाजसेवी ने भारत के उन कई गाँवों की तस्वीर बदल दी, जहां यदि वे महान विभूति न होते तो शायद आज भी विकास की लहर कोसों दूर होती। त्याग तपस्या परिश्रम करुणा भेदभाव से रहित दबे पिछड़े लोगों के विकास को प्रतिबद्ध इस महान सामाजिक निर्माता की दूर दृष्टि सोच ने विकास को एक नया आयाम दिया है। ऐसे थे प्रख्यात समाजसेवी नानाजी देशमुख। नानाजी ने वैसे तो पूरे भारत के कई राज्यों में गांवो की तकदीर व् तस्वीर बदल दी, लेकिन उन्होंने अपनी कर्मभूमि का केंद्र बनाया भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट को। नानाजी का मानना था कि जब अपने वनवासकाल के प्रवास के दौरान भगवान राम चित्रकूट में आदिवासियों तथा दलितों के उत्थान का कार्य कर सकते हैं, तो वे क्यों नहीं। अतः नानाजी चित्रकूट में ही जब पहली बार 1989 में आए तो यहीं बस गए और बदल डाली गांवों की तस्वीर।
प्रख्यात समाजसेवी नानाजी देशमुख का जन्म महाराष्ट्र के परभणी जिले में 11 अक्टूबर सन् 1916 को एक ब्राम्हण परिवार में हुआ था। बाल्यकाल से किशोरावस्था के रथ पर सवार होने तक उनके मन में भारत के गाँवों की दुर्दशा की चिंता अपना आशियाना बना चुकी थी, जिसको लेकर नानाजी प्रायः फिक्रमन्द रहने लगे। चूंकि नानाजी का बचपन काफी अभावों में बीता था, इसलिए उनके अंदर दबे पिछड़े गरीब लोगों के प्रति दया का सागर हिलोरें मारता। शिक्षा प्राप्त करने के लिए नानाजी ने सब्जी बेंचकर पैसे जुटाए।
आरएसएस से सम्पर्क
आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से नानाजी के पारिवारिक सम्बन्ध थे। नानाजी की उभरती सामाजिक प्रतिभा को पहचानते हुए हेडगेवार ने उन्हें संघ की शाखा में आने के लिए कहा। सने 1940 में हेडगेवार के निधन के बाद आरएसएस को खड़ा करने की ज़िम्मेदारी नानाजी पर आ गई और इस संघर्ष को अपने जीवन का मूल उद्देश्य बनाते हुए नानाजी ने अपना पूरा जीवन आरएसएस के नाम कर दिया। उन्होंने महाराष्ट्र सहित देश के विभिन राज्यों में घूम घूम कर युवाओं को आरएसएस से जुड़ने के लिए प्रेरित किया तथा इस कार्य में वे काफी हद तक सफल भी हुए।
आरएसएस प्रचारक के रूप में पहली बार आगरा प्रवास पर आए नानाजी देशमुख की मुलाकात पण्डित दीनदयाल उपाध्याय से हुई. आगरा के बाद नानाजी गोरखपुर गए और वहां दिनरात मेहनत करते हुए आरएसएस की शाखाएं खड़ी कीं. यहां तक कि नानाजी को गोरखपुर में ठहरने हेतु( संघ के पास उस समय संगठन संचालन के लिए पर्याप्त धन नहीं था) आश्रम संचालक बाबा राघवदास के लिए भोजन तक बनाना पड़ा. आज देश भर में शिक्षा के केंद्रबिंदु में समाहित सरस्वती शिशु मन्दिर नामक शिक्षण संस्था की स्थापना नानाजी ने सर्वप्रथम गोरखपुर में ही की थी। 1947 में आरएसएस ने पाञ्चजन्य नामक दो साप्ताहिक व् स्वदेश हिंदी समाचार पत्र निकालने की शुरुआत की। अटल बिहारी बाजपेयी को सम्पादन दीनदयाल उपाध्याय को मार्गदर्शन और नानाजी को प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई। 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया, फिर भी भूमिगत होकर इन पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन कार्य जारी रहा।
राजनीतिक जीवन
आरएसएस से प्रतिबंध हटने के बाद भारतीय जनसंघ की स्थापना का निर्णय हुआ, जिसके विस्तार के लिए नानाजी को उत्तर प्रदेश भेजा गया। अपनी सांगठनिक कौशल की मिसाल कायम करते हुए नानाजी ने सन् 1957 तक उत्तर प्रदेश के हर जिले में जनसंघ की इकाइयां स्थापित कर दीं गई। जनसंघ उत्तर प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक शक्ति का केंद्रबिंदु बन गया। नानाजी ने राम मनोहर लोहिया की मुलाकात दीनदयाल उपाध्याय से करवाई जिसके बाद जनसंघ और समाजवादी विचारधारा ने कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी कर दी। उत्तर प्रदेश की पहली गैर कॉंग्रेसी सरकार के गठन में विभिन्न राजनीतिक दलों को एकजुट करने में नानाजी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। जेपी आंदोलन के समय जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण के ऊपर पुलिस का लाठीचार्ज हुआ तब नानाजी ने साहस का परिचय देते हुए जयप्रकाश नारायण (जेपी) को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जनता पार्टी के संस्थापकों में नानाजी प्रमुख थे। कांग्रेस को सत्ता से मुक्त कर अस्तित्व में आई जनता पार्टी। आपातकाल हटने के बाद जब चुनाव हुआ तो नानाजी देशमुख यूपी के बलरामपुर से लोकसभा सांसद चुने गए और उन्हें मोरारजी मन्त्रीमण्डल में शामिल होने का न्योता दिया गया, लेकिन नानाजी देशमुख ने यह कह कर प्रस्ताव ठुकरा दिया कि 60 वर्ष की उम्र के बाद सांसद राजनीति से दूर रहकर सामाजिक व् सांगठनिक कार्य करें।
सामाजिक जीवन
1960 में लगभग 60 वर्ष की उम्र में नानाजी ने राजनीतिक जीवन से सन्यास लेते हुए सामाजिक जीवन में पदार्पण किया। वे आश्रमों में रहकर सामाजिक कार्य (खासतौर पर गाँवों में) करते रहे परन्तु कभी अपना प्रचार नहीं किया। नानाजी ने दीनदयाल उपाध्याय के निधन के बाद शोकग्रस्त न होते हुए दीनदयाल के दर्शन एकात्म मानववाद को साकार किया तथा दिल्ली में खुद के दम पर दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना की। नानाजी ने उत्तर प्रदेश के उस समय के सबसे पिछड़े जिले गोंडा और महाराष्ट्र के बीड में कई सामाजिक कार्य किए। नानाजी द्वारा चलाई गई परियोजना का उद्देश्य था हर हांथ को काम और हर खेत को पानी।
 
चित्रकूट से लगाव
1989 में भारत भ्रमण के दौरान नानाजी पहली बार भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट आए और अंतिम रूप से यहीं बस गए।अशिक्षा पानी व् दस्यु समस्या से जूझते चित्रकूट की दुर्दशा देख नानाजी द्रवित हो उठे और उन्होंने चित्रकूट के गाँवों की दशा व् दिशा बदलने का निश्चय किया। चित्रकूट के सुरम्य प्राकृतिक वातावरण को नानाजी ने अपने सामाजिक कार्य का केंद्र बनाकर समाज के गरीब व्यक्तियों की सेवा शुरू की। नानाजी को जानने वाले लोग बताते हैं कि नानाजी कहा करते थे कि उन्हें राजा राम से अधिक प्रिय वनवासी राम लगते हैं क्योंकि वनवासी राम से समाजसेवा की प्रेरणा मिलती है। ग्रामीण परिवेश के छात्रों के उचित शिक्षा व्यवस्था के लिए नानाजी देशमुख ने चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना की।
इसके आलावा चित्रकूट के जंगलों में पाई जाने वाली जड़ीबूटियों की उपयोगिता जन जन तक पहुंचाने के लिए नानाजी द्वारा आरोग्यधाम की स्थापना की गई जहां विभिन आयुर्वेदिक चिकित्सा व् औषधियों का निर्माण होता है। कोल आदिवासी बाहुल्य चित्रकूट के बीहड़ में बसे गाँवों में नानाजी ने शिक्षा के कई प्रकल्प चलाए और कई गाँवों में शिक्षा की अलख जगाई यही नहीं जनजातीय बच्चों को भी नानाजी के प्रकल्पों के माध्यम से शिक्षित व् आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। लघु व् कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नानाजी ने ग्रामीण परिवेश के कई छोटे मोटे कार्यों को पहचान दिलाई जिससे लोग आत्मनिर्भर तथा स्वावलम्बी बन सकें। सन् 2010 में 27 फरवरी को इस महान आत्मा का इस मृत्युलोक से प्रस्थान हुआ।
प्रशंसा और सम्मान भी छोटे
1999 में नानाजी को पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी नानाजी की समाजसेवा के कायल थे। 95 वर्ष की उम्र में 27 फरवरी सन् 2010 को नानाजी ने चित्रकूट में अंतिम सांस ली। नानाजी ने अपने मृत शरीर को मेडिकल शोध हेतु दान करने का वसीयतनामा निधन से काफी पहले 1997 में ही लिखकर दे दिया था।निधन के बाद नानाजी का शव अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को सौंप दिया गया।
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गोधरा कांड : 11 दोषियों की सज़ा उम्रकैद में बदली, मास्टरमाइंड इस बार भी बरी

खास बातें

  1. 63 आरोपियों को बरी करने के फैसले को नहीं पलटा है
  2. 20 दोषियों को उम्रकैद बरकरार रखी
  3. 63 आरोपियों को बरी करने के फैसले को नहीं पलटा

गुजरात हाईकोर्ट ने गोधरा स्टेशन पर वर्ष 2002 में साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में आग लगाकर 59 लोगों की जान लेने के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी करार दिए जा चुके 11 लोगों की फांसी की सज़ा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है, जबकि 20 दोषियों को उम्रकैद तथा 63 आरोपियों को बरी करने के फैसले को नहीं पलटा है. विशेष अदालत ने इस मामले में कुल 94 में से 63 आरोपियों को बरी कर दिया था, और कुल 31 आरोपियों को दोषी करार देकर उनमें से 11 को फांसी तथा 20 को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी.

गोधरा स्टेशन पर हुई इस वारदात के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 1,000 से भी ज़्यादा लोग मारे गए थे. इस मामले में सभी 94 आरोपी मुस्लिम थे, और उन पर हत्या तथा षड्यंत्र रचने के आरोप थे. वर्ष 2011 में विशेष अदालत ने आगज़नी की वारदात का मास्टरमाइंड माने जाने वाले मौलवी उमरजी समेत 63 लोगों को बरी कर दिया था, और हाईकोर्ट ने भी उस फैसले में कोई बदलाव नहीं किया है.

31 लोगों को हत्या, हत्या की कोशिश तथा आपराधिक षड्यंत्र रचने का दोषी करार दिया गया था, और उनमें से 11 को फांसी तथा 20 को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी, और सोमवार को हाईकोर्ट ने फांसी की सज़ा पाए 11 दोषियों की सज़ा को भी उम्रकैद में तब्दील कर दिया.

अहमदाबाद से लगभग 130 किलोमीटर दूर गोधरा स्टेशन पर फरवरी, 2002 में साबरमती एक्सप्रेस के जिस कोच (डिब्बे) में आग लगाई गई थी, उसमें 59 लोगों की जलकर मौत हो गई थी, जिनमें से ज़्यादातर अयोध्या से लौट रहे कारसेवक थे. मामले के आरोपियों का आखिर तक यही दावा रहा कि उन्होंने 27 फरवरी, 2002 को ट्रेन के कोच में आग नहीं लगाई थी.
यह ट्रेन अयोध्या में मौजूद बाबरी मस्जिद के उस विवादित ढांचास्थल से लौट रही थी, जिसे लाखों दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं तथा वॉलंटियरों ने दिसंबर, 1992 में ढहा दिया था. वर्ष 2011 में विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि ट्रेन को बाकायदा साज़िश रचकर आग लगाई गई थी.

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रघुराम राजन को नहीं मिला अर्थशास्‍त्र का नोबेल: अमेरिकी अर्थशास्‍त्री रिचर्ड थैलर को चुना गया है

अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के लिए अमेरिकी अर्थशास्‍त्री रिचर्ड थैलर को चुना गया है. 2017 के लिए चुने गए इस पुरस्‍कार की रेस में आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी शामिल थे. लेकिन उन्‍हें पुरस्‍कार नहीं मिला.थैलर शिकागो में व्यवहारिक विज्ञान के प्रोफेसर हैं.

अर्थशास्‍त्र-मनोविज्ञान के बीच की दूरी कम की
अवॉर्ड की घोषणा करते हुए रॉयल स्‍वीडिश अकेडमी ऑफ साइंसेज ने कहा है कि थैलर के योगदान ने एक व्यक्ति के फैसले लेने के मामले में आर्थिक और मनोवैज्ञानिक दूरी के बीच पुल का काम किया है. उनके काम ने इकोनॉमिक्‍स और साइकोलॉजी के बीच के गैप को कम किया है. इनाम के तौर पर 90 लाख स्वीडिश क्रोनर (करीब 7.25 करोड़ रुपए) दिए जाएंगे.

नोबेल ज्यूरी के मुताबिक, थैलर ने लिमिटेड रेशनलिटी, सोशल प्रेफरेंसेज और खुद पर कंट्रोल में कमी के बीच संबंध स्‍थापित करने का काम किया है. उन्‍होंने स्‍थापित किया है कि ये तीनों चीजें व्यक्तिगत आर्थिक फैसलों के साथ ही बाजार के फैसलों को भी प्रभावित करती हैं.


कौन हैं थैलर 
थैलर यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में बिहेवियरल साइंस और इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हैं. वे 2008 में आई पुस्‍तक Nudge के सह-लेखक हैं. थैलर ने यह पुस्‍तक कैस आर.संस्टीन के साथ लिखी थी. इसमें बताया गया था कि बिहेवियरल इकोनॉमिक्स के जरिए सोसाइटी की कई समस्‍याओं को हल किया जा सकता है.

राजन भी थे रेस में
आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन इकोनॉमिक्‍स के नोबेल पुरस्‍कार की रेस में थे. लिस्‍ट तैयार करने वाली रिसर्च कंपनी क्‍लैरिवेट एनालिटिक्‍स के अनुसार, कॉरपोरेट फाइनेंस से जु़ड़े निर्णयों के दायरे को बढ़ाने में अनोखे योगदान के लिए राजन के नाम पर विचार किया जा रहा था. राजन इस समय यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्‍कूल ऑफ बिजनेस में कैथरीन डूसक मिलर डिस्टिंग्‍यूज्‍ड सर्विस प्रोफेसर हैं. इससे पहले 1998 में भारत के अमर्त्य सेन को वेलफेयर इकोनॉमिक्स के लिए अर्थशास्‍त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया था.

1968 में शुरू हुआ अर्थशास्‍त्र में नोबेल
अर्थशास्‍त्र में नोबेल पुरस्‍कार 1968 में शुरू हुआ. यह 1895 में अल्‍फ्रेड नोबेल द्वारा शुरू किए गए मूल पुरस्‍कारों में शामिल नहीं था.

अमेरिका का दबदबा है इकोनॉमिक्‍स के नोबेल में
इकोनॉमिक्‍स के नोबेल में अमेरिका का दबदबा रहा है. अभी तक जितने लोगों को अर्थशास्‍त्र का नोबेल पुरस्‍कार मिला है, उनमें लगभग आधे अमेरिकी ही हैं. 2000 और 2013 के बीच तो हर साल या तो अमेरिकी जीते, या फिर उन्‍होंने किसी और के साथ इसे शेयर किया.